शुक्रवार, 29 मार्च 2024

संत पापा फ्राँसिस ने 13 मार्च 2013 में परमाध्यक्ष बनने के बाद से जेल

 संत पापा फ्राँसिस ने विभिन्न देशों की बारह महिला कैदियों के पैर धोए

वाटिकन.जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो का जन्म 17 दिसंबर 1936 को हुआ है.वे 13 मार्च 2013 को संत पापा चुने गये थे.असीसी के संत फ्रांसिस के सम्मान में अपने पोप के नाम के रूप में फ्रांसिस को चुना.रोमन कैथोलिक चर्च के 266वें और वर्तमान पोप हैं, उनके पास रोम के बिशप और वेटिकन सिटी के संप्रभु के रूप में पदेन उपाधि है, साथ ही वर्तमान वास्तविक राजकुमार और ग्रैंड मास्टर भी हैं.

        संत पापा फ्राँसिस ने 13 मार्च 2013 में परमाध्यक्ष बनने के बाद से जेल, देखभाल सुविधा या शरणार्थी केंद्र में पवित्र गुरुवार का मिस्सा समारोह को अनुष्ठान किया है, जबकि उनके हाल के पूर्ववर्तियों ने रोम में संत पेत्रुस महागिरजाघर या संत जॉन लातेरन महागिरजाघर में पुरोहितों के पैर धोए थे.संत पापा फ्राँसिस की पहली यात्रा रेबिबिया जेल में 2015 में हुई थी.वह पहली बार 2015 में पुरुष और महिला कैदियों से मुलाकात की थी और 12 कैदियों और एक बच्चे का पैर धोए थे.जेल में प्रभु भोज का समारोह मनाने की अपनी परंपरा को जारी रखते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने पवित्र गुरुवार 28 मार्च की दोपहर को रोम में रेबिबिया सुधार विभाग के महिला अनुभाग का दौरा किया. उन्होंने पवित्र मिस्सा समारोह की अध्यक्षता की और जेल के बाहरी क्षेत्र में एकत्र हुए बारह कैदियों, गार्डों और अधिकारियों के पैर धोने की रस्म पूरी की.

         


बता दें कि संत पापा फ्राँसिस पहले जेसुइट पोप चुने गए है. समकालीन जीवित जेसुइट कार्डिनल्स की पूरी सूची में से तीन की उम्र 80 वर्ष से अधिक है और इस प्रकार वे पोप के निर्वाचक के रूप में अयोग्य हैं. अन्य चार अभी भी 80 वर्ष से अधिक उम्र के नहीं हैं और इस प्रकार वर्तमान में पोप निर्वाचक के रूप में सेवा करने के पात्र हैं.         

        बता दें कि बिहार में अपने जेसुइट पोप संत पापा फ्राँसिस के पदचिन्हों पर चलकर जेसुइट प्रीस्ट फादर जोन क्रिस्तोस्तम ने पहली बार कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल में महिलाओं का पैर धोए थे.उसके बाद कुर्जी पल्ली में महिला और पुरुष को मिलाकर 12 लोगों के पैर धोने का सिलसिला जारी है.सवाल यह है कि क्यों केवल जेसुइट द्वारा संचालित पल्ली में ही महिला और पुरुष को मिलाकर पैर धोए जा रहे है?  एक ने कहा कि यह सच है कि प्रभु येसु ख्रीस्त के 12 प्रेरितों में स्त्रियों के नाम नहीं है पर उनके शिष्यों में स्त्रियां भी थी जैसे मैरी मैग्डलीन, मार्था आदि.दूसरी ने कहा कि जमाना बदल रहा है सर जी.... पहली औरत केवल घर में रहती थी..........आगे आप समझिए.       
 

यह बात तब निकली जब बेतिया धर्मप्रांत के चखनी पल्ली में रहने वाले श्रीमान एडवर्ड ठाकुर का कहना है कि पवित्र बृहस्पतिवार के दिन 12 शिष्यों के पैर धोने का परंपरा है.उक्त परंपरा में केवल 12 शिष्यों के ही पैर धोने का प्रावधान है,जो अंतिम व्यालू के दिन प्रभु येसु ख्रीस्त के साथ भोजन किये थे.उनमें केवल पुरूष ही थे.उन 12 प्रेरितों के नाम हैं.बाइबल हमें सिखाती है कि यीशु के मूल प्रेरित पतरस थे. जेम्स ,जॉन , एंड्रयू , फिलिप, यहूदा इस्करियोती, मैथ्यू ,थॉमस , अल्फियस का पुत्र जेम्स, बार्थोलोम्यू जुडास, थडियसय और साइमन जेलोट्स.इन शिष्यों में दूर-दूर में औरत और न ही नामोल्लेख ही है.सवाल यह है  क्या किसी औरत के पैर धोने चाहिए? जगजाहिर है कि उन 12 प्रेरितों के सहयोग परमप्रसाद की स्थापना की गई.जो आज मिस्सा के दरम्यान पुरोहित वितरण करते है.

 

आलोक कुमार


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