शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025

"देश के गरीब और वंचित वर्गों को आत्मसम्मान और अधिकार की भावना दी"


 *स्व. इंदिरा गांधी और सरदार पटेल को कांग्रेस ने किया याद

 पटना .आज बिहार प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम में भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी जी की 41वीं पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा पर एवं भारत के लौह पुरुष, पूर्व गृह व रक्षा मंत्री स्व. सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया.

     इस अवसर पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  ने इंदिरा गांधी जी के राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने अदम्य साहस, निर्णायक नेतृत्व और भारत की एकता-अखंडता की रक्षा के लिए जो योगदान दिया, वह सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा. उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी जी ने गरीबी हटाओ का नारा देकर देश के गरीब और वंचित वर्गों को आत्मसम्मान और अधिकार की भावना दी.

     अशोक गहलोत  ने साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल जी की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि लौह पुरुष पटेल ने अपने अद्भुत संगठन कौशल और दृढ़ संकल्प के बल पर 562 रियासतों का एकीकरण कर भारत की एकता की नींव रखी। उनके योगदान को सदैव स्वर्ण अक्षरों में याद किया जाएगा.

        कार्यक्रम में मुख्य रूप से राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, अ.भा.कां.कमेटी के महासचिव अविनाश पाण्डेय, अ.भा.कां.क. मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा, बिहार चुनाव के पर्यवेक्षक अधीर रंजन चौधरी , सांसद डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी, कोषाध्यक्ष जितेन्द्र गुप्ता, मोती लाल शर्मा,सुबोध कुमार, राजेश राठौड़, जमाल अहमद भल्लू, ब्रजेश प्रसाद मुनन, अजय चौधरी , शरवत जहां फातिमा, कमलदेव नारायण शुक्ला,रौशन कुमार सिंह, मंजीत आनन्द साहू, राज किशोर सिंह,वैद्यनाथ शर्मा, शशि कांत तिवारी,विमलेश तिवारी, शकीलुर रहमान, सत्येन्द्र कुमार सिंह, अरविन्द लाल रजक, आदित्य पासवान,सुनील कुमार सिंह, गुरूदयाल सिंह, शशि भूषण कुमार, प्रदुम्न कुमार, साधना रजक,मधुरेन्द्र कुमार, हसीब अनवर, वसीम अहमद,राजेन्द्र चौधरी , अर्जुन पासवान, सुदय शर्मा, किशोर कुमार, विवेक यादव सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहें.


आलोक कुमार

मोकामा सीट अपनी ऐतिहासिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि

 पटना.मोकामा सीट अपनी ऐतिहासिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ बाहुबलियों के प्रभाव के लिए जानी जाती है. बाहुबली नेता अनंत सिंह यहां से कई बार विधायक रह चुके हैं. गंगा नदी के दक्षिण में बसे इस क्षेत्र में घोसवरी, मोकामा और पंडारक प्रखंड के कुछ गांव शामिल हैं. आगामी 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में मोकामा सीट पर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है, क्योंकि जातीय समीकरण और बाहुबली प्रभाव इस क्षेत्र की राजनीति को आकार देते हैं.

            बिहार में चुनाव हो रहा है.कुल 243 सीटों पर चुनाव होना है.चुनाव दो चरणों में होना है.पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर हो है.चुनाव परिणाम 14 नवंबर को आएगा.बिहार के लोगों की नजर मोकामा विधानसभा पर जा ठीक गयी है.भूमिहार बहुल मोकामा विधानसभा सीट पर इस बार दो बाहुबलियों की भिड़ंत होने वाली है. मोकामा के छोटे सरकार जदयू से चुनाव लड़ रहे हैं, तो सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी ने राजद के टिकट पर परचा भर दिया है. चुनाव भले वीणा लड़ रहीं हों, लेकिन मुकाबला अनंत सिंह बनाम सूरजभान सिंह ही बताया जा रहा है.अब दोनों बाहुबलि पसंद नहीं करते हैं कि बाहुबलि  कहा जाए.अब जनता ही बाहुबली है.

        बिहार विधानसभा चुनाव में मोकामा विधानसभा क्षेत्र की अलग अहमियत होती है. मोकामा विधानसभा क्षेत्र और ‘बाहुबली’ अनंत सिंह राजनीतिक रूप से एक-दूसरे के पर्याय माने जाते हैं. इस बार ‘छोटे सरकार’ को उनके ही गढ़ में शिकस्त देने के लिए वीणा देवी मैदान में तर गयीं हैं. वीणा देवी ‘बाहुबली’ सूरजभान सिंह की पत्नी हैं. वह कहते हैं कि जनता ने एक बार मौका दिया, तो वह मोकामा की तस्वीर बदल देंगी. ठीक वैसे ही, जैसे अपने पति सूरजभान सिंह के व्यक्तित्व को बदल दिया.

  मोकामा विधानसभा क्षेत्र दिलीप सिंह का क्षेत्र रहा है.अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह 1990 से एकतरफा चुनाव जीतते थे.उनको बाहुबलि  सूरजभान सिंह ने 2000 में पराजित कर बिहार विधानसभा में पहुंचे.उसके बाद सूरजभान सिंह 2004 में उत्तर प्रदेश से लोकसभा का चुनाव लड़े और लोकसभा में पहुंचे.बाहुबलि अनंत सिंह 2005 में बिहार विधानसभा का चुनाव लड़े और विधायक बन गए.तब से अनंत सिंह का सीट बनकर रह गया.लोकसभा चुनाव के एक साल बाद बिहार में हुए विधानसभा चुनाव 2020 में अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार ने राजद के टिकट पर मोकामा सीट पर जीत दर्ज की थी. वर्ष 2022 में एक आपराधिक मामले में सजा होने के बाद उनकी सदस्यता समाप्त हो गयी. इसके बाद उनकी पत्नी नीलम देवी ने उपचुनाव जीता और बाद में जदयू में शामिल हो गयी. इस बार अनंत सिंह जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. 2025 में खुद अनंत सिंह मैदान में हैं.उनके सामने सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी चुनौती दे रही हैं.


आलोक कुमार

बुधवार, 29 अक्टूबर 2025

इस त्याग ने बेटी को यह सोचने पर विवश किया

 त्याग और अनुशासन का मौन स्तंभ

पटना.1909 में जब सोनोरा स्मार्ट डोड ने मदर्स डे पर एक उपदेश सुना, तो उनके मन में यह प्रश्न उठा कि पिताओं के लिए भी कोई दिन क्यों न हो? माँ के प्रेम की तरह पिता का समर्पण भी तो समान रूप से आदरणीय है। इसी भाव से उन्होंने फादर्स डे की नींव रखी।उनकी प्रेरणा के केंद्र में उनके अपने पिता विलियम जैक्सन स्मार्ट थे — गृह युद्ध के एक सैनिक, जिन्होंने पत्नी के निधन के बाद छह बच्चों का पालन-पोषण अकेले किया.

    इस त्याग ने बेटी को यह सोचने पर विवश किया कि पिता के मौन संघर्ष को भी समाज की मान्यता मिलनी चाहिए।उनके अथक प्रयासों का परिणाम था — 19 जून 1910, जब स्पोकेन, वाशिंगटन में पहला फादर्स डे मनाया गया. लेकिन इसे आधिकारिक मान्यता मिलने में लंबा समय लगा. अंततः 1972 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इसे अमेरिका का राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया.आज भारत सहित अनेक देशों में यह पर्व जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है. 2025 में यह दिन 15 जून को पड़ा.वहीं, कुछ यूरोपीय देशों में इसे 19 मार्च को मनाने की परंपरा है.

     हाल में कलकत्ता महाधर्मप्रांत में भी इस दिवस का उत्साह देखा गया.सेंट पॉल चर्च, कमर चौकी में 28 अक्टूबर 2025 को फादर्स डे समारोह आयोजित हुआ. समुदाय ने अपने पिताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट की.फिर भी, कुछ लोगों ने यह प्रश्न उठाया है कि क्या इस अवसर की व्यापकता पूरे महाधर्मप्रांत तक पहुंच पा रही है? शिवचरण हांसदा ने चिंता जताई कि कुछ चुनिंदा चर्चों तक ही गतिविधियां सीमित हैं.दरअसल, फादर्स डे केवल उत्सव नहीं, बल्कि उस मौन शक्ति का सम्मान है जो परिवार को थामे रखती है. पिता अक्सर भावनाएँ नहीं जताते, पर हर जिम्मेदारी को निभाने में वे उदाहरण बन जाते हैं. समय है कि हम उस मौन त्याग को भी मुखर सम्मान दें — क्योंकि पिता का प्रेम दिखता नहीं, पर हर सफलता के पीछे उसका हाथ होता है.

आलोक कुमार

मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025

ढोरी माता तीर्थालय में उमड़ी श्रद्धा की भीड़, प्रेम और एकता का संदेश

 



ढोरी माता तीर्थालय में उमड़ी श्रद्धा की भीड़, प्रेम और एकता का संदेश

जारंगडीह.झारखंड के जारंगडीह स्थित ढोरी माता तीर्थालय में 69वां वार्षिक समारोह बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ. रांची महाधर्मप्रांत के अंतर्गत आने वाले गुमला धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष बिशप लिनुस पिंगल एक्का इस आयोजन के मुख्य अतिथि थे. उनके साथ हजारीबाग धर्मप्रांत के बिशप आनंद जोजो भी उपस्थित रहे.
    समारोह की शुरुआत अतिथि धर्माध्यक्ष के पादुका छाजन और भक्ति गीतों के साथ हुई. प्रवेश गान, नृत्य, दया याचना, महिमा गान, बाइबल जुलूस, चढ़ावा और स्तुति गान जैसे भक्ति गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ संत एंथोनी और कार्मेल स्कूल, करगली की छात्राओं एवं धर्म बहनों द्वारा दी गईं.
   मुख्य याजक के रूप में बिशप लिनुस पिंगल एक्का तथा धर्माध्यक्ष आनंद जोजो के नेतृत्व में पवित्र मिस्सा समारोह का आयोजन किया गया. देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया और ढोरी माता के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की.धर्माध्यक्षों ने अपने प्रवचन में प्रेम, सेवा और सामाजिक एकता पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि “ढोरी माता आस्था, दया और मानवता की प्रतीक हैं। ईश्वर प्रेम का यही संदेश हमें एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील और सहयोगी बनाता है.
    ”भक्ति गीतों, संगीत और प्रार्थनाओं से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा. श्रद्धालुओं ने विश्व शांति और मानवीय सद्भाव की कामना की. आयोजन की व्यवस्था ढोरी माता समिति और स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से की गई थी.
    अनुष्ठान में फादर सिरियक जोसेफ, फादर माइकल लकड़ा, फादर नोर्बर्ट लकड़ा, फादर सुरेन्द्र पॉल, फादर अल्बर्ट केरकेट्टा, फादर अनुरंजन टोप्पो, फादर मुक्ति मिंज, फादर प्रमोद कुजूर, फादर संतोष टोपनो और फादर एमानुएल टेटे सहित अनेक पुरोहित शामिल हुए.
     दो दिवसीय इस वार्षिक महोत्सव में झारखंड के विभिन्न जिलों बोकारो, रांची, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, चतरा, कोडरमा और पलामू  के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जो भी सच्चे मन से ढोरी माता के चरणों में मन्नत मांगता है, उसकी कामना अवश्य पूरी होती है.ढोरी माता तीर्थ केवल आस्था का नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और मानवता के संगम का स्थल बन चुका है.

आलोक कुमार

सोमवार, 27 अक्टूबर 2025

राजनीति में बाहुबल और जनाधार

मोकामा विधानसभा :


बाहुबलियों की परंपरा, जनता की परीक्षा

पटना.बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही एक बार फिर मोकामा सीट सुर्खियों में है. 243 सीटों वाले इस राज्य में दो चरणों में चुनाव होने हैं — पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को, जबकि परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. लेकिन बिहार की निगाहें मोकामा पर टिकी हैं, जहाँ राजनीति, जातीय समीकरण और बाहुबल का अनोखा संगम देखने को मिलता है.गंगा नदी के दक्षिण तट पर स्थित मोकामा क्षेत्र में घोसवरी, मोकामा और पंडारक प्रखंड के कुछ गांव शामिल हैं. यह सीट अपने इतिहास और बाहुबली नेताओं के प्रभाव के लिए प्रसिद्ध रही है. यहाँ की राजनीति में बाहुबल और जनाधार का अद्भुत संतुलन हमेशा चर्चा में रहा है.

        बाहुबलियों की परंपरा और मुकाबले की विरासत मोकामा का नाम आते ही अनंत सिंह उर्फ "छोटे सरकार" की याद आती है. यह सीट लंबे समय से उनके नाम से जुड़ी रही है. लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में हालात पहले जैसे नहीं हैं.इस बार मैदान में दो बाहुबलियों का आमना-सामना होने जा रहा है — एक ओर जदयू के उम्मीदवार अनंत सिंह, तो दूसरी ओर राजद से सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी.दिलचस्प यह है कि अब दोनों ही पक्ष “बाहुबली” कहलाना पसंद नहीं करते.उनका कहना है कि असली शक्ति जनता के पास है, और वह आज की असली बाहुबली है.

           लेकिन इतिहास बताता है कि मोकामा की राजनीति में बाहुबली प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.इतिहास में झाँके तो...मोकामा विधानसभा सीट कभी दिलीप सिंह का गढ़ हुआ करती थी.1990 के दशक में वे लगातार चुनाव जीतते रहे. लेकिन वर्ष 2000 में सूरजभान सिंह ने उन्हें हराकर इस गढ़ में सेंध लगाई. सूरजभान सिंह बाद में 2004 में लोकसभा पहुंचे, जबकि 2005 में अनंत सिंह ने विधानसभा में दस्तक दी और तब से यह सीट उनके नाम से जानी जाने लगी.

            2020 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह ने राजद के टिकट पर जीत हासिल की, लेकिन 2022 में एक आपराधिक मामले में सजा होने के बाद उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई.इसके बाद उनकी पत्नी नीलम देवी ने उपचुनाव में जीत दर्ज की और बाद में जदयू में शामिल हो गईं. अब 2025 में खुद अनंत सिंह जदयू से मैदान में हैं.नया मुकाबला, पुरानी रंजिश इस बार वीणा देवी मैदान में हैं, लेकिन मुकाबला अनंत सिंह बनाम सूरजभान सिंह ही माना जा रहा है. वीणा देवी कहती हैं — “जनता ने एक बार मौका दिया तो मोकामा की तस्वीर बदल देंगे, जैसे मैंने अपने पति सूरजभान सिंह का जीवन बदल दिया.”

     दूसरी ओर, अनंत सिंह का दावा है कि मोकामा की जनता “छोटे सरकार” के साथ है और विकास के मुद्दे पर उन्हें फिर से मौका देगी.जातीय समीकरण और जनता की भूमिका भूमिहार बहुल इस क्षेत्र में जातीय समीकरण हमेशा निर्णायक रहे हैं.लेकिन अब यह लड़ाई केवल जाति या बाहुबल की नहीं, बल्कि प्रभाव और छवि की हो गई है.जनता तय करेगी कि पुराने राजनीतिक प्रतीकों को आगे बढ़ाना है या नई दिशा देनी है.


आलोक कुमार

रविवार, 26 अक्टूबर 2025

“खरना” छठ महापर्व का दूसरा और अत्यंत पवित्र दिन

 पटना.“खरना” छठ महापर्व का दूसरा और अत्यंत पवित्र दिन आस्था का आलोक : जब घर-आंगन में उतरता है ‘खरना’ का उजासरविवार की सांझ है.आसमान पर हल्की केसरिया आभा फैली हुई है.दिनभर की भागदौड़, बाजार की रौनक, घाटों की तैयारियां और घरों में उत्साह की हलचल—सब कुछ एक अदृश्य आस्था की डोर से बंधा प्रतीत होता है. आज खरना है—छठ महापर्व का दूसरा दिन. वही दिन जब सूर्यास्त के साथ व्रती अपने निर्जला व्रत की शुरुआत करती हैं.

     मैं खड़ा हूँ पटना के दीघा घाट की ओर जाने वाली एक गली में. हर घर से धुएँ की


पतली लकीरें उठ रही हैं.धूप, कपूर, अरवा चावल और गुड़ की सुगंध से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो उठा है. लगता है जैसे पूरा शहर श्रद्धा में डूब गया हो—हर चेहरा, हर दीया, हर अर्घ्य पात्र सूर्यदेव की प्रतीक्षा में शांत और विनम्र है. खरना : आस्था का अनुशासन, शुद्धता का पर्वछठ महापर्व के चार दिन होते हैं—नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य.खरना इन चारों में सबसे संयमित और अनुशासित दिन है. यह दिन भक्ति की शुरुआत नहीं, बल्कि भक्ति के परिपक्व रूप का उद्घोष है. व्रती सुबह से जल भी ग्रहण नहीं करते.पूरे दिन बिना अन्न-जल के रहते हैं और संध्या बेला में शुद्ध प्रसाद—गुड़ की खीर, रोटी और केला—से पूजा करते हैं.

   लेकिन ‘खरना’ सिर्फ व्रत का नियम नहीं है; यह मन की शुद्धि का विधान है.यह वह क्षण है जब व्यक्ति अपने भीतर की अशुद्धियों को त्याग कर आत्मा के स्वच्छ जल में स्नान करता है. सूर्य अस्त होते हैं, पर भीतर एक नया सूरज उगता है—आत्मबल का, धैर्य का, समर्पण का.आंखों देखी दृश्यावली : एक संध्या का साक्षात्कारघड़ी में शाम के पाँच बजे हैं.व्रती महिलाएँ पीत वस्त्र धारण कर चुकी हैं. कुछ के माथे पर सिंदूर की लकीर मांग के पार तक खिंची हुई है.रसोई में तांबे की हांडी में दूध उबल रहा है.उस पर रखी है काठ की कलछी—जो हल्की भाप से चमक रही है.

रसोई में प्रवेश करने वाला कोई भी व्यक्ति जूता-चप्पल बाहर ही उतार देता है. यह रसोई अब पूजा स्थल है.एक ओर लकड़ी की आंच पर चावल पक रहा है—अरवा चावल, जो बिना नमक और बिना मसाले के.दूसरी ओर गुड़ की खीर बन रही है—कद्दू की मिठास और दूध की गाढ़ी लहरों से भरी.कहीं- कहीं केले के पत्तों पर प्रसाद रखा जा रहा है, तो कहीं मिट्टी के चूल्हे पर अंतिम आंच में चपाती सेंकी जा रही है—रोटी नहीं, “ठेकुआ” की तरह गोल, परंतु स्वाद में साधना से भरी.बाहर आंगन में बच्चे दीये सजा रहे हैं.एक बुजुर्ग महिला धूपबत्ती में आग लगाते हुए कहती हैं—“खरना के रात अइसन होखेला जइसे धरती पे सुरज के किरन उतर आइल हो.”

उनके शब्दों में जो चमक है, वह किसी ग्रंथ की पवित्रता से कम नहीं.सूर्यदेव की प्रतीक्षा : अस्त होते सूरज की ओर निहारती आंखेंसंध्या करीब आती है.घरों की छतों से लोग पश्चिम की ओर निहारने लगते हैं.गंगा किनारे व्रती अपने थाल सजाकर बैठी हैं.पीत वस्त्रों में, माथे पर हल्का चंदन और हाथों में दूध का अर्घ्य.अस्ताचलगामी सूर्य जैसे धरती से विदा नहीं ले रहा, बल्कि व्रती के आस्था के दीप में स्वयं समा रहा है.

   अर्घ्य देते वक्त वह दृश्य अवर्णनीय होता है—

जब व्रती के नेत्रों में गंगा का जल झिलमिलाता है और होंठों पर एक ही प्रार्थना होती है:

 “सूर्यदेव, हमारे घर-आंगन में शांति, सुख और स्वच्छता बनी रहे.”

   उस क्षण लगता है जैसे मनुष्य और प्रकृति के बीच कोई संवाद पुनः स्थापित हो गया हो.

गंगा की लहरें धीमे-धीमे उस संवाद की लय पर नाच उठती हैं.प्रसाद : स्वाद से अधिक भावनाखरना का प्रसाद—गुड़ की खीर, रोटी और केला—साधारण दिखता है, पर इसका अर्थ असाधारण है.

इसमें स्वाद नहीं, तप है; मिठास नहीं, समर्पण है.

जब प्रसाद बनता है, तब घर का हर सदस्य अपनी सांस रोक लेता है कि कोई अशुद्धि न हो जाए.

इस दौरान बोलचाल भी धीमी हो जाती है, जैसे किसी मंदिर में मौन साधना चल रही हो.

   रात के आठ बजे व्रती पूजा संपन्न कर प्रसाद ग्रहण करती हैं.पहला निवाला सूर्यदेव को अर्पित होता है, दूसरा जल को, और तीसरा—वह स्वयं ग्रहण करती हैं.

यह पहला अन्न का कौर उस व्रत का आरंभ है जो अगले दो दिनों तक निरंतर चलेगा—बिना जल, बिना अन्न.

    इसके बाद यही प्रसाद परिवार और पड़ोस में बांटा जाता है.बच्चे दौड़ते हैं, महिलाएँ ‘जय छठी मइया’ का जयघोष करती हैं, और पूरा मोहल्ला प्रसाद की मिठास में डूब जाता है.यह बाँटने का भाव ही तो छठ की आत्मा है—अपने सुख को दूसरों के साथ साझा करने का अनुष्ठान.रात का उजास : जब दीपों में बहती है श्रद्धा की नदिया रात उतर आई है.दीघा, सोनपुर, आरा, समस्तीपुर—हर जगह से एक जैसी झिलमिलाहट उठती है.घरों की छतों पर दीपों की कतारें हैं.गंगा के घाट पर जलते दीप जैसे तारों की परछाई बन गए हों.

  हवा में लोबान की खुशबू है, और आसमान में चांदनी का कोमल प्रकाश.हर किसी के मन में संतोष है कि व्रत का सबसे कठिन दिन सफलतापूर्वक पूरा हुआ.कुछ महिलाएँ अपने बच्चों के माथे पर हाथ रखती हैं और कहती हैं—“छठी मइया सबके घर सुख-शांति देइथु।”इन शब्दों में न आडंबर है, न आग्रह—बस आस्था की सादगी है. सांस्कृतिक अर्थ : खरना का सामाजिक विज्ञानखरना केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अनुशासन का प्रतीक है.

यह दिन हमें सिखाता है कि शुद्धता केवल बाहरी नहीं, भीतर की भी होती है.

जब हम प्रसाद बनाते समय अपने विचारों को संयमित रखते हैं, तब वह क्रिया ध्यान बन जाती है.यह व्रत हमें सिखाता है—संतुलन: भूख और संयम का समन्वय.समानता: हर घर में एक जैसा प्रसाद, एक जैसी थाली, एक जैसी प्रार्थना.साझेदारी: प्रसाद का वितरण सामाजिक एकता की मिसाल है.खरना का प्रसाद हर जाति, वर्ग और धर्म के लोगों में बाँटा जाता है.यह वह क्षण होता है जब समाज के कृत्रिम विभाजन मिट जाते हैं.हर किसी के हाथ में वही खीर, वही रोटी—और वही आशीर्वाद. प्रकृति के साथ संवाद : छठ का पर्यावरणीय संदेशआज जब दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, छठ का खरना हमें बताता है कि प्रकृति की पूजा ही जीवन की रक्षा है.खरना में मिट्टी के चूल्हे, केले के पत्ते, पीतल या कांसे के बर्तन, और गंगाजल का उपयोग—सब पर्यावरण-संवेदनशील हैं.यह पर्व सिखाता है कि पूजा का अर्थ भव्यता नहीं, बल्कि सामंजस्य है.जब व्रती जल में खड़ी होकर सूर्य को नमन करती है, तब वह केवल देवता को नहीं, बल्कि प्रकृति को धन्यवाद देती है—उस सूर्य को जो ऊर्जा देता है, उस जल को जो जीवन देता है, और उस धरती को जो अन्न देती है.व्यक्तिगत अनुभूति : एक दर्शक की चेतनाखरना की रात में जब मैं घाट से लौट रहा था, गली के मोड़ पर एक बूढ़ी अम्मा मिलीं।

उन्होंने पूछा—“बाबू, अर्घ्य देखलु?”

मैंने कहा—“हां अम्मा, देख लिया।”

वह मुस्कुराईं और बोलीं—

 “देखा ना बाबू, छठी मइया सबके दिल में बसली हैं—करे वाला भी खुश, देखे वाला भी धन्य.”


उनके ये शब्द मुझे भीतर तक छू गए.वाकई, छठ का आकर्षण यही है कि यह केवल व्रती का पर्व नहीं, बल्कि समाज का उत्सव है.

हर व्यक्ति, चाहे वह श्रद्धालु हो या दर्शक, किसी न किसी रूप में इससे जुड़ जाता है.

 सूर्य के प्रतीक में जीवन का दर्शनछठ में सूर्य केवल देवता नहीं, बल्कि जीवन का तार्किक प्रतीक हैं.खरना की बेला में अस्त सूर्य को अर्घ्य देना हमें सिखाता है कि जीवन का हर अंत एक नई शुरुआत है.जैसे सूर्य डूबता है पर लौटता भी है, वैसे ही हर कठिनाई के बाद प्रकाश आता है.यह पर्व धैर्य की शिक्षा देता है—कि अंधेरा चाहे जितना गहरा हो, अगर मन में श्रद्धा का दीप जलता रहे, तो भोर निश्चित है.और खरना वही दीप है—जो रात की शुरुआत में उम्मीद की लौ जलाता है. अंतिम आलोक : जब भक्ति और विज्ञान मिलते हैंखरना में जो संयम है, वह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शरीर और मन के संतुलन का वैज्ञानिक रूप है.

दिनभर का उपवास शरीर को शुद्ध करता है, और सूर्यास्त के बाद शुद्ध अन्न से ऊर्जा मिलती है.

यह व्रत डिटॉक्सिफिकेशन और मेडिटेशन का पारंपरिक भारतीय संस्करण है.व्रती महिलाएँ जब गंगा में उतरती हैं, तो उनका ध्यान सूर्य पर नहीं, अपने भीतर के आलोक पर होता है.यह आत्म-चिंतन का क्षण है—जहां धर्म और विज्ञान, दोनों एक सूत्र में बंध जाते हैं उपसंहार : खरना की रात, आत्मा की शांतिरात गहराती जा रही है.दीघा घाट की लहरों पर दीप तैर रहे हैं.उनकी लौ कभी थरथराती है, कभी स्थिर हो जाती है.यह लौ, व्रती के हृदय में जलती उस अग्नि का प्रतीक है, जो अगले दो दिन तक अडिग रहेगी.खरना की रात के बाद जब सुबह होती है, तो सूर्य थोड़ा और उजला लगता है.मानो उसने भी व्रती की श्रद्धा से नया तेज पा लिया हो.छठ का खरना हमें याद दिलाता है—

कि आस्था केवल पूजा नहीं, जीवन जीने की शैली है.यह दिन हमें संयम, शुद्धता, अनुशासन और साझेदारी की उस परंपरा से जोड़ता है, जिसने सदियों से भारतीय संस्कृति को जीवित रखा है.आज जब आधुनिकता के शोर में आत्मा की आवाज़ दबने लगी है, तब भी खरना का यह मौन व्रत हमें भीतर झांकने की प्रेरणा देता है।

यह कहता है—“जहाँ शुद्धता है, वहीं देवत्व है; जहाँ संयम है, वहीं सूर्य का प्रकाश है.”

 समापन पंक्तिखरना की इस आंखों देखी रात ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि

आस्था केवल प्रार्थना नहीं, बल्कि अनुभव है —

और जब अनुभव में प्रेम, अनुशासन और शुद्धता मिल जाती है,

तभी धरती पर सूर्य उतर आता है.


आलोक कुमार

शनिवार, 25 अक्टूबर 2025

आस्था, संस्कृति और स्वच्छता का महायज्ञ

 आस्था, संस्कृति और स्वच्छता का महायज्ञ

प्रस्तावना : सूर्योपासना की अनोखी परंपरा भारतवर्ष की मिट्टी में जितनी विविधताएं हैं, उतनी ही उसमें आस्थाओं की गहराई भी है. हर प्रदेश, हर जनपद, हर बोली अपने भीतर लोकजीवन का एक अध्याय समेटे हुए है. इन्हीं अध्यायों में एक उज्ज्वल पृष्ठ है — छठ महापर्व. यह पर्व केवल पूजा-अर्चना का अवसर नहीं, बल्कि मानव, प्रकृति और संस्कृति के मध्य संतुलन का अनुपम प्रतीक है. 

बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाने वाला यह पर्व आज देश की सीमाओं को लांघकर विश्व के हर कोने तक पहुँच चुका है. जहाँ-जहाँ भोजपुरी, मैथिली, मगही या हिंदी बोलने वाले बसे हैं, वहाँ-वहाँ डूबते और उगते सूर्य की आराधना में डूबे लोगों की झिलमिलाती आरतियाँ दिखाई देते हैं.

     छठ केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि पर्यावरण, श्रम, अनुशासन और समर्पण का जीवंत उत्सव है.यह पर्व समाज को वह सीख देता है, जो शायद किसी पाठ्यपुस्तक में नहीं मिलती — शुद्धता ही पूजा है, निष्ठा ही साधना है और सूर्य ही साक्षात् जीवन है.

    छठ का ऐतिहासिक और पौराणिक आधार छठ पर्व की जड़ें वैदिक काल तक जाती हैं. ऋग्वेद में ‘सूर्य उपासना’ के अनेक मंत्र मिलते हैं. वैदिक ऋषि सूर्य को जीवनदायिनी शक्ति मानते थे, जो पृथ्वी पर प्रकाश, ऊर्जा और जीवन का संचार करती है. यह परंपरा कालांतर में लोकजीवन से जुड़ती गई और छठ का स्वरूप सामने आया.पौराणिक मान्यता है कि त्रेतायुग में जब भगवान राम अयोध्या लौटे, तब माता सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन सूर्यदेव की आराधना की थी.उन्होंने नदी के किनारे उपवास रखकर सूर्य को अर्घ्य दिया. इसी से यह पर्व आरंभ हुआ माना जाता है.

     महाभारत काल में भी इस व्रत का उल्लेख मिलता है। कर्ण, को सूर्यपुत्र थे, प्रतिदिन सूर्यदेव की पूजा करते और उन्हें अर्घ्य अर्पित करते थे. माना जाता है कि सूर्य की उपासना से ही कर्ण को अपार तेज और शक्ति प्राप्त हुई थी.व्रत की वैज्ञानिकता और अनुशासन छठ पर्व की सबसे बड़ी विशेषता इसका वैज्ञानिक और अनुशासित स्वरूप है. इसमें किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि प्रकृति और पंच तत्वों की आराधना की जाती है.

       व्रती (छठव्रती) चार दिनों तक कड़े नियमों का पालन करती हैं —नहाय-खाय: पहला दिन शरीर और मन की शुद्धता का प्रतीक है. व्रती नदी या तालाब में स्नान कर घर में शुद्ध भोजन बनाती हैं.खरना: दूसरे दिन व्रती पूरे दिन निर्जल उपवास रखती हैं और शाम को गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करती हैं.संध्या अर्घ्य: तीसरे दिन व्रती पूरे दिन निर्जल रहकर शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं.प्रातः अर्घ्य: चौथे दिन सूर्योदय से पहले उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन होता है.

     यह क्रम केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आयुर्वेद और पर्यावरणीय दृष्टि से भी अद्भुत संतुलन दर्शाता है. इस दौरान शरीर विषैले तत्वों से मुक्त होता है, आत्मा अनुशासन से परिष्कृत होती है, और मन संयम से शांत होता है.सूर्य — ऊर्जा का परम स्रोत सूर्य को विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं ने जीवनदायिनी शक्ति माना है.मिस्र की सभ्यता में ‘रा’, जापान में ‘अमातेरासु’, और भारत में ‘सूर्यदेव’ — ये सभी एक ही चेतना के प्रतीक हैं. छठ पर्व उसी चेतना की उपासना है.

            सूर्य की किरणें हमारे शरीर को विटामिन-डी प्रदान करती हैं, जो हड्डियों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए आवश्यक है. सुबह की किरणें शरीर के प्रत्येक कोशिका को सजीव करती हैं. इसलिए छठ का अर्घ्य अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य दोनों को दिया जाता है — यानी जीवन के हर पक्ष, हर अवस्था को समान सम्मान.

महिलाओं की भूमिका : श्रद्धा की साक्षात मूर्ति छठ पर्व का सबसे भावनात्मक पहलू है — स्त्री का त्याग और तपस्या। यह व्रत प्रायः महिलाएं ही करती हैं, हालांकि पुरुष भी इसमें पीछे नहीं.

चार दिनों तक निराहार रहकर, ठंडे जल में खड़ी होकर, घंटों तक ध्यानमग्न रहना किसी तपस्या से कम नहीं.यह पर्व नारी-शक्ति के असीम धैर्य, विश्वास और शक्ति का दर्पण है. व्रती महिलाएं न केवल अपने परिवार के लिए वरदान मांगती हैं, बल्कि पूरे समाज की समृद्धि, आरोग्यता और उज्जवल भविष्य के लिए प्रार्थना करती हैं.

लोक संस्कृति का उत्सव : गीत, गंध और गंगा की लहरें छठ पर्व केवल पूजा का अनुष्ठान नहीं, यह लोकगीतों, संगीत और सादगी का पर्व है। जब घाटों पर “केलवा जे फरेला घवद से ओ पिया” या “उग हो सूरज देव” जैसे गीत गूंजते हैं, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है.यह गीत केवल संगीत नहीं, बल्कि पीढ़ियों की स्मृति, मातृत्व की पुकार और आस्था की गूंज हैं.मिट्टी के दीये, बाँस की टोकरी, ठेकुआ, कसार और फल — इन सबका अपना सांस्कृतिक महत्व है.ये लोकजीवन को प्रकृति से जोड़ते हैं.छठ और प्रवासी समाज आज छठ बिहार या पूर्वांचल तक सीमित नहीं रहा.मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, सूरत, चेन्नई से लेकर दुबई, लंदन, सिडनी और न्यूयॉर्क तक इसके आयोजन होने लगे हैं. प्रवासी भारतीयों के लिए यह पर्व अपनी जड़ों से जुड़ने का भावनात्मक पुल बन गया है.

शहरों की बहुमंजिली इमारतों की छतों पर, या समुद्र तटों पर, जब लोग पीले वस्त्रों में सूर्य की आराधना करते हैं, तो वह केवल पूजा नहीं, बल्कि अपने गाँव-घाट, अपनी मिट्टी और अपनी माँ की याद का प्रतीक होता है।पर्यावरण और स्वच्छता का संदेश छठ पर्व का सबसे बड़ा सामाजिक संदेश है — स्वच्छता ही श्रद्धा है. इस पर्व से पहले गाँव-शहर के तालाब, नदी और सड़कों की सफाई होती है. लोग अपने घरों और मोहल्लों को धो-पोंछकर सजाते हैं. छठ व्रत यह सिखाता है कि प्रकृति की पूजा तभी संभव है जब हम कैसे स्वच्छ रखें.

             आज जो विश्व प्रदूषण और जल-संकट से जूझ रहा है, तब छठ का यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है।आर्थिक दृष्टि से छठ का प्रभाव छठ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है.मिट्टी के बर्तन बनाने वाले, बांस की टोकरी बनाने वाले, फल-सब्जी विक्रेता, वस्त्र और पूजा सामग्री बेचने वाले — सभी के लिए यह पर्व आय का प्रमुख स्रोत बन जाता है.गाँवों में कुटीर उद्योगों का पुनर्जीवन इस पर्व से देखा जा सकता है.

          यह अपने आप में आर्थिक और सामाजिक आत्मनिर्भरता का मॉडल है.सामाजिक समरसता और लोक एकता छठ पर्व में कोई जात-पात, ऊँच-नीच या वर्ग भेद नहीं रहता.गाँव का अमीर हो या गरीब, सब एक ही घाट पर खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं.यह पर्व सामाजिक समानता का प्रतीक है — जहाँ भक्ति ही पहचान है और सत्य ही धर्म।आधुनिक संदर्भों में छठ की चुनौतियाँ तेजी से बदलते समय में, जब जीवन की गति कृत्रिम होती जा रही है, छठ जैसे पर्वों के सामने भी कई चुनौतियां हैं.

    नदियों का प्रदूषण, प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग, और नगरीकरण के कारण प्राकृतिक घाटों का अभाव — ये सब इस महापर्व की पवित्रता को चुनौती दे रहे हैं.इसलिए अब यह आवश्यक है कि हम छठ को केवल धार्मिक अनुष्ठान न मानें, लेकिन पर्यावरणीय आंदोलन के रूप में भी देखें. हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह नदी, तालाब और पर्यावरण की रक्षा करें, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी छठ की वही दिव्या महसूस कर सकें.

छठ : लोकजीवन में स्त्री-पुरुष की समान भागीदारी भले ही व्रत करने वाली महिला प्रमुख रूप से केंद्र में होती हैं, लेकिन पुरुष भी इस पर्व में समान भूमिका निभाते हैं.पूरे परिवार का सहयोग, प्रसाद बनाने में मदद, घाट सजाने में श्रमदान — यह सब मिलकर पारिवारिक एकता और सामूहिक जीवन का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं.

        छठ का यह स्वरूप भारतीय परिवार की उस परंपरा को पुनः जीवित करता है, जिसमें घर ही मंदिर और परिवार ही समाज होता है.सांस्कृतिक निर्यात : विश्व में बिहार की पहचान छठ ने बिहार की पहचान को नया आयाम दिया है.

         आज न्यू जर्सी, मेलबर्न, दुबई, मस्कट, सिंगापुर, लंदन, मॉरीशस तक इस पर्व का आयोजन होता है.विदेशों में रहने वाले भारतीय अपने बच्चों को यह सिखाते हैं कि यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि संस्कार और जीवनशैली है.विश्व स्तर पर यह पर्व भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का उदाहरण बन चुका है.छठ और नारी सशक्तिकरण इस पर्व में नारी केवल पूजा करने वाली नहीं, बल्कि संरक्षक और नेतृत्वकर्ता की भूमिका में होती है.सफाई से लेकर आयोजन तक, हर स्तर पर महिला नेतृत्व करती हैं.उनकी एकाग्रता, अनुशासन और संयम समाज को यह संदेश देता है कि नारी शक्ति यदि संकल्प कर ले, तो असंभव कुछ भी नहीं.यह पर्व स्त्री के भीतर छिपे ऋषिता की पहचान है.लोक कला और साहित्य में छठ छठ का प्रभाव लोक कला, चित्रकला, नृत्य और साहित्य तक फैला हुआ है.

           मधुबनी चित्रों में सूर्य की आराधना के दृश्य, भोजपुरी कविताओं में व्रती के गीत, और हिंदी साहित्य में आस्था के प्रतीक के रूप में छठ — ये सभी इस पर्व की सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाते हैं.भोजपुरी सिनेमा और गीतों ने भी इसे जन-जन तक पहुँचाया है, जिससे यह पर्व लोकधारा से राष्ट्रीय धारा में परिवर्तित हुआ है.आस्था और विज्ञान का संगम छठ पर्व का हर नियम विज्ञान की कसौटी पर खरा उतरता है.सूर्यास्त और सूर्योदय के समय अर्घ्य देने से शरीर की कोशिकाएं सौर ऊर्जा को ग्रहण करती हैं.निर्जल उपवास शरीर के भीतर विषैले तत्वों को निकालता है.प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग पर्यावरण-संरक्षण को बढ़ावा देता है. इस प्रकार यह पर्व आस्था और विज्ञान के बीच संतुलन का अद्भुत उदाहरण है.

निष्कर्ष : छठ एक जीवन-दर्शन छठ केवल पूजा नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन है.यह सिखाता है कि जीवन में शुद्धता, अनुशासन, संयम और प्रकृति के प्रति सम्मान ही सच्ची भक्ति है.जब डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, तो यह जीवन के संघर्षों के प्रति आभार है;और जब उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, तो यह भविष्य की आशा का प्रतीक है.आज के भौतिक युग में, जहां आडंबर और उपभोग का अंधकार फैलता जा रहा है, छठ महापर्व एक दीपक की तरह है — जो हमें याद दिलाता है कि आस्था केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि हमारे कर्म, हमारी निष्ठा और हमारे पर्यावरण की रक्षा में है.यह पर्व हमें जोड़ता है — मनुष्य से मनुष्य को, मनुष्य से प्रकृति को, और मनुष्य से परमात्मा को।समापन विचार जब घाटों पर डूबते सूर्य की सुनहरी किरणें जल में झिलमिलाती हैं, व्रती के हाथ folded होकर प्रार्थना में उठते हैं, और हवा में गूंजता है —

"छठ मइया के जयकारा, उग हो सूरज देव!" — तब लगता है मानो सम्पूर्ण ब्रह्मांड एक ही सुर में कह रहा हो — “यह आस्था नहीं, यह जीवन का उत्सव है.”


आलोक कुमार 

शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025

छठ पर्व को लेकर जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक सम्पन्न

 छठ घाटों पर स्वच्छता, प्रकाश और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करें : जिला पदाधिकारी

छठ व्रतियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका रखें विशेष ध्यान

छठ व्रतियों की सुविधा के मद्देनजर चेंजिंग रूम की करें व्यवस्था

छठ पर्व को लेकर जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक सम्पन्न

बेतिया .छठ महापर्व को लेकर जिला प्रशासन पश्चिम चम्पारण पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। जिला पदाधिकारी, श्री धर्मेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें छठव्रती महिलाओं और श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए.

     जिला पदाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के सभी छठ घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था, जल निकासी, पेयजल आपूर्ति, विधि-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएँ. उन्होंने कहा कि घाटों तक जाने वाले मार्गों की मरम्मत, कीचड़ की सफाई और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो.

       उन्होंने कहा कि छठ महापर्व लोक आस्था का पर्व है, इसलिए श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के प्रमुख छठ घाटों का भौतिक निरीक्षण करें और सड़कों, नालियों तथा घाटों की सफाई एवं मरम्मत कार्य को सुनिश्चित करें.

     बैठक में स्वास्थ्य विभाग को घाटों एवं भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर प्राथमिक उपचार केंद्र संचालित करने के निर्देश दिए गए. वहीं विद्युत विभाग को सभी घाटों और प्रमुख स्थलों पर प्रकाश की समुचित व्यवस्था करने तथा खराब तारों और पोलों की तत्काल मरम्मत का आदेश दिया गया. जिला पदाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय एवं सतत निगरानी बनाए रखने का निर्देश देते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य है कि जिले के सभी व्रतधारी और श्रद्धालु सुरक्षित, स्वच्छ और श्रद्धा मय वातावरण में छठ महापर्व मनाएँ.

     बैठक में नगर आयुक्त, नगर निगम बेतिया श्री लक्ष्मण तिवारी, विशेष कार्य पदाधिकारी, जिला गोपनीय शाखा, श्री सुजीत कुमार सहित सभी अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सभी नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी सहित अन्य प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी उपस्थित थे.

              छोटे सिंह ने कहा कि  सर पर्व के महत्व को देखते हुए आप से जनहित से अनुरोध पूर्वक कहना है कि पूर्व से चिन्हित छठ घाटों का निरीक्षण और अवलोकन अपने से हर-एक घाटों के साज सज्जा करने वाले कमिटी के साथ करने का कष्ट करेंगे बहुत मेहरबानी होगी.


आलोक कुमार

गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025

बरौली में महिलाओं की टोली ने मतदाताओं को किया जागरूक

 बरौली में महिलाओं की टोली ने मतदाताओं को किया जागरूक


बरौली.आगामी 6 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर मतदाताओं को लगातार जागरूक किया जा रहा है, ताकि मतदान के प्रतिशत को अधिक से अधिक बढ़ाया जा सके. इस क्रम में इस जागरूकता अभियान में महिलाओं की भी अहम भागीदारी है. जिला स्वीप कोषांग की ओर से आयोजित हो रही विभिन्न गतिविधियों में महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है. बुधवार को बरौली विधानसभा क्षेत्र के बरौली प्रखंड मुख्यालय में जीविका से जुड़ी दो दर्जन से अधिक महिलाओं ने अभियान चलाकर महिला व पुरुष मतदाताओं को जागरूक किया तथा 6 नवंबर को मतदान करने का संकल्प दिलाया. जागरूकता बैनर के साथ निकली महिलाओं ने जागरूकता से संबंधित कई नारे लगाए तथा लोगों से मतदान करने की अपील की.


आलोक कुमार

बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

स्व. श्रीकृष्ण सिंह के तैल चित्र पर कांग्रेसजन ने पुष्पांजलि अर्पित की

 स्व. श्रीकृष्ण सिंह के तैल चित्र पर कांग्रेसजन ने पुष्पांजलि अर्पित की

पटना. आधुनिक बिहार के निर्माता और बिहार के पहले मुख्यमंत्री बिहार केसरी स्व. श्रीकृष्ण सिंह की 138 वीं जयंती प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में मनाई गई। स्व. श्रीकृष्ण सिंह के तैल चित्र पर कांग्रेसजन ने पुष्पांजलि अर्पित की.

    इस अवसर पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सांसद डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण बाबू आधुनिक बिहार के निर्माता रहें हैं और देश की आजादी के लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के नेता

रहें हैं. उन्होंने बिहार के विकास को राह प्रदान किया। बरौनी और पतरातू थर्मल पावर स्टेशन से लेकर बरौनी तेल शोधक कारखाना, बोकारो स्टील कारखाना, बरौनी व सिंदरी सीमेंट कारखाना, हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन आदि प्रमुख कारखानों को उन्होंने अविभाजित बिहार लगने का मार्ग प्रशस्त किया। श्रीकृष्ण बाबू आजादी के लड़ाई में देश को दिशा देने वाले नेताओं में से एक रहें हैं. उन्होंने कहा कि आधुनिक बिहार के निर्माण में श्रीकृष्ण बाबू का योगदान अविस्मरणीय है.

      बिहार को प्रगति पथ पर अग्रसर करने में उनकी अहम भूमिका रही है.जयंती कार्यक्रम में प्रो. रामजतन सिन्हा, नरेन्द्र कुमार, ब्रजेश प्रसाद मुनन, जमाल अहमद भल्लू , अजय कुमार  चौधरी ,पंकज यादव, डा0 कमलदेव नारायण शुक्ला, रौशन कुमार सिंह, शशिकांत तिवारी, संजय कुमार पाण्डेय, प्रदुम्न कुमार, प्रियंका सिंह, राजनन्दन कुमार, धर्मवीर शुक्ला, आलोक हर्ष, सतीश कुमार चंदन, डा0 अफजल इमाम, रंजीत कुमार बाल्मीकी , बाल्मीकी शर्मा, मुन्ना ठाकुर समेत प्रमुख नेतागण मौजूद रहें.

आलोक कुमार

मंगलवार, 21 अक्टूबर 2025

जो हर नए वादे के साथ बस “कल तक” का इंतज़ार करते रहते

 सरकार के फैसलों और घटती पेंशनभोगियों की संख्या से जुड़ा ताज़ा अपडेट सामने आया है। EPS-95 के लाखों बुजुर्गों को राहत की उम्मीद, लेकिन क्या सच में ₹7500 न्यूनतम पेंशन मिल पाएगी? पेंशन में बढ़ोतरी के पीछे छिपे असर और ताज़ा हालात जानकर आप चौंक जाएंगे!



पटना . ईपीएस-95 पेंशन : उम्मीदें, वादे और हकीकत 1995 में जब आजतक ने दूरदर्शन पर एक 20 मिनट के समाचार कार्यक्रम के रूप में शुरुआत की थी, तब हर बुलेटिन के अंत में ऐंकर कहते थे — “इंतज़ार करिए कल तक.” उस समय यह वाक्य सिर्फ समाचारों की निरंतरता का प्रतीक था, पर आज यह पंक्ति लाखों ईपीएस-95 पेंशनधारियों की ज़िंदगी का पर्याय बन चुकी है — जो हर नए वादे के साथ बस “कल तक” का इंतज़ार करते रहते हैं.

          ईपीएस-95 पेंशन योजना से जुड़े करीब 75 लाख पेंशनधारी वर्षों से अपनी न्यूनतम पेंशन में सम्मानजनक वृद्धि की मांग कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि ₹7500 मासिक पेंशन, महंगाई भत्ता और पति-पत्नी के लिए चिकित्सा सुविधा लागू हो. पर हर बार उम्मीदें बंधती हैं, घोषणा होती हैं, और फिर सब “फाइल प्रक्रिया में है” कहकर टाल दिया जाता है. जब केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने घोषणा की थी कि आगामी बैठक में पेंशन वृद्धि का निर्णय लिया जाएगा. पर बोलते-बोलते मंत्रालय बदल गया और वे किसी और विभाग में स्थानांतरित हो गए.        

         अब श्रम मंत्रालय की कमान डॉ. मनसुख लक्ष्मण भाई मंडाविया के पास है. वे भी वही पुराने शब्द दोहरा रहे हैं — “आपका आंदोलन मर्यादित है, मैं उसका सम्मान करता हूं, सरकार सकारात्मक है, जल्द ही सम्मानजनक पेंशन मिलेगी — पर मैं समय नहीं बता सकता.”यह वही आश्वासन है जो वर्षों से दिया जा रहा है, पर कभी अमल में नहीं उतरा.

      अब खबर है कि सीबीटी की अगली बैठक नवंबर 2025 के अंत या दिसंबर की शुरुआत में हो सकती है. सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय और श्रम मंत्रालय के बीच सहमति बन चुकी है, बस औपचारिक मंजूरी बाकी है. यही उम्मीद फिर से जागी है कि शायद इस बार फैसला हो जाए.पर सवाल वही है — “क्या यह भी सिर्फ कल तक का इंतज़ार बनकर रह जाएगा?”ईपीएफओ के विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पेंशन वृद्धि लागू होती है, तो इससे लाखों बुजुर्गों के जीवन में स्थायित्व आएगा. यह न केवल उनकी आर्थिक सुरक्षा को मजबूती देगा, बल्कि ईपीएफओ की छवि को भी सुदृढ़ करेगा.

      कई सेवानिवृत्त कर्मचारी अब भी 1000-1200 रुपये मासिक पेंशन पर गुज़ारा कर रहे हैं — जो मौजूदा समय में एक अपमानजनक स्थिति है. यह पेंशन नहीं, बल्कि औपचारिकता भर रह गई है.आज भी सड़कों पर बैठा वृद्धा पेंशन धारक सरकार से कोई एहसान नहीं, बल्कि अपना हक मांग रहा है.यह वही वर्ग है जिसने अपनी युवावस्था में देश की औद्योगिक और आर्थिक नींव को मजबूती दी.

    अब वही लोग अपनी बुज़ुर्गी में सरकार के रहम पर निर्भर हैं.शब्दों में सहानुभूति, पर कार्रवाई में सन्नाटा — यही इस पूरे प्रकरण का सार है.दरअसल, सरकारें बदलती है, मंत्रियों के नाम बदलते हैं, पर बयान वही रहते हैं — “हम इस दिशा में काम कर रहे हैं… फाइल आगे बढ़ गई है… फैसला जल्द होगा…”पर ‘जल्द’ की यह परिभाषा कभी हकीकत नहीं बन पाई।ईपीएस-95 पेंशनधारियों की कहानी आज आजतक की उस पुरानी आवाज़ जैसी है —जहाँ हर उम्मीद के बाद बस इतना कहा जाता है —“इंतज़ार करिए... कल तक.”


आलोक कुमार

सोमवार, 20 अक्टूबर 2025

सम्पूर्ण पश्चिम चम्पारण में 11 नवंबर को शत प्रतिशत मतदान का सन्देश दिया

 

बेतिया . पश्चिम चंपारण वासियों को जिला प्रशासन की तरफ से दीपोत्सव की शुभकामनाओं के साथ शत प्रतिशत मतदान का सन्देश.मतदाता जागरूकता पर आधारित कार्यक्रम “दीपदान से मतदान तक” दिनांक - 19/10/2025, सायं 5:30, सागर पोखरा में श्री धर्मेंद्र कुमार-(जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिलाधिकारी, पश्चिम चम्पारण) के मार्गदर्शन में लगभग 4000 दीपक को बेतिया वासियों  तथा जिला प्रशासन द्वारा प्रज्वलित किया गया .दीपदान के इस महोत्सव ने सम्पूर्ण पश्चिम चम्पारण में 11 नवंबर को शत प्रतिशत मतदान का सन्देश दिया.दीपदान के इस महोत्सव में जिला प्रशासन, जीविका दीदी, स्वयं सेवी संस्थाएं, और बड़ी संख्या में बेतिया वासियों ने हिस्सा लिया और दीप जलाकर यह संकल्प लिया कि इस दीपदान के साथ 11 नवंबर को बढ़ चढ़कर मतदान करेंगे

    उप विकास आयुक्त, श्री सुमित कुमार ने कहा की जिला प्रशासन इस तरह के आयोजन लगातार कर रहा है ताकि हर मतदाता तक पहुंच बनाई जा सके और पोलिंग बूथ पर हर सुविधा का ध्यान रखा जा रहा हैं मतदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो साथ ही अपर समाहर्ता, श्री राजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि हम इन कार्यक्रमों के माध्यम से संपूर्ण चंपारण में एक अलख जगाना चाहते हैं ताकि वह पोलिंग बूथ पर जाकर अपनी जिम्मेदारी को निभाएं.अपर समाहर्ता-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, श्री अनिल कुमार सिन्हा ने बताया कि सभी मतदाताओं से अपील है कि पूर्ण रूप से स्वतंत्र भयमुक्त और सुविधाजनक वातावरण में मतदान करके अपने 11 नवंबर को पोलिंग बूथ पर पहुंचे प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है.

     नोडल पदाधिकारी, जिला स्वीप कोषांग, श्रीमती नगमा तबस्सुम द्वारा स्वच्छ, शांतिपूर्ण मतदान करने का संदेश दिया गया.कार्यक्रम में जिला प्रशासन से नजारत उप समाहर्ता, श्री सुजीत कुमार, DPM जीविका, श्री आर के निखिल, ज़िला कला संस्कृति पदाधिकारी, श्री राकेश कुमार और रश्मि कुमारी-केंद्र प्रशासक सखी वन स्टॉप सेंटर भी उपस्थित रहे। वहीं स्वीप कोषांग के सदस्य  राम इकबाल, नूतन कुमारी, राजीव कुमार के साथ अन्य  सभी ने दीपदान किया.कार्यक्रम आयोजन संपूर्ण स्वीप टीम द्वारा मिलकर किया गया.


आलोक कुमार

रविवार, 19 अक्टूबर 2025

चुने हुए बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन पर पिलाई जाएगी दवा

 

छठ पर्व पर विशेष पोलियो अभियान 18 से 28 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है

नेपाल व बाहरी राज्यों से बिहार लौटने वाले 5 वर्ष तक के बच्चों पर रहेगी नजर

चुने हुए बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन पर पिलाई जाएगी दवा

मोतिहारी. छठ पर्व पर विशेष पोलियो अभियान के तहत 18 से 28 अक्टूबर तक बच्चों को पल्स पोलियो से बचाव को दवा पिलाई जा रही है. वहीं इसको लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस सम्बन्ध में सिविल सर्जन डॉ रवि भूषण श्रीवास्तव व डीआईओ डॉ शरत चंद्र शर्मा ने बताया की नेपाल व बाहरी राज्यों से बिहार लौटने वाले 5 वर्ष तक के बच्चों पर रहेगी टीम की नजर.

    वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रक्सौल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजीव रंजन ने बताया की रक्सौल के सटे हुए नेपाल की सीमा है जहाँ से बाहरी लोग आते है इसलिए यहाँ के चुने हुए बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन पर बच्चों को दवा पिलाई जाएगी. 5 साल तक के बच्चों को  पोलियो की खुराक रेलवे स्टेश नए बस स्टैंड ए के साथ छठ घाटों पर भी टीकाकरण की व्यवस्था की जाएगी. विशेष अभियान में खासकर वैसे बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाना है, जो त्योहार के समय अपने घर आए हों। बता दें कि जिला को पोलियो के खतरों से मुक्त कराने के उद्देश्य से यह विशेष पोलियो टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है.जो आगामी 28 अक्टूबर तक चलेगा. पूर्वी चम्पारण के सीएस डॉ रविभूषण श्रीवास्तव ने बताया कि पर्व त्योहार में बाहर से आने.जाने वाले बच्चे पोलियो की खुराक पीकर पोलियो के संभावित खतरों के प्रति सुरक्षित हो सके.इसलिए ट्रांजिट टीम के साथ स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देशित किया गया है कि रेलवे स्टेशन बस स्टैंड के साथ छठ घाटों पर बच्चों को पल्स पोलियो की दो बूंद दवा अवश्य पिलायें.

        डॉ एस सी शर्मा ने बताया कि चिह्नित स्थान जहां से बाहर के बच्चे जिले में प्रवेश करेंगे तथा जिले से प्रखंड व संबंधित गांव में प्रवेश करेंगे। उन जगहों पर कर्मी को नियुक्त किया गया है.पर्यवेक्षण के लिए सुपरवाइजर भी प्रतिनियुक्त किए गए हैं.बापूधाम मोतिहारी, समेत  प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रक्सौल के अंतर्गत  दीपावली, छठ पूजा स्पेशल पोलियो उन्मूलन अभियान में पोलियो ट्रांजिट टीम रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म 1 पर दल कर्मी द्वारा बच्चों को दवा पिलाया गया.वहीं दल का अनुश्रवण प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी,नोडल चिकित्सा पदाधिकारी,बीएमसी यूनिसेफ द्वारा किया गया.


आलोक कुमार

शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

मरीज की मौत हो जाने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया

 नरकटियागंज स्थित निजी अस्पताल में मरीज की मृत्यु पर जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

नरकटियागंज.नरकटियागंज में  बिनु सर्जिकल केयर में पूनम देवी का भर्ती कराया गया.यहां के चिकित्सकों ने पूनम देवी का ऑपरेशन किया.वह दो दिनों तक ठीक थी. तीसरे दिन पूनम देवी की हालत खराब होने लगी.इस हालात को सुधारने के बदले चिकित्सक और कर्मचारी भाग खड़े हुए.इस तरह के ऑपरेशन के बाद मरीज की मौत हो जाने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया.

   इस  बिनु  सर्जिकल केयर में पूनम देवी नामक मरीज की मृत्यु पर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है. बिनु सर्जिकल केयर हॉस्पिटल (पूर्व में नीतू सर्जिकल केयर) को प्रशासन ने सील कर दिया है. हॉस्पिटल के कर्ताधर्ताओं पर प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई चल रही है.प्रशासन का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील कर कानून-व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह किया है और अफवाहों पर ध्यान न देने पर जोर दिया.

           घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला पदाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, श्री धर्मेन्द्र कुमार के निर्देश पर निवेशित पूंजी का गुणांक  (MOIC)नरकटियागंज एवं थाना प्रभारी, नरकटियागंज की संयुक्त टीम द्वारा तत्काल कार्रवाई की गई. उक्त निजी अस्पताल को प्रशासनिक नियंत्रण में लेते हुए सील कर दिया गया है.

        जिलाधिकारी, श्री धर्मेन्द्र कुमार ने कहा है कि किसी भी स्तर पर यदि चिकित्सकीय लापरवाही या वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित अस्पताल संचालक एवं चिकित्सकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी.जिला प्रशासन नागरिकों से अपील करता है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखें और अफवाहों पर ध्यान न दें। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.

            प्रकाश कुमार गुप्ता का कहना है कि सील किया हुआ अस्पताल अगर दोबारा चल रहा है तो इसमें प्रशासन की भूमिका का क्या कहा जा सकता है. District Administration, West Champaran , Bettiah,नरकटियागंज में पहले जीतने सील किए अस्पताल की समय से जांच कराए गए रहते तो आप को
खबर हो कि सभी अस्पताल वर्तमान में अवैध रूप से चल रहे हैं.

यह घटना नरकटियागंज में कोई पहली बार नहीं घटी है आए दिन शहर के विभिन्न गली मोहल्ले में मल्टीप्लेक्स हॉस्पिटल के नाम से खुलता रहता है और उसका उद्घाटन सफेद पोश वाले भी करते हैं और दलालों के चंगुल में फंसकर मजबूर और गरीब लोग इलाज करने जाते हैं जहां मौत बांटा जाता है और स्थानीय शासन प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग मौन  रह कर केवल तमाशा देखते हैं और घटना घटने के बाद कागजी प्रक्रिया में जुट जाते है.


आलोक कुमार


शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025

माइक्रो आब्जर्वर का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न

 कर्मियों के लिए प्रथम स्तरीय अंतिम प्रशिक्षण 

मोतिहारी. आगामी बिहार विधानसभा आम निर्वाचन -2025 के प्रथम स्तरीय मतदान दल के कर्मियों के प्रशिक्षण में अनुपस्थित पाए गए मतदान दल के कर्मी जो पूर्व में प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किए थे,  उनके लिए जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी पूर्वी चंपारण ,मोतिहारी के आदेशानुसार उक्त कर्मियों के लिए प्रथम स्तरीय अंतिम प्रशिक्षण का आयोजन सी एस डी ए भी  पब्लिक स्कूल, मोतिहारी के प्रांगण में आयोजित किया गया.

    इसमें सभी स्तर के मतदान डालकर्मी जैसे- पीठासीन पदाधिकारी, मतदान पदाधिकारी प्रथम ,मतदान पदाधिकारी द्वितीय ,मतदान पदाधिकारी तृतीय, काउंटिंग असिस्टेंट, काउंटिंग सुपरवाइजर इत्यादि के साथ-साथ माइक्रो आब्जर्वर का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया. जिसमें मतदान दल के कर्मियों के लिए मौक पोल ड्रिल के  साथ-साथ चुनाव में होने और आने वाली कठिनाइयों का निवारण भी जिला मास्टर ट्रेनरों के द्वारा किया गया.  उन्हें आश्वस्त किया गया कि आगामी बिहार विधानसभा आम निर्वाचन -2025 निष्पक्ष एवं भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराया जाएगा जिसमें उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी .

     इसके लिए जिला प्रशासन पूर्वी चंपारण मोतिहारी दृढ़ संकल्पित है।. इस प्रशिक्षण का निरीक्षण एवं गुणवत्ता की जांच जिला प्रशिक्षण कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी श्री शैलेंद्र भारती,जिला पंचायती पदाधिकारी श्री रामजन्म पासवान, जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री राजन कुमार गिरि  के द्वारा किया गया । मौके पर वरीय मास्टर ट्रेनर नागेंद्र प्रसाद ,रमेश कुमार, कमलेश कुमार सिंह, शैलेंद्र कुमार मिश्रा, अभिजीत कुमार ,रामेश्वर राम ,अरुण कुमार सिंह, मनोज कुमार इत्यादि उपस्थित थे.


आलोक कुमार

गुरुवार, 16 अक्टूबर 2025

वीवीपैट स्क्रीनिंग कार्य का संयुक्त रूप से निरीक्षण किया


नालंदा . आज दिनांक 16 अक्टूबर, 2025 को श्री कुंदन कुमार , जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह- जिलाधिकारी, नालंदा  एवं श्री भारत सोनी ,पुलिस अधीक्षक, नालंदा  द्वारा भ्रमण कार्यक्रम के दौरान बिहारशरीफ  मघड़ा अवस्थित ई०वी० एम० वेयर हाउस में ई०वी० एम० /वीवीपैट स्क्रीनिंग कार्य का संयुक्त रूप से निरीक्षण किया गया.निरीक्षण के दौरान ई०वी० एम० की सुरक्षा, रखरखाव एवं स्क्रीनिंग प्रक्रिया की बारीकी से देखने के उपरांत उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए.

   नोडल पदाधिकारी ईवीएम कोषांग ने बताया कि विधानसभा वार CU,BU सेग्रीगेशन कार्य पूर्ण हो चुका है ,वीवीपैट सेग्रीगेशन का कार्य प्रगति पर है , इसे जल्द ही ससमय पूर्ण कर लिया जाएगा .

जिला निर्वाचन पदाधिकारी महोदय ने उपस्थित अधिकारियों एवं तकनीकी कर्मियों को निर्देशित किया कि ई०वी० एम० की स्क्रीनिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं उच्च स्तर की सावधानी बरती जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा वार स्क्रीनिंग ईवीएम /वीवीपैट मशीनों को जीपीएस ट्रैकिंग कंटेनर युक्त वाहनों के माध्यम से ही पुलिस अभिरक्षा के साथ डिस्पैच सेंटर तक पहुंचाना सुनिश्चित करेंगे.

       इस अवसर पर नगर आयुक्त, नोडल पदाधिकारी ईवीएम कोषांग,तकनीकी टीम, पुलिस पदाधिकारीगण तथा अन्य संबंधित कर्मी भी उपस्थित थे.


आलोक कुमार

बुधवार, 15 अक्टूबर 2025

उम्मीदवारों को अनुमतियाँ अब एक ही स्थान पर

 चुनावी व्यवस्थाओं को पारदर्शी व सरल बनाने की दिशा में एक और कदम

जिलास्तर पर समाहरणालय परिसर में एकल खिड़की प्रणाली प्रारंभ

उम्मीदवारों को अनुमतियाँ अब एक ही स्थान पर



बेतिया . बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 के अवसर पर पश्चिम चम्पारण जिलान्तर्गत सभी उम्मीदवारों अथवा उनके प्रतिनिधियों को चुनाव प्रचार-प्रसार में विभिन्न अनुमतियों की प्राप्ति में सुविधा हेतु विभिन्न स्तरों पर एकल खिड़की कोषांग की व्यवस्था की गयी है.इसी क्रम में आज दिनांक-15.10.2025 को जिलास्तरीय एकल खिड़की की व्यवस्था जो लाहिया स्वच्छ बिहार अभियान कार्यालय में संचालित है, का उद्घाटन जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, श्री धर्मेन्द्र कुमार के द्वारा किया गया.

एकल खिड़की व्यवस्था (कोषांग) में सभी राजनैतिक उम्मीदवारों को उनके चुनाव प्रचार-प्रसार के लिए वाहन/रैली/चुनाव कार्यालय/हेलीकॉप्टर आदि की अनुमति उक्त कोषांग के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर दी जायेगी.

इस मौके पर श्री सुमित कुमार, उप विकास आयुक्त, श्री राजीव रंजन सिन्हा, अपर समाहर्ता-सह-अपर जिला दंडाधिकारी, श्री अरुण प्रकाश, निदेशक, लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन, श्री सौरभ आलोक, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, श्रीमती नगमा तबस्सुम, वरीय उप समाहर्ता, श्री राकेश कुमार, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे.


आलोक कुमार

मंगलवार, 14 अक्टूबर 2025

दीपावली का पर्व 5 दिनों का पर्व है


गयाजी.दीपावली का पर्व 5 दिनों का पर्व है जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर समाप्त होता है. 18 अक्टूबर धनतेरस, 19 अक्टूबर 2025 छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी), 20 अक्टूबर दिवाली और लक्ष्मी पूजा, 22 अक्टूबर गोवर्धन पूजा और 23 अक्टूबर भाई दूज दिन है.अबकी बार धनतेरस और दिवाली से लेकर भाई दूज तक का पूरा कैलेंडर. यह तिथि और मुहूर्त होगा धनतेरस, छोटी दिवाली और दिवाली मनाने के लिए सबसे उत्तम रहेगा.

              गोवर्धन अन्नकूट पूजा प्रतिपदा तिथि के दिन मनाने की परंपरा है. प्रतिपदा तिथि 21 तारीख को शाम में 5 बजकर 55 मिनट पर लगेगी और 22 तारीख को शाम में 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदय तिथि के अनुसार, 22 तारीख को ही गोवर्धन पर्व मनाया जाना शास्त्र सम्मत होगा.भाई दूज का पर्व कार्तिक मास की द्वितीया तिथि के दिन मनाया जाता है. 22 तारीख को रात में 8 बजकर 17 मिनट पर कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि का आरंभ होगा और 23 तारीख को रात में 10 बजकर 47 मिनट पर द्वितीया तिथि का समापन होगा। ऐसे में पंचांग की गणना के अनुसार भाई दूज पर्व 22 तारीख को ही मनाया जाना उचित होगा.

   इस बीच गयाजी जिले के जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर के निर्देश के आलोक में दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए दिनांक 13.10.2025 को टेकारी एवं गया सदर में स्थित कुल 08 प्रतिष्ठानों में निरीक्षण कर छापामारी किया गया एवं कुल 17 संदिग्ध खाद्य पदार्थ का नमूना संग्रह किया गया जिसका विवरण निम्न है-

1. में0 विजय लड्डू भंडार, पंचानपुर टेकारी, गया जी के प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया गया निरीक्षण के दौरान लगभग 3.5 किलोग्राम  दूषित मुरब्बा एवं लगभग 2 किलो  दूषित ड्राई फ्रूट लड्डू को जब्त करते हुए नष्ट करने की कार्रवाई किया गया था  मुखदल लड्डू, बेसन लड्डू, खोवा बर्फी एवं मुरब्बा का नमूना संग्रह किया गया.

2. में0 संतोष किराना स्टोर, पंचानपुर टेकारी, गया जी के प्रतिष्ठान से लाल मिर्च पाउडर, सरसों तेल एवं जीरा का नमूना संग्रह किया गया.

3. में0 पंडित जी स्वीट्स साॅप, पंचानपुर टेकारी, गया जी के प्रतिष्ठान से कलाकंद, छेना मिठाई एवं नारियल लड्डू का नमूना संग्रह किया गया.

4. में0 मिथुन होटल, बड़की डेल्हा नियर बस स्टैड, गया जी के प्रतिष्ठान से बेसन लड्डू का नमूना संग्रह किया गया.

5. में0 जैन स्वीट्स शहीद रोड, गया जी के प्रतिष्ठान से पनीर का नमूना संग्रह किया गया.

6. में0 श्री कृष्णा मिष्ठान भंडार चौक शहीद रोड, गया जी के प्रतिष्ठान से छेना मिठाई एवं खोवा बर्फी का नमूना संग्रह किया गया.

7. में0 प्रमोड लड्डू भंडार भेज प्लाजा पपरीका, नियर किरण सिनेमा चैक टाॅवर, गया जी के प्रतिष्ठान से सोनपापड़ी एवं पेड़ा का नमूना संग्रह किया गया.

8. में0 श्री राम तिलकुट भंडार, टेकारी रोड, गया जी के प्रतिष्ठान से लाई का नमूना संग्रह किया गया। खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थ को ढ़कवाया गया एवं हमेशा ढ़क कर ही बेचने का निर्देश दिया गया.

2011 के शेड्यूल 4 के अनुसार साफ-सफाई रखने का निर्देश दिया गया. बिना अनुज्ञप्ति/ पंजीयन प्राप्त प्रतिष्ठानों को अविलंब अनुज्ञप्ति/ पंजीयन प्राप्त करने का निर्देश दिया गया. सभी नमूने की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है, जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरांत जाँच प्रतिवेदन के आधार पर कार्रवाई की जायेगी.

आलोक कुमार

Publisher ID: pub-4394035046473735
Site: chingariprimenews.blogspot.com

सोमवार, 13 अक्टूबर 2025

आदर्श आचार संहिता के पालन को लेकर प्रवर्तन एजेंसियों की बैठक सम्पन्न

 बेतिया.आदर्श आचार संहिता के पालन को लेकर प्रवर्तन एजेंसियों की बैठक सम्पन्न. जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने दिए कई अहम निर्देश. बिहार विधान सभा आम निर्वाचन 2025 के सफल, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण संचालन के लिए आज समाहरणालय सभागार में जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, श्री धर्मेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में सभी प्रवर्तन एजेंसियों की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई.

     बैठक का उद्देश्य आदर्श आचार संहिता (MCC) के प्रभावी पालन तथा निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित करना था.बैठक में उपस्थित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि एफएसटी (Flying Squad Team) एवं एसएसटी (Static Surveillance Team) आपसी समन्वय के साथ सक्रियता से कार्य करें.गश्ती दलों की संख्या तथा गश्ती बढ़ाई जाए तथा जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए, ताकि आम जनता को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े.उन्होंने कहा कि आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाए, साथ ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी मानक प्रक्रिया प्रचालन (SOP) के अनुरूप नकद, शराब, मादक पदार्थ, फर्जी मुद्रा, ड्रग्स एवं फ्रीबी आदि पर पूर्ण नियंत्रण रखा जाए. वैध नकद के परिवहन के दौरान आम नागरिकों को कोई असुविधा न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जाए.

    बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि आयकर विभाग, उत्पाद विभाग, पुलिस, सीमा शुल्क, नारकोटिक्स ब्यूरो, डीआरआई तथा अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सुदृढ़ समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि किसी भी शिकायत या सूचना पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। त्वरित सूचना आदान-प्रदान के लिए व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से संपर्क बनाए रखने की बात कही गई. जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि व्यय अनुश्रवण से संबंधित सभी व्यवस्थाएं—जैसे उड़नदस्ता, स्थैतिक निगरानी दल, वीडियो सर्विलांस टीम एवं अकाउंट टीम—भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार सुचारू रूप से कार्य करें।उन्होंने सभी एजेंसियों को Compendium of Instructions on Election Expenditure Monitoring (Dec 2024) में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया.उन्होंने कहा कि सी-विजिल एप पर नागरिकों द्वारा प्राप्त शिकायतों का त्वरित निपटारा किया जाए, ताकि आम जन की सहभागिता से आदर्श आचार संहिता का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके.

          बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पश्चिम चम्पारण जिले की सीमाओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी, ताकि पड़ोसी जिलों, राज्यों तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से नकद, शराब या मादक पदार्थों की अवैध आवाजाही पर रोक लगाई जा सके.इसके लिए सीमावर्ती जिलों एवं राज्यों के साथ संयुक्त अभियान चलाने, ज्वाइंट कंट्रोल रूम तथा क्विक रिस्पांस टीम (QRT) स्थापित करने के निर्देश दिए गए.साथ ही स्थैतिक निगरानी दलों के चेक पोस्टों पर वाहनों की गहन तलाशी एवं संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखने का निर्देश दिया गया. भवनों और परिसरों की भी सघन जांच सुनिश्चित की जाएगी ताकि निर्वाचन के दौरान किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि न हो.जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि सभी एजेंसियां ESMS (Expenditure Sensitive Monitoring System) का प्रभावी उपयोग करें तथा जब्ती से संबंधित सभी प्रतिवेदन समय पर एवं स्पष्टता के साथ अपलोड करें.जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने लोगों से कहा है कि 50 हजार से ज्यादा की राशि आपके साथ है तो उसकी जांच होगी.

      बैठक में व्यय प्रेक्षक,श्री अनिल कुमार एवं श्री विनय कुमार कांथेटी सहित विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी, पुलिस प्रशासन, उत्पाद विभाग, सीमा शुल्क, आयकर विभाग सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे.

रविवार, 12 अक्टूबर 2025

बिहार में उभरते क्रिकेटरों में वैभव सूर्यवंशी के अलावे अनेक प्लेयर हैं

 बिहार में उभरते क्रिकेटरों में वैभव सूर्यवंशी के अलावे अनेक प्लेयर हैं

           बिहार क्रिकेट: लगातार गिरावट की कहानी


पटना .बिहार क्रिकेट के प्रशंसकों के लिए ये खबर बेहद निराशाजनक है कि रणजी ट्रॉफी के मौजूदा सीजन में टीम एलीट ग्रुप से बाहर होकर फिर से प्लेट ग्रुप में लौट गई है. कभी उम्मीदों की नई सुबह के साथ रणजी में वापसी करने वाली यह टीम अब लगातार गिरावट का शिकार बनती जा रही है. 2018 में बिहार को रणजी में दोबारा मान्यता मिली थी. प्लेट ग्रुप में शानदार प्रदर्शन कर एलीट ग्रुप तक का सफर तय करने वाली टीम से क्रिकेट प्रेमियों को बड़ी उम्मीदें थीं.

      लेकिन इन सात वर्षों में बिहार क्रिकेट की तस्वीर में सुधार के बजाय गिरावट ही दिखी है. रणजी 2025-26 के पूरे सीजन में भी बिहार किसी तरह एलीट ग्रुप में टिकी रही थी, मगर इस बार केरल के खिलाफ शर्मनाक हार ने उस संभावना को भी खत्म कर दिया. चार दिन के मैच में कुछ ही घंटों में दो बार ऑल आउट होना न केवल तकनीकी कमजोरी को उजागर करता है, बल्कि मानसिक तैयारी और टीम संयोजन की कमी को भी दिखाता है. सात में से पाँच मैच पारी से हराया इस बात का प्रमाण है कि बिहार की रणजी टीम में न बल्लेबाजी का भरोसा है और न गेंदबाजी की निरंतरता.रणजी ट्रॉफी के नए सीजन में बिहार फिर से प्लेट ग्रुप में खेलेगी. जहां उसका सामना अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम जैसी टीमों से होगा.दये मुकाबले बिहार के लिए आत्ममंथन का मौका होंगे.सिर्फ हार-जीत नहीं, बल्कि यह समय है यह समझने का कि क्या बिहार क्रिकेट संरचना में सुधार की जरूरत है, क्या प्रतिभाओं को सही अवसर मिल रहे हैं, और क्या राज्य क्रिकेट संघ में पारदर्शिता व योजना की कमी इस पतन की वजह बन रही है. अब जबकि बिहार 15 अक्टूबर से अपने नए सफर की शुरुआत मोइन-उल-हक स्टेडियम, पटना में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ करेगा, उम्मीद यही की जानी चाहिए कि यह गिरावट का नहीं, बल्कि पुनरुत्थान का आरंभ बने. बिहार क्रिकेट को अब आत्मसम्मान बचाने से आगे बढ़कर एक नई पहचान गढ़नी होगी..

     ऑस्ट्रेलिया  दौरा से वैभव सूर्यवंशी बिहार आ गये हैं.इस समय उनके हाथ से एक बड़ा मौका हाथ से निकल रहा है. वैभव को इस रणजी ट्रॉफी में बिहार टीम की तरफ से खेलने का मौका मिल सकता था, लेकिन बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (ठब्।) में सीनियर सिलेक्शन पैनल में तीन स्लॉट खाली हैं. इन पदों पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने किसी की नियुक्ति नहीं की है. इन पदों पर जब तक ठब्ब्प् नियुक्ति नहीं करती है, तब बिहार की रणजी ट्रॉफी टीम चयन करने के लिए सेलेक्टर्स नहीं मिलेंगे और सेलेक्शन कमेटी में जब तक लोग ही नहीं होंगे, तब तक वैभव सूर्यवंशी को टीम में शामिल नहीं किया जा सकता है.

  वैभव सूर्यवंशी पिछले एक साल से बेहकर फॉर्म में नजर आ रहे हैं. बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी का अगला सीजन 15 अक्टूबर के बाद से शुरू हो रहा है. बीसीए की सेलेक्शन कमेटी में तब तक भर्ती नहीं होती है तो वैभव सूर्यवंशी को इस बार रणजी ट्रॉफी में खेलने का मौका नहीं मिलेगा. वैभव ने अंडर-19 डेब्यू में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच में 62 गेंदों में 104 रन बनाए थे. इसी के साथ वे भारत के लिए टेस्ट में सबसे तेज शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन गए. 14 साल की उम्र में ही वैभव ने आईपीएल 2025 में राजस्थान रॉयल्स के लिए डेब्यू किया और आईपीएल में भी वे 35 गेंदों में सेंचुरी ठोकर सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय खिलाड़ी बन गए.

आलोक कुमार

शनिवार, 11 अक्टूबर 2025

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच मैच खेला गया

गुवाहाटी.भारत और श्रीलंका के द्वारा संयुक्त रूप से महिला वनडे विश्व कप का मेजबानी किया जा रहा है.अब तक 12 मैच खेले जा चुके है.अभी तक चार शतक बनाया गया है.विश्व कप 2025 के पहले वनडे मुकाबले में मेजबान भारत ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल कर ली है. टूर्नामेंट की प्रबल दावेदार मानी जा रही भारतीय टीम के लिए यह मैच काफी अहम था, खासकर इसलिए क्योंकि पहली पारी में टीम एक समय बेहद मुश्किल में थी, जब 124 के स्कोर पर छह विकेट गिर चुके थे. लेकिन इस कठिन परिस्थिति से अमनजोत कौर, स्नेह राणा, और दीप्ति शर्मा ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए टीम को न सिर्फ मजबूत स्कोर तक पहुंचाया, बल्कि गेंदबाजी में भी जीत की नींव रखी.

    महिला वर्ल्ड कप 2025 का दूसरा मैच ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच मैच खेला गया.महिला विश्व कप का दूसरा मुकाबला दर्शकों के लिए यादगार बन गया. महिला विश्व कप का दूसरा मुकाबला दर्शकों के लिए यादगार बन गया. 1 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए इस मैच में बल्लेबाजी का अद्भुत नजारा देखने को मिला. दोनों टीमों की कप्तान और प्रमुख खिलाड़ी शतकों की चमक बिखेरती दिखीं.

     ऑस्ट्रेलिया की एश्ले गार्डनर ने मात्र 83 गेंदों में 115 रन ठोककर अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया.यह पारी न सिर्फ मैच का टर्निंग पॉइंट बनी, बल्कि महिला विश्व कप इतिहास में छठे या उससे निचले क्रम पर बल्लेबाजी करने वाली खिलाड़ी द्वारा खेली गई सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी भी बन गई.गार्डनर की यह विस्फोटक बल्लेबाजी दर्शाती है कि महिला क्रिकेट अब गति और दमखम दोनों में नए मानक स्थापित कर रहा है.

     दूसरी ओर, न्यूजीलैंड की कप्तान सोफी डिवाइन ने भी हार नहीं मानी और 112 रन की शानदार पारी खेली.लेकिन उनके अकेले प्रयास से टीम को जीत नहीं मिल सकी.

   मैच का नतीजा भले ही ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में 89 रन की जीत के रूप में दर्ज हुआ हो, लेकिन इस मुकाबले ने यह साबित किया कि महिला क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा अब उच्चतम स्तर पर है.

एक ही दिन में दो शतक — यह इस विश्व कप के स्तर और रोमांच का प्रतीक है.


आलोक कुमार

शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025

साई सुदर्शन भी नए स्टार बनने जा रहे हैं

 जन्मदिन की अग्रिम बधाई


दिल्ली.भारद्वाज साईं सुदर्शन का जन्म 15 अक्टूबर 2001 को हुआ है.वह एक होनहार भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हैं, जो तमिलनाडु और इंडियन प्रीमियर लीग में गुजरात टाइटन्स के लिए खेलते हैं.उन्होंने दिसंबर 2023 में दक्षिण अफ्रीका दौरे के दौरान भारत की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए अपना एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय (वनडे) पदार्पण किया.

   इसके दो साल के बाद भारद्वाज साईं सुदर्शन ने 20 जून 2025 को इंग्लैंड के खिलाफ अपना टेस्ट मैच में डेब्यू किया.यह तारीख खास है क्योंकि इसी दिन राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और विराट कोहली जैसे दिग्गजों ने भी टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था.

     आपको बता दें कि 20 जून की तारीख को ही साल 1996 में राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली ने एक साथ अपना टेस्ट डेब्यू किया था.ये मैच भी इंग्लैंड के खिलाफ ही खेला गया था.इसके बाद साल 2011 में 20 जून को ही विराट कोहली ने अपना डेब्यू किया था. खास बात ये है कि 20 जून को डेब्यू करने वाले ये तीनों ही खिलाड़ी 100 से ज्यादा टेस्ट खेलने में कामयाब रहे हैं. साथ ही तीनों ने अपने अपने वक्त में भारतीय टीम की कप्तानी भी की है.

     अब देखना है कि साई सुदर्शन किस्मत के कितने धनी आदमी हो सकते हैं. वे पहली बार भारतीय टीम में शामिल ​हुए और पहले ही मैच में उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका भी मिल गया. भारत बनाम इंग्लैंड सीरीज के पहले मैच में जब कप्तान शुभमन गिल टॉस के लिए आए तो उन्होंने ऐलान कर दिया कि साई सुदर्शन इस मैच में डेब्यू कर रहे हैं.

    साई सुदर्शन भी नए स्टार बनने जा रहे हैं.ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। साई सुदर्शन अब तक 29 प्रथम श्रेणी मैच खेलकर उसमें 1957 रन बना चुके हैं। उनका औसत 39.93 का है। साई सुदर्शन ने इस दौरान 7 शतक और 5 अर्धशतक लगाने काम किया है। अब यही आंकड़े उन्हें इंटरनेशनल क्रिकेट में भी दोहराने होंगे.

   जहां तक टेस्ट मैच की बात है.साई सुदर्शन ने अब तक चार टेस्ट मैचों की 7 पारियों में 21 की औसत से 147 रन बनाए हैं. उनके बल्ले से एकमात्र अर्धशतक इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट में आया था.वहां उन्होंने पहली पारी में 60 रन बनाए थे। अब वह वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट में भी बड़ी पारी खेलना चाहेंगे, जिससे कि टेस्ट टीम में उनकी जगह बनी रहे.

वेस्टइंडीज के खिलाफ अहमदाबाद मैच में वह 19 गेंदों में 7 रन बनाकर आउट हो गए थे। इस बीच दूसरे टेस्ट मैच  के बारे में डोएशे ने कहा कि मुझे यकीन है कि सुदर्शन को हमारा पूरा सपोर्ट मिला हुआ है और वह इस बात को जानता है। कप्तान और कोचिंग स्टाफ भी उसे पूरा सपोर्ट करते हैं और हमें लगता है कि वह बहुत जल्द अपना वादा पूरा करेगा.

      दिल्ली में खेले जा रहे वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में सुदर्शन पहली पारी में अच्छा प्रदर्शन करने के दबाव में 87 रन बनाकर पवेलियन चले गए.अब साई सुदर्शन ने पांच टेस्ट मैचों की 8 पारियों में 234 रन बनाए हैं. उनके बल्ले से दो अर्धशतक बना है.एक इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट में आया था.वहां उन्होंने पहली पारी में 60 रन बनाए थे.दूसरी वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में आया.यहां पहली पारी में 87 रन बनाए हैं.


आलोक कुमार


The Configure Featured Post option in Blogger allows you to highlight a selected post prominently on

How to Configure Popular Posts in Blogger The Popular Posts widget highlights your most viewed post