नरकटियागंज स्थित निजी अस्पताल में मरीज की मृत्यु पर जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
नरकटियागंज.नरकटियागंज में बिनु सर्जिकल केयर में पूनम देवी का भर्ती कराया गया.यहां के चिकित्सकों ने पूनम देवी का ऑपरेशन किया.वह दो दिनों तक ठीक थी. तीसरे दिन पूनम देवी की हालत खराब होने लगी.इस हालात को सुधारने के बदले चिकित्सक और कर्मचारी भाग खड़े हुए.इस तरह के ऑपरेशन के बाद मरीज की मौत हो जाने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया.इस बिनु सर्जिकल केयर में पूनम देवी नामक मरीज की मृत्यु पर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है. बिनु सर्जिकल केयर हॉस्पिटल (पूर्व में नीतू सर्जिकल केयर) को प्रशासन ने सील कर दिया है. हॉस्पिटल के कर्ताधर्ताओं पर प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई चल रही है.प्रशासन का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील कर कानून-व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह किया है और अफवाहों पर ध्यान न देने पर जोर दिया.
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला पदाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, श्री धर्मेन्द्र कुमार के निर्देश पर निवेशित पूंजी का गुणांक (MOIC)नरकटियागंज एवं थाना प्रभारी, नरकटियागंज की संयुक्त टीम द्वारा तत्काल कार्रवाई की गई. उक्त निजी अस्पताल को प्रशासनिक नियंत्रण में लेते हुए सील कर दिया गया है.
जिलाधिकारी, श्री धर्मेन्द्र कुमार ने कहा है कि किसी भी स्तर पर यदि चिकित्सकीय लापरवाही या वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित अस्पताल संचालक एवं चिकित्सकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी.जिला प्रशासन नागरिकों से अपील करता है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखें और अफवाहों पर ध्यान न दें। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.
प्रकाश कुमार गुप्ता का कहना है कि सील किया हुआ अस्पताल अगर दोबारा चल रहा है तो इसमें प्रशासन की भूमिका का क्या कहा जा सकता है. District Administration, West Champaran , Bettiah,नरकटियागंज में पहले जीतने सील किए अस्पताल की समय से जांच कराए गए रहते तो आप को
खबर हो कि सभी अस्पताल वर्तमान में अवैध रूप से चल रहे हैं.
यह घटना नरकटियागंज में कोई पहली बार नहीं घटी है आए दिन शहर के विभिन्न गली मोहल्ले में मल्टीप्लेक्स हॉस्पिटल के नाम से खुलता रहता है और उसका उद्घाटन सफेद पोश वाले भी करते हैं और दलालों के चंगुल में फंसकर मजबूर और गरीब लोग इलाज करने जाते हैं जहां मौत बांटा जाता है और स्थानीय शासन प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग मौन रह कर केवल तमाशा देखते हैं और घटना घटने के बाद कागजी प्रक्रिया में जुट जाते है.
आलोक कुमार

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