शुक्रवार, 21 जुलाई 2023

विभिन्न आपराधिक मामलों के राजनीतिकरण

 

नई दिल्ली.मई महीने से हिंसा की आग में जल रहे मणिपुर में बीते दिनों दो महिलाओं के साथ हुई बर्बर घटना ने इंसानियत को शर्मशार किया है. पूरे देश में घटना की निंदा हो रही है, लेकिन राजनीतिक दलों ने पूरे मसले पर सियासी रोटी सेंकना शुरू कर दिया है. इसका उदाहरण संसद के अंदर दिखाई पड़ रहा है. मणिपुर के मसले को उठाते हुए संसद को चलने तक नहीं दिया जा रहा है. केंद्र सरकार की तरफ से बार बार संसद में चर्चा और बहस की बात कही जा रही है, लेकिन विपक्ष लगातार बवाल काटे हुए है.
      इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा कि मणिपुर की घटना निश्चित रूप से बहुत ही गंभीर है और इसकी गंभीरता को समझते हुए प्रधानमंत्री जी ने स्वयं ही इस बात को कहा है कि मणिपुर में जो कुछ भी हुआ है उससे पूरे का पूरा राष्ट्र शर्मसार हुआ है. यहां तक कि मणिपुर की घटनाओं को लेकर कठोर से कठोर कार्यवाही किए जाने की बात प्रधानमंत्री जी ने कही है.
       उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मणिपुर की घटना से मेरा हृदय पीड़ा से भरा है. किसी भी सभ्य समाज के लिए ये शर्मसार करने वाली है. पाप करने वाले कितने हैं, कौन हैं, वो अपनी जगह पर है, लेकिन बेइज़्ज़ती पूरे देश की हो रही है. 140 करोड़ देशवासियों को शर्मसार होना पड़ रहा है. मैं मुख्यमंत्रियों से अपील करता हूं कि वो अपने-अपने राज्यों में क़ानून व्यवस्था मज़बूत करें.
      हम चाहते है कि इस घटना पर संसद में चर्चा हो. मैंने सर्वदलीय बैठक में भी इस बात को कहा है और आज मैं फिर से सदन में दोहराना चाहता हूं कि हम चाहते हैं कि मणिपुर की घटना पर सदन में चर्चा होनी चाहिए.
         मैं देख रहा हूं कि कुछ ऐसे राजनीतिक दल है जो कि अनावश्यक यहां पर ऐसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं ताकि किसी भी सूरत में मणिपुर की घटना पर चर्चा न हो पाए. मैं स्पष्ट रूप से यह आरोप लगाना चाहता हूं कि सचमुच यह प्रतिपक्ष मणिपुर की घटना को लेकर जितना गंभीर होना चाहिए उतना गंभीर नहीं है.
   
बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के उपाध्यक्ष और ईसाई नेता राजन क्लेमेंट साह ने कहा है कि देश में हत्या,लूट,बलात्कार आदि की घटनाओं समेत विभिन्न आपराधिक मामलों के राजनीतिकरण ने मानवीय संवेदनाओं को तार तार कर दिया है. अब पार्टी और विचारधारा के हिसाब से हिंसा एवं अपराध की गंभीरता आंकी जा रही है. निश्चित रूप से मणिपुर की घटना अत्यंत उद्वेलित करने वाली एवं निंदनीय है.
     वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न पंचायत चुनावों के दौरान शुरू हुई हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. राज्य की ममता बनर्जी सरकार के पालतू गुंडों ने समस्त प्रदेश में हिंसा का तांडव मचा रखा है. एक महिला मुख्यमंत्री के शासन में महिलाओं पर हो रहे निरंतर अत्याचार की घटनाओं ने पूरे राष्ट्र को झकझोर कर रख दिया है. भय के कारण राज्य से लोगों का पलायन अत्यंत गंभीर मामला है.

आलोक कुमार

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