शनिवार, 26 अगस्त 2023

बदलाव करने में क्या हर्ज है?

 

बदलाव करने में क्या हर्ज है?


केरल.इस समय केरल में बहुत बवाल चल रहा है.धर्माध्यक्ष और पुरोहित अपने वरिष्ठ अधिकारियों की बात नहीं मान रहे हैं.अपने ही बातों पर अडिग है.एर्नाकुलम -अंगमाली धर्मप्रांत में आज भी पुरोहित बेदी के सामने होकर ही  पूजा करते हैं और उस समय पूजा करते समय पुरोहित का पीठ दर्शकों के सामने रहता है. इसमें बदलाव लाने के लिए रोम से सिरो मालकाना चर्च के एक उच्चस्तरीय दल केरल आया था.उक्त उच्च स्तरीय दल विवाद सलटाने का प्रयास करने लगे परंतु उसमें असफल हो गए और वापस रोम चले गए.

  इस समय एर्नाकुलम -अंगामाली धर्मप्रांत के लोग परंपरागत ढंग से ही मिस्सा करने पर अबादा है.ये लोग सिरो मालकाना चर्च से जुड़े हैं.रोम से सिरो मालकाना चर्च के उच्चस्तरीय दल केरल आया था.विवाद सलटाने के समय विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को बुलाना पड़ा.पुलिस ने एर्नाकुलम -अंगामाली धर्मप्रांत के कुछ पुरोहितों को पकड़ कर बाद में छोड़ दिया.

     निर्णय लेनेवाले सर्वोच्च निकाय, धर्माध्यक्षों की धर्मसभा द्वारा अनुमोदित मिस्सा अनुष्ठान की विधि को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं.धर्मसभा- अनुमोदित ख्रीस्तीयाग के अनुसार पवित्र मिस्सा में यूखरिस्त प्रार्थना के दौरान पुरोहितों (अनुष्ठाता) को वेदी की ओर देखना है.इसको लेकर विवाद हो गया है.

 23 अगस्त को सिरो-मालाबार कलीसिया के एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘एर्नाकुलम-अंगमाली महाधर्मप्रांत के परमधर्मपीठीय प्रतिनिधि, महाधर्माध्यक्ष सिरिल वासिल, मिशन का पहला दौर पूरा करने के बाद रोम लौट गए.‘

 जी अंग्रेजों के कार्यकाल में मिस्सा करते समय पुरोहित वेदी की ओर मुंह करके पूजा किया करते थे.लोकधर्मी यानी जनता को पुरोहित का पीठ ही देखते थे.इसमें परिवर्तन किया गया.इस परिवर्तन से पुरोहित जनता के सामने मुखातिर होकर मिस्सा करने लगे.अब केरल के पुरोहित और लोकधर्मी चाहते हैं कि मिस्सा के दौरान सभी समय पुरोहित विश्वासियों की ओर मुंह करें.यह 1970 से उनकी परंपरा रही है.

 दूसरी ओर एर्नाकुलम-अंगमाली महाधर्मप्रांत के कुछ पुरोहित एवं विश्वासी, पूर्वी रीति की कलीसिया के  बयान में कहा गया है कि स्लोवाकिया के जेसुइट ‘पोप और पूर्वी रीति की कलीसियाओं के लिए गठित धर्मसंघ के अध्यक्ष को, सिरो-मालाबार धर्मसभा-अनुमोदित मिस्सा-बलिदान के समान तरीके को लागू करने में कठिनाइयों के बारे में अपने आकलन से अवगत कराएंगे.‘

 बता दें कि कलीसिया के सभी 34 धर्मप्रांतों ने धर्मसभा-अनुमोदित मिस्सा विधि को लागू किया है.इसका मतलब पुरोहित विश्वासियों की ओर मुंह करके ही मिस्सा करेंगे.इस विधि को एर्नाकुलम-अंगामाली महाधर्मप्रांत में लागू नहीं किया जा रहा है.सिरो-मालाबार कलीसिया में दशकों पुराने विवाद को निपटाने के लिए नियुक्त वाटिकन प्रतिनिधि, अपनी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की स्थिति बिगड़ने के बाद रोम लौट गये हैं.सिरो-मालाबार कलीसिया के प्रमुख, कार्डिनल जॉर्ज एलेनचेरी का धर्मप्रांत, दुनिया भर में कलीसिया के 5 मिलियन काथलिकों के आधे मिलियन अनुयायियों का घर है.

   असंतुष्ट पुरोहितों का कहना है कि महाधर्माध्यक्ष सिरिल वासिल 4 अगस्त को केरल की कलीसिया के पास पहुंचे थे उन्होंने कहा कि उनका काम धर्मसभा-अनुमोदित खीस्तयाग को लागू करना था और किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया.इस बीच 17 अगस्त को धर्माध्यक्ष ने महाधर्मप्रांत के सभी पुरोहितों को 20 अगस्त से धर्मसभा-अनुमोदित सामूहिक प्रार्थना करने का आदेश दिया.उन्होंने उन सभी गिरजाघरों को भी बंद करने का आदेश दिया, जहां विरोध के कारण धर्मसभा-अनुमोदित मिस्सा-बलिदान अर्पित नहीं किया जा सका.महाधर्माध्यक्ष सिरिल वासिल ने उनके आदेश का बचाव करने वाले पुरोहितों को बहिष्कृत करने की भी धमकी दी है.


आलोक कुमार

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