बुधवार, 31 दिसंबर 2025

2025की विदाई : आत्ममंथन, अनुभव और नई उम्मीदों का वर्ष

 


2025की विदाई : आत्ममंथन, अनुभव और नई उम्मीदों का वर्ष

वर्ष 2025 अब विदा लेने की ओर है.यह साल देश, समाज और आम नागरिकों के जीवन में कई अनुभव, चुनौतियाँ और सबक छोड़कर जा रहा है. बीते बारह महीनों में राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विमर्श और आम जनजीवन—हर स्तर पर बदलाव महसूस किए गए.कुछ फैसलों ने उम्मीद जगाई, तो कुछ घटनाओं ने सवाल भी खड़े किए.

सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य

2025 में देश की राजनीति लगातार सक्रिय और चर्चा में रही। सत्ता और विपक्ष के बीच वैचारिक बहसें तेज़ रहीं. महंगाई, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे जनता के केंद्र में रहे. लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन यह वर्ष यह भी याद दिलाता है कि संवाद और संवैधानिक मर्यादा लोकतंत्र की असली ताकत है.

आम नागरिक की चुनौतियाँ

इस वर्ष आम लोगों ने रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे। बढ़ती कीमतें, नौकरी की अनिश्चितता और बदलते आर्थिक हालात ने परिवारों को प्रभावित किया. इसके बावजूद समाज के अलग-अलग वर्गों ने संयम, मेहनत और सहयोग के साथ परिस्थितियों का सामना किया.यही सामाजिक एकजुटता भारत की सबसे बड़ी शक्ति रही.

मीडिया और विमर्श

2025 में मीडिया और सोशल मीडिया की भूमिका भी लगातार चर्चा में रही.सूचना की तेज़ रफ्तार ने जागरूकता बढ़ाई, लेकिन साथ ही जिम्मेदार पत्रकारिता और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की ज़रूरत भी महसूस कराई.यह वर्ष याद दिलाता है कि खबरों के साथ संतुलन और सत्यनिष्ठा कितनी महत्वपूर्ण है.

उम्मीदों की ओर नया वर्ष

2025की विदाई केवल एक कैलेंडर वर्ष का अंत नहीं है, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है. आने वाला नया वर्ष बेहतर संवाद, सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी की उम्मीद लेकर आता है। अगर बीते अनुभवों से सीख लेकर आगे बढ़ा जाए, तो भविष्य अधिक मजबूत और समावेशी हो सकता है।

निष्कर्ष

2026 हमें यह सिखाकर जा रहा है कि चुनौतियाँ अस्थायी होती हैं, लेकिन उम्मीद स्थायी. बदलाव का रास्ता कठिन हो सकता है, पर सामूहिक प्रयास से दिशा बदली जा सकती है.नए वर्ष में यही कामना है कि देश और समाज प्रगति, सद्भाव और विश्वास के मार्ग पर आगे बढ़े.

आलोक कुमार

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वर्ष में राजद की स्थिति – 2025 का विश्लेषण

 वर्ष में राजद की स्थिति – 2025 का विश्लेषण


वर्ष 2025 राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए राजनीतिक सक्रियता, सामाजिक मुद्दों और संगठनात्मक मजबूती के प्रयासों का वर्ष रहा. बिहार की राजनीति में एक प्रमुख विपक्षी दल के रूप में राजद ने इस दौरान अपनी भूमिका को बनाए रखने और जनाधार को मजबूत करने की कोशिश की. हालांकि चुनौतियाँ भी रहीं, लेकिन पार्टी ने अपनी पारंपरिक राजनीति और सामाजिक न्याय के एजेंडे को आगे बढ़ाया.

संगठन और नेतृत्व

2025 में राजद नेतृत्व ने संगठन को सक्रिय रखने पर विशेष ध्यान दिया. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और युवा नेताओं ने जिलों और प्रखंड स्तर तक कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाने का प्रयास किया. संगठनात्मक बैठकों, जनसभाओं और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं में ऊर्जा बनाए रखने की कोशिश की.

सामाजिक न्याय और मुद्दों की राजनीति

राजद ने वर्ष 2025 में सामाजिक न्याय, आरक्षण, पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा-स्वास्थ्य से जुड़े सवालों पर पार्टी ने राज्य और केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की। इन मुद्दों के जरिए राजद ने अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने का प्रयास किया.

विपक्षी भूमिका और राजनीतिक गतिविधियाँ

बिहार की राजनीति में राजद ने एक सक्रिय विपक्षी दल की भूमिका निभाई। विधानसभा के भीतर और बाहर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए. कई मौकों पर जनआंदोलन और धरना-प्रदर्शन के जरिए पार्टी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि राजद जनता की आवाज़ उठाने वाली पार्टी बनी हुई है.

युवा नेतृत्व और भविष्य की तैयारी

2025 में राजद ने युवा नेतृत्व को आगे लाने की दिशा में भी प्रयास किए। युवा नेताओं की सक्रियता सोशल मीडिया और जमीनी राजनीति—दोनों स्तरों पर देखने को मिली.पार्टी ने यह संकेत देने की कोशिश की कि आने वाले समय में वह नए नेतृत्व और नई सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है.

चुनौतियाँ और सीमाएँ

हालांकि वर्ष 2025 में राजद की राजनीतिक मौजूदगी बनी रही, लेकिन संगठनात्मक विस्तार और व्यापक जनसमर्थन हासिल करने में पार्टी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. बदलते राजनीतिक समीकरणों और नई पीढ़ी के मतदाताओं को जोड़ना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहा.

निष्कर्ष

31 दिसंबर को वर्ष 2025 में राजद की स्थिति का मूल्यांकन किया जाए तो यह कहा जा सकता है कि यह साल पार्टी के लिए निरंतर संघर्ष और संतुलन का वर्ष रहा.राजद ने न तो कोई बड़ी राजनीतिक छलांग लगाई और न ही अपनी पकड़ पूरी तरह खोई. आने वाले समय में संगठन की मजबूती, युवा नेतृत्व और प्रभावी जनसंपर्क ही पार्टी की राजनीतिक दिशा तय करेंगे.


आलोक कुमार

मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

नूतन वर्ष 2026 की तैयारियाँ

 


बिहार की राजधानी पटना में जोरशोर से जारी हैं. वर्ष के अंतिम दिनों में शहर का माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया है.नए साल के स्वागत को लेकर खासकर जेन-जी (Gen Z) युवा वर्ग में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. युवा नए और आकर्षक पर्यटन स्थलों की खोज में जुटे हैं, वहीं परिवार भी नए साल की शुरुआत सैर-सपाटे के साथ करने की योजना बना रहे हैं.

पटना मरीन ड्राइव बना पहली पसंद

नववर्ष 2026 के अवसर पर पटना मरीन ड्राइव राजधानीवासियों की पहली पसंद बनकर उभरा है. गंगा नदी के किनारे विकसित यह इलाका अपनी खूबसूरती और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है. सुबह और शाम के समय यहां गंगा का मनमोहक दृश्य लोगों को आकर्षित कर रहा है.युवा वर्ग यहां घूमने, फोटो और वीडियो बनाने के साथ-साथ दोस्तों के साथ समय बिताने की योजना बना रहा है.

पाटलिपुत्र कॉलोनी के तीन बगान में बढ़ी चहल-पहल

राजधानी के पॉश इलाके पाटलिपुत्र कॉलोनी में विकसित किए गए तीन बगान भी नववर्ष के अवसर पर खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.हरियाली, खुले स्थान और शांत वातावरण के कारण यहां परिवारों के आने की संभावना अधिक है। स्थानीय लोगों का मानना है कि नए साल के दिन यहां बड़ी संख्या में लोग पिकनिक और सैर के लिए पहुंचेंगे.

संजय गांधी जैविक उद्यान रहेगा खास केंद्र

पटना का प्रसिद्ध संजय गांधी जैविक उद्यान (चिड़ियाघर) भी नववर्ष 2026 के मौके पर लोगों की प्रमुख पसंद में शामिल है. प्राकृतिक वातावरण, हरियाली और वन्यजीवों के कारण यह स्थान बच्चों और परिवारों के लिए विशेष आकर्षण रखता है.नए साल के अवसर पर यहां भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है.

जेन-जी का उत्साह और सोशल मीडिया ट्रेंड

इस बार नववर्ष 2026 के जश्न में जेन-जी युवाओं की भूमिका अहम मानी जा रही है.युवा वर्ग घूमने के साथ-साथ इन पर्यटन स्थलों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने को लेकर भी उत्साहित है.मरीन ड्राइव और खुले बगान युवाओं के लिए खास ट्रेंडिंग स्पॉट बनते जा रहे हैं.

प्रशासन भी सतर्क

नववर्ष को देखते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम भी अलर्ट मोड में हैं. प्रमुख पर्यटन स्थलों पर साफ-सफाई, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो.

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, नववर्ष 2026 के स्वागत के लिए पटना पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है. मरीन ड्राइव, पाटलिपुत्र कॉलोनी के बगान और संजय गांधी जैविक उद्यान राजधानीवासियों के उत्साह का केंद्र बने हुए हैं. युवा वर्ग से लेकर परिवारों तक, सभी नए साल की शुरुआत खुशियों और यादगार पलों के साथ करने की तैयारी में जुटे हैं.


आलोक कुमार

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वर्ष में बीजेपी की स्थिति – 2025 का विश्लेषण

 


वर्ष में बीजेपी की स्थिति – 2025 का विश्लेषण

वर्ष 2025 भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए सत्ता, संगठन और रणनीति के लिहाज़ से महत्वपूर्ण रहा. केंद्र में सत्ता संभालते हुए पार्टी ने नीतिगत फैसलों, चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक विस्तार पर विशेष ध्यान दिया. हालांकि उपलब्धियों के साथ-साथ कुछ चुनौतियाँ भी पार्टी के सामने रहीं.

सत्ता और नीतिगत फैसले

2025 में केंद्र सरकार ने आर्थिक सुधार, बुनियादी ढाँचे के विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस बनाए रखा. सड़क, रेल, डिजिटल सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाया गया. सरकार के फैसलों ने समर्थकों के बीच भरोसा मजबूत किया, जबकि विपक्ष ने कुछ नीतियों को लेकर सवाल भी उठाए.

संगठन और विस्तार

बीजेपी का संगठनात्मक ढाँचा 2025 में भी मजबूत बना रहा. बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता, सदस्यता अभियान और जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए पार्टी ने अपनी पकड़ बनाए रखी.राज्यों में संगठन को और सशक्त करने की कोशिशें जारी रहीं, जिससे आगामी चुनावों की तैयारी को धार मिली.

चुनावी माहौल और राजनीतिक स्थिति

वर्ष के दौरान हुए कुछ चुनावों और उपचुनावों में बीजेपी का प्रदर्शन कुल मिलाकर प्रभावी रहा. कहीं पार्टी ने सत्ता बनाए रखी, तो कहीं उसे कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा.शहरी और मध्यम वर्ग में पार्टी का समर्थन बना रहा, जबकि कुछ क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों ने चुनौती खड़ी की.

विपक्ष और आलोचना

2025 में विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की. बीजेपी ने इन आलोचनाओं का जवाब विकास कार्यों और योजनाओं के माध्यम से देने का प्रयास किया। राजनीतिक बहसों के बीच पार्टी ने अपनी वैचारिक पहचान को प्रमुखता से सामने रखा.

भविष्य की रणनीति

पार्टी ने युवा मतदाताओं, महिलाओं और नए मतदाताओं को जोड़ने पर ध्यान दिया. डिजिटल मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म के जरिए संवाद को और मजबूत किया गया. आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर रणनीतिक तैयारी दिखाई दी.

निष्कर्ष

30 दिसंबर को वर्ष 2025 में बीजेपी की स्थिति का मूल्यांकन करें तो यह स्पष्ट होता है कि पार्टी ने सत्ता और संगठन दोनों मोर्चों पर अपनी मजबूती बनाए रखी.चुनौतियों के बावजूद बीजेपी ने खुद को एक प्रभावशाली राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित रखा.आने वाले समय में नीतिगत फैसले, जनसंपर्क और संगठनात्मक एकजुटता ही पार्टी की दिशा तय करेंगे.


आलोक कुमार

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सोमवार, 29 दिसंबर 2025

वर्ष में कांग्रेस की स्थिति – 2025 का विश्लेषण


 वर्ष में कांग्रेस की स्थिति – 2025 का विश्लेषण

वर्ष 2025 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए आत्ममंथन और संघर्ष का वर्ष रहा. देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी ने इस दौरान संगठनात्मक मजबूती, जनआंदोलनों और विपक्षी भूमिका को लेकर कई प्रयास किए.हालांकि आंतरिक चुनौतियाँ और सीमित चुनावी सफलता पार्टी के सामने बड़ी परीक्षा बनकर उभरीं.

संगठन और नेतृत्व

2025 में कांग्रेस नेतृत्व ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठा. प्रदेश स्तर पर पुनर्गठन, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जमीनी मुद्दों से जुड़ने की कोशिश की गई. इसके बावजूद नेतृत्व को लेकर स्पष्टता और एकजुटता की कमी कई बार सामने आई, जिससे पार्टी की रणनीति अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा सकी.

चुनावी प्रदर्शन

वर्ष के दौरान हुए कुछ राज्यों और उपचुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन मिला-जुला रहा.कुछ क्षेत्रों में पार्टी ने विपक्ष के रूप में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, जबकि कई स्थानों पर उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया. ग्रामीण और शहरी मतदाताओं के बीच भरोसा दोबारा कायम करना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहा.

मुद्दे और जनसरोकार

महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएँ और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को कांग्रेस ने प्रमुखता से उठाया. संसद के भीतर और बाहर सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए पार्टी ने खुद को एक सक्रिय विपक्ष के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की. कुछ आंदोलनों में भागीदारी ने कांग्रेस को जनसरोकारों से जोड़े रखा.

गठबंधन और विपक्षी राजनीति

2025 में विपक्षी एकता की चर्चा कांग्रेस के लिए अहम विषय रही.क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल और साझा रणनीति बनाने के प्रयास किए गए, लेकिन सभी मोर्चों पर सफलता नहीं मिल सकी.इसके बावजूद कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की एक केंद्रीय ताकत के रूप में अपनी भूमिका बनाए रखने का प्रयास जारी रखा.

युवा और भविष्य की दिशा

पार्टी ने युवाओं को जोड़ने और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी बात रखने पर ध्यान दिया. युवा नेताओं को आगे लाने की कोशिश हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित रहा। भविष्य के लिए कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को मजबूत करना और मतदाताओं का भरोसा दोबारा हासिल करना है.

निष्कर्ष

29 दिसंबर को वर्ष 2025 में कांग्रेस की स्थिति का आकलन करें तो स्पष्ट होता है कि यह साल पार्टी के लिए संघर्ष और आत्मविश्लेषण का रहा. कांग्रेस न तो पूरी तरह कमजोर हुई और न ही कोई बड़ी राजनीतिक छलांग लगा सकी.आने वाले समय में संगठनात्मक मजबूती, स्पष्ट नेतृत्व और प्रभावी जनसंपर्क ही पार्टी की दिशा तय करेंगे.

आलोक कुमार 

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रविवार, 28 दिसंबर 2025

वर्ष 2025 खेल जगत के लिए कई उत्साहजनक

 


वर्ष 2025 खेल जगत के लिए कई उत्साहजनक और यादगार पल लेकर आया. इस साल भारत ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई अहम प्रतियोगिताओं में अपनी छाप छोड़ी. क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स और अन्य खेलों में खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और देशवासियों को गर्व का अनुभव कराया.

1. भारतीय क्रिकेट का प्रदर्शन 2025 में भारतीय क्रिकेट टीम ने T20 और ODI में बेहतरीन प्रदर्शन किया.युवा खिलाड़ियों ने अनुभवी खिलाड़ियों के साथ मिलकर कई रिकॉर्ड तोड़े. घरेलू टूर्नामेंट्स में भी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने अपनी छवि बनाई। महिला क्रिकेट टीम ने भी लगातार जीत हासिल की और देश का मान बढ़ाया.

2. हॉकी और अन्य टीम खेल भारतीय हॉकी टीम ने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में शानदार प्रदर्शन किया. टीम ने आक्रामक और रणनीतिक खेल के माध्यम से कई जीत हासिल की.इसके अलावा बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और फुटबॉल में भी खिलाड़ियों ने उत्साहजनक परिणाम दिए.

 3. एथलेटिक्स और इंडिविजुअल स्पोर्ट्स एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों ने दौड़, फील्ड और मैराथन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया.राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन हुआ। युवा एथलीटों की प्रतिभा ने आने वाले वर्षों के लिए आशा की किरण दिखाई.

4. महिला खेलों की प्रगति महिला खिलाड़ियों ने इस वर्ष महत्वपूर्ण योगदान दिया.क्रिकेट, बॉक्सिंग, बैडमिंटन और अन्य खेलों में उनके प्रदर्शन ने महिलाओं के खेलों को नया उत्साह दिया. महिला खेलों के लिए सरकारी और प्राइवेट पहलें भी बढ़ी, जिससे खेलों में सहभागिता बढ़ी.

5. टैलेंट और युवा खिलाड़ियों की बढ़त युवा खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई. नए खिलाड़ियों की यह ऊर्जा टीम की ताकत को बढ़ाती है और भविष्य के लिए उम्मीद जगाती है। कई युवा खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय टीम में जगह बनाकर आने वाले वर्षों में सफलता की नींव रखी. 

6. खेलों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश सरकार और प्राइवेट सेक्टर ने खेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाया। नए स्टेडियम, प्रशिक्षण केंद्र और खेल अकादमियों का निर्माण हुआ. यह कदम खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएँ और देश के खेलों के विकास में सहायक रहा.

निष्कर्ष: 28 दिसंबर को वर्ष के खेल जगत का आकलन करते हुए कहा जा सकता है कि 2025 भारतीय खेलों के लिए उत्साह और प्रगति का वर्ष रहा. खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और समर्पण से सफलता हासिल की. आने वाले वर्ष में खेलों के लिए नई पहल, युवाओं की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.


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28 दिसंबर: वर्ष में खेल जगत – 2025 का विश्लेषण

28 दिसंबर: वर्ष में खेल जगत – 2025 का विश्लेषण India Sports 2025 Cricket Hockey Football

A detailed overview of India’s sports scenario in 2025, covering cricket, hockey, football, and other major events. Stay updated with Chingari Prime News for insights into athletes’ achievements, tournaments, and sports developments across the country.

वर्ष 2025 खेल जगत के लिए कई उत्साहजनक और यादगार पल लेकर आया। इस साल भारत ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई अहम प्रतियोगिताओं में अपनी छाप छोड़ी। क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स और अन्य खेलों में खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और देशवासियों को गर्व का अनुभव कराया।

1. क्रिकेट

2025 में भारतीय क्रिकेट टीम ने T20 और ODI में बेहतरीन प्रदर्शन किया। युवा खिलाड़ियों ने अनुभवी खिलाड़ियों के साथ मिलकर कई रिकॉर्ड तोड़े। घरेलू टूर्नामेंट्स में भी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने अपनी छवि बनाई। महिला क्रिकेट टीम ने भी लगातार जीत हासिल की और देश का मान बढ़ाया।

2. हॉकी और अन्य टीम खेल

भारतीय हॉकी टीम ने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने आक्रामक और रणनीतिक खेल के माध्यम से कई जीत हासिल की। इसके अलावा बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और फुटबॉल में भी खिलाड़ियों ने उत्साहजनक परिणाम दिए।

3. एथलेटिक्स और इंडिविजुअल स्पोर्ट्स

एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों ने दौड़, फील्ड और मैराथन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन हुआ। युवा एथलीटों की प्रतिभा ने आने वाले वर्षों के लिए आशा की किरण दिखाई।

4. महिला खेलों की प्रगति

महिला खिलाड़ियों ने इस वर्ष महत्वपूर्ण योगदान दिया। क्रिकेट, बॉक्सिंग, बैडमिंटन और अन्य खेलों में उनके प्रदर्शन ने महिलाओं के खेलों को नया उत्साह दिया। महिला खेलों के लिए सरकारी और निजी पहलें भी बढ़ीं, जिससे खेलों में सहभागिता में वृद्धि हुई।

5. टैलेंट और युवा खिलाड़ियों की बढ़त

युवा खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। नए खिलाड़ियों की यह ऊर्जा टीम की ताकत को बढ़ाती है और भविष्य के लिए उम्मीद जगाती है। कई युवा खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय टीम में जगह बनाकर आने वाले वर्षों में सफलता की नींव रखी।

6. खेलों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश

सरकार और निजी क्षेत्र ने खेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाया। नए स्टेडियम, प्रशिक्षण केंद्र और खेल अकादमियों का निर्माण हुआ। यह कदम खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने और देश के खेलों के विकास में सहायक सिद्ध हुआ।

निष्कर्ष

28 दिसंबर को वर्ष के खेल जगत का आकलन करते हुए कहा जा सकता है कि 2025 भारतीय खेलों के लिए उत्साह और प्रगति का वर्ष रहा। खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और समर्पण से सफलता हासिल की। आने वाले वर्ष में खेलों के लिए नई पहल, युवाओं की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है।

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शनिवार, 27 दिसंबर 2025

आर्थिक स्थिति – 2025 का विश्लेषण

 


आर्थिक स्थिति – 2025 का विश्लेषण

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An in-depth look at India’s economic scenario in 2025, analyzing growth,
inflation, employment, agriculture, and industry trends. Stay informed
with Chingari Prime News for accurate insights on current affairs,
government policies, and financial developments affecting both
rural and urban India.

वर्ष 2025 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा।

वैश्विक अनिश्चितताओं, महंगाई के दबाव, भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू नीतिगत फैसलों के बीच देश की आर्थिक स्थिति ने संतुलन बनाए रखने की कोशिश की। साल के अंत में जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि यह वर्ष चुनौतियों के साथ-साथ अवसरों का भी रहा।


1. आर्थिक विकास

वर्ष 2025 में भारत की आर्थिक वृद्धि मध्यम लेकिन स्थिर रही। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र ने GDP को सहारा दिया। वैश्विक मंदी के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था ने संतुलन बनाए रखा।

2. महंगाई और आम आदमी

खाद्य पदार्थों, दाल, सब्ज़ी और पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आम आदमी के बजट पर असर डालते रहे। सरकार और RBI के प्रयासों से महंगाई कुछ हद तक नियंत्रित हुई, लेकिन घरेलू क्रय शक्ति पूरी तरह वापस नहीं आई।

3. मौद्रिक नीति और बैंकिंग

RBI ने ब्याज दरों को संतुलित रखा, जिससे उद्योगों को राहत मिली और ऋण लेने वालों का बोझ कम हुआ। बैंकिंग सेक्टर में सुधार और एनपीए स्तर में कमी देखी गई।

4. कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

मौसमी अनिश्चितताओं के कारण कृषि क्षेत्र पर असर पड़ा। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और फसल बीमा योजनाओं के माध्यम से सरकार ने किसानों को समर्थन दिया। ग्रामीण आय में वृद्धि अपेक्षित स्तर तक नहीं हुई।

5. उद्योग और रोजगार

‘मेक इन इंडिया’ और ‘पीएलआई योजना’ के कारण विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ा। स्टार्टअप और छोटे उद्योगों को चुनौतियाँ रहीं, लेकिन रोजगार के कुछ अवसर पैदा हुए।

6. वैश्विक प्रभाव और भारत

तेल की कीमतें, अमेरिका-चीन संबंध और अन्य वैश्विक संकेत भारत की निर्यात और वित्तीय स्थिति को प्रभावित करते रहे। घरेलू मांग ने अर्थव्यवस्था को संतुलित रखा।


निष्कर्ष
27 दिसंबर को वर्ष की आर्थिक स्थिति का आकलन करते हुए यह कहा जा सकता है कि 2025 एक संतुलन का वर्ष रहा। न तो बड़ी छलांग, न ही बड़ी गिरावट—बल्कि स्थिरता और संभलकर आगे बढ़ने का प्रयास। आने वाले वर्ष में रोजगार सृजन, महंगाई नियंत्रण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और निवेश का माहौल सुधारना मुख्य चुनौतियाँ होंगी।


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शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025

साल के समापन पर वर्ष में राजनीति

 साल के समापन पर वर्ष में राजनीति

पटना.साल 2025 भारतीय राजनीति के लिए उथल-पुथल, बड़े फैसलों और निरंतर चुनावी गतिविधियों का वर्ष रहा। राष्ट्रीय राजनीति से लेकर राज्यों तक, सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे टकराव, गठबंधनों की नई परिभाषाएं और जन मुद्दों को लेकर संघर्ष लगातार देखने को मिला. वर्ष के समापन पर यह जरूरी हो जाता है कि पूरे साल की राजनीतिक घटनाओं और रुझानों का समग्र विश्लेषण किया जाए.

राष्ट्रीय राजनीति: बड़े फैसलों का साल

केंद्र की राजनीति में वर्ष 2025 कई अहम नीतिगत निर्णयों के लिए याद किया जाएगा.सरकार ने आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं को प्राथमिकता देते हुए कई फैसले लिए.संसद में बहसों का स्तर तीखा रहा। कई विधेयकों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबी बहस हुई, वहीं कुछ मामलों में विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी का आरोप लगाया.विदेश नीति के मोर्चे पर भी सरकार सक्रिय दिखी. पड़ोसी देशों से संबंध, वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका और रणनीतिक साझेदारियों को लेकर सालभर राजनीतिक बयानबाजी होती रही.

विपक्ष की भूमिका: एकजुटता की कोशिश

वर्ष 2025 में विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास किया। महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता जैसे मुद्दे संसद से लेकर सड़क तक उठाए गए.हालांकि, विपक्ष की सबसे बड़ी चुनौती आपसी एकजुटता रही. कुछ राज्यों में विपक्षी दलों ने साझा मोर्चा बनाकर सरकार को कड़ी टक्कर दी, तो कहीं आंतरिक मतभेद सामने आए। इसके बावजूद, साल के अंत तक विपक्ष ने यह संकेत जरूर दिया कि आगामी चुनावों को देखते हुए साझा रणनीति पर काम किया जाएगा.

राज्य राजनीति: चुनावी गर्मी चरम पर

राज्यों की राजनीति में यह साल चुनावी सरगर्मी से भरा रहा। कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, जहां सत्ता परिवर्तन, गठबंधन सरकारों का गठन और मजबूत जनादेश जैसी तस्वीरें उभरीं.राज्य सरकारों के प्रदर्शन पर जनता की नजर रही। कहीं विकास कार्यों को लेकर सरकारों की सराहना हुई, तो कहीं कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं पर तीखा जन असंतोष दिखा.बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों में राजनीतिक घटनाक्रम राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बने रहे.

चुनावी संकेत और जनमत

वर्ष 2025 में हुए उपचुनावों और विधानसभा चुनावों ने आने वाले बड़े चुनावों के संकेत दे दिए. मतदाताओं का रुझान साफ तौर पर मुद्दा आधारित राजनीति की ओर जाता दिखा। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे सवालों पर जनता ने राजनीतिक दलों से स्पष्ट जवाब मांगे.सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म राजनीति के अहम हथियार बनकर उभरे.चुनाव प्रचार से लेकर जनमत निर्माण तक, डिजिटल राजनीति का प्रभाव पहले से कहीं अधिक दिखाई दिया.

सत्ता बनाम विपक्ष: लोकतंत्र की कसौटी

पूरे साल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लोकतंत्र की कसौटी साबित हुआ। संसद के भीतर हंगामे, कार्यवाही का बाधित होना और बहिष्कार जैसी घटनाएं बार-बार सामने आईं। वहीं, सरकार का तर्क रहा कि वह जनादेश के आधार पर फैसले ले रही है.इस खींचतान के बीच न्यायपालिका, चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका भी चर्चा में रही। कई फैसलों और टिप्पणियों ने राजनीतिक विमर्श को नई दिशा दी.

जन आंदोलनों और सामाजिक राजनीति

साल 2025 में सामाजिक मुद्दों पर आधारित आंदोलनों ने भी राजनीति को प्रभावित किया। किसानों, युवाओं, कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों की मांगें राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनीं.इन आंदोलनों ने यह स्पष्ट किया कि राजनीति केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनसरोकारों से सीधा जुड़ाव उसकी सबसे बड़ी कसौटी है.

निष्कर्ष: बदलाव के संकेतों वाला वर्ष

कुल मिलाकर, वर्ष 2025 की राजनीति बदलाव के संकेतों से भरी रही. सत्ता ने अपनी नीतियों और फैसलों के जरिए मजबूत पकड़ बनाए रखने की कोशिश की, जबकि विपक्ष ने जन मुद्दों के सहारे खुद को पुनर्गठित करने का प्रयास किया.साल के समापन पर यह स्पष्ट है कि आने वाला समय राजनीति के लिए और भी चुनौतीपूर्ण होने वाला है। जन अपेक्षाएं बढ़ रही हैं और राजनीतिक दलों के सामने विश्वास बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी है.26 दिसंबर को वर्ष में राजनीति की यह समीक्षा न केवल बीते साल की तस्वीर पेश करती है, बल्कि भविष्य की राजनीतिक दिशा की झलक भी देती है.

आलोक कुमार

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गुरुवार, 25 दिसंबर 2025

साल के समापन पर विशेष श्रृंखला


साल के समापन पर विशेष श्रृंखला

वर्ष के समापन अवसर पर पाठकों के लिए 26 दिसंबर से 31 दिसंबर तक एक विशेष श्रृंखला प्रस्तुत की जा रही है। इस श्रृंखला के अंतर्गत हर दिन एक प्रमुख विषय पर वर्षभर की घटनाओं, उपलब्धियों और परिस्थितियों का विश्लेषणात्मक आकलन किया जाएगा।


श्रृंखला का कार्यक्रम इस प्रकार है—
🔹 26 दिसंबर : वर्ष में राजनीति
🔹 27 दिसंबर : वर्ष में आर्थिक स्थिति
🔹 28 दिसंबर : वर्ष में खेल जगत
🔹 29 दिसंबर : वर्ष में कांग्रेस की स्थिति
🔹 30 दिसंबर : वर्ष में बीजेपी की स्थिति
🔹 31 दिसंबर : वर्ष में राजद की स्थिति

नववर्ष 2026 के स्वागत को लेकर लोगों की तैयारियों और पर्यटन स्थलों की रौनक पर भी विशेष प्रस्तुति दी जाएगी।

पाठक इस विशेष श्रृंखला से जुड़े रहें.


आलोक कुमार

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वैश्विक क्रिसमस धूमधाम से संपन्न

 वैश्विक क्रिसमस धूमधाम से संपन्न


पटना. प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला वैश्विक क्रिसमस पर्व श्रद्धा, उल्लास और भाईचारे के संदेश के साथ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया. इस अवसर पर दुनिया भर के चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं, पवित्र मिस्सा और मध्यरात्रि आराधनाएं आयोजित की गईं. ईसाई समुदाय ने बड़ी संख्या में चर्च पहुंचकर प्रभु यीशु के जन्म का स्मरण किया और मानवता, प्रेम व शांति का संकल्प लिया.

क्रिसमस मास के दौरान पुरोहितों ने पवित्र मिस्सा संपन्न कराई और श्रद्धालुओं के बीच परमप्रसाद का वितरण किया। मिस्सा के बाद लोगों ने एक-दूसरे को विभिन्न भाषाओं और परंपराओं में शुभकामनाएं दीं. झारखंडी अभिवादन में “खुश जनम पर्व”, हिंदी में “बड़ा दिन मुबारक हो” और अंग्रेज़ी में “हैप्पी मैरी क्रिसमस” कहकर लोगों ने आपसी सौहार्द का परिचय दिया.

चर्च परिसरों को आकर्षक रोशनी, क्रिसमस ट्री और जन्म-झांकियों से सजाया गया था। भजन-कीर्तन और कैरोल गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही, जिससे पर्व शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ.

मिस्सा के उपरांत लोग अपने घरों को लौटे, जहां परिवार के साथ केक काटकर खुशी मनाई गई। घरों में पारंपरिक व्यंजन—ठेकुआ, नीमकी और पूरी—बनाए गए और परिजनों के साथ अल्पाहार किया गया. इस तरह वैश्विक क्रिसमस प्रेम, विश्वास और आपसी सद्भाव के संदेश के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ.

आलोक कुमार

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बुधवार, 24 दिसंबर 2025

क्रिसमस की तैयारियों को अंतिम रूप: अर्धरात्रि में चर्च जाएंगे ईसाई समुदाय


 क्रिसमस की तैयारियों को अंतिम रूप: अर्धरात्रि में चर्च जाएंगे ईसाई समुदाय, देशभर में उत्सव का माहौल

नई दिल्ली/पटना/कोलकाता, 24 दिसंबर 2025.

पूरे देश में क्रिसमस पर्व को लेकर उत्साह अपने चरम पर है. 25 दिसंबर को मनाए जाने वाले ईसा मसीह के जन्मोत्सव से पहले, 24 दिसंबर की शाम से ही ईसाई समुदाय द्वारा विशेष तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं. परंपरा के अनुसार, क्रिसमस की अर्धरात्रि में विशेष प्रार्थना सभा (मिडनाइट मास) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु चर्च पहुंचेंगे.                                                                                                                                     दिल्ली, पटना और कोलकाता समेत देश के प्रमुख शहरों में चर्चों को आकर्षक रोशनी, फूलों और क्रिसमस ट्री से सजाया गया है.ईसाई समुदाय के लोग अपने-अपने घरों में भी सजावट कर रहे हैं और पारंपरिक व्यंजनों की तैयारी में जुटे हैं। बाजारों में क्रिसमस केक, सजावटी सामान और उपहारों की अच्छी बिक्री देखी जा रही है.

दिल्ली महाधर्मप्रांत के अधीन चर्चों में विशेष आयोजन                                                                                          राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिल्ली महाधर्मप्रांत के अधीन आने वाले सभी प्रमुख चर्चों में क्रिसमस की विशेष तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं. सेंट्रल दिल्ली, साउथ दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में स्थित चर्चों में 24 दिसंबर की रात को मिडनाइट मास आयोजित की जाएगी. चर्च प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं.                                                                                                                                               दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने भी चर्चों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है.बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए ट्रैफिक और पार्किंग को लेकर भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.

पटना महाधर्मप्रांत में श्रद्धा और उल्लास                                                                                                            बिहार की राजधानी पटना में भी क्रिसमस को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है.पटना महाधर्मप्रांत के अंतर्गत आने वाले चर्चों में प्रार्थना सभाओं की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं.चर्चों में बच्चों द्वारा कैरोल सिंगिंग का अभ्यास किया जा रहा है, वहीं युवा वर्ग स्वयंसेवक के रूप में व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहा है.                                                    पटना के कई इलाकों में गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन और उपहार वितरण की भी योजना बनाई गई है.ईसाई समुदाय के नेताओं ने बताया कि क्रिसमस केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा और मानवता का संदेश देने का पर्व है.

कोलकाता महाधर्मप्रांत में विशेष उत्सव

                                                                                                                                                          कोलकाता, जिसे क्रिसमस का प्रमुख केंद्र माना जाता है, वहाँ भी उत्सव का माहौल साफ दिखाई दे रहा है.कोलकाता महाधर्मप्रांत के अधीन चर्चों में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है. सेंट पॉल्स कैथेड्रल और अन्य ऐतिहासिक चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया जाएगा.                                                             पार्क स्ट्रीट और आसपास के इलाकों में सजावट और रोशनी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. स्थानीय प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं.

शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश                                                                                                                                  धार्मिक नेताओं ने क्रिसमस के अवसर पर शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को एक-दूसरे के प्रति सम्मान, करुणा और सहयोग की सबसे अधिक आवश्यकता है. क्रिसमस पर्व लोगों को आपसी भेदभाव भुलाकर एक साथ आने की प्रेरणा देता है.

प्रशासन की अपील प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे चर्च जाते समय नियमों का पालन करें, सुरक्षा निर्देशों का ध्यान रखें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें. साथ ही, ठंड के मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है.

निष्कर्ष:                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                         24 दिसंबर की रात देशभर में ईसाई समुदाय आस्था और उल्लास के साथ चर्चों में एकत्र होकर क्रिसमस पर्व का स्वागत करेगा.यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि समाज में शांति, प्रेम और सौहार्द का संदेश भी देता है.


आलोक कुमार

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मंगलवार, 23 दिसंबर 2025

कड़ाके की ठंड का कहर जारी

 कड़ाके की ठंड का कहर जारी: उत्तर भारत में तापमान गिरा, शीतलहर से जनजीवन प्रभावित

नई दिल्ली, 23 दिसंबर 2025.उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का सिलसिला लगातार जारी है. दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया है. ठंडी हवाओं और शीतलहर के कारण सुबह और रात के समय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने की चेतावनी जारी की है.                                                     दिल्ली में मंगलवार सुबह ठंडी हवाओं के साथ दिन की शुरुआत हुई. न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को अलाव और हीटर का सहारा लेना पड़ा. सड़कों पर सुबह-सुबह कम चहल-पहल देखने को मिली. ठंड का असर खासतौर पर दिहाड़ी मजदूरों, बुजुर्गों और बच्चों पर अधिक दिखाई दे रहा है.

शीतलहर से बढ़ी मुश्किलें

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के कारण शीतलहर की स्थिति बनी हुई है.कई इलाकों में हवा की रफ्तार तेज़ होने से ठंड और ज्यादा महसूस की जा रही है। रात के समय तापमान और गिरने की आशंका है, जिससे खुले में रहने वाले लोगों के लिए स्थिति और कठिन हो सकती है.                                                                    राज्य सरकारों और जिला प्रशासन ने रैन बसेरों की संख्या बढ़ाने और जरूरतमंदों को कंबल वितरित करने के निर्देश दिए हैं। कई सामाजिक संगठन भी सड़कों पर जरूरतमंदों को गर्म कपड़े और भोजन उपलब्ध करा रहे हैं।

यातायात और दैनिक जीवन पर असर

ठंड और कोहरे के संयुक्त असर से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है.सुबह के समय सड़कों पर दृश्यता कम रहने के कारण वाहन चालकों को धीमी गति से चलना पड़ रहा है.कुछ जगहों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति भी देखने को मिली.                                                                                                                                                                  रेलवे और हवाई सेवाओं पर भी हल्का असर पड़ा है। कुछ ट्रेनों और उड़ानों में देरी दर्ज की गई, जिससे यात्रियों को परेशानी हुई। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अत्यधिक आवश्यक न हो तो सुबह जल्दी यात्रा से बचें।

स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा

ठंड के साथ-साथ बढ़ते प्रदूषण ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को भी बढ़ा दिया है. डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में सर्दी, खांसी, बुखार और सांस से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं. खासकर अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.                                                                                             स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को गर्म कपड़े पहनने, ठंडे पेय पदार्थों से बचने और पर्याप्त मात्रा में गर्म तरल पदार्थ लेने की सलाह दी है. सुबह-शाम खुले में व्यायाम करने से भी बचने को कहा गया है.

खेती और बाजार पर असर

कड़ाके की ठंड का असर खेती पर भी पड़ रहा है.कुछ इलाकों में फसलों पर पाले का खतरा बढ़ गया है.किसान फसलों को बचाने के लिए सिंचाई और अन्य उपाय कर रहे हैं.सब्जियों की आपूर्ति पर भी ठंड का असर देखा जा रहा है, जिससे कुछ जगहों पर दामों में बढ़ोतरी हुई है.                                                                                                  वहीं, बाजारों में भी ठंड के कारण ग्राहकों की संख्या में कमी आई है.खासकर सुबह और देर शाम के समय बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है. छोटे दुकानदारों का कहना है कि ठंड की वजह से बिक्री प्रभावित हो रही है.

मौसम विभाग का अनुमान

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप बना रहेगा. न्यूनतम तापमान में और गिरावट आ सकती है. कुछ राज्यों में शीतलहर की स्थिति जारी रहने की संभावना है. जनवरी की शुरुआत में ही मौसम में कुछ बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है.

लोगों के लिए सावधानी

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से ठंड से बचाव के लिए सभी जरूरी कदम उठाने की अपील की है। गर्म कपड़े पहनें, अलाव या हीटर का सुरक्षित तरीके से उपयोग करें और जरूरतमंदों की मदद करें। वाहन चलाते समय सतर्क रहें और मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान दें.

निष्कर्ष:

उत्तर भारत में जारी कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है.ऐसे में सावधानी, सतर्कता और आपसी सहयोग से ही इस मौसम की चुनौती का सामना किया जा सकता है.

आलोक कुमार

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सोमवार, 22 दिसंबर 2025

घने कोहरे और ठंड की मार

घने कोहरे और ठंड की मार: उत्तर भारत में जनजीवन अस्त-व्यस्त, यातायात और कारोबार पर असर


नई दिल्ली.उत्तर भारत इन दिनों भीषण ठंड और घने कोहरे की चपेट में है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और बिहार के कई इलाकों में सुबह और देर रात घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ यातायात और व्यापार पर भी व्यापक असर पड़ा है। मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों तक ठंड और कोहरे से राहत मिलने की संभावना कम जताई है.

दिल्ली और आसपास के इलाकों में दृश्यता बेहद कम दर्ज की जा रही है.कई स्थानों पर विजिबिलिटी 50 मीटर से भी नीचे चली गई, जिसके कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार काफी धीमी रही. ऑफिस जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी ठंड चुनौती बनी हुई है.

हवाई, रेल और सड़क यातायात प्रभावित

घने कोहरे का सबसे अधिक असर हवाई और रेल यातायात पर देखने को मिला। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कई उड़ानों में देरी हुई, जबकि कुछ उड़ानों को री-शेड्यूल भी करना पड़ा. यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जिससे एयरपोर्ट पर भीड़ बढ़ी.

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, उत्तर भारत से गुजरने वाली कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं.कुछ ट्रेनों को एहतियातन रोकना पड़ा, ताकि किसी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके. वहीं, राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। ट्रैफिक पुलिस ने चालकों से सावधानी बरतने और धीमी गति से वाहन चलाने की अपील की है.

वायु गुणवत्ता भी खराब

कोहरे के साथ-साथ प्रदूषण ने भी चिंता बढ़ा दी है.दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया. विशेषज्ञों का कहना है कि ठंडी हवा और कम हवा की गति के कारण प्रदूषक कण वातावरण में ही फंसे रहते हैं, जिससे सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

    डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है. मास्क का उपयोग करने और गर्म कपड़े पहनने पर जोर दिया जा रहा है.

किसानों और कारोबार पर असर

मौसम की मार का असर खेती और व्यापार पर भी पड़ रहा है.कई राज्यों में सब्जियों की आवक प्रभावित हुई है, जिससे बाजार में दामों में हल्की बढ़ोतरी देखी जा रही है.कोहरे के कारण फसलों में नमी बढ़ने से किसानों को नुकसान की आशंका सता रही है.

   वहीं, छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों का कहना है कि ठंड और कोहरे के कारण ग्राहकों की संख्या कम हो गई है.सुबह और देर रात के समय बाजारों में रौनक घट गई है, जिससे रोज़मर्रा की कमाई प्रभावित हो रही है.

मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 48 से 72 घंटों तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में घना कोहरा बना रह सकता है. न्यूनतम तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।.कुछ इलाकों में शीतलहर चलने की चेतावनी भी जारी की गई है.

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर रहने के कारण फिलहाल ठंड से राहत मिलने की उम्मीद कम है. जनवरी की शुरुआत में ही मौसम में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है.

लोगों के लिए सलाह

प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है.वाहन चलाते समय फॉग लाइट का उपयोग करें, पर्याप्त दूरी बनाए रखें और जरूरत न हो तो सुबह जल्दी यात्रा से बचें।.ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनें और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें.

निष्कर्ष:

घना कोहरा और बढ़ती ठंड उत्तर भारत के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. जनजीवन, यातायात और अर्थव्यवस्था सभी पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है. ऐसे में सावधानी और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है.

आलोक कुमार


 

रविवार, 21 दिसंबर 2025

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घना कोहरा, मौसम की मार और भारत का आर्थिक जलवा

घना कोहरा, मौसम की मार और भारत का आर्थिक जलवा

नई दिल्ली. उत्तर भारत में बेहद घने कोहरे के कारण जनजीवन और यातायात दोनों प्रभावित रहे। राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में सुबह‑सुबह दृश्यता बहुत कम रही, जिससे रेल, सड़क और हवाई यात्रा में भारी बाधाएँ आईं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए नागरिकों से अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा है.

आईआरसीटीसी और रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कोहरे के कारण कई ट्रेनें देर से चल रहीं हैं और कुछ को रद्द भी करना पड़ा है। सुबह और रात के समय दृश्यता इतनी कम थी कि यात्रियों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। दिल्ली‑एनसीआर में रेल सेवाओं में देरी की खबरें लगातार आ रही हैं.

फिर भी, मौसम की वजह से केवल यातायात ही प्रभावित नहीं हुआ – दिल्ली‑एनसीआर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) भी बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि कोहरे के साथ भारी कचरे का धुआँ जमा होने से प्रदूषण और भी गंभीर हो रहा है.

आलोक कुमार

शनिवार, 20 दिसंबर 2025

बिहार की आम जनता आज भी कांग्रेस की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही

 

बिहार की आम जनता आज भी कांग्रेस की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही 

बिहार में चुनाव हो गया.महागठबंधन की करारी हार हो गई.फिर से एनडीए सरकार सत्ता में आ गयी है.अब बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के द्वारा प्रवक्ताओं और पैनलिस्ट को जगाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की अध्यक्षता में प्रवक्ताओं और पैनलिस्ट की अहम बैठक. की गई.इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने प्रदेश प्रवक्ताओं और पैनलिस्ट को आवश्यक सुझाव दिया....


पटना. बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद एक बार फिर राज्य में एनडीए की सरकार सत्ता में आ गई है.इस बदले राजनीतिक परिदृश्य में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संगठन को सक्रिय और धारदार बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए प्रवक्ताओं एवं पैनलिस्टों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की. यह बैठक प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई. बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों को पार्टी की नीतियों, विचारधारा और आगामी नीतियों के अनुरूप मीडिया में पक्ष रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.

       राजेश राम ने कहा कि बिहार की आम जनता आज भी कांग्रेस की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है.उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष ने वोटों की चोरी और झूठे वादों के सहारे सत्ता हासिल की है और अब रोज़ जनता की उम्मीदों को कुचलने का काम कर रहा है. ऐसे में कांग्रेस प्रवक्ताओं का कर्तव्य है कि वे जनता की आशाओं और आकांक्षाओं को मजबूती से आवाज़ दें तथा जनहित के मुद्दों पर जिम्मेदारी के साथ खड़े होकर लोकतंत्र को मजबूत करें.उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मीडिया में पार्टी के पक्ष को सकारात्मक, तथ्यपरक और नेतृत्व की योजनाओं के अनुरूप रखा जाए

   इसके अलावा, आज सभी फ्रंटल संगठनों, मोर्चों और मंचों की भी बैठक सम्पन्न हुई। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष ने सभी फ्रंटल अध्यक्षों को संगठन की मजबूती और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए. बैठक में प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, सोशल मीडिया चेयरमैन सौरभ सिन्हा, प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक प्रतिमा दास, अमित कुमार टुन्ना, डॉ. स्नेहाशीष वर्धन पाण्डेय, शिशिर कौंडिल्य, असित नाथ तिवारी, रूपम यादव, पंकज यादव, संजीव कर्मवीर, डॉ. हसनैन कैसर सहित अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे.


आलोक कुमार

शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025

कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की

 खगड़िया जिला से विभिन्न दलों के नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की

पटना . आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम की उपस्थिति में खगड़िया जिले के राजद के पूर्व जिलाध्यक्ष कुमार रंजन, राजद के मौजूदा प्रखंड अध्यक्ष  संजय कुशवाहा समेत सैकड़ों की संख्या में विभिन्न दलों से जुड़े नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पार्टी की विचारधारा में आस्था व्यक्त करते हुए
कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की.

      कांग्रेस पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं में जदयू व्यवसायिक प्रकोष्ठ के प्रखंड अध्यक्ष  सह पंचायत समिति चौथम गोविंद कुमार, पंचायत समिति सदस्य चौथम सुमन कुमार चौरसिया .जदयू नेता सन्नी गुप्ता, पैक्स अध्यक्ष निखिल कुमार, पूर्व मुखिया रामाकांत दास, स्वराज इंडिया के संयोजक संजय गुप्ता, वार्ड पार्षद आकाश राज पासवान, स्वराज इंडिया के अभिमन्यु साह, राजद के पूर्व मुखिया रमाकांत दास, राजद के पूर्व वार्ड सचिव कैलाश कुमार तांती, संजय कुमार गुप्ता, पवन कुमार चौरसिया, अजमत अली, आशुतोष सक्सेना, रामानुज ठाकुर, संजीत कुमार, राज कुमार, अभिमन्यु कुमार, संजय कुमार, मुस्तकीम, मो0 सोहिल, आकाश राज, शाहबुद्दीन,राहुल चन्द्र सिंह, , वीआईपी नेता बेलदौर राजेश कुमार महतो, मनोज पासवान, सिन्टू यादव प्रमुख रहे.

    इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने पार्टी में शामिल सभी  साथियों का कांग्रेस परिवार में स्वागत करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी सामाजिक न्याय, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करती रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि खगड़िया से जुड़े ये सभी साथी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

     राजेश राम ने कहा कि आज देश और राज्य में जिस तरह लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है, ऐसे समय में कांग्रेस की विचारधारा और भी प्रासंगिक हो गई है.जनता के अधिकारों, किसानों, मजदूरों, युवाओं और वंचित वर्गों की आवाज़ को मजबूती से उठाने का कार्य कांग्रेस ही कर सकती है.

    कांग्रेस पार्टी में शामिल नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेतृत्व में विश्वास जताते हुए कहा कि वे पार्टी की नीतियों एवं कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने और संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे.

  इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव डॉ चंदन यादव, बेलदौर के कांग्रेस प्रत्याशी मिथिलेश कुमार निषाद , प्रवक्ता असित नाथ तिवारी,  खगड़िया जिला अध्यक्ष अविनाश कुमार अविनाश, रंजीत कुमार  सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित रहे.


आलोक कुमार

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गुरुवार, 18 दिसंबर 2025

ईशान किशन की टी20 बल्लेबाजी

 


ईशान किशन की टी20 बल्लेबाजी

पटना . एक आक्रामक प्रतिभा का उदय भारतीय क्रिकेट के युवा सितारों में ईशान किशन का नाम हमेशा आक्रामकता और विस्फोटक बल्लेबाजी का पर्याय रहा है. बाएं हाथ के इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने घरेलू टी20 क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी है, जहां उन्होंने अब तक कुल छह शतक ठोके हैं.यह आंकड़ा न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा को रेखांकित करता है, बल्कि टी20 प्रारूप में भारतीय बल्लेबाजों की बढ़ती गहराई को भी दर्शाता है.सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (SMAT) 2025-26 के फाइनल में हरियाणा के खिलाफ ईशान की 49 गेंदों में 101 रनों की पारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों वे घरेलू सर्किट के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में शुमार हैं.

      मात्र 45 गेंदों में शतक पूरा करने के साथ उन्होंने टूर्नामेंट में अपना पांचवां शतक जड़ा, जिससे अभिषेक शर्मा के रिकॉर्ड की बराबरी की. यह ईशान का करियर का छठा टी20 शतक था, जो मुख्य रूप से घरेलू टी20 और आईपीएल जैसे प्लेटफॉर्म पर आए हैं.ईशान की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वे एक विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में पांच शतक लगा चुके हैं – भारतीय क्रिकेट में संजू सैमसन (चार शतक) से आगे निकलकर वे इस सूची में अकेले शीर्ष पर हैं. कप्तान के रूप में भी उनकी तीन शतकीय पारियां विश्व रिकॉर्ड हैं, जो एडम गिलक्रिस्ट और मोहम्मद रिजवान जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ती हैं. SMAT 2025 में उनकी कप्तानी में झारखंड की टीम ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया, और फाइनल में भी उनका योगदान टीम के लिए निर्णायक साबित हुआ.

   अंतरराष्ट्रीय टी20 में ईशान अभी शतक से वंचित हैं. उनके 32 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में सर्वाधिक स्कोर 89 रन रहा है, लेकिन घरेलू स्तर पर उनकी निरंतरता चयनकर्ताओं के लिए एक मजबूत दावेदारी पेश करती है. टीम इंडिया से लंबे समय से बाहर चल रहे ईशान ने इस टूर्नामेंट में 500 से अधिक रन बनाकर स्ट्राइक रेट 197 के साथ अपनी फॉर्म का जोरदार प्रदर्शन किया.ईशान किशन जैसे खिलाड़ी टी20 क्रिकेट की आत्मा हैं – तेज, निडर और मैच जिताऊ। उनकी छह टी20 शतकों की यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी है, बल्कि भारतीय क्रिकेट की युवा पीढ़ी की आक्रामक सोच का प्रतीक भी. यदि वे इसी लय को बरकरार रखते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शतकों की बारिश करना मात्र समय की बात लगती है. चयनकर्ताओं की नजरें अब उन पर टिकी हैं – क्या ईशान जल्द ही नीली जर्सी में यह कारनामा दोहराएंगे? क्रिकेट प्रेमी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.


आलोक कुमार

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बुधवार, 17 दिसंबर 2025

कांग्रेस का विरोध मार्च, नेशनल हेराल्ड केस को लेकर केंद्र सरकार पर हमला

कांग्रेस का विरोध मार्च, नेशनल हेराल्ड केस को लेकर केंद्र सरकार पर हमला

पटना.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को राजनीतिक द्वेष के तहत फंसाने के आरोप लगाते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में आयकर गोलंबर से भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला. यह प्रदर्शन नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई और राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार किए जाने के बाद आयोजित किया गया.

      विरोध मार्च को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ईडी द्वारा दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है.उन्होंने आरोप लगाया कि मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर दोनों नेताओं को बेवजह परेशान किया गया और यह पूरा मामला केवल गांधी परिवार को बदनाम करने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार, यह सत्ताधारी भाजपा सरकार की राजनीतिक बदले की भावना का परिणाम है.

      राजेश राम ने सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने ईडी को कानून के दायरे में रहकर काम करने की हिदायत दी है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के मामलों में दोषसिद्धि की दर 10 प्रतिशत से भी कम है, जिससे स्पष्ट होता है कि ऐसे मामलों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है.कांग्रेस ने कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए ईडी की भूमिका पर सवाल उठाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा से राजनीतिक विद्वेष से बाज आने तथा देश से माफी मांगने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की. आयकर गोलंबर से आगे बढ़ने पर पुलिस ने बलपूर्वक प्रदर्शन को रोक दिया.

    इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा, पूर्व विधायक इजहारूल हुसैन, राजेश राठौड़, प्रतिमा कुमारी दास, अमित कुमार टुन्ना, डॉ. संजय यादव, डॉ. स्नेहाशीष वर्धन पाण्डेय, सौरभ सिन्हा, शशि रंजन, कुमार आशीष, शिशिर कौटिल्य, पंकज यादव, चंद्र प्रकाश सिंह, शशिकांत तिवारी, कमल कमलेश, कमल देव नारायण शुक्ला, सत्येंद्र कुमार सिंह, गुंजन पटेल, केसर कुमार सिंह, संजय पाण्डेय, संतोष कुमार श्रीवास्तव, सुधीर शर्मा, मृणाल अनामय, मुकुल यादव, राजेन्द्र चौधरी, रंजीत कुमार, रीता सिंह, कुमारी माला, गुरजीत सिंह, विमलेश तिवारी, नीरज कुमार, अरुण पाठक, विशाल यादव सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे.


आलोक कुमार

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मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26

  सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26


पटना . भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे रोमांचक टी20 टूर्नामेंट सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (SMAT) के 2025-26 संस्करण में इस बार नया प्रयोग देखने को मिला है। पारंपरिक नॉकआउट स्टेज की जगह सुपर लीग फॉर्मेट अपनाया गया, जिसमें ग्रुप स्टेज की टॉप-8 टीमें दो ग्रुप्स में बंटकर राउंड-रॉबिन खेलती हैं और दोनों ग्रुप के विजेता सीधे फाइनल में पहुंचे हैं। टूर्नामेंट का फाइनल 18 दिसंबर को पुणे के MCA स्टेडियम में खेला जाएगा।

प्रश्न है ग्रुप ए से फाइनल में पहुंचने वाली टीम का। एलीट ग्रुप स्टेज में चार ग्रुप (A, B, C, D) थे, जिनमें से हर ग्रुप की टॉप-2 टीमें सुपर लीग के लिए क्वालीफाई की.ग्रुप ए से मुंबई और आंध्र प्रदेश ने सुपर लीग में जगह बनाई। मुंबई ने ग्रुप में शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप किया, जबकि आंध्र प्रदेश ने दूसरे स्थान पर रहकर क्वालीफाई किया.

सुपर लीग में ये आठ टीमें थीं: मुंबई, आंध्र प्रदेश (ग्रुप A से), हैदराबाद, मध्य प्रदेश (ग्रुप B से), हरियाणा, राजस्थान (ग्रुप C से), झारखंड, पंजाब (ग्रुप D से)। इन्हें दो ग्रुप में बांटा गया:

सुपर लीग ग्रुप A: मध्य प्रदेश, पंजाब, झारखंड, आंध्र प्रदेश

सुपर लीग ग्रुप B: हैदराबाद, हरियाणा, मुंबई, राजस्थान

16 दिसंबर 2025 तक सुपर लीग के अधिकांश मुकाबले हो चुके हैं। ग्रुप A में झारखंड और हैदराबाद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने-अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया। झारखंड ने तो टूर्नामेंट में लगातार जीत का सिलसिला बना रखा, जिसमें सुपर लीग में भी मध्य प्रदेश जैसी मजबूत टीम को रोमांचक मुकाबले में हराया. हैदराबाद ने भी अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी की धार से ग्रुप B पर जमाया.

इस प्रकार, ग्रुप ए से क्वालीफाई करने वाली आंध्र प्रदेश सुपर लीग ग्रुप A में थी, लेकिन फाइनल में पहुंचने वाली टीम झारखंड बनी, जो मूल एलीट ग्रुप D से आई थी. आंध्र प्रदेश ने सुपर लीग में कुछ अच्छे प्रदर्शन दिखाए, लेकिन झारखंड की लगातार जीत और बेहतर नेट रन रेट के सामने वे फाइनल की दौड़ से बाहर हो गईं। मुंबई (ग्रुप A की दूसरी टीम) भी सुपर लीग ग्रुप B में मजबूत दावेदार थी, लेकिन हैदराबाद ने उन्हें पीछे छोड़ दिया.

यह फॉर्मेट टूर्नामेंट को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना रहा है, क्योंकि एक हार से टीम बाहर नहीं होती। झारखंड और हैदराबाद जैसे टीमों के उभरते सितारों – जैसे ईशान किशन की कप्तानी में झारखंड की आक्रामक बल्लेबाजी और गेंदबाजी – ने दर्शकों को खूब रोमांचित किया.फाइनल में ये दोनों टीमें आमने-सामने होंगी, जो निश्चित रूप से एक यादगार मुकाबला होगा.

ग्रुप ए से सुपर लीग तक का सफर मुंबई और आंध्र प्रदेश के लिए सराहनीय रहा, लेकिन फाइनल की चाबी अब झारखंड और हैदराबाद के पास है. घरेलू क्रिकेट में ऐसे प्रयोग युवा प्रतिभाओं को ज्यादा मौके दे रहे हैं, जो आने वाले आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए शुभ संकेत है.

आलोक कुमार

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सोमवार, 15 दिसंबर 2025

जेल के दिनों ने उनके शरीर पर गहरी चोट

 


पटना.उत्तरी भारत के एक छोटे से गाँव में 45 वर्षीय शीला देवी की कहानी आज भी सवालों से भरे हमारे समय का आईना है. मसीही विश्वास का पालन करते हुए अपने घर में एक छोटी-सी मंडली चलाने की वजह से उन्हें लगभग तीन महीने जेल में रहना पड़ा.आरोप था—धर्म परिवर्तन कानून का उल्लंघन.बीमारी के चलते ज़मानत मिली, पर जेल के दिनों ने उनके शरीर पर गहरी चोट छोड़ी; बाद में कैंसर का पता चला.

पिछले दो वर्षों से शीला अपने घर में प्रार्थना सभाएँ आयोजित कर रही थीं. यह पहल उनके लिए सेवा थी, पर गाँव के कुछ लोगों के लिए असहजता. विरोध बढ़ा, शिकायत हुई और 20 जुलाई की रविवार आराधना के दौरान पुलिस ने घर में प्रवेश कर पूछताछ की. बाइबिल, क्रॉस, भजन की किताबें, दीवार पर टंगा दस आज्ञाओं का पोस्टर, एम्प्लीफायर—सब ज़ब्त कर लिया गया. यहाँ तक कि उनका मोबाइल फ़ोन भी, जो उनके लिए परमेश्वर के वचन से जुड़े रहने का माध्यम था.

शीला का कहना है कि वे सभाएँ बंद नहीं कर सकती थीं. उनका विश्वास था कि ये मुलाक़ातें लोगों को शांति और चंगाई देती हैं—बीमारी और अकेलेपन के बीच आशा का सहारा बनती हैं. इसी दृढ़ता की कीमत उन्हें कैद के रूप में चुकानी पड़ी, पर उनका संकल्प डगमगाया नहीं.

आज, रिहाई के बाद भी चुनौतियाँ कम नहीं हैं.स्वास्थ्य संघर्ष जारी है, सामाजिक दबाव भी। फिर भी उनकी गवाही उस मंडली के लिए प्रेरणा है—कि कठिनाइयों के बीच भी विश्वास पर अडिग रहा जा सकता है.

प्रार्थना

हे स्वर्गीय पिता, शीला की साहसी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद. उनके शरीर को चंगा करें और उनके विश्वास को और दृढ़ करें। स्थानीय अधिकारियों को अनुग्रह दें कि इस समुदाय को शांतिपूर्वक मिलने की अनुमति मिले. यदि परिस्थितियाँ बदलें, तो नेताओं को सही निर्णय की बुद्धि प्रदान करें. भारत में—विशेषकर उत्तरी भाग में—यीशु का प्रकाश और प्रेम चमकता रहे.

वचन

“क्योंकि हम अपना प्रचार नहीं करते, बल्कि प्रभु यीशु मसीह का….” — 2 कुरिंथियों 4:3–5

यदि चाहें, मैं इसे संक्षिप्त समाचार रिपोर्ट, मानवाधिकार नोट, या प्रार्थना-पुस्तिका हेतु अनुकूलित संस्करण में भी ढाल सकता हूँ.

आलोक कुमार


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