बुधवार, 9 नवंबर 2022

सरकार कभी गरम तो कभी नरम कानून बनाकर कुर्सी बचाने में कामयाब

 पटना.बिहार में सबसे पहले कर्पूरी ठाकुर ने 1977 39 में बिहार में शराबबंदी कानून लागू कर तहलका मचा दिया था. बिहार में गरीब शराब के नशे से जिस कदर बर्बाद हो रहे थे उसे देखते हुए कर्पूरी ठाकुर ने ऐतिहासिक फैसला लिया और बिहार में शराब की बिक्री बंद कर दी गई, पर यह कर्पूरी ठाकुर को भी नहीं पता था कि दो सालों में ही उनकी सरकार गिर जाएगी और शराबबंदी कानून खत्म कर दिया जाएगा.वहीं 39 साल के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत अप्रैल 2016 में राज्य में शराबबंदी लागू कर दी है.बिहार सरकार कभी गरम तो कभी नरम कानून बनाकर कुर्सी बचाने  में  कामयाब है.इस समय बिहार के साथ गुजरात, लक्षद्वीप, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड में शराब निषेध अधिनियम लागू है. इन राज्यों में शराब की बिक्री एवं सेवन पर प्रतिबंध है.

                     बिहार में शराबबंदी को ठीक तरीके से लागू करने में आ रही दिक्कतों के बीच सरकार लगातार अपनी रणनीति को बदलते आ रही है और इसी कड़ी में अब शराबियों को पकड़ने के बजाय शराब तस्कर, शराब का भंडारण और इसकी बिक्री करने वालों पर नकेल कसने की नई रणनीति बनाई गई है. राज्य के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने प्रेस कांफ्रेंस में  कहा कि बिहार में शराबबंदी को सख्ती से लागू करने के लिए राज्य सरकार अब पीने वालों से अधिक शराब के धंधेबाजों की गिरफ्तारी व उनको सजा दिलाने पर अधिक फोकस करेगी. शराब की आपूर्ति व बिक्री करने वालों की पकड़ने को लेकर पहले से चल रहे अभियान को तेज किया जायेगा.

                    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को प्रदेश में लागू शराबबंदी की समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह भविष्य में शराब तस्करों पर कसेगी नकेल .बिहार में शराबबंदी को सख्त से लागू कराने की तमाम कोशिशों के बावजूद नीतीश सरकार विफल साबित हो रही है. राज्य में शराबबंदी के बाद भी जहरीली शराब से मौत हो जा रही है.

                      सीएम ने बैठक में कहा कि पुलिस का ज्यादा फोकस अब शराब पीने वालों की जगह व्यवसायियों पर रहेगा. इसके अलावा सीएम ने अधिकारियों से अन्य राज्यों से बिहार में शराब की तस्करी में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने को भी कहा. उन्होंने कहा कि पुलिस विशेष रूप से शराब सप्लायर पर ध्यान देते हुए उन्हें पकड़ने, जेल भेजने और सजा दिलाने का काम करेगी.

                 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मद्य निषेध और निबंधन विभाग की समीक्षा बैठक के बाद मुख्य सचिव अमीर सुभानी ने कहा कि सीएम ने बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस, शराबबंदी और आबकारी विभागों के अधिकारियों का ध्यान प्रदेश में शराब आपूर्ति और वितरण श्रृंखलाओं को तोड़ने पर होना चाहिए. इसलिए संबंधित अधिकारियों की प्राथमिकता के आधार पर पहले उन रास्तों की पहचान करनी होगी जिनके जरिए बिहार में दूसरे राज्यों से शराब की तस्करी की जा रही है और इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाए. उन्होंने कहा कि इसका मतलब ऐसा नहीं है कि पीनेवालों को नहीं पकड़ा जाएगा, पहली बार शराब पीनेवालों को जुर्माना लेकर छोड़ा जाएगा, लेकिन दुबारा कोई पीते हुए पकड़ा जाएगा, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

                              मद्य निषेध विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बिहार पुलिस शराब की सप्लाइ चेन को तोड़ने का पूरा प्रयास कर रही है. इसके तहत बाहर से शराब मंगाने वाले बिहार के धंधेबाजों से संबंधित कई लोगों की पहचान की गई है. पुलिस ने पिछले एक साल में बिहार के अंदर दूसरे राज्यों से शराब आपूर्ति करने वाले 90 शराब माफियाओं को पकड़ा है.

  आपूर्ति करने वाले और स्थानीय स्तर पर विक्रेता (रिसीवर) से जुड़े 60 हजार लोग पकड़े गए हैं. उन्होंने कहा कि होम डिलिवरी करने वालों को लेकर भी अभियान चलाया जा रहा है. कई बड़े माफियाओं को सजा दिलाने के लिए स्पीडी ट्रायल चलाया जा रहा है.

                       सरकार का मानना है कि दूसरे राज्यों से शराब की हो रही आपूर्ति के कारण ही शराब बिहार में बिक रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पीने वालों की अपेक्षा ऐसे लोगों को न सिर्फ पकड़ा जाये, बल्कि उनको कोर्ट से सजा दिलाने का काम भी हो. एक अधिकारी ने बताया कि शराबबंदी को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए बीते त्योहारी महीने अक्टूबर में ही 20 हजार से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए हैं. इनमें आम से लेकर खास लोग शामिल रहे.

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