रविवार, 10 सितंबर 2023

राजगीर के पल्ली पुरोहित फादर जेम्स रोजारियो का कार्य विवरण

राजगीर के पल्ली पुरोहित फादर जेम्स रोजारियो का कार्य विवरण


अपने ईश्वर का भजन गाना कितना अच्छा है, उसकी स्तुति करना कितना सुखद है। प्रभु के मंदिर में उसकी स्तुति करो। उसके महिमामय आकाश में उसकी स्तुति करो। उसके महान कार्यों के कारण उसकी स्तुति करो। उसके प्रताप के कारण उसकी स्तुति करो। तुरही फूकते हुए वीणा और सितार बजाते हुए, ढोल बजाते और नृत्य करते हुए, हुए, झांझो की ध्वनि पर उसकी स्तुति करो। मधुर स्वर स्वतः सन् 1969 ई० में आरोक्या सामी और रथिना मेरी के कंठो से फूट जब उनके पहिलौते पुत्र जेम्स रोजारियो का उनके घर में जन्म हुआ। ईश्वर की महिमा का सौंदर्य धारण कर इन्होंने आनंदित होकर अपने पुत्र का पालन पोषण किया। 

जब उनके दो पुत्र अलबर्ट राजा और अमल राजा का जन्म हुआ तो उनके कंठो से ये स्वर फूट पड़े - हम कितने सौभागयशाली है, ईश्वर की इच्छा हम पर प्रकट हुई। आकाश जयजयकार करो क्योंकि प्रभु ने यह संपन्न किया। पृथ्वी की गहराईयों से जयघोष करो; पर्वतो, वन और वृक्षों उल्लासित होकर गाओं। 

प्रज्ञा का मूल्य मोतियों से भी बढ़कर और वह किसी वस्तु से अधिक वांछनीय है। ज्ञान परिष्कृत सोना श्रेष्ठतर है। इस ज्ञान की महता को पहचान कर आपके माता-पिता शिक्षा अर्जन के लिए आपको शिक्षण संस्थान भेजा। आपकी प्राथमिक शिक्षा संत जोसेफ स्कूल, मुल्लीपाड़ी पल्ली में शुरू हुई। उसके उपरांत दसवीं कक्षा तक संत मेरिस सेकेंडरी स्कूल, डिंडिगल शिक्षा प्राप्त की। आपकी बारहवीं की शिक्षा संत जोसेफ कॉलेज, बैंगलूर से हुई। शिक्षा के दौरान प्रभु की वाणी यह कहते हुए सुनाई पड़ी - “मैं किसे भेजूँ? हमारा संदेश वाहक कौन होगा?‘और मैंने उत्तर दिया, “मैं प्रस्तुत हूँ, मुझको भेज!” हमारा संदेश वाहक कौन होगा!‘ और मैंने उत्तर दिया, ‘ मैं प्रस्तुत हूं,मुझको भेज!‘ इस तरह आप संत मेरिज सेमिनरी, चकारम में प्रशिक्षण के लिए आये। एक साल के बाद आप गुरूकुल मुजफ्फरपुर गये। दर्शनशास्त्र की पढ़ाई के लिए मॉर्निग स्टार, बैरकपुर गये। तीन साल पुरोहिताई प्रशिक्षण के साथ बी०ए० किये। 

आप कार्यानुभूति के लिए बाढ़ और मनेर भेजे गये। आपके व्यक्तित्व एवं कार्य से वहाँ के लोग जलस्त्रोत के किनारे लगे मजनूँ वृक्षों की तरह, जलाशय के तट पर घास की तरह लह लहा उठें। आपने सभी कार्य प्रभु को अर्पित किया और आपने सफलता हासिल की। 

   ईश्वर का ज्ञान प्राप्त करने में हमारा कल्याण है। संत पौलूस फिलिपियों के पत्र में कहते हैं- “मैं प्रभु ईसा मसीह को जानना सर्वश्रेष्ठ लाभ मानता हूँ और इस ज्ञान की तुलना में हर वस्तु को हानि ही मानता हूँ।‘ ईश्वर के ज्ञान में बढ़ने के ईशशास्त्र की शिक्षा ग्रहण करने के लिए पेपल सेमीनरी, पुना गये। उपयाजक का परिधान धारण करने के बाद मनेर पल्ली उपयाजकीय कार्यों में अपने आपको पूर्ण समर्पित किया और आप ईश्वर की आँख की पुतली बने रहे। उसी स्थान पर ईश्वर ने यह आनंद के तेल से 18/1/1999 को अति माननीय धर्माध्यक्ष बेनेडिक्ट के कर कमलों द्वारा अभिषेक किया ताकि आप अपने लोगों से पापों का प्रायश्चित कर सके और ईश्वर संबंधी बातो में मनुष्यों का प्रतिनिधि बन कर भेंट और पापों के प्रायश्चित की बलि चढ़ा सके। इस तरह मेलकिसदेक के सदृश जो वंश परम्परा पर आधारित किसी नियम के अनुसार नहीं, बल्कि अविनाशी जीवन के सामर्थ्य से पुरोहित का गौरवपूर्ण धारण किया। 

   याजक के रूप में कुछ महीने कार्य करने के बाद आपको विद्वता, समझदारी, कर्मठता एवं कर्तव्यनिष्ठा को बारीकी से परखने के लिए महाधर्माध्यक्ष बेनेडिक्ट ओस्ता ने अपना पहला सचिव बनाया। सचिव के पद पर सुशोभित आपने बहुत सारे प्रोजेक्ट लिखकर पटना कलीसिया को गौरवपूर्ण सेवा प्रदान की जैसे बख्तियारपुर चर्च का  युवक प्रशिक्षण पाकर नौकरी पाये। तत्पश्चात् यू. पी. एस. सी., बी. पी. एस. सी. और विभिन्न सरकारी नौकरी पाने के लिए मुफ्त कोचिंग सेंटर चलाए। 

    बिहार के पिछड़े वर्ग के युवक-युवतियों का सफल भविष्य बनाने के लिए , कौशल विकास प्रशिक्षण केन्द्रों का नींव आशादीप मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, पूणिर्या, भागलपुर में डी. बी. टेक के माध्यम से किए। 

   अपने बूढ़े माता-पिता की सेवा में कमी न करें । युवाओ के संचालन के समय प्रेरणा के सुपिरियर का पद सहर्ष स्वीकार किया और बुजुर्ग फादरगण की सेवा में कोई कमी नहीं आने दी। उनकी आत्मा को इतना आनंदित कर दिया कि कहीं किसी प्रकार की सिकायत की गुंजाइस नहीं रही।

    आप सन् 2013-2020 तक बिहार शरीफ में पल्ली पुरोहित रहे। पीनहास की भांति यशस्वी व्यक्तित्व वाला व्यक्ति प्रभु के लिए उत्साह का प्रदर्शन किया और अपनी उदारता और साहस से शांति के कार्य करते रहे। आप थके मान्दे को बल देते और आसक्त को संभालते। जवान भले ही थक कर चूर हो जाए और फिसल कर गिर जाते किंतु आप गरूड़ की भांति अपने पंख फैलाये रहते और तेजी से दौड़ते किंतु थकते नहीं, सदा आगे बढ़ते रहते, शिथिल नहीं होते। नई शक्ति से संचार होते रहते। इन सात वर्षों में करीब 1000 व्यवस्क और बच्चों को बपतिस्मा दिये। 

   समय की मांग को देखते हुए अपने पल्ली के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षण में गुणवत्ता लाए। शिक्षकों को शिक्षण के साथ एक महीना का अंग्रेजी का जबरदस्त पाठ्यक्रम बनाकर अंग्रेजी माध्यम स्कूल चलाया ताकि हमारे बच्चे किसी से कम न रहे। गरीब से गरीब घराने के बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा का द्वार  खुल गया। बादलों के बीच प्रभात तारे के सदृश, पूर्णिमा सदृश, पूर्णिमा के चन्द्रमा सदृश, महिमामय बादलों के बीच इन्द्रधनुष के सदृश, वसंत के गुलाब के फूल के सदृश, माणियों से जड़े सोने के पात्र के सदृश आप लोगों के दिमाग में बसे रहे। 

       सन् 2020 में सर्वधर्म की कड़ी को एक रूपता देने के लिए आपको विभिन्न धर्माे का संगम स्थल राजगीर स्थानांतरण किया गया। कुछ दिनों के बाद ही वहाँ के लोगा के दिल में बसने लगे। आपकी एक पहचान बन गई। कोई भी व्यक्ति अनजान नहीं मालूम होता । विभिन्न धर्मों की गोष्ठी कराके आप अपनी एक अलग पहचान बना रखी। आपके हृदय स्पंदन से तरंगित होता है-यही प्रभु है, इसी पर भरोसा है। हम उल्लसित होकर आनंद मनाये क्योंकि यह हमें मुक्ति प्रदान करता है। प्रभु मेरा यह भजन तुझे प्रिय लगे, प्रभु तू ही मेरा आनंद हैं।

    ऐसे गरिमामय व्यक्तित्व अमूल्य निधि से मंडित व्यक्तित्व के लिए परमेश्वर का प्रशंसा गान करते हुए आपके मंगलमय, सुखदायी और कल्याणकारी जीवन की कामना करते हैं। धन्य हैं वे जो आपके सान्तिध का रसपान करते हैं।


आलोक कुमार


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