दिशोम गुरू नहीं रहे
झारखंड. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक 'दिशोम गुरुजी' शिबू सोरेन का 81 वर्ष की आयु में नई दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया. वे लंबे समय से बीमार थे और वेंटिलेटर पर थे.उन्हें हार्ट, किडनी सहित कई बीमारियां थीं.
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल निधन हो गया. उन्होंने 81 वर्ष की आयु में आखिरी सांस ली. शिबू सोरेन ने झारखंड राज्य की मांग को लेकर चलाए गए आंदोलन में भी भाग लिया. वह तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे. वर्तमान में शिबू सोरेन राज्यसभा के सदस्य थे. शिबू सोरेन का जन्म 11 मई 1944 को झारखंड के हजारीबाग जिले के निमरा गांव में हुआ था. उन्होंने हजारीबाग के गोला हाईस्कूल से शिक्षा हासिल की. वह मैट्रिक पास थे और पेशे से किसान थे. उन्होंने झारखंड के सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में एक अलग पहचान बनाई. इसीलिए लोग उन्हें दिशोम गुरू के नाम से भी जानते थे.
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन एक वरिष्ठ और विशिष्ठ आदिवासी नेता थे. उनके प्रशंसक उन्हें दिशोम गुरु कहा करते थे. जबकि गरीबों में उनकी पहचान गुरुजी के रूप में थी. वह आदिवासी समुदाय के अधिकारों और उत्थान के आंदोलन में एक प्रमुख आवाज और जमीनी कार्यकर्ता थे. झारखंड की स्थापना के आंदोलन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई.
शिबू सोरेन झारखंड के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक थे. उन्होंने वंचितों के अधिकारों और कल्याण के लिए समर्पित भाव से काम किया. वह आठ बार लोकसभा के सदस्य रहे. जबकि उन्होंने 2004 से 2006 तक कोयला मंत्रालय में कैबिनेट, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में भी काम किया. वे तीन बार राज्यसभा के सदस्य रहे. वर्तमान में भी वह राज्यसभा के सदस्य थे.
शिबू सोरेन को उनके प्रशंसक 'दिशोम गुरु' या 'गुरुजी' के नाम से भी जानते थे. ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि आखिर शिबू सोरेन को 'दिशोम गुरु' क्यों कहा जाता था. इसका अर्थ क्या होता है. दरअसल, झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन को 'गुरुजी' या 'दिशोम गुरु' इसलिए कहा जाता था क्योंकि उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के माध्यम से आदिवासी समुदायों. जिसमें खासकर संथाल और अन्य जनजातियों के अधिकारों और उनकी स्वायत्तता के लिए एक लंबा संघर्ष किया.
वह आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए झारखंड को अलग राज्य बनाने की मांग के लिए चलाए गए आंदोलन के प्रमुख नेता थे. शिबू सोरेन के नेतृत्व में ही सामाजिक कार्यों और आदिवासी संस्कृति के हितों के प्रति समर्पण ने उन्हें जनजातीय समुदायों का प्रिय नेता बना दिया. वह आदिवासियों के लिए एक मार्गदर्शक और शिक्षक (गुरु) की सम्मानित हो गए. बता दें कि दिशोम गुरु का मतलब संथाली में देश का गुरु होता है, जो सोरेन के नेतृत्व और प्रभाव को दर्शाता है.
आलोक कुमार
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