छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्टेशन पर मॉब लिंचिंग: नन और युवक पर हमला, पुलिस की लापरवाही उजागर
राज्य में अल्पसंख्यकों के खिलाफ मॉब लिंचिंग की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल से जुड़े लोगों ने दो ननों और एक युवक को धर्मांतरण के आरोप में घेरकर पीटा, धमकाया और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पीड़ितों पर जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए मारपीट की और उन्हें "धर्मांतरण का चादर" पहनाकर जुलूस की तरह घुमाया। मौके पर मौजूद पुलिस ने हिंसा रोकने में सुस्ती दिखाई और उल्टे पीड़ितों के बैग की तलाशी लेने लगी।
पुलिस का रवैया सवालों के घेरे में
पीड़ितों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने मॉब लिंचिंग करने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय उनका बयान दर्ज कर खानापूर्ति की। यहां तक कि कथित "धर्मांतरण" का आरोप लगाकर पीड़ितों को ही जेल भेज दिया गया, जबकि हमलावरों पर स्वतः संज्ञान लेने की कोई कोशिश नहीं की गई।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मॉब लिंचिंग एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए कड़ी सजा होनी चाहिए। लेकिन प्रशासन की लापरवाही से अपराधियों को खुली छूट मिल रही है, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बढ़ता भय और असुरक्षा
अल्पसंख्यक समुदाय में इस घटना के बाद भय का माहौल और गहरा गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल संविधान के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन हैं बल्कि भीड़तंत्र के बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाती हैं।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
welcome your comment on https://chingariprimenews.blogspot.com/