शनिवार, 23 अप्रैल 2022

प्रथम पुण्यतिथि

 पटना. येसु समाज के पुरोहित फादर सुशील साह.एक साधारण पुरोहित नहीं थे.वे अमेरिका में जाकर मनोचिकित्सक का अध्ययन किये थे.अमेरिका से मनोचिकित्सक के डाक्टर बनकर आये.यहां पर कुर्जी पल्ली के सहायक पल्ली पुरोहित थे. एक मनोचिकित्सक के डाक्टर होने के कारण डॉ.सुशील साह कुर्जी होली फैमिली हाॅस्पिटल में प्रैक्टिस करने लगे थे. इस बीच डा.सुशील साह का स्थानान्तरण बेतिया महापल्ली में 2018 में हो गया.यहां प्रधान पल्ली पुरोहित बनने के बाद फादर सुशील साह ने पल्ली परिषद गठित किया.इनके नेतृत्व में बेतिया चर्च के 275 वर्ष का जयंती बनाया गया.फादर सुशील का कदम बढ़ने लगा.इस बीच बीमार पड़े. बिस्तर पर गिरे तो फिर उठे नहीं.विधि के विधान के तहत फादर सुशील साह का निधन 24 अप्रैल 2021 को पटना में हो गया. उनका प्रथम पुण्यतिथि पर के.आर.हाई स्कूल के शिक्षक और बेतिया पल्ली परिषद के सदस्य जेम्स माइकल ने श्रद्धांजलि अर्पित किये हैं.


आलोक कुमार 

देश में स्वतंत्रता संग्राम के 1857 के अग्रिम योद्धा वीर कुंवर सिंह

 

पटना.देश में स्वतंत्रता संग्राम के 1857 के अग्रिम योद्धा वीर कुंवर सिंह का 165 वां विजयोत्सव आज पूर्वाह्न 11.30 बजे प्रदेश कांग्रेस के मुख्यालय, सदाकत आश्रम में मनाया गया. बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा0 मदन मोहन झा ने समारोह की अध्यक्षता की.


डा0 झा ने कहा कि वीर कुंवर सिंह 80 वर्ष की अवस्था में 23 अप्रैल, 1857 को अंगरेजी सेना को हराकर जगदीशपुर के किले एवं आरा शहर में अपना झंडा फहराया था.उन्होंने कहा कि वीर कुँवर सिंह अद्वितीय शौर्य एवं साहस के साथ अंगरेजी सेना से लड़े. वे साम्प्रदायिक एकता के बड़े हिमायती थे.जहाँ उन्होंने शिव मंदिर बनाये वहीं उन्होंने मस्जिद भी बनवाये तथा पीर-फकीरों को दान भी दिये.डा0 झा ने कहा कि आज कृतज्ञ राष्ट्र वीर कुँवर सिंह के योगदान को स्मरण कर उनकी स्मृति को शत-शत नमन करता है.


इस अवसर पर डा0 मदन मोहन झा के अलावे प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, सदस्यता प्रभारी ब्रजेश प्रसाद मुनन, पूर्व विधायक गजानन्द शाही, लाल बाबू लाल, कुमार आशीष,ज्ञान रंजन, शशिकांत तिवारी, शरबतजहां फातमा, अरविन्द लाल रजक,रीता सिंह, मृणाल अनामय, आर0एन0चैधरी, राज किशोर चौधरी, विमलेश तिवारी, अनूप कुमार, निधि पाण्डेय, रूमा सिंह, सत्येन्द्र पासवान, आयुष भगत, सुभाष झा, सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित थे.


आलोक कुमार 

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2022

22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाया


रांची.नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज रद्द हो.जान देंगे जमीन नहीं देंगे.जल,जंगल और जमीन, वह हो जनता के अधीन.इसी तरह का नारा लगाते ग्रामीण 21 अप्रैल को टूटवापानी से पदयात्रा शुरू कर दी है.इस समय की चिलचिलाती धूप में टुटूवापानी से बनारी, विशुनपुर, आदर, घाघरा, टोटाम्बी, गुमला, सिसई, भरनो, बेड़ो, गुटुवा तालाब, कटहलमोड़, पिस्का मोड़, रातू रोड होते 25 अप्रैल को रांची (राजभवन) पहुंचेगी.इस बीच पदयात्री 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस भी मनाया.झारखंड के राज्यपाल से मिलने करीब दो सौ किमी पदयात्रा कर सैकड़ों आदिवासी लातेहार के नेतरहाट टुटुआपानी आंदोलन स्थल से आएंगे.


नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज रद्द करने की मांग को लेकर केंद्रीय जनसंघर्ष समिति के बैनर तले 200 से भी अधिक गांवों के लोग दो सौ किमी पदयात्रा कर रहे हैं. वे झारखंड की राजधानी रांची पहुंच राजभवन के सामने धरना देंगे. करीब 30 सालों से अनिश्चितता में जीते लोग गांवों से निकल पड़े हैं.जान देंगे, जमीन नहीं देंगे. जल, जंगल, जमीन हमारा है. इस नारे के साथ गुरुवार को झारखंड के लातेहार जिले के नेतरहाट के सत्याग्रह स्थल टुटूवापानी से नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को रद्द कराने की मांग को लेकर केंद्रीय जनसंघर्ष समिति लातेहार, गुमला के बैनर तले राजभवन के लिए पदयात्रा शुरू हुई. इस पदयात्रा को केंद्रीय जनसंघर्ष के सबसे बुजुर्ग साथी 95 वर्षीय एमान्वेल एवं मगदली कुजूर, दोमिनिका मिंज, मो खाजोमुदीन खान, बलराम प्रसाद साहू, एवं रमेश प्रसाद जायसवाल ने आंदोलनकारियों को माला पहनाकर एवं झंडा दिखाकर रवाना किया. इस पदयात्रा में जेरोम जेराल्ड कुजूर व फिल्म निर्देशक श्रीराम डाल्टन भी शामिल हैं. ये पदयात्रा 25 अप्रैल को रांची पहुंचेगी. यहां आंदोलनकारी राजभवन के समक्ष धरना देंगे और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेंगे.


ये पदयात्रा नेतरहाट की वादियों से निकल कर चिलचिलाती धूप में टुटूवापानी से बनारी, विशुनपुर, आदर, घाघरा, टोटाम्बी, गुमला, सिसई, भरनो, बेड़ो, गुटुवा तालाब, कटहलमोड़, पिस्का मोड़, रातू रोड होते 25 अप्रैल को रांची (राजभवन) पहुंचेगी. यात्रा में प्रभावित क्षेत्र के 200 से अधिक आंदोलनकारी महिला एवं पुरुष के साथ युवा भी शामिल हुए. ये 25 अप्रैल को राजभवन के समक्ष धरना देंगे और राज्यपाल को नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज रद्द कराने को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा. इस पदयात्रा में शामिल होने के लिए बुधवार शाम से ही सत्याग्रह स्थल टुटूवापानी में प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण जुटने लगे थे. सत्याग्रह स्थल पर पहुंचे सैकड़ों ग्रामीणों ने रात्रि विश्राम किया, जहां जन संघर्ष समिति के द्वारा भोजन की व्यवस्था की गयी. इस पदयात्रा में फिल्म निर्देशक श्रीराम डाल्टन भी शामिल हुए. आपको बता दें कि इस आंदोलन की पृष्ठभूमि पर एक फिल्म का ताना बाना बुना गया. पटकथा लिखी गयी और फिल्म थंडर स्प्रिंग बनाई गयी है. निर्देशक श्रीराम डाल्टन ने कहा कि मौका मिले तो फिल्म जरूर देखें. इसमें दिखाया गया है कि कैसे लोग जान देने को तैयार हैं, लेकिन अपनी जमीन किसी सूरत में देने को तैयार नहीं हैं.


 बताते चले कि पायलट प्रोजेक्ट नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से होने वाले 245 गांव के विस्थापन के खिलाफ चला आंदोलन 22-23 मार्च 2014 को सत्याग्रह दिवस मनाते हुए अपने आंदोलन का 21वाँ वर्ष पूरा करेगा. जतरा टाना भगत के दिखाए रास्ते पर अमल करते हुए झारखंड में झारखंडी प्रतिरोध की संस्कृति में  आगे बढ़ते जन सत्याग्रह के माध्यम से झारखंड ही नहीं , देश एवं वैश्विक स्तर पर विस्थापन विरोधी आंदोलनों को नई दिशा देने का काम इस आंदोलन ने किया है. आज की तारीख में यह आंदोलन  सफल आंदोलनों की श्रेणी में शामिल है.परन्तु आंदोलनकारी आज भी संघर्षरत हैं और अपनी लड़ाई के लिए कमर कस कर किसी भी कीमत पर पायलट प्रोजेक्ट को नहीं बनने देना चाहते हैं और नही उस क्षेत्र में होने वाले चांदमारी  एवं गोलाबारी अभ्यास को भी नहीं होने देना चाहते.स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है कि संभावित विस्थापित  क्षेत्र के लोग अब किसी भी कीमत पर सेना की चहलकदमी स्वीकार करने को तैयार नहीं। इसके पीछे इनका तर्क साफ है कि 1956 से 1993 तक  37वर्षों में सेना द्वारा गोलाबारी अभ्यास के दौरान सेना के जवानों द्वारा अमानवीय,शर्मनाक एवं दर्दनाक व्यवहार जिसका सर्वेक्षण  केंद्रीय जन संघर्ष समिति जिसने पूरे आदोलन का नेतृत्व किया, करा लिया था जो चौंकाने वाले हैं. 


आलोक कुमार 


जानकारियों का आदान-प्रदान करना

 
रायसेन.एकता परिषद मध्यप्रदेश वन अधिकार अभियान के  तहत जिला रायसेन के ब्लॉक के सिलवानी ब्लॉक के ग्राम पुद्दर में दो दिवसीय ग्रामीण मुखिया नेतृत्व विकास शिविर का आयोजन रखा है.जिसमे सिलवानी ब्लाक,50 गांव के  लगभग 100 मुखिया साथी भाग ले रहे हैं. इस शिविर का मुख्य उद्देश्य वन अधिकार अधिनियम के तहत जानकारियों का आदान-प्रदान करना एवं वन अधिकार पाने के लिए जो प्रक्रिया है उसकी जानकारी ग्रामीणों  को  देना है.


इस शिविर में प्रत्येक गांव से दो-दो मुखियाओं का नेतृत्व तैयार कर वन अधिकार अभियान चलाया जाएगा.शिविर में भोपाल से आए एकता परिषद के राष्ट्रीय महा सचिव श्री अनीश जी ने  जमीन के संदर्भ में बात रखते हुए बताया की  वन अधिकार  क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अभी भी पिछड़ा हुआ हे जिसको लेकर अभी बहुत कार्य करना  शेष है.

एकता परिषद के संभागीय संयोजक दीपक अग्रवाल ने कहां कि मध्यप्रदेश वन अधिकार अभियान कार्यक्रम चलाया जा रहा है, आने वाले समय में अंतिम बार जिन लोगों को वन अधिकार का  पट्टा नहीं मिला है उन सभी का वन अधिकार अभियान के तहत दावा लगाने के लिए  एकता परिषद  इस अभियान के तहत कार्यकर्ताओं द्वारा सिलवानी के ग्रामों में  वन अधिकार पर मई माह से चौपाल  लगाकर दावे लगाने की प्रक्रिया चलाई जाएगी .इस प्रक्रिया के उपरांत वन भूमि के मुद्दों को हल कराने के लिए शासन प्रशासन से संवाद किया जाएगा.


शिविर में एकता महिला मंच रायसेन जिला समन्वयक सरस्वती ऊइके, जिला संयोजक टीकाराम आठिया , बैतूल से आए  संयोजक भरत सरयाम, सिलवानी क्षेत्र के कार्यकर्ता साथी, विमलेश भाई, संतोष सिंह गौड़,बबली बाडिवा, चन्द्रवती बहिन, बलीराम भाई आदि गांवों मुखिया, युवा,महिलाएं उपस्थित रहे.

आलोक कुमार

जिलाधिकारी कुंदन कुमार प्राइम मिनिस्टर्स अवार्ड से सम्मानित

                      *जिलाधिकारी कुंदन कुमार प्राइम मिनिस्टर्स अवार्ड से सम्मानित

                                            🖋आलोक कुमार और स्वीटी माइकल


बेतिया. सिविल सर्विसेज डे 21 अप्रैल को मनाया जाता है.इस अवसर पर पश्चिमी चम्पारण जिले के जिलाधिकारी कुंदन कुमार को इनोवेशन कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया.दिल्ली में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के हाथों प्राइम मिनिस्टर्स अवार्ड से कुंदन कुमार सम्मानित किये गए. 

बता दें कि आईएएस बनने से पहले कुंदन कुमार 2009 बैच के IPS थे. उत्तराखंड कैडर में तीन साल आईपीएस रहे फिर 2012 में आईएएस बने. इसके पहले मुंबई में पांच साल तक रिलायंस में बड़े पदाधिकारी रहे. आईएएस, आईपीएस और इंजीनियर तीनों ही क्षेत्र की जानकारी और स्टडी इस आईएएस को औरों से अलग कर देती है.जब बांका जिले के डीएम कुंदन कुमार थे.तब बांका जिला में पांच सरकारी विद्यालयों से Smart Class की शुरुवात की थी. इसके बाद उसकी गूंज अमेरिका के ड्यूक यूनिवर्सिटी तक छा गई.

बता दें कि डीएम कुंदन कुमार ने वर्ष 2020 में कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि होने पर लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण घर वापस लौटे कामगारों के द्वारा जिला प्रशासन की सहायता से जिले में प्रारंभ किये गए स्टार्टअप जोन चनपटिया के कारण सफलता की कहानी में एक और अध्याय जोड़ दिये  है. दरअसल लॉकडाउन में 80 हजार से ज्यादा कामगारों की जिले में घर वापसी हुई थी. यह सभी अपना घर-बार छोड़कर अन्य राज्यों में मजदूरी करते थे. मगर लॉकडाउन के कारण आजीविका छीन जाने पर यह अवसाद और परेशानी में वापस आए थे. क्वारंटाइन कैंप में 14 दिन रहने के दौरान जिला प्रशासन द्वारा इनकी स्किल मैपिंग कराई गई और जिले में उद्यम स्थापित करने के लिए सुझाव लिए गए.

स्किल मैपिंग के दौरान मुख्य रूप से टेक्सटाइल एंड एपैरल, फुटवेयर, बंबू एंड क्राफ्ट विधा में इनके पारंगत होने की जानकारी प्राप्त हुई. इन क्षेत्रों में इनकी पारंगता जान कर भविष्य में इन कामगारों से संपर्क करने के लिए उद्यम मित्र मंडल का निर्माण किया गया. जिला पदाधिकारी के द्वारा वापस लौटे कामगारों के लिए कोरोना जैसी ’आपदा’ में ’अवसर’ की तलाश करने का प्रयास किया. इस कड़ी में जिलाधिकारी कुंदन कुमार की अध्यक्षता में वर्ष 2020 के अगस्त माह में लुधियाना, अमृतसर, सूरत, दिल्ली, मुंबई जगहों से हिस्सा लेने आये 30 से ज्यादा कामगारों के साथ बैठक कर कार्ययोजना तैयार की गई. उन्हीं से उद्यम स्थापित करने की दिशा में किये जाने वाले कामों की जानकारी और सुझाव लिया गया. उनसे आवश्यकताओं की जानकारी भी ली गयी और राज्य सरकार के द्वारा जिला औद्योगिक नवप्रवर्तन योजना के तहत दिए जाने वाले लाभों से अवगत कराया गया.

मुख्य रूप से सड़क से संबद्ध स्थान, 24×7 के तर्ज पर थ्री फेज बिजली और राशि की आवश्यकता बताई गयी. आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बैंक के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर ऋण मेला का आयोजन करते हुए हुए आर्थिक सहायतार्थ ऋण दिलवाया गया. स्थान के लिए 20 एकड़ में फैले बाजार समिति के अनुपयोगी पड़े वेयरहाउस को चिन्हित किया गया और बिजली के लिए उच्चाधिकारियों से वार्ता कर डेडिकेटेड ट्रांसफार्मर की व्यवस्था कराई गई. सभी प्रकार के कागजातों को तैयार करने, ऋण दिलाने में सहायता प्रदान करने या यूं कहें प्रत्येक स्तर पर सहायता करने के लिए जिला स्तरीय एक-एक पदाधिकारी को सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट (स्पोक) के रूप में प्राधिकृत किया गया.

इसके साथ ही कामगारों के द्वारा लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के कंप्यूटर एडेड इक्विपमेंट का आयात करना शुरू किया गया और इस प्रकार से चनपटिया के 20 एकड़ में फैले बाजार समिति में जिले का प्रथम स्टार्टअप की शुरुआत की गई. इस दरम्यान जिलाधिकारी की अध्यक्षता में दर्जनों बार कामगारों, बैंक प्रबंधकों, स्टेक होल्डरों के साथ समीक्षा बैठक की गई और उद्यमियों को हर संभव मदद पहुंचायी गयी.

डीएम के कुशल मार्गदर्शन और दिशा-निर्देश से अब तक 57 उद्यमियों के द्वारा स्टार्टअप जोन में यूनिट स्थापित कर लिया गया. लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के 400 से अधिक मशीनों की स्थापना हो चुकी है, जिससे उत्पादित 15 करोड़ से ज्यादा के सामानों की बिक्री स्थानीय बाजार सहित अन्य जिले, राज्यों तथा विदेशों में किया जा चुका है. सामानों की बात करें तो बनारसी साड़ी, स्वेटर, कश्मीरी शाल सहित 25 से अधिक प्रकार के टेक्सटाइल एंड एपैरल का निर्माण स्टार्टअप जोन में किया जा रहा है. इसके अतिरिक्त सेनेटरी पैड, फुटवेयर्स, स्टील के बर्तन का भी निर्माण किया जा रहा है. कुछ दिनों पूर्व ही ई-रिक्शा की भी असेंबलिंग स्टार्टअप जोन में शुरू कर दिया गया है.

बेतिया मॉडल (स्टार्टअप जोन) की सफलता से अभिभूत होकर जिले के अन्य क्षेत्रों में 100 से अधिक उद्यम स्थापित हो चुके हैं. स्टार्टअप जोन के इस अभिनव प्रयोग के कारण जिले के सुदूरवर्ती थरुहट क्षेत्र हरनाटांड़, मिश्रौली एवं रामनगर सहित अन्य क्षेत्रों में भी उद्यम स्थापना की बयार बह चुकी है. 140 से अधिक लोग उद्यम स्थापना के लिए स्थान आवंटन हेतु कतार में हैं. थरुहट के लोगों द्वारा भी चनपटिया के तर्ज पर ही प्लग एंड प्ले आधारित स्टार्टअप जोन स्थापित करने की मांग की गई. इन्हें प्लग एंड प्ले आधारित स्टार्टअप जोन मुहैया कराने को लेकर स्थान भी चिन्हित कर लिया गया है.

बता दें कि चनपटिया स्टार्टअप जोन की सफलता को राज्य सहित केंद्र स्तर पर पहचान प्राप्त हुई है और इसी कड़ी में सिविल सर्विसेज दिवस 21 अप्रैल, 2022 को देश के सबसे प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण पुरस्कार प्राइम मिनिस्टर्स अवार्ड, 2021 के तहत इनोवेशन कोटि में पुरस्कार के लिए डीएम कुंदन कुमार काे चयन कर सम्मानित किया. साथ ही स्टार्टअप जोन के लिए 20 लाख रुपये का अवार्ड भी मिला.इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चयनित होने के लिए पूरे देश के जिलों से प्रविष्टी मांगी गई थी, जिसमें 2253 जिलों से विस्तृत प्रस्ताव भेजे गए थे. इसमें 847 जिलों से केवल इनोवेशन के क्षेत्र में प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजे गए थे. 

जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की है और संबंधित सभी अधिकारियों, कर्मियों एवं उद्यम स्थापित करने वाले कामगारों श्रमिकों को शुभकामना दी हैं. उन्होंने कहा कि यह सम्मान जिले की जनता के लिए है और खास कर स्टार्टअप जोन चनपटिया के उन उद्यमियों को समर्पित है, जिन्होंने कोरोना जैसी विपत्ति में भी अपने जिले के विकास के लिए एकजुटता और प्रतिबद्धता दिखाई, जिसके कारण स्टार्टअप जोन, चनपटिया की स्थापना हो पाई इस पुरस्कार ने ना केवल जिले का मान बढ़ाया है बल्कि बिहार का भी मान पूरे देश में बढ़ाया है.

चनपटिया के जिला पार्षद आरजू परवीन ने  2012 बैच के आईएएस कुंदन कुमार को बधाई दी है. इनका व अधिकारियों का अतुलनीय योगदान रहा है.इसके बल पर यहां के बने विभिन्न उत्पाद साड़ी, लहंगा, शर्ट, टी-शर्ट, लोअर, ट्रैक सूट, जैकेट आदि लद्दाख, कश्मीर, लुधियाना, दिल्ली आदि बड़े शहरों में भेजे जा रहे हैं तथा यहां के उत्पादों की डिमांड दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है.


गुरुवार, 21 अप्रैल 2022

वर्तमान में प्रतिनिधि सभा में 76 सीटें हैं - सत्ता बनाए रखने के लिए न्यूनतम आवश्यक

 ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने 21 मई को देश में संघीय चुनाव कराए जाने की घोषणा की है। मॉरिसन के सत्तारूढ़ गठबंधन के पास वर्तमान में प्रतिनिधि सभा में 76 सीटें हैं - सत्ता बनाए रखने के लिए न्यूनतम आवश्यक...

ऑस्ट्रेलिया.ऑस्ट्रेलिया में 21 मई को संघीय चुनाव है. ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने 21 मई को संघीय चुनाव कराने का सुझाव दिया है.मतदान सर्वेक्षणों में सत्‍ता परिवर्तन की संभावना व्यक्त की गई है. एंथनी अल्बनीज के नेतृत्व में विपक्षी लेबर पार्टी की सरकार बनने का अनुमान व्यक्त किया गया है. परंतु पिछले चुनाव में अधिकांश मतदान सर्वेक्षणों के नतीजों के विपरीत स्कॉट मॉरिसन ने बहुमत हासिल किया था.मॉरिसन   के सत्तारूढ़ गठबंधन के पास अभी 76 सीटें हैं.

बताया गया कि ऑस्ट्रेलिया में जॉन हॉवर्ड के बाद मॉरिसन ऐसे पहले नेता हैं जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया है. हॉवर्ड चार चुनाव जीतने के बाद 2007 में लेबर पार्टी के केविन रूड से चुनाव हार गए थे.

चुनाव की घोषणा करते समय मॉरिसन ने कहा कि आर्थिक अनिश्चितताओं से बचने और सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए आप हमारी पार्टी को वोट करें. उन्होंने कहा कि 21 मई को होने वाले इस चुनाव में उदारवादियों को वोट देकर ही आप मजबूत भविष्य के लिए एक मजबूत अर्थव्यवस्था सुनिश्चित कर सकते हैं.मॉरिसन ने कहा कि विपक्षी लेबर पार्टी का कहना है कि वह ऑस्ट्रेलियाई लोगों के लिए बेहतर आर्थिक विकल्प पेश करेगी. लेकिन ये उनके झूठे वादे हैं.उनके झांसे में जनता न आएं.

 मॉरिसन ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई लोगों ने पिछले चुनाव के बाद से कई चुनौतियों का सामना किया है - जिसमें आग, बाढ़ और COVID-19 महामारी शामिल है. इस दौरान  हमारी सरकार ने दूसरे देशों की तुलना में बहुत बेहतर प्रदर्शन किया है. बता दें कि स्कॉट मॉरिसन ऑस्ट्रेलिया के 30वें और वर्तमान प्रधान मंत्री के रूप में कार्यरत हैं.उन्होंने अगस्त 2018 में ऑस्ट्रेलिया की लिबरल पार्टी के नेता के रूप में  पदभार ग्रहण किया था. वहीं उनके विपक्ष में लेबर पार्टी है जो कि उन्हें टक्कर देती दिख रही है.लेबर पार्टी के मुख्य नेता एंथनी अल्बनीस हैं.हालांकि चुनाव के बाद ही नतीजे साफ हो पाएंगे.

इस बीच 21 मई को ऑस्ट्रेलिया के संघीय चुनाव से पहले प्रचार अभियान के रूप में, देश के कैथोलिक धर्माध्यक्षों ने मतदाताओं से अपने ख्रीस्तीय धर्म के आलोक में दांव पर लगे मुद्दों पर विचार करने का आग्रह किया.

पर्यावरणीय चिंता, बेहतर उपशामक और वृद्ध देखभाल, बढ़ती गरीबी, शरण चाहने वालों और आदिवासी लोगों के अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और कैथोलिक शिक्षा के लिए स्कूल इत्यादि धर्माध्यक्षों द्वारा रेखांकित मुद्दे हैं.

ऑस्ट्रेलियाई कैथोलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष ब्रिस्बेन के महाधर्माध्यक्ष मार्क कॉलरिज ने चुनाव के ठीक एक महीने पहले मंगलवार को जारी एक बयान में उन चिंताओं को व्यक्त किया.

धर्माध्यक्षों ने संत पापा फ्राँसिस की अपील को याद करते हुए कहा कि "एक बेहतर प्रकार की राजनीति, जो वास्तव में आम अच्छे की सेवा में हो."

"हमारा ख्रीस्तीय विश्वास हमें एक मिशनरी के रूप में जीने के लिए बुलाता है जो मानवता को येसु मसीह के प्रेम की गवाही देते हैं.हमारी मान्यताएं एक निजी आध्यात्मिकता नहीं हैं, बल्कि कार्यों में व्यक्त प्रेम के माध्यम से महसूस की जाती हैं."

धर्माध्यक्षों का कहना है कि लोकतांत्रिक समाज में ख्रीस्तीय होने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि "सभी की भलाई के लिए अपने वोट का उपयोग करके वे अपने समुदाय के लिए जो अच्छा कर सकते हैं, उस पर चिंतन करें."

ऑस्ट्रेलिया, 2019 में पिछले चुनाव के बाद के वर्षों में, चरम मौसम, कोविड -19 के प्रभावों और यूक्रेन में युद्ध के प्रभाव को देखा है, जो शांति, न्याय और सहयोगात्मक भागीदारी के राजनीतिक मूल्यों की रक्षा करने की आवश्यकता को उजागर करता है.

जैसा कि देश महामारी के मद्देनजर आर्थिक सुधार चाहता है, धर्माध्यक्ष "एक नए सामाजिक अनुबंध" का आह्वान करते हैं जो किसी भी व्यक्ति या सामाजिक समूह को पीछे छोड़े बिना आम भलाई को बढ़ावा देता है.

वे स्वास्थ्य देखभाल, विशेष रूप से वृद्ध देखभाल और उपशामक देखभाल के मानकों में सुधार की आवश्यकता की ओर इशारा करते हैं, क्योंकि मानव गरिमा के लिए समाज को "सभी लोगों के जीवन को महत्व देना चाहिए, जिसमें उनके जीवन के अंत के करीब का समय भी शामिल हैं."

धर्माध्यक्षों का कहना है कि उपशामक देखभाल तक पहुंच आवश्यक है, ताकि मरने वाले पर सहायता प्राप्त आत्महत्या का विकल्प चुनने के लिए दबाव न डाला जाए.

ऑस्ट्रेलियाई धर्माध्यक्षों ने ऐसी नीतियों का आह्वान किया जो बेरोजगारी और गरीबी में पीड़ित लोगों की सहायता करती हैं.

उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता की भी रक्षा की जानी चाहिए."भेदभाव से सुरक्षा और धार्मिक संगठनों को उनके विश्वास से प्रेरित मिशन के आधार पर चलाने की स्वतंत्रता मौलिक मानवाधिकार हैं जिनकी रक्षा की जानी चाहिए."

कलीसिया द्वारा संचालित संस्था द्वारा एक वर्ष में 777,000 से अधिक ऑस्ट्रेलियाई लोगों को शिक्षित करने के साथ, कैथोलिक धर्माध्यक्ष मतदाताओं से राजनेताओं को चुनने का आग्रह करते हैं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि "स्कूल का विकल्प सभी परिवारों के लिए एक सुलभ विकल्प बना रहे," विशेष रूप से वंचित समुदायों में.

बच्चियों के साथ बैठकर भोजन किया

 पटना. पटना जिले के जिलाधिकारी है डॉक्टर चंद्रशेखर सिंह.आज बालिका मध्य विद्यालय अमला टोला में मध्याह्न भोजन का निरीक्षण कर बच्चियों के साथ बैठकर भोजन किया गया, गुणवत्ता को और बेहतर करने का निर्देश दिया.बता दें कि बिहार शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद प्रदेशभर के आलाधिकारी लगातार स्कूलों का दौरा कर वहां की स्थिति का जायजा ले रहे हैं. इसी क्रम में राजधानी पटना के कलेक्टर डॉक्टर चंद्रशेखर सिंह अचानक से एक कन्या मध्य विद्यालय में पहुंच गए. डीएम साहब के आने से स्‍कूल में खलबली सी मच गई. शिक्षक से लेकर स्‍टाफ तक इस सोच में पड़ गए कि आखिर कलेक्‍टर अचानक से स्‍कूल क्‍यों पहुंच गए? इस दौरान मिड डे मील का भी समय हो गया था. कलेक्‍टर साहब ने झट से छात्राओं संग खुद भी जमीन पर आसन लगाकर मिड डे मील खाने बैठ गए. डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह के इस व्यवहार से हर कोई भौचक्का था. पटना डीएम के साथ जिला शिक्षा अधिकारी भी मध्याह्न भोजन करने बैठ गए. इस दौरान चंद्रशेखर सिंह को छात्राओं से गुफ्तगू करते भी देखा गया.


राजधानी पटना में भी शिक्षा विभाग के आदेश का असर देखने को मिला है. जिलाधिकारी डॉक्टर चन्द्रशेखर सिंह खुद स्कूल का औचक निरीक्षण करने पहुंच गए. उन्होंने अमला टोला कन्या मध्य विद्यालय में बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया. डीएम चन्द्रशेखर सिंह के साथ डीईओ अमित कुमार भी अचानक अमला टोला स्कूल पहुंचे. आलाधिकारियों ने यहां सबसे पहले स्कूल के किचन का जायजा लिया और मेन्यू चेक किया. जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी बच्चों के साथ पंक्ति में फर्श पर बैठ गए और तकरीबन आधे घंटे तक भोजन किया. जिले के आलाधिकारियों द्वारा इस तरह से जमीन पर बैठकर आम छात्रों की तरह भोजन करना हर किसी को आश्चर्यचकित कर रहा था.


कन्या मध्य विद्यालय में गुरुवार को मिश्रित दाल, चावल और सलाद का मेन्यू था. स्‍कूल में इसके मुताबिक भोजन की व्यवस्था की गई थी. भोजन करने के बाद जिलाधिकारी ने भोजन की क्वालिटी की जमकर तारीफ की और स्कूल को इस मामले में 100 में 100 नम्बर दिया. उन्होंने कहा कि वह बिना बताए यहां पहुंचे थे और बिल्कुल घर जैसा खाना लगा. वहीं, डीईओ ने भी कहा कि अब ऐसे ही औचक निरीक्षण किया जाएगा, ताकि खाने की क्वालिटी और बेहतर हो सके. उन्‍होंने कहा कि इससे बच्चों की उपस्थिति भी बढ़ेगी.


जिलाधिकारी डॉक्टर चंद्रशेखर को साथ में खाना खाते देख स्कूल की छात्राएं भी गौरवान्वित महसूस कर रही थीं. छात्राओं ने बताया कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि वे कलेक्टर साहब के साथ खाना खा रही हैं. डीएम ने स्कूल की रसोईया से भी मुलाकात की और खाने की तारीफ की. रसोईया गीता और रेणु देवी ने संकल्प भी लिया कि वे रोज ऐसा ही खाना खिलाएंगी और क्वालिटी से समझौता नहीं करेंगी. मिड डे मील को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है. सभी जिलों को आदेश दिया है कि स्कूल के एचएम से लेकर शिक्षा समिति के सदस्य और जिलाधिकारी तक स्कूलों में बच्चों के साथ पंक्ति में बैठकर खाना खाएंगे, ताकि मिड डे मील की गुणवत्ता बढ़ सके.


आलोक कुमार


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