बुधवार, 8 जून 2022

वितरण शिविर का उद्घाटन मुख्य अतिथि माननीय मंत्री गन्ना उद्योग

मोतिहारी. आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आज दिनांक 8 जून 2022 को डीआरसीसी भवन में दिव्यांगजनों  के बीच सहायक उपकरण एवं यंत्रों का वितरण शिविर आयोजित किया गया.वितरण शिविर का उद्घाटन मुख्य अतिथि माननीय मंत्री गन्ना उद्योग एवं विधि बिहार सरकार श्री प्रमोद कुमार , उप विकास आयुक्त श्री कमलेश कुमार सिंह, सहायक निदेशक जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण कोषांग, जिला प्रबंधक बुनियाद केन्द्र एवं डॉ लाल बाबू प्रसाद जिला महामंत्री द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई.

इस दौरान सहायक निदेशक दिव्यांगजन सशक्तिकरण द्वारा सभी अतिथियों का पुष्प


के गुच्छो से स्वागत किया गया.इस अवसर पर माननीय मंत्री बिहार सरकार द्वारा दिव्यांगजनों एंव परिसर में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इन सहायक उपकरणों की मदद से समाज के निचले पायदान पर भी जो लोग खड़े हैं, वे समावेशी विकास तथा एक विकसित समाज बनाने में अपनी भूमिका महत्वपूर्ण रुप से अदा करेंगे. दिव्यांगों को सशक्त बनाने के लिए बिहार सरकार के द्वारा दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय का गठन किया गया है.

उप विकास आयुक्त ने अपने संबोधन समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज के विकास के लिए सभी वर्ग के व्यक्तियों को साथ लेकर चलना होगा. आजादी के 75वे वर्ष पर आज कार्यक्रम का आयोजन कर 75 से अधिक दिव्यांगों को ट्राइसाइकिल, वैशाखी, छड़ी, व्हील चेअर इत्यादि का वितरण माननीय मंत्री बिहार सरकार द्वारा फीटा काट कर किया गया.मुख्यमंत्री संबल योजना के तह्त दिव्यांगजनों के लिए आयोजित क्रार्यक्रम का मुख्य उद्येश्य उन्हें भौतिक तथा सामाजिक रुप से सशक्त करना है . इस योजना का लाभ ऐसे लाभुकों को दी जाती है जिनकी सालाना आय एक लाख रुपये से कम तथा दिव्यांगता का प्रतिशत 40 या उससे अधिक हो.इस अवसर पर  प्रशासनिक पदाधिकारी सहित माननीय जनप्रतिनिधि मौजूद थे.



आलोक कुमार

बाल अधिकारों की रक्षा करने के लिए सभी नागरिकों तथा जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया


मोतिहारी. श्रम संसाधन विभाग व सेव द चिल्ड्रेन के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय  बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल अधिकार जागरूकता अभियान के तहत जागरूकता रथ समाहरणालय गेट के निकट  से श्रम अधीक्षक राकेश रंजन, बाल संरक्षण पदाधिकारी राकेश कुमार सहित अन्य जिला के अन्य अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.

इस अवसर पर श्रम अधीक्षक राकेश रंजन ने कहा कि बाल श्रम कराने वाले प्रतिष्ठानों पर कड़ी करवाई की जाएगी.उन्होंने बाल अधिकारों की रक्षा करने के लिए सभी नागरिकों तथा जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया. यह  कार्यक्रम सेव द  चिल्ड्रेन के श्रम बच्चों का खेल नहीं द्वारा संचालित किया गया.यह जागरूकता रथ सुगौली ब्लाक सहित अन्य प्रखंडों में करीब 1 सप्ताह तक बाल श्रम से मुक्ति के लिए जन जागरूकता अभियान चलाता रहेगा।  इस क्रम में शहर के विभिन्न प्रतिष्ठानों में धावा दल द्वारा छापामारी की गई और दुकानदारों से बाल श्रम नहीं करवाने का शपथ भरवाया गया.

आलोक कुमार

तालियों की गड़गड़ाहट से गूँजता रहा अधिवेशन भवन



पटना.लोकार्पण कार्यक्रम का माननीय मुख्यमंत्री, बिहार, श्री नीतीश कुमार के कर-कमलों द्वारा उद्घाटन किया गया.जिलाधिकारी, पश्चिमी चम्पारण, बेतिया, श्री कुंदन कुमार ने दिए बेतिया मॉडल (चनपटिया स्टार्टअप जोन) से संबंधित प्रेजेंटेशन.तालियों की गड़गड़ाहट से गूँजता रहा अधिवेशन भवन.इन्वेस्टर्स मीट-सह-बिहार टेक्सटाईल एवं लेदर पॉलिसी 2022 का लोकार्पण आज दिनांक 08.06.2022 को पटना के पुराना सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में किया गया.

उक्त लोकार्पण कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन माननीय मुख्यमंत्री, बिहार, श्री नीतीश कुमार द्वारा किया गया.इस कार्यक्रम में माननीय उपमुख्यमंत्री, बिहार, माननीय मंत्री, उद्योग विभाग, बिहार सहित मुख्य सचिव, बिहार, प्रधान सचिव, उद्योग विभाग सहित अन्य माननीय जनप्रतिनिधिगण तथा वरीय अधिकारीगण सम्मिलित हुए.इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री, बिहार ने कहा कि बिहार टेक्सटाईल एवं लेदर पॉलिसी 2022 के माध्यम से राज्य सरकार का प्रयास है कि बिहार को निवेशकों के लिए वस्त्र एवं चमड़ा उद्योग में बेहतर अवसरों के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके.


उन्होंने कहा कि इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य बिहार को इस क्षेत्र के घरेलू और वैश्विक निवेशकों के लिए निवेश के प्रमुख संभावित केंद्र के रूप में विकसित करना तथा कपड़ा और चमड़ा व्यवसाय शुरू करने वाले उद्यमियों के लिए कई प्रकार के प्रोत्साहन देना है.साथ ही कपड़ा और चमड़ा क्षेत्र के लिए स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना, फाइबर से लेकर फैशन तक की पूरी वैल्यू चेन बनाना, खादी, रेशम, हस्तकरघा, पावरलूम आदि के उत्पादन के बाद उसका मूल्यवर्धन करना है.

इस कार्यक्रम में जिलाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, बेतिया, श्री कुंदन कुमार द्वारा बेतिया मॉडल (चनपटिया स्टार्टअप जोन) से संबंधित सार्थक प्रजेंटेशन दिया गया तथा  वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान चनपटिया स्टार्टअप जोन को किस प्रकार से चरणबद्ध तरीके से वापस आये कामगारों की स्किल मैपिंग कराकर, उनसे सुझाव लेकर और बैंक लिंकेज कराते हुए, काफी अल्प अवधि में स्टार्टअप जोन की स्थापना की गई और इसे विकसित किया गया, की जानकारी हर्ष एवं उत्साह के साथ दी गयी.

आलोक कुमार 

बिहार में सभी धर्मों के लोग आपसी सद्भाव से रहते हैं:सीएम नीतीश कुमार

 पटना.बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को दो टूक कहा कि जिस राज्य में सरकार सतर्क है और विभिन्न धार्मिक समुदायों के सदस्य शांति से रहते हैं वहां धर्मांतरण विरोधी कानून की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा बिहार में जो स्थिति है उसको देखते हुए ऐसे किसी कानून की जरूरत ही नहीं है. बिहार में सभी धर्मों के लोग आपसी सद्भाव से रहते हैं.और इस मुद्दे को लेकर कोई खास मामले बिहार में सामने नहीं आए हैं, जो इसके लिए कानून बनाया जाए.      

बता दें कि एक गोदी मीडिया के द्वारा धर्मांतरण का बवंडर  बनाया जा रहा है.इन दिनों वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का मसला पूरे देश की सुर्खियों में है.जमीन विवाद का ये मामला लोअर कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचते हुए अब वाराणसी की जिला अदालत तक पहुंचा है. तमाम ऐतिहासिक दलीलें दी जा रही हैं.यहां तो कम से कम कोर्ट की निगरानी में मामला निपटाने का प्रयास हो रहा है.मगर बिहार के छपरा जिले में जोर जबर्दस्ती से मगाईडीह गांव में राधा प्रसाद नामक ईसाई व्यक्ति के नवनिर्मित प्रार्थना भवन में बजरंग बली का झंडा लहराया दिया है.यहां पर चार साल के बाद राधा प्रसाद प्रार्थना भवन बनाने में सफल हुआ है. इसी को आधार बनाकर एक पत्रकार ने एक चैनल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री से ये बात पूछी थी.   

सीएम नीतीश कुमार ने एक पत्रकार के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि बिहार में धर्मांतरण विरोधी कानून लाने की कोई आवश्यकता नहीं है. उनके अनुसार बिहार में जो स्थिति है उसको देखते हुए ऐसे किसी कानून की जरूरत ही नहीं है. जिस राज्य में सरकार अलर्ट है और सभी धर्म के लोग शांति से रह रहे हैं, वहां धर्मांतरण विरोधी कानून की कोई जरूरत नहीं है। वहीं हिंदुओं के धर्म बदलने के कुछ मामलों की रिपोर्ट्स को लेकर सीएम नीतीश ने कहा कि इस मामले में सरकार पूरी तरह अलर्ट है. बिहार में समुदायों के बीच कोई झगड़ा नहीं है. सभी तरह की आस्था वाले लोग शांति से रह रहे हैं.उनके लिए कोई परेशानी नहीं है. हमने अपना काम कुशलता से किया है. इसलिए यहां इस तरह के कदम की जरूरत नहीं है.सरकार की सतर्कता ने सुनिश्चित किया है कि राज्य में कोई सांप्रदायिक तनाव न हो.

आपको बता दें, बिहार में बीजेपी के साथ गठबंधन में सरकार चला रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून की कोई जरूरत नहीं है। सीएम नीतीश कुमार का कहना है कि बिहार में पूरी तरह एकता है और सभी समुदाय के लोग शांति से एकसाथ रह रहे हैं। वहीं सीएम नीतीश के इस बयान से कुछ दिनों पहले गठबंधन पार्टनर भाजपा के फायरब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बिहार प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में धर्मांतरण विरोधी कड़े कानून की मांग उठाई थी। इसके अलावा भी भाजपा के कई नेता कानून को बनाने की मांग करते आए हैं, लेकिन सीएम नीतीश के इस बयान ने साफ कर दिया है कि जेडीयू अपनी गठबंधन साथी भाजपा के इस एजेंडे में सहमति नहीं रखती है.सिर्फ धर्मांतरण विरोधी कानून ही नहीं बल्कि 1990 के दशक से ही नीतीश कुमार भाजपा के द्वारा बनाए जा रहे किसी भी कानून के समर्थन में नहीं रहे हैं, जिनमें अनुच्छेद 370, समान नागरिक संहिता, ट्रिपल तलाक, एनआरसी और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल हैं.

आलोक कुमार


दोषी शिक्षिका के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही भी प्रारंभ

 *  वर्ग कक्ष में कुर्सी पर सोने एवं छात्रा से पंखा झलवाने वाली शिक्षिका बबिता कुमारी निलंबित


योगापट्टी.पश्चिमी चंपारण जिले में है राजकीय प्राथमिक विघालय, बउअठवा,योगापट्टी.इस विघालय में वर्ग कक्ष में कुर्सी पर सोने और छात्रा के द्वारा पंखा झलने के कारण शिक्षिका श्रीमती बबिता कुमारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.निलंबन की अवधि में उक्त शिक्षिका का मुख्यालय प्रखंड ससांधन केन्द्र, योगापट्टी निर्धारित किया गया है. इसके साथ ही शिक्षिका के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही भी संचालित कर दिया गया है.

ज्ञातव्य हो कि राजकीय प्राथमिक विघालय, बउअठवा, योगापट्टी से संबंधित एक वीडियो विगत दिनों वायरल हुआ था. जिसमें शिक्षिका बबिता कुमारी को कुर्सी पर सोते एवं छात्रा द्वारा शिक्षिका को पंखा झलना स्पष्ट दिखाई दे रहा था. 

इस घटना को जिला प्रशासन द्वारा अत्यंत ही गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी को उक्त मामले की जाँच करते हुए अग्रतर कार्रवाई करने का निर्देश जिलाधिकारी, श्री कुंदन कुमार द्वारा दिया गया.शिक्षा विभाग द्वारा इस घटना की जाँच करायी गयी है तथा दोषी शिक्षिका के विरुद्ध बिहार पंचायत प्रारंभिक विद्यालय सेवा (नियुक्ति, प्रोन्नति, स्थानांतरण, अनुशासनिक कार्रवाई एवं सेवा शर्त) नियमावली 2020 के कंडिका-18 में वर्णित प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई करने के लिए संबंधित नियोजन इकाई को निर्देशित किया गया.

पंचायत सचिव-सह-सचिव, शिक्षक नियोजन इकाई, ग्राम पंचायत राज बगही पुरैना, प्रखंड योगापट्टी पश्चिमी चम्पारण द्वारा रा0 प्रा0 वि0, बउअठवा, योगापट्टी की दोषी शिक्षिका, श्रीमती बबिता कुमारी को तत्काल प्रभाव से दिनांक 07.06.2022 से निलंबित कर दिया गया है.

डीपीओ, स्थापना, शिक्षा, श्री योगेश कुमार द्वारा बताया गया कि दोषी शिक्षिका, के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गयी है.

इस मामले में जब शिक्षिका बबिता कुमारी से सवाल पूछा गया, तो शिक्षिका ने कहा कि उसकी तबियत ठीक नहीं थी. इसलिए कुर्सी पर लेटी हुई थी. इस बीच किसी ने ईर्ष्यावश वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है.


आलोक कुमार


पर्याप्त मात्रा में एंटी रैबिज वैक्सीन उपलब्ध रहता है

 और वह युवक कुत्ते ( श्वान) के काटने से भौंकने लगा, पूर्णिया जिले के रूपौली कॉलोनी के रहने वाले उमेश राम के बेटा है पंकज राम.उसे पागल कुत्ते ने काटा था. वह एंटी रैबिज वैक्सीन नहीं लिया था. दो महीने बाद पागलपन सवार...    


पूर्णिया.आजकल बिहार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावे अनुमंडल व जिला अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में एंटी रैबिज वैक्सीन उपलब्ध रहता है.जो केवल आधार दिखाने के बाद सहूलियत से मिल जाता है.पहले की तरह श्वान काटने (Dog Bite) पर 14 इंजेक्शन लगवाने पड़ते थे.उसके बाद 5 और अब तो सिर्फ 4 इंजेक्शन ( Dog Bite Injection ) ही लगवाने पड़ते हैं.इसका व्यवहारिक रूप नहीं देने के कारण उमेश राम के बेटा पंकज राम को रेबीज़ हो गया है.

रूपौली कॉलोनी के रहने वाले उमेश राम के बेटा पंकज राम को ऐसी परिस्थिति में पूर्णिया के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीज के रूप में लाया गया जिसके हरकत को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई. युवक कुत्ते जैसा हरकत कर रहा था.उसके ऊपर पागलपन सवार था. वह कुत्ते के जैसा भौंक रहा था और लोगों को काटने के लिए तैयार था. परिजनों ने युवक को हाथ पैर गमछा से बांध दिया.डाॅक्टर ने भी उसे जवाब दे दिया. युवक अपने दिमागी संतुलन पूरी तरह खो दिया था.युवक जिले के रूपौली कॉलोनी के रहने वाले उमेश राम के बेटा पंकज राम (27 वर्ष) है.

मरीज के परिजनों ने बताया कि पंकज राम को गांव में ही दो माह पूर्व एक पागल कुत्ते ने काट लिया था. पंकज ने मामूली घाव समझ कर एंटीरेबिज की सुई नहीं लिया.घाव भी ठीक हो गए. लेकिन उसे यह पता नहीं चला कि उसके लापरवाही एक दिन जानलेवा साबित हो सकता है. दो महीने बाद पागल कुत्ते के काटा हुआ असर दिखने को मिला.परिजनों ने बताया कि पंकज एक दिन पहले तक ठीक था. लेकिन मंगलवार के 10 बजे बाद वह अचानक पागल जैसा बरताव करने लगा.

जब उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया तो जांच से पता चला कि उसे रेबीज़ हो गया है. बताया जा रहा है कि पंकज की शादी 3 साल पूर्व हुई थी.अब तक वह पिता तक भी नहीं बन पाया.रेबीज़ होने की बात सुनते ही परिजनों के होश ही उड़ गए.

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डाॅ ए अहद ने बताया कि रेबीज़ का कोई इलाज नहीं है.समय पर एंटीरेबिज का सूई लेना ही बचाव है.यह संक्रमण 10 दिन से लेकर 12 साल के अंदर तक असर होता है. यह संक्रमण जंगली जानवरों के काटने से फैलता है.                 

परिवार वाले आनन-फानन में उसे लेकर पूर्णिया मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने पंकज राम का आरभिंक उपचार करने के बाद पटना रेफर कर दिया.पंकज राम के चाचा ने बताया कि 2-3 माह पहले उसके भतीजे को किसी पागल कुत्ते ने काट लिया था. उन्होंने कहा, इस बात को पंकज ने हल्के में ले लिया तथा किसी को इसकी खबर नहीं दी.जब उसकी अचानक तबीयत बिगड़ने लगी तब घरवालों ने पहले उसे रेफरल हॉस्पिटल रुपौली में एडमिट कराया.शुरुआती उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे पूर्णिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रेफर कर दिया.यहां आने के बाद चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे रेबीज की परेशानी बताई तथा पटना रेफर कर दिया.मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के डॉक्टर ने बताया कि रेबीज का कोई उपचार नहीं है, वक़्त पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लेना ही बचाव है.यह संक्रमण जंगली जानवरों के काटने से फैलता है.इस के चलते चिकित्सालय परिसर में शख्स पागल जानवरों जैसी हरकतें करता रहा जिसे देखने के लिए वहां लोगों की भीड़ जुट गई.     

 श्वान के काटने पर पीड़ित को दर्द सहने के अलावा इंजेक्शन का डर अलग से सताता है.पहले जहां श्वान काटने (Dog Bite) पर 14 इंजेक्शन लगवाने पड़ते थे, उसके बाद 5 और अब सिर्फ 4 इंजेक्शन ( Dog Bite Injection ) ही लगवाने पड़ते हैं.इससे अस्पताल पहुंचने वाले पीड़ितों का दर्द कुछ कम होगा.उन्हे अस्पताल के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे.वर्ल्ड हैल्थ आर्गेनाइजेशन ( WHO ) ने डॉग बाइटिंग पर दिए जाने वाले इंजेक्शनों को लेकर नई गाइड लाइन जारी की है.इसके तहत श्वान के शिकार को पांच के स्थान पर अब सिर्फ चार ही इंजेक्शन लगाए जाऐंगे. त्वचा के मार्ग से भी इंजेक्शन लगाकर पीड़ित को रेबीज से बचाया जा सकेगा.          

डा. दिलीप बोस के अनुसार इन्ट्रामास्क्यूलर इंजेक्शन की पहले पांच डोज डॉग बाइट से पीड़ित को दी जाती थी. अस्पताल पहुंचने के दिन से चिकित्सको द्वारा बताए अनुसार ही इंजेक्शन लगवाने होते है.इसके तहत पहला इंजेक्शन काटने के बाद अस्पताल पहुंचने पर, दूसरी डोज तीसरे दिन व तीसरी डोज 7वें तथा चोथी व अंतिम डोज 14 से 28 दिवस के बीच दी जाएगी. इसके अलावा एक नया इंजेक्शन भी आया है. इसमें रोगी को तीन दिन ही अस्पताल आना पड़ेगा.

पहली डोज काटने के बाद, फिर तीसरे दिन व तीसरा इंजेक्शन 7वें दिन लगाया जाएगा.यह इंजेक्शन (इन्ट्राडर्मल) त्वचा रूट से लगेगा.चिकित्सको का मानना है कि कम दर्द देगा ओर असर भी ज्यादा करेंगे.हालांकि इसमें एक बार में दो इंजेक्शन लगाए जाएंगे.

जानकारी के अनुसार 2002 तक न्यूरल वैक्सीन लगाए जाते थे. इन पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी.एक तो श्वान के काटने पर हुऐ घाव का दर्द ओर दूसरा एक के बाद एक 14 इंजेक्शन लगाने से पीड़ित को काफी पीड़ा सहनी पड़ती थी. चूंकि इंजेक्शन पेट में लगाए जाते थे.पेट में इंजेक्शन लगने के नाम से ही दिल दहल जाया करता था.बच्चो के लिए यह काफी मुश्किल भी ज्यादा होते है। इन इंजेक्शनो के बंद होने के बाद सेल कल्चर आए.नए शिड्यूल के अनुसार भी यही दिए जा रहे है.तरीका व माध्यम में कुछ बदलाव आया है.

एक अन्य चिकित्सक के अनुसार डॉग बाइट की तीन श्रेणियां होती है.पहली श्रेणी में श्वान की जीभ पर टच होने या चाटने पर.इस श्रेणी में जिस स्थान पर श्वान की जीच टच होती है, उसे 15 से 20 मिनट तक धोकर साफ कर लेना चाहिए.दूसरी स्थिति में खून नहीं निकले, लेकिन शरीर पर खरोंच आ जाए तो वेक्सीन लगवाना जरूरी है.तीसरी स्थिति में जब श्वान के काटने पर खून आ जाए तो रेबीज की रोकथाम के लिए इंजेक्शन के साथ इम्यूनोग्लोबिन भी साथ में लगवाने होते है.शहर में श्वानो का आंतक है.शहर के अस्पताल में प्रतिदन 2 से 3 पीड़ित पहुंचते है.बताया गया कि प्रतिवर्ष एक हजार के करीब लोग श्वानों के कोप के शिकार हो रहे है.


आलोक कुमार   

मंगलवार, 7 जून 2022

24 जून एक घंटे की राष्ट्रीय धन्यवादी प्रार्थना सेवा का आयोजन


पटना.पटना.अभी हाल में रोम में ‘संत‘ बनने वाले संत देवसहायम को श्रद्धांजलि अर्पित करने का निर्णय लिया गया है.पेंटेकोस्ट के बाद दूसरे रविवार के बाद 24 जून दिन शुक्रवार को येसु का पवित्र हृदय का पर्व है. उस दिन संत देवसहायम को श्रद्धांजलि अर्पित किया जाएगा.मौके पर सभी येसु का पवित्र हृदय के पवित्र परिवारों के लिए 8.30 से 9.30 बजे रात्रि  एक घंटे की राष्ट्रीय धन्यवादी प्रार्थना सेवा का आयोजन किया गया है.


बता दें कि भारत का सबसे बड़ा चर्च रोमन कैथोलिक चर्च ही है.रोमन कैथोलिक कुल आबादी का 1.55  प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनकी संख्या लगभग 20 मिलियन से अधिक हैं. भारत में 10,701 पैरिश और 174 धर्मप्रांत हैं, जो 29 प्रांतों में संगठित हैं.इनमें से 132 लैटिन कैथोलिक चर्च के हैं.भारत में लैटिन कैथोलिक चर्च के द्वारा शुक्रवार 24 जून 2022 को एक घंटे की राष्ट्रीय धन्यवादी प्रार्थना सेवा आयोजित करेगा.

यह भी बता दें कि संत देवसहायम की समाधि संत फ्रांसिस जेवियर्स कैथेड्रल, कोट्टार, तमिलनाडु में है वहां से ही से प्रार्थना की जाएगी. यूचरिस्टिक आशीर्वाद के साथ विशेष प्रार्थना सेवा कैथोलिक उपग्रह टेलीविजन चैनलों जैसे माधा टीवी, शालोम टीवी, गुडनेस टीवी, दिव्यवाणी टीवी, आत्मदर्शन टीवी, ईश्वरी टीवी, सीसीआर टीवी और प्रार्थना भवन टीवी पर प्रसारित की जाएगी. इसे प्रमुख कैथोलिक यूट्यूब चैनलों के माध्यम से भी स्ट्रीम किया जाएगा.

माननीय जॉर्ज एंटोनीसैमी, उपाध्यक्ष, सीसीबीआई और मद्रास-मैलापुर के आर्चबिशप प्रार्थना सेवा की शुरुआत करेंगे.दिल्ली के आर्चबिशप माननीय अनिल कूटो, महासचिव, सीसीबीआई और कोट्टार के बिशप माननीय नाजरीन सूसाई के साथ सिस्टर एनी कुट्टिकाड एसएमआई स्तोत्र का जाप करेगा. डॉ. जॉन कुलंदई, वाइस पोस्टुलेटर,संत देवसहायम का संतीकरण सुसमाचार की घोषणा करेगा और महामहिम बॉम्बे के आर्चबिशप सह कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस प्रवचन देंगे.

बाइबिल के लिए सीसीबीआई आयोग के कार्यकारी सचिव डॉ. येसु करुणानिधि और भारत के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु हिंदी, तमिल, मलयालम, कन्नड़, तेलुगु, बंगाली और बडगा सात भाषाओं में भक्तों की प्रार्थनाओं का नेतृत्व करेंगे. त्रिवेंद्रम के आर्चबिशप माननीय थॉमस जे. नेट्टो संत देवसहायम की प्रार्थना का पाठ करेंगे. संत देवसहायम के लिए गीत गाना बजानेवालों द्वारा संत की हिमायत का आह्वान करते हुए गीत गाना गाया जाएगा.


महामहिम कार्डिनल-चुनाव फिलिप नेरी फेराओ, अध्यक्ष सीसीबीआई और गोवा और दमन के आर्चबिशप सभी परिवारों को येसु के पवित्र हृदय को समर्पित करेंगे.मदुरै के महाधर्माध्यक्ष एंटनी पप्पू सामी समापन प्रार्थना का पाठ करेंगे और मोस्ट रेव लियोपोल्डो गिरेली, भारत के अपोस्टोलिक नुनसियो यूचरिस्टिक आशीर्वाद देंगे.

भारत के  सीसीबीआई    के अध्यक्ष द्वारा जारी परिपत्र में सभी से अनुरोध किया जाता है, विशेष रूप से परिवारों और धार्मिक समुदायों से, इस प्रार्थना सेवा में शामिल हो और इस कार्यक्रम के बारे में भक्तों के साथ साझा करें.जिनके परिवार और समुदाय के सदस्य विदेश में हैं, ताकि वे भी एक परिवार के रूप में शामिल हो सके.

यह आशा व्यक्त किया गया है कि भारत में सभी श्रद्धालु इस एक घंटे में एक परिवार के रूप में बिताएंगे, इस प्रकार कैथोलिक धर्म और चर्च की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता की गवाही देंगे.भारत में लैटिन कैथोलिक चर्च में 132 लैटिन कैथोलिक चर्च और 20 मिलियन भक्तगण विश्वासी हैं.

300 साल बाद वेटिकल से संत की उपाधि


18वीं सदी में ईसाई धर्म अपनाने वाले देवसहायम पिल्लई को उनके जन्म के 300 साल बाद वेटिकल से संत की उपाधि पाने वाले पहले संत बन गए हैं. वैटिकन में पोप फ्रांसिस ने रविवार को पिल्लई के संत बनने की प्रक्रिया पूरी की है. देवसहायम यह उपाधि पाने वाले पहले आम भारतीय हैं. इस तरह पोप फ्रांसिस ने देवसहायम को संत की उपाधि प्रदान करने का संचालन किया. यह पहली बार हुआ कि कोई भारतीय आम आदमी क्रिश्चियन धर्म में इस प्रकार से संत की उपाधि प्राप्त कर रहा किया. पोप ने उनके अलावा दुनियाभर के 9 अन्य लोगों को भी संत की उपाधि से नवाजा है.पिल्लई के चमत्कारिक परोपकारी कार्यों को पोप फ्रांसिस ने साल 2014 में मान्यता दी थी.उनको 15 मई 2022 में संत घोषित किया गया.

साल 1745 में अपनाया ईसाई धर्म

देवसहायम पिल्लई का जन्म 23 अप्रैल 1712 को तमिलनाडु के कन्याकुमारी में हिंदू परिवार में हुआ था और उन्होंने 1745 में ईसाई धर्म अपना लिया और अपना नाम लाजरूस रख लिया था.इसका मतलब होता है प्रभु की मदद.तमिल और मलयालम भाषाओं में इसका अनुवाद देवसहायम होता है. इसी नाम से उन्हें अधिक पहचान मिली. धर्मांतरण के कारण उनको काफी नाराजगी झेलनी पड़ी थी. पिल्लई तत्कालीन त्रावणकोर के राजा के दरबार में एक अधिकारी थे. राजा मार्तंड वर्मा के अधीन त्रावणकोर सेना के कमांडर के रूप में बाद के कार्यकाल के दौरान उन्हें डच नौसेना अधिकारी कैप्टन डी लेनॉय द्वारा ईसाई धर्म से परिचित कराया गया था. देवसहायम के पिता वासुदेवन नंपुथिरी एक ब्राह्मण थे और उनकी मां का नाम देवकी अम्मा नायर जाति की थी.इसलिए उनका नाम नीलकंद पिल्लई रखा गया.

साल 1752 में हुए शहीद

साल 2020 में वेटिकन ने कहा था कि प्रचार करते समय उन्होंने विशेष रूप से जातिगत मतभेदों के बावजूद सभी लोगों की समानता पर जोर दिया. उनका धर्म बदलना उनके मूल धर्म से जुड़े प्रमुखों को रास नहीं आया.उनके खिलाफ राजद्रोह, जासूसी के झूठे आरोप लगाए गए.शाही प्रशासन के पद से हटाया गया और जेल में डाल दिया गया.14 जनवरी 1752 को देवसहायम को गोली मार दी गई. जिसके बाद उन्हें शहीद का दर्जा मिला. कोट्टर में 2 दिसंबर 2012 को ईसाई धर्म अनुसार उन्हें सौभाग्यशाली (ब्लेस्ड) घोषित किया गया था.15 मई 2022 को संत घोषित किये गये.

आलोक कुमार


The Configure Featured Post option in Blogger allows you to highlight a selected post prominently on

चिंगारी प्राइम न्यूज़

 About Us | चिंगारी प्राइम न्यूज़ Chingari Prime News एक स्वतंत्र हिंदी डिजिटल न्यूज़ और विचार मंच है, जिसका उद्देश्य सच्ची, तथ्यपरक और ज़मी...

How to Configure Popular Posts in Blogger The Popular Posts widget highlights your most viewed post