सोमवार, 18 सितंबर 2023

केरल के “रिचर्ड हे” और पश्चिम बंगाल के “जॉर्ज बेकर” दो एंग्लो-इंडियन सांसद

 

पटना. पटना संसदीय क्षेत्र के सांसद रविशंकर प्रसाद है.जब केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद थे,तब उन्होंने देश भर में केवल 296 एंग्लो इंडियन होने का दावा पेश कर संवैधानिक अधिकारों से एंग्लो इंडियन समुदाय को वंचित करने का खेला कर दिया. भारतीय संविधान का 126वां संविधान संशोधन विधेयक का 104वां संशोधन.इस विधेयक के तहत भारतीय संविधान के अनुच्छेद 334 में संशोधन किया गया.इस विधेयक के तहत लोक सभा और विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए आरक्षण की अवधि को 10 वर्ष और बढ़ाया गया.इसमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में 25 जनवरी, 2030 तक सीटों का आरक्षण बढ़ाने का प्रावधान किया गया.12 दिसंबर, 2019 को राज्य सभा में पारित किया गया.लोक सभा द्वारा यह विधेयक इससे पूर्व पारित किया जा चुका था.पूर्व में इस आरक्षण की समय सीमा 25 जनवरी, 2020 तक थी. इस संविधान संशोधन विधेयक द्वारा संसद में एंग्लो इंडियन समुदाय के प्रदत्त आरक्षण को समाप्त कर दिया गया है. आरक्षण के तहत एंग्लो-इंडियन समुदाय के 2 सदस्य लोक सभा में प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे.यूपी के दोनों सदनों ने भी अपने इकलौते एंग्लो इंडियन सदस्य डॉ. डेंजिल जे. गोडिन की अपील को अनसुना करते हुए इस विधेयक पर मुहर लगा दी. 25 जनवरी के बाद उनकी नुमाइंदगी खत्म हो गयी. आज भी एंग्लो इंडियन समुदाय खफा है.एंग्लो इंडियनों के लिए संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व 2020 में केंद्र सरकार के अनुचित रवैये द्वारा यह कहकर छीन लिया गया कि ‘2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, एंग्लो इंडियनों की संख्या केवल 296 है.पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एंग्लो-इंडियनों के संवैधानिक अधिकार पर पूर्ण ग्रहण लगा दिया.फेडरेशन ऑफ एंग्लो इंडियन असोसिएशन (एफएआईएआई) के प्रेजिडेंट और पूर्व सांसद केरल के पूर्व सांसद चार्ल्स डायस ने कहा कि एफएआईएआई के अनुमान के अनुसार, देश भर में लगभग 4 लाख एंग्लो इंडियन फैले हुए हैं. गोवा और दमन के आर्कबिशप, डॉ. फ़िलिप नेरी फ़ेराओ को जो एनीमेशन सेंटर, महाबलीपुरम, चेन्नई, तमिलनाडु में नेशनल एपिस्कोपल कॉन्फ्रेंस ऑफ़ इंडिया की 31वीं पूर्ण सभा द्वारा सीसीबीआई के नए अध्यक्ष के रूप में चुना गया. इसके अलावे भारत में कैथोलिक बिशप परिषद (सीसीबीआई) के पदेन अध्यक्ष फेराओ हैं, कथित तौर पर इस मुद्दे का समर्थन करने के लिए सहमत हुए. महासंघ ने देश के विभिन्न इलाकों में एंग्लो इंडियंस की पहचान करने और उन्हें पुनर्गठित करने में भी सीसीबीआई से मदद मांगी. समूह ने एंग्लो इंडियंस की संख्या का पता लगाने के लिए एक सर्वेक्षण करने की योजना बनाई है, जो एफएआईएआई को एंग्लो- इंडियंस के लिए संसद में दो नामांकित सीटों को बहाल करने के लिए केंद्र को याचिका दायर करने में मदद करेगा.इस पर कार्य जारी है. बताया जाता है कि एंग्लो इंडियंस में “कई लोग बेरोजगार हैं, किराए के मकानों में रह रहे हैं. हम एक छोटे से अल्पसंख्यक हैं जिनमें बहुत सी विकलांगताएँ हैं. पहचान का संकट है और आवाज की कमी के कारण, उनकी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए कोई जगह नहीं है, केरल के पूर्व सांसद चार्ल्स डायस जो एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, ने कहा. डायस के साथ दिल्ली महाधर्मप्रांत के एक पुरोहित, फादर निकोलस डायस भी थे, जो एंग्लो इंडियनों के लिए पुरोहित के रूप में कार्य करते हैं. फादर निकोलस बेनौलीम के रहने वाले हैं और उन्हें कार्डिनल फेराओ ने पुरोहित नियुक्त किया था.

  सवाल यह है कि क्या केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के दावे के अनुरूप देश भर में 296 एंग्लो इंडियन ही बचे हैं? यूपी के इकलौते एंग्लो इंडियन सदस्य डॉ. डेंजिल जे. गोडिन कहते हैं कि जब जनगणना के प्रारूप में एंग्लो इंडियन का कॉलम ही नहीं है तो यह गिनती कहां से हो गई? यूपी में ही 50 हजार से अधिक इनकी संख्या है. इस कानून को लागू होने के लिए आधे राज्यों का अनुमोदन जरूरी है. चूंकि, इसमें एससी-एसटी का भी आरक्षण जुड़ा है, इसलिए कमोबेश हर राज्य से सहमति मिलती नजर आ रही है. केरल विधानसभा ने जरूर प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा है कि एंग्लो इंडियन का आरक्षण बरकरार रखा जाए.  डेंजिल जे. गोडिन कहते हैं कि आजादी के बाद बहुत से एंग्लो इंडियन यहां से चले गए थे. जो यहां रुके उन्होंने इसे अपना देश माना और इसके विकास में अपना योगदान दे रहे हैं. 1965 और 1971 की लड़ाई लड़ने वालों में भी एंग्लो इंडियंस थे जिन्हें इनकी बहादुरी के लिए वीरता पुरस्कारों से नवाजा गया. संविधान की मूल मंशा और भरोसे के तहत हमारा प्रतिनिधित्व बनाए रखा जाना चाहिए। फेडरेशन ऑफ एंग्लो इंडियन असोसिएशन के प्रेजिडेंट और पूर्व सांसद चार्ल्स डायस का कहना है कि 3.47 लाख से अधिक एंग्लो इंडियन उनके संगठन ने ही चिह्नित किए हैं.इसमें पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों के आंकड़े ही नहीं है. कुछ लोगों ने जनगणना के दौरान गलती से धर्म के कॉलम में एंग्लो इंडियन लिख दिया और कानून मंत्री ने उसे आंकड़े के तौर पर पेश कर दिया. आखिर जनगणना में जाति के आंकड़े हैं नहीं और एंग्लो इंडियन धर्म होता नहीं, तो यह संख्या कहां से आई? सरकार इतनी जल्दबाजी में थी कि उसने हमारे प्रतिनिधियों से बात करना जरूरी नहीं समझा. सरकार ने आगे बढ़ाने की जगह उनसे बात रखने का मंच भी छीन लिया. जब संविधान सभा का गठन हुआ तो एंग्लो इंडियन समुदाय के प्रतिनिधि के तौर पर फ्रेंक एंथोनी को भी संविधान सभा का सदस्य बनाया गया.एंथोनी ने महात्मा गांधी, सरदार पटेल और नेहरू से प्रतिनिधित्व से जुड़ा सवाल उठाया था. इसके बाद आर्टिकल 331 जोड़ा गया. यह कहता है कि राष्ट्रपति अधिकतम दो सदस्य इस समुदाय से नामित कर सकते हैं. संविधान का अनुच्छेद 133 कहता है कि अगर राज्यपाल को लगता है कि एंग्लो इंडियन का पर्याप्त प्रतिनिधित्व विधानसभा में नहीं है तो वे एक व्यक्ति को नामित कर सकते हैं। यूपी, उत्तराखंड, बिहार, आंध्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल, एमपी, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और बंगाल में इनके प्रतिनिधि नामित हैं. भारत की संसद; लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति से मिलकर बनती है. देश में लोकसभा के लिए अधिकतम 552 सदस्य (530 राज्य $ 20 केंद्र शासित प्रदेश $ 2 एंग्लो इंडियन) हो सकते हैं, लेकिन विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लोकसभा के लिए केवल 543 सदस्य चुने जाते हैं और यदि चुने गए 543 सांसदों में एंग्लो इंडियन समुदाय का कोई सदस्य नहीं चुना जाता है तब भारत का राष्ट्रपति इस समुदाय के 2 सदस्यों का चुनाव कर सकता है.




एंग्लो इंडियन किन्हें कहा जाता है?


संविधान के अनुच्छेद 366 (2) के तहत एंग्लो इंडियन ऐसे किसी व्यक्ति को माना जाता है जो भारत में रहता हो और जिसका पिता या कोई पुरुष पूर्वज यूरोपियन वंश के हों. यह शब्द मुख्य रूप से ब्रिटिश लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो कि भारत में काम कर रहे हों और भारतीय मूल के हों.  एंग्लो-इंडियन एकमात्र समुदाय है जिसके प्रतिनिधि लोकसभा के लिए नामित होते हैं क्योंकि इस समुदाय का अपना कोई निर्वाचन क्षेत्र नहीं है. यह अधिकार फ्रैंक एंथोनी ने जवाहरलाल नेहरू से हासिल किया था. एंग्लो-इंडियन समुदाय का प्रतिनिधित्व लोकसभा में दो सदस्यों द्वारा किया जाता है. अनुच्छेद 331 के तहत राष्ट्रपति लोकसभा में एंग्लो इंडियन समुदाय के दो सदस्य नियुक्त करते हैं. इसी प्रकार विधान सभा में अनुच्छेद 333 के तहत राज्यपाल को यह अधिकार है कि (यदि विधानसभा में कोई एंग्लो इंडियन चुनाव नहीं जीता है) वह 1 एंग्लो इंडियन को सदन में चुनकर भेज सकता है. बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, झारखंड, उत्तराखंड और केरल जैसे राज्यों में विधान सभा के लिए एंग्लो इंडियन समुदाय का एक-एक सदस्य नामित है. जबकि वर्तमान में लोकसभा में 2 सदस्य भारतीय जनता पार्टी की तरफ से नामित हैं इनके नाम नीचे लिस्ट में हैं.




लोकसभा के लिए एंग्लो इंडियन समुदाय के सभी नामित सदस्यों की सूची इस प्रकार है;


नामित होने का वर्ष 1951-52 सदस्य का नाम फ्रैंक एंथोनी व ए.ई.टी.बैरो, निर्दलीय.1957 फ्रैंक एंथोनी व ए.ई.टी.बैरो, निर्दलीय (IPG). 1962 फ्रैंक एंथोनी व ए.ई.टी.बैरो,निर्दलीय (IPG). 1967 फ्रैंक एंथोनी व ए.ई.टी.बैरो,निर्दलीय (IPG). 1971 फ्रैंक एंथोनी व मार्जोरी गॉडफ्रे,नामित, यूनाइटेड इंडिपेंडेंट पार्लियामेंट्री ग्रुप. 1977 ए.ई.टी.बैरो,निर्दलीय व रूडोल्फ रॉड्रिक्स,जनता पार्टी.1980 फ्रैंक एंथोनी व ए.ई. टी.बैरो,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस,1984. फ्रैंक एंथोनी व ए.ई.टी.बैरो ,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस,1989.जॉस फर्नांडीज व पॉल मंतोष,जनता दल.1991फ्रैंक एंथोनी (1993 तक),रॉबर्ट ई विलियम्स व शीला एफ ईरानी (1995-1996),भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस.1996,नील ओ ब्रायन व हेडविग रेगो,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस,1998.बीट्रिक्स डिसूजा व नेविल फोली,समता पार्टी.1999 बीट्रिक्स डिसूजा, समता पार्टी व डेन्ज़िल बी एटकिंसन, भारतीय जनता पार्टी.2004 इंग्रिड मैक्लोड व फ्रांसिस फैन्थोम, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस.2009 इंग्रिड मैक्लोड व चार्ल्स डायस,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस.2014 जॉर्ज बेकर व रिचर्ड हे,भारतीय जनता पार्टी.वर्तमान में, लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के दो एंग्लो-इंडियन सांसद थे.ये हैं केरल के “रिचर्ड हे” और पश्चिम बंगाल के “जॉर्ज बेकर”. संविधान की 10वीं अनुसूची के मुताबिक कोई एंग्लो इंडियन सदन में मनोनीत होने के 6 महीने के अंदर किसी पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं. सदस्यता लेने के बाद वो सदस्य पार्टी व्हिप से बंध जाते हैं और उन्हें पार्टी के मुताबिक सदन में काम करना पड़ता है.


अधिकारियों को दिये आवश्यक दिशा-निर्देश

  
मुख्य बिंदु-  ग्रामीण पथों का बेहतर रखरखाव विभाग द्वारा करायें, इसके लिए आवश्यकतानुसार अभियंताओं और तकनीकी कर्मियों की शीघ्र नियुक्ति करायें। निर्माण के साथ - साथ मेंटेनेंस को लेकर अभियंता पथों का स्थलीय निरीक्षण करें। विभाग द्वारा मेंटेनेंस करवाने से खर्च में भी बचत होगी और लोगों को नौकरी और रोजगार के अवसर मिलेंगे...

पटना । मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प' में ग्रामीण कार्य विभाग की समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये । बैठक में ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव श्री पंकज कुमार पाल ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण की योजनावार स्थिति एवं बिहार ग्रामीण पथ विभागीय अनुरक्षण नीति के संबंध में प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी। 

   ग्रामीण विभाग के सचिव ने बताया कि लक्षित बसावटों में सम्पर्कता प्रदान करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना एवं अन्य राज्य योजना, ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना, ग्रामीण पथों के नवीनीकरण एवं उन्नयन कार्य आदि कार्यों की अद्यतन जानकारी दी। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क होने से लोगों का आवागमन आसान होता है। ग्रामीण पथों का बेहतर रखरखाव विभाग द्वारा ही कराया, इसके लिए आवश्यकतानुसार अभियंताओं और तकनीकी कर्मियों की शीघ्र नियुक्ति करायें। 

          विभाग के अभियंता पथों के निर्माण और मेंटेनेंस के लिए जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करेंगे तो बेहतर सड़कों का निर्माण होगा और सड़कें मेंटेन भी रहेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संसाधनों की जो भी आवश्यकता होगी उसे पूरा किया जायेगा। निर्माण के साथ-साथ मेंटेनेंस को लेकर पथों का स्थलीय निरीक्षण अभियंता करते रहें। ग्रामीण कार्य विभाग बचे हुए टोलों के लिये भी पथों का निर्माण कार्य जल्द पूर्ण करायें ताकि उनकी सम्पर्कता सुलभ हो सके। ग्रामीण इलाकों में जिन पथों की चौड़ीकरण की आवश्यकता है उसका आकलन कर उस पर काम करें। क्षतिग्रस्त पथों का पुनर्निर्माण कार्य भी तेजी से कराएं। मुख्यमंत्री ग्रामीण टोला संपर्क योजना तथा अन्य निर्माणाधीन पथों का निर्माण तेजी से पूर्ण करें। 

      मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हमलोगों ने बेहतर सड़क और पुल-पुलियों का निर्माण कराया गया है। किए गए कार्यों को लोगों को बतायें, जिससे उन्हें पता चले कि राज्य सरकार द्वारा अपने संसाधन से बेहतर ग्रामीण पथों का निर्माण कराया गया और उसकी देखभाल की जा रही है। हमलोगों का उद्देश्य सिर्फ बेहतर सड़क और पुल-पुलियों का निर्माण करना ही नहीं है बल्कि उसका अच्छे से मेंटेनेंस भी उतना ही जरूरी है। विभाग द्वारा मेंटेनेंस करने से खर्च में भी बचत होगी और लोगों को नौकरी और रोजगार के अवसर मिलेंगे। 

         बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री तेजस्वी प्रसाद यादव, वित्त, वाणिज्य कर एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, विकास आयुक्त श्री विवेक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ० एस० सिद्धार्थ, वित्त विभाग के प्रधान सचिव श्री अरविंद कुमार चौधरी, ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव श्री पंकज कुमार पाल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह सहित अभियंता गण उपस्थित थे। 

आलोक कुमार

रविवार, 17 सितंबर 2023

सरकार सभी महिलाओं को मासिक तीन हजार रुपए आर्थिक सहयोग दें


* सीतामढ़ी में वृद्धा पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर सैकड़ों की संख्या में लोगों ने किया प्रदर्शन, 400 की जगह 3 हजार हो पेंशन

* सहरसा में बुजुर्गों को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने अधिकार मार्च निकाला

* कर्नाटक और मध्यप्रदेश सरकार की तरह बिहार सरकार में भी सरकार सभी महिलाओं को मासिक तीन हजार रुपए आर्थिक सहयोग दें

सहरसा. बिहार के सहरसा में बुजुर्गों को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने अधिकार मार्च निकाला है.इसी तरह की मिली जुली मांग एकता परिषद बिहार के द्वारा की जा रही है.इस संदर्भ में एकता परिषद का नेता विजय गोरैया कहते हैं कि कर्नाटक और मध्य प्रदेश सरकार की तरह बिहार सरकार भी सरकार सभी महिलाओं को  मासिक तीन हजार रुपए आर्थिक सहयोग दें.

        अब बिहार में प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू कर दी गयी है. लोकसभा का चुनाव 2024 में और राज्य विधानसभा का चुनाव 2025 में है.इस समय राज्य में प्रदेश सरकार ने Mukhyamantri Vridhjan Pension Yojana की शुरुआत की है.सभी बूढ़े बुजर्गों को बुढ़ापे में अच्छे से जीवन व्यतीत करने के आर्थिक सहायता स्वरूप पेंशन दी जाएगी. बिहार वृद्धजन पेंशन योजना को दो भागों में बांटा गया है.जिस बुजुर्ग की आयु 60 से 79 वर्ष के बीच में उसको 400 रुपये हर माह पेंशन के रूप में प्रदान की जाएगी.वहीं जिस बुजुर्ग की उम्र 80 वर्ष से अधिक है उसको 500 रुपये हर माह पेंशन के तौर पर दी जाएगी.

      इस वृद्धजन पेंशन योजना से वृद्धजन नाखुश है.बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी,मुनाफाखोरी आदि से परिवार में आर्थिक संकट बढ़ती जा रही है.इसके आलोक में प्रभावित लोग सड़क पर उतरने लगे है.सीतामढ़ी में वृद्धा पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर सैकड़ों की संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया. फिलहाल वृद्ध लोगों को पेंशन में 400 रुपये दिए जाते हैं. जिसे 3 हजार तक करने की मांग की जा रही है. 

       आज शनिवार को बिहार के सहरसा में बुजुर्गों को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने अधिकार मार्च निकाला है.ग्रामीणों ने इस दौरान नारा लगाया कि सरकार करे दो हजार, नहीं तो होगा तकरार. वृद्धा पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर पंचगछिया ग्राम पंचायत के मुखिया के नेतृत्व में अधिकार मार्च निकाला गया.

      पंचगछिया ग्राम पंचायत के मुखिया के नेतृत्व में निकले गए अधिकार मार्च में बड़ी संख्या में महिला, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए. सभी के हाथों में मांगों के समर्थन में लिखी गई नारे की तख्तियां थी. सभी अधिकार मार्च में एक ही मांग कर रहे थे कि भारत के अन्य राज्यों के पेंशन की भांति बिहार के बुजुर्गों को भी पेंशन दें. इसी मांग के समर्थन में अधिकार मार्च निकाल कर सरकार के वर्तमान पेंशन योजना का विरोध करते हुए नई पेंशन योजना लागू करने की लोगों ने मांग की.

राज्य सरकार द्वारा मासिक आर्थिक सहयोग दिए जाने की आवश्यकता 

जन संगठन एकता परिषद के संस्थापक पी.व्ही.राजगोपाल है.इस समय एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणसिंह परमार हैं.वे मुजफ्फरपुर में आए थे.अपने संबोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष रणसिंह परमार ने कहा कि कर्नाटक और मध्य प्रदेश की सरकार महिलाओं का आर्थिक स्वावलंबन के लिए आर्थिक सहयोग दिया जाता है.उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से निवेदन किए कि आप भी बिहार की सभी महिलाओं को मासिक आर्थिक सहयोग तीन हजार रुपए दें ताकि बढ़ती महंगाई के बीच में खुद का परिवार की जिंदगी बचा सके.

 बिहार सरकार ध्यान दें 

इस समय छोटे-मोटे घरेलू जरूरतों पूरा करने का तनाव महिलाएं झेल रही.अगर दिल्ली में 'आप' सरकार फ्री-बस यात्रा की सुविधा दे सकती है.राजस्थान एवं मध्य प्रदेश की सरकार में 500/-रु. या इससे कम कीमत पर गैस-सिलेंडर उपलब्ध करा सकती हैं.कर्नाटक एवं मध्यप्रदेश की सरकार 2000/-रु. व 1000/-रु. क्रमश: नकद प्रत्येक माह प्रदान कर सकती हैं.तो बिहार में महिला मतदाताओं की अमूल्य वोट पाकर बार-बार सत्ता में आने वाली नीतीश सरकार बेहाल महिलाओं को 'विशेष मासिक आर्थिक सहयोग' क्यों नहीं प्रदान कर सकती.  नीतीश-सरकार के लिए महिलाओं का कर्ज चुकता करने का समय आ गया है.

इसके आलोक में जोरदार अभियान चलाने का निश्चय

 एकता परिषद, बिहार का प्रांत स्तरीय अभियान.अभियान का नाम - "मासिक तीन हजार".संदर्भ--  गृह-प्रबंधन में आर्थिक खींचतान से तनाव ग्रस्त बिहार की महिलाओं के लिए, कर्नाटक एवं एम.पी. की तरह,  राज्य सरकार से मासिक आर्थिक सहयोग की मांग. हर महिला के लिए मात्र तीन हजार रुपये मासिक. अभियान-अवधि-27 सितंबर शहीद भगत सिंह जयंती से 11 अक्टूबर जे.पी. जयंती तक. इस अवधि में जनता के बीच कहीं जन-संपर्क, कहीं हस्ताक्षर अभियान, कहीं संवाद-यात्रा तो कहीं प्रचार-गोष्ठी के कार्यक्रम चले. कार्यक्षेत्र के हर एवं जिला अधिकारी को, माननीय मुख्यमंत्री महोदय को संबोधित मांग-पत्र भी सौंपे जाएंगे. 


आलोक कुमार

पल्ली पुरोहित फादर वाल्टर सुशील गाब्रिएल क्रूसवीर बच्चों को देखकर खुश

 दरभंगा.आज खास दिन दरभंगा में रहा.यहां पर क्रूसवीर बच्चों का दिवस रहा.क्रूसवीर बच्चे सफेद परिधान में थे.घर से ही सफेद परिधान में बच्चे होली रोसरी चर्च  में पहुंचे.दरभंगा पल्ली के प्रधान पल्ली पुरोहित फादर वाल्टर सुशील गाब्रिएल क्रूसवीर बच्चों को देखकर खुश थे.

क्रूसवीर बच्चों का रहा दिवस                                   

आज 17 सितंबर है.दरभंगा पल्ली में क्रूसवीर दिवस समारोह मनाया गया. इस अवसर पर क्रूसवीर के बच्चों ने क्रूसवीर को लेकर शपथ लिया और क्रूसवीर का सफर शुरू किया.इस अवसर पर मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के फादर वाल्टर सुशील गाब्रिएल और गोरखपुर धर्मप्रांत के फादर अनीश और फादर नोएल (सी0एस0टी0) ने मिलकर मिस्सा किए.दोनों पुरोहित गोरखपुर धर्मप्रांत के सिरो मालाबार से जुड़े हैं.दोनों फादर अनीश और फादर नोएल (सी0एस0टी0) के बिशप गोरखपुर धर्मप्रांत में रहते हैं.

क्रूस के चार हथियार 

यह कहा जाता है कि प्रभु येसु ख्रीस्त के वचनों पर चलने के लिए क्रूस के चार हथियार प्रार्थना, परम प्रसाद, बलिदान और प्रेरिताई है.उसको अपने जीवन में आत्मसात करना जरूरी है, तभी ईश्वरीय शक्ति की प्राप्ति होगी. 

सही संस्कार की प्राप्ति के लिए विशेष अर्चना 

इस मौके पर बच्चे-बच्चियों को उनके माता-पिता ने फूल देकर आशीर्वाद दिया और उपस्थित भक्तों ने बच्चों के सही संस्कार की प्राप्ति के लिए विशेष अर्चना की. सभी बच्चों को आध्यात्मिक जीवन में मजबूत बनने का आशीर्वाद दिया.


आलोक कुमार

पवित्र मिस्सा का संचालन महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा ने किया

 पटना.राजधानी पटना में राजा बाजार है.यहां के फ्रेंड कॉलोनी,एजी कॉलोनी रोड में  रोमन कैथोलिक समुदाय का चर्च है.इस का चर्च का नाम संत मेरी चर्च है.इसको 2005 में स्थापित किया गया.कैथोलिकों की संख्या 31 है. पल्ली पुरोहित फादर जोसेफ राज है.यहां पर संत मेरी एकेडमी संचालित है.

  आज यहां पल्ली दिवस धूमधाम से मनाया गया.पल्ली दिवस के अवसर पर पवित्र मिस्सा का संचालन महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा ने किया.उनके साथ बाढ़ पल्ली के फादर तंबी, पल्ली पुरोहित फादर जोसेफ राज और महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष के सेक्रेटरी फादर एलेक्स वी साथ में थे.

  सर्वप्रथम पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा ने 13 बच्चों को दृढ़करण संस्कार दिया.उसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम किया गया.बच्चों ने आगत अतिथियों का स्वागत किया. बच्चे,महिला,एवं पुरुषों के द्वारा गीत व नृत्य प्रस्तुत किया गया. अंत में पल्ली वासियों ने प्रीतिभोज किया.उसके बाद धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम समाप्त किया गया.


आलोक कुमार

राहुल सिंह को प्रवक्ता बनाया

 पटना. भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री श्रीनिवास बी0भी0 ने प्रदेश से लेकर जिला स्तर पर युवा कांग्रेस में प्रवक्ताओं को नियुक्त किया है. इसी क्रम में बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस के विशाल कुमार यादव को मुख्य प्रवक्ता तथा संस्कार यादव, मो0 कमालुद्दीन राजा, अजमेर करीम, जयवर्द्धन सिंह, अमित पाण्डेय, शशांक रंजन, सुन्दरम पाठक एवं राहुल सिंह को प्रवक्ता बनाया गया है.

बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष शिव प्रकाश गरीब दास ने इन लोगों के मनोनयन के लिए भारतीय युवा कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि इन प्रवक्ताओं के मनोनयन से युवा कांग्रेस का पक्ष को मजबूती के साथ प्रेस मीडिया के सामने आयेगा.


आलोक कुमार

शनिवार, 16 सितंबर 2023

रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के तहत कराये जा रहे कार्यों का लिया जायजा

  मुख्यमंत्री ने बख्तियारपुर के सीढ़ी घाट पर रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के तहत कराये जा रहे कार्यों का लिया जायजा


पटना. मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज बख्तियारपुर के गंगा तट स्थित सीढ़ी घाट का भ्रमण कर रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के तहत किए जा रहे कार्यों का जायजा लिया. सीढ़ी घाट पर जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री चैतन्य प्रसाद ने मुख्यमंत्री को पुष्प गुच्छ भेंटकर उनका अभिनंदन किया. जायजा के क्रम में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सीढ़ी घाट तक श्रद्धालुओं का आवागमन सुगमतापूर्वक हो सके, इसको ध्यान में रखते हुए कार्य कराएं. गंगा नदी की मुख्यधारा तक लोग आसानी से पहुंच सकें, इसके लिए पथ का निर्माण कराएं.

      हर रविवार को हम यहां नहाने आते.उस समय सीढ़ी घाट से गंगा नदी की मुख्य धारा तक पहुंचने के लिए रास्ता हुआ करता था.बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचकर छठ पूजा करते थे. पहले यहां पुल से होकर गंगा नदी की मुख्यधारा तक लोग आसानी से चले जाते थे. बचपन मुख्यमंत्री ने सीढ़ी घाट स्थित श्री राधे कृष्ण मंदिर (ठाकुरबाड़ी) में पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की.

      पंडित शीलभद्र याजी मेमोरियल पहुंचकर मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी पंडित शीलभद्र याजी एवं उनकी धर्मपत्नी स्व0 बालकेश्वरी जी के स्मारक स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

    इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री श्री संजय कुमार झा, सांसद श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, विधायक श्री अनिरुद्ध प्रसाद, विधान पार्षद श्री संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री चैतन्य प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ० एस० सिद्धार्थ, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, ए०डी०जी० श्री संजय कुमार सिंह, आयुक्त पटना प्रमंडल श्री कुमार रवि, आई० जी० पटना प्रक्षेत्र श्री राकेश राठी, बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री कार्तिकेय धनजी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति, वरीय अधिकारी एवं स्थानीय लोग उपस्थित थे.


आलोक कुमार 

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