मंगलवार, 31 मई 2022

राज्यसभा की सदस्यता समाप्त होने के बाद बंगला खाली करने को कहा था:शरद यादव

 


  *22 साल के बाद 7 तुगलक आवास से बेदखल


दिल्ली.पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव ने मंगलवार को 7 तुगलक रोड बंगला खाली कर दिया. अब वह छतरपुर शिफ्ट हो रहे हैं. लुटियंस जोन में करीब 50 साल बिताने वाले शरद यादव को राज्यसभा की सदस्यता समाप्त होने के बाद बंगला खाली करने को कहा गया था. हालांकि, वह इसके लिए सुप्रीम कोर्ट भी गए लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में मंत्री रहे शरद यादव कभी जेडीयू के साथ भी रहे. उनके नीतीश के साथ एक वक्त तक रिश्ते काफी अच्छे थे. वह बिहार जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष भी रहे.


भारी मन से पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव ने कहा कि मैं अपनी राजनीति का एक लंबा वक्त लोकसभा और राज्यसभा दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं.50 साल से लुटियंस जोन में हूं. 22 साल से 7 तुगलक रोड पर स्थित बंगला में रहते रहे.लेकिन राज्यसभा की सदस्यता समाप्त होने के बाद उन्हें कई बार बंगले को खाली करने के लिए कहा गया. लेकिन बंगले की खाली करने से बचने के लिए वह कोशिश में लगे रहे. इस बीच बंगले को खाली कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया. जहां से कोर्ट ने शरद यादव के खिलाफ में फैसला सुनाया और उन्हें 31 मई तक बंगले को खाली करने के आदेश दिए थे.मंगलवार को 7 तुगलक रोड बंगला 22 साल बाद केंद्रीय मंत्री और संसद सदस्य के रूप में खाली कर दिया, जो श्री यादव ने कहा कि वह अब छतरपुर जा रहे हैं.


उन्होंने कहा “मैंने जीवन भर संघर्ष किया है. मैंने नैतिक कारणों से तीन बार संसद से इस्तीफा दिया है.कितने नेताओं ने अपने राजनीतिक जीवन में ऐसा किया है?” उसने पूछा.पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि वह 1974 में दिल्ली आए थे और आपातकाल के दौरान दो साल तक जेल में रहे थे.“मैंने आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (मीसा) के तहत दो बार जेल में समय दिया है.राजनीतिक लड़ाई के लिए कितने जेल गए?“मैंने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. मैंने एक नहीं, बल्कि कई चुनाव देखे हैं.मैं इस लुटियंस में 50 साल से हूं, लुटियंस दिल्ली में आज मेरा आखिरी दिन है.समय बदलने पर मैं यहां वापस आऊंगा “श्री यादव ने कहा.केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री रहने के दौरान शरद यादव वर्ष 2000 से 7 तुगलक रोड स्थित एक बंगले में रह रहे हैं.



पूर्व केन्द्रीय मंत्री शरद यादव को लालू-तेजस्वी यादव की पार्टी राज्यसभा भेज सकती है। शरद यादव इन दिनों गंभीर रूप से बीमार चल रहे हैं। इस साल जुलाई में बिहार में राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिसमें दो सीटें भाजपा, एक सीट जेडीयू और दो सीटें राजद के पास जाएगी। इसको लेकर कुछ दिनों पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मुलाकात भी शरद यादव से दिल्ली में हुई है।


बताया जाता है कि तेजस्वी ने शरद यादव को राज्यसभा भेजने का आश्वासन भी दिया है। दूसरी तरफ शरद यादव अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) का विलय 20 मार्च को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय जनता दल के साथ करेंगे. जदयू से अलग होकर शरद यादव ने 2018 में अपनी पार्टी का गठन किया था। इस खबर को और आगे पढ़ने से पहले इस पोल में भाग लेकर अपने विचार बता दीजिए.


पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव ने अपने लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) का लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में विलय कर दिया.पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव ने कहा कि एलजेडी को राजद में विलय कर दिया.यह सोचा था कि राजद जून में होने वाले उच्च सदन के द्विवार्षिक चुनावों के दौरान राज्यसभा के लिए नामित कर सकती है.राजद द्वारा वादे के बावजूद उन्हें राज्यसभा का टिकट नहीं देने के लिए कहने पर, श्री यादव ने कहा कि कहानी को पीछे छोड़ना बेहतर है, अब हर जगह राज्यसभा के टिकटों को अंतिम रूप दिया गया है. दोनों दलों के विलय की घोषणा के बाद शरद यादव ने कहा कि यह कदम “विपक्षी दल के गठन की दिशा में पहला कदम” था.“राजद का हमारी पार्टी के साथ एकीकरण विपक्षी एकता के निर्माण की दिशा में पहला कदम है. भाजपा को हराने के लिए पूरे विपक्ष को एकजुट होना जरूरी है.अब तक, एकीकरण हमारी प्राथमिकता है. उसके बाद हम होंगे. हम इस बारे में सोचेंगे संयुक्त विपक्ष का नेतृत्व कौन करेगा.” उसने किया.शरद यादव ने भारतीय जनता पार्टी के साथ पार्टी के गठबंधन को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) से अलग होने के बाद 2018 में एलजेडी का गठन किया.


एलजेडी ने अपनी स्थापना के बाद से कभी भी चुनाव नहीं लड़ा है जब इसके प्रमुख शरद यादव 2019 के लोकसभा चुनाव में मधेपुरा से राजद के टिकट पर हार गए थे.शरद यादव केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री थे.संयोग से, दोनों नेता लगभग 25 वर्षों के बाद फिर से मिले हैं. 1997 में वे अलग हो गए जब लालू प्रसाद यादव ने राजद की स्थापना की और शरद यादव ने नीतीश कुमार के साथ जदयू) की स्थापना की.लालू प्रसाद यादव को बाद में पशु चारा घोटाले में दोषी ठहराया गया था.राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के अलावा, उन्होंने बिहार की राजनीति पर हावी होने के लिए 1990 के दशक में “मंडल” राजनीति के बैंड-बाजे को अपनाया.


आलोक कुमार

विपक्ष की ताकतों को ज्यादा गंभीर होना होगा:धीरेंद्र झा

 


पटना. भाजपा का उन्मादी साम्प्रदायिक अभियान जारी है. इसने जमीनी स्तर पर विमर्श को बुरी तरह प्रभावित किया है. इस विमर्श को बदलकर ही भाजपा के उन्मादी अभियान को रोका जा सकता है. नीतीशजी के आधार में जो गिरावट आ रही है,उसे भाजपा जोड़ने में जी जान से लगी है. उत्तर बिहार-पूर्वी बिहार की स्थिति तो और चिंताजनक है. समस्तीपुर की हालिया घटनाओं और रामनवमी के दिन घटी घटनाओं ने तो लोकतांत्रिक प्रगतिशील समूहों के समक्ष अभूतपूर्व चुनौतियां पेश की हैं.यह सोच कामरेड धीरेंद्र झा का है.


राजनीतिक परिस्थिति की दरपेश चुनौतियों का मुकाबला करने के लिये विपक्ष की ताकतों को ज्यादा गंभीर होना होगा.समावेशी,लोकतांत्रिक और पारदर्शी मूल्यबोधों के आधार पर गठबंधन राजनीति को मजबूती देनी होगी. प्रतीकात्मकता के साथ साथ सामाजिक न्याय के मौलिक मुद्दों पर आंदोलनात्मक धार देनी होगी.आमजन की कठिन होती जिन्दगी के बरक्स महंगाई-बेरोजगारी को आंदोलन का मुद्दा बनाना होगा. शिक्षा और जमीन से बेदखली आज के समय में अहम मुद्दा है जो सामाजिक न्याय और समतामूलक समाज बनाने के सपने के बुनियाद पर चोट करता है.


ऐसी स्थिति में महागठबंधन को दरकिनार कर राजद की ओर से एकतरफा प्रत्याशियों की घोषणा करना दुर्भाग्यपूर्ण है.परिषद की तीसरी सीट पर उनके द्वारा लिया गया निर्णय तो गठबंधन धर्म की बुनियाद को नकारना है. राजद यह कह सकती थी कि माले और कांग्रेस मिलकर तीसरी सीट का फैसला कर ले. बिहार में भाजपा अब नीतीश कुमार को किनारे कर स्वतंत्र कब्जा करने की रणनीति के तहत काम कर रही है.ऐसी स्थिति में सबों को जवाबदेही के साथ काम करना होगा और इसमें सबसे बड़े दल की भूमिका सबसे अहम है. राजद के अनुभवी नेतृत्व को तात्कालिकता की जगह दीर्घकालिकता को तब्बजो देनी चाहिए.वादाखिलाफी के खिलाफ न्यायपूर्ण दावेदारी की न्यायपूर्ण आवाज को भाकपा माले बुलंद करती रहेगी!


आलोक कुमार


संत मरिया मेजर महागिरजाघर में शांति की रानी मरियम के सामने रोजरी प्रार्थना की

                             *रोजरी प्रार्थना द्वारा शांति के लिए संत पापा ने की प्रार्थना


बेतिया.आज ईसाई समुदाय ने रोम से लेकर बिहार तक माता मरियम का अपनी कुटुम्बिनी एलिजाबेथ से मुलाकात करने का पर्व मनाया. इस अवसर पर रोम के संत मरिया मेजर महागिरजाघर में शांति की रानी मरियम के सामने रोजरी प्रार्थना की गयी.बेतिया धर्मप्रांत के दुसैया में माता मरियम के आदर में धार्मिक यात्रा निकाली गयी.ऐतिहासिक बेतिया चर्च के परिसर में आज माता मरियम के आदर में शोभायात्रा निकाली गयी.चुहड़ी पल्ली में भी शोभायात्रा निकाली गयी.

संत पापा ने 31 मई के ट्वीट संदेश में लिखा, ‘मरियम का विश्वास नबी के समान है.खुद अपने जीवन से मरियम, मानव इतिहास में ईश्वर की उपस्थिति की ओर एक भविष्य सूचक चिन्ह हैं, उनके करुणामय हस्तक्षेप की ओर जो दुनिया के तर्क को हराता, दीनों को उठाता एवं शक्तिशालियों को नीचे गिरा देता है.(लूक. 1ः52). संत पापा फ्राँसिस उन लोगों के लिए आशा के चिन्ह स्वरूप मई माह के अंतिम दिन रोजरी माला विनती कर रहे हैं, जो यूक्रेन एवं विश्व के विभिन्न हिस्सों में जारी युद्ध से पीड़ित हैं. 31 मई को संत पापा फ्राँसिस ने रोम के संत मरिया मेजर महागिरजाघर में शांति की रानी मरियम के सामने रोजरी प्रार्थना की. संत पापा ने दुनिया के हर क्षेत्र के विश्वासियों को आमंत्रित किया था कि रोजरी प्रार्थना द्वारा शांति के लिए संत पापा की प्रार्थना में सहभागी हों.रोजरी माला विनती को वाटिकन के आधिकारिक चैनलों द्वारा लाईव प्रसारित किया गया.                              

इस अवसर पर बेतिया धर्मप्रांत के दुसैया में माता मरियम के आदर में धार्मिक यात्रा निकाली गयी. इस धार्मिक यात्रा के दौरान माला विनती की गई.उसके बाद छोटे चर्च में रोजरी खत्म होने पर पवित्र मिस्सा मिलकर  फादर क्लाउड, फादर पंकज और फादर अरुण अर्पित किये.इस अवसर पर लगभग 100 लोग उपस्थित हुए.मिस्सा उपरांत सबको खीर खाने को मिला.इसके बाद फादर पीपी ने सभी भक्तों को एक-एक रोजरी भेंट की.


बेतिया धर्मप्रांत के ऐतिहासिक बेतिया चर्च.आज माता मरियम के आदर में शोभायात्रा निकाली गई.शोभायात्रा चर्च परिसर से शुरू हुआ.चर्च परिसर में ही भक्तगण पवित्र माला के पांच भेद खत्म किये.इसके बाद बेतिया धर्मप्रांत के बिशप पीटर सेबेस्टियन गोबियस के नेतृत्व में पवित्र मिस्सा किया गया. बिशप के साथ पल्ली पुरोहित फादर हेनरी फर्नांडो, फादर अमित तिर्की, फादर विपिन के अलावे बेतिया धर्मप्रांत के भाई और बहन शामिल थे.इनमें प्रकाश अगस्टीन, अनिल डिक्रूज, गोडेन अन्थोनी ठाकुर, नॉर्बेन जूलियस, अमित, अमन गुप्ता के अलावे बहुत सारे भक्तगण  उपस्थित थे.हे! मरिया के लड़कों आया मां का महीना.जी ईसाई भक्तों ने मां का महीना में सामूहिक व व्यक्तिगत माला विनती करते रहे.आज परंपरागत ढंग से मां का महीना का समापन कर दिया गया.

आज हर साल की भातिं गिरजाघर से लेकर गाँव के ग्रोटों तक गाँव के बच्चों ने ग्रोटो की सजावट करने में सुबह से ही लग गये थे.उसके बाद माँ मरियम की शोभायात्रा निकाली गई.इस अवसर पर चुहड़ी पल्ली के पल्ली पुरोहित  फादर तोबियास द्वारा मिस्सा किया गया.फादर ने अपने उपदेश में कहा कि आज ही के दिन माँ मरियम  एलिजाबेथ से  भेट की थी.


आलोक कुमार

सोमवार, 30 मई 2022

कोरोना महामारी से अनाथ हुए बच्चों के बीच स्कॉलरशीप

 * माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार द्वारा कोरोना महामारी से अनाथ हुई बेबी कुमारी के बीच डिजिटली रूप से स्कॉलरशीप, हेल्थ कार्ड, स्नेह पत्र आदि का किया गया वितरण 


बेतिया.माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार, श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा आज पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत कोरोना महामारी से अनाथ हुए बच्चों के बीच स्कॉलरशीप, हेल्थ कार्ड, स्नेह पत्र, पोस्ट ऑफिस पासबुक आदि का वितरण डिजिटल रूप से किया गया.
 
जिला स्तर पर उक्त कार्यक्रम का आयोजन समाहरणालय स्थित एनआइसी सभाकक्ष में किया गया.जहां कोरोना महामारी में अपने माता-पिता को खो चुकी नरकटियागंज प्रखंड अंतर्गत शिकारपुर थाना क्षेत्र के भसुरारी ग्राम निवासी सुश्री बेबी कुमारी अपने अभिभावक श्री दीपू प्रसाद के साथ उपस्थित रही. सुश्री बेबी कुमारी अभी कक्षा 10 की छात्रा है. इस अवसर पर जिलाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, श्री कुंदन कुमार, सहायक निदेशक, बाल संरक्षण इकाई, श्री अभय कुमार उपस्थित रहे.
कोरोना महामारी से अनाथ बच्चों को हर महीने आर्थिक सहायता मिले, उन्हें शिक्षा मिले और वे स्वस्थ रहें, इस के लिए पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कार्य कर रहा है ताकि असीम संभावनाओं से भरे बच्चों का भविष्य उज्जवल हो और अनंत सफलताओं से भरा हुआ हो.



अनाथ हुए बच्चों को पीएम केयर योजना के तहत आयुष्मान भारत योजना से 05 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा, छात्रवृति के अलावा रहने, खाने और किताबों के लिए धनराशि, उच्च शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन, जिसमें ब्याज का भुगतान पीएम केयर फंड से होगा. बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए प्रधानमंत्री कोष से मिलने वाली धन राशि को आयु अनुसार इन्वेस्ट किया जायेगा जो कि बच्चों के 18 साल होने पर 10 लाख रुपया होगा. इस राशि पर मिलने वाले ब्याज से बच्चों को 18-23 साल की आयु तक हर महीने खर्च के लिए धन राशि दी जाएगी. साथ ही स्कूली शिक्षा के बाद तकनीकी शिक्षा के लिए स्वनाथ छात्रवृति योजना से 50 हजार रूपये प्रतिवर्ष दी जानी है. 10 वीं के बाद स्कूल छोड़ने वाले बच्चों के कौशल प्रशिक्षण का भी प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही 50 हजार रुपये अनुग्रह की राशि भी उपलब्ध करायी जायेगी.

कार्यक्रम में जिलाधिकारी द्वारा लाभार्थी बेबी कुमारी को पीएम केयर योजना से संबंधित दस्तावेजों को प्रदान किया गया. जिलाधिकारी द्वारा बेबी कुमारी से बातचीत की गयी और उसके उज्जवल भविष्य की कामना की गयी. बेबी कुमारी ने बताया गया कि उन्हें शिक्षक बनकर समाज और देश की सेवा करनी है.जिलाधिकारी ने बेबी कुमारी से कहा कि अच्छे तरीके से अपनी पढ़ाई-लिखाई करो और स्कॉलरशीप, पढ़ाई-लिखाई में कोई परेशानी हो तो तुरंत संपर्क करो.


आलोक कुमार

21 नये कार्डिनलों की घोषणा

 

रोम. संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 29 मई,2022 को स्वर्ग की रानी प्रार्थना के उपरांत 21 नये कार्डिनलों की घोषणा कर दी .जिसकी विधिवत रचना 27 अगस्त,2022 की कन्सिस्टरी में की जाएगी. वे सभी विश्वव्यापी कलीसिया का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा विभिन्न संस्कृति, पृष्टभूमि और प्रेरितिक क्षेत्र से आते हैं.

रविवार को स्वर्ग की रानी प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने कहा कि शनिवार 27 अगस्त को सामान्य लोकसभा परिषद में नये कार्डिनलों की रचना विधिवत की जायेगी.उन्होंने यह भी कहा कि उसके बाद वे दो दिन सोमवार, 29 और मंगलवार, 30 अगस्त को सभी कार्डिनलों से मुलाकात करेंगे तथा नये प्रेरितिक संविधान प्रेदिकाते एवं जेलियुम पर चिंतन करेंगे.

आगे संत पापा ने कहा, 27 अगस्त को मैं नये कार्डिनलों की रचना के लिए सामान्य लोकसभा परिषद की सभा का आयोजन करूँगा. बता दें कि वर्तमान में कार्डिनलों की कुल संख्या 208 है जिनमें से 117 कार्डिनल वोट कर सकते हैं और 91 कार्डिनल वोट नहीं कर सकते. इसका मतलब है कि 91 कार्डिनल पॉल VI के द्वारा आयोजित 1970 के सम्मेलन में पारित प्रस्ताव की चपेट में आ गये हैं.ऐसे  80 वर्ष वाले कार्डिनल्स संत पापा के चुनने वाले मतदाता सूची में शामिल नहीं किये जाएंगे.80 वर्ष से कम उम्र के कार्डिनल्स के लिए मतदान सीमित कर दिया गया था, कथित तौर पर उक्त अवधि में संत पापा का चुनाव करना और बुजुर्ग कार्डिनल को रोम की यात्रा करने से रोकने के तरीके के रूप में नियम तैयार किया गया है.

वर्तमान में कार्डिनलों की कुल संख्या 208 है और 27 अगस्त को 21 कार्डिनलों को जोड़ने से उनकी कुल संख्या 229 होगी. जिनमें वर्तमान के 117 और उम्र की हिसाब से 15 और कार्डिनल जोड़ देने से 132 कार्डिनल संत पापा के चुनाव में वोट डाल पाएंगे. 

नये कार्डिनलों में से 8 यूरोप से, 6 एशिया से, 2 अफ्रीका से, 1 उत्तरी अमेरिका से और 4 मध्य एवं लातीनी अमेरिका से हैं.उन

21 नये कार्डिनलों के नाम इस प्रकार हैं-

1.     महाधर्माध्यक्ष अर्तुर रोक, 72 साल, दिव्य उपासना एवं संस्कारों के अनुष्ठान के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के अध्यक्ष.

2.     महाधर्माध्यक्ष लाजारो यू ह्यूंग सिक, 70 साल, याजकों के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के अध्यक्ष।

3.     महाधर्माध्यक्ष फेरनांदो वेरगेज अलजागा आई.सी, 77 साल,वाटिकन सिटी एवं वाटिकन सिटी के प्रशासन के लिए गठित परमधर्मपीठीय आयोग के अध्यक्ष।  

4.     महाधर्माध्यक्ष जाँ-मार्क अभेलिन, 63 साल, फ्राँस के महाधर्माध्यक्ष।

5.     धर्माध्यक्ष पीटर ओकपालेक,59 साल, नाईजीरिया के धर्माध्यक्ष

6.     महाधर्माध्यक्ष लेओनार्दो उलरिक स्तेइनर ओएफएम, 71 साल,ब्राजील के महाधर्माध्यक्ष

7.     महाधर्माध्यक्ष फिलिप नेरी अंतोनियो सेबास्तियानो दी रोसारियोफेर्राओ,69 साल, गोवा और दमाओ (भारत) के महाधर्माध्यक्ष।

8.     धर्माध्यक्ष रोबर्ट वार्टर मैक एलरोय,68 साल, संत डियेगो के धर्माध्यक्ष।  

9.     महाधर्माध्यक्ष विरजिलियो दो कार्मो दा सिल्वा एस.डी.बी, 54 साल, पूर्वी तिमोर के महाधर्माध्यक्ष।

10. धर्माध्यक्ष ओस्कर कंतोनी,71 साल, कोमो (इटली) के धर्माध्यक्ष।

11. महाधर्माध्यक्ष अंतोनी पूला,60 साल, हैदराबाद (भारत) के महाधर्माध्यक्ष।

12. महाधर्माध्यक्ष पाओलो चेसार कोस्ता,54 साल ब्राजील के महाधर्माध्यक्ष।

13. धर्माध्यक्ष रिचार्ड कुया बाउबर,62 साल घाना के धर्माध्यक्ष।

14. महाधर्माध्यक्ष विलियम गोह सेंग,64 साल, सिंगापुर के महाधर्माध्यक्ष।

15. महाधर्माध्यक्ष अदलबेर्तो मार्टिनेज फ्लोरेंस, पराग्वे के महाधर्माध्यक्ष।

16. महाधर्माध्यक्ष जॉर्ज मारेंगो आई. एम. सी.,48 साल मंगोलिया के प्रेरितिक प्रशासक।  

17.महाधर्माध्यक्ष जॉर्ज एनरिक जिमेनेज करवा जाल,80 साल कोलंबिया के महाधर्माध्यक्ष।

18. महाधर्माध्यक्ष लूकस वान जूसी एस. डी.बी,80 साल, बेल्जियम के ससम्मान सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष।

19.महाधर्माध्यक्ष अरिगो मिलियो,80 साल, इटली के ससम्मान सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष।

20.फादर जान फ्रांको गिरलांदा येसु समाजी,80 साल, थियोलोजी के प्रोफेसर।

21.मोनसेन्योर फोरतुनातो,80 साल, संत पेत्रुस महागिरजाघर के कैनन।

आलोक कुमार


डॉ. युगल किशोर प्रसाद के निधन पर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की

 


पटना. कांग्रेस पार्टी के मूर्धन्य नेता एवं गया शहर के पूर्व विधायक डॉ. युगल किशोर प्रसाद के निधन पर प्रदेश कांग्रेस व गया शहरवासी मर्माहत व शोकाकुल है. डॉ. युगल किशोर प्रसाद के निधन पर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है.

 शोक संवेदना में डॉ. मदन मोहन झा ने कहा है कि डॉ.. युगल किशोर प्रसाद गया शहर के प्रतिष्ठित चिकित्सक के रूप में जन जन के बीच बेहद लोकप्रिय थे.स्व. युगल किशोर प्रसाद कांग्रेस पार्टी की राजनीति पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम जी के सान्निध्य में शुरू किए तथा सन् 1972 में गया शहर विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित होकर 1977 तक गया शहर के विधायक रहे.

 डॉ. युगल किशोर प्रसाद का कोलकाता के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया वे 81 वर्ष के थे. वे अपने पीछे लड़का लड़की सहित भरापूरा परिवार छोड़ गये है.

कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित शर्मा, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी, डा0 समीर कुमार सिंह, श्याम सुन्दर सिंह धीरज, अशोक कुमार, पूर्व मंत्री अवधेश कुमार सिंह ,कृपानाथ पाठक, प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, सदस्यता अभियान के प्रभारी ब्रजेश प्रसाद मुनन, कुमार आशीष, स्नेहाशीष वर्द्धन ने भी पूर्व विधायक डॉ. युगल प्रसाद के निधन पर शोक व्यक्त किया है.

आलोक कुमार


रविवार, 29 मई 2022

गांव में भिक्षुक से बातचीत


मोतिहारी. स्माइल SMILE  परियोजना अंतर्गत मिशन गरिमा के अंतर्गत सर्वेक्षित भिक्षुओं का परामर्श करने एवं उनकी दक्षता/ आवश्यकता का पता लगाने के लिए आज SMILE team द्वारा कल्याणपुर प्रखंड के मठ कल्याणपुर गांव में भिक्षुक से बातचीत की गयी. भिक्षुको के द्वारा बताया गया कि जीविकापार्णन के लिए भिक्षाटन करते हैं.उनका यह मानना है कि इस कार्य में गरिमा एवं प्रतिष्ठा नहीं है. यदि उनको रोजगार अथवा व्यवसाय के अन्य साधन उपलब्ध कराये जाये तो रोजगार करना चाहेंगे एवं भिक्षावृत्ति से मुक्त होना चाहेंगे.इस गांव में लगभग 35 परिवार ऐसे हैं जिनकी आजीविका का मुख्य साधन भिक्षावृत्ति ही है.उन्होंने मांग की कि यदि सरकार द्वारा उन्हें कुछ ऋण उपलब्ध करायी जाये, तो वह गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए रोजगार करेंगे. उक्त परामर्श टीम का नेतृत्व ममता झा, सहायक निदेशक बाल संरक्षण कर रही है. इनके साथ श्री शिवेंद्र कुमार, सहायक निदेशक दिव्यांगजन सशक्तिकरण कोषांग, श्री राजीव कुमार बिहार विकास मिशन एवं प्रखंड समन्वयक विकास कुमार मौजूद थे.


आलोक कुमार

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“कब्रिस्तान में जगह नहीं है…”

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