सोमवार, 28 अगस्त 2023

संत माग्देलीन संघ

 शाहपुर.विश्व भर में संत मोनिका दिवस मनाया जा रहा है.एक परिवार से दो ‘संत‘ यह अजूबा है.एक परिवार से दो ‘बिशप‘,एक परिवार से दो ‘पुरोहित‘, एक परिवार से दो ‘सिस्टर‘ बने हैं.मालूम हो कि संत अगस्टीन की माँ संत मोनिका है. उसने जीवन की कठिन परिस्थिति में, ईश्वर की इच्छा को स्वीकार करना, सीखने के द्वारा, विश्वास को बनाये रखा. उसकी ताकत प्रार्थना थी.  संत मोनिका के पर्व दिवस पर एक ट्वीट प्रेषित किया गया है.सभी माताओं को संत मोनिका का अनुकरण करने के  लिए प्रोत्साहन दिया.मां मोनिका का 27 अगस्त को और पुत्र संत अगस्टीन का 28 अगस्त को पर्व है.

   संत मोनिका का पर्व मनाने में बक्सर धर्मप्रांत की शाहपुर पल्ली पीछे नहीं रहा.इन दिनों शाहपुर पल्ली के पल्ली पुरोहित फादर भास्कर बोज्जा है.उनके नेतृत्व आज संत मोनिका दिवस मनाया.                                                                     

   वास्तव में संत मोनिका निश्चय ही एक दृढ़ महिला थी, वह अपने आचरण से मजबूत थी. वह एक ऐसी महिला थी जो एक पत्नी एवं माता के रूप में समाज में अपनी भूमिका से पूरी तरह वाकिफ थी. वह दृढ़ निश्चयी थी, जीवन दे सकती थी, अपने आस-पास के लोगों को अधिक मानवीय बना सकती थी. उसने इस कार्य को अपने पति एवं बच्चों के द्वारा दिखलाया जो उनके व्यवहार एवं ख्रीस्तीय जीवन में परिलक्षित हुआ.न केवल उसके बेटे अगस्टीन का मन-परिवर्तन हुआ किन्तु उसके दो अन्य बेटों के जीवन में भी परिवर्तन हुआ.

          मोनिका निश्चय ही एक सफल महिला की आदर्श हैं किन्तु उसने भी कई बार गलती की. उसने ईश्वर की इच्छा और योजना पर अधिक ध्यान न देकर अपनी इच्छा अनुसार अपने बेटे अगस्टीन का मन-परिवर्तन चाहा था, पर ईश्वर ने धीरे-धीरे उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें एक आदर्श माँ बनने एवं ईश्वर के समय का सम्मान करना सिखलाया.

शाहपुर पल्ली पुरोहित फादर भास्कर बोज्जा आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के मुख्य उत्सवकर्ता थे. अपने भाषण में उन्होंने संत मोनिका के बारे में बात की.वह जीवन भर ईश्वर के प्रति वफादार रही.जश्न में करीब 300 लोग मौजूद थे.

संत माग्देलीन संघ

इस अवसर पर पल्ली पुरोहित फादर भास्कर बोज्जा ने कहा कि शाहपुर चर्च में संत मोनिका का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया गया, इसमें महिलाओं की उपस्थिति तथा भागीदारी सराहनीय थी. मिस्सा के तुरन्त बाद महिलाओं की बैठक हुई, जिसमें सभी महिलाओं की सहमति से संत माग्देलीन संघ की पूनम हेनरी गंज को अध्यक्ष तथा उर्मिला रूद्रनगर को सचिव नियुक्त किया गया.मौके पर चुनाव के समय पल्ली पुरोहित उपस्थित रहे.

उन्होंने कहा कि संत माग्देलीन संघ की अध्यक्ष और सचिव पल्ली में समूह का नेतृत्व करेंगे. वे पल्ली में महिलाओं को प्रेरित और प्रोत्साहित करेंगे.इनका कार्यकाल पांच साल का होगा. 


आलोक कुमार


 

रविवार, 27 अगस्त 2023

स्पेशल सेल में तैनात इंस्पेक्टर हर्षवर्धन मार्चिनो का निधन

  

* नोएडा में स्पेशल सेल में तैनात इंस्पेक्टर हर्षवर्धन मार्चिनो का निधन

* इंस्पेक्टर फरवरी 2023 से ल्यूकेमिया से पीड़ित थे.उन्होंने इलाज के दरम्यान जेपी अस्पताल नोएडा में दम तोड़ा

* सोमवार को पहाड़गंज कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार 3ः30 बजे से होगा

नई दिल्ली. ईसाई समुदाय से किसी उच्च पद पर कार्यरत शख्स का निधन होने से दुख होता है. इसमें स्पेशल सेल में तैनात इंस्पेक्टर हर्षवर्धन मार्चिनो भी शामिल हो गए है.
   इंस्पेक्टर हर्षवर्धन मार्चिनो फरवरी 2023 से ल्यूकेमिया (कैंसर) से पीड़ित थे.उनका इलाज चल ही रहा था.परंतु दवा और दुआ का खास असर नहीं पड़ा.बीमार पड़ने के 6 माह के बाद परलोक चले गए.उन्होंने आज 27 अगस्त को जेपी अस्पताल नोएडा में इलाज के दरम्यान दम तोड़ दिया.वे 55 वर्ष के थे.उनके दो पुत्री हैं.सोमवार 28 अगस्त को पहाड़गंज कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार 3ः30 बजे से होगा.
उनका पिता का नाम लेफ्टिनेंट अरमान मार्चिनो और माता का नाम ग्रेसी मार्चिनो है.उनके 6 संतान है.उनमें एक भी बच्ची नहीं है.इंस्पेक्टर का भाई का नाम विजेता मार्चिनो आरबीआई दिल्ली में एए डीजीएम के पद पर तैनात हैं. रिश्तेदारों में आनंद इग्नासियुस के अलावे अन्य बेतिया और पटना (गर्दनीबाग) में संबंधित रहते हैं.विनीता डि‘क्रुस इंस्पेक्टर का मौसेरा भाई है.

आलोक कुमार


शनिवार, 26 अगस्त 2023

चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देते हैं बी.बी. पाण्डे : कुणाल

विपरीत परिस्थितियों में भी असीम धैर्य के साथ चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देते हैं बी.बी. पाण्डे  : कुणाल 



पटना आज भाकपा-माले राज्य कार्यालय, पटना में पार्टी के केंद्रीय कन्ट्रोल कमीशन के चेयरमैन रहे और 'समकालीन लोकयुद्ध' के पूर्व संपादक का. बृज बिहारी पांडे की दूसरी बरसी पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई. 

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए पार्टी राज्य सचिव का. कुणाल ने कहा कि आज जब भाजपा देश की जनता पर नए तरीके से राजनीतिक- सामाजिक-आर्थिक- साँस्कृतिक गुलामी थोप रही है, लोकतांत्रिक मूल्यों व संस्थाओं को ख़त्म कर फासीवादी शासन स्थापित करने की लगातार कोशिशें कर रही हैं;  इस गम्भीर चुनौती से निपटने में का. बी बी. पांडेय हमारे लिए हमेशा प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे. 

उन्होंने विषम से विषम परिस्थितयों का भी असीम धैर्य के साथ सामना किया और राजनीतिक-सामाजिक बदलाव के संघर्ष को जारी रखा. उनका यह विशिष्ट पहलू हमें अथाह ऊर्जा से भर देता है और फासीवाद को हराने का विश्वास पैदा करता है. फासीवाद को मुकम्मल तौर पर पराजित करने के लिए हमें बी.बी. पांडेय की ही तरह धैर्य के साथ लगातार आगे बढ़ते रहने का गुण सीखना चाहिए. 

का. बी. बी. पांडे कानपुर में स्कूली शिक्षा खत्म करने के बाद 1966 में दुर्गापुर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने गए थे, तब वियतनाम के मुक्ति संग्राम और नक्सलबाड़ी के किसान विद्रोह का दौर था, जब अधिकांश संवेदनशील छात्रों ने पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में क्रांतिकारी आंदोलन में शामिल होने के लिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी थी. इसमें का. विनोद मिश्रा, डी.पी. बख्शी और बी.बी. पांडे की मशहूर तिकड़ी ने पार्टी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. बी.बी. पांडे ने लंबे समय तक 'समकालीन जनमत' और पार्टी के मुखपत्र 'लोकयुद्ध' के संपादक रहने के साथ केंद्रीय कंट्रोल कमीशन के चैयरमैन की बखूबी जिम्मेदारी आखिरी सांस तक निभाई. 

सभा का संचालन समकालीन लोकयुद्ध के उपसंपादक और बी. बी. पांडे के सहकर्मी रहे का. प्रदीप झा ने किया. समकालीन लोकयुद्ध के संपादक संतोष सहर, पटना महानगर के सचिव अभ्युदय, कमलेश शर्मा, समता राय आदि वक्ताओं ने भी बी. बी. पांडे के संस्मरणों को साझा किया. 

मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता राजाराम, विभा गुप्ता, संतलाल, मुर्तजा अली, मनमोहन, कुमार दिव्यम, विनय कुमार, प्रमोद यादव, विश्वमोहन, आशीष कुमार, रिया, रूनझुन सहित अनेक लोग उपस्थित थे.

आलोक कुमार



बदलाव करने में क्या हर्ज है?

 

बदलाव करने में क्या हर्ज है?


केरल.इस समय केरल में बहुत बवाल चल रहा है.धर्माध्यक्ष और पुरोहित अपने वरिष्ठ अधिकारियों की बात नहीं मान रहे हैं.अपने ही बातों पर अडिग है.एर्नाकुलम -अंगमाली धर्मप्रांत में आज भी पुरोहित बेदी के सामने होकर ही  पूजा करते हैं और उस समय पूजा करते समय पुरोहित का पीठ दर्शकों के सामने रहता है. इसमें बदलाव लाने के लिए रोम से सिरो मालकाना चर्च के एक उच्चस्तरीय दल केरल आया था.उक्त उच्च स्तरीय दल विवाद सलटाने का प्रयास करने लगे परंतु उसमें असफल हो गए और वापस रोम चले गए.

  इस समय एर्नाकुलम -अंगामाली धर्मप्रांत के लोग परंपरागत ढंग से ही मिस्सा करने पर अबादा है.ये लोग सिरो मालकाना चर्च से जुड़े हैं.रोम से सिरो मालकाना चर्च के उच्चस्तरीय दल केरल आया था.विवाद सलटाने के समय विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को बुलाना पड़ा.पुलिस ने एर्नाकुलम -अंगामाली धर्मप्रांत के कुछ पुरोहितों को पकड़ कर बाद में छोड़ दिया.

     निर्णय लेनेवाले सर्वोच्च निकाय, धर्माध्यक्षों की धर्मसभा द्वारा अनुमोदित मिस्सा अनुष्ठान की विधि को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं.धर्मसभा- अनुमोदित ख्रीस्तीयाग के अनुसार पवित्र मिस्सा में यूखरिस्त प्रार्थना के दौरान पुरोहितों (अनुष्ठाता) को वेदी की ओर देखना है.इसको लेकर विवाद हो गया है.

 23 अगस्त को सिरो-मालाबार कलीसिया के एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘एर्नाकुलम-अंगमाली महाधर्मप्रांत के परमधर्मपीठीय प्रतिनिधि, महाधर्माध्यक्ष सिरिल वासिल, मिशन का पहला दौर पूरा करने के बाद रोम लौट गए.‘

 जी अंग्रेजों के कार्यकाल में मिस्सा करते समय पुरोहित वेदी की ओर मुंह करके पूजा किया करते थे.लोकधर्मी यानी जनता को पुरोहित का पीठ ही देखते थे.इसमें परिवर्तन किया गया.इस परिवर्तन से पुरोहित जनता के सामने मुखातिर होकर मिस्सा करने लगे.अब केरल के पुरोहित और लोकधर्मी चाहते हैं कि मिस्सा के दौरान सभी समय पुरोहित विश्वासियों की ओर मुंह करें.यह 1970 से उनकी परंपरा रही है.

 दूसरी ओर एर्नाकुलम-अंगमाली महाधर्मप्रांत के कुछ पुरोहित एवं विश्वासी, पूर्वी रीति की कलीसिया के  बयान में कहा गया है कि स्लोवाकिया के जेसुइट ‘पोप और पूर्वी रीति की कलीसियाओं के लिए गठित धर्मसंघ के अध्यक्ष को, सिरो-मालाबार धर्मसभा-अनुमोदित मिस्सा-बलिदान के समान तरीके को लागू करने में कठिनाइयों के बारे में अपने आकलन से अवगत कराएंगे.‘

 बता दें कि कलीसिया के सभी 34 धर्मप्रांतों ने धर्मसभा-अनुमोदित मिस्सा विधि को लागू किया है.इसका मतलब पुरोहित विश्वासियों की ओर मुंह करके ही मिस्सा करेंगे.इस विधि को एर्नाकुलम-अंगामाली महाधर्मप्रांत में लागू नहीं किया जा रहा है.सिरो-मालाबार कलीसिया में दशकों पुराने विवाद को निपटाने के लिए नियुक्त वाटिकन प्रतिनिधि, अपनी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की स्थिति बिगड़ने के बाद रोम लौट गये हैं.सिरो-मालाबार कलीसिया के प्रमुख, कार्डिनल जॉर्ज एलेनचेरी का धर्मप्रांत, दुनिया भर में कलीसिया के 5 मिलियन काथलिकों के आधे मिलियन अनुयायियों का घर है.

   असंतुष्ट पुरोहितों का कहना है कि महाधर्माध्यक्ष सिरिल वासिल 4 अगस्त को केरल की कलीसिया के पास पहुंचे थे उन्होंने कहा कि उनका काम धर्मसभा-अनुमोदित खीस्तयाग को लागू करना था और किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया.इस बीच 17 अगस्त को धर्माध्यक्ष ने महाधर्मप्रांत के सभी पुरोहितों को 20 अगस्त से धर्मसभा-अनुमोदित सामूहिक प्रार्थना करने का आदेश दिया.उन्होंने उन सभी गिरजाघरों को भी बंद करने का आदेश दिया, जहां विरोध के कारण धर्मसभा-अनुमोदित मिस्सा-बलिदान अर्पित नहीं किया जा सका.महाधर्माध्यक्ष सिरिल वासिल ने उनके आदेश का बचाव करने वाले पुरोहितों को बहिष्कृत करने की भी धमकी दी है.


आलोक कुमार

गुरुवार, 24 अगस्त 2023

जिला के अब तक 23 बच्चों की सर्जरी कर कानपुर में किया गया कॉकलियर इंप्लाट

 *श्रवण श्रुति की मिली मदद, अपने माता—पिता की आवाज सुन सकेगी टेकारी की स्वीटी

*जिला के अब तक 23 बच्चों की सर्जरी कर कानपुर में किया गया कॉकलियर इंप्लाट

*ज़िले के 39 बच्चे को सर्जरी के लिए अंतिम कागजी प्रक्रिया में है, बहुत जल्द ही यह बच्चे भी अपने माता पिता की आवाज सुन सकेंगे

*
कानपुर में टेकारी की स्वीटी का सफलतापूर्वक किया गया सर्जरी

गया.  गया ज़िला के सुदूरवर्ती  क्षेत्र टेकारी की स्वीटी की उम्र 4 साल है. जब वह दो साल की थी तब अक्सर माता—पिता के पुकारे जाने पर वह अपनी प्रतिक्रिया नहीं देती थी. माता पिता को यह लगा कि शायद बच्ची को बोलने में समय लगेगा. इसे लेकर कुछ समय तक तो वे इत्मिनान रहे लेकिन मन में यह बात खटकती रही. उन्होंने महसूस किया कि दूसरे बच्चों की तरह उनकी बच्ची का प्रतिक्रिया नहीं देना  कोई साधारण बात नहीं है. इसे लेकर उन्हें कई अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ा. तब पता चला कि उनकी बच्ची की सुनने की क्षमता प्रभावित है. वह सुन नहीं पाती. स्वीटी का नहीं सुन पाना उसके माता पिता के लिए एक बड़ी परेशानी का सबब बन गया. ना तो इतना पैसा था कि वह इलाज में खर्च कर सकें ना ही किसी बड़े अस्पताल में जाने के संसाधन.

           इस बीच गांव की आशा दीदी ने उनके इस परेशानी को हल कर दिया. आशा दीदी ने स्वीटी के पिता चंद्र दास को यह बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसे बच्चों के कानों की जांच की जाती है और किसी परेशानी होने पर इसका इलाज किया जाता है. उसने बताया कि इसके लिए श्रवण श्रुति कार्यक्रम के तहत कैंप लगाया जाता है. इस जानकारी के बाद चंद्र दास अपनी बच्ची को लेकर टेकारी के मुससी आगनवाड़ी सेंटर पहुंचे और वहां राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चिकित्सा दल द्वारा स्क्रीनिंग करवाया गया. फिर बच्ची के कानों की आवश्यक जांच व इलाज की प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रारंभ की गयी.  स्वीटी का कानपुर के चिकित्सकों द्वारा स्क्रीनिंग करवाया गया। बेरा टेस्ट करवाया गया तथा स्वीटी को विशेष जांच के लिए कानपुर भेजा गया। परसो यानी 21 अगस्त  2023 को टेकारी की स्वीटी का सफलतापूर्वक सर्जरी करते हुए कॉकलियर इंप्लाट लगाया गया।

       चंद दास बताते हैं कि वह किसान हैं, खेती करके अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं. श्रवण श्रुति की मदद से उन्हें काफी लाभ मिला है. उनका कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि वह बच्ची की सर्जरी कर सके. इस सर्जरी और इलाज में जिला पदाधिकारी गया डॉ० त्यागराजन एसएम की विशेष पहल से स्वास्थ्य विभाग की काफी मदद मिली है और सभी खर्च सरकार द्वारा वहन किये गये हैं. 

   *23 बच्चों को मिली श्रवण श्रुति की मदद

जिला में श्रवण श्रुति कार्यक्रम की मदद से 23 बच्चों के कानों की सफल सज्ररी की जा चुकी है. इन बच्चों के सर्जरी कर कॉकलियर इंप्लाट किया गया है. अब ये बच्चे अपने मां—बाप आवाजें सुन सकेंगे. सर्जरी के बाद इन बच्चों के माता—पिता के चेहरे पर मुस्कान है. उन्हें अब आशा हैं कि वह अपने बच्चों की बोली सुन सकेंगे. बच्चे अपने मातापिता को प्रतिक्रियाएं दे सकेंगे.

           श्रवण श्रुति कार्यक्रम की मदद से कानपुर स्थित मेहरोत्रा ईएनटी अस्पताल में इन बच्चों की सर्जरी की गयी. इनमें बोधगया के तीन, शेरघाटी एक, टेकरी 9, बेलागंज 2, इमामगंज तीन, मोहनपुर दो, मानपुर एक, परैया एक, बांके बाजार एक, गुरुआ के एक और वजीरगंज के एक बच्चे शामिल हैं. 

     *स्वस्थ्य भविष्य की जिलाधिकारी ने की कामना

     श्रवण श्रुति कार्यक्रम का अनुश्रवण जिला पदाधिकारी गया डॉ० त्यागराजन एस एम द्वारा नियमित रूप से सभी संबंधित पदाधिकारियों के साथ समीक्षा करते हैं। साथ ही पहले जितने भी सर्जरी हो चुके हैं उन बच्चों में वर्तमान स्थिति का भी जानकारी लेते हैं।  जिलाधिकारी ने बताया कि श्रवण श्रुति कार्यक्रम की मदद से ऐसे सभी बच्चे जो सही प्रकार से नहीं सुन पाते या पूरी तरह से बहरापन के शिकार है, उनके सर्जरी और इलाज की पूरी व्यवस्था सरकार द्वारा की जायेगी. उन्होंने सर्जरी हुए बच्चों के स्वस्थ्य भविष्य की कामना करते हुए उनके माता—पिता को बच्चों की नियमित थेरेपी की सलाह दी है. बच्चों के बेहतर खानपान पर भी ध्यान देने के लिए कहा है. 

  *स्क्रीनिंग की संख्या को बढ़ाने का हो रहा काम

        ज़िला पदाधिकारी ने बताया कि जिला एवं प्रखंड स्तर में कैंप लगाकर बच्चों की स्क्रीनिंग की संख्या को बढ़ाया जा रहा है. अधिक से अधिक ऐसे बच्चों को चिन्हित करने का काम किया जा रहा है जो बहरापन के शिकार हैं. ऐसे बच्चों के माता​पिता अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सक से मिलकर इसके बारे में विस्तार से जानकारी ले सकते हैं. साथ ही जयप्रकाश नारायण अस्पताल में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के समन्व्यक से मिल सकते हैं.

         सिविल सर्जन ने बताया बच्चों की स्क्रीनिंग के बाद आवश्यक जांच किया जाता है. बहरापन के शिकार बच्चों के ईलाज के लिए पूरी व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग कर रही है।

         ज़िले में अबतक 325877 बच्चे को स्क्रीनिंग किया जा चुका है। 735 बच्चे को बेरा जांच हेतु रेफर किया गया था। 416 बच्चे बेरा जांच पूर्ण की गई, जिसमे 81 बच्चे बेर पॉजिटिव  तथा 335 बच्चे बेरा निगेटिव पाए गए। कुल 23 बच्चे को सफलतापूर्वक कॉकलियर इंप्लाट मशीन लगा दिया गया है। 39 बच्चे को मशीन लगाने के लिए कागजी प्रक्रिया अंतिम चरण में है, इन्हें भी जल्द ही कॉकलियर इंप्लाट करवाया जाएगा।


 आलोक कुमार

बुधवार, 23 अगस्त 2023

अन्य अनुमंडल में भी आयोजकों को किया जाएगा सम्मानित


* हिलसा अनुमंडल में मुहर्रम के अवसर लाइसेन्स की शर्तों के अनुपालन के साथ शांतिपूर्ण तरीके से मुहर्रम अखाड़ा जुलूस निकालने वाले आयोजकों एवं शांति समिति के सदस्यों को जिलाधिकारी ने प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित  व  अन्य अनुमंडल में भी आयोजकों को किया जाएगा सम्मानित


हिलसा। मुहर्रम के अवसर पर  सम्पूर्ण जिला में अनेक अखाड़ों द्वारा जुलूस निकालने के लिए लाइसेन्स लिया गया था। अधिकांश अखाड़ों द्वारा लाइसेन्स की शर्तों का अनुपालन करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से जुलूस निकाला गया। 

ऐसे सभी अखाड़ों एवं शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग करने वाले शांति समिति के सदस्यों को अनुमण्डलवार सम्मानित किया जा रहा है। इस क्रम में सबसे पहले आज हिलसा अनुमंडल के 30 अखाड़ा आयोजकों तथा शान्ति समिति के 20 सदस्यों को सम्मानित किया गया। अनुमंडलीय सभागार में आयोजित समारोह में जिलाधिकारी ने सभी लोगों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

  इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि हिलसा अनुमंडल में मुहर्रम का जुलूस काफी शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न किया गया इसके लिए सभी अखाड़ों के आयोजक एवं शांति समिति के स्थानीय सदस्यगण धन्यवाद के पात्र हैं। इन सभी लोगों द्वारा प्रशासन को सक्रिय सहयोग दिया गया जिसके फलस्वरूप यह आयोजन सौहार्दपूर्ण वातावरण में संभव हुआ।

    इस अवसर पर विभिन्न अखाड़ों के आयोजकों तथा शान्ति समिति के सदस्यों ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त की। इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी,भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी आदि उपस्थित थे।


आलोक कुमार 

बेतिया पल्ली के पल्ली पुरोहित फादर हेनरी फर्नांडो के कहा

 

12 दिनों तक नेटिविटी ऑफ दी ब्लेस्ड विर्जिन मेरी चर्च में धार्मिक कार्यक्रम

बेतिया.ईसाई समुदाय का उद्गम स्थल बेतिया में आध्यात्मिक प्रार्थना सभा कार्यक्रम 25 अगस्त से होने जा रहा है.जो तीन दिनों का है, वह 27 अगस्त तक चलेगा.उसके बाद 30 अगस्त से नोवेना प्रार्थना शुरू होगी.वह 7 सितंबर तक जारी रहेगा. 8 सितंबर को धन्य वर्जिन मेरी चर्च (नेटिविटी ऑफ दी ब्लेस्ड विर्जिन मेरी) बेतिया चर्च में महापर्व का मिस्सा पूजा होगा.बेतिया धर्मप्रांत के बेतिया पल्ली के पल्ली पुरोहित फादर हेनरी फर्नांडो के कहा कि पल्ली में होने वाले धार्मिक आयोजन में सपरिवार भारी संख्या में भाग ले.लंच और टी सर्व किया जाएगा.

आध्यात्मिक प्रार्थना सभा कार्यक्रम

दिनांक 25 अगस्त दिन शुक्रवार दोपहर 3 बजे आध्यात्मिक प्रार्थना सभा का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन से होगा. आध्यात्मिक प्रार्थना सभा संख्या 4ः30 तक, उसके बाद संध्या 5 बजे से मिस्सा बलिदान, उसके बाद पुनः आध्यात्मिक प्रार्थना संध्या 7ः00 बजे तक होगी.26 अगस्त दिन शनिवार को सुबह 9ः00 बजे से दोपहर 12ः30 तक तथा दोपहर 2 बजे से संध्या 4ः30 तक आध्यात्मिक प्रार्थना, उसके बाद संध्या 5 बजे से मिस्सा बलिदान मिस्सा के बाद पुनः आध्यात्मिक प्रार्थना संध्या 7ः00 बजे तक होगी.27 अगस्त दिन रविवार को सुबह 9ः00 बजे से दोपहर के 12ः30 बजे तक तथा दोपहर 2ः00 बजे से संध्या 5ः30 बजे तक आध्यात्मिक प्रार्थना उसके बाद संध्या 6ः00 बजे से मिस्सा बलिदान. 

नोवेना प्रार्थना 30 अगस्त से

दिनांक 30 अगस्त संध्या 5ः00 बजे झंडोतोलन के बाद मिस्सा बलिदान एवं नोवेना प्रार्थना.दिनांक 30 अगस्त से 7 सितम्बर तक प्रति दिन संध्या 5ः00 बजे मिस्सा बलिदान एवं नोवेना प्रार्थना. दिनांक 7 सितम्बर को मिस्सा बलिदान एवं नोवेना प्रार्थना के बाद माँ मरियम के आदर में डोली शोभायात्रा.आप पल्ली वासियों से निवेदन यह है कि उस दिन अपने साथ मोमबत्ती लेते आयें.

पल्ली महापर्व 8 सितंबर को

प्रत्येक साल की तरह आठ सितंबर को माता मरियम का पर्व है.इस दिन बेतिया में पल्ली दिवस मनाया जाता है.पल्ली में धार्मिक माहौल बनाने के लिए नौ दिवसीय नोवेना का आयोजन किया गया है.महागिरजाघर का नाम नेटिविटी ऑफ दी ब्लेस्ड विर्जिन मेरी है.जो बेतिया कैथेड्रल के नाम से प्रचारित है.दिनांक 8 सितम्बर को पल्ली का महापर्व है.इस अवसर पर पहला मिस्सा बलिदान सुबह 6ः30 बजे होगा और उस मिस्सा बलिदान में छोटे बच्चे एवं बच्चियों का प्रथम पवित्र परमप्रसाद दिया जायेगा. शाम का मिस्सा बलिदान संध्या 5ः00 बजे होगा और उस दिन सुबह का दूसरा मिस्सा नहीं होगा. इन सभी कार्यक्रमों में आप सभी बेतिया के पल्ली वासियों से अनुरोध है कि सपरिवार भाग लेकर माँ मरियम का आर्शीवाद प्राप्त करें.


आलोक कुमार

 

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