शनिवार, 9 दिसंबर 2023

एक नहीं अनेक कार्यक्रम रजत जयंती के अवसर पर

 बेतिया.एक नहीं अनेक कार्यक्रम रजत जयंती के अवसर पर संत जेवियर हायर सेकेंडरी स्कूल में हुआ.संत जेवियर हायर सेकेंडरी स्कूल के रजत जयंती  के अवसर पर सभी पूर्व प्रिंसिपल फादर लॉरेंस पास्काल , फादर मैथ्यू, फादर जॉर्ज, फादर रिचर्ड आदि मौजूद थे.मौके पर पश्चिम चंपारण के डीएम दिनेश कुमार, मुख्य अतिथि थे.पटना जेसुइट प्रोविंस के प्रोविंसिएल डोनाल्ड जे मिरांडा,विशिष्ट अतिथि थे.इन महानुभावों के साथ बच्चों के अभिभावक और शुभचिंतक भारी संख्या में मौजूद थे.

        इसके पूर्व संत जेवियर हायर सेकेंडरी स्कूल के रजत जयंती समारोह के अवसर पर ग्रैंड पेरेट्स डे,इंटर स्कूल क्विज प्रतियोगिता,अंतर विघालय म्युजिकल नाटक प्रतियोगिता के साथ इंटर स्कूल कबड्डी टूर्नामेंट रजत जयंती समारोह 2023 कार्यक्रम भी किया गया. 

      अंतर विद्यालय म्यूजिकल नाटक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर विद्यालय के प्राचार्य आर्मस्ट्रांग एडिशन, विद्यालय के उप प्राचार्य रेमंड रेमी, सिस्टर पुष्पा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया. अंतर विद्यालय प्रतियोगिता में नगर के पांच स्कूलों के प्रतिभागियों ने भाग लिया.प्राचार्य फादर आर्मस्ट्रांग एडिशन ने कहा कि हमें प्रेम एवं सेवा की भावना से अपने जीवन को अपनाना चाहिए. जिसमें संत जेवियर के छात्रों ने प्रथम स्थान हासिल कर इस प्रतियोगिता को अपने नाम कर लिया.

 इस प्रतियोगिता में नगर के नोट्रेडेम पब्लिक स्कूल, केआर स्कूल, सेंट जेवियर हायर सेकेंडरी, असेंबली ऑफ़ गॉड चर्च स्कूल के प्रतिभागियों ने भाग लिया. इस प्रतियोगिता में संत थॉमस स्कूल के प्रतिभागियों द्वारा प्रति प्रेम एवं उनकी महता को दर्शाया गया.नोट्रेडेम पब्लिक स्कूल ने राष्ट्र प्रेम की भावनाओं को दर्शाया.वही संत जेवियर स्कूल के प्रतिभागियों ने क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर की स्थापना व उसके जीवनी की प्रस्तुति दी.अंत में प्रतियोगिता का रिजल्ट घोषित किया गया. जिसमें संत जेवियर को इस प्रतियोगिता का टॉपर घोषित किया गया.केआर स्कूल को संतावना पुरस्कार से सम्मानित किया गया. द्वितीय पुरस्कार नोट्रेडेम पब्लिक स्कूल के प्रतिभागियों को दिया गया. वही तृतीय पुरस्कार असेंबली आफ गॉड चर्च स्कूल को दिया गया.कार्यक्रम में निर्णायक मंडली के रूप में होली क्रॉस के सिस्टर जेसी, सेक्रेड हार्ट से सिस्टर सुजाता व गहरी मिशन से सिस्टर पुष्पा रही.मंच का संचालन अनघ, अमृत, श्रेयम और वंशिका द्वारा किया गया.मौके पर खेल समीर रेमी, जितेंद्र कुमार, संजीव शील आदि मौजूद रहे.

  बता दें इस समय संत जेवियर हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य फादर आर्मस्ट्रांग एडिशन हैं.उन्होंने शिक्षा जगत में 2003 में कदम रखा था.संत जेवियर हाई स्कूल बेतिया में अंग्रेजी के शिक्षक के रूप में उन्होंने सेवा शुरू की थी. दस साल के अध्यापन के बाद अमेरिका के मैरक्वेट विश्वविद्यालय से उन्होंने शैक्षणिक प्रशासन में स्नातकोत्तर की डिग्री 2015 में हासिल की.फादर एडिसन 1 फरवरी 2015 को संत माइकल हाई स्कूल में उप-प्राचार्य का पद संभाला.बाद में संत माइकल हाई स्कूल के प्राचार्य बनाए गए थे.8 साल के बाद संत जेवियर हाई स्कूल बेतिया में अंग्रेजी के शिक्षक के रूप में कार्य करने वाले  फादर आर्मस्ट्रांग एडिशन प्राचार्य पद पर काबिज हैं.

      उनके नेतृत्व में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हो रहा है. उन्होंने कहा कि विद्यालय ने जिन ऊंचाइयों को पाया है, वे उसे और आगे ले जाएंगे। विद्यार्थियों को खेलकूद के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.



आलोक कुमार

स्वास्थ्य उपकेंद्र तुंगी को अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उत्क्रमित कराने के लिए अनुरोध किया

 जनता दरबार में जिलाधिकारी ने 10 आवेदकों की समस्याओं को सुना, कार्रवाई को लेकर संबंधित पदाधिकारियों  को दिया गया निर्देश


 

नालंदा । दैनिक जनता दरबार में जिलाधिकारी श्री शशांक शुभंकर ने आज 10 लोगों की समस्याओं को सुना तथा समस्याओं के निदान के लिए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया।बिहारशरीफ के तुंगी के एक आवेदक द्वारा स्वास्थ्य उपकेंद्र तुंगी को अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उत्क्रमित कराने के लिए अनुरोध किया गया। जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

     मघड़ा के एक आवेदक द्वारा नगर निगम के वार्ड संख्या 47 में नाला निर्माण से संबंधित आवश्यकता के बारे में बताया गया। जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। थरथरी के एक आवेदक द्वारा जन वितरण प्रणाली की अनुज्ञप्ति के लिए मेधा क्रमांक के निर्धारण में प्रावधान का उल्लंघन किये जाने की शिकायत की गई।जिलाधिकारी ने जिला आपूर्ति पदाधिकारी को मामले की जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया।

      कुछ अन्य मामलों को लोक शिकायत अधिनियम के तहत सुनवाई के लिए जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को निर्देश दिया गया। अन्य आवेदनों को भी संबंधित विभाग के पदाधिकारियों को भेजते हुए समाधान के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया।

आलोक कुमार

सोनिया गांधी हैं त्याग की प्रतिमूर्ति : डॉ. अखिलेश


 सोनिया गांधी हैं त्याग की प्रतिमूर्ति : डॉ. अखिलेश

9 दिसम्बर कांग्रेसियों के लिए प्रेरणा दिवस : डॉ. अखिलेश

  पटना ।बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी त्याग की प्रतिमूर्ति हैं और उनके जन्मदिन को प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए।  वे शनिवार को प्रदेश पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में श्रीमती सोनिया गांधी का 77वाँ जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमती गांधी  की जिन्दगी त्याग की गाथा है।  पति की हत्या के बाद अपनी जिन्दगी के साथ दो अबोध बच्चों के भविष्य की चिन्ता करते हुए भी श्रीमती गांधी   राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखा । निजी जिन्दगी की त्रासदी के बीच भी राजनीतिक लालसा उनको कभी विचलित नहीं कर पाया। न चाहते हुए भी कांग्रेस के हित के लिए वे राजनीति में आयीं मगर जब कांग्रेस को सत्ता मिली और प्रधानमंत्री की कुर्सी सामने पड़ी थी तो एक पल बिताये बगैर उन्होंने उसे ठुकरा दिया। भारतीय राजनीति में दुसरा ऐसा मिशाल नहीं। 

श्रीमती सोनिया गांधी   के जन्मदिन के उपलक्ष्य में प्रदेश अध्यक्ष ने सैंकड़ों कार्यकर्ताओं को केक खिलाए एवं सैंकड़ों बच्चों को पठन-पाठन सामग्री के अलावा फुड पैकेट का वितरण किया। इस अवसर पर प्रदेश महिला कांग्रेस सरबत जहाँ फातिमा के नेतृत्व में मिलन समारोह आयोजित किया गया जिसमें प्रदेश महिला कांग्रेस की महासचिव डा0 कुमारी सोनी रंजन के नेतृत्व में दर्जनों महिला कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का दामन थामा। बाद में महिला कांग्रेस की अध्यक्षा सरबत जहाँ फातिमा ने प्रदेश अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।

इसके अलावा सदाकत आश्रम में शनिवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व0 केदार पाण्डेय की 110वीं जयन्ती मनायी गयी जिसमें प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने स्व0 पाण्डेय के तैल चित्र पर पुष्प-माला अर्पित कर श्रद्धाँजलि दी। 

सोनिया गांधी  के जन्मदिन कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं में शामिल थे - पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा0 मदन मोहन झा, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, कौकब कादरी, विधायक प्रतिमा कुमारी दास, नरेन्द्र कुमार, लाल बाबू लाल, बंटी चौधरी, कपिलदेव प्रसाद यादव, नूतन पाण्डेय, ब्रजेश पाण्डेय, राजेश राठौड़, ब्रजेश प्रसाद मुनन भावना झा, निर्मल वर्मा, असित नाथ तिवारी, शरवत जहां फातिमा, डा0विनोद शर्मा, डा0 संजय यादव, राज किशोर सिंह, शशि रंजन, डा0 आशुतोष शर्मा, संजीव कुमार कर्मवीर, शशिकांत तिवारी, अनुराग चंदन, रूपम यादव, विशाल रंजन, मृणाल अनामय, उदय शंकर पटेल, शास्वत केदार पाण्डेय, निधि पाण्डेय, रमाशंकर पाण्डेय, सुदय शर्मा, रेणु सिंह, नीतू सिंह निषाद, सत्येन्द्र पासवान, प्रियंका सिंह,जावेद इकबाल, अरूणा सिंह।

आलोक कुमार

40 स्कूलों का सर्वे में सेंट माइकल अकादमी,पटना को प्रथम रैंक प्राप्त

 टाइम्स स्कूल सर्वे में सेंट माइकल अकादमी,पटना को प्रथम रैंक प्राप्त हुआ है.40 स्कूलों का सर्वे

पटना. सेंट माइकल अकादमी पटना को 1 रैंक प्राप्त हुआ है.

नोट्रे डेम अकादमी, पटना और लिट्रा वैली स्कूल पटना को 2 रैंक संयुक्त रूप से प्राप्त हुआ है.रेडार्ट इंटरनेशनल स्कूल, पटना और संत कैरेंस सेकेंडरी स्कूल, पटना को 3 रैंक संयुक्त रूप से प्राप्त हुआ है.विद्या विहार रेजिडेंशियल स्कूल, पटना को 4 रैंक प्राप्त हुआ है.

          इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल गर्ल्स, पटना और दिल्ली पब्लिक स्कूल, गया को 5 रैंक संयुक्त रूप से प्राप्त हुआ है.सेठ एम.आर.जयपुरिया स्कूल, पटना को 6 रैंक प्राप्त हुआ है.बीओ पब्लिक स्कूल,पटना को 7 रैंक प्राप्त हुआ है.नॉर्थ प्वाइंट चिल्ड्रन स्कूल, मुजफ्फरपुर को 8 रैंक प्राप्त हुआ है.डीपीएस, पटना को 9 रैंक प्राप्त हुआ है.डीएवी बीएसईबी, पटना को 10 रैंक प्राप्त हुआ है.सेंट जोसेफ कॉन्वेंट, पटना को 11 रैंक प्राप्त हुआ है.प्रभात तारा स्कूल, मुजफ्फरपुर को 12 रैंक प्राप्त हुआ है.डॉन बॉस्को अकादमी, पटना को 13 रैंक प्राप्त हुआ है.लोयोला हाई स्कूल, पटना को 14 रैंक प्राप्त हुआ है.संत ज़ेवियर का हाई स्कूल, पटना को 15 रैंक प्राप्त हुआ है.कार्मेल हाई स्कूल, पटना को 16 रैंक प्राप्त हुआ है.बिशप स्कॉट गर्ल्स स्कूल, पटमा को 17 रैंक प्राप्त हुआ है.ओ एन मेमोरियल हाई स्कूल, गया को 18 रैंक प्राप्त हुआ है.होली मिशन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मुजफ्फरपुर को 19 रैंक प्राप्त हुआ है.आरयूएस इंटरनेशनल स्कूल, गया को 20 रैंक प्राप्त हुआ है.

             ज्ञान निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पटना को 21 रैंक प्राप्त हुआ है.उषा मार्टिन वर्ल्ड स्कूल, पटना को 22 रैंक प्राप्त हुआ है.मिलेनियम वर्ल्ड स्कूल, पटना को 23 रैंक प्राप्त हुआ है. नाज़रेथ अकादमी, गया को 24 रैंक प्राप्त हुआ है.ज्ञान भारती रेजिडेंशियल कॉम्पटेक्स,गया को 25 रैंक प्राप्त हुआ है.जीडी मदर इंटरनेशनल स्कूल, मुजफ्फरपुर को 26 रैंक प्राप्त हुआ है.होली मिशन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मुजफ्फरपुर को 27 रैंक प्राप्त हुआ है.शिवम कान्वेंट, पटना को 28 रैंक प्राप्त हुआ है.ब्रैडफोर्ड इंटरनेशनल स्कूल, पटना को 29 रैंक प्राप्त हुआ है.संत माइकल अकादमी, बेतिया को 30 रैंक प्राप्त हुआ है.

           डीएवी पब्लिक स्कूल समस्तीपुर को 31 रैंक प्राप्त हुआ है.डीएवी खगौल पटना को 32 रैंक प्राप्त हुआ है.पीएस रेजिडेंशियल स्कूल, पटना को 33 रैंक प्राप्त हुआ है.होली मिशन सीनियर सेकेंडरी स्कूल,पटना को 34 रैंक प्राप्त हुआ है.डीएवी रोटरी कैंपस गया,गया को 35 रैंक प्राप्त हुआ है.डिफेन्स पब्लिक स्कूल,नालंदा को 36 रैंक प्राप्त हुआ है.कुरमा संस्कृत स्कूल,जहानाबाद को 37 रैंक प्राप्त हुआ है.बाल्डविन अकादमी,पटना को 38 रैंक प्राप्त हुआ है.ओपन माइंड-ए बिला स्कूल,पटना को 39 रैंक प्राप्त हुआ है.डीवाई पाटिल इंटरनेशनल स्कूल, पटना को 40 रैंक प्राप्त हुआ है.

आलोक कुमार


शुक्रवार, 8 दिसंबर 2023

बच्चों की अचानक तबीयत खराब होने की सूचना

बेतिया। पश्चिम चंपारण जिले के मझौलिया प्रखंड अंतर्गत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, परसा बाबू टोला के बच्चों की अचानक  तबीयत  खराब होने की सूचना जिला प्रशासन के संज्ञान में आया है।

इस विद्यालय के 51 बच्चों को हल्का पेट दर्द, सिरदर्द की शिकायत पर स्थानीय पीएचसी में इलाज के लिए ले जाया गया। यहाँ इन्हें डॉक्टरों की निगरानी में ऑब्जर्वेशन में रखा गया।  तबीयत में सुधार होने के उपरांत बच्चे अपने घर पहुंच गए हैं। 04 बच्चों द्वारा पेट में ज्यादा दर्द होने की बात बताई गई। इन्हें जीएमसीएच में समुचित इलाज के लिए भेजा गया है। फिलवक्त इनकी तबीयत सामान्य है।

जिलाधिकारी, पश्चिमी चम्पारण द्वारा उक्त घटना की उच्च स्तरीय जांच के लिए टीम का गठन कर दिया गया है। इस टीम में अपर समाहर्ता-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, सिविल सर्जन तथा एएसडीएम, बेतिया को शामिल किया गया है। टीम जांच कर अपना रिपोर्ट देगी, इसके आलोक में अग्रतर कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन द्वारा अपील की गई है कि जिलेवासी किसी भी प्रकार के अफवाहों पर ध्यान नहीं देंगे। जिला प्रशासन पूरी तरह संवेदनशील है। सभी बच्चे अपने घर पहुंच गए हैं और स्वस्थ हैं।


आलोक कुमार

 

रजत जयंती समारोह शनिवार 9 दिसंबर को संध्या 4 बजे से



बेतिया। सेंट इग्नाटियस लोयोला द्वारा 1540 में सोसाइटी ऑफ जीसस नामक संस्था स्थापित की थी। दुनिया भर में शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रही है सोसाइटी ऑफ जीसस। भारत में, सोसाइटी ऑफ जीसस वर्तमान में 160 हाई स्कूलों, 27 कॉलेजों और 15 तकनीकी और अन्य संस्थानों के लिए जिम्मेदार है, जिसमें प्रत्येक सामाजिक वर्ग, समुदाय और भाषाई समूह के 2,50,000 से अधिक युवा दस क्षेत्रीय माध्यमों से शिक्षित होते हैं। इसमें सेंट जेवियर्स हायर सेकेंडरी स्कूल, बेतिया भी शामिल है। इसे 1998 में स्थापित किया गया था और मानवता की सेवा के माध्यम से भगवान की महान महिमा के लिए समर्पित पुरुषों का एक समूह, सोसाइटी ऑफ जीसस (जेसुइट फादर्स) के सदस्यों द्वारा प्रशासित है।

   सेंट जेवियर्स हायर सेकेंडरी स्कूल, बेतिया के प्राचार्य फादर आर्मस्ट्रांग एडिसन, एस.जे.कहते हैं कि मैं स्कूल के इस रजत जयंती वर्ष के दौरान प्रतिष्ठित सेंट जेवियर्स हायर सेकेंडरी स्कूल, बेतिया में प्रिंसिपल के रूप में शामिल होकर बेहद खुश और सम्मानित महसूस कर रहा हूं। हमारे स्कूल का आदर्श वाक्य है ‘प्रेम के साथ सेवा‘। हमारा स्कूल पिछले पच्चीस वर्षों से पश्चिम चंपारण के लोगों की सेवा में है, और इस वर्ष हम इन वर्षों की प्रेमपूर्ण सेवा के दौरान हमारे प्रति ईश्वर की वफादारी का जश्न मनाते हैं। जैसा कि महान महात्मा गांधी ने एक बार कहा था, ‘खुद को खोजने का सबसे अच्छा तरीका खुद को दूसरों की सेवा में खो देना है।‘ सेवा के कार्यों के माध्यम से, हमारे छात्र अपनी क्षमता की खोज करते हैं और समाज में सार्थक योगदान देते हैं। यहां सेंट जेवियर्स में सेवा हमारे मिशन का केंद्र है। हम अपने छात्रों को दूसरों के प्रति करुणा और सहानुभूति की भावना विकसित करने और अपने आसपास की दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए अपनी प्रतिभा और कौशल का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

   हमारा स्कूल एक सुरक्षित, सहायक और शैक्षणिक रूप से चुनौतीपूर्ण वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है जो बौद्धिक योग्यता, विकास के लिए खुलापन, प्रकृति में प्रेम और विश्वास और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को बढ़ावा देता है। हमारे स्टाफ के समर्पित सदस्य छात्रों को अकादमिक और व्यक्तिगत रूप से उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने में मदद करने के लिए उत्साहित हैं। हम एक व्यापक पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं जो बचपन की प्रारंभिक शिक्षा से लेकर हाई स्कूल तक हमारे सभी छात्रों की जरूरतों और हितों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। सकारात्मक और समावेशी शिक्षण वातावरण बनाने के लिए हम सभी हितधारकों से खुले संचार और सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं। हमारा लक्ष्य अपने छात्रों को ‘दूसरों के लिए पुरुष और महिला, विवेक, सक्षमता और दयालु प्रतिबद्धता वाले व्यक्ति‘ बनाना है।

  बताया जाता है कि रजत जयंती समारोह शनिवार 9 दिसंबर को संध्या 4 बजे से मनाया जाएगा।


आलोक कुमार

2024 में प्रभावशाली समुदाय आधारित लाइटनिंग रेजिलिएंस कार्यक्रम चलाना

 पटना। कैरिटास इंडिया सामाजिक सरोकार और मानव विकास के लिए कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) का आधिकारिक राष्ट्रीय संगठन है। इसका अध्यक्ष पटना के आर्चबिशप सेबेस्टियन कल्लुपुरा है।कैरिटास इंडिया के द्वारा बिहार वाटर डेवलपमेंट सोसाइटी को सहयोग किया जाता है। इस सहयोग से नवादा जिले के कौवाकोल प्रखंड में फादर दिनेश कुमार और जौन डी‘क्रूज के नेतृत्व में शानदार कार्य किया जा रहा है।

    बताया गया कि कौवाकोल ब्लॉक के खैरा पंचायत में लाइटिंग जागरूकता रथ द्वारा लोगों को दिनांक 7.12.23 एवं 8.12. 23 को जागरूक किया गया.इसका मुख्य विषय लाइटनिंग रेजिलिएंस फ्रेमवर्क बनाने का था। इसमें कैरिटास इंडिया और क्लाइमेट रेजिलिएंट ऑब्जर्विंग सिस्टम एसप्रमोशन काउंसिल सीआरओपीसी, एनडीएमए, आईएमडी के द्वारा अध्ययन की जा रही है। इसका खास उद्देश्य पुरानी प्रथाओं से सीखना और उसमें हुई कमियों को पहचान कर चर्चा कर 2024 में प्रभावशाली समुदाय आधारित (वज्रपात) लाइटनिंग रेजिलिएंस कार्यक्रम चलाना है।
         दो दिनों के दरम्यान प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों में हाल के दशकों में तेजी से वृद्धि देखी गई है. दुनिया भर के शहरों और देशों को यह एहसास होने लगा है कि ये घटनाएँ अब ‘सौ साल‘ के तूफान नहीं हैं, बल्कि कुछ वर्षों के भीतर दोहराई जाती हैं। जैसे-जैसे इस सदी में शहरीकरण जारी रहेगा, अधिक से अधिक लोग और अधिक आर्थिक गतिविधियाँ जोखिम वाले क्षेत्रों में केंद्रित होंगी; विशेष रूप से पूरे एशिया और अफ्रीका के शहरों में नए आगमन के सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों में केंद्रित होने की संभावना है, जैसा कि वे आज अक्सर उत्तरी अमेरिका और यूरोप में होते हैं। यह लेख प्राकृतिक आपदाओं की हालिया वृद्धि की समीक्षा करता है और विचार करता है कि कैसे एक सिस्टम दृष्टिकोण इन जोखिमों के शमन और अनुकूलन और ऐसी घटनाओं से उबरने के तरीकों में सुधार कर सकता है।
    शहरों और क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के जोखिमों के शमन और अनुकूलन को इंटरनेट ऑफ थिंग्स, डेटा साइंस से विश्लेषणात्मक और मॉडलिंग तकनीकों पर आधारित सिस्टम साइंस परिप्रेक्ष्य और सिस्टम इंजीनियरिंग विधियों के अनुप्रयोग के माध्यम से कैसे मजबूत किया जा सकता है, और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) में सामान्य विकास। इस तरह का काम हाल ही में शुरू हुआ है और न केवल अकादमिक हित के लिए, बल्कि इन जोखिमों के लिए जीवन और संपत्ति के जोखिम को कम करने के लिए सिमुलेशन मॉडलिंग की तकनीकों को लागू करने के महान अवसर हैं। स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र, विशेष रूप से बीमा कंपनियों की ऐसे उपकरण विकसित करने में गहरी रुचि है।
   कोई भी मानव जीवन जोखिम से मुक्त नहीं है और अंत में हम सभी मर जाते हैं। हम कितने समय तक और कितना अच्छा जीवन जीते हैं यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि हम जोखिमों को कैसे पहचानते हैं और उन्हें कैसे कम करते हैं और उनके साथ कैसे तालमेल बिठाते हैं। हम इसे व्यक्तियों और समुदायों के सदस्यों के रूप में करते हैं। हम कुछ जोखिम स्वीकार करते हैं, क्योंकि यदि हम आपदा से बचने में सफल होते हैं, तो हम कुछ वांछनीय परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। हम आपदा से बचने के लिए अन्य जोखिमों को कम करते हैं या उनके अनुकूल ढलते हैं, लेकिन इसमें अवसर लागत शामिल होती है। व्यक्ति और समुदाय दोनों के रूप में हम जोखिमों और संबंधित लागतों को समझने का खराब काम करते हैं। यह आलेख शहरी और क्षेत्रीय समुदायों को ऐसी घटनाओं के प्रति अपने लचीलेपन में सुधार करने में सक्षम बनाने के लिए नए तरीकों का वर्णन करता है।
   भूभौतिकीय संवेदन का व्यापक विस्तार, जो लगभग 50 साल पहले पृथ्वी की उपग्रह इमेजिंग के साथ शुरू हुआ था, और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के माध्यम से ऐसी जानकारी प्राप्त करने और डेटा विज्ञान के एल्गोरिदम और कम्प्यूटेशनल शक्ति के साथ इसका विश्लेषण करने की हमारी क्षमता में क्षमता है। प्राकृतिक आपदा जोखिमों के प्रति हमारे दृष्टिकोण को बदलें। संवेदन का इसी तरह का विस्तार शहरों में भी चल रहा है और ये शहरी प्रणालियों को समझने में सक्षम बनाता है। इस लेख में हम उन क्षेत्रों की ओर इशारा करते हैं जहां ये प्रौद्योगिकियां, सिस्टम साइंस पर आधारित नए सिद्धांतों के साथ, मानव जीवन की सुरक्षा और सार्वजनिक और निजी बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश में सहायता कर सकती हैं।
      प्राकृतिक आपदाएँ अलग-अलग घटनाएँ नहीं हैं। वे सहस्राब्दियों से मौजूद प्राकृतिक प्रणालियों के बार-बार, लेकिन प्रासंगिक, परिणाम हैं, हालांकि आधुनिक मानव गतिविधियों के माध्यम से उन्हें बढ़ाया जा सकता है, उदाहरण के लिए, बड़े पैमाने पर वैश्विक यात्रा के माध्यम से संक्रामक रोगों का प्रसार। इस दृष्टिकोण से, अधिकांश प्राकृतिक आपदाएं आश्चर्य के रूप में नहीं आनी चाहिए।
      पृथ्वी की प्राकृतिक प्रणालियों के हाथों में, हम प्राकृतिक आपदाओं को रोकने में शक्तिहीन हैं। कुछ मामलों में, उदाहरण के लिए भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट, उनकी घटना का सटीक समय उपयोगी रूप से अनुमानित नहीं हो सकता है। लेकिन उन्हें पूरी तरह आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए. किसी दिए गए शहर या क्षेत्र के लिए, मध्यम प्रयास से, यह पहचानना संभव है कि कौन से प्रमुख जोखिम मौजूद हैं, उनके प्रभाव कहाँ होंगे, और कौन से सांकेतिक संकेत किसी आसन्न घटना की चेतावनी देंगे। इस विश्लेषण में से कुछ ऐतिहासिक अभिलेखों से आ सकते हैं, कुछ वैज्ञानिक अनुसंधान से, जैसे कि स्थानीय भूविज्ञान, और कुछ समकालीन उपकरण से। यह विश्लेषण उन लोगों और बुनियादी ढांचे को भी इंगित करेगा जो सबसे अधिक जोखिम में हैं और संभावित घटनाओं की मानवीय और आर्थिक लागत का आकलन करने की अनुमति देगा। यह बदले में इनमें से कुछ या सभी जोखिमों के शमन के लिए नीति के विकास और ऐसे उदाहरणों की पहचान करने की अनुमति देगा जहां शमन और दिन-प्रतिदिन की गतिविधियां एक-दूसरे का समर्थन कर सकती हैं - उदाहरण के लिए, जहां स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकियां आपदा लचीलापन भी प्रदान करती हैं या जहां बाढ़ क्षेत्र को पार्क के रूप में नामित किया जाता है जब वह पानी के नीचे नहीं होता है। ऐसी नीति का लक्ष्य एक ऐसे निर्मित वातावरण का निर्माण करना नहीं है जो प्राकृतिक शक्तियों द्वारा अभेद्य हो, जो सामान्य तौर पर अव्यावहारिक है, बल्कि शहर या क्षेत्र में जीवन की मूल प्रणालियों को समझना और यह सुनिश्चित करना है कि इन्हें संरक्षित और पुनः बनाया जा सके। किसी घटना के बाद यथाशीघ्र स्थापित किया गया। यह प्राकृतिक आपदाओं के प्रति लचीलापन है।
       इस प्रकार प्राकृतिक आपदाओं को अप्रत्याशित, क्षणभंगुर घटनाओं के रूप में नहीं माना जाना चाहिए जो आपातकालीन प्रतिक्रिया की मांग करती हैं, बल्कि वर्षों या सदियों तक चलने वाले जीवन चक्र के साथ चल रहे जोखिमों के रूप में मानी जानी चाहिए जिनका शमन और अनुकूलन शहरी नियोजन और नीति में स्थायी रूप से अंतर्निहित होना चाहिए। यह रूपरेखा नीति निर्माताओं के लिए आवश्यक संतुलन की ओर इशारा करती हैरू भविष्य की घटनाओं के प्रभावों को कम करने के लिए या जहां संभव हो, दोनों नीतियों को एक साथ लाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश करने या आज संभावित आर्थिक विकास को बाहर करने की आवश्यकता है।
      सिस्टम साइंस  के परिप्रेक्ष्य से प्राकृतिक आपदाओं और मानव बस्तियों पर उनके प्रभावों पर विचार करता है । यह ऐसी बस्तियों को न तो पूरी तरह से सामाजिक प्रणालियों के रूप में और न ही पूरी तरह से बुनियादी ढांचे की प्रणालियों के रूप में देखता है, बल्कि निवासियों और प्राकृतिक और निर्मित वातावरणों के बीच और प्राकृतिक और निर्मित वातावरणों के बीच निवासियों के बीच असंख्य बातचीत के रूप में देखता है। ये अंतःक्रिया शहरी प्रणालियों का निर्माण करती हैं  
 विचार यह है कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और बिग डेटा जैसी वर्तमान प्रगति ऐसी प्रणालियों का अध्ययन करने के लिए काफी उन्नत क्षमताएं प्रदान करती है और इन्हें ऐसी बस्तियों के लचीलेपन में सुधार के लिए प्राकृतिक आपदा जोखिमों के पूरे जीवन चक्र में लागू किया जा सकता है।
        हम यह तर्क नहीं देते कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्राकृतिक आपदा लचीलेपन के लिए चमत्कारी समाधान हैं। वास्तव में इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि, उदाहरण के लिए, सामाजिक एकजुटता  अपने आप में एक शक्तिशाली कारक है जो कम से कम किसी घटना के प्रभाव को कम कर सकता है। लेकिन हम ऐसे समय में रह रहे हैं जब दुनिया भर के शहर और क्षेत्र पहले से ही सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरताओं, शहरीकरण और अभूतपूर्व पैमाने पर प्रवास के कारण अत्यधिक तनाव में हैं, और जिसमें प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। इन सभी प्रवृत्तियों से प्राकृतिक आपदाओं के अधिक प्रभाव का ख़तरा है। इस संदर्भ में, हमें न केवल लचीलेपन के लिए सामाजिक दृष्टिकोण पर विचार करना चाहिए, बल्कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से बनाए गए अवसरों पर भी विचार करना चाहिए ।

आलोक कुमार

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