न जाने किस जहां में खो गए
बगहा. पश्चिम चंपारण में चखनी, रजवटिया है.जो बगहा 1 में पड़ता है.यहां पर ईसाई समुदाय का उपासना स्थल होली फैमिली चर्च है.यह 141 साल पूर्व 1883 में स्थापित किया गया.
इस क्षेत्र के गुरू हेनरी ठाकुर और माग्रेट हेनरी ठाकुर के पुत्र विक्टर हेनरी ठाकुर है. विक्टर हेनरी ठाकुर का जन्म 1 जुलाई 1954 को चखनी में हुआ था. रायपुर धर्मप्रांत में पुरोहित बनने गए.उनका पुरोहिताभिषेक 3 मई, 1984 को हुआ.रायपुर धर्मप्रांत के चांसलर और रायपुर बिशप के सचिव के रूप में कार्य किया था.मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के विभाजन के बाद फादर विक्टर हेनरी ठाकुर 27 जून, 1998 को बेतिया धर्मप्रांत के प्रथम बिशप नियुक्त होने का गर्व प्राप्त किया.उनका एपिस्कोपल समन्वय 11 नवंबर, 1998 को हुआ था.बिशप ठाकुर बिहार क्षेत्रीय बिशप परिषद के शिक्षा आयोग के अध्यक्ष थे. उन्हें 3 जून 2013 को रायपुर का आर्चबिशप नियुक्त किया गया और 19 सितंबर 2013 को पदस्थापित किया गया.
रायपुर महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप विक्टर हेनरी ठाकुर चखनी पहुंचे.उनके दस साल बड़े भाई डॉक्टर आल्बर्ट हेनरी ठाकुर का निधन 24 मार्च को हो गया था.रायपुर महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप विक्टर हेनरी ठाकुर के अलावे पटना महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप सेबेस्टियन कल्लूपुरा भी पहुंचे.
आज 25 मार्च को होली फैमिली चर्च में डॉक्टर आल्बर्ट हेनरी ठाकुर का पार्थिव शरीर रखकर मिस्सा किया गया.इस मिस्सा का मुख्य अनुष्ठानकर्ता रायपुर महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप विक्टर हेनरी ठाकुर थे.उनके साथ पटना महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप सेबेस्टियन कल्लूपुरा, बेतिया धर्मप्रांत के बिशप पीटर सेबेस्टियन गोबियस,बेतिया धर्मप्रांत के विकर जनरल फिंटन अलोसियुस साह ,बेतिया पल्ली के पल्ली फादर हेनरी फर्नाडो,चखनी पल्ली के पुरोहित पुरोहित फादर नॉरबर्ट, फादर चैंबर्लिन ,फादर आनंद पास्काल आदि शामिल थे.
मिस्सा के बाद भारी मन से होली फैमिली चर्च के कब्रिस्तान में ईसाई धर्मरीति के अनुसार दफन कर दिया गया.इससे पूर्व रायपुर महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप विक्टर हेनरी ठाकुर ने अपने अग्रज के लिए प्रार्थना की.मालूम हो कि यही पर आर्चबिशप विक्टर हेनरी ठाकुर के पिताश्री हेनरी ठाकुर का अंतिम क्रियाकलाप किया गया था.
मौके पर डॉक्टर साहब के रिश्तेदार और शुभचिंतक उपस्थित रहे.बेतिया,चुहड़ी,चनपटिया, रामनगर पल्ली के भी लोग अंतिम दर्शन और दफन में भाग लेने पहुंचे थे.सभी लोगों ने यह कामना किये कि ओ जानेवाले, हो सके तो लौट के आना ये घाट, तू ये बाट कहीं भूल न जाना बचपन के तेरे मीत, तेरे संग के सहारे ढूंढ़ेंगे तुझे गली गली, ...
आलोक कुमार







