दुर्ग रेलवे स्टेशन विवाद पर नन और आदिवासी युवतियों की गिरफ्तारी से लेकर जमानत तक घटनाक्रम.एनआईए कोर्ट ने दी जमानत, पहले दो बार खारिज हुई थी अर्जी......
दुर्ग . दुर्ग रेलवे स्टेशन पर मिशनरी ननों और तीन आदिवासी युवतियों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एनआईए कोर्ट के जमानत आदेश के बाद ठंडा पड़ता नजर आ रहा है.सिस्टर प्रीति मेरी, सिस्टर वंदना फ्रांसिस और ब्रदर सुकमन मंडावी को एनआईए कोर्ट ने जमानत दे दी है.इससे पहले उनकी जमानत अर्जी निचली अदालत और सत्र न्यायालय दोनों में खारिज हो चुकी थी.
घटना चक्र:
26 जुलाई 2025:
दुर्ग रेलवे स्टेशन पर विवाद.
नारायणपुर जिले की तीन आदिवासी युवतियां (कमलेश्वरी प्रधान, ललिता और सुखमती) ननों के साथ आगरा नौकरी के लिए जा रही थीं.टीटीई द्वारा टिकट जांच के बाद बजरंग दल को सूचना दी गई.
बजरंग दल नेता ज्योति शर्मा ने मौके पर पहुंचकर आरोप लगाया कि नन नौकरी का लालच देकर युवतियों को धर्मांतरण के लिए ले जा रही हैं.पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों ननों और युवक सुखमन मंडावी को हिरासत में लिया.
27 जुलाई 2025:
पुलिस ने छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया.तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया.
29 जुलाई 2025:
निचली अदालत ने जमानत अर्जी खारिज की. अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पूरी होने तक जमानत नहीं दी जा सकती.
30 जुलाई 2025:
सत्र न्यायालय ने भी जमानत याचिका खारिज की.अदालत ने पुलिस को जल्द चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश दिए.
31 जुलाई 2025:
ननों और ब्रदर सुकमन के समर्थन में केरल और छत्तीसगढ़ में विरोध प्रदर्शन.चर्च और ईसाई संगठनों ने इसे झूठा केस बताया.
2 अगस्त 2025:
मामला एनआईए कोर्ट में पहुंचा.एनआईए कोर्ट ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत मंजूर कर ली.
आरोप और बचाव
आरोप: बजरंग दल का कहना था कि नन आदिवासी युवतियों को नौकरी के बहाने धर्मांतरण के लिए ले जा रही थीं.
बचाव: युवतियों और उनके परिजनों ने कहा कि वे अपनी मर्जी से नौकरी के लिए जा रही थीं और किसी प्रकार का दबाव नहीं था.
जमानत का आदेश
एनआईए कोर्ट ने कहा कि पुलिस जांच पूरी होने तक आरोपियों को जेल में रखना उचित नहीं है.अदालत ने सभी को शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.
आलोक कुमार







