शनिवार, 27 सितंबर 2025

डॉ. एस. एन. सुब्बा राव (भाई जी)


 डॉ. एस. एन. सुब्बा राव (भाई जी)

पटना.एक युगद्रष्टा समाजसेवी और युवा प्रेरक भारतीय समाज ने अनेक संत, समाज सुधारक और राष्ट्रसेवक देखे हैं, लेकिन डॉ. एस. एन. सुब्बा राव, जिन्हें देश “भाई जी” के नाम से जानता है, उनमें से सबसे विलक्षण रहे.उनका जीवन सेवा, साहस और समर्पण का जीवंत उदाहरण है. 7 फरवरी 1929 को कर्नाटक के सेलम (बैंगलोर के निकट) में जन्मे भाई जी आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी 96वीं जयंती हमें उनके कार्यों और विचारों को पुनः याद करने का अवसर देती है.

चंबल के डाकुओं को अहिंसा के मार्ग पर

सत्तर का दशक. चंबल घाटी डाकुओं के आतंक से कांप रही थी. खून-खराबा, लूटपाट और भय उस इलाके की पहचान बन चुके थे. ऐसे समय में भाई जी ने गांधीवादी तरीके से संवाद, धैर्य और मानवता का सहारा लिया. उन्होंने डाकुओं को न केवल आत्मसमर्पण के लिए तैयार किया, बल्कि उन्हें खेती-किसानी, कुटीर उद्योग और अहिंसक जीवन का प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा में वापस लाए. चंबल का इतिहास इस तथ्य का साक्षी है कि एक व्यक्ति की करुणा और दृढ़ता समाज की दिशा बदल सकती है.

युवाओं के लिए “भाई जी”

भाई जी का विश्वास था कि राष्ट्र की असली ताकत उसकी युवा पीढ़ी है.उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना की भावना को आगे बढ़ाते हुए “राष्ट्रीय युवा योजना” की स्थापना की. यह योजना युवाओं के लिए केवल कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि जीवन का संदेश थी – “युवा ही राष्ट्र की धड़कन हैं, उन्हें सही दिशा मिले तो देश बदल सकता है.

”उनकी अपील सरल लेकिन गहरी थी –

एक घंटा देश को और एक घंटा देह को ”

युवाओं से अपेक्षा थी कि वे प्रतिदिन अपने देश की सेवा में एक घंटा दें और अपने स्वास्थ्य के लिए भी एक घंटा निकालें। यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था.

सद्भावना की रेल यात्रा

भाई जी ने केवल युवाओं को संगठित नहीं किया, बल्कि उन्हें देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा बनाया.1990 के दशक की सद्भावना रेल यात्रा इसका उदाहरण है. यह तीन चरणों में पूरे देश से होकर गुज़री और जहाँ-जहाँ पहुँची, वहाँ सर्वधर्म प्रार्थना सभाओं और रैलियों के जरिए सामाजिक एकता का संदेश दिया.धर्म, जाति और भाषा के भेदभाव को मिटाकर भाईचारे की भावना जगाने में उनका योगदान अद्वितीय रहा.

राहत और पुनर्वास में सदैव अग्रणी

प्राकृतिक आपदाओं या दंगों से पीड़ित इलाकों में भाई जी और उनके युवा स्वयंसेवक सबसे पहले पहुँचते थे। चाहे बाढ़ हो, चक्रवात, भूकंप या दंगे – वे तुरंत राहत शिविर लगवाते और मानवता की सेवा में जुट जाते। यही कारण था कि वे केवल समाजसेवी नहीं, बल्कि युवा शक्ति के मार्गदर्शक माने गए.

संवाद और संगीत की ताकत

भाई जी की सबसे बड़ी शक्ति का संवाद था. वे देश की लगभग हर प्रमुख भाषा में संवाद कर सकते थे.उनकी मधुर आवाज़ में गाए गए भजन और सामूहिक गीत लोगों को झकझोर देते थे. बच्चे उन्हें “फुग्गावाले दादा जी” कहते थे क्योंकि वे हमेशा जेब में गुब्बारे रखते और मासूम चेहरों पर मुस्कान बिखेर देते. युवाओं के लिए वे “भाई जी” और चंबल के आत्मसमर्पित बागियों के लिए “सुब्बाराम” बन गए.

आज की प्रासंगिकता

आज का युवा बेरोजगारी, नशाखोरी, और आडंबर की दुनिया में उलझा है। ऐसे समय में भाई जी का जीवन हमें याद दिलाता है कि सही दिशा, सेवा भाव और दृढ़ संकल्प से ही युवाओं की ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में लगाई जा सकती है। उन्होंने दिखाया कि जब युवा अपने भीतर की शक्ति को पहचानता है, तो समाज की सबसे बड़ी समस्या भी हल हो सकती हैं.

निष्कर्ष

भाई जी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि “सेवा ही सच्ची साधना है.” उनकी 96वीं जयंती पर यही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारे, समाज सेवा के प्रति अपने संकल्प को मजबूत करें और राष्ट्र की एकता-अखंडता के लिए काम करें.

* भाई जी ने अपने जीवन से यह सिद्ध कर दिया कि दृढ़ संकल्प से असंभव संभव है.

* अहिंसा केवल विचार नहीं, बल्कि बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है.

* और युवा शक्ति ही भारत की सबसे बड़ी पूंजी है.

डॉ. एस. एन. सुब्बा राव – एक नाम नहीं, बल्कि सेवा और प्रेरणा की जीवित विरासत हैं.

आलोक कुमार

शुक्रवार, 26 सितंबर 2025

61 योजनाओं का शिलान्यास किया

 दरभंगा. मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने आज दरभंगा में मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान, दरभंगा के परिसर में आयोजित कार्यक्रम स्थल से 3463.2 करोड़ रुपये लागत की कुल 97 योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया. इसमें 96.47 करोड़ रुपये की लागत से कुल 36 विकासात्मक योजनाओं का उद्घाटन एवं 3366.73 करोड़ रुपये की लागत की 61 योजनाओं का शिलान्यास किया गया.

            इन योजनाओं से जिले में विकास कार्यों को नई गति एवं दिशा मिलेगी, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार होगा एवं उन्हें इसका प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा. इसके पश्चात् माननीय मुख्यमंत्री जी ने मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान, दरभंगा के परिसर में ही आयोजित संवाद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित पेंशनधारी लाभुकों, जीविका दीदियों, आंगनबाड़ी सेविका / सहायिका सहित अन्य लाभुकों के साथ संवाद किया.

       इसके पश्चात् माननीय मुख्यमंत्री जी ने मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया. उन्होंने मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान परिसर के प्रशासनिक भवन में पांडुलिपियों का बारीकी से अवलोकन किया. साथ ही माननीय मुख्यमंत्री जी ने मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान को एन.एच.- 77 से संपर्कता प्रदान करने के  लिए प्रशासनिक पथ का अवलोकन किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.


आलोक कुमार

गुरुवार, 25 सितंबर 2025

उप विकास आयुक्त सुमित कुमार ने किया युक्तधारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

 जिला ग्रामीण विकास अभिकरण बेतिया द्वारा युक्तधारा पोर्टल पर प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

उप विकास आयुक्त सुमित कुमार ने किया युक्तधारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ


बेतिया. इस समय देश और प्रदेश में युक्तधारा पोर्टल के उपयोग को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है.इस पोर्टल को केंद्र सरकार ने विकसित किया है और इसका उद्देश्य ग्रामीण विकास के कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करना और कृषि विकास में सहायक होता है.पश्चिमी चंपारण के बेतिया मुख्यालय में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण बेतिया द्वारा युक्तधारा पोर्टल पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का उप विकास आयुक्त सुमित कुमार ने शुभारंभ किया था.

    मनरेगा योजना अंतर्गत युक्तधारा पोर्टल के विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. उप विकास आयुक्त बेतिया, श्री सुमित कुमार (भा०प्र०से०) द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई. महात्मा गांधी मनरेगा योजना अंतर्गत ग्राम पंचायतों में योजनाओं का चयन GIS (जीआईएस) के आधार पर ‘युक्तधारा‘ पोर्टल के माध्यम से किया जाता है.

उप विकास आयुक्त द्वारा बताया गया कि पंचायत स्तर पर मनरेगा योजनाओं का GIS based Planning एवं monitoring युक्तधारा  पोर्टल के माध्यम से किया जाता है,  जो) वित्तीय वर्ष 2026-27 (1 अप्रैल, 2026) से प्रभावी होगा.जिसके लिए जिला अंतर्गत सभी कार्यक्रम पदाधिकारियों, तकनीकी कर्मियों एवं पंचायत रोजगार सेवकों को युक्तधारा के उपयोग के लिए   प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे कि कर्मियों द्वारा पंचायत स्तर पर मानक अनुरूप कार्य हो सके.

उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में निदेशक (रा०नि०का०) श्री पुरुषोत्तम त्रिवेदी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मनरेगा, जिला वित्तीय प्रबंधक मनरेगा, कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता मनरेगा आदि उपस्थित रहे.


आलोक कुमार


Chingari Prime News : पुलिस तकनीकी जांच के माध्यम से संबंधित नंबर और व्य...

Chingari Prime News : पुलिस तकनीकी जांच के माध्यम से संबंधित नंबर और व्य...:  पुलिस तकनीकी जांच के माध्यम से संबंधित नंबर और व्यक्ति की पहचान करने में जुटी। पटना . पश्चिम चम्पारण जिला प्रशासन ने एक गंभीर मामले पर कार्...

<https://chingariprimenews.blogspot.com/<AdSense >

बुधवार, 24 सितंबर 2025

"रोड नहीं तो वोट नहीं" आंदोलन को. 8 नवम्बर 2024 से शुरू हुआ

 "रोड नहीं तो वोट नहीं"—गाँव की चीख़

दरभंगा .आज़ादी के 78 वर्ष पूरे हो गए, लेकिन देश के कई हिस्सों में अब भी विकास केवल भाषण और घोषणाओं तक सीमित है.दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के सुघराईन पंचायत की स्थिति इसका ज्वलंत उदाहरण है.यहाँ के लोग आज भी बारहमासी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं.

         हर साल बाढ़ और बारिश के दिनों में कच्ची सड़कें कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं.गांव के रास्ते जलमग्न होकर पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाते हैं.परिणामस्वरूप, बच्चों की पढ़ाई, किसानों की खेती-बाड़ी, रोज़मर्रा की ज़रूरतें और सबसे महत्वपूर्ण—मरीजों को अस्पताल तक ले जाना—सब ठप पड़ जाता है. विकास के कारणों और योजनाओं की चमक-दमक इन ग्रामीणों के लिए केवल एक छलावा साबित हुई है.

         इसी पीड़ा ने जन्म दिया "रोड नहीं तो वोट नहीं" आंदोलन को. 8 नवम्बर 2024 से शुरू हुआ यह आंदोलन अब गाँव की सामूहिक प्रतिज्ञा बन चुका है.पंचायत वासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक आने वाले विधानसभा चुनाव 2025 में वोट का बहिष्कार होगा. हाल ही में 21 सितम्बर 2025 को पूरे पंचायत में मानव-श्रृंखला बनाकर लोगों ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया. इसमें पुरुष, महिला, युवा, बच्चे और बुजुर्ग सभी शामिल हुए.

       ग्रामीणों का आक्रोश सिर्फ सड़कों की दुर्दशा तक सीमित नहीं है. उनका गुस्सा नेताओं और प्रशासन की उस पुरानी चाल पर भी है जिसमें चुनाव से पूर्व केवल योजना का बोर्ड लगाकर कार्य पूर्ण होने का भ्रम फैलाया जाता है.गोडेपुरा-सुघराईन प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना इसका सबसे बड़ा प्रमाण है—दस साल पहले इसका बोर्ड लगा था, लेकिन आज तक सड़क धरातल पर नहीं उतरी.

        ग्रामीणों की यह आवाज़ लोकतंत्र की चेतावनी है. यदि मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं कराई जा सकती, तो लोकतंत्र का उत्सव—चुनाव—कैसे सार्थक होगा? सड़क सिर्फ़ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मानजनक जीवन का आधार है.

सरकार और जनप्रतिनिधियों को यह समझना होगा कि अब जनता केवल वादों और खोखली घोषणाओं से संतुष्ट नहीं होगी. यदि विकास धरातल पर नहीं उतरेगा, तो "रोड नहीं तो वोट नहीं" जैसे आंदोलन लोकतंत्र की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं.

         सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन सुघराईन पंचायत की इस चेतावनी को गंभीरता से लेगा, या फिर यह आंदोलन भी चुनावी कोलाहल में कहीं दबकर रह जाएगा?


आलोक कुमार


<https://chingariprimenews.blogspot.com/<AdSense >


मंगलवार, 23 सितंबर 2025

पुलिस तकनीकी जांच के माध्यम से संबंधित नंबर और व्यक्ति की पहचान करने में जुटी।

 पुलिस तकनीकी जांच के माध्यम से संबंधित नंबर और व्यक्ति की पहचान करने में जुटी।


पटना . पश्चिम चम्पारण जिला प्रशासन ने एक गंभीर मामले पर कार्रवाई करते हुए लौरिया थाने में सनहा दर्ज कराया है। मामला जिलाधिकारी के नाम और फोटो का दुरुपयोग कर फर्जी आदेश जारी करने से संबंधित है. लौरिया अंचल अधिकारी ने थानाध्यक्ष को आवेदन देकर बताया कि 21 सितंबर 2025 को एक अज्ञात व्हाट्सएप नंबर (मो. 6203657540) से उनके मोबाइल पर आदेश पत्र भेजा गया। इस आदेश में दाखिल-खारिज वाद को रिजेक्ट करने की बात कही गई थी.

        अंचल अधिकारी ने आवेदन में उल्लेख किया कि संबंधित व्हाट्सएप प्रोफाइल पर पश्चिम चम्पारण जिलाधिकारी का फोटो और नाम अंकित था। इससे यह प्रतीत होता है कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा जिलाधिकारी महोदय की पहचान का दुरुपयोग कर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है.जिला पदाधिकारी ने इस मामले को अत्यंत ही गंभीर मानते हुए थाने में सनहा दर्ज करने का निर्देश दिया.उक्त निर्देश के आलोक में अंचलाधिकारी द्वारा लौरिया थाने में सनहा दर्ज करा दी गयी है. पुलिस तकनीकी जांच के माध्यम से संबंधित नंबर और व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है.

        जिलाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, श्री धर्मेन्द्र कुमार ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात नंबर या सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से प्राप्त फर्जी संदेश, आदेश पत्र या संदिग्ध लिंक पर भरोसा न करें.उन्होंने कहा कि प्रशासन से जुड़ा कोई भी आधिकारिक आदेश केवल अधिकृत माध्यम से ही जारी होता है.उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि यदि किसी को इस तरह का संदेश प्राप्त होता है तो तुरंत नज़दीकी थाना या जिला प्रशासन को सूचित करें. जिलाधिकारी ने कहा कि फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.


आलोक कुमार


<https://chingariprimenews.blogspot.com/<AdSense >

कैथोलिक समुदाय के लिए नई उम्मीद और धार्मिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत है

 

दुमका.झारखंड का दुमका धर्मप्रांत संथाल परगना के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिदृश्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस धर्मप्रांत का नेतृत्व बिशप जूलियस मरांडी कर रहे हैं और हाल ही में फादर सोनातन किस्कू को सहायक बिशप के रूप में नियुक्त किया गया है.यह नियुक्ति संथाल समाज और कैथोलिक समुदाय के लिए नई उम्मीद और धार्मिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत है.

     दुमका धर्मप्रांत की विशेषता यह है कि इसके अंतर्गत आने वाले चार विधानसभा क्षेत्र—दुमका, जामा, जामताड़ा और सारठ—राजनीतिक रूप से सक्रिय तो हैं, लेकिन इनमें से किसी भी क्षेत्र से अब तक कोई कैथोलिक प्रतिनिधि निर्वाचित नहीं हुआ. वर्तमान समय में आलोक कुमार सोरेन, बसंत सोरेन, श्रीमती लोइस मरांडी और देवेंद्र कुंवर यहां की राजनीति में जनप्रतिनिधि के रूप में सक्रिय हैं. यह तथ्य ध्यान खींचता है कि 4,542,658 की कुल जनसंख्या (2023) में 207,336 कैथोलिक होने के बावजूद उनकी राजनीतिक भागीदारी नगण्य है.संथाल, बंगाली, पहाड़िया, उरांव, मुस्लिम और हिंदू जातीय समूहों से मिलकर बने इस क्षेत्र में भाषाई विविधता भी स्पष्ट है. हिंदी, बंगाली, पहाड़िया और उरांव जैसी भाषाएँ यहां की सामाजिक पहचान को और गहरा बनाती हैं. फिर भी कैथोलिक समुदाय की आवाज़ राजनीतिक मंचों पर लगभग गुम ही है.

     लोकसभा की 14 सीटों वाले झारखंड में दुमका एक अहम संसदीय क्षेत्र है, परंतु यहां से किसी भी कैथोलिक उम्मीदवार ने चुनावी दावेदारी तक नहीं की.वर्तमान सांसद नलिन सोरेन हैं, जिनका राजनीतिक प्रभाव स्पष्ट है.झारखंड की राजनीति मूलतः क्षेत्रीय दलों और आदिवासी नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है.झारखंड मुक्ति मोर्चा, वनांचल कांग्रेस और मार्क्सवादी समन्वय समिति जैसे दल यहां का आधार तय करते हैं. इस समय मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा राज्य की बागडोर संभाले हुए हैं.

     संवैधानिक ढांचे के तहत राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है, लेकिन वास्तविक सत्ता मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के हाथों में रहती है.इन तमाम परिस्थितियों के बीच सवाल यह है कि क्या झारखंड के कैथोलिक समुदाय को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलेगा? सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक क्षेत्र में सक्रिय यह समुदाय राजनीतिक रूप से अब तक उपेक्षित रहा है. भविष्य की राजनीति में अगर इनकी भागीदारी बढ़े, तो यह न केवल समुदाय की पहचान को सशक्त करेगा, बल्कि राज्य की बहुलतावादी लोकतांत्रिक संरचना को भी मजबूती देगा.दुमका धर्मप्रांत की स्थिति हमें यह सोचने पर विवश करती है कि धर्म और संस्कृति से जुड़े समुदायों की सहभागिता केवल प्रार्थना और आस्था तक सीमित न रहे, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व में भी अपना स्थान सुनिश्चित करे.

आलोक कुमार

The Configure Featured Post option in Blogger allows you to highlight a selected post prominently on

चिंगारी प्राइम न्यूज़

 About Us | चिंगारी प्राइम न्यूज़ Chingari Prime News एक स्वतंत्र हिंदी डिजिटल न्यूज़ और विचार मंच है, जिसका उद्देश्य सच्ची, तथ्यपरक और ज़मी...

How to Configure Popular Posts in Blogger The Popular Posts widget highlights your most viewed post