बुधवार, 13 अप्रैल 2022

23 साल खत्म हो चुके है इसके बाद भी 1773 स्कूलों को अपना भवन नहीं मिला

 



पटना.बिहार में 70 हजार प्राथमिक और मध्य विद्यालय हैं.इनमें 1773 विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं है.पटना जिले में ही 190 विद्यालय भवनहीन हैं, जो दूसरे विद्यालयों में चलाए जा रहे हैं.पटना क्षेत्र में 74 ऐसे विद्यालय है, जिनका अपना भवन नहीं है. इसमें 13 मध्य विद्यालय लड़कियों के हैं.ऐसे सभी विद्यालयों को मर्ज करने का निर्णय लिया गया है. प्रदेश में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों की संख्या 70 हजार है. इनमें प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 38 हजार और मध्य विद्यालयों की संख्या 32 हजार है. पटना में 3339 प्राथमिक और मध्य विद्यालय हैं, जिसमें 2183 प्राथमिक और 1140 मध्य विद्यालय हैं.अल्पसंख्यकों के लिए 16 मध्य विद्यालयों और 12 प्रस्वीकृत विद्यालय है.

अपनी जमीन अपना भवन का यह सपना शिक्षा विभाग 1999 से दिखा रहा है. इसके बाद भी भवनहीन विद्यालयों के लिए 23 साल से जमीन की तलाश पूरी नहीं कर सका है. 1999 में शिक्षा विभाग ने लोगों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए प्रदेश में लगभग 20 हजार विद्यालयों बनाए थे. यहां-वहां की तर्ज पर बनाए गए विद्यालयों का निर्माण किया गया था. योजना थी कि दो-तीन साल में अपनी जमीन खोज कर स्कूल को भवन उपलब्ध कराया जा सके. लेकिन, 23 साल खत्म हो चुके है इसके बाद भी 1773 स्कूलों को अपना भवन नहीं मिला है. एक नए नियम के तहत स्कूल मर्ज करने पर कहीं एक किलोमीटर में दो-तीन विद्यालय और कहीं पर तीन से चार में एक भी विद्यालय नहीं होंगे.

पटना में लगभग 100 विद्यालयों को मर्ज किया जा चुका है.लगभग 90 विद्यालयों को मर्ज किए जाने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है. कई विद्यालय ऐसे है जहां पर भवन की अपेक्षा लड़की संख्या काफी अधिक है. ऐसे में इनको मर्ज किए जाने पर शिक्षकों को संख्या कम पड़ जाएगी. इसको देखते हुए विद्यालयों के लिए जमीन की तलाश की जा रही है.

इस बीच शिक्षा विभाग,बिहार के प्राथमिक शिक्षा निदेशक रवि प्रकाश ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को दिनांक 11 अप्रैल 2022 को पत्र लिखा है कि राज्य में वैसे दो या दो से अधिक विघालय जो एक ही विघालय के भवन में संचालित है उन्हें एक विघालय में सामजित कर अतिरिक्त शिक्षकों को अन्यत्र स्थानांतरित कर दें.आगे कहा गया है कि इस कार्यालय के पत्रांक 1772 दिनांक 21.12.2021,पत्रांक1533 दिनांक 19.11.2021,पत्रांक 256 दिनांक 13.03.2019,पत्रांक 1546 दिनांक 18.09.2017,पत्रांक 488 दिनांक 15.03.2018 एवं पत्रांक 880.प्रांसगिक पत्र के आलोक में 15 जिला यथा जहानाबाद, किशनगंज,पश्चिम चम्पारण, वैशाली, औरंगाबाद, सीतामढ़ी, कैमूर,जमुई, बांका, पूर्वी चम्पारण, खगड़िया, बेगूसराय, कटिहार,सहरसा एवं नवादा से प्रतिवेदन हार्ड कोपी में प्राप्त हुआ है लेकिन उसका साफ्ट कोपी उपलब्ध नहीं कराया गया है,शेष जिला से अब तक अघतन प्रतिवेदन अप्राप्त है. प्राथमिक शिक्षा निदेशक रवि प्रकाश ने निर्देश दिया है कि वैसे जिला,जिनके द्वारा प्रतिवेदन अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है, वे एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें. जिलके द्वारा हार्ड कोपी में उपलब्ध कराया गया है, वे उसका साफ्ट कोपी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें.

आनन्द माधव चेयरमैन, रिसर्च व मैनिफेस्टो कमेटी एवं प्रवक्ता, बिहार प्रदेश काँग्रेस कमेटी ने कहा है कि एक ओर बिहार सरकारी उच्च विद्यालय हर पंचायत में खोलनें की घोषणा सरकार कर रही है तो दूसरी ओर धीरे-धीरे सरकारी स्कूलों को बंद करनें की साजिश रच रही है.आज सुबह एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार, बिहार के 1885 प्राथमिक विद्यालयों को पिछले 1 वर्षों में बंद कर दिया गया है. जब इस संबंध में शिक्षा मंत्री से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि विद्यालयों को बंद नहीं बल्कि मर्ज किया जा रहा है.

चेयरमैन, रिसर्च विभाग व प्रवक्ता, बिहार प्रदेश काँग्रेस कमेटी, आनन्द माधव ने कहा कि यह पूरी तरह से ही भ्रामक और गैर जिम्मेदाराना बयान है.शिक्षा मंत्री शब्दजाल में जनता को उलझा रहे हैं.सरकार ने स्पष्ट रूप से समग्र शिक्षा अभियान के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में 1885 विद्यालयों को बंद कर दूसरे विद्यालय में समाहित करने की बात कही है.दो दिन पूर्व प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने भी इसी आशय में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आदेश निर्गत किया है कि भवनहीन या भूमिहीन विद्यालयों को नजदीकी विद्यालय में समाहित करते हुए अतिरिक्त शिक्षकों को किसी अन्य विद्यालय में स्थानांतरित किया जाय.


ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर 15 सालों तक भवनहीन या भूमिहीन विद्यालय पेड़ों के नीचे या अस्थायी भवन या पंचायत भवन में चलाये ही क्यों गए? या फिर इन विद्यालयों के पास अगर भूमि या भवन ही नहीं था तो इन 15 सालों में विद्यार्थियों को इन विद्यालयों में कैसे पढ़ाया गया? क्या सरकार ने उन बच्चों के भविष्य को बर्बाद नहीं किया? सच्चाई यह है कि सरकार के पास शिक्षा को लेकर के कोई स्पष्ट नीति नहीं है. चुनाव के दौरान जब वोट लेने के बारी आती है तो हर टोले में प्राथमिक विद्यालय और हर पंचायत में उच्च विद्यालय खोलने की घोषणा कर दी जाती है. ना तो उनके लिए भूमि या भवन की व्यवस्था की जाती है और ना ही उन विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था होती है.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में चौपट कर दिया है. अगर सरकार को शिक्षा व्यवस्था की चिंता होती और सही मायने में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चाहती तो विद्यालय खोलने की घोषणा करने से पहले उनके लिए भवन और पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की व्यवस्था करती. लेकिन सरकार तो चुनावों में वोट और तालियां बटोरने के लिए घोषणा कर देती है. उसका फलाफल यह होता है कि 10-15 साल तक भवनहीन एवं शिक्षक विहीन विद्यालय चलने के बाद उन्हें बंद करने की घोषणा करनी पड़ती है.
 
एक ओर तो कोरोना के कारण सरकारी स्कूल के बच्चों की दो साल पढ़ाई बंद रही और अब स्कूल बंद कर उनका भविष्य और बर्बाद कर रहे. सच यह है कि शिक्षा विभाग स्कूल विहीन शिक्षा की बात सोच रही है और धीरे धीरे उस कदम बढ़ा रही है.यह व्यवस्था निजी स्कूलों को बढ़ावा देनें की तथा सरकारी स्कूलों को और कमजोर करनें की एक सोची समझी चाल है और हम इस जाल में फँसते चले जा रहे हैं.

आनन्द माधव ने प्रश्न पूछते हुए कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि कितनें स्कूलों को कितने समय सीमा में ये बंद करनें जा रही है.उन्होंने माँग किया कि एक भी विद्यालय बंद नहीं होनें चाहिये तथा उनके लिए उचित भूमि और भवन की व्यवस्था की जाए.अगर इस तरह से सरकारी विद्यालय को बंद करने से आने वाले भविष्य में गरीब एवं पिछड़े तबकों को शिक्षा से वंचित होना पड़ेगा.जरूरत है आज सरकारी शिक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करने की ना तो उसे कमजोर करने की.

आलोक कुमार

सोमवार, 11 अप्रैल 2022

और दोस्तों से कहते रहते कि दिल्ली से पटना आते ही रहेंगे अंततः पटना जेफरी आ ही गये

 और दोस्तों से कहते रहते कि दिल्ली से पटना आते ही रहेंगे अंततः पटना जेफरी आ ही गये


कुर्जी चर्च 
जेफरी केरकेट्टा का नाम समीर केरकेट्टा भी है. कुर्जी क्रिश्चियन काॅलोनी में रहने वाले आर केरकेट्टा के पुत्र हैं. स्व.आर केरकेट्टा नोट्र्े डेम एकेडमी में अकाउंटेड थे.उनके चार पुत्री और चार पुत्र हैं.पुत्रियों में सरोज बड़ी थीं.पुत्र में जेफरी केरकेट्टा बड़े थे.पटना में कालाजार विभाग में कार्यरत थे. इसके बाद दिल्ली में स्थानान्तरण हुआ था.वहां पर बेहतर ढंग से कार्य करते थे.इस बीच बीमार पड़े. किडनी में कैंसर हो गया था. इसका इलाज चल रह था. इस बीच दिल्ली से पटना आते और जाते थे.पटना के दोस्तों से कहते थे कि अब पटना आते रहेंगे.यह देखें पटना आ ही गये.यह विधि के विधान के तहत हो गया.
उनसे मिलने वाले रिश्तेदार और दोस्त आ गये.पर वह बाॅक्स में पड़े रहे.आने वाले लोग जेफरी के बारे कहते रहे जिंदा दिल इंसान थे. चेहरे पर मुस्कान बिखड़ते रहते थे.किसी से दुश्मनी नहीं सभी दोस्त ही थे. जेफरी के दोस्तों में सुशील लकड़ा, जोन बेनेदिक्त,इक्लारेंस हेनरी,सुशील लोबो,जेवियर लुइस आदि आये थे.वहीं जेफरी की धर्मपत्नी गोडेंसिया केरकेट्टा के साथ नर्सिंग करने वाली एडलीन माइकल की पुत्री भी आयी थीं. कुर्जी होली फैमिली हाॅस्पिटल में गोडेंसिया और एडलीन साथ-साथ नर्सिंग की थीं.साथ-साथ इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान,शेखपुरा में काम करती थीं. इसके बाद उक्त संस्थान से गोडेंसिया दिल्ली चली गयी. इस बीच एडलीन माइकल की अकाल मौत हो गयी.इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान,शेखपुरा की दोस्त लुसी बेनेदिक्त,कुमारी,फिलोमीना डिक्रूज आदि भी कुर्जी चर्च में मिस्सा सुने और कुर्जी कब्रिस्तान में मिट्टी दिये. फादर सेल्विन जेवियर को भी कहते सुना गया कि जब ब्रदर थे तब से केरकेट्टा परिवार को जानते हैं.

आलोक कुमार

लेंट के चालीस दिन की आध्यात्मिक तैयारी

 ईसाई समुदाय के पाम संडे के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों को समेटकर पेश है आलोक कुमार और स्वीटी माइकल की विशेष रिपोर्ट..


पटना.पाम संडे के साथ ही ईसाई समुदाय के लिए पुण्य सप्ताह का आगाज हो गया है.इस पुण्य सप्ताह के दौरान पवित्र बृहस्पतिवार को परमप्रसाद की स्थापना के रस्म अदायगी, अंतिम ब्यालु भी कहा जाता है. पुण्य शुक्रवार को उपवास और परहेज का दिन होगा.इस दिन रूस और यूक्रेन के बीच जारी महायुद्ध समाप्त के लिए ईसाई समुदाय उपवास और परहेज रखेंगे. पुण्य शुक्रवार यानी गुड फ्राइडे को प्रभु येसु को क्रूस पर चढ़ाकर मार डालने पर गम इजहार करेंगे.इस अवसर पर झांकी प्रस्तुत विक्टर फ्रांसिस पेश करेंगे. पवित्र धर्मग्रंथ बाइबल में उल्लेखित प्रभु येसु को क्रूस चढ़ाकर मार डालने के बाद तीन दिनों के जीवित हो जाने का पर्व अगले रविवार को ईस्टर के रूप मनाया जाएगा. प्रभु येसु के जीवित हो उठने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है. इससे पहले चर्च में इस पूरे सप्ताह अलग-अलग दिनों में कई तरह के आयोजन होंगे.


आजकल अप्रैल महीना चल रहा है.अप्रैल माह हिंदू और मुस्लिम धर्मावलंबियों के लिए पवित्र माह है.इसके साथ ही ईसाई समुदाय के लिए भी महीना बेहद खास है.हिंद संवत्सर में चैत्र का महीना चल रहा है और आज रामनवमी है.वहीं इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार यह रोजे का पाक महीना है.इसी महीने में ईसाई समुदाय का पाम संडे और गुड फ्राइडे भी है. इन दिनों ईसाई समुदाय के भी रोजे चल रहे हैं. जो अंतिम चरण में है.40 दिन के रोजे रखने के बाद उनका एक बड़ा पर्व आता है ईस्टर .यह ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए त्योहारों में से एक है.आज ईसाई समुदाय पाम संडे मना रहे हैं.इसके साथ ही पवित्र सप्ताह शुरू हो गया है.


आज ईसाई समुदाय परम्परागत ढंग से पाम संडे मना रहे है.आज के दिन दो हजार वर्ष पूर्व प्रभु येसु मसीह नगर यरूशलेम नगरी में प्रवेश किए थे. वहां के लोगों ने उनके स्वागत में खजूर की डालियां और कपड़ों को जमीन पर बिछाकर स्वागत किया था. दाऊद के पुत्र को होसान्ना..ईसा के आगे-आगे जाते हुए और पीछे -पीछे आते हुए लोग यह नारा लगा रहे थे,‘दाउद के पुत्र को होसन्ना... धन्य है वह जो प्रभु के नाम पर आते हैं.सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना.‘



प्रभु येसु के यरुशलेम में प्रवेश करने की सूचना पाकर यरुशलेम के निवासी काफी उत्साहित होकर उसके स्वागत में उसके सामने अपने कपड़े बिछा दिये थे।ताकि उन कपड़ों पर चलकर ही प्रभु येसु यरुशलेम में प्रवेश करें.आज पाम संडे के रूप में हमें भी अपने प्रभु येसु  के सिद्धांतों पर चल अपने हृदय रुपी घर में उसके आगमन को पक्का करने की जरुरत है तथा जिस तरह यरुशलेम में पहुंचकर उन्होने लोगों को चंगा किया था.उसी तरह हम भी प्रभु येसु के सिद्धांतों पर चल अपने आध्यात्मिक एवं शारीरिक चंगाई के लिये प्रार्थना करें और  उससे कहें कि-‘हे पिता हमारी प्रार्थना स्वीकार कर.

 

उसी दिन को स्मरण कर मसीही समुदाय के लोग पाम संडे यानी खजूर पर्व मनाते हैं.10 अप्रैल की सुबह 5ः30 बजे से भक्तों भारी संख्या संत माइकल जुनियर स्कूल में एकत्रित हो गये. इस अवसर पर येसु समाजी पुरोहित उपस्थित थे. येसु समाजी पुरोहितों में फादर पीयुस ओस्ता,फादर राजीव रंजन,फादर राजेश,फादर लौरेंस पास्कल,फादर एडिसन आम्रस्टांग,फादर ग्रेगरी गोम्स,फादर सेल्विन जेवियर,फादर डेनिस और फादर अगस्टीन उपस्थित थे. फादर सेल्विन जेवियर ने ग्रामीण अंचल से लाये गए खजूर की डालियों पर आशीष दिये.



पाटलिपुत्र पल्ली में स्थित सेक्रेट हार्ट चर्च,पाटलिपुत्र में खजूर इतवार का धार्मिक कार्यक्रम सुबह 6ः45 बजे से शुरू हुआ.उपस्थित फादर मार्टिन आनंद ने खजूर डालियों पर आशीष दिये और जुलूस के रूप में चर्च में प्रवेश किये. मिस्सा फादर मार्टिन आनंद ने पवित्र मिस्सा अर्पित किया. बेतिया पल्ली में खजूर रविवार का कार्यक्रम सुबह 5ः30 बजे संत तरेसा स्कूल कैम्पस में खजूर की डालियों पर आशीष के बाद गिरजाघर की ओर यात्रा और मिस्सा किया गया.चूहड़ी पल्ली में खजूर रविवार को 6ः00 सुबह से गांव के ग्रोटो में खजूर की डालियों पर आशीष देने के बाद गिरजाघर की ओर यात्रा आगमन हुआ और फादर तोबियास टोप्पो ने मिस्सा किये. भक्त इग्नासियुस माइकल ने कहा कि गोरखपुर पल्ली में सुबह 8 बजे से एलएफएस प्राइमरी स्कूल से संत एंथोनी चर्च में जुलूस जाने के बाद पाम संडे का मिस्सा किया गया. पवित्र परिवार गिरजा घर,चखनी में सुबह 6ः30 बजे पुराना टोला में खजूर की डालियों पर आशीष तथा उसके बाद जुलूस के साथ नया टोला होते हुए गिरजा घर में प्रवेश किया गया.यहां पर पल्ला पुरोहित ने पवित्र मिस्सा अर्पित किया.


इस धार्मिक कार्यक्रम के दौरान रूस और यूक्रेन के बीच महायुद्ध समाप्त करने के लिए प्रार्थना की गयी.इस जहां के सभी समुदाय के लोगों के लिए प्रार्थना की गयी. परिवार, समाज, एकता, प्रेम, संगठन, शांति व भाईचारे के लिए प्रभु येसु मसीह से दुआ मांगी.इस दौरान पाम संडे के दिन पुरोहितों के नेतृत्व में अनुयायी हाथ मे खजूर की डालियां लेकर होसन्ना के गीत गाते हुए चर्च में प्रवेश करते हैं। इस अवसर पर


फादर सेल्विन जेवियर की अगुवाई में सुबह जुलूस निकाला गया.स्वयंसेवक हॉली क्रॉस लेकर आगे-आगे निकले और उनके पीछे मसीही समुदाय के लोग चल रहे थे. इन लोगों ने हाथ में खजूर के पेड़ की डालियां थीं. इस दौरान प्रभु येसु की शान में गीत गाए गए. जय-जय होवे तेरीकृप्रभु के प्रतिनिधि दाउद सुत की गूंजे इस़्त्राएल के प्रभु की नभ में यश की भेरी जय-जय होवे तेरी.आज से 2022 साल पहले प्रभु येसु के लिए भीड़ ने होशन्ना के नारे लगाए थे. उसी दिन की याद में पाम संडे मनाया गया.जय हो... प्रभु की जय जय हो,स्वर्ग लोक की जय हो स्वागत के लिए हर्ष के मारे,बालक ले जैतून की डालें गुंजित करने लगे नारे,जय हो प्रभु की जय हो...

पाम संडे के साथ मसीहियों के लिए पवित्र सप्ताह का आगाज हो गया है. अगले रविवार को ईस्टर मनाया जाएगा. प्रभु यीशु के जीवित हो उठने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है. इससे पहले चर्चा में इस पूरे सप्ताह अलग-अलग दिनों में कई तरह के आयोजन होंगे.


कहा जाता है कि चालीसा या लेंट के चालीस दिन की आध्यात्मिक तैयारी प्रत्येक मसीही के लिए अपने जीवन में की गई गलतियों और पापों के लिए सच्चे दिल से पश्चाताप करने, उपवास, परहेज और प्रार्थना में बढ़ने का अभ्यास है. लेकिन उपवास, प्रार्थना, परहेज और क्रूस रास्ता आराधना आदि के कार्यक्रम को मात्र चालीस दिन की औपचारिकता तक ही सीमित करने का नहीं, पूरे जगत के मसीहियों के लिए यह जीवन पूरे साल अर्थात वर्ष के 365 दिन कहें या अपने जीवन के अंतिम सांस तक अनुसरण करने का है.





बुधवार, 6 अप्रैल 2022

गेंद जनता के पाले में

 पटना. पटना नगर निगम के पाटलिपुत्र अंचल में  वार्ड नम्बर- 22 ए के वार्ड पार्षद हैं दिनेश कुमार.इस वार्ड पार्षद के पार्षद प्रतिनिधि हैं नीरज कुमार. वार्ड 22 ए में गंगा विहार कॉलोनी है.यहां पर पांच सौ मकान है.इस गंगा विहार के लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं.

कॉलोनी के मो.आरिफ ने समस्याओं का जिक्र करने के दरम्यान कहते हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गरीबों की प्यास बुझाने के लिए 2015 में जब महागठबंधन के साथ सरकार बनाई थी, उस समय उन्होंने सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल के माध्यम से शुद्ध पेयजल मिल सके इसकी शुरुआत की थी. इस योजना को शुरू हुए 7 साल से अधिक हो गए, लेकिन अभी भी यह योजना पूरी तरह से धरातल पर नहीं दिख नहीं रही है. राजधानी पटना में ही यह योजना दम तोड़ रही है.

उन्होंने कहा कि इस बहुआंकाक्षी सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल पहुंचाने का प्रयास 2016 में गंगा विहार कॉलोनी में भी किया गया.आईटीआई छात्रावास के बगल में जलापूर्ति केंद्र सह जलमिनार से पाइप का संयोजन किया गया.पॉश एरिया फेयरफील्ड कॉलोनी में पाइप बिछाकर गंगा विहार कॉलोनी में अंत किया गया.

उन्होंने कहा कि जलापूर्ति चालू होने के बाद हर घर नल का जल पहुंचने से लोग खुश थे.यह ड्रीम प्रोजेक्ट 2017 तक चला.इसके बाद प्रोजेक्ट का पानी आना बंद हो गया .इससे लोग नाखुश हो गये.साल में एक बार मटरगश्ती करने वाले वार्ड पार्षद दिनेश कुमार से शिकायत की गयी.तब उन्होंने फेयरफील्ड कॉलोनी शुरू और गंगा विहार कॉलोनी अंत पाइप खोलकर जांच कराएं. जांचोपरांत पता चला कि पाइप में पानी बहाव हो रहा है,परंतु घरों तक नहीं पहुंच रहा है.पांच साल से परेशान हैं.

रोज़ा तोड़वाने के समय के पूर्व मो.नौशाद ने कहा कि शुद्ध पेयजल के साथ जल निकासी की भी समस्या है.बरसात
के दिनों में दु:ख बढ़ जाता है.ठेंहुना भर पानी का भराव हो जाता है.इसी में महिला,पुरूष,बच्चों के साथ पालतू जानवरों को भी आवाजाही करने को बाध्य होते हैं.

वहीं लोग कहते हैं साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन के द्वारा तीन  खंभा गाढ़कर कर्तव्य पूरा कर लिया है. दो साल के बाद भी तार तानकर उर्जा घरों तक पहुंचाने का कार्य नहीं किया जा रहा है.बांस के सहारे तार लाया गया है.

जानकार लोगों का कहना है कि पटना नगर निगम के वार्ड पार्षदों को एक करोड़ विकास कार्य करने को मिला है.पर वार्ड पार्षद दिनेश कुमार गंगा विहार कॉलोनी में विकास कार्य करना ही नहीं चाहते हैं.इससे लोग आक्रोशित हैं.

बिहार में सीएम नीतीश (CM Nitish) का ड्रीम प्रोजेक्ट सात निश्चय योजना (Saat Nischay Yojana) के तहत 'हर घर नल का घर योजना ' के क्रियान्वयन में लेट लतीफी के कारण अभी तक कई वार्डों में पाइप भी नहीं बिछाए गए हैं. कई वार्डों में पाइप बिछाए गए तो उसमें से पानी ही गायब है. ऐसे में पानी के लिए लोग तरस रहे हैं.

इस संदर्भ में 22 ए के भावी प्रत्याशी उमेश कुमार कहते हैं कि वर्त्तमान वार्ड पार्षद दिनेश कुमार जन उम्मीदों पर खड़ा नहीं उतर रहे हैं. उनका कहना है कि अब गंगा विहार कॉलोनी के लोगों को सोचना होगा. उनका विकास कौन करेगा ? कौन पटना नगर निगम के द्वारा प्रदत राशि का उपयोग जन विकास कार्य में लगा सकता है .गेंद जनता के पाले में है . कुछ दिनों के बाद ही चुनाव होने वाला है .

आलोक कुमार

सोमवार, 4 अप्रैल 2022

क्रिस्म मास में पुरोहित लेते है वादा साथ-साथ रहने का

 


पटना.प्रभु येसु ख्रीस्त ने अंतिम ब्यालू के समय बलिदान चढ़ाने की शक्ति दी, जब उसने रोटी और दाखरस को स्वयं के शरीर और रक्त में परिवर्तित करते हुए कहा, 'यह मेरी स्मृति में किया करो.' इन शब्दों के द्वारा उसने उन्हें खीस्तयाग अर्पित करने को कहा. बारह प्रेरित प्रथम धर्माध्यक्ष और पुरोहित थे.वे स्वयं महापुरोहित येसु ख्रीस्त द्वारा अभिषिक्त किए गए थे.प्रेरितों के कार्यकलाप और धर्मग्रंथ के दूसरे भागों में हम पाते हैं कि पुरोहिताई के पवित्र संस्कार द्वारा उन्होंने दूसरे व्यक्तियों को धर्माध्यक्ष और पुरोहितों की शक्ति प्रदान की.केवल धर्माध्यक्षों और पुरोहितों के पास ही वह शक्ति है, जो ख्रीस्त ने बारह प्रेरितों को प्रदान की थी.

पुण्य बृहस्पतिवार 14 अप्रैल को

हर साल आर्चबिशप अथवा स्थानीय बिशप क्रिस्म मास का आयोजन करते है.यह आयोजन पवित्र सप्ताह के दौरान अंतिम व्यालू के दिन पवित्र बृहस्पतिवार के दिन होता है.इस साल रोम में 14 अप्रैल पुण्य बृहस्पतिवार को प्रातः 9.30 बजे से संत पेत्रुस महागिरजाघर में किस्म मास होगा, जिसमें संत पापा फ्रांसिस, कार्डिनलों, महाधर्माध्यक्षो और पुरोहितों (रोम के धर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी) के साथ खीस्तयाग अर्पित करेंगे.

प्रेरितों की रानी ईश मंदिर कैथेड्रल,कुर्जी में
बता दें कि किस्म मास करने में सहुलियते दी गयी है.आप ईस्टर पर्व के पूर्व आयोजित कर सकते हैं. इसके कारण राजधानी पटना के कुर्जी में स्थित पटना महाधर्मप्रांत का प्रेरितों की रानी ईश मंदिर कैथेड्रल में क्रिस्म मास 07 अप्रैल को शाम 05 बजे से होगा.महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबस्टियन कल्लूपुरा,  विकर जनरल,पल्ली पुरोहितों (पटना के महाधर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी) के साथ खीस्तयाग अर्पित करेंगे.

किस्म मास में भाग लेने हैं सुदूर ग्रामीण चर्च के पुरोहित
सुदूर ग्रामीण और शहरी चर्च के महाधर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी पुरोहित किस्म मास में भाग लेने हैं.इन लोगों का जमावड़ा प्रेरितों की रानी ईश मंदिर कैथेड्रल में होगा.महाधर्माध्यक्ष सेवस्टियन कल्लूपुरा के नेतृत्व में किस्म मास होगा.किस्म मास में तीन तरह के पवित्र तेल पर आशीष दी जाती है. एक बीमारों के तेल ,द्वितीय केटक्यूमेन तेल और तीसरा क्रिस्म तेल है.इसमें गुल मेहँदी Balsam डाला जाता है. बिशप स्वामी के द्वारा आशीष दी जाती है.अगर यहीं विशेष कार्यक्रम पुण्य बृहस्पतिवार को क्रिस्म मास होगा,तो सुदूर ग्रामीण और शहरी चर्च के पुरोहितों को वापस जाकर अपने पल्ली में   धार्मिक कार्यक्रम करने में दिक्कत होगी. सुबह हो या शाम पुरोहित परेशान ही परेशान हो जाते .इसके चलते पवित्र बृहस्पतिवार को विशेष समारोह नहीं रखा जाता है.

किस्म मास के दौरान सभी पुरोहित अपनी मन्नतों को दोहराते हैं
मुख्य याजक बिशप स्वामी के सामने महाधर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी सभी पुरोहित अपनी मन्नतों को दोहराते हैं और बिशप के प्रति अपनी आज्ञाकारिता का वादा करते हैं.यह सभी पुरोहितों का एक महापर्व है.इस दिन येसु ख्रीस्त पुरोहिताई संस्कार को ठहराया था.इसलिए इसे एक बड़े समारोह के रूप में मनाते हैं .

क्रिस्म मास के दौरान आशीर्वाद वाले नये तेल पल्ली ले जाते
बता दें कि क्रिस्म मास के दौरान हर पल्ली पुरोहितों को देने के लिए पर्याप्त नए तेल का आशीर्वाद दिया जाता है. पुरोहित पवित्र तेलों को अलग-अलग पैरिशों में ले जाते है, जहाँ वे उस वर्ष के दौरान उपयोग के लिए व्यवहार में लाया जाता है.यद्यपि बिशप प्रत्येक बपतिस्मा या अपने धर्मप्रांत में पुष्टिकरण पर शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो सकते है, वह अपने द्वारा आशीर्वादित पवित्र तेलों के माध्यम से प्रतीकात्मक रूप से उपस्थित हो जाते हैं.बीमार व्यक्तियों के चंगाई के तेल, नए दीक्षार्थियों और बपतिस्मा के लिए तेल और तीसरा पवित्र विलेपन का या पवित्र अभिषेक के लिए तेल की बिशप और अन्य पुरोहितों द्वारा आशीष किया गया.

जैतून का तेल विशेष पात्र में रखा जाता है
वचन की आराधना के बाद, तेलों का आशीर्वाद होता है. एक औपचारिक जुलूस में, जैतून का तेल विशेष कलशों में आगे लाया जाता है.बीमारों का तेल पहले पेश किया जाता है, फिर कैटेचुमेन्स का तेल, और अंत में पवित्र क्रिस्म के लिए तेल. बिशप व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक तेल पर प्रार्थना करता है और आशीर्वाद देता बिशप जैतून के तेल के साथ बालसम के पौधे से तेल मिलाता है, पवित्र आत्मा की उपस्थिति को दर्शाने के लिए मिश्रित तेल पर सांस लेता है, और फिर इसे पवित्र करने के लिए प्रार्थना करता है.एक बार इस तरह से आशीर्वाद देने के बाद, क्रिस्म और अन्य तेल अब साधारण मलहम नहीं रह गए हैं.इसके बजाय, वे चर्च के लिए भगवान से एक पवित्र, कीमती उपहार हैं, जो शुद्धिकरण और मजबूती, उपचार और आराम, और पवित्र आत्मा की जीवन देने वाली कृपा को दर्शाता है.    
                  
आलोक कुमार

शनिवार, 2 अप्रैल 2022

ईसा मसीह के खिलाफ षड्यंत्र रच कर उन्हें सूली पर लटकाया गया

पटना.इस साल 15 अप्रैल को गुड फ्राइडे है.इन दिनों ईसाई समाज 40 दिनों का उपवास रखते हैं.ईसाई धर्म में आस्था रखने वालों के लिए भी गुड फ्राइडे का दिन बहुत अहम है.बाइबल के अनुसार, इसी दिन ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह के खिलाफ षड्यंत्र रच कर उन्हें सूली पर लटकाया गया था. इस वर्ष गुड फ्राइडे 15 अप्रैल को मनाया जाएगा.दरअसल, गुड फ्राइडे के साथ ईसाई धर्म के लोगों के लिए पाम संडे और ईस्टर डे भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

इस साल पाम संडे 10 अप्रैल को है.वहीं गुड फ्राइडे 15 अप्रैल को है और ईस्टर संडे 17 अप्रैल को है.बाइबल, यूहन्ना 18 और 19 में इन तीन दिनों में जो घटना घटी थी उसका उल्लेख किया गया है. बाइबल के अनुसार, पाम संडे पर ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह यरूशलेम पहुंचे थे जहां लोगों ने उनका स्वागत खजूर की डालियों को बिछाकर किया था, इस घटना के वजह से इस दिन को पाम संडे का नाम दिया गया है. जब वह  यरूशलेम यानी इजरायल की राजधानी  यरूशलेम  पहुंचे थे तब उन्हें सूली पर लटकाया गया था. जिस दिन उनकी मृत्यु हुई थी उस दिन को गुड फ्राइडे के नाम से जाना जाता है. आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे की, ठीक 3 दिन बाद यानी रविवार के दिन मेरी मेग्दलीन नाम की एक महिला ने ईसा मसीह को उनके कब्र के पास देखा था. यह चमत्कारी घटना जिस दिन हुई थी उसे ईस्टर संडे कहा गया.

आज भी इजराइल की राजधानी जेरूसलम में वह जगह मौजूद है जहां ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था. यह जगह गोलगोथा के नाम से पूरे विश्व में मशहूर है. जिस जगह गोलगोथा मौजूद है वह हिल ऑफ द केलवेरी के नाम से जाना जाता है. इसी जगह पर चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन स्थित है जहां सार्वजनिक रूप से ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह की निंदा की गई थी. मान्यताओं के अनुसार, चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन के मार्ग को दर्द या पीड़ा का मार्ग कहा जाता है. इस स्थान पर नौ और ऐतिहासिक स्थल स्थित है.

पटना महाधर्मप्रांत के प्रेरितों की रानी कैथेडल में मिस्सा पूजा में शामिल होने वाले भक्तगण प्रभु येसु ख्रीस्त की दुःखभरी यात्रा को एक झांकी के रूप में दर्शाकर प्रार्थना करते हैं.हरेक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी गुड फ्राइडे को प्रभु येसु ख्रीस्त की दुःखमयी घटना को एक झांकी के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया था.दिनांक 15 अप्रैल ( गुड़ फ्राइडे) के पुण्य बेला में सुबह सात बजे से लोयला हाई स्कूल, कुर्जी से प्रारम्भ होकर कुर्जी के मुख्य सड़क से होते हुए प्रभु ईसा की दुःखमयी यात्रा को एक झांकी के रूप में दर्शाते हुए, प्रार्थना और भक्ति गीतों के साथ कुर्जी चर्च में जाकर एक विशेष प्रार्थना के साथ संपन्न होगी.

यह बताया गया कि यह कलीसिया का काम है जो लोकधर्मियो द्वारा आयोजित किया जा रहा है. निवेदक विक्टर फ्रांसिस का नम्र निवेदन है कि इस धार्मिक कार्य में आप अपने स्तर से सहयोग करें ताकि इसे हम एक साथ मिलकर और भी भक्तिमय और दूसरों के लिए प्रेरणादायक बना सकें.आज दिनांक 2 अप्रैल को और कल दिनांक 3 अप्रैल को संध्या 4 बजे से इसके रिहर्सल में उपस्थित होकर अपना योगदान देने की कृपा करें.आशा करता हूं कि आप अपनी भागदौड़ की जिंदगी में से कुछ समय इस पुण्य कार्य के लिए अवश्य निकलने की कोशिश करेंगे.

आलोक कुमार

बक्सर धर्मप्रांत में 29 जून 2018 से बिशप नहीं

पटना.कैथोलिक धर्मप्रांत में इलाहाबाद धर्मप्रांत विश्व का सबसे बड़ा धर्मप्रांत था.इसमें कोलकाता, पटना, जबलपुर, इंदौर, लखनऊ, झांसी और गोरखपुर आते थे. 1887 में कोलकाता धर्मप्रांत, पटना धर्मप्रांत 1919 में, 1932 में जबलपुर धर्मप्रांत, 1935 में इंदौर धर्मप्रांत, 1940 में लखनऊ धर्मप्रांत व 1946 में गोरखपुर इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग हुए.

1845 मे हुगली दो विकारिएट में विभाजित हुआ. एक भाग चटगांव विकारिएट और दूसरा कोलकाता विकारिएट जो पूर्वी बंगाल और पश्चिम बंगाल के नाम से जाने जाते थे. पश्चिम बंगाल को 1864 में बेल्जियम जेसुइट पुरोहितों के हाथों सौंपा गया.वह महाधर्मप्रांत के अस्तित्व में आया. मिशनरियों ने 1865 में मिदनापुर, बालासेार, 1868 में 24 परगना, 1869 में चाईबासा और 1870 में छोटानागपुर क्षेत्र में विकास का काम किया.

रोम 1812 में एक विकारिएट में तिब्बत-हिंदुस्तान के प्रान्त बनवाया. 1827 एक स्वतंत्र पटना विकारिएट बनाया गया था.जिसमें बेतिया , चुहड़ी , पटना सिटी , दानापुर , भागलपुर , दार्जिलिंग , सिक्किम , नेपाल तथा निकटवर्ती प्रदेशों. संत अनास्तासियस हार्टमैन को इसका पहला विकार अपोस्टोलिक नियुक्त किया गया था. पोप लियो एक्सटीटीआई के एक डिक्री के साथ पटना विकारिएट 1886 में इलाहाबाद धर्मप्रांत का हिस्सा बन गया.बेतिया, चुहड़ी , चखनी और लातौना के अपने चार स्टेशनों के साथ उत्तर बिहार मिशन को 1886 में टायरोलिस कैपुचिन्स को सौंपा गया था. मई 1892 में उत्तर बिहार मिशन बेतिया - नेपाल प्रीफेक्चर बनाया गया था, जिसका पहला प्रीफेक्ट अबतेई के फादर हिलारियन, ऑफम कैप था. 1919 में इस प्रान्त को भंग कर दिया गया और पटना के वर्तमान धर्मप्रांत के रूप में दक्षिण बिहार में शामिल हो गया.

पोप बेनेडिक्ट 15 वें ने 10 सितंबर 1919 को एक डिक्री द्वारा इलाहाबाद के धर्मप्रांत को दो में विभाजित किया. इस प्रकार पटना का धर्मप्रांत बनाया गया था. बेतिया-नेपाल के प्रीफेक्चर को नए धर्मप्रांत के साथ जोड़ा गया था. परमधर्मपीठ ने पटना धर्मप्रांत को सोसाइटी ऑफ जीसस के अमेरिकी मिसौरी प्रांत को सौंपा. बाद में, 13 नवंबर 1930 को, मिसौरी प्रांत के विभाजन के बाद, पटना धर्मप्रांत को सोसाइटी ऑफ जीसस के शिकागो प्रांत को सौंपा गया था. बेल्जियम के जेसुइट लुइस वैन होएक को 20 जुलाई 1920-15 फरवरी 1928 पटना का पहला बिशप नियुक्त किया गया था. 6 मार्च 1921 में विधिवत फादर लुइस वानहुक को पटना धर्मप्रांत के प्रथम  धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषिक्त किया गया.

आपको मालूम है कि इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग होकर बना है पटना धर्मप्रांत. जी हां, संत पिता बेनेडिक्ट 15 वें के कार्यकाल में 10 सितम्बर 1919 को इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग करके पटना धर्मप्रांत की स्थापना की गयी थी.इसके 2 साल के बाद पटना धर्मप्रांत को प्रथम धर्माध्यक्ष मिला.प्रथम धर्माध्यक्ष बनने का श्रेय फादर लुइस वानहुक को प्राप्त हुआ. 6 मार्च 1921 में विधिवत फादर लुइस वानहुक को पटना धर्मप्रांत के प्रथम  धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषिक्त किया गया.

बिशप लुई वैन होएक , एसजे (6 मार्च 1921 - 15 फरवरी 1928),बिशप बर्नार्ड जेम्स सुलिवन , एसजे (15 जनवरी 1929 - 6 जून 1946),बिशप ऑगस्टीन फ्रांसिस वाइल्डरमुथ , एसजे (12 जून 1947 - 6 मार्च 1980),बिशप बेनेडिक्ट जॉन ओस्टा, एसजे (76) (बाद में आर्चबिशप ) (6 मार्च 1980 - 16 मार्च 1999),बिशप विलियम डिसूजा( बाद में आर्चबिशप ) (12 दिसंबर 2005 -ं9 दिसंबर 2020) और अब सेबस्टियन कल्लूपुरा ( बाद में आर्चबिशप) April 3, 2009....)                                

पटना धर्मप्रांत को विभक्त कर मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत बनाया. मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत को विभक्त कर बेतिया धर्मप्रांत बनाया. पटना महाधर्मप्रांत को विभक्त कर बक्सर धर्मप्रांत बनाया.  जून 29, 2018 से बिशप नहीं हैं. अभी सेवानिवृत आर्चबिशप विलियम डिसूजा को प्रेरितिक प्रशासक बनाकर काम निकाला जा रहा है.

                                                                                                                                                                      आलोक कुमार

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