नेहरू-गांधी परिवार से नेता प्रतिपक्ष बनने वाले राहुल गांधी तीसरे सदस्य हो गए
नेता प्रतिपक्ष पद संभालने वाले प्रधानमंत्री या उप प्रधानमंत्री भी बनते है
पटना.एक दशक बाद लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी चुन लिए गए हैं.माता सोनिया गांधी (1999), पिता राजीव गांधी (1989) और पुत्र राहुल गांधी (2024) नेता प्रतिपक्ष बने. जो एक कीर्तिमान है.तीनों ही यूपी से सांसद रहते हुए नेता प्रतिपक्ष चुने गए हैं.मंगलवार को देर शाम हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने का फैसला लिया गया. इस तरह राहुल गांधी ने इस बार एक और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. नेहरू-गांधी परिवार से नेता प्रतिपक्ष बनने वाले राहुल गांधी तीसरे सदस्य हो गए हैं. राहुल गांधी भी अपनी मां की तरह रायबरेली के सांसद रहते हुए यह जिम्मेदारी उठाएंगे. राहुल के पिता राजीव गांधी नेहरू-गांधी परिवार से पहले नेता प्रतिपक्ष बने थे. खास बात यह है कि माता-पिता और पुत्र तीनों ही यूपी से सांसद रहते हुए नेता प्रतिपक्ष चुने गए हैं.लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए किसी दल के पास कम से कम 10% (55 सांसद) होना जरूरी होता है. जो इस बार कांग्रेस के पास है. जबकि 2014 में कांग्रेस के 44 और 2019 में 52 सांसद थे. जिसकी वजह से दोनों बार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मजबूत नहीं रहा.
बताया जाता है कि सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष राम सुभाग सिंह 1969 में चुने गए थे. यशवंत राव चव्हाण 1977 और 1979, सीए.एम. स्टीफन 1978, जगजीवन राम 1979, राजीव गांधी 1989,लालकृष्ण आडवाणी 1990-91 और 2004, अटल बिहारी वाजपेयी 1993 और 1996, पीवी नरसिम्हा राव 1996, शरद पवार 1998, सोनिया गांधी 1999, सुषमा स्वराज 2009 में नेता प्रतिपक्ष चुनी गईं थीं. जबकि 6 बार कोई भी औपचारिक रूप से नेता प्रतिपक्ष नहीं चुना गया था. वहीं, लोकसभा चुनाव 2024 में यूपी की रायबरेली से नवनिर्वाचित सांसद राहुल गांधी लोकसभा के 12वें नेता प्रतिपक्ष बन गए हैं.
नेता प्रतिपक्ष के साथ बाद में राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने.उसी तरह जगजीवन राम और लालकृष्ण आडवाणी उप प्रधानमंत्री बने.अब देखना है कि 12वें नेता प्रतिपक्ष बने राहुल गांधी कब प्रधानमंत्री या उप प्रधानमंत्री बन पाते हैं.
फिलवक्त नेता प्रतिपक्ष की संवैधानिक पदों पर होने वाली नियुक्तियों में महत्वपूर्ण भूमिका होती है. सतर्कता आयुक्त (CVC), सूचना आयुक्त, और लोकपाल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुखों की नियुक्ति में नेता प्रतिपक्ष से राय ली जाती है. चयन समितियों में नेता प्रतिपक्ष की उपस्थिति सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करती है. बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अल्पसंख्यक विभाग के उपाध्यक्ष सेसिल साह ने नेता प्रतिपक्ष बनने पर बधाई दी है.
आलोक कुमार

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