गुरुवार, 2 नवंबर 2023

गया जिले में लगभग 10 हजार से ऊपर तिलकुट कारीगर, तिलकुट बनाने का कार्य करते हैं


गया. गया जी के पूरे विश्व मे सुप्रसिद्ध तिलकुट को नेशनल एव इंटरनेशनल लेवल पर  एक नया आयाम देने के उद्देश्य से बेहतर पैकेजिंग की आवयश्कता को देखते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग नई दिल्ली के एडिशनल डायरेक्टर की उपस्थिति में जिला पदाधिकारी गया डॉ० त्यागराजन एसएम की अध्यक्षता में ज़िला उद्योग कार्यालय गया में 1 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, इस कार्यशाला में ज़िले के सैकड़ो तिलकुट निर्माता/ व्यवसाय एव उत्पादक के लोगो ने भाग लिया. गया जिले में लगभग 10 हजार से ऊपर तिलकुट कारीगर, तिलकुट बनाने का कार्य करते हैं.

      कार्यशाला में आये हुए ज़िले के सभी तिलकुट व्यवसायिक को जिला पदाधिकारी ने संबोधित करते हुए बताया कि उद्योग विभाग बिहार सरकार से समन्वय कर गया जिले में निर्माण होने वाले तिलकुट को और इंटरनेशनल लेवल पर कैसे उतारा जाए, इसे अधिक से अधिक लोगों के बीच और कैसे पहुंचाया जाय इसके लिए उद्योग विभाग द्वारा इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पैकेजिंग न्यू दिल्ली द्वारा जिले में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करवाया गया है. जिससे आप सभी गया जी के तिलकुट को विश्व के कोने कोने तक बेहतर पैकेजिंग के माध्यम से लोगो को खाने हेतु बड़े बड़े मार्केट में उतार सके.

          तिलकुट व्यवसाय के लिए पैकेजिंग एक अहम रोल है. आज कल में दौर में मार्केटिंग में ई-कॉमर्स का ज्यादा डिमांड है. देश के विभिन्न कोने में गया जी की तिलकुट की डिमांड रहती है, लेकिन बेहतर पैकेजिंग नही होने के कारण बड़े लेवल के मार्केट में लाने में थोड़ी कठिनाई होती है. तिलकुट काफी खस्ता एवं बहुत जल्द नमी लगने के कारण गिला हो जाता है, इसी बातों को ध्यान में रख कर पैकिंग की आवश्यकता है। प्रोडक्ट को कैसे बेहतर पैकेजिंग करें ताकि प्रोडक्ट और बेहतर दिखे. उन्होंने कहा कि जो दिखता है वही बिकता है। उसी अनुरूप पैकेजिंग करें। लंबी अवधि तक पैकेट के अंदर नमी नहीं पहुंचे इस पर विशेष ध्यान रखें. कलर कॉम्बिनेशन के साथ-साथ अलग-अलग क्वालिटी के अनुरूप पैकेजिंग का डिजाइन तैयार करें.

     उन्होंने कहा कि पैकेजिंग बेहतर होने से ग्राहक तुरंत इंप्रेस हो जाते हैं. पैकेजिंग से प्रोडक्ट का डिमांड बढ़ता है।साथ ही मार्केटिंग भी पकड़ती है. बेहतर पैकेजिंग के लिए जिले के तिलकुट व्यवसाय अलग-अलग छोटे पैमाने पर मशीन लगाना चाहते हैं, उन्हें बैंकर्स के माध्यम से लोन/ ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले के तिलकुट व्यवसाययों में 31 व्यवसाय ने मशीन अधिष्ठापन हेतु आवेदन किया था जिनके विरुद्ध 22 व्यवसाईयों को लोन स्वीकृत कर दी गई है, शेष 9 व्यवसाय को दीपावली तक लोन उपलब्ध करवाने का कार्य किया जाएगा.जिला पदाधिकारी में गया जिले के तमाम तिलकुट व्यवसाययों से अपील किया है कि जिन्हें भी अपनी उद्योग को बढ़ावा देने तथा बेहतर पैकेजिंग का मशीन संस्थापित करना चाहते हैं साथ ही जिन्हें उद्योग विभाग द्वारा मशीन संस्थापित करने के लिए लोन की आवश्यकता है वह तुरंत आवेदन करें. उद्योग विभाग द्वारा निश्चित रूप से लोन उपलब्ध करवाने में आपकी सहयोग करेगी.

    उन्होंने यह भी कहा कि आजकल के लोग खाने-पीने की वस्तुओं को अपने हाइजीन के अनुसार आंकते हैं, इसलिये अपने प्रोडक्ट के पैकेजिंग में तिलकुट के विशेषताएं एवं फायदेमंद के बारे में जरूर अंकित करवाये। प्रोडक्ट एक निश्चित अवधि तक खाने में सुरक्षित रहे इसी अनुरूप पैकेजिंग करवाये.

    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ पैकेजिंग नई दिल्ली के सहायक निदेशक ने पूरी विस्तार से प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रोडक्ट के पैकेजिंग के बारे में सभी व्यवसाईयों को बताया. उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न राज्यो के जो भी प्रसिद्ध वस्तुएं यथा कतरनी चावल, जर्दालु आम, मखाना इत्यादि के बारे में बताया। इन सभी वस्तुओं को बेहतर पैकेजिंग डिज़ाइन तैयार के कारण आज बेहतर मार्केट मिला है. गया जी के तिलकुट को भी बेहतर पैकेजिंग की आवश्यकता है जिससे गया के अलावा अन्य  ज़िलों, राज्यों एव देशों में मार्केटिंग हो सके.

    बैठक में उप विकास आयुक्त, एलडीएम, ज़िला उद्योग पदाधिकारी, विभिन्न स्टेकहोल्डर, विभिन्न तिलकुट व्यवसाय से जुड़े हुए बड़े दुकानदार उपस्थित थे.


आलोक कुमार

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