शनिवार, 10 सितंबर 2022

कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल की प्रशासिका बिहारी नहीं बन पाए

 पटना.बिहार में संचालित संस्था मेडिकल मिशन सिस्टर्स में बिहारी सिस्टरों का अकाल है.संस्था मेडिकल मिशन सिस्टर्स के द्वारा कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल संचालित है.यहां पर केवल नर्सेज बनाया जाता है.इसके प्रभाव से कोई सिस्टर बनना नहीं चाहते हैं. इसके कारण 83 सालों में कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल की प्रशासिका बिहारी नहीं बन पाए हैं.            

मेडिकल मिशन सिस्टर्स द्वारा संचालित है कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल.1939 में पादरी की हवेली पटना सिटी में मेडिकल मिशन सिस्टर्स के द्वारा लघु हॉस्पिटल खोला गया.यहां 1948 मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना से पहले मदर टेरेसा ने बुनियादी चिकित्सा प्रशिक्षण प्राप्त किया.आज मदर टेरेसा संत बन गयी हैं.संत मदर टेरेसा से प्रार्थना है कि 1939 से 2022 तक के इन 83 सालों में अविभाजित बिहार और 15 नवंबर 2000 में विभाजित बिहार से किसी को हॉस्पिटल की प्रशासिका नहीं बनायी गयी हैं.हम तुझसे प्रार्थना करते हैं कि निकट भविष्य में किसी बिहारी को हॉस्पिटल की प्रशासिका बनाने में सहायक बने.

बताते चले कि होली फैमिली हॉस्पिटल की शुरुआत 1939 में पटना सिटी में मेडिकल मिशन सिस्टर्स द्वारा की गई थी.मेडिकल मिशन सिस्टर्स की सिस्टर लूसी कुन्नथानम हॉस्पिटल की प्रशासिका बनी.उसके बाद सिस्टर जोन मथाइकल हॉस्पिटल की प्रशासिका बनी. उनके बाद सिस्टर ग्रेस की ताजपोशी प्रशासिका के रूप में हुई.उनके बाद पुनः सिस्टर जोन मथाइकल हॉस्पिटल की प्रशासिका बनी.यह बता दें कि सिस्टर लुसिया ई.प्रशासिका बनने वाली थी.परंतु सर्वेश्वर को मंजूर न था.सिस्टर लुसिया का निधन हो गया.तब सोशल वर्क में डिग्री हासिल करने वाली सिस्टर जुलियाना डिकुन्हा की ताजपोशी प्रशासिका के रूप में की गयी.यहां बता दें कि झारखंड में स्थित होली फैमिली अस्पताल,मांडर की  प्रशासिका सिस्टर जोन मथाइकल हॉस्पिटल की प्रशासिका थीं.उन्हें वहां  से पटना लाने के लिए हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स करने वाली झारखंड की सिस्टर अनातासिया टेटे को झारखंड में स्थित होली फैमिली अस्पताल,मांडर की  प्रशासिका बनायी गयी.इस समय मेडिकल मिशन सिस्टर्स के रीजनल सुपेरियर सिस्टर अनातासिया टेटे हैं.अब यह संभव नहीं है कि सिस्टर अनातासिया टेटे प्रशासिका बन सके.

बता दें कि रांची महाधर्मप्रांत में 1955 से होली फैमिली अस्पताल मांडर संचालित है.जब 60 साल का था तब 7 नवम्बर 2015 को कॉन्स्टंट लीवन्स अस्पताल और शोध संस्थान (नया नाम) मिला. सीबीसीआई सोसायटी मेडिकल एडुकेशन, नौर्थ इंडिया ने अपने हाथ में ले लिया है.झारखंड में स्थित होली फैमिली अस्पताल,मांडर के एक कोने में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है.उसी तरह 2000 में मेडिकल मिशन सिस्टर्स (एमएमएस) ने सिस्टर्स ऑफ चौरिटी ऑफ नाज़रेथ (एससीएन) को एमएमएस के साथ संयुक्त रूप से अस्पताल का प्रबंधन करने के लिए आमंत्रित किया गया.जो 22 सालों से मिलकर चला रहे हैं.हर पांच साल के बाद प्रशासिका बदल जाती है.

पिछले 83 वर्षों में मेडिकल मिशन सिस्टर्स ने हमारी दुनिया में लाखों लोगों की देखभाल और करुणा की पेशकश की है.जैसे-जैसे समय और जरूरतें विकसित हुई हैं, वैसे-वैसे हमारा ध्यान मिशन पर भी है - उपचारात्मक से लेकर निवारक तक, प्रोत्साहन देने के लिए, समुदाय-आधारित, समग्र स्वास्थ्य देखभाल तक.कुर्जी होली फैमिली अस्पताल 19 नवंबर, 1958 को एक वास्तविकता बन गया और लगातार विस्तार और है आज तक 300 बिस्तरों वाला अस्पताल.वर्ष 2000 से, अस्पताल का प्रबंधन एक शासी निकाय द्वारा मेडिकल मिशन सिस्टर्स एंड सिस्टर्स ऑफ चैरिटी ऑफ नाजरेथ द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है.

हर पांच साल के बाद मेडिकल मिशन सिस्टर्स की सिस्टर जुलियाना डिकुन्हा प्रशासिका बदल गयी.अब सिस्टर्स ऑफ चैरिटी ऑफ नाजरेथ की सिस्टर प्रिंसी मैथ्यू, कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल की प्रशासक हैं. वह सिस्टर्स ऑफ चैरिटी ऑफ नाजरेथ की सदस्य हैं. शेफ ने कर्नाटक के फादर मुलर मेडिकल कॉलेज मैंगलोर से हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स पूरा किया है और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर और होली फैमिली हॉस्पिटल, दिल्ली में इंटर्नशिप की है.

उन्होंने फादर मुलर मेडिकल कॉलेज मैंगलोर, कर्नाटक में पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग और कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल पटना में जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी किया है.

उन्हें दो साल तक कुर्जी होली फैमिली अस्पताल पटना में गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) के प्रभारी होने का भी अनुभव है. उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बख्तियारपुर में दो साल तक स्टाफ प्रभारी के रूप में कार्य किया.उन्हें 1 सितंबर 2018 को कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल पटना में प्रशासनिक समन्वयक के रूप में नियुक्त किया गया था, 1 मार्च 2019 से एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर बनीं और 1 सितंबर 2022 से प्रशासक बनीं.

सीनियर प्रिंसी समग्र देखभाल प्रदान करने और बिना किसी भेदभाव के चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता वाले सभी लोगों तक पहुंचने की इच्छुक हैं.


आलोक कुमार


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