मंगलवार, 23 अगस्त 2022

13 दिन बाद भी विधानसभा अध्यक्ष ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया

 

पटना: बिहार में सरकार बदलने के 13 दिन बाद भी विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है.जिसके कारण संवैधानिक संकट बन गया है.बिहार विधानसभा स्पीकर विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मैं इस्तीफा नहीं देंगे.यह कहा जा सकता है कि इस्तीफा देने के मसले पर अड़ गए हैं. किसी भी कीमत पर इस्तीफा नहीं देंगे.

बिहार में सत्ता परिवर्तन 10 अगस्त को हुआ.लगभग 13 दिन हो गए.अब तक विजय कुमार सिन्हा ने विधानसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं दिया है.सत्ताधारी जेडीयू और आरजेडी, लगातार इस्तीफे की मांग कर रही है, लेकिन वे इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं.विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि जो उन्हें नोटिस दी गई है, वह नियमों के खिलाफ है.

पटना में पत्रकारों से बात करते हुए स्पीकर विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि विगत दिनों सत्ता को बचाए रखने के लिए जो कुछ भी हुआ, उस पर इस समय कुछ भी कहना उचित नहीं होगा. लेकिन इस दौरान विधायिका की प्रतिष्ठा पर जो प्रश्न खड़े किए गए हैं, उस पर चुप रह जाना भी मेरे लिए अनुचित होगा. विजय सिन्हा ने कहा कि जब तक दायित्व के साथ बंधे हैं, तब तक अपने व्यक्तिगत सम्मान से ऊपर लोकतंत्र की गरिमा को सुरक्षित रखना मेरा कर्तव्य है. इसलिए जब विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, तब मैंने अपने ऊपर विश्वास की कमी के रूप में नहीं देखा.अविश्वास का प्रस्ताव का जो नोटिस सभा सचिवालय को दिया गया है, इसके नियमों और प्रावधानों की अनदेखी की गई है.इसलिए इस नोटिस को अस्वीकृत करना मेरा स्वाभाविक जिम्मेवारी है.

बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने साफ तौर पर कह दिया है कि वे पद से इस्तीफा नहीं देंगे. विजय सिन्हा ने कहा कि मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, लेकिन मैंने खुद पर विश्वास रखा. अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सचिवालय को दिया गया, जिसमें नियमों की अनदेखी की गई है. आसन से बंधे होने के कारण से नोटिस में सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और निराधार आरोप लगाए गए हैं, जो व्यक्तिगत स्तर के हैं. ऐसे में उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद ललित यादव की अध्यक्षता में महागठबंधन के नेताओं ने मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था.बिहार विधानसभा के सचिव के समक्ष 10 अगस्त को महागठबंधन के 50 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपा गया था. अविश्वास प्रस्ताव के तहत विजय कुमार सिन्हा को अध्यक्ष के रूप में अपना पद बरकरार रखने के लिए विधानसभा के अंदर बहुमत साबित करना होगा.लेकिन अब उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया है.

अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने के 14 दिन बाद उस पर चर्चा हो सकती है.नोटिस दिए जाने का बाद विधानसभा की कार्यवाही सत्र शुरू होने पर चर्चा के लिए यह सबसे पहला एजेंडा होता है. जब अविश्वास प्रस्ताव लिया जाता है, तो स्पीकर खुद अध्यक्षता नहीं कर सकता. ऐसे में डिप्टी स्पीकर काम संभालेंगे. विधानसभा में जेडीयू नेता महेश्वर हजारी डिप्टी स्पीकर हैं. कानून के मुताबिक विजय कुमार सिन्हा अधिकतम 14 दिन स्पीकर की कुर्सी पर रह सकते हैं. वहीं महागठबंधन को 15 दिनों का इंतजार करना पड़ेगा. ऐसे में 14 दिनों का समय 23 अगस्त को खत्म हो रहा है और सत्र 24 अगस्त को होगा. लेकिन सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ही स्पीकर ने कह दिया है कि वे अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे.

बता दें कि बिहार विधानसभा के कार्य संचालन नियमावली में अध्यक्ष को हटाने और नये अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया निर्धारित है. खास बात यह है कि बिहार के राज्यपाल द्वारा अध्यक्ष के निर्वाचन की तिथि निर्धारित की जाती है. तकनीकी रूप से देखा जाए तो विधानसभा अध्यक्ष का पद अभी खाली नहीं है और ना ही इस तरह की कोई सूचना विधानसभा की ओर से महामहिम राज्यपाल को दी गई है. जहां तक विधानसभा अध्यक्ष के निर्वाचन की बात है तो पद रिक्ति की सूचना मिलने के बाद राज्यपाल द्वारा तिथि निर्धारित की जाती है. नियम के अनुसार, निर्वाचन की तिथि के एक दिन पहले 12 बजे दिन तक ही अध्यक्ष बनने को इच्छुक सदस्य विधानसभा सचिव के पास नामांकन दर्ज कर सकते हैं.

बता दें कि नई सरकार को विश्वास मत हासिल करने के लिए 24 अगस्त को विधानसभा की बैठक बुलाई गई है. दो दिवसीय सत्र की कार्ययोजना मौजूदा अध्यक्ष को ही बनानी है. बिहार विधानसभा में दो ही कार्य किये जाने हैं. पहला सरकार का बहुमत हासिल करना और दूसरा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराना. हालांकि अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि इनमें से पहला कार्य कौन होगा और दूसरा कौन सा.हालांकि विधानसभा स्पीकर ने सत्ता पक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है. ऐसे में अब आगे क्या होगा, इस पर इस पर सबकी नजर रहेगी.

 जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा,‘महागठबंधन के विधायकों ने मंगलवार को (जिस दिन नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में पद छोड़ दिया था) बिहार विधानसभा के सचिव को एक नोटिस भेजा, जिसमें सदन के अध्यक्ष को उनके पद से हटाने की मांग की गई है.’ उन्होंने कहा कि महागठबंधन के कई विधायकों ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे. चौधरी ने कहा कि इसकी एक हार्ड कॉपी भी बुधवार को विधानसभा सचिवालय को सौंपी गई. चौधरी ने कहा कि सदन के वर्तमान अध्यक्ष सिन्हा के खिलाफ यह प्रस्ताव नीतीश कुमार की ओर से विश्वास मत लाने के लिए सत्र आहूत किए जाने के दौरान लाया जाएगा. 

जेडीयू के एक अन्य नेता ने कहा, ‘हमें पता चला कि वर्तमान अध्यक्ष ने मंगलवार को एक बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) नेता की अध्यक्षता में आचार समिति की बैठक बुलाई और पिछले साल मार्च में विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम के अधिनियम के दौरान विधानसभा में अराजकता पर एक ताजा रिपोर्ट प्राप्त की थी.’ उन्होंने कहा कि अध्यक्ष की मंशा बहुत संदिग्ध थी, क्योंकि उन्होंने परंपरा के अनुसार पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था.

जब अविश्वास प्रस्ताव लिया जाता है, तो स्पीकर खुद अध्यक्षता नहीं कर सकता. ऐसे में डिप्टी स्पीकर काम संभालेंगे.' विधानसभा में जदयू नेता महेश्वर हजारी डिप्टी स्पीकर हैं.पूर्व स्पीकर विजय कुमार चौधरी ने बताया कि कानून के मुताबिक विजय कुमार सिन्हा अधिकतम 14 दिन स्पीकर की कुर्सी पर रह सकते हैं। ही महागठबंधन को 15 दिनों का इंतजार करना पड़ेगा. विजय कुमार चौधरी ने कहा, 'मुझे भी पता चला है कि महागठबंधन ने अविश्वास नोटिस दिया है. ऐसे में 14 दिनों का समय 23 अगस्त को खत्म हो रहा है और सत्र 24 अगस्त को होगा.'

आलोक कुमार

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