बुधवार, 24 अगस्त 2022

 


रोम: संत पापा फ्राँसिस ने छह महीने से युद्ध की भयावहता से पीड़ित यूक्रेनी लोगों के लिए शांति के लिए प्रार्थना की, युद्ध को ‘पागलपन‘ कहा. संत पापा ने कई यूक्रेनी और रूसी अनाथों को याद किया, पुतिन के विचारक की बेटी दरिया दुगीना पर हमले का उल्लेख किया, साथ ही दुनिया को सीरिया, यमन और म्यांमार के युद्ध पीड़ितों को याद करने का आह्वान किया.

रूस की यूक्रेन के खिलाफ शुरू की गई जंग को आज छह महीने का वक्त पूरा हो गया है. इस जंग में न केवल यूक्रेन और रूस ने अपना काफी कुछ खोया है बल्कि पूरी दुनिया को भी अच्छा खासा नुकसान उठाना पड़ा है. यूक्रेन इस वक्त लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर है, रूसी सैनिकों को भारी नुकसान हो रहा है और बाकी दुनिया खाने की कमी, बढ़ती महंगाई, परामणु युद्ध के खतरे की आशंका और इस युद्ध से उत्पन्न अन्य चुनौतियों से जूझ रही है. जिसके जल्दी खत्म होने के कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे. रेड क्रॉस ने मंगलवार को चेतावनी जारी करते हुए बताया कि यूक्रेन संकट ने पूरी दुनिया की मानवीय व्यवसथा को झटका दिया है और दुनियाभर में आपात स्थितियों पर प्रतिक्रिया देने के लिए संगठन की क्षमता पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है.

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ द रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज के अध्यक्ष फ्रांसेस्को रोक्का ने कहा कि इस युद्ध को छह महीने हो गये हैं, इसने लोगों को मुश्किल वक्त में लाकर खड़ा कर दिया है. एक बयान में उन्होंने कहा कि जिस तरह से लड़ाई जारी है, ‘भोजन और ईंधन की बढ़ती कीमत और गहराते खाद्य संकट का प्रभाव केवल बढ़ रहा है.‘ तो चलिए अब जान लेते हैं कि इस युद्ध के क्या परिणाम रहे हैं.

मौत का असल आंकड़ा वास्तव में काफी अधिक होने की संभावना है, लेकिन जो आंकड़े उपलब्ध हैं, उनके अनुसार 24 फरवरी को जंग शुरू होने के बाद से 5587 आम नागरिकों की मौत हो गई है. जबकि 7890 लोग घायल हुए हैं.ओएचसीएचआर के अनुसार, अधिकतर नागरिकों की मौत रूस के हवाई, तोप और मिसाइल हमलों में हुई है. इसके अलावा 22 अगस्त को यूक्रेनी सशस्त्र बलों के कमांडर जनरल वैलेरी जालुज्नी ने बताया कि लड़ाई में करीब 9000 यूक्रेन के सैनिक मारे गए हैं. युद्ध शुरू होने के बाद ऐसा पहली बार है, जब सेना के किसी बड़े अधकारी ने मौत का आंकड़ा जारी किया है. हालांकि रूस के सैनिकों की मौत का आंकड़ा जारी नहीं हुआ है.

लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी में बताया गया है कि यूक्रेन में रूस के 15000 सैनिकों की मौत हो गई है और तीन गुना ज्यादा घायल हो गए हैं. 1979 से 1989 तक अफगानिस्तान पर कब्जे के दौरान सोवियत संघ के जितने लोगों की मौत हुई, ये आंकड़ा उसी के बराबर है.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी का कहना है कि 24 फरवरी के बाद एक तिहाई यूक्रेनियन, जिनकी संख्या 4.1 करोड़ से अधिक है, को अपने घरों को छोड़ना पड़ा है. जिसकी वजह से इस समय दुनिया की सबसे खराब मानव विस्थापन आपदा आ गई है. एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, 66 लाख से अधिक यूक्रेनी शरणार्थी यूरोप के अलग-अलग देशों में चले गए हैं. सबसे अधिक आबादी पोलैंड गई है, इसके बाद रूस और जर्मनी का नंबर है, जहां बड़ी संख्या में यूक्रेनी लोग रहने के लिए गए हैं.

रॉयटर्स के मुताबिक 2014 में क्रीमिया पर रूसी कब्जे के बाद यूक्रेन ने अपनी जमीन के 22 फीसदी हिस्से पर से नियंत्रण खो दिया है.उसने अपनी तटरेखा का एक बड़ा हिस्सा खो दिया है, उसकी अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई है और रूसी बमबारी ने कुछ शहरों को वीरान कर दिया है. विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों के अनुसार, 2022 में यूक्रेन की जीडीपी 45 फीसदी तक गिर जाएगी. प्रधानमंत्री डेनिस श्यामल के अनुसार, युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण की पूरी लागत लगभग 750 अरब डॉलर होगी। यह बहुत अधिक भी हो सकती है.

यूक्रेन में युद्ध शुरू करने की वजह से रूस का काफी पैसा खर्च हुआ है, लेकिन कितना ये रूस ने नहीं बताया है. सेना और हथियारों पर आने वाले खर्च के अलावा रूस को पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का भी सामना करना पड़ रहा है.1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस ने वर्तमान में अपनी अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी गिरावट देखी है.रूस की 1.8 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के 2022 में 4-6 फीसदी तक गिरने की आशंका है, जो अप्रैल में सेंट्रल बैंक द्वारा बताई 8-10 फीसदी गिरावट की संभावना से कम है.

रूस पर आर्थिक प्रभाव अब भी पड़ रहा है और पूरी तरह उसे समझ पाना मुश्किल है. वह पश्चिमी वित्तीय बाजारों तक पहुंचने में असमर्थ है, उसके अधिकतर अमीर लोगों पर प्रतिबंध लग गए हैं और उसे माइक्रोचिप्स जैसे कुछ सामान को प्राप्त करने में परेशानी हो रही है.

संत पापा ने न केवल यूक्रेन में, बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी हो रही त्रासदियों पर दुनिया का ध्यान आकर्षित कराया. ‘टुकड़ों में हो रहा तीसरा विश्व युद्ध,‘ वे ‘टुकड़े‘ जो धीरे-धीरे एक विश्व रसातल को चित्रित करने के लिए जुड़ रहे हैं.

संत पापा ने कहा, “हम उन अन्य देशों के बारे में नहीं सोचते जो कुछ समय से युद्ध में हैं. दस साल से अधिक समय से सीरिया में युद्ध है. आइए, हम यमन के बारे में सोचें, जहां इतने सारे बच्चे भूख से पीड़ित हैं.आइए, उन रोहिंग्या लोगों के बारे में सोचें जो अन्याय पूर्वक अपनी जमीन से बेदखल कर दिये गये हैं और दुनिया की यात्रा करते हैं.”


आज, हालांकि, कीव में आक्रमण शुरू होने के छह महीने बाद, संत पापा ने यूक्रेन और रूस पर भी विशेष ध्यान देते हुए कहा, ‘मैंने दोनों देशों को माता मरिया के निष्कलंक हृदय को समर्पित किया है. माँ आप इन दोनों देशों पर अपनी नजर बनाए रखें, यूक्रेन को देखें, रूस को देखें.माँ हमें शांति प्रदान करें। हमें शांति चाहिए.‘


आलोक कुमार

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