शुक्रवार, 19 अगस्त 2022

वोट देने का संवैधानिक अधिकार से वंचित !

 पटना: भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. इस समय भारत खतरे में है.आजकल भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की कवायद तेज है.उसके लिए एक मसौदा तैयार किया जा रहा है.फिलहाल जो यहां मसौदा का प्रारूप बना है उसके अनुसार भारत के हिंदुओं के अलावा अन्य जो दो धर्म के मतावलंबी हैं यानी मुस्लिम और ईसाई, उनको भारत में हर तरह के अधिकार प्राप्त होंगे. वो शिक्षा ग्रहण करने के लेकर रोज़गार, व्यवसाय सब कर सकेंगे. लेकिन उनको वोट देने का संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है.यानी मतदान नहीं कर सकेेंगे.एक तरह से राजनीतिक हत्या कर दी जाएगी.



बता दें कि फरवरी 2022 में आयोजित माघ मेले के दौरान संगम तट पर संत सम्मेलन में भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के साथ भारत को अपने संविधान के साथ हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए धर्म संसद में प्रस्ताव पारित हुआ था. तीन प्रस्ताव पारित किए गए थे.तीर्थराज प्रयागराज की धरती से हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने का साधु-संतों ने संकल्प लिये थे तो उस समय जोरदार जयघोष गूंजने लगे थे.इस दौरान संतों ने कहा था कि जब तक भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा, तब तक विश्व गुरु बनने का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकेगा.    

तब प्रयागराज धर्म संसद में यह तय किया गया कि संत और धर्मगुरु इसके लिए एक मसौदा तैयार करेंगे जो एक राष्ट्र के गठन की स्थिति में ‘संविधान‘के रूप में गाइडबुक के रूप में कार्य करेगा.इस दौरान सनातनी हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए इस्लामी जिहाद के खिलाफ संतों से एकजुटता का आह्वान किया गया था.कहा गया कि अब अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक का फर्क मिट जाना चाहिए.यह धर्म संसद महावीर मार्ग स्थित ब्रह्मर्षि आश्रम ट्रस्ट शिविर में आयोजित थी.  

इस संदर्भ में बताया गया कि हिंदू राष्ट्र के संविधान का मसौदा तैयार हो चुका है. मसौदे में विषयों को शामिल करने के साथ-साथ आम जनता के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा.अभी तक 32 पृष्ठों का मसौदा तैयार किया गया है, प्रस्तावित गाइडबुक 750 पृष्ठों की होगी. यह विद्वानों व संतों के बीच मतैक्य स्थापित कर ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है. इस मौजूदा मसौदे में कई चौंकाने वाली बातें हैं.    

इस कथित ड्राफ्ट में पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को राजधानी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है.मसौदे में दिल्ली के बजाय वाराणसी को भारत की राजधानी बनाने का प्रस्ताव है. मसौदे के निर्माताओं के अनुसार वाराणसी सर्वज्ञता का केंद्र रहा है और इसलिए इसे हिंदू राष्ट्र में राजधानी बनाया जाना चाहिए. हालांकि शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि नाम केवल चर्चा के लिए है और अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है. संभव है कि राजधानी के लिए उज्जैन जैसी कोई दूसरी जगह भी मानी जा सकती है.                        

वाराणसी में 30 संतों और विद्वानों ने इसे तैयार किया है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इसमें मुस्लिमों और ईसाइयों को मताधिकार नहीं दिया गया है.विधि विशेषज्ञों एवं सनातन धर्म के विशेषज्ञों के सहयोग से ‘हिन्दू राष्ट्र संविधान निर्माण समिति‘ने इस मसौदे पर लोगों से विचार-विमर्श कर 2023 में प्रयागराज में होने वाले माघ मेले में इस प्रारूप को प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है.मसौदे पर उनकी राय जानने के लिए लोगों के बीच जाएंगे.

अब धार्मिक विद्वानों और विधि विशेषज्ञों ने इसके लिए एक दस्तावेज तैयार किया है.यह शांभवी पीठाधीश्वर आनंद स्वरूप के नेतृत्व में उस विस्तृत दस्तावेज का एक हिस्सा है. कहा जा रहा है कि हिंदू राष्ट्र के संविधान के पहले मसौदे में शिक्षा, कानून-व्यवस्था, रक्षा, मतदान प्रणाली, रक्षा, राज्य के मुखिया के अधिकारों के बारे में बताया गया है.  

हिंदू राष्ट्र के संविधान में कहा गया है कि सभी लोगों को अनिवार्य रूप से सैन्य प्रशिक्षण दिया जाएगा. खेती को टैक्स फ्री किया जाएगा. इस ड्राफ्ट में सबसे महत्वपूर्ण बात मताधिकार को लेकर है. फिलहाल जो प्रारूप बना है उसके अनुसार हिंदुओं के अलावा अन्य जो दो धर्म के मतावलंबी हैं यानी मुस्लिम और ईसाई, उनको भारत में हर तरह के अधिकार प्राप्त होंगे. वो शिक्षा ग्रहण करने के लेकर रोज़गार, व्यवसाय सब कर सकेंगे. लेकिन उनको वोट देने का अधिकार नहीं होगा. यानी हिंदुओं जिसमें सिख, बौद्ध, जैन भी हैं, वो ही वोट दे सकेंगे. स्वामी आनंद स्वरूप कहते हैं ‘ ऐसा ही तो दूसरे देशों में है.तो फिर भारत में क्यों नहीं? इस्लामिक देश क्या वहां रहने वाले हिंदुओं को मत का अधिकार देते हैं? इस प्रारूप में वोट देने की आयु 16 वर्ष और चुनाव लड़ने की 25 वर्ष करने का भी प्रस्ताव किया गया है.

इस संविधान के कवर पेज पर अखंड भारत का नक्शा लगाया गया है. कवर पेज में कुछ मंदिरों के ऊपर भगवा झंडा फहराते हुए दिखाया गया है. ब्रिटिश कालीन नियम खत्म कर दिए जाएंगे. सब कुछ वर्ण व्यवस्था के आधार पर चलाया जाएगा. हर जाति के लोगों को सुविधा और सुरक्षा मिलेगी.

आलोक कुमार


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