गुरुवार, 16 नवंबर 2023

बिहार में धार्मिक शोभा यात्रा और जुलूस के लिए कड़े प्रावधान

 पटना.बिहार सरकार ने बिहार में धार्मिक शोभा यात्रा और जुलूस के लिए कड़े प्रावधान कर दिए गए हैं.कड़े प्रावधान का असर ईसाई समुदाय के यूखरिस्तीय यात्रा पर पड़ने की संभावना है.अब जुलूस में शामिल होने वाले 15 से 20 लोगों की लिस्ट देनी होगी.उनको यह बताना होगा कि जुलूस और शोभायात्रा के दौरान किसी तरह की हिंसा नहीं होगी.


          सर्वज्ञात है कि ईसाई समुदाय के द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से यूखरिस्तीय यात्रा निकाली जाती है.फिर भी असामाजिक तत्व के द्वारा विघ्न डालने का प्रयास हो सकता है तो सचेत रहना जरूरी ही है.जानकारी के अनुसार बक्सर धर्मप्रांत में 24 नवंबर से तीन दिवसीय धर्मप्रांतीय आध्यात्मिक सम्मेलन होने वाला है.यहां के संत मेरीस कैथेड्रल,नयी बाजार में 24 और 25 नवंबर को साधना और प्रार्थना करने का कार्यक्रम है.उसके बाद साधना और प्रार्थना के अंतिम दिन 26 नवंबर को जुलूस निकाला जाएगा. झारखंड में स्थित डिवाइन आश्रम,हजारीबाग के लोगों के द्वारा   आध्यात्मिक सम्मेलन का संचालन होगा. मौके पर पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा द्वारा पवित्र मिस्सा बलिदान और पटना महाधर्मप्रांत के एमेरिटस महाधर्माध्यक्ष विलियम डिसूजा के द्वारा पवित्र यूखरिस्त अर्पित करेंगे.बक्सर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष जेम्स शेखर द्वारा समापन समारोह में शिरकत करेंगे.

            बक्सर धर्मप्रांत में बक्सर, भोजपुर, भभुआ और रोहतास जिले हैै.आरा पल्ली के अलावे अन्य पीरो, शाहपुर, बक्सर, डुमरांव, इटाढ़ी, चेनारी, कोआथ और सासाराम पल्ली है.यहां पर ईसाई समुदायों की संख्या और आकार में वृद्धि हुई है. चर्च संस्थान और संगठनात्मक संरचनाएं उनके साथ बढ़ती गईं, जिससे क्षेत्र के बहुसंख्यक दलित ईसाइयों के बीच महत्वपूर्ण सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन आया है.इसके आलोक में भारी संख्या में लोग तीन दिवसीय अध्यात्मिक सम्मेलन में भाग लेने आएंगे.

               इस बीच सामान्य प्रशासन विभाग ने गुरुवार को आदेश जारी करते हुए राज्य के सभी जिलों के डीएम और पुलिस अधीक्षक को इस संबंध में पत्र जारी कर सूचित कर दिया गया है. बिहार गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में धार्मिक जुलूसों को विनियमित करने और जुलूसों को अनुज्ञप्ति निर्गत करने को लेकर कई नियमों को सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है. इसमें कहा गया है कि ऐसे दृष्टांत सामने आए हैं जिनमें विभिन्न पर्व त्योहारों के अवसर पर धार्मिक जुलूसों शोभा यात्राओं में शामिल लोगों द्वारा माइक्रोफोन / लाउडस्पीकर से काफी उच्च ध्वनि में धार्मिक नारे लगाने, डीजे बजाने और परम्परागत हथियारों के प्रदर्शन को लेकर साम्प्रदायिक तनाव के कारण विधि व्यवस्था की गंभीर समस्या उत्पन्न हुई.

                 इसमें कहा गया है कि धार्मिक जुलूसों की स्वीकृति एवं उनके लिए दिए जाने वाली अनुज्ञप्ति में यह शर्त निश्चित रूप से शामिल किया जाए कि धार्मिक जुलूसों में माइक्रोफोन / पब्लिक एड्रेस सिस्टम या अन्य विस्तारक के शोर का स्तर उस क्षेत्र के लिए निर्धारित मानक स्तर से अधिक न हो तथा जुलूस नेतृत्व द्वारा मात्र जुलूस के नियंत्रण के लिए ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग किया जायेगा. इसके लिए प्रत्येक ध्वनि विस्तारक के उपयोग के लिए अलग से अनुज्ञप्ति निर्गत किया जायेगा.

                  प्रत्येक अनुज्ञप्ति में डेसिबल स्पष्ट रूप से अंकित हो. प्रत्येक ध्वनि विस्तारक यंत्र का डेसिबल मिलान किया जायेगा. डेसिबल मिलान के लिए मोबाइल पर ऐप उपलब्ध है जिसके माध्यम से सुगमतापूर्वक इसकी जांच की जा सकती है. जुलूस या शोभायात्राओं के दौरान कई लोगों द्वारा समूह में लाठी, भाला, तलवार, आग्नेयास्त्र एवं अन्य हथियारों का उत्तेजक प्रदर्शन किया जाता है. कुछ खास परिस्थिति यथा सिख समुदाय द्वारा धारित कृपाण को छोड़कर किसी भी जुलूस या शोभायात्रा में हथियार ले जाना अथवा प्रदर्शन किया जाना आर्म्स एक्ट के तहत प्रतिबंधित है. यदि किसी कारण से तलवार इत्यादि ले जाना आवश्यक हो तो उसके लिए अलग से प्रत्येक ऐसे व्यक्ति जो तलवार इत्यादि धारित करेंगे को अनुमति लेना आवश्यक होगा. साथ ही जुलूस या शोभायात्राओं में भाग ले रहे कम से कम 10 से 25 लोगों से उपक्रम लिया जाय कि विधि व्यवस्था जुलूस में संधारित करेंगे एवं 10 से 25 लोगों का नाम, पता तथा आधार कार्ड का नंबर भी प्राप्त कर लिया जाय.

                   जो मजिस्ट्रेट अथवा पुलिस पदाधिकारी इस जुलूस में प्रतिनियुक्त रहेंगे, उपरोक्त कंडिकाओं में उल्लेखित शर्तों की जांच कर सुनिश्चित होने एवं कंडिका-5 के अन्तर्गत उपक्रम प्राप्त होने के पश्चात हीं प्रारम्भिक स्थल से जुलूस के प्रस्थान की अनुमति देंगे। संबंधित थाना के थाना प्रभारी को इसकी सूचना प्रतिनियुक्त पुलिस पदाधिकारी द्वारा तुरंत दी जाएगी.

                    जाहिर है कि लाठी, तलवार भाला, बरछी पर पाबंदी लगा दी गई है. अब जुलूस में शामिल होने वाले 15 से 20 लोगों की लिस्ट देनी होगी. उनको यह बताना होगा कि जुलूस और शोभायात्रा के दौरान किसी तरह की हिंसा नहीं होगी. बिहार सरकार में सभी जिला अधिकारी एसपी को इसे लेकर निर्देश जारी किया है. सरकार का कहना है कि शोभा यात्रा और धार्मिक जुलूस के दौरान माइक्रोफोन, लाउडस्पीकर से काफी तेज आवाज होती है. धार्मिक नारे लगाने, डीजे बजाने, परम्परागत हथियारों के प्रदर्शन से साम्प्रदायिक तनाव फैसला है। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ती है.


आलोक कुमार


चुनाव निकट देख विशेष दर्जा पर राजनीति शुरू करते हैं नीतीश कुमार

 केंद्र ने बिहार को विशेष आर्थिक पैकेज देकर विशेष दर्जा से ज्यादा मदद की 

*14 वें वित्त आयोग ने खारिज की विशेष राज्य की अवधारणा

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चुनाव निकट देख विशेष दर्जा पर राजनीति शुरू करते हैं नीतीश कुमार

* केंद्र में पावरफुल मंत्री रहते लालू  क्यों नहीं दिला पाए विशेष दर्जा

* केंद्रीय मदद से ही हुए बड़े विकास,

* 2.5 करोड़ लोगों की गरीबी दूर हुई

* कई मेगा ब्रिज, 6- लेन सड़कें, पटना-दरभंगा एयरपोर्ट विस्तार क्या केंद्रीय सहायता नहीं?

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 14 वें वित्त आयोग ने "विशेष राज्य" की अवधारणा को ही अमान्य कर दिया है  और अब किसी राज्य को विशेष दर्जा नहीं दिया जा सकता, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार को विशेष आर्थिक पैकेज देकर विशेष दर्जा से कई गुना अधिक मदद कर रहे हैं।

             श्री मोदी ने कहा कि स्वयं नीतीश कुमार की पहल पर कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जो रघुराम राजन कमेटी गठित करायी थी, उसने भी "विशेष राज्य" की मांग को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जब केंद्र के विरोधी खेमे में रहते हैं, तब केंद्र की परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने में अड़ंगेबाजी करते हैं और चुनाव निकट देख कर केंद्र को बदनाम करने के लिए विशेष दर्जे की मांग पर राजनीति शुरू कर देते हैं।

              श्री मोदी ने कहा कि जब नीतीश कुमार और लालू प्रसाद केंद्र सरकार में ताकतवर मंत्री रहे, तब इन लोगों ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा क्यों नहीं दिलवाया ?उन्होंने  कहा कि एक लाख करोड़ से अधिक राशि खर्च कर बिहार में जो आधा दर्जन से ज्यादा मेगा ब्रिज  और 4-लेन,6- लेन सड़कों का  नेटवर्क तैयार हो रहा है, वह क्या केंद्रीय मदद नहीं है?

               श्री मोदी ने कहा कि बिहार में जो भी बड़ा ढांचागत विकास हुआ, वह विशेष आर्थिक पैकेज और केंद्र की सहायता से संभव हुआ। इससे बिहार के हजारों परिवारों को रोजगार मिला। उन्होंने कहा कि क्या बिना केंद्रीय मदद के राज्य के 2.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आ गए? केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में बिहार को उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा 1.02 लाख करोड़ की राशि मिलती है। क्या यह केंद्रीय सहायता नहीं है?

               श्री मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने 8,500 करोड़ रुपये खर्च कर बरौनी खाद कारखाना का आधुनिकीकरण कर इसे फिर चालू कराया। उन्होंने कहा कि यदि विकास की चिंता होती तो नीतीश कुमार उनके साथ नहीं जाते, जिनके शासन में बरौनी सहित कई कारखाने बंद हुए, बेरोजगारी तेजी से बढ़ी और पलायन की नौबत आयी । श्री मोदी ने कहा कि दरभंगा , बिहटा और पटना एयरपोर्ट का विस्तार क्या बिना केंद्रीय सहायता के संभव था?



आलोक कुमार

बुधवार, 15 नवंबर 2023

लोक आस्था के महापर्व ‘छठ’ के अवसर पर गुड़ वितरण

पटना.आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में लोक आस्था के महापर्व ‘छठ’ के अवसर पर   गुड़ वितरण का कार्यक्रम चलाया गया. कांग्रेस नेता निर्मल वर्मा द्वारा उपलब्ध कराये गए खादी ग्राम उद्योग का शुद्ध गुड़ छठ करने वालों  के बीच में वितरण किया गया. इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधान पार्षद लालबाबू लाल, पूर्व महामंत्री डॉ विनोद शर्मा, निर्मल वर्मा, उमेश राम, सुदय शर्मा, निधि पांडे के साथ-साथ अनेक नेता उपस्थित थे.

आलोक कुमार

 

आचार्य विनोबा जी को उनकी 41 जयंती पर श्रद्धांजलि

'जय जगत' का नारा देने वाले भारत रत्न आचार्य विनोबा है

आज भी नारा जयघोष करने वाले कहते है 'जय जगत' का नारा है सारा संसार हमारा है

आचार्य विनोबा जी को उनकी 41 जयंती पर श्रद्धांजलि

         जन्म 11 सितंबर 1895- निधन 15 नवंबर 1982)

आज आचार्य विनायक नरहरि भावे उर्फ विनोबा भावे की पुण्यतिथि है.उनका जन्म बंबई के दक्षिण में गागोडे गांव में 11 सितंबर 1895 एक उच्च कोटि के चितपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था.

भावे भूदान यज्ञ ("भूमि-उपहार आंदोलन") के संस्थापक थे.एक उच्च जाति के ब्राह्मण परिवार में जन्मे, उन्होंने 1916 में अहमदाबाद के पास साबरमती में गांधी के आश्रम (तपस्वी समुदाय) में शामिल होने के लिए अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी.गांधी की शिक्षाओं ने भावे को भारतीय ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित तपस्या पूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित किया.  भूदान आंदोलन 1950 में भूमि व्यवस्था सुधार के उद्देश्य से शुरू किया गया एक आंदोलन था। इसे रक्तहीन आन्दोलन के नाम से भी जाना गया। संपूर्ण उत्तर: भूदान आंदोलन का उद्देश्य बड़ी मात्रा में भूमि रखने वाले अमीर लोगों को अपनी भूमि का कुछ हिस्सा स्वेच्छा से भूमिहीन लोगों को देने के लिए राजी करना था।    विनोबा भावे सर्वोदय आंदोलन एवं भूदान आंदोलन के प्रणेता के रूप में परिचित विनोबा भावे ने सर्वोदय समाज के स्थापना की.भूदान आन्दोलन संत विनोबा भावे द्वारा सन् 1951 में आरम्भ किया गया था. यह स्वैच्छिक भूमि सुधार आंदोलन था.विनोबा की कोशिश थी कि भूमि का पुनर्वितरण सिर्फ सरकारी कानूनों के जरिए नहीं हो, बल्कि एक आंदोलन के माध्यम से इसकी सफल कोशिश की जाए.    जमीन जुटाने के लिए विनोबा ने जमींदारों से बात की और उससे प्रभावित होकर रामचंद्र रेड्डी ने अपनी सौ एकड़ जमीन दान दे दी. इसी घटना से प्रेरित होकर उनके मन में भूदान आंदोलन शुरू किया जो महाराष्ट्र में विशेष तौर पर सफल रहा. उन्होंने 13 लाख गरीब किसानों के लिए 44 लाख एकड़ जमीन हासिल की.

विनोबा भावे  एक भारतीय राष्ट्रवादी और समाज-सुधार नेता थे.भावे का सबसे उल्लेखनीय योगदान भूदान (भूमि उपहार) आंदोलन का निर्माण था.      आंदोलन का मुख्य उद्देश्य इसके नाम, "भूदान" या भूमि का उपहार में निहित है। इसका उद्देश्य भूस्वामियों को अपनी भूमि का एक छोटा सा हिस्सा स्वेच्छा से छोड़ने के लिए प्रेरित करके भूमिहीन किसानों के बीच भूमि वितरित करना था, जिससे अमीर और गरीब के बीच की खाई कम हो सके.      15 नवंबर 1982 को उन्होंने अंतिम सांस ली थी. वे 87 साल 2 महीना 4 दिन के थे.उनके अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने मास्को यात्रा तक स्थगित कर दी थी. विनोबा को 1958 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से नवाजा गया था. उनकी मृत्यु के अगले साल ही उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.

आलोक कुमार

 

सदाकत आश्रम में मनाई गई पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष स्व. सीताराम केसरी की जयंती

 


सदाकत आश्रम में मनाई गई पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष स्व. सीताराम केसरी की जयंती


पटना।बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष स्व. सीताराम केसरी की 104वीं जयंती पर उनके तैल चित्र पर कांग्रेसजनों ने पुष्पांजलि अर्पित की।जयंती कार्यक्रम की अध्यक्षता नेता बिहार विधान परिषद कांग्रेस दल डॉ मदन मोहन झा ने की।


इस अवसर पर डॉ मदन मोहन झा ने स्व. सीताराम केशरी के व्यक्तिव और कृतित्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि केशरी जी बिहार की धरती से राष्ट्रीय राजनीति में सबसे बड़े दल के अध्यक्ष तक का सफर तय किया। वे बिहार कांग्रेस के भी अध्यक्ष रहे। वे केन्द्रीय मंत्री के साथ-साथ कांग्रेस के विभिन्न पदों को भी सुशोभित किया। कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों में उनके प्रति विशेष सम्मान था। स्व. केसरी ने जीवनपर्यंत कांग्रेस की विचारधारा को मजबूत किया और गांधीवादी जीवन शैली के पक्षधर रहे।


स्व. सीताराम केसरी की 104वीं जयंती कार्यक्रम में डॉ मदन मोहन झा के अलावे ब्रजेश पाण्डेय, लाल बाबू लाल, ब्रजेश प्रसाद मुनन, निर्मल वर्मा, सरवत जहाँ फातिमा, उमेश कुमार राम, डॉ. विनोद शर्मा, अखिलेश्वर सिंह, निधि पाण्डेय, मिथिलेश शर्मा मधुकर, विमलेश तिवारी, विश्वनाथ बैठा, मृगेंद्र कुमार सिंह, राजेश मिश्रा, सुदय शर्मा, चितरंजन कुमार, मनीष कुमार सिन्हा, अब्दुल बकी सज्जन सहित अन्य प्रमुख नेतागण उपस्थित रहें।



आलोक कुमार

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक सम्पन्न

 छठ घाटों सहित आने-जाने वाले मार्गों की करिए समुचित साफ-सफाई : जिलाधिकारी

घाटों एवं आने-जाने वाले रास्ते में पर्याप्त रोशनी, खतरनाक घाटों की बैरिकेडिंग, घाटों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम, मेडिकल टीम आदि की व्यवस्था करें सुनिश्चित

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक सम्पन्न

छठ महापर्व को लेकर विधि-व्यवस्था संधारण एवं श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनजर की जा रही तैयारियों की आज जिलाधिकारी, श्री दिनेश कुमार राय द्वारा समीक्षा की गयी

  बेतिया। पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी दिनेश कुमार ने अधिकारियों से कहा कि पूर्व के पर्व-त्योहारों को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराने में सभी अधिकारियों एवं कर्मियों का योगदान सराहनीय है। उन्होंने कहा कि छठ महापर्व 17 नवंबर को नहाय खाय से प्रारंभ होकर 18 नवंबर को खरना, 19 नवंबर को भगवान सूर्य को प्रथम अर्घ्य (संध्या कालीन) एवं 20 नवंबर को द्वितीय अर्घ्य (प्रातःकालीन) के साथ सम्पन्न होगा।

        महापर्व छठ को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने के लिए जिला प्रशासन कृतसंकल्पित है। छठव्रतियों को किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े, इसका विशेष ध्यान रखना है। सभी अधिकारी संवेदनशीलता के साथ अपने-अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निवर्हन तत्परतापूर्वक करेंगे।

        उन्होंने कहा कि छठ पूजा के अवसर पर विभिन्न घाटों पर व्रतियों के साथ बच्चों, महिलाओं, युवकों एवं वृद्धों की भारी भीड़ एकत्र होती है, एवं भगदड़ होने की संभावना रहती है। नदी, तालाबों में कोई डूबे नहीं, इस के लिए एहतियातन सभी आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाय।

        छठ घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को लेकर एहतियातन सभी प्रकार की व्यवस्थाएं सुदृढ़ रखनी हैै। छठ घाटों सहित आने-जाने वाले मार्गों की समुचित साफ-सफाई, पर्याप्त रौशनी, खतरनाक घाटों की बैरिकेडिंग, घाटों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम, मेडिकल टीम आदि की व्यवस्थाएं रहनी चाहिए। बड़े घाटों पर सीसीटीवी का अधिष्ठापन आवश्यक है।

      जिलाधिकारी ने कहा कि अर्घ्य के समय बच्चे नदी, तालाबों आदि के पास नहीं जाए, इस पर विशेष ध्यान देना होगा। इस के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम से लगातार मैसेज प्रसारित किया जाय। नावों के परिचालन पर पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा। छठ घाटों पर पटाखों की बिक्री एवं संचालन को नियंत्रित किया जाना है।

     उन्होंने कहा कि सभी संबंधित प्रत्येक छठ घाटों का फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगे। बांस आदि के माध्यम से घाटों की गहराई का आकलन कर लेंगे। खतरनाक घाटों पर फ्लेक्स, बैनर का अधिष्ठापन कराना सुनिश्चित करेंगे ताकि दुर्घटना की संभावना नहीं रहे। खतरनाक घाटों की समुचित घेराबंदी की जाए तथा वहाँ पर स्पष्ट सूचक बोर्ड एवं झंडे पर्याप्त संख्या में लगाया जाय।

      उन्होंने निर्देश दिया कि छठ महापर्व को लेकर छठ घाटों पर किये जा रहे कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग एवं निरीक्षण सभी एसडीएम करेंगे। नगर आयुक्त, नगर निगम, बेतिया सहित सभी नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी तथा सभी प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रान्तर्गत साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।

      उन्होंने कहा कि महिला श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनजर छट घाटों पर पर्याप्त संख्या में चेंजिंग रूम का अधिष्ठापन कराना सुनिश्चित किया जाय। इसके साथ ही अस्थायी शौचालय का निर्माण भी कराया जाय। एसडीआरएफ की टीम पूरी तरह मुस्तैद रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित गति से कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

     पुलिस अधीक्षक, बेतिया, श्री अमरकेश डी ने कहा कि छठ महापर्व को लेकर सभी थानाध्यक्ष अलर्ट रहेंगे। नदियों में नाव का परिचालन नहीं हो, इसे सुनिश्चित करेंगे। असामाजिक तत्वों पर नजर बनाकर रखेंगे और उनके विरूद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करेंगे।

      जिलाधिकारी द्वारा जिलेवासियों अपील की गयी है कि जिलेवासी महापर्व छठ को  कि शांतिपूर्ण, आपसी सौहार्द एवं भाईचारे के साथ मनाएं। किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। जिला प्रशासन द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्था की जा रही है। छठव्रतियों की सुविधा का ख्याल रखते हुए पूजा आयोजन समितियों से समन्वय स्थापित कर छठ घाट, आने-जाने वाले मार्गों की समुचित साफ-सफाई, पर्याप्त रौशनी आदि की व्यवस्था की जा रही है।

      इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक, बेतिया, श्री अमरकेश डी, अपर समाहर्ता, श्री राजीव कुमार सिंह, एसडीएम, बगहा, डॉ0 अनुपमा सिंह, एसडीएम, बेतिया, श्री विनोद कुमार, एसडीएम, नरकटियागंज, श्री सूर्य प्रकाश कुमार सहित सभी जिलास्तरीय पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सभी अंचलाधिकारी आदि उपस्थित रहे तथा सभी एसडीपीओ, थानाध्यक्ष आदि वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।


आलोक कुमार

सोमवार, 13 नवंबर 2023

छठव्रती महिलाओं के लिए ड्रेस चेंजिंग रूम निर्माण कराने का निर्देश

 जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा छठ घाटों का किया गया निरीक्षण

छठव्रती महिलाओं के लिए ड्रेस चेंजिंग रूम निर्माण कराने का निर्देश

खतरनाक घाटों की घेराबंदी सहित आगे जाना मना है, का फ्लेक्स, बैनर लगाने का निर्देश

बेहतर तरीके से क्राउड मैनेजमेंट की व्यवस्था करने का निर्देश

बेतिया। एम्बुलेंस, मेडिकल टीम, फायर ब्रिगेड, बिजली तारों की निगरानी, गार्ड वायर, साफ-सफाई, बैरिकेडिंग, नाव, नाविक, गोताखोर आदि व्यवस्था सुदृढ़ करने का  निर्देश।

जिलाधिकारी, श्री दिनेश कुमार राय एवं पुलिस अधीक्षक, बेतिया, श्री अमरकेश डी द्वारा आज सागर पोखरा, उतरवारी पोखरा, संत घाट, दुर्गाबाग छठ घाटों का निरीक्षण किया गया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया।

             निरीक्षण के दौरान छठ पूजा आयोजन समिति के सदस्यों, माननीय जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों से छठ घाट से संबंधित फीडबैक जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा लिया गया। जिलाधिकारी ने निरीक्षण के क्रम में कहा कि छठ पर्व के अवसर पर काफी संख्या में छठव्रती महिला-पुरूष विभिन्न नदी घाटों एवं तालाब घाटों पर एकत्रित होकर भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगे। इस दौरान अर्घ्य देने के समय भीड़भाड़ वाले घाट पर भगदड़ नहीं मचे, कोई भी श्रद्धालु पानी में डूबे नहीं इसका खास ख्याल रखना है। इसके साथ ही सभी छठ घाटों पर सभी व्यवस्थाएं पुख्ता रखनी है ताकि छठव्रतियों को परेशानी नहीं हो।

           जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी घाटों पर साफ-सफाई, बैरिकेडिंग के साथ ही साथ पूरे छठ घाट परिसरों में आयोजकों से समन्वय स्थापित कर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाय। साथ ही महिला छठ व्रतियों की सुविधा के मद्देजनर पर्याप्त संख्या में चेंजिंग रूम की भी व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाय ताकि श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

     उन्होंने कहा कि जहां गहराई ज्यादा हो वहां पर मजबूत बैरिकेडिंग कराना सुनिश्चित करें ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना नहीं हो। ज्यादा गहराई वाले घाटों पर इसके आगे जाना खतरनाक है की तख्ती लगवाना भी आवश्यक है ताकि सभी श्रद्धालुओं को स्पष्ट रूप से दिखाई दें।

      कार्यपालक अभियंता, विधुत को निर्देश  दिया गया कि घाटों पर बिजली व्यवस्था की अच्छे तरीक़े से निगरानी आवश्यक है। इस के लिए समुचित कदम उठाए। साथ ही घाटों के आसपास के क्षेत्रों में प्रॉपर तरीके से गार्ड वायर की व्यवस्था करें। नगर आयुक्त, नगर निगम, बेतिया को घाटों की तरफ जाने वाली सड़कों, पहुंच पथों की लेबलिंग कराने, साफ-सफाई, बैरिकेडिंग, चूना/ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव आदि व्यवस्था करने को कहा गया है।

उन्होंने निर्देश दिया कि छठ पर्व के दौरान यातायात व्यवस्था सुदृढ़ रखी जाय। पार्किग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। छठव्रती महिलाओं एवं पुरूषों को पूजा में व्यवधान नहीं हो, इसे हेतु कारगर कार्रवाई की जाय। घाटों पर सभी आवश्यक संसाधन की व्यवस्था की जाय।

जिलाधिकारी द्वारा सिविल सर्जन को निर्देश दिया गया है कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आवश्यक दवाइयों के साथ डॉक्टर ससमय उपस्थित रहेंगे तथा एंबुलेंस को अपडेट रखेंगे। इसके साथ ही महत्वपूर्ण छठ घाटों पर चिकित्सा दल/एंबुलेंस/आवश्यक दवा/पैरामेडिकल स्टाफ आदि की प्रतिनियुक्ति करने के लिए निर्देश दिया गया है।

               पुलिस अधीक्षक, बेतिया, श्री अमरकेश डी ने कहा कि विधि-व्यवस्था संधारण तथा सुरक्षा की दृष्टिकोण से सभी घाटों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस पदाधिकारी तथा पुलिस बलों की प्रतिनियुक्ति की जायेगी। उन्होंने कहा कि उतरवारी पोखरा छठ घाट पर विद्युत तार पंडाल से काफी नजदीक है। छठ व्रतियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से पंडाल की हाइट कम किया जाए ताकि दुर्घटना की संभावना नहीं रहे।  

              ज्ञातव्य हो कि छठ महापर्व के अवसर पर विधि-व्यवस्था संधारण सहित छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनजर की जा रही तैयारियों का जिला प्रशासन द्वारा लगातार समीक्षा एवं जायजा लिया जा रहा है। जिलाधिकारी, पश्चिम चम्पारण के निर्देश के आलोक में सभी संबंधित पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों के छठ घाटों का लगातार निरीक्षण करते हुए सभी व्यवस्थाएं सुदृढ़ करा रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

                  इस अवसर पर अपर समाहर्त्ता, श्री राजीव कुमार सिंह, एसडीएम, बेतिया, श्री विनोद कुमार, नगर आयुक्त, नगर निगम, बेतिया, श्री शम्भू कुमार, एएसडीएम, बेतिया, श्री अनिल कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

आलोक कुमार


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