पटना वीमेंस कॉलेज बिहार समेत झारखंड, बंगाल व समस्त पूर्वी भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक सम्मानित स्थान
आलोक कुमार हूं। ग्रामीण प्रबंधन एवं कल्याण प्रशासन में डिप्लोमाधारी हूं। कई दशकों से पत्रकारिता में जुड़ा हूं। मैं समाज के किनारे रह गये लोगों के बारे में लिखता और पढ़ता हूं। इसमें आप लोग मेरी मदद कर सकते हैं। https://adsense.google.com/adsense/u/0/pub-4394035046473735/myads/sites/preview?url=chingariprimenews.blogspot.com chingariprimenews.com
जहानाबाद.बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी हैं. आज जहानाबाद पहुंचे थे. यहां कोल्ड स्टोर का उद्घाटन करने के लिए पहुंचे थे. जहां उन्होंने एक बड़ा बयान दिया है और इस बार ये बयान उन्होंने अपने बेटे को लेकर दिया है. उन्होंने कहा दिया है कि उनके बेटे में मुख्यमंत्री बनने की काबलियत है. अगर उसे मुख्यमंत्री बनाया गया तो विकास की गति तेज हो जाएगी.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुझ पर विश्वास कर मुझे सीएम की कुर्सी सौंपी थी. अपने 9 महीने के कार्यकाल में मैंने पूरी ईमानदारी से काम किया था. मेरे शासनकाल में किसी को भी किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं मिल सकती है. वहीं, उन्होंने कहा कि मैं नीतीश कुमार के साथ हूं, मुझे अगर नीतीश कुमार किसी भी तरह का धक्का देंगे तब भी मैं उनका साथ नहीं छोडूंगा. मैं हमेशा उनके साथ ही रहूंगा.
इस बीच जीतनराम मांझी अपनी गरीब संपर्क यात्रा के दौरान अक्सर सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को निशाना बनाते रहे हैं. साथ ही जीतनराम मांझी ने गुटबाजी से प्रभावित महागठबंधन की लंबी उम्र पर भी प्रश्न उठाए हैं. गुरुवार को यात्रा के दौरान मांझी ने नीतीश के नेतृत्व वाली गवर्नमेंट की कार्यशैली पर प्रश्न उठाए.
जहानाबाद में पत्रकारों से वार्ता में बेटे को बिहार का सीएम बनाने के प्रश्न पर जीतन राम मांझी ने बोला कि संतोष पढ़ा-लिखा है और उसे सीएम बना देना चाहिए. उन्होंने बोला कि ऐसा नहीं है कि वह सिर्फ भुइया जाति से आते हैं, वह एक प्रोफेसर भी हैं. पूर्व सीएम ने बोला कि गरीबों में दलितों की जनसंख्या 90 प्रतिशत है, इसलिए हम संतोष को सीएम बनते देखना चाहते हैं.
बिना किसी का नाम लिए उन्होंने बोला कि मेरा बेटा सीएम बनने के योग्य है. कई लोग बिहार का सीएम बनने की प्रयास कर रहे हैं और मेरा बेटा उन्हें पढ़ना सिखा सकता है. बोला जा रहा है कि उनका इशारा डिप्टी मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की ओर था. उधर, बिहार गवर्नमेंट में मंत्री और जीतनराम मांझी के बेटे संतोष ने बिहार का मुख्यमंत्री बनने की ख़्वाहिश को मन में रखने से इनकार कर दिया.
कानपुर।बिहार के कैमूर जिले की रहने वाली नेहा सिंह राठौर का जन्म 1997 में हुआ था।यूपी चुनाव के दौरान नेहा का 'यूपी में का बा' काफी फेमस हुआ था।विधानसभा चुनाव में यूपी में का बा गाकर चर्चा में आई नेहा सिंह राठौर की शादी यूपी में हुई है। शादी के बाद एक बार नेहा सिंह चर्चा में आ गई हैं। लखनऊ से 21 जून को यूपी के अंबेडकर नगर के हिमांशू सिंह की पत्नी बनकर यूपी की बहू बन गईं हैं।
"यूपी में का बा" फेम भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने एक बार फिर अपने गीत से सरकार को घेरा है। कानपुर देहात में अतिक्रमण हटाने के दौरान मां-बेटी की मौत को लेकर यूपी सरकार से लेकर बाबा के बुलडोजर, रामराज और कानपुर देहात की डीएम की कार्यशैली को सवाल उठाए हैं। कलेक्टर को रंगबाज और ठुमकेबाज कहा है। आइए हम आपको नेहा सिंह राठौर के गीत से अक्षरश: रूबरू कराते हैं…।
बाबा के दरबार बा ढहत घर बार बा माई बेटी का आग मा झोंकत यूपी सरकार बा…। का बा, यूपी में का बा, बाबा के डीएम तो बड़ी रंगबाज बा, कानपुर देहात में ले आइल राम राज बा, बुलडोजर से रौंदत दीक्षित के घरवा आज बा, यही बुलडोजरवा पे बाबा के नाज बा, यूपी में का बा, यूपी में का बा…। कलक्टर ठुमकेबाज बा, सटकल ओकर मिजाज बा, अधिकारी भइले बेलगाम मनमानी के रिवाज बा…। यूपी में का बा, यूपी में का बा…। गरीबन के मडही फुंकवा दा, गुरबन के इलाज बा, लोकतंत्र के नाम पर भइया भइल कोढ़ में खाज बा…। यूपी में का बा, यूपी में का बा…। आग लगी तो हिंदु जरिहैं, जरिहैं मुसलमान बा, ये बाबा यह जाना खाली अब्दुल के मकान बा… यूपी में का बा, यूपी में का बा…।
लोक गीत गायिका नेहा सिंह राठौर ने अपने महज 1 मिनट 9 सेकेंड के गीत में सरकार को जमकर कोसा और उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। यह कोई पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी लगातार वह सरकार के खिलाफ अपने गीत के माध्यम से सरकार की कार्यशैली को कटघर में खड़ा करती आई हैं।
नेहा दरअसल यूपी विधान सभा चुनाव 2022 के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में आई थी। जब उन्होंने यूपी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया था और अपना एक भोजपूरी गाने की वीडियो रिलीज किया था। इसमें योगी आदित्यनाथ पर भी व्यंग स्टाइल में उन्होंने तीखा हमला किया था। उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था से लेकर यहां की रोजगार व्यवस्था पर उन्होंने सवाल उठाया था।
पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के द्वारा शपथ लेते ही बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर हो गए
पटना।बिहार के 41वें राज्यपाल के रूप में राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने शपथ ले ली है। उन्हें हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश ने शुक्रवार को दोपहर बाद करीब साढ़े 12 बजे शपथ दिलाई।इसके पहले बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर के पटना पहुँचने पर जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया। स्टेट हैंगर में बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। गार्ड ऑफ ऑनर के पहले बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर की अगवानी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की तथा फूलों का गुलदस्ता भेंटकर उनका अभिनंदन किया।
हवाई अड्डे पर उनके स्वागत में बिहार विधान परिषद् के सभापति देवेशचन्द्र ठाकुर, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, वित्त, वाणिज्य कर एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर, खान एवं भूतत्व मंत्री रामानंद यादव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री ललित कुमार यादव, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री सुनील कुमार, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अनिता देवी, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री जितेन्द्र कुमार राय, विधि मंत्री शमीम अहमद, सूचना प्रावैधिकी मंत्री मो0 इसराईल मंसूरी, श्रम संसाधन मंत्री सुरेन्द्र राम, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा, बिहार विधान परिषद् में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण मौजूद रहे।
मूलत गोवा के रहने वाले हैं बिहार का राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर
बिहार के महामहिम राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर पणजी , गोवा , पुर्तगाली भारत,सिटिज़नशिप भारत का है।उनका जन्म 23 अप्रैल 1954 (आयु 68) को हुआ है।उनका जीवनसाथी अनघा अर्लेकर है।दोनों के 2 बच्चे है।अर्लेकर बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं। वह 1989 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। वह 1980 के दशक से गोवा भाजपा के सक्रिय सदस्य रहे हैं। उन्होंने विभिन्न पदों पर कार्य किया है जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: महासचिव, भारतीय जनता पार्टी, गोवा प्रदेश। अध्यक्ष, गोवा औद्योगिक विकास निगम। अध्यक्ष, गोवा राज्य अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग वित्तीय विकास निगम। महासचिव, भारतीय जनता पार्टी, गोवा। दक्षिण गोवा अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी।
बिहार के 41 वां राज्यपाल होंगे
हिमाचल प्रदेश के 21 वां राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर को बिहार का राज्यपाल बनाया है।बिहार के 41 वां राज्यपाल होंगे.बिहार के वर्तमान राज्यपाल फागू चौहान को मेघालय का राज्पाल बनाया गया है।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राजेंद्र विश्वनाथ को बिहार का नया राज्यपाल बनाने की स्वीकृति दे दी गई है। वहीं मौजूदा राज्यपाल फागू चौहान को मेघालय का राज्यपाल बनाया गया है। बिहार के साथ देश के कई अन्य राज्यों के भी राज्यपाल बदले गए हैं। राष्ट्रपति की ओर से नए राज्यपालों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी गई है।
गोवा विधान सभा को कागज रहित बनाने का श्रेय
जब मनोहर पर्रिकर को 2014 में केंद्रीय रक्षा मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था, तो अर्लेकर को अगले मुख्यमंत्री के लिए माना गया था, लेकिन पार्टी ने इसके बजाय लक्ष्मीकांत पारसेकर को अगले मुख्यमंत्री के रूप में चुना।उन्हें गोवा विधान सभा को कागज रहित बनाने का श्रेय दिया जाता है, ऐसा करने वाली वह पहली राज्य विधानसभा है।2015 में कैबिनेट में फेरबदल के दौरान उन्हें पर्यावरण और वन मंत्री नियुक्त किया गया था।6 जुलाई 2021 को उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जब बंडारू दत्तात्रेय को हरियाणा का राज्यपाल बनाया गया। राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने 13 जुलाई, 2021 को हिमाचल के नए राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। राजेंद्र अर्लेकर गोवा की राजनीति का अहम चेहरा हैं।भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक सफर शुरू करने वाले अर्लेकर गोवा के विधायक और फिर मंत्री भी रहे हैं।अर्लेकर ने पार्टी को धन्यवाद दिया और कहा कि बीजेपी एक ऐसी पार्टी है जहां प्रत्येक सदस्य के काम को मान्यता दी जाती है।
फागु चौहान अब मेघालय के राज्यपाल
फागु चौहान अब मेघालय के राज्यपाल होंगे।फागू चौहान का कार्यकाल काफी लंबा रहा है।उन्होंने 2019 में राज्य के राज्यपाल के रुप में शपथ लिया था।इस बीच राज्य की राजनीति में बड़ी उठा पटक देखने को मिली।नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़कर महागठबंधन से हाथ मिलाया। इसके साथ ही, विधानसभा चुनाव भी हुए। बता दें कि फागू चौहान बिहार के 40वें राज्यपाल थे।उनका जन्म आजमगढ़ के शेखपुरा में एक जनवरी, 1948 को हुआ था।उनके पिता का नाम खरपत्तु चौहान था। पिछड़ी जाति से आनेवाले फागू चौहान वर्ष 1985 में पहली बार दलित किसान मजदूर पार्टी से घोसी विधानसभा से विधायक बने और यहीं से शुरू हुई उनकी राजनीतिक यात्रा।वो घोसी से लगातार छह बार विधायक रहे। उन्हें उत्तर प्रदेश में पिछड़ी जाती का बड़ा चेहरा माना जाता है।
डॉक्टरों पर कठोर कार्रवाई की जरूरत
चिकित्सा नैतिकता को भूल, गलत तरीके से गर्भाशय निकाल रहे, राज्य के प्राइवेट अस्पतालों पर कार्रवाई की जरूरत : डॉ गौतम कुमार
पटना .बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी,पिछड़ा एवं अति पिछड़ा, मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष डॉ गौतम कुमार ने बताया कि राज्य के हर कोने में छोटे बड़े प्राइवेट अस्पताल खुले हैं. पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण सहित राज्य के तमाम सीमाई इलाकों में 20-25 वर्ष की अवस्था में ही महिलाओं को उल्टा सीधा समझाकर ,ऑपरेशन कर उनका गर्भाशय प्राइवेट अस्पतालों द्वारा निकाल दिया जाता है.
जैसा कि सभी जानते हैं कि ग्रामीण इलाकों में कम उम्र में ही शादी हो जाती है. 20-25 वर्ष की अवस्था में ही उनके कई बाल बच्चे हो जाते हैं. इस दौरान इन इलाकों की महिलाएं सामान्य मासिक गड़बड़ी, ल्यूकोरिया की समस्या को लेकर डॉक्टर के पास जाते हैं, तो वे लोग रुपया के लालच में उल्टा सीधा समझा कर सीधा महिलाओं का ऑपरेशन कर गर्भाशय ही निकाल देते हैं. जबकि सभी डॉक्टर इस बात को जानते हैं कि गर्भाशय और अंडाशय का शरीर में कितना महत्व है. गर्भाशय और अंडाशय से निकलने वाले हार्मोन शरीर को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. और जिन महिलाओं का कम उम्र में गर्भाशय निकल जाता है ,उन्हे किन किन समस्याओं से जूझना पड़ता है.किसी परिवार के खुशहाली के लिए महिलाओं का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है.
सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की जरूरत है. और चिकित्सा नैतिकता को भूल चुके ऐसे डॉक्टर, मेडिकल संस्थान ,और डॉक्टरों पर कठोर कार्रवाई की जरूरत है.
प्रस्तुति समारोह टोक्यो, जापान में गुरुवार, 11 मई, 2023 को होगा। एक पुरस्कार प्रमाण पत्र के अलावा, श्री राजगोपाल पी. वी. को एक पदक और बीस मिलियन येन प्राप्त होंगे.....
भोपाल। बौद्ध संगठन रिशो कोसी काई के पहले अध्यक्ष थे निक्यो निवानो। उनको सम्मान देने लिए निवानों पीस फाउंडेशन में रखा गया है।फाउंडेशन की संपत्ति करीब 4.4 अरब येन है।फाउंडेशन ने अपने प्रथम अध्यक्ष निक्यो निवानो के नाम पर निवानो शांति पुरस्कार शुरू किया है।अबतक 39 लोगों को निवानो शांति पुरस्कार दिया जा चुका है। 2023 का निवानो पीस पुरस्कार एकता परिषद जनसंगठन के संस्थापक रह चुके श्री राजगोपाल पी.व्ही. को दिया जा रहा है।
बताया गया कि निवानों पीस फाउंडेशन के द्वारा किसी विशेष धर्म या क्षेत्र पर अनुचित जोर देने से बचने के लिए पीस फाउंडेशन हर साल दुनिया भर में मान्यता प्राप्त बौद्धिक और धार्मिक कद के लोगों से नामांकन मांगता है। नामांकन प्रक्रिया में, 125 देशों और कई धर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाले करीब 600 लोगों और संगठनों से उम्मीदवारों का प्रस्ताव करने के लिए कहा जाता है। निवानो शांति पुरस्कार समिति द्वारा जांच की गई, जिसे मई 2003 में निवानो शांति पुरस्कार की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर स्थापित किया गया था।
दुनिया के विभिन्न हिस्सों से नौ धार्मिक नेताओं में से, जिनमें से सभी शांति और अंतर-धार्मिक सहयोग के लिए आंदोलनों में शामिल हैं।
अबतक निवानो पीस पुरस्कार पाने वाले हैं-
1. आर्चबिशप हेल्डर पी. कैमरा (1983)
2. डॉ. होमर ए. जैक (1984)
3. श्री झाओ पुचु (1985)
4. डॉ. फिलिप ए. पॉटर (1986)
5. विश्व मुस्लिम कांग्रेस (1987)
6. रेव एताई यामादा (1989)
7. मिस्टर नॉर्मन कजिन्स (1990)
8. डॉ हिल्डेगार्ड गॉस-मेयर (1991)
9. डॉ. ए.टी. अरियारत्ने (1992)
10. नेवे शालोम/वहात अल-सलाम (1993)
11. पाउलो एवरिस्टो कार्डिनल आर्न्स (1994)
12. डॉ. एम. अराम (1995)
13. सुश्री मारी के हसेगावा (1996)
14. कोरीमीला समुदाय (1997)
15. वेनमहा घोसानंद (1998)
16. द कम्युनिटी ऑफ़ सेंटश्एगिडियो (1999)
17. डॉ. कांग वोन योंग (2000)
18. रेव.अबुना एलियास चकोर (2001)
19. रेव.सैमुअल रुइज़ गार्सिया (2002)
20. डॉ. प्रिस्किला एलवर्थी (2003)
21. अकोली धार्मिक नेताओं की शांति पहल (2004)
22. डॉ. हंस कुंग (2005)
23. मानव अधिकारों के लिए रब्बी (2006)
24. धर्म गुरु चेंग येन (2007)
25. हिज रॉयल हाईनेस प्रिंस अल हसन बिन तलाल (2008)
26. रेव कैनन गिदोन बगुमा ब्यामुगिशा (2009)
27. सुश्री इला रमेश भट्ट (2010)
28. श्री सुलक शिवराक्ष (2011)
29. सुश्री रोज़ालिना तुयुक वेलास्केज़ (2012)
30. आर.टी. रेव. डॉ. गुन्नार स्टालसेट (2013)
31. सुश्री देना मरियम (2014)
32. पादरी एस्तेर अबिमिकु इबांगा (2015)
33. शांति निर्माण और सुलह केंद्र (2016)
34. बिशप डॉ मुनीब ए युनान (2017)
35. अदयान फाउंडेशन (2018)
36. डॉ. जॉन पॉल लेडेराच (2019)
37. आदरणीय पोमन्युन (2020)
38. आदरणीय शिह चाओ-ह्वेई (2021)
39. फादर माइकल लैपस्ली, एसएसएम (2022) और
40. में श्री राजगोपाल पी.व्ही. हैं,जिनको 11 मई 2023 को जापान के टोक्यो शहर में एक समारोह में दिया जायेगा।
इस बीच निवानो शांति पुरस्कार समिति की ओर से कहा गया कि 40वीं निवानो शांति की घोषणा करते हुए सम्मानित महसूस हो रहा है। सेवा में उनके असाधारण कार्य के लिए भारत के श्री राजगोपाल पी. वी. को न्याय और शांति का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। अपने देश के सबसे गरीब और सबसे हाशिए पर पड़े लोगों के पक्ष में उनके कार्यों को अंजाम दिया गया। शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीकों के माध्यम से, और समान मानवीय गरिमा की मान्यता के लिए उनका संघर्ष और जाति या लिंग की परवाह किए बिना, हर पुरुष और महिला के समान अधिकार, महान प्रशंसा को प्रेरित करते हैं। उनका विशेष उच्चतम सम्मान हासिल करने वाली उपलब्धियों में समर्पण पर बातचीत करना और इसे सुविधाजनक बनाना शामिल है। गिरोहों का पुनर्वास, गरीबों की सेवा में युवाओं की शिक्षा, और अच्छी तरह से जानते हैं कि गरीबों की प्राथमिक जरूरतें जल, जमीन और जंगल हैं, पर्यावरण की देखभाल के लिए उनकी प्रतिबद्धता। श्री।
न्याय के लिए राजगोपाल के कार्य को संस्थानों के साथ संवाद के माध्यम से भी आगे बढ़ाया जाता है।भूमि हड़पने की घटना का प्रतिकार करना और उचित भूमि सुधार के माध्यम से प्राप्त करनाभूमि का पुनर्वितरण और भूमि के स्वामित्व का असाइनमेंट। आध्यात्मिकता के साधन और अर्थ श्री राजगोपाल की सभी गतिविधियों में गहराई से निहित हैं। होने के नाते सोच और कार्य में गांधीवादी, वे दृढ़ता से सामाजिक क्रिया की यात्रा में विश्वास करते हैं जो एक ष्आंतरिकष् से शुरू होती है।परिवर्तन ”और बाहरी दुनिया तक फैलता है। यह आध्यात्मिकता श्री राजगोपाल के बहुत से मेल खाती है।
उल्लेखनीय संगठनात्मक कौशल, जैसा कि छोटे समूहों में की गई कार्रवाई से संक्रमण से पता चलता है और एकता परिषद जैसे बड़े आंदोलनों के निर्माण के लिए स्वयं सहायता संगठन, जिसमें एक सक्रिय है। 250,000 भूमिहीन गरीबों की सदस्यता और राष्ट्रीय और में हजारों प्रतिभागियों को संगठित करने में सक्षम है।हमारे समय की महत्वपूर्ण समस्याओं पर ध्यान देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मार्च।
श्री राजगोपाल की जीवनी और बायोडाटा इतना समृद्ध है कि इसकी केवल रूपरेखा ही देखी जा सकती है। एक गांधीवादी परिवार के बच्चे, उनका जन्म 6 जून 1948 को केरल राज्य, दक्षिण भारत में हुआ था। वह केवल अपना पहला उपयोग करता हैसार्वजनिक रूप से नाम जाति की घटना से जुड़े होने से बचने के लिए, जो उनकी दृष्टि का एक स्पष्ट संकेत है मानव समानता। उन्होंने सबसे पहले केरल के एक प्रतिष्ठित संगठन से पारंपरिक कला और संगीत में डिप्लोमा प्राप्त किया।और बाद में शिक्षा की नई तालीम प्रणाली, गांधीवादी पद्धति में कृषि इंजीनियरिंग में डिप्लोमा ‘जीवन के लिए शिक्षा।‘ जैसा कि श्री राजगोपाल ने स्वयं कहा था, “क्या खोजने की कोशिश के संदर्भ में यह एक लंबी यात्रा थी। मैं वास्तव में करना चाहता था।वह क्या करना चाहते थे यह 1970 के दशक की शुरुआत में स्पष्ट हो गया जब वे चंबल चले गए ।
मध्य प्रदेश के जिले। वहां उन्होंने स्थानिक हिंसा, अन्याय और गलत का परिणाम पाया जनसंख्या से पीड़ित थे जिसके परिणामस्वरूप गिरोहों (डकैतों) का विकास हुआ था। साथ में श्री राजगोपाल अन्य वरिष्ठ गांधीवादी नेता, एक शांतिदूत बन गए, आत्मसमर्पण और यहां तक कि पुनर्वास भी प्राप्त किया। इस साहसी पहल ने एक और महान महत्व का मार्ग प्रशस्त किया जो इस दौरान विकसित हुआ।
1980 के दशक सामाजिक परिवर्तन के लिए अहिंसक कार्रवाई की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय और राष्ट्रीय युवा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संगठन।
इस 20 साल की अवधि में न्याय और शांति के लिए श्री राजगोपाल की प्रतिबद्धता की परिणति हुई।
हजारों लोगों की भागीदारी के साथ सफल भूमि अधिकार मार्च। कुल मिलाकर आंदोलन के साथ अन्य समूहों के सहयोग से, लगभग 500,000 परिवारों के लिए भूमि अधिकार सुरक्षित किए, ‘वन अधिकार अधिनियम‘पर बातचीत की।2006-2007 में, 2007 और 2012 में अत्यधिक भाग लेने वाले मार्च आयोजित किए, और एक नई भूमि सुधार नीति पर सहमति हुई ।
केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राज्य सरकारों द्वारा। आखिरी और दिल्ली से जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय तक दस देशों के माध्यम से अधिक दूरदर्शी मार्च (स्विट्जरलैंड), पूरे एक साल (अक्टूबर 2019 से अक्टूबर 2020) चलने की योजना है, पूरा नहीं किया जा सका क्योंकि कोविद-19 महामारी का। एकता परिषद के कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों, जिनकी संख्या 2,000 से अधिक थी, ने प्रतिक्रिया व्यक्त की । कई भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू देखभाल और स्वास्थ्य हस्तक्षेप प्रदान करके कोविद -19 की चुनौती महामारी से लड़ो।गांधीवादी आध्यात्मिकता और दर्शन में श्री राजगोपाल की जड़ों ने उनके भीतर सेवा करना स्वाभाविक बना दिया। संस्थान जो महात्मा के सिद्धांतों को लागू करके उनकी स्मृति को बनाए रखते हैं। 1972 में वे इसके सचिव थे।
महात्मा गांधी सेवा आश्रम, 2005 में उन्हें गांधी पीस फाउंडेशन का उपाध्यक्ष चुना गया, और आज भी वे अहिंसा के लिए अंतर्राष्ट्रीय गांधीवादी पहल के प्रबंध न्यासी बने हुए हैं। शांति (आईजीआईएनपी)। श्री राजगोपाल की अहिंसक सामाजिक क्रिया ने भी उन्हें संवाद का आदमी बना दिया है।
निवानों पीस फाउंडेशन के द्वारा दी गयी जानकारी के मुताबिक शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीकों के माध्यम से श्री राजगोपाल पी.व्ही. ने देश के सबसे गरीब और हाशिए पर पड़े लोगों के लिए बिना किसी जाति व लैगिंक भेदभाव के समान मानवीय गरिमा और प्रत्येक महिला व पुरूष के समान अधिकारों की मान्यता के लिए कार्य किया है। यह पुरस्कार जल, जंगल और जमीन पर गरीबों के प्राथमिक अधिकार, पर्यावरणीय सुरक्षा, आत्मसमर्पित बागियों के पुनर्वास, युवाओं में शांति व अहिंसा की शिक्षा के लिए दिया गया है। श्री राजगोपाल पी.व्ही को यह पुरस्कार 11 मई 2023 को जापान के टोक्यो शहर में एक समारोह में दिया जायेगा। इसमें एक पुरस्कार प्रमाणपत्र के अलावा श्री राजगोपाल पी.व्ही को एक पदक और बीस मिलियन येन प्राप्त होंगे। भारतीय रूपए में 1,23,28,024.67 मूल्य है।
निवानों शांति पुरस्कार श्री राजगोपाल पी.व्ही को दिये जाने की घोषणा होने पर एकता परिषद के अध्यक्ष श्री रनसिंह परमार, राष्ट्रीय संयोजक रमेश शर्मा, अनीस कुमार, श्रद्वा कश्यप , उपाध्यक्ष प्रदीप प्रियदर्शी , वरिष्ठ कार्यकर्ता संतोष सिंह, निर्भय सिंह, प्रांतीय संयोजक डोंगर शर्मा, सर्वाेदय के मनीष राजपूत, एकता महिला मंच की कस्तूरी पटेल, निर्मला कुजूर उत्तरप्रदेश के राकेश दीक्षित, द्विजेन्द्र विश्वात्मा छत्तीसगढ के प्रशांत भाई, अरूण कुमार, उड़ीसा के भरत भूषण मणिपुर के रिशि, तमिलनाडू के बीजू, विनोद टीके, केरल के पवित्रन इत्यादि ने श्री राजगोपाल जी को शुभकामनाएं दी।
एकता परिषद के वरिष्ठ सदस्य वियज गोरैया ने सम्माननीय राजा जी को जापान की प्रतिष्ठित संस्था निवानो पीस फाउंडेशन के द्वारा निवानो शांति पुरस्कार से नवाजे जाने पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करेंगे !! कुढ़नी सहित एकता परिषद्, मुजफ्फरपुर के साथियों की ओर से सादर जय जगत !
आलोक कुमार
आलोक कुमार
हमें घटना के बारे में कल सुबह पता चला. मेरी बेटी से साथ अन्याय हुआ है. मैं चाहता हूं कि उसे मौत की सजा मिले. सुनील यादव, निक्की यादव के पिता, झज्जर, हरियाणा.....
आलोक कुमार
नई दिल्ली. सभी लोग जानते हैं कि दिल्ली में श्रद्धा वॉल्कर की हत्या किस तरह से बेरहमी के साथ कर दी गयी थी.श्रद्धा वॉल्कर मर्डर केस के बाद अब निक्की मर्डर केस सुर्खियों में है. यह धोखे की ऐसी कहानी है, जिसे सुनकर दिल दहल जाएगा. साहिल गहलोत नाम के एक शख्स ने अपनी लिव-इन पार्टनर निक्की यादव की हत्या की और उसकी लाश एक ढाबे के फ्रिज में छिपा दी. यह ढाबा, नजफगढ़ के मित्राऊं गांव में था. प्यार, हवस और धोखे की ये कहानी, सुनकर खुद पुलिस भी हैरान है.
दिल्ली में अब एक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. जहां 5 साल तक रिलेशन में रहने के बाद साहिल गहलोत नामक युवक ने अपनी गर्लफ्रेंड निक्की यादव का कार में ही मोबाइल के चार्जर से गला घोंट दिया और उसके शव को अपने ढाबे के फ्रिज में छिपा दिया.
साहिल गहलोत की उम्र अभी महज 24 साल है लेकिन उसके तेवर बेहद खतरनाक निकले. वह अपने लिव-इन पार्टनर के साथ यह उम्मीद दिलाकर रह रहा था कि दोनों शादी कर लेंगे. ऐसा हुआ नहीं. साहिल ने निक्की की हत्या कर दी और लाश को अपने परिवार के ढाबे में फ्रिज के अंदर रख दिया. उसी दिन उसने एक दूसरी लड़की से शादी रचा ली. प्यार और धोखे की इस कहानी पर दुनिया सन्न है.
पुलिस के मुताबिक उसके परिवार ने एक लड़की से उसकी शादी 9 या 10 फरवरी को तय की थी. साहिल ने निक्की यादव को इस शादी के बारे में कुछ भी नहीं बताया था. जब निक्की को अपने पार्टनर की शादी के बारे में पता चला तो वह हैरान रह गई. उसने साहिल गहलोत के साथ झगड़ा किया. जब मामला बढ़ा तो साहिल ने उसे मौत के घाट उतार दिया.
साहिल और निक्की के प्यार की कहानी साल 2018 में दिल्ली के उत्तम नगर से शुरू हुई. साहिल यहां एसएससी एग्जाम की तैयारी करने पहुंचा था. वहीं, हरियाणा के झज्जर की रहने वाली निक्की यादव डॉक्टर बनना चाहती थी और मेडिकल की तैयारी करने उत्तम नगर पहुंची थी. एक ही रोजाना एक ही जगह कोचिंग जाने की वजह से दोनों में फ्रेंडशिप हो गई और मुलाकातें प्यार में बदल गई. कुछ दिन बाद साहिल को ग्रेटर नोएडा के एक कॉलेज में दाखिला मिल गया. निक्की ने भी उसकी कॉलेज में एडमिशन ले लिया. जिसके बाद दोनों की मोहब्बत परवान चढ़ती गई और दोनों कई बार पहाड़ों की ट्रिप पर गए. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने खुलासा किया है कि साहिल गहलोत फॉर्मेसी में ग्रेजुएशन कर रहा है. उसका एक फैमिली ढाबा मित्राऊं गांव में है. वह निक्की यादव के साथ 2018 से ही रिलेशनशिप में था. दोनों द्वारका में साथ में ही रह रहे थे. निक्की यादव की बहन भी कभी-कभी उसके साथ रहने आती थी.
जब निक्की यादव लापता हुई तो एक स्थानीय शख्स ने पुलिस से कहा कि निक्की को उसने कई दिनों से नहीं देखा है. न ही उसका फोन लग रहा है. उसे शक था कि निक्की के साथ कुछ हुआ है क्योंकि साहिल ने किसी और से शादी कर ली है.
निक्की का परिवार हरियाणा के झज्जर में रहता है. उन्हें नहीं पता था कि वह साहिल के साथ रिलेशनशिप में थी. डीसीपी सतीश कुमार की अगुवाई में एक टीम बनी और मितराऊं गांव में साहिल गहलोत के घर पुलिस ने दस्तक दी. पूछताछ हुई तो पता चला कि वहां कोई नहीं है. सबका फोन स्विच ऑफ था. परिवार से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था. कई जगह रेड डाली गई और आखिर कैर गांव से उनकी गिरफ्तारी हुई.
दिल्ली पुलिस ने जब आरोपी साहिल गहलोत से कड़ाई से पूछताछ की तो पता चला कि उसने ही हत्या कर दी है. खुद साहिल ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि 9 से 10 फरवरी के बीच उसने निक्की यादव की हत्या कर दी. साहिल का परिवार उस पर शादी का दबाव बना रहा था. उसने निक्की यादव को इस शादी के बारे में कुछ भी नहीं बताया था. वह उसके साथ रह रहा था. जब निक्की को उसकी शादी के बारे में किसी और से खबर लगी तब जाकर सारे राज खुले.
जिसके साथ निक्की शादी करने के सपने देख रही थी, वही कातिल बन गया. जब उसे खबर लगी कि साहिल किसी और लड़की से शादी कर रहा है, तभी उसने मिलने का प्रेशर बनाया. दोनों के बीच झगड़ा हुआ और रूम से बाहर कपल निकल गया.
दोनों करीब 11 बजे फ्लैट से निकले और कश्मीरी गेट पहुंच गए. उनके बीच एक घंटे तक लड़ाई हुई. बहस इस हद तक बढ़ गई कि उसने डेटा केबल से गला घोंटकर निक्की को मार डाला. हत्या के बाद साहिल घबरा गया. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह कहां जाए. सुबह करीब 5 बजे वह अपने ढाबे पर पहुंचा और लाश को फ्रिज के अंदर छिपा दिया. वह घर चला गया और शादी के फंक्शन की तैयारी करने लगा.
पुलिस से उसने कहा कि वह शादी की तैयारी कर रहा था. ढाबा बंद था और फ्रिज काम नहीं कर रहा था. उसने पुलिस को शव तक पहुंचा भी दिया. लाश पुलिस के कब्जे में है. पोस्टमार्टम के लिए उसे भेज दिया गया है. पुलिस ने एक हुंडई कार जब्त की है, जिसमें रखकर वह लाश लाया था.
बहन को भनक भी नहीं लगी कि निक्की यादव की हत्या हो चुकी थी. वह सोच रही थी दोनों गोवा गए हैं. पुलिस ने यह भी कहा है कि दोनों ने खुदकुशी का प्लान भी बनाया था. गोवा जाकर दोनों खुदकुशी करने वाले थे. साहिल आखिरी वक्त पर गोवा जाने से इनकार कर दिया. 9 फरवरी को गोवा का टिकट बुक था. 9 फरवरी को साहिल की इंगेजमेंट हुई और यह निक्की यादव की जिंदगी का आखिरी दिन साबित हुआ. फ्लैट पर मुलाकात के बाद उसकी कार में हत्या कर दी गई. पुलिस केस की छानबीन में जुटी है.
निक्की यादव के पिता सुनील यादव ने कानून से हत्यारे के लिए मौत की सजा की मांग की है. उन्होंने कहा कि हमें घटना के बारे में कल सुबह पता चला। मेरी बेटी से साथ अन्याय हुआ है। मैं चाहता हूं कि उसे मौत की सजा मिले. वहीं, पुलिस आरोपी को आज कोर्ट में पेश करेगी. माना जा रहा है पुलिस कोर्ट से आरोपी साहिल की रिमांड बढ़ाने की मांग कर सकती है. पुलिस इस मामले की पूरी तह में जाना चाहती है. जिसके लिए आरोपी से अभी और पूछताछ किया जाना जरूरी है.
*वेरीफाई करके ट्यूटर के द्वारा राजन क्लेमेंट साह को ब्लू टिक मिला
* नाउ राजन क्लेमेंट साह इज वेरीफाई
बताया गया कि बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष राजन क्लेमेंट साह ने सोशल मीडिया ट्यूटर में 6 साल से काफी मेहनत कर रहे हैं.जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है. उनका अकाउंट को ट्विटर ने वेरीफाई करके ब्लू टिक कर दिया है.यह दिन राजन क्लेमेंट साह के लिए ऐतिहासिक रहा.वहीं राजन क्लेमेंट साह ट्विटर पर पोस्ट करके ब्लू टिक प्राप्त करने वाले प्रथम बिहारी क्रिश्चियन हो गए हैं.वे 2017 में ट्यूटर में प्रवेश किए.सामाजिक सरोकार को उठाते रहे हैं.1857 Following & 1122 followers हैं.
आलोक कुमार
“ आयुष्मान भारत योजना का लाभ कैसे लें – पूरी जानकारी” Narendra Modi द्वारा शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना भारत की सबसे बड़ी स्वास्थ्य ...