बुधवार, 6 अप्रैल 2022

गेंद जनता के पाले में

 पटना. पटना नगर निगम के पाटलिपुत्र अंचल में  वार्ड नम्बर- 22 ए के वार्ड पार्षद हैं दिनेश कुमार.इस वार्ड पार्षद के पार्षद प्रतिनिधि हैं नीरज कुमार. वार्ड 22 ए में गंगा विहार कॉलोनी है.यहां पर पांच सौ मकान है.इस गंगा विहार के लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं.

कॉलोनी के मो.आरिफ ने समस्याओं का जिक्र करने के दरम्यान कहते हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गरीबों की प्यास बुझाने के लिए 2015 में जब महागठबंधन के साथ सरकार बनाई थी, उस समय उन्होंने सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल के माध्यम से शुद्ध पेयजल मिल सके इसकी शुरुआत की थी. इस योजना को शुरू हुए 7 साल से अधिक हो गए, लेकिन अभी भी यह योजना पूरी तरह से धरातल पर नहीं दिख नहीं रही है. राजधानी पटना में ही यह योजना दम तोड़ रही है.

उन्होंने कहा कि इस बहुआंकाक्षी सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल पहुंचाने का प्रयास 2016 में गंगा विहार कॉलोनी में भी किया गया.आईटीआई छात्रावास के बगल में जलापूर्ति केंद्र सह जलमिनार से पाइप का संयोजन किया गया.पॉश एरिया फेयरफील्ड कॉलोनी में पाइप बिछाकर गंगा विहार कॉलोनी में अंत किया गया.

उन्होंने कहा कि जलापूर्ति चालू होने के बाद हर घर नल का जल पहुंचने से लोग खुश थे.यह ड्रीम प्रोजेक्ट 2017 तक चला.इसके बाद प्रोजेक्ट का पानी आना बंद हो गया .इससे लोग नाखुश हो गये.साल में एक बार मटरगश्ती करने वाले वार्ड पार्षद दिनेश कुमार से शिकायत की गयी.तब उन्होंने फेयरफील्ड कॉलोनी शुरू और गंगा विहार कॉलोनी अंत पाइप खोलकर जांच कराएं. जांचोपरांत पता चला कि पाइप में पानी बहाव हो रहा है,परंतु घरों तक नहीं पहुंच रहा है.पांच साल से परेशान हैं.

रोज़ा तोड़वाने के समय के पूर्व मो.नौशाद ने कहा कि शुद्ध पेयजल के साथ जल निकासी की भी समस्या है.बरसात
के दिनों में दु:ख बढ़ जाता है.ठेंहुना भर पानी का भराव हो जाता है.इसी में महिला,पुरूष,बच्चों के साथ पालतू जानवरों को भी आवाजाही करने को बाध्य होते हैं.

वहीं लोग कहते हैं साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन के द्वारा तीन  खंभा गाढ़कर कर्तव्य पूरा कर लिया है. दो साल के बाद भी तार तानकर उर्जा घरों तक पहुंचाने का कार्य नहीं किया जा रहा है.बांस के सहारे तार लाया गया है.

जानकार लोगों का कहना है कि पटना नगर निगम के वार्ड पार्षदों को एक करोड़ विकास कार्य करने को मिला है.पर वार्ड पार्षद दिनेश कुमार गंगा विहार कॉलोनी में विकास कार्य करना ही नहीं चाहते हैं.इससे लोग आक्रोशित हैं.

बिहार में सीएम नीतीश (CM Nitish) का ड्रीम प्रोजेक्ट सात निश्चय योजना (Saat Nischay Yojana) के तहत 'हर घर नल का घर योजना ' के क्रियान्वयन में लेट लतीफी के कारण अभी तक कई वार्डों में पाइप भी नहीं बिछाए गए हैं. कई वार्डों में पाइप बिछाए गए तो उसमें से पानी ही गायब है. ऐसे में पानी के लिए लोग तरस रहे हैं.

इस संदर्भ में 22 ए के भावी प्रत्याशी उमेश कुमार कहते हैं कि वर्त्तमान वार्ड पार्षद दिनेश कुमार जन उम्मीदों पर खड़ा नहीं उतर रहे हैं. उनका कहना है कि अब गंगा विहार कॉलोनी के लोगों को सोचना होगा. उनका विकास कौन करेगा ? कौन पटना नगर निगम के द्वारा प्रदत राशि का उपयोग जन विकास कार्य में लगा सकता है .गेंद जनता के पाले में है . कुछ दिनों के बाद ही चुनाव होने वाला है .

आलोक कुमार

सोमवार, 4 अप्रैल 2022

क्रिस्म मास में पुरोहित लेते है वादा साथ-साथ रहने का

 


पटना.प्रभु येसु ख्रीस्त ने अंतिम ब्यालू के समय बलिदान चढ़ाने की शक्ति दी, जब उसने रोटी और दाखरस को स्वयं के शरीर और रक्त में परिवर्तित करते हुए कहा, 'यह मेरी स्मृति में किया करो.' इन शब्दों के द्वारा उसने उन्हें खीस्तयाग अर्पित करने को कहा. बारह प्रेरित प्रथम धर्माध्यक्ष और पुरोहित थे.वे स्वयं महापुरोहित येसु ख्रीस्त द्वारा अभिषिक्त किए गए थे.प्रेरितों के कार्यकलाप और धर्मग्रंथ के दूसरे भागों में हम पाते हैं कि पुरोहिताई के पवित्र संस्कार द्वारा उन्होंने दूसरे व्यक्तियों को धर्माध्यक्ष और पुरोहितों की शक्ति प्रदान की.केवल धर्माध्यक्षों और पुरोहितों के पास ही वह शक्ति है, जो ख्रीस्त ने बारह प्रेरितों को प्रदान की थी.

पुण्य बृहस्पतिवार 14 अप्रैल को

हर साल आर्चबिशप अथवा स्थानीय बिशप क्रिस्म मास का आयोजन करते है.यह आयोजन पवित्र सप्ताह के दौरान अंतिम व्यालू के दिन पवित्र बृहस्पतिवार के दिन होता है.इस साल रोम में 14 अप्रैल पुण्य बृहस्पतिवार को प्रातः 9.30 बजे से संत पेत्रुस महागिरजाघर में किस्म मास होगा, जिसमें संत पापा फ्रांसिस, कार्डिनलों, महाधर्माध्यक्षो और पुरोहितों (रोम के धर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी) के साथ खीस्तयाग अर्पित करेंगे.

प्रेरितों की रानी ईश मंदिर कैथेड्रल,कुर्जी में
बता दें कि किस्म मास करने में सहुलियते दी गयी है.आप ईस्टर पर्व के पूर्व आयोजित कर सकते हैं. इसके कारण राजधानी पटना के कुर्जी में स्थित पटना महाधर्मप्रांत का प्रेरितों की रानी ईश मंदिर कैथेड्रल में क्रिस्म मास 07 अप्रैल को शाम 05 बजे से होगा.महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबस्टियन कल्लूपुरा,  विकर जनरल,पल्ली पुरोहितों (पटना के महाधर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी) के साथ खीस्तयाग अर्पित करेंगे.

किस्म मास में भाग लेने हैं सुदूर ग्रामीण चर्च के पुरोहित
सुदूर ग्रामीण और शहरी चर्च के महाधर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी पुरोहित किस्म मास में भाग लेने हैं.इन लोगों का जमावड़ा प्रेरितों की रानी ईश मंदिर कैथेड्रल में होगा.महाधर्माध्यक्ष सेवस्टियन कल्लूपुरा के नेतृत्व में किस्म मास होगा.किस्म मास में तीन तरह के पवित्र तेल पर आशीष दी जाती है. एक बीमारों के तेल ,द्वितीय केटक्यूमेन तेल और तीसरा क्रिस्म तेल है.इसमें गुल मेहँदी Balsam डाला जाता है. बिशप स्वामी के द्वारा आशीष दी जाती है.अगर यहीं विशेष कार्यक्रम पुण्य बृहस्पतिवार को क्रिस्म मास होगा,तो सुदूर ग्रामीण और शहरी चर्च के पुरोहितों को वापस जाकर अपने पल्ली में   धार्मिक कार्यक्रम करने में दिक्कत होगी. सुबह हो या शाम पुरोहित परेशान ही परेशान हो जाते .इसके चलते पवित्र बृहस्पतिवार को विशेष समारोह नहीं रखा जाता है.

किस्म मास के दौरान सभी पुरोहित अपनी मन्नतों को दोहराते हैं
मुख्य याजक बिशप स्वामी के सामने महाधर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी सभी पुरोहित अपनी मन्नतों को दोहराते हैं और बिशप के प्रति अपनी आज्ञाकारिता का वादा करते हैं.यह सभी पुरोहितों का एक महापर्व है.इस दिन येसु ख्रीस्त पुरोहिताई संस्कार को ठहराया था.इसलिए इसे एक बड़े समारोह के रूप में मनाते हैं .

क्रिस्म मास के दौरान आशीर्वाद वाले नये तेल पल्ली ले जाते
बता दें कि क्रिस्म मास के दौरान हर पल्ली पुरोहितों को देने के लिए पर्याप्त नए तेल का आशीर्वाद दिया जाता है. पुरोहित पवित्र तेलों को अलग-अलग पैरिशों में ले जाते है, जहाँ वे उस वर्ष के दौरान उपयोग के लिए व्यवहार में लाया जाता है.यद्यपि बिशप प्रत्येक बपतिस्मा या अपने धर्मप्रांत में पुष्टिकरण पर शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो सकते है, वह अपने द्वारा आशीर्वादित पवित्र तेलों के माध्यम से प्रतीकात्मक रूप से उपस्थित हो जाते हैं.बीमार व्यक्तियों के चंगाई के तेल, नए दीक्षार्थियों और बपतिस्मा के लिए तेल और तीसरा पवित्र विलेपन का या पवित्र अभिषेक के लिए तेल की बिशप और अन्य पुरोहितों द्वारा आशीष किया गया.

जैतून का तेल विशेष पात्र में रखा जाता है
वचन की आराधना के बाद, तेलों का आशीर्वाद होता है. एक औपचारिक जुलूस में, जैतून का तेल विशेष कलशों में आगे लाया जाता है.बीमारों का तेल पहले पेश किया जाता है, फिर कैटेचुमेन्स का तेल, और अंत में पवित्र क्रिस्म के लिए तेल. बिशप व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक तेल पर प्रार्थना करता है और आशीर्वाद देता बिशप जैतून के तेल के साथ बालसम के पौधे से तेल मिलाता है, पवित्र आत्मा की उपस्थिति को दर्शाने के लिए मिश्रित तेल पर सांस लेता है, और फिर इसे पवित्र करने के लिए प्रार्थना करता है.एक बार इस तरह से आशीर्वाद देने के बाद, क्रिस्म और अन्य तेल अब साधारण मलहम नहीं रह गए हैं.इसके बजाय, वे चर्च के लिए भगवान से एक पवित्र, कीमती उपहार हैं, जो शुद्धिकरण और मजबूती, उपचार और आराम, और पवित्र आत्मा की जीवन देने वाली कृपा को दर्शाता है.    
                  
आलोक कुमार

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