मंगलवार, 22 मार्च 2022

पटना महाधर्मप्रांत के बक्सर और पूर्णिया धर्मप्रांत में बिशप का पद रिक्त है

 

   *   अगर रोम में रहने वाले महामहिम पोप के द्वारा किसी योग्य पुरोहित को मोनसिन्योर बनाया जाता  


रोमन कैथोलिक में अगर किसी बिशप के रिटायरमेंट होने के पहले वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती है तो ऐसी हालात पर पोप के द्वारा वहां पर रिटायर होने वाले बिशप को ही प्रेरितिक प्रशासक नियुक्त कर दिया जाता है.इन दिनों पटना महाधर्मप्रांत के बक्सर और पूर्णिया धर्मप्रांत में बिशप का पद रिक्त है.दोनों धर्मप्रांतों में रोम के द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी.जानकार लोगों का कहना है कि पटना महाधर्मप्रांत के गठन के बाद बिशप के रिटायर होने के पूर्व रोम के द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी है. बेतिया धर्मप्रांत में वयोवृद्ध फादर लौरेंस पास्कल को प्रेरितिक प्रशासक बनाकर रखा गया.इसके बाद भागलपुर से पीटर सेबास्टियन गोबियए को बिशप पद पर बैठाया गया.इसके पहले मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत में फादर विलियम डिसूजा को प्रेरितिक प्रशासक बनाया गया.उसके बाद फ्रांसिस काजीटेन को बिशप बनाया गया.आजतक पटना महाधर्मप्रांत में रोम के द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में किसी योग्य पुरोहित को मोनसिन्योर नहीं बनाया गया.इस समय सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष विलियम डिसूजा को बक्सर धर्मप्रांत का प्रेरितिक प्रशासक बनाकर रोम के द्वारा काम निकाला जा रहा है.इस तरह बिशप पद पाने वाले पुरोहितों की उम्मीदों पर वज्रपात हो रहा है.


आलोक कुमार

सोमवार, 21 मार्च 2022

बीजेपी में दूरदूर जाकर कार्य व पदभार संभालेंगे


 आज राजन क्लेमेंट साह का हैप्पी बर्थडे है. जन्मदिन की शुभकामनाएं और बधाई देने वालों में मंत्री रेणु देवी, विधायक डाॅ.संजीव चौधरी,बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रांतीय अध्यक्ष तुफैल कादरी आदि ने दी है

पटना.आज राजन क्लेमेंट साह का हैप्पी बर्थडे है. जन्मदिन की शुभकामनाएं और बधाई देने वालों में बिहार की उपमुख्यमंत्री मंत्री रेणु देवी, विधायक डाॅ.संजीव चौधरी,,बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रांतीय अध्यक्ष तुफैल कादरी आदि ने दी है. 

आप बिहारी ईसाई होने के बावजूद भी भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण किये हैं.आपके शानदार करतब के कारण ही भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष पद काबिज हैं.ईसाइयों के बीच पैठ होने के कारण चुनाव के समय अतिरिक्त दायित्व देकर झारखंड और गोवा भेजे गये.वहां आपने बेहतर दायित्व निभाया.

माननीय प्रधानमंत्री के जन्मोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम को सफलता से मनाने के लिए पश्चिम चम्पारण के प्रभारी बनाये गये.वहां पर बीजेपी के झंडा मजबूती से लहराया.

आज जन्मदिन के दिन राजन क्लेमेंट साह   सोशल मीडिया में छा गये हैं.शुभचिंतक व आम से खास लोग राजन क्लेमेंट साह को ईसाइयों का नेता घोषित कर चुके हैं.आशा करते हैं कि बीजेपी में दूरदूर जाकर कार्य व पदभार संभालेंगे.

आलोक कुमार

रविवार, 20 मार्च 2022

दुनिया के सभी धर्माध्यक्ष रूस और यूक्रेन को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित करेंगे

पटना.संत पापा फ्राँसिस रूस और यूक्रेन के बीच 25 दिनों से जारी यु़द्ध को लेकर परेशान हैं.संत पापा फ्राँसिस ने 13 मार्च को देवदूत प्रार्थना के उपरांत पूरी कलीसिया को शांति के लिए प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित किया था.‘ मैं सभी धर्मप्रांतों और धार्मिक समुदायों से शांति के लिए प्रार्थना के अपने समय को बढ़ाने के लिए आमंत्रित करता हूँ.‘ और बुधवार, 23 फरवरी को आम दर्शन समारोह में उन्होंने यूक्रेन में शांति के लिए राख बुधवार 2 मार्च को प्रार्थना और उपवास के दिन का आह्वान करते हुए कहा था, ‘शांति की रानी दुनिया को युद्ध के पागलपन से बचाए. 


अब संत पापा फ्राँसिस ने पूरी दुनिया के धर्माध्यक्षों को अपने पुरोहितों के साथ रूस और यूक्रेन को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पण धर्मविधि और शांति के लिए प्रार्थना में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है.25 मार्च शनिवार की शाम 5 बजे से संत पेत्रुस महागिरजाघर में पश्चात की धर्मविधि समारोह में शामिल होने को कहा है.दुनिया के सभी धर्माध्यक्ष रूस और यूक्रेन को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित करेंगे.

बताया जा रहा है कि शुक्रवार, 25 मार्च की शाम 5 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर में संत पापा फ्राँसिस पश्चताप की धर्मविधि समारोह के दौरान रूस और यूक्रेन को माता मरियम के निष्कलंक हदय को समर्पित करेंगे. उसी दिन उसी समय संत पापा के दानदाता कार्डिनल कोनराड क्रेजेवस्की, फातिमा में रूस और यूक्रेन को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित करेंगे. उसी दिन दुनिया के सभी धर्माध्यक्ष रूस और यूक्रेन को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित करेंगे.

फातिमा में 13 जुलाई 1917 को माता मरिया ने दर्शन देकर अपने निष्कलंक हृदय में रूस का समर्पण और पहले शनिवार को पश्चताप की धर्मविधि का अनुष्ठान करने के लिए कहा था.अगर यह नहीं किया गया तो रूस ‘दुनिया भर में अपनी गलतियों और युद्धों को फैलाएगा, कलीसिया में उत्पीड़न को बढ़ाएगा.अच्छे लोग शहीद हो जायेंगे, संत पापा को बहुत कुछ भुगतना होगा, विभिन्न राष्ट्रों को नष्ट कर दिया जाएगा.‘

फातिमा में माता मरिया के दर्शन देने के बाद माता मरियम के बेदाग दिल को समर्पण के विभिन्न धर्मविधि सम्पन्न किये गये. संत पापा पियुस बारहवें ने 31 अक्टूबर 1942 को पूरी दुनिया को समर्पित किया और साम्यवादी शासन में रहने के लिए मजबूर ईसाइयों की कठिन स्थिति को देखते हुए 7 जुलाई 1952 को प्रेरितिक पत्र ‘साक्रो वेर्जेंटे आन्नो’ में उन्होंने रूस के लोगों को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित किया.

21 नवंबर 1964 को संत पापा पॉल षष्टम ने द्वितीय वाटिकन परिषद के धर्माध्यक्षों की उपस्थिति में माता मरिया के निष्कलंक हृदय को रूस के समर्पण को नवीनीकृत किया.संत पापा जॉन पॉल द्वितीय  ने 7 जून 1981 को संत मरिया मेजर महागिरजाघर में पेंतेकोस्त के मिस्सा समारोह पर मनाए जाने वाले,’समर्पण धर्मविधि’ के लिए एक प्रार्थना की रचना की.जून 2000 में, परमधर्मपीठ ने फातिमा के रहस्य के तीसरे भाग का खुलासा किया.

उस समय, विश्वास एवं धर्म सिद्धांत के लिए बने परमधर्मपीठीय सम्मेलन के सचिव, तत्कालीन महाधर्माध्यक्ष तर्सिसियो बर्तोने ने बताया कि सिस्टर लूसिया ने 1989 के एक पत्र में व्यक्तिगत रूप से पुष्टि की थी कि समर्पण का यह गंभीर और सार्वभौमिक धर्मविधि माता मरिया की इच्छा के अनुरूप है. दर्शन देखने वाली सिस्टर लूसिया ने लिखा, ‘जैसा कि माता मरियम ने 25 मार्च 1984 को जो कहा था, सबकुछ उसी के अनुरुप किया गया.‘और अब इस वर्ष, 25 मार्च को, संत पापा फ्राँसिस दुनिया भर के धर्माध्यक्षों के साथ रूस और यूक्रेन को माता मरयम के बेदाग हृदय को समर्पित करेंगे.

आलोक कुमार


स्थानीय चर्चों को पुनर्जीवित करने के लिए धर्मसभा का उपयोग किया है


पटना.प्रेरितों की रानी ईश मंदिर को पटना प्रोविंश के द्वारा जेसुइट पुरोहितों के द्वारा संचालित किया जाता है.यहां पर हाल के दिनों में पुरोहित बने फादर राजीव रंजन पदस्थापित हैं.पटना प्रोविंश के फादर प्रोविंशियल डोनाल्ड जे मिरांडा ने फादर राजीव रंजन को अतिरिक्त कार्यभार दिये हैं.वे युवा अपोस्तोलेट के सदस्य हैं.युवा अपोस्तोलेट का सभापति फादर प्रकाश एंथोनी हैं. फादर प्रकाश एंथोनी और फादर राजीव रंजन ने मिलकर धर्म महासभा पर शानदार ढंग से संगोष्ठी आयोजित की.इसमें कुर्जी पल्ली के 30 युवाओं ने हिस्सा लिये. 

धर्म महासभा को तीन सत्र में बांटा गया था. प्रथम सत्र में फादर अनील ने धर्म महासभा पर विचार व्यक्त किये.द्वितीय चरण में फादर एंथोनी और फादर राजीव रंजन ने मिलकर टीम वर्क पर विचार व्यक्त किये.तृतीय चरण में सामूहिक चर्चा की गयी और कार्ययोजना बनायी गयी. कार्ययोजना पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई.अपने जीवन को कैसे सवारना है.करियर गाइडेंस और पल्ली के उनकी जिम्मेवारी के बारे में बताया गया.

बताते चले कि धर्म महासभा आधिकारिक नाम हैः ‘एक धर्मसभा के लिए चर्च‘ कम्युनियन, भागीदारी और मिशन‘ संत पापा फ्राँसिस द्वारा पूरे चर्च को इस ‘धर्मसभा प्रक्रिया‘ के लिए बुलाए जाने से पहले ही, दुनिया भर के कई बिशपों ने अपने स्थानीय चर्चों को पुनर्जीवित करने के लिए धर्मसभा का उपयोग किया है.इसके आलोक में युवाओं को दिशानिर्देश देने के संगोष्ठी का आयोजन किया गया है.

फादर राजेश जेकब भाजू ने पवित्र मिस्स अर्पित किये. मिस्सा के बाद भोजन किया गया.इसके बाद संगोष्ठी में शामिल युवाओं को तरूमित्र और संत जेवियर काॅलेज का भ्रमण करवाया गया.

आलोक कुमार





 

ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस के भारत आगमन की 137 वीं वर्षगांठ और वार्षिक तीर्थयात्रा आयोजित

 राँची .आज  हुलहुण्डू पल्ली के जमगाई गाँव में  राँची में ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस  के भारत आगमन की 137 वीं वर्षगांठ और वार्षिक तीर्थयात्रा आयोजित की गयी.सभी पल्लीवासियों को  विशेष रूप से पल्ली पुरोहित और युवा साथियों को आज के सफल संचालन के लिए बहुत - बहुत  बधाई दी गयी.


ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस  ने 19 मार्च 1885 ई. को जमगाई गाँव में पाँव रखा था और वहीं से छोटानागपुर के लोगों की सेवा करना आरम्भ किया था.उन्होंने अपना सारा जीवन छोटानागपुर के गरीब और कमजोर लोगों की मदद करने में बिताया. उनकी स्मृति में हर साल जमगाई में ‘लीवन्स डे‘ मनाया जाता है.

राँची महाधर्मप्रांत महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एवं सह अनुष्ठाता सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेन्स ने ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवन्स को श्रद्धांजलि देते हुए माल्यार्पण किया एवं मशाल प्रज्वलित किया. तत्पश्चात् फादर कॉन्सटंट लीवंस  की संक्षिप्त जीवनी प्रस्तुत की गई। परमप्रसाद के बाद ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस  की धन्य घोषणा के लिए विशेष प्रार्थना की गई.महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एस.जे. ने अपने संदेश में कहा कि फादर लीवन्स कोन्सटण्ट ने जो विश्वास का बीज 137 साल पहले बोया था उसे हमें आगे बढ़ाना है और उसे जीने का प्रयत्न करना है. उन्होंने हमारे पूर्वजों को जमीनदारों के चंगुल से छुड़ाया और सी.एन.टी एवं एस.पी.टी एक्ट को लागू करवाने में भी उनकी अहम भूमिका रही है.

राँची के सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेन्स ने ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंन्स एवं ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त की संत घोषणा की प्रक्रिया की जानकारी दी और कहा कि उनकी संत घोषणा के लिए हर घर, समाज और पल्ली में प्रार्थना करना है.

फादर कॉन्सटंट लीवन्स ईश्वर के प्रेम की आग से प्रज्वलित थे. उनमें ईश्वर की शक्ति को स्पष्ट देखा जा सकता है. उनका जन्म 10 अप्रैल 1856 को बेल्जियम के मूरसेलेदे में हुआ था.मानव सेवा से प्रेरित होकर उन्होंने 1878 में येसु समाज में प्रवेश किया और 1880 में मिशनरी बनकर भारत आये. 1883 में पुरोहित अभिषेक के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए पढ़ाई में व्यतीत किया उसके बाद 1885 में छोटानागपुर आये.छोटानागपुर जो आज झारखंड कहलाता है उन दिनों वहाँ के लोग जमीनदारों के चंगुल में थे एवं गरीबी, अशिक्षा, अन्याय, अत्याचार आदि कई विकट समस्याओं का सामना कर रहे थे.फादर लीबंस ने छोटनागपुर में साल सालों की अपनी प्रेरिताई में दिन-रात मेहनत कर बहुत सारे लोगों को जमीनदारों के चंगुल से छुड़ाया और उनके बीच ख्रीस्त की ज्योति जलायी.


कठोर परिश्रम और त्याग करने के कारण वे अधिक दिन छोटानागपुर में नहीं रह पाये और 7 नवम्बर 1893 को 37 साल की उम्र में बेल्जियम में उनका निधन हो गया। उनके पवित्र अवशेष को 7 नवम्बर 1993 को राँची लाया गया तथा संत मरिया महागिरजाघर में स्थापित किया गया है.

फादर कॉन्सटंट लीवंस का छोटानागपुर पदार्पण और हमारे पूर्वजों का मनफिराव एक ऐतिहासिक घटना है। बेल्जियम मिशनरी येसु संघी फादर कोन्सटंट लीवंस छोटानागपुर में बहुत कम समय के लिए अपनी मिशनरी सेवाएं दी। उनकी समर्पित मिशनरी सेवा और सुसमाचार प्रचार का प्रभाव था कि सात साल में 80 हजार लोगों ने मनफिराव कर ख्रीस्त को अंगीकार किया, इसलिए उन्हें छोटानागपुर के प्रेरित भी कहा जाता है.   

हुलहुण्डू पल्ली के जमगाई गाँव में इस मौके पर संत अन्ना की पुत्रियाँ, उर्सुलाईन की धर्मबहनें, हुलहुण्डू के पल्ली पुरोहित फादर हुबेर्तुस बेक, काथलिक सभा के सभापति राजन तिरू, प्रचारक साइमन तिरू, अनिमा, सि. एमरेंसिया और भारी संख्या में विभिन्न धर्मसमाजों के पुरोहित, धर्मबंधु, धर्मबहनें और हजारों की संख्या में विश्वासी उपस्थित थे. कार्यक्रम का समापन प्रीति भोज से किया गया.

आलोक कुमार  


शनिवार, 19 मार्च 2022

फादर बर्टी पौल का पुरोहिताभिषेक का 28 वां पावन दिवस

 

पटना.आज बालक येसु के पालक पिता संत जोसेफ का पर्व है.यह पर्व माता कलीसिया ने द्योषित की है.आज हमलोग माता मरियम के दुल्हे तथा येसु के पालक पिता संत जोसेफ को याद करते हैं.इसी तरह उत्तर बिहार के ईसाई समुदाय फादर बर्टी पौल को याद करते हैं.फादर का जन्म चखनी पल्ली में हुआ है.यह बगहा एक प्रखंड में पड़ता है.बेतिया धर्मप्रांत की चखनी पल्ली में जन्म लेने वाले फादर बर्टी पौल का पुरोहिताभिषेक का 28 वां पावन दिवस है.फादर बर्टी का पुरोहिताभिषेक 19 मार्च 1994 में हुआ था.मौसम के 28 वसंत ऋतु देख चुके फादर कहते हैं कि मेरे लिए येसु से दुआ करें ताकि मैं पुरोहिताई जीवन को पवित्रता के साथ जीते हुए ईश्वरीय योजना में आगे बढ़ते हुए मानव सेवा करता रहूं.

बता चले कि चखनी पल्ली में रहने वाले अनीश साह भी हैं.पटना जेसुइट प्रोविंश में जाने वाले प्रथम व्यक्ति हैं.हालांकि रायपुर महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप  विक्टर हेनरी  ठाकुर और पटना महाधर्मप्रांतीय पुरोहित फादर चार्ली चखनी पल्ली के ही हैं.यहां से कई सिस्टर अलाकोक भी धर्मसमाज में हैं.एक डिकेन भी हैं. इसी तरह चखनी पल्ली से ब्रदर जोसेफ साह थे. ब्रदर जार्ज ठाकुर, और फादर चार्ली साह,फादर भिनसेट ‌?,फादर लूईस पीटर साह‌ फादर राजेश ठाकुर,फादर बर्टी पौलख् फादर अमितख् ‌फादर दीपक ‌फादर रंजित ठाकुर और आर्चबिशप विक्टर हेनरी ठाकुर चखनी पल्ली से धर्म समाज और धर्मप्रान्त के लिए सेवा दे रहे हैं.

आलोक कुमार

शुक्रवार, 18 मार्च 2022

पुरोहिताभिषेक का शानदार पचास साल मुबारक हो पुरोहित

पटना.विख्यात येसु समाज के पुरोहित हैं फादर हेनरी रेबेलो. अभी 84 साल का हैं. उनका जन्म 28 अक्टूबर 1938 हुआ था. जब 21 साल के थे,तब उन्होंने येसु समाज में 8 जून 1959 में प्रवेश किए. अभी प्रवेश के 63 साल हो गया. जब वे 34 साल के थे,तब उनका पुरोहिताभिषेक 18 मार्च 1972 को हुआ.अभी 50 साल हो गया. आज फादर हेनरी रेबेलो का स्वर्णिम दिवस है.भला क्यों हो उन्होंने येसु समाज के पुरोहित के रूप में 50 वर्ष पूरा कर लिये हैं.आज 18 मार्च 2022 को पचास साल हो गया.पुरोहिताभिषेक का शानदार पचास साल मुबारक हो. 

उत्तर बिहार के ईसाइयों का उद्गम स्थल बेतिया पल्ली के पल्ली पुरोहित थे फादर हेनरी रेबेलो.कई जगहों पर शानदार कार्य करने के बाद कुर्जी पल्ली के भी पल्ली पुरोहित थे.जब पल्ली पुरोहित थे,तब विश्व विख्यात संत विंसेंट डी पौल सोसाइटी की स्थापना में कुर्जी पल्ली में की थी.संत विंसेंट डी पौल समाज के आध्यामिक सलाहकार बनकर सोसाइटी को आगे बढ़ाने का काम किया.कोलकाता के अधीन सोसाइटी रहने के बाद पटना पार्टिकुलर काउंसिल बनने के बाद सेंटल काउंसिल बना.इसके बाद आज विभिन्न पल्लियों में संचालित है.शानदार पचास वर्ष पूरा करने वाले फादर हेनरी रेबेलो शिवाजी नगर में स्थित फातिमा माता सुसमाचार केन्द्र में करिश्माई कार्य में जुड़े रहे. 

सादगी जीवन बिताने में माहिर थे. मिलनसार स्वाभाव थे. किसी तरह के विवादों को प्रार्थना के बल पर सुलझाने में विश्वास रखते थे.पल्लियों में काम करते समय किसी पल्लीवासी से विवाद नहीं हुआ.इस तरह के पल्ली पुरोहितों से पुरोहितों को सीखना चाहिए. किसी को टारगेट बनाकर पल्ली में काम नहीं करना चाहिए.


आलोक कुमार

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