शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025

कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की

 खगड़िया जिला से विभिन्न दलों के नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की

पटना . आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम की उपस्थिति में खगड़िया जिले के राजद के पूर्व जिलाध्यक्ष कुमार रंजन, राजद के मौजूदा प्रखंड अध्यक्ष  संजय कुशवाहा समेत सैकड़ों की संख्या में विभिन्न दलों से जुड़े नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पार्टी की विचारधारा में आस्था व्यक्त करते हुए
कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की.

      कांग्रेस पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं में जदयू व्यवसायिक प्रकोष्ठ के प्रखंड अध्यक्ष  सह पंचायत समिति चौथम गोविंद कुमार, पंचायत समिति सदस्य चौथम सुमन कुमार चौरसिया .जदयू नेता सन्नी गुप्ता, पैक्स अध्यक्ष निखिल कुमार, पूर्व मुखिया रामाकांत दास, स्वराज इंडिया के संयोजक संजय गुप्ता, वार्ड पार्षद आकाश राज पासवान, स्वराज इंडिया के अभिमन्यु साह, राजद के पूर्व मुखिया रमाकांत दास, राजद के पूर्व वार्ड सचिव कैलाश कुमार तांती, संजय कुमार गुप्ता, पवन कुमार चौरसिया, अजमत अली, आशुतोष सक्सेना, रामानुज ठाकुर, संजीत कुमार, राज कुमार, अभिमन्यु कुमार, संजय कुमार, मुस्तकीम, मो0 सोहिल, आकाश राज, शाहबुद्दीन,राहुल चन्द्र सिंह, , वीआईपी नेता बेलदौर राजेश कुमार महतो, मनोज पासवान, सिन्टू यादव प्रमुख रहे.

    इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने पार्टी में शामिल सभी  साथियों का कांग्रेस परिवार में स्वागत करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी सामाजिक न्याय, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करती रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि खगड़िया से जुड़े ये सभी साथी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

     राजेश राम ने कहा कि आज देश और राज्य में जिस तरह लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है, ऐसे समय में कांग्रेस की विचारधारा और भी प्रासंगिक हो गई है.जनता के अधिकारों, किसानों, मजदूरों, युवाओं और वंचित वर्गों की आवाज़ को मजबूती से उठाने का कार्य कांग्रेस ही कर सकती है.

    कांग्रेस पार्टी में शामिल नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेतृत्व में विश्वास जताते हुए कहा कि वे पार्टी की नीतियों एवं कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने और संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे.

  इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव डॉ चंदन यादव, बेलदौर के कांग्रेस प्रत्याशी मिथिलेश कुमार निषाद , प्रवक्ता असित नाथ तिवारी,  खगड़िया जिला अध्यक्ष अविनाश कुमार अविनाश, रंजीत कुमार  सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित रहे.


आलोक कुमार

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गुरुवार, 18 दिसंबर 2025

ईशान किशन की टी20 बल्लेबाजी

 


ईशान किशन की टी20 बल्लेबाजी

पटना . एक आक्रामक प्रतिभा का उदय भारतीय क्रिकेट के युवा सितारों में ईशान किशन का नाम हमेशा आक्रामकता और विस्फोटक बल्लेबाजी का पर्याय रहा है. बाएं हाथ के इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने घरेलू टी20 क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी है, जहां उन्होंने अब तक कुल छह शतक ठोके हैं.यह आंकड़ा न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा को रेखांकित करता है, बल्कि टी20 प्रारूप में भारतीय बल्लेबाजों की बढ़ती गहराई को भी दर्शाता है.सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (SMAT) 2025-26 के फाइनल में हरियाणा के खिलाफ ईशान की 49 गेंदों में 101 रनों की पारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों वे घरेलू सर्किट के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में शुमार हैं.

      मात्र 45 गेंदों में शतक पूरा करने के साथ उन्होंने टूर्नामेंट में अपना पांचवां शतक जड़ा, जिससे अभिषेक शर्मा के रिकॉर्ड की बराबरी की. यह ईशान का करियर का छठा टी20 शतक था, जो मुख्य रूप से घरेलू टी20 और आईपीएल जैसे प्लेटफॉर्म पर आए हैं.ईशान की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वे एक विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में पांच शतक लगा चुके हैं – भारतीय क्रिकेट में संजू सैमसन (चार शतक) से आगे निकलकर वे इस सूची में अकेले शीर्ष पर हैं. कप्तान के रूप में भी उनकी तीन शतकीय पारियां विश्व रिकॉर्ड हैं, जो एडम गिलक्रिस्ट और मोहम्मद रिजवान जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ती हैं. SMAT 2025 में उनकी कप्तानी में झारखंड की टीम ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया, और फाइनल में भी उनका योगदान टीम के लिए निर्णायक साबित हुआ.

   अंतरराष्ट्रीय टी20 में ईशान अभी शतक से वंचित हैं. उनके 32 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में सर्वाधिक स्कोर 89 रन रहा है, लेकिन घरेलू स्तर पर उनकी निरंतरता चयनकर्ताओं के लिए एक मजबूत दावेदारी पेश करती है. टीम इंडिया से लंबे समय से बाहर चल रहे ईशान ने इस टूर्नामेंट में 500 से अधिक रन बनाकर स्ट्राइक रेट 197 के साथ अपनी फॉर्म का जोरदार प्रदर्शन किया.ईशान किशन जैसे खिलाड़ी टी20 क्रिकेट की आत्मा हैं – तेज, निडर और मैच जिताऊ। उनकी छह टी20 शतकों की यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी है, बल्कि भारतीय क्रिकेट की युवा पीढ़ी की आक्रामक सोच का प्रतीक भी. यदि वे इसी लय को बरकरार रखते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शतकों की बारिश करना मात्र समय की बात लगती है. चयनकर्ताओं की नजरें अब उन पर टिकी हैं – क्या ईशान जल्द ही नीली जर्सी में यह कारनामा दोहराएंगे? क्रिकेट प्रेमी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.


आलोक कुमार

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बुधवार, 17 दिसंबर 2025

कांग्रेस का विरोध मार्च, नेशनल हेराल्ड केस को लेकर केंद्र सरकार पर हमला

कांग्रेस का विरोध मार्च, नेशनल हेराल्ड केस को लेकर केंद्र सरकार पर हमला

पटना.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को राजनीतिक द्वेष के तहत फंसाने के आरोप लगाते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में आयकर गोलंबर से भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला. यह प्रदर्शन नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई और राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार किए जाने के बाद आयोजित किया गया.

      विरोध मार्च को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ईडी द्वारा दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है.उन्होंने आरोप लगाया कि मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर दोनों नेताओं को बेवजह परेशान किया गया और यह पूरा मामला केवल गांधी परिवार को बदनाम करने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार, यह सत्ताधारी भाजपा सरकार की राजनीतिक बदले की भावना का परिणाम है.

      राजेश राम ने सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने ईडी को कानून के दायरे में रहकर काम करने की हिदायत दी है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के मामलों में दोषसिद्धि की दर 10 प्रतिशत से भी कम है, जिससे स्पष्ट होता है कि ऐसे मामलों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है.कांग्रेस ने कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए ईडी की भूमिका पर सवाल उठाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा से राजनीतिक विद्वेष से बाज आने तथा देश से माफी मांगने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की. आयकर गोलंबर से आगे बढ़ने पर पुलिस ने बलपूर्वक प्रदर्शन को रोक दिया.

    इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा, पूर्व विधायक इजहारूल हुसैन, राजेश राठौड़, प्रतिमा कुमारी दास, अमित कुमार टुन्ना, डॉ. संजय यादव, डॉ. स्नेहाशीष वर्धन पाण्डेय, सौरभ सिन्हा, शशि रंजन, कुमार आशीष, शिशिर कौटिल्य, पंकज यादव, चंद्र प्रकाश सिंह, शशिकांत तिवारी, कमल कमलेश, कमल देव नारायण शुक्ला, सत्येंद्र कुमार सिंह, गुंजन पटेल, केसर कुमार सिंह, संजय पाण्डेय, संतोष कुमार श्रीवास्तव, सुधीर शर्मा, मृणाल अनामय, मुकुल यादव, राजेन्द्र चौधरी, रंजीत कुमार, रीता सिंह, कुमारी माला, गुरजीत सिंह, विमलेश तिवारी, नीरज कुमार, अरुण पाठक, विशाल यादव सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे.


आलोक कुमार

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मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26

  सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26


पटना . भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे रोमांचक टी20 टूर्नामेंट सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (SMAT) के 2025-26 संस्करण में इस बार नया प्रयोग देखने को मिला है। पारंपरिक नॉकआउट स्टेज की जगह सुपर लीग फॉर्मेट अपनाया गया, जिसमें ग्रुप स्टेज की टॉप-8 टीमें दो ग्रुप्स में बंटकर राउंड-रॉबिन खेलती हैं और दोनों ग्रुप के विजेता सीधे फाइनल में पहुंचे हैं। टूर्नामेंट का फाइनल 18 दिसंबर को पुणे के MCA स्टेडियम में खेला जाएगा।

प्रश्न है ग्रुप ए से फाइनल में पहुंचने वाली टीम का। एलीट ग्रुप स्टेज में चार ग्रुप (A, B, C, D) थे, जिनमें से हर ग्रुप की टॉप-2 टीमें सुपर लीग के लिए क्वालीफाई की.ग्रुप ए से मुंबई और आंध्र प्रदेश ने सुपर लीग में जगह बनाई। मुंबई ने ग्रुप में शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप किया, जबकि आंध्र प्रदेश ने दूसरे स्थान पर रहकर क्वालीफाई किया.

सुपर लीग में ये आठ टीमें थीं: मुंबई, आंध्र प्रदेश (ग्रुप A से), हैदराबाद, मध्य प्रदेश (ग्रुप B से), हरियाणा, राजस्थान (ग्रुप C से), झारखंड, पंजाब (ग्रुप D से)। इन्हें दो ग्रुप में बांटा गया:

सुपर लीग ग्रुप A: मध्य प्रदेश, पंजाब, झारखंड, आंध्र प्रदेश

सुपर लीग ग्रुप B: हैदराबाद, हरियाणा, मुंबई, राजस्थान

16 दिसंबर 2025 तक सुपर लीग के अधिकांश मुकाबले हो चुके हैं। ग्रुप A में झारखंड और हैदराबाद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने-अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया। झारखंड ने तो टूर्नामेंट में लगातार जीत का सिलसिला बना रखा, जिसमें सुपर लीग में भी मध्य प्रदेश जैसी मजबूत टीम को रोमांचक मुकाबले में हराया. हैदराबाद ने भी अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी की धार से ग्रुप B पर जमाया.

इस प्रकार, ग्रुप ए से क्वालीफाई करने वाली आंध्र प्रदेश सुपर लीग ग्रुप A में थी, लेकिन फाइनल में पहुंचने वाली टीम झारखंड बनी, जो मूल एलीट ग्रुप D से आई थी. आंध्र प्रदेश ने सुपर लीग में कुछ अच्छे प्रदर्शन दिखाए, लेकिन झारखंड की लगातार जीत और बेहतर नेट रन रेट के सामने वे फाइनल की दौड़ से बाहर हो गईं। मुंबई (ग्रुप A की दूसरी टीम) भी सुपर लीग ग्रुप B में मजबूत दावेदार थी, लेकिन हैदराबाद ने उन्हें पीछे छोड़ दिया.

यह फॉर्मेट टूर्नामेंट को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना रहा है, क्योंकि एक हार से टीम बाहर नहीं होती। झारखंड और हैदराबाद जैसे टीमों के उभरते सितारों – जैसे ईशान किशन की कप्तानी में झारखंड की आक्रामक बल्लेबाजी और गेंदबाजी – ने दर्शकों को खूब रोमांचित किया.फाइनल में ये दोनों टीमें आमने-सामने होंगी, जो निश्चित रूप से एक यादगार मुकाबला होगा.

ग्रुप ए से सुपर लीग तक का सफर मुंबई और आंध्र प्रदेश के लिए सराहनीय रहा, लेकिन फाइनल की चाबी अब झारखंड और हैदराबाद के पास है. घरेलू क्रिकेट में ऐसे प्रयोग युवा प्रतिभाओं को ज्यादा मौके दे रहे हैं, जो आने वाले आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए शुभ संकेत है.

आलोक कुमार

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सोमवार, 15 दिसंबर 2025

जेल के दिनों ने उनके शरीर पर गहरी चोट

 


पटना.उत्तरी भारत के एक छोटे से गाँव में 45 वर्षीय शीला देवी की कहानी आज भी सवालों से भरे हमारे समय का आईना है. मसीही विश्वास का पालन करते हुए अपने घर में एक छोटी-सी मंडली चलाने की वजह से उन्हें लगभग तीन महीने जेल में रहना पड़ा.आरोप था—धर्म परिवर्तन कानून का उल्लंघन.बीमारी के चलते ज़मानत मिली, पर जेल के दिनों ने उनके शरीर पर गहरी चोट छोड़ी; बाद में कैंसर का पता चला.

पिछले दो वर्षों से शीला अपने घर में प्रार्थना सभाएँ आयोजित कर रही थीं. यह पहल उनके लिए सेवा थी, पर गाँव के कुछ लोगों के लिए असहजता. विरोध बढ़ा, शिकायत हुई और 20 जुलाई की रविवार आराधना के दौरान पुलिस ने घर में प्रवेश कर पूछताछ की. बाइबिल, क्रॉस, भजन की किताबें, दीवार पर टंगा दस आज्ञाओं का पोस्टर, एम्प्लीफायर—सब ज़ब्त कर लिया गया. यहाँ तक कि उनका मोबाइल फ़ोन भी, जो उनके लिए परमेश्वर के वचन से जुड़े रहने का माध्यम था.

शीला का कहना है कि वे सभाएँ बंद नहीं कर सकती थीं. उनका विश्वास था कि ये मुलाक़ातें लोगों को शांति और चंगाई देती हैं—बीमारी और अकेलेपन के बीच आशा का सहारा बनती हैं. इसी दृढ़ता की कीमत उन्हें कैद के रूप में चुकानी पड़ी, पर उनका संकल्प डगमगाया नहीं.

आज, रिहाई के बाद भी चुनौतियाँ कम नहीं हैं.स्वास्थ्य संघर्ष जारी है, सामाजिक दबाव भी। फिर भी उनकी गवाही उस मंडली के लिए प्रेरणा है—कि कठिनाइयों के बीच भी विश्वास पर अडिग रहा जा सकता है.

प्रार्थना

हे स्वर्गीय पिता, शीला की साहसी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद. उनके शरीर को चंगा करें और उनके विश्वास को और दृढ़ करें। स्थानीय अधिकारियों को अनुग्रह दें कि इस समुदाय को शांतिपूर्वक मिलने की अनुमति मिले. यदि परिस्थितियाँ बदलें, तो नेताओं को सही निर्णय की बुद्धि प्रदान करें. भारत में—विशेषकर उत्तरी भाग में—यीशु का प्रकाश और प्रेम चमकता रहे.

वचन

“क्योंकि हम अपना प्रचार नहीं करते, बल्कि प्रभु यीशु मसीह का….” — 2 कुरिंथियों 4:3–5

यदि चाहें, मैं इसे संक्षिप्त समाचार रिपोर्ट, मानवाधिकार नोट, या प्रार्थना-पुस्तिका हेतु अनुकूलित संस्करण में भी ढाल सकता हूँ.

आलोक कुमार


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रविवार, 14 दिसंबर 2025

शहादत की अमर विरासत

 संसद पर हमला: शहादत की अमर विरासत


नई दिल्ली.13 दिसंबर 2001 का दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक अध्याय है. इसी दिन आतंकवादियों ने देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था—संसद—पर हमला कर भारत की संप्रभुता को चुनौती देने का दुस्साहस किया। किंतु उनके मंसूबों को हमारे वीर सुरक्षाकर्मियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर विफल कर दिया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्रियों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा दी गई श्रद्धांजलि यह दर्शाती है कि राष्ट्र आज भी उन शहीदों के बलिदान को एकजुट होकर नमन करता है.यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उस कर्तव्यबोध की पुनः स्मृति है, जिसने देश को एक अडिग सुरक्षा कवच प्रदान किया.

संसद की रक्षा करते हुए शहीद हुए जवानों का साहस, सतर्कता और कर्तव्यनिष्ठा आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा है.उनका बलिदान यह संदेश देता है कि लोकतंत्र की रक्षा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि संकल्प और त्याग से होती है.

आज जब आतंकवाद नए-नए रूपों में वैश्विक चुनौती बना हुआ है, तब 13 दिसंबर 2001 के शहीद हमें सतत सजग रहने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाए रखने की सीख देते हैं.देश उन वीरों और उनके परिवारों का सदा ऋणी रहेगा। उनका बलिदान अमर है और भारत की राष्ट्रीय चेतना में सदैव जीवित रहेगा.                 

 आलोक कुमार

शनिवार, 13 दिसंबर 2025

सड़क चौड़ीकरण के नाम पर शिक्षा का वह एकमात्र ठिकाना मिट्टी में मिला दिया

 


पटना. पटना नगर निगम का वार्ड संख्या–1, जो राजधानी के विकास की चमक के बीच स्थित है, आज भी सामाजिक हाशिए पर खड़े समुदायों की उपेक्षा का जीवंत उदाहरण बन गया है.इस वार्ड की निर्वाचित प्रतिनिधि छठिया देवी स्वयं महादलित मुसहर समुदाय से आती हैं, लेकिन विडंबना यह है कि उन्हीं की बिरादरी आज सबसे अधिक उपेक्षा और अव्यवस्था का दंश झेल रही है.दीघा मुसहरी के लोग समस्याओं के ऐसे मकड़जाल में उलझे हैं, वहां से निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता दिखाई नहीं देता.

     दीघा मुसहरी में कभी सरकारी स्कूल की व्यवस्था थी. भवन के अभाव में शिक्षक केदार मांझी की झोपड़ी में पढ़ाने को विवश थे, जहां पास ही सूअरों का बखौर था. यह दृश्य ही बताता है कि शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत को किस हद तक नजरअंदाज किया गया. वर्षों बाद सड़क किनारे स्कूल भवन बना, जिसने बच्चों और अभिभावकों में उम्मीद जगाई. लेकिन जैसे ही दीघा–पटना रेलखंड पर अटल पथ निर्माण की योजना आई, स्कूल भवन को विकास की भेंट चढ़ा दिया गया.सड़क चौड़ीकरण के नाम पर शिक्षा का वह एकमात्र ठिकाना मिट्टी में मिला दिया गया.

    इसी क्रम में वार्ड पार्षद द्वारा ‘हर घर नल-जल’ योजना के तहत जलापूर्ति केंद्र, शौचालय और स्नानघर का निर्माण कराया गया. कुछ समय के लिए ही सही, महादलित समुदाय को लगा कि सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि उनकी बुनियादी जरूरतों को समझ रहे हैं.लेकिन यह खुशी भी ज्यादा दिन टिक नहीं सकी. सरकारी योजना से बने सामुदायिक भवन की परिधि में जलापूर्ति केंद्र और शौचालय को शामिल कर लिया गया और बाद में उस भवन पर ताला जड़ दिया गया.नतीजा यह हुआ कि जिन सुविधाओं के लिए योजनाएं बनी थीं, उन्हीं से महादलित मुसहर समुदाय को वंचित कर दिया गया.

   जल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से कट जाने के बाद, समाज के सबसे कमजोर तबके के लोग महाजनों से कर्ज लेकर अपने घरों में शौचालय बनवाने और पानी की पाइप लाइन खुद गाड़ने को मजबूर हुए. यह केवल एक बस्ती की कहानी नहीं है, बल्कि ‘हर घर नल का जल’ जैसी महत्वाकांक्षी योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल है. बिहार के कई हिस्सों से यह शिकायत सामने आ रही है कि पाइप तो बिछा दिए गए, लेकिन पानी या तो अनियमित है या बिल्कुल नहीं है.

     दीघा मुसहरी के निवासियों की पहल—खुद पाइपलाइन बिछाना—उनके संघर्ष और जिजीविषा को दर्शाती है, लेकिन यह भी बताती है कि सरकारी व्यवस्था किस हद तक असफल रही है. विकास तब सार्थक माना जाएगा, जब योजनाओं का लाभ सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे. अन्यथा, सामुदायिक भवनों पर ताले और सूखी नल-टोटियां केवल सरकारी दावों की पोल खोलती रहेंगी.

इस गंभीर स्थानीय समस्या के समाधान के लिए जरूरी है कि जन स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) और पटना नगर निगम तत्काल हस्तक्षेप करें. दीघा मुसहरी के महादलित मुसहर समुदाय को जल और स्वच्छता की सुविधाओं से वंचित रखना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि सामाजिक न्याय की अवधारणा पर भी गहरा आघात है.

आलोक कुमार

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“कब्रिस्तान में जगह नहीं है…”

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