गुरुवार, 16 मार्च 2023

कैंडल लाइट कर विरोध व्यक्त किया

 

कोच्चि.इन दिनों केरल में मलयालम लेखक फ्रांसिस नोरोन्हा की कहानी पर आधारित एक नाटक, 'कक्कुकली' को लेकर ईसाई समुदाय आक्रोशित हैं.इस संदर्भ में केरल राज्य में कैथोलिक चर्च की सर्वोच्च संस्था केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) ने राज्य सरकार से एक मलयालम नाटक के मंचन पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इसमें ईसाई धर्म के साथ-साथ इसकी मंडलियों और कॉन्वेंट को गलत तरीके से चित्रित किया गया है.वहीं कैंडल लाइट कर विरोध व्यक्त किया गया.

         बताया जाता है कि ईसाई धर्म केरल का तीसरा सबसे व्यापक धर्म है, भारत सरकार की जनगणना के अनुसार जनसंख्या का 18 प्रतिशत है. अल्पसंख्यक समुदाय होने के बावजूद केरल में ईसाई समुदाय संपूर्ण भारत के ईसाई समुदाय की तुलना में आनुपातिक रूप से बहुत बड़ा है.इस बड़ी जनसंख्या वाले ईसाई समुदाय को मलयालम लेखक फ्रांसिस नोरोन्हा की कहानी पर आधारित एक नाटक, 'कक्कुकली' हिलाकर रख दिया है.मलयालम लेखक ने 'कक्कुकली' नाटक में एक युवा नन और उसके संघर्षों और चुनौतियों के इर्द-गिर्द घूमती जिंदगी को दर्शाया है, जिसका सामना वह एक कॉन्वेंट में करती है.

        वास्तव में अलापुझा स्थित नेथल नाटक संघम द्वारा मंच पर लाया गया नाटक केबी अजय कुमार द्वारा लिखित और जॉब मडाथिल द्वारा निर्देशित है.यह एक ईसाई लड़की की कहानी बताती है जो ईसाई चर्च में शामिल हो गई और अपने पिता की इच्छा का विरोध करते हुए नन बन गई, जो एक कम्युनिस्ट थे.नाटक उस चुनौतीपूर्ण स्थिति से संबंधित है जिसका सामना एक कॉन्वेंट के नियमों और विनियमों के भीतर रहते हुए नन करती है.इसको आधार बनाकर मलयालम लेखक फ्रांसिस नोरोन्हा ने एक नाटक 'कक्कुकली' बना दिया है.अलप्पुझा स्थित नेथल नाटक संघम ने जॉब मदाथिल के निर्देशन में कहानी को एक मंचीय रूपांतर दिया है.

        कॉन्वेंट में एक युवा नन के संघर्ष से संबंधित एक नाटक से परेशान, विश्वासियों के एक वर्ग ने गुरुवयूर में इसके मंचन को रोकने की कोशिश की. उसने कुछ कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया है जो दावा करते हैं कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में घुसपैठ है और नाटक के लिए और अधिक चरणों का वादा किया है.मलयालम लेखक फ्रांसिस नोरोना की एक कहानी पर आधारित एक नाटक "कक्कुकली' तूफान के केंद्र में है, जिसमें केसीबीसी समर्थक जीवन कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह ईसाई धर्म का अपमान करता है.                                                                                       जब मंदिर में वार्षिक उत्सव के एक भाग के रूप में गुरुवायुर नगर पालिका के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रदर्शन करने के लिए नाटक तैयार किया गया था, तो केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी)  समर्थक जीवन कार्यकर्ताओं ने विरोध किया और यहां तक कि आयोजकों को नाटक के मंचन से पीछे हटने के लिए प्रभावित करने की कोशिश की.

       केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) प्रो-लाइफ आंदोलन के जेम्स अझचांगड के अनुसार, "शुरुआत से लेकर अंत तक, कक्कुकली पूरे धर्म, विशेष रूप से ईसाई धर्म के पुजारियों और ननों का अपमान करने की कोशिश कर रही है." हालांकि, नाटक के समर्थन में एआईवाईएफ और अन्य संगठन सामने आए थे.एआईवाईएफ जिला समिति द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि नाटक के खिलाफ अनावश्यक विवाद केवल समाज में लोगों के बीच विभाजन को बढ़ावा देंगे और इस तरह की प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए.आधिकारिक बयान में कहा गया है, "इस तरह के हस्तक्षेप को केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में घुसपैठ माना जाएगा." एआईवाईएफ ने नेथल नाटक संघम के लिए चरणों की व्यवस्था करने की इच्छा भी व्यक्त की, अगर वे त्रिशूर में इसे फिर से करने के लिए तैयार थे.

         राज्य में कैथोलिक चर्च की सर्वोच्च संस्था केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) ने राज्य सरकार से एक मलयालम नाटक के मंचन पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इसमें ईसाई धर्म के साथ-साथ इसकी मंडलियों और कॉन्वेंट को गलत तरीके से चित्रित किया गया है.

     केसीबीसी के अध्यक्ष कार्डिनल बेसेलियोस क्लेमिस की अध्यक्षता में धर्माध्यक्षों और विभिन्न कलीसियाओं के प्रमुखों की हाल ही में हुई एक बैठक में 'कक्कुकली' नाटक की निंदा की गई और कहा गया कि इसका मंचन केरल की संस्कृति पर एक धब्बा है.अलप्पुझा स्थित नेथल नाटक संघम ने जॉब मदाथिल के निर्देशन में कहानी को एक मंचीय रूपांतर दिया है.

    बैठक में केसीबीसी के प्रतिनिधियों ने कहा कि नाटक और साहित्यिक कृतियों का सुधार, परिवर्तन और सामाजिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करने का इतिहास रहा है.शीर्ष निकाय ने एक बयान में कहा, लेकिन अत्यधिक अपमानजनक सामग्री और इतिहास की विकृति के साथ महिमामंडन अस्वीकार्य है.

    यह घोर निंदनीय था कि समाज को अनूठी सेवाएं देने वाली हजारों ननों और मण्डलियों के आत्म-विश्वास और स्वाभिमान को ठेस पहुँचाने वाली 'कक्कूकली' को राज्य सरकार के अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य उत्सव में शामिल कर विशाल पुरस्कार दिया गया है.वामपंथी संगठनों द्वारा प्रचार, बयान में आगे कहा गया है.


कैथोलिक निकाय ने भी सांस्कृतिक समाज से नाटक की निंदा करने का आग्रह किया और सरकार से इसके मंचन पर प्रतिबंध लगाने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की.


हालांकि, नाटक के निर्देशक जॉब मैडाथिल ने आलोचनाओं को खारिज कर दिया है और कहा है कि मंडली इसके मंचन के साथ आगे बढ़ेगी. उन्होंने कहा, 'नाटक का मंचन 15 जगहों पर हो चुका था और मुझे समझ नहीं आया कि अब अचानक से विरोध क्यों शुरू हो गया .

आलोक कुमार

ईसाई समुदाय के द्वारा विरोध व्यक्त किया


पटना.बिहार जाति आधारित गणना,2022 का प्रथम चरण 7 जनवरी से 21 जनवरी तक मकानों की गणना की गई.अब द्वितीय चरण में 1 से 30 अप्रैल तक जातिवार गणना होगा.इस पर ईसाई समुदाय के द्वारा विरोध व्यक्त किया जा रहा है.प्रशांत कुमार नामक ईसाई का कहना है कि ईसाई धर्मावलंबी को केवल दो कोड में रखा गया है. ईसाई धर्मावलंबी (हरिजन) की जाति कोड 10 है और ईसाई धर्मावलंबी (अन्य पिछड़ी जाति) की जाति कोड 11 है.बिहार में जन्मे और रहने वाले ईसाई धर्मावलंबी आदिवासी का कोड नहीं दिया गया है.इसका मतलब आदिवासी कहकर उरांव,धागंड़ कहते ही (उरांव) की जाति कोड 12 में डाल देंगे.जो ईसाई धर्म नहीं दर्शाता है.उसे हिंदू ही समझा जाएगा.इसमें परिवर्तन करने की जरूरत है.         

   विदित हो कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार जाति आधारित गणना,2022 मुहिम के रूप में शुरू किया था.इसके प्रथम चरण में शनिवार 7 जनवरी से जातिगत जनगणना के तहत मकानों की गणना शुरू किया गया. खुद ही पटना में डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने मकान की गणना में लगाए गए कर्मियों के साथ इसकी शुरुआत की थी.राज्य सरकार के अनुसार जातिगत जनगणना से आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचितों एवं पिछड़ों की पहचान होगी और उनके हिसाब से योजनाएं बनाई जा सकेगी. सरकार का दावा है कि जून में पूरी रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी.

   बता दें कि पहले चरण में 7 जनवरी से 21 जनवरी तक मकानों की गणना शुरू की गई. इन 15 दिनों के दरम्यान गणनाकर्मी लगातार हर मकान में गए.  हर मकान को खास नंबर अलॉट किए.यह यूनिक नंबर लाल रंग से मकान पर मार्क भी किए और इस रिकॉर्ड को लोगों को रिकॉर्ड के रूप में इसे अपने पास भी लिखकर रख लेना चाहिए, क्योंकि यह एक तरह से पता हो जाएगा. अब तक नगर निगम मकान नंबर जारी किया करता था, लेकिन उसे पता के रूप में खोजना असंभव हो जाता था. दावा है कि इस बार दिया जा रहा नंबर हर आदमी के पते के रूप में रिकॉर्ड बनकर दर्ज हो जाएगा.मकान की गणना करते समय गणनाकर्मी घर के मुखिया का नाम भी लिख रहे हैं, ताकि यह रिकॉर्ड रहे कि मकान नंबर फलां किस व्यक्ति का है.गणनाकर्मी यह भी दर्ज कर रहे हैं कि उस परिवार में कुल कितने सदस्य हैं. साथ ही बेघर लोगों का भी रिकॉर्ड उनके अस्थायी आशियाने-ठिकाने पर लिया गया.प्रत्येक कर्मी 150 मकानों की गिनती किए. इसके लिए उन्हें हर रोज मैनुअल डेटा अपलोड करना पड़ा. अगर कोई घर बंद मिला तो मोबाइल नंबर लेकर उनसे उनकी पूरी जानकारी लिए.यह गणनाकर्मी की जिम्मेदारी थी.

दूसरे चरण में 1 से 30 अप्रैल तक जातिवार गणना होगा.इस दौरान जाति पूछेंगे, साथ ही काम और आय जानेंगे. मकान के मुखिया और परिवार के सदस्यों की कुल संख्या का रिकॉर्ड कागजों पर दर्ज किया जा रहा है.यह 21 जनवरी तक प्रक्रिया पूरी हो गयी. इसके साथ ही इस डाटा को अपलोड किए जाने पर ऑनलाइन फॉर्म तैयार होता चला गया.उसी फॉर्म में अगले चरण के दौरान बाकी जानकारी फीड की जाएगी.पूरे अप्रैल महीने गणनाकर्मी इसी ऑनलाइन फॉर्म में बाकी सूचनाएं भरेंगे. उस दौरान मकान नंबर के हिसाब से परिवार के मुखिया के पास पहुंच उनकी जाति के साथ परिवार के सदस्यों की जानकारी ली जाएगी. उनके पास कौन-कितनी गाड़ियां हैं, कितने मोबाइल है, आय का स्रोत क्या है, नौकरी करते हैं या स्वरोजगार या बेरोजगार हैं, क्या-क्या हुनर जानते हैं...जैसी जानकारी भी ली जाएगी.

आलोक कुमार

बुधवार, 15 मार्च 2023

अहिंसा को दुनिया में विस्तार देने के लिए राजगोपाल का नागरिक अभिनंदन

  * जापान द्वारा 40वां निवानो शांति पुरस्कार की घोषणा पर विख्यात गांधीवादी राजगोपाल का नागरिक अभिनंदन अहिंसा को दुनिया में विस्तार देने के लिए राजगोपाल का नागरिक अभिनंदन..


भोपाल. राजागोपाल पी व्ही जी को न्याय और शांति की सेवा में उनके असाधारण कार्य के लिए दुनिया की प्रतिष्ठित संस्था निवानो पीस फाउंडेशन, जापान ने 40वां निवानो शांति पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की है, इस उपलक्ष्य में गांधी भवन, भोपाल में उनका नागरिक अभिनंदन किया गया. इसके साथ ही सर्वधर्म सद्भावना मंच एवं समस्त समाज सेवी संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में होली मिलन का आयोजन किया.

वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान ने विख्यात गांधीवादी राजगोपाल पी.व्ही. का परिचय देते हुए कहा कि राजगोपाल जी को लोग प्यार से राजू भाई कहते हैं.इन्हें याद करते हुए कबीर की याद आती है. कबीर जैसा जीवन और कबीर गायन में वे रचे-बसे हैं. वे कथककली नृत्य में परांगत हैं, इसलिए वे अपनी भाव-भंगिमा से अपने विचारों को व्यक्त कर पाते हैं. उन्होंने चंबल में हिंसा के ताने-बाने को अहिंसा के माध्यम से खत्म किया.यह दुनिया का अतुलनीय काम है.उन्होंने गांधीवादी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया, जो देश-दुनिया में अहिंसा के माध्यम से शांति, समानता एवं न्याय के लिए काम कर रहे हैं.


गांधीवादी राजगोपाल पी.व्ही. ने कहा कि अपने लोगों से मिला प्यार किसी भी पुरस्कार से बड़ा होता है.पुरस्कार का तीन महत्व इस समय है.पहला, आज सरकार द्वारा हर सामाजिक आंदोलन को दबाया जा रहा है, जबकि मानव अधिकार की बात संविधान में है.अलग-अलग तरह से संस्थाओं को परेशान किया जा रहा है, ऐसे समय में इस पुरस्कार का महत्व है. यह पुरस्कार गांधी जी के काम को स्वीकार करने का महत्व है, जब देश में उन्हें नकारने की बात हो रही है.तीसरी बात यह है कि यह पुरस्कार दुनिया में अहिंसा को महत्व देता है. आज देश में नफरत से बाहर आकर प्रेम एवं भाईचारे को बढ़ाने की जरूरत है.आज मैं चार स्तरीय तरीके से अहिंसा पर काम कर रहा हूं. यह मेरा पूरा जोर है कि सत्ता को कैसे अहिंसक बनाया जाए?  


वरिष्ठ पत्रकार लज्जा शंकर हरदेनिया ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी हिंसा के शिकार देश जापान है, वह अहिंसा के महत्व को समझता है.ऐसे देश से राजगोपाल को सम्मान मिलना देश के लिए गौरव की बात है. गांधीवादी विचारक सुश्री अनुराधा शंकर ने कहा कि मंच का काम मील का पत्थर है. राजा जी का काम सभी को जोड़ता है.राजा जी आज के जमाने के कबीर हैं.वे जिनसे मिलते हैं, उनको जोड़ते हैं. भारत माता में हम सभी लोग है.उन्होंने देश को जागृत किया है. समाज के अंतिम तबके के अधिकारों के लिए काम किया है. जापान का जो सम्मान पूर्वी दुनिया का नोबेल है. सद्भावना मंच के संयोजक महेन्द्र शर्मा ने कहा कि राजगोपाल जी ने गांधीवादी एवं सर्वोदयी विचारों को दुनिया में विस्तार दिया है.


भंते सागर थेरा जी ने कहा किं सभी धर्मों के व्यक्ति यहां मंच पर है, अपने-अपने सिद्धांत एवं मतों के अनुसार चलते हुए इंसानियत की बात कर रहे हैं.भोपाल इस तरह का आयोजन करने वाला इकलौता शहर है.फादर आनंद मुटुंगल ने कहा कि देश को शांतिमय एवं भाईचारा वाला देश बनाने की जरूरत है. राजगोपाल जी को जिस अहिंसक मूल्यों के लिए जापान से जो सम्मान मिला, उसे जीवन में अपनाने की जरूरत है. प्रो. मनोज जैन ने कहा कि राजगोपाल जी को सम्मान मिलने से देश गौरवान्वित हुआ है.सर्वधर्म सद्भावना मंच के हाजी हारुन ने कहा कि इस वक्त देश में कुछ लोग आग लगाने की की कोशिश कर रहे हैं, तो हम पानी डालने का काम कर रहे हैं.गदर करने वाले चंद लोग होते हैं. हम प्यार मोहब्बत की बात करते हैं.देश सदियों से धर्मनिरपेक्ष रहा है.

इस मौके पर प्रदेश भर से आए नागरिकों एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रन सिंह परमार, लेखक शैलेन्द्र शैली, जमीयत उलेमा के प्रदेश प्रमुख, संत पुजारी संघ के अध्यक्ष दीक्षित जी, पूर्व विधायक महेश मिश्रा सहित कई गणमान्यों ने अपने विचार व्यक्त किए. इस अवसर पर सैकड़ों नागरिक उपस्थित हुए. कार्यक्रम का संचालन सतीश पुरोहित ने किया.

आलोक कुमार


पूरे बिहार में दलित गरीबों भूमिहीनों को दस डिसमिल जमीन देने की बात कही

  


पटना.आज बिहार विधानसभा के बजट सत्र में विधानसभा विधायक दल उप नेता सत्यदेव राम ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग पर सदन में अपनी बात रखी.

        उन्होंने सदन में बिहार सरकार से  भूमि सुधार आयोग के अध्यक्ष डी बंधोपाधाय की रिपोर्ट को लागू करने की मांग की है. पूरे बिहार में दलित गरीबों भूमिहीनों को दस डिसमिल जमीन देने की बात कही.

    बताते चले कि 60 के दशक में कांग्रेस सरकार ने बिहार में भूमि सुधार का प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन ज़मींदारों के विरोध के कारण यह ठंडे बस्ते में चली गई. 90 के दशक में लालू प्रसाद यादव ने भी भूमि सुधार को चुनावी मुद्दा बनाया, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्होंने भी इस दिशा में कोई क़दम नहीं उठाया.

डेढ़ दशक बाद वर्ष 2005 में नीतीश कुमार जब पहली बार सीएम की कुर्सी पर काबिज़ हुए, तो उन्होंने भूमि सुधार के लिए डी. बंद्योपाध्याय की अध्यक्षता में भूमि सुधार आयोग का गठन किया था.बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 16 जून 2006 को गठित किया था.आयोग ने अगस्त 2006 से काम करना शुरू किया था.

    यहां यह भी सनद रहे कि सन 1977 में पश्चिम बंगाल में जब वाममोर्चा की सरकार बनी थी, तो वहां के वर्गादार (बटाईदार) किसानों को समुचित अधिकार देने के लिए ‘ऑपरेशन वर्गा’ चलाकर भूमि सुधार किया था, जिसे अब तक का सबसे सफलतम भूमि सुधार माना जाता है.इस ऑपरेशन का नेतृत्व डी. बंद्योपाध्याय ने ही किया था.

        दो वर्षों तक माथापच्ची करने के बाद डी. बंद्योपाध्याय ने अप्रैल 2008 में नीतीश सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी. इस रिपोर्ट में बटाईदारों को अधिकार देने की बात कही गई थी और इसके लिए एक क़ानून बनाने का प्रस्ताव दिया गया था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि हर बटाईदार को उस ज़मीन का पर्चा देना चाहिए, जिस ज़मीन पर वह खेती कर रहा है.

इस पर्चे में भू-स्वामी का नाम व खेत का नंबर रहेगा. पर्चे की एक प्रमाणित प्रति ज़मीन मालिक को भी देने की भी बात कही गई थी.इन सबके अलावा भी कई तरह की सिफारिशें थीं. लेकिन, ज़मींदार वोट बैंक को बचाने की राजनीतिक मजबूरियों के चलते नीतीश कुमार ने भी पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों की लीक पर ही चलने का फैसला लिया और सिफ़ारिशों को धूल फांकने के लिए छोड़ दिया.

     बताते चले कि अपने लिए निर्धारित एक साल की समय सीमा को एक बार बढ़वाने के बाद आयोग ने 2008 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी.लेकिन 15 साल बाद भी नीतीश कुमार ने आयोग के सुझावों पर अमल की कोई पहल करते नहीं दिख रहे है.आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 1990 के दशक के दौरान भूमिहीनता का आंकड़ा रखा. इन आंकड़ों के अनुसार इस दौरान राज्य में भूमिहीनता की दर चिंताजनक हद तक बढ़ी है.

     जगजाहिर है कि जन संगठन एकता परिषद के संस्थापक पी व्ही राजगोपाल ने राष्ट्रीय स्तर पर और प्रदेश स्तर पर एकता परिषद के प्रांतीय संयोजक प्रदीप प्रियदर्शी ने मिलकर डी. बंद्योपाध्याय की अध्यक्षता वाली भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के लिए अहिंसात्मक आंदोलन चलाया.

       उत्तर बिहार एकता परिषद के नेता विजय गोरैया ने महागठबंधन सरकार के  राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री आलोक मेहता को बाजीगर करार दिया है.उन्होंने कहा कि मंत्री जी ने सभी आवासीय भूमिहीन परिवारों की गिनती कराने के वादा से पीछे हटने के बाद, बिहार के भूमि सुधार मंत्री जी अब गरीबों की आँखों में धूल झोंक रहे हैं.  गिनती कराई नहीं, कोई नया आँकड़ा डाला नहीं और 'डाटा अपडेट' करायेंगे ?   अंचल कार्यालय के कंप्यूटर में वर्षों से पड़े सौ-दो सौ आवासीय भूमिहीन परिवार के आँकड़ों को जिला स्तर पर जोड़वाकर प्रकाशित करा देंगे. किसी जिला में पाँच सौ तो किसी में हजार-बारह सौ की संख्या  ...हो गया अपडेट.  जबकि, आवासीय भूमिहीन परिवारों की एक प्रखंड की संख्या औसतन पाँच से पच्चीस हजार तक संभावित है./   कायदे से, जबतक गाँव के हर दरवाजे तक पहुँचकर सर्वेक्षण टीम द्वारा पुछताछ करने के बाद ही आवासीय भूमिहीनों की सही जानकारी प्राप्त होगी. अगर सरकार की नियत ठीक हो तो पूरे बिहार में, यह काम एक सप्ताह में पूरा किया जा सकता है. लेकिन अखबार की इस घोषणा से लगता है मानो, मंत्री जी बिहार के आवासीय भूमिहीनों को उकसा ही नहीं चिढ़ा भी रहे हों कि 'दम है तो हमारे खिलाफ बड़ी लड़ाई शुरु करो ; अगर नहीं, तो जो टुकड़ा हम फेंकते हैं उसे हमारी कृपा समझ कर स्वीकार करो'.

आलोक कुमार


मंगलवार, 14 मार्च 2023

निजी नियोजकों द्वारा 130 विभिन्न पदों के लिए अभ्यर्थियों का किया जायेगा चयन

  * 16 मार्च को डीआरसीसी में जॉब कैम्प का आयोजन

* निजी नियोजकों द्वारा 130 विभिन्न पदों के लिए अभ्यर्थियों का किया जायेगा चयन

* कार्यक्षेत्र होगा स्थानीय, मानदेय भी बेहतर


बेतिया।श्रम संसाधन विभाग जिला नियोजनालय के तत्वावधान में 16.03.2023 को स्थानीय डीआरसीसी (जिला निबंधन एवं परामर्श केन्द्र) के प्रांगण में जॉब कैम्प का आयोजन किया जा रहा है। इस दिन पूर्वाह्न 11.00 बजे से अपराह्न 04.00 बजे तक इच्छुक अभ्यर्थी जॉब कैम्प में नियोजक से जॉब के विषय में जानकारी प्राप्त कर अपना आवेदन/बायोडाटा जमा कर सकते हैं।

  जिला नियोजन पदाधिकारी, श्री अंकित राज द्वारा बताया गया कि जिलाधिकारी, श्री कुंदन कुमार के दिशा-निर्देश के आलोक में लगातार जिले में जॉब कैम्प का आयोजन कर बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार मुहैया कराने का कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में 16 मार्च 2023 को भी जॉब कैम्प का आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पैरामाउंट एकेडमी, श्री साई ऑर्गेनिक फुड्स प्रा0 लि0 तथा चौतन्य इंडिया फीन क्रेडिट प्रा0 लि0 द्वारा पश्चिमी चम्पारण जिले में पीजीटी/टीजीटी टीचर, फ्रांट डेस्क, पियून, ड्राईवर, हेल्पर, स्वीपर, नाईट गार्ड, सुपरवाईजर, कस्टमर रिलेशनशीप एक्जक्यूटिव पद पर कार्य करने के इच्छुक कुल-130 अभ्यर्थियों का चयन किया जायेगा। उन्होंने बताया कि निजी नियोजक, पद, योग्यता, उम्र, मानदेय, रिक्ति, कार्यस्थल आदि की विस्तृत जानकारी का प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है ताकि लक्ष्य के अनुरूप बेरोजगार युवक-युवतियों को नौकरी दिलाई जा सके।


आलोक कुमार

ग्राम कचहरियों एवं वार्डों का लंबित अंकेक्षण जिलास्तर पर मिशन मोड में कराने के लिए रोस्टर जारी

 * ग्राम कचहरियों एवं वार्डों का लंबित अंकेक्षण जिलास्तर पर मिशन मोड में कराने के लिए रोस्टर जारी

* तिथि को ऑडिट कार्य नहीं कराने पर संबंधित पंचायत/प्रखंड के वित्तीय लेन-देन पर लगा दी जाएगी रोक

*जिलाधिकारी द्वारा की गयी अंकेक्षण कार्य प्रगति की समीक्षा


बेतिया। जिलाधिकारी, श्री कुंदन कुमार ने कहा कि ग्राम कचहरियों एवं वार्डों का अंकेक्षण कार्य अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। पूर्व में भी मिशन मोड में जिलास्तर पर कैंप लगाकर अंकेक्षण कार्य पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद बगहा-02 एवं नरकटियागंज पंचायत समिति एवं अधिकांश प्रखंडों में ग्राम कचहरियों एवं वार्डों का अंकेक्षण निर्धारित अवधि में नहीं हो सका है, जो अत्यंत ही खेदजनक है।  

उन्होंने कहा कि अंकेक्षण कार्य की लगातार उच्च स्तरीय समीक्षा की जा रही है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूर्ण कराना अति आवश्यक है। इस कार्य में तनिक भी लापरवाही, शिथिलता एवं कोताही बरतने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने निर्देश दिया कि लंबित अंकेक्षण कार्यों को ससमय पूरा करने के उद्देश्य से जिलास्तर पर रोस्टर वाइज कैम्प का संचालन किया जा रहा है। इसके माध्यम से शत-प्रतिशत अंकेक्षण मामलों को अविलंब निष्पादित करना सुनिश्चित किया जाय।

समीक्षा के क्रम में बताया गया कि निर्धारित कार्यक्रमानुसार जिलास्तर पर जिला परिषद सभागार में अंकेक्षण दल की उपस्थिति में अंकेक्षण कार्य कराया जा रहा है। इस हेतु तिथि का निर्धारण कर दिया गया है। 13 एवं 14 मार्च 2023 को लौरिया, नौतन, मधुबनी प्रखंड अंतर्गत विभिन्न ग्राम कचहरियों तथा वार्ड के लंबित मामलों का अंकेक्षण कार्य पूर्ण कराया जायेगा। इसी तरह 15 एवं 16 मार्च 2023 को सिकटा, बैरिया, रामनगर, 17 एवं 18 मार्च 2023 को योगापट्टी, बगहा-01, 20 एवं 21 मार्च 2023 को चनपटिया, बगहा-02 (समिति), 23 एवं 24 मार्च 2023 को मझौलिया, नरकटियागंज (समिति) प्रखंडों के लंबित अंकेक्षण का कार्य पूर्ण कराया जायेगा।

अंकेक्षण कार्य में पंचायत सचिव एवं लेखापाल-सह-आईटी सहायक भाग लेंगे। साथ ही प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी/प्रभारी प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी पर्यवेक्षण पदाधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं।

जिलाधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया कि प्रखंड नाजिर/पंचायत सचिव/ लेखापाल-सह-आईटी सहायक प्रातः 09.00 बजे पूर्वाह्न निर्धारित तिथि को अंकेक्षण से संबंधित पंजी/अभिलेखों के साथ उपस्थित रहकर अंकेक्षण कार्य सम्पन्न करायेंगे। शाम में पंचायत कार्यालय को सूचित करेंगे कि उनके द्वारा ऑडिट करा लिया गया है।

जिलाधिकारी ने कहा कि निर्धारित तिथि को ऑडिट समापन का कार्य नहीं कराने पर संबंधित पंचायत/प्रखंड के वित्तीय लेन-देन पर रोक दिया जायेगा। साथ ही संबंधित नाजिर/पंचायत सचिव/लेखापाल-सह-आईटी सहायक से कारण पृच्छा करते हुए उक्त तिथि का वेतन/मानदेय अवरुद्ध कर उनके सेवापुस्त में एंट्री कर दिया जायेगा।

समीक्षा बैठक में उप विकास आयुक्त, श्री अनिल कुमार, अपर समाहर्ता, श्री राजीव कुमार सिंह, श्री अनिल राय, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, श्री मनीष कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।


आलोक कुमार

उत्तर भारत में आरामदायक दुख भोग यात्रा


नई दिल्ली.आजकल ईसाई समुदाय का दुख भोग चल रहा है. 22 फरवरी को शुरू हुआ था. मंगलवार 14 मार्च चालीसे का तीसरा सप्ताह में है.ईसाई समुदाय अपनी सहुलियत से दुख भोग को कष्टकर और आरामदायक बनाते हैं.दक्षिण भारत में कष्टकर दुख भोग यात्रा करते हैं तो उत्तर भारत में आरामदायक दुख भोग यात्रा करने का कार्यक्रम तय किया गया है.

दक्षिण भारत के केरल राज्य

में तीर्थ स्थल विकसित किया गया है. राज्य के तीर्थ स्थलों में सबसे प्रमुख सेंट थॉमस सिरो-मालाबार कैथोलिक चर्च है, जहां हर साल हजारों ईसाई और अन्य पर्यटक आते हैं. यहां पर मलयात्तूर तीर्थ स्थल है. जहां पर संत थॉमस  आए थे.उन्होंने मलयातूर के पहाड़ पर चढ़े थे.वहां पर यानी पहाड़ पर उनके पैर का निशान है.वहां पर भक्तगण भक्ति से प्रार्थना करते हैं.पहाड़ पर सेंट थॉमस के नाम से चर्च बनाया गया है. लोग बहुत ही मुश्किल से पहाड़ के ऊपर चढ़ते हैं.यहां पर लोग दुख भोग के समय मिलकर कूस का रास्ता तय करते हैं.अपने हाथों में क्रूस को लेकर पहाड़ पर चढ़ते हैं.यह रहा कष्टकर दुख भोग का वर्णन.अब आपको आरामदायक दुख भोग यात्रा के बारे में बता रहे हैं.

उत्तर भारत में नई दिल्ली में विकास नगर है.यहां पर चर्च ऑफ आवर लेड़ी ऑफ ग्रेस, आनंद कुंज, विकासपुरी, न्यू दिल्ली में चर्च है.इस चर्च के रक्षक फादर इवान है.उन्होंने अपने बल पर चालीसा कालीन यात्रा कार्यक्रम तय किये हैं. विकासपुरा पल्ली के भक्तगण आराम से बस पर चढ़ेंगे और प्रभु येसु ख्रीस्त के दुख भोग में शामिल हो जाएंगे.इस दौरान 7 चर्चों का मुआयना भी करने जाएंगे. तो इस प्रकार दुख भोग के 14 मुकाम पूरा करेंगे.शनिवार 18 मार्च 2023 को विकासपुरी चर्च से 9 बजे बस खुलेगी.विकासपुरी चर्च से ही चौदह मुकाम शुरू होगा.

1.विकासपुरी चर्च से पालम चर्च की दूरी 12 किलोमीटर है.इसके बाद 2. पालम चर्च से जनकपुरी चर्च की दूरी 7 किलोमीटर है. 3. जनकपुरी चर्च से मायापुरी चर्च की दूरी 8 किलोमीटर है. 4. मायापुरी चर्च से पंजाबी बाग की दूरी 10 किलोमीटर है. 5. पंजाबी बाग चर्च से रोहिणी चर्च की दूरी 12 किलोमीटर है. 6. रोहिणी चर्च से पीतमपुरा चर्च की दूरी 10 किलोमीटर है. 7. पीतमपुरा के बाद भक्तों को घर पहुंचा दिया जाएगा.

यह बताया कि चर्च ऑफ़ अवर लेडी ऑफ़ ग्रेस, विकासपुरी,नई दिल्ली के फादर इवान के द्वारा बस की व्यवस्था की गयी है.पहले आओ पहले पाओ पर की तर्ज पर सुविधा प्रदान की जाएगी.भक्तों से आग्रह किया गया है कि कृपया अपना भोजन और पानी स्वयं लाएं. क्रूस रास्ता विकास नगर चर्च से शुरू होगा और पीतमपुरा चर्च में समाप्त होगा.

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