चुनावी मौसम में शिक्षा की सौगात
“शिक्षा की सौगात या चुनावी शगुन?”
पटना.बुधवार को हुई मोदी कैबिनेट की बैठक में केंद्र सरकार ने बिहार में 19 नए केवी स्कूल खोलने की मंजूरी दी है. इस बात की जानकारी केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक्स पर दी. बता दें कि ये सभी 19 स्कूल बिहार के जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में खोले जाएंगे.जब नीतीश कुमार एनडीए से बाहर थे, तब पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय घोषित करने की मांग उठाई जाती रही, लेकिन केंद्र सरकार ने उसे ठुकरा दिया.अब जबकि बिहार में चुनावी बयार बह रही है, केंद्र ने अचानक 19 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की घोषणा कर दी है.यह फैसला निस्संदेह शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, लेकिन समय पर सवाल खड़े करता है.
पांच साल में क्यों नहीं?
सुधि जनों का कहना है कि यदि यही विद्यालय पिछले पांच सालों में खुल जाते तो जनता अपने आप केंद्र की नीयत समझ जाती. अब चुनाव से ठीक पहले इस घोषणा से सरकार "हमाम में नंगा" दिखने लगी है.जाहिर है, राजनीतिक लाभ-हानि का समीकरण इस फैसले के पीछे छिपा हुआ है.फिर भी, इस निर्णय से इनकार नहीं किया जा सकता कि बिहार को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाई मिलेगी. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि राज्य के 16 जिलों में ये विद्यालय स्थापित होंगे. इससे न केवल स्थानीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलेगा बल्कि शिक्षा का स्तर भी ऊंचा उठेगा.
देश में बनेंगे कुल 57 नए केवी
जानकारी के लिए बता दें कि कैबिनेट की बैठक में देशभर में कुल 57 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की मंजूरी दी गई है. इसके लिए 5862 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. इनमें से सबसे ज्यादा 19 केवी स्कूल बिहार में खोले जाएंगे. सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक पूरे देश में फिलहाल 1288 केवी संचालित किए जा रहे हैं, इनमें से 3 विदेश में स्थित हैं, बाकी देश के विभिन्न राज्यों में मौजूद हैं. इन स्कूलों में 13 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं.
किन-किन जिलों में खुलेंगे विद्यालय
ये 19 विद्यालय बिहार के 16 जिलों में स्थापित होंगे। प्रस्तावित सूची में शामिल हैं — सीतामढ़ी, कटिहार, कैमूर (भभुआ), झंझारपुर, मधुबनी, शेखपुरा, मधेपुरा, पटना (वाल्मी, दीघा क्षेत्र), अरवल, पूर्णिया, भोजपुर (आरा), मुज़फ्फरपुर (बेला इंडस्ट्रियल एरिया), मुंगेर, दरभंगा-नंबर 3, भागलपुर (नगर क्षेत्र), बिहारशरीफ (नालंदा), बोधगया आदि.
निष्कर्ष
केंद्र सरकार का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह वास्तविक विकास की पहल है या महज चुनावी रणनीति? जनता को फैसला करना है कि उन्हें शिक्षा का वादा चाहिए या समय पर विकास की गारंटी.
आलोक कुमार


...jpg)




.jpg)

