बुधवार, 1 अक्टूबर 2025

“शिक्षा की सौगात या चुनावी शगुन?”

 


चुनावी मौसम में शिक्षा की सौगात

“शिक्षा की सौगात या चुनावी शगुन?”

पटना.बुधवार को हुई मोदी कैबिनेट की बैठक में केंद्र सरकार ने बिहार में 19 नए केवी स्कूल खोलने की मंजूरी दी है. इस बात की जानकारी केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक्स पर दी. बता दें कि ये सभी 19 स्कूल बिहार के जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में खोले जाएंगे.जब नीतीश कुमार एनडीए से बाहर थे, तब पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय घोषित करने की मांग उठाई जाती रही, लेकिन केंद्र सरकार ने उसे ठुकरा दिया.अब जबकि बिहार में चुनावी बयार बह रही है, केंद्र ने अचानक 19 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की घोषणा कर दी है.यह फैसला निस्संदेह शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, लेकिन समय पर सवाल खड़े करता है.

पांच साल में क्यों नहीं?

सुधि जनों का कहना है कि यदि यही विद्यालय पिछले पांच सालों में खुल जाते तो जनता अपने आप केंद्र की नीयत समझ जाती. अब चुनाव से ठीक पहले इस घोषणा से सरकार "हमाम में नंगा" दिखने लगी है.जाहिर है, राजनीतिक लाभ-हानि का समीकरण इस फैसले के पीछे छिपा हुआ है.फिर भी, इस निर्णय से इनकार नहीं किया जा सकता कि बिहार को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाई मिलेगी. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि राज्य के 16 जिलों में ये विद्यालय स्थापित होंगे. इससे न केवल स्थानीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलेगा बल्कि शिक्षा का स्तर भी ऊंचा उठेगा.

देश में बनेंगे कुल 57 नए केवी

जानकारी के लिए बता दें कि कैबिनेट की बैठक में देशभर में कुल 57 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की मंजूरी दी गई है. इसके लिए 5862 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. इनमें से सबसे ज्यादा 19 केवी स्कूल बिहार में खोले जाएंगे. सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक पूरे देश में फिलहाल 1288 केवी संचालित किए जा रहे हैं, इनमें से 3 विदेश में स्थित हैं, बाकी देश के विभिन्न राज्यों में मौजूद हैं. इन स्कूलों में 13 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं.

किन-किन जिलों में खुलेंगे विद्यालय

ये 19 विद्यालय बिहार के 16 जिलों में स्थापित होंगे। प्रस्तावित सूची में शामिल हैं — सीतामढ़ी, कटिहार, कैमूर (भभुआ), झंझारपुर, मधुबनी, शेखपुरा, मधेपुरा, पटना (वाल्मी, दीघा क्षेत्र), अरवल, पूर्णिया, भोजपुर (आरा), मुज़फ्फरपुर (बेला इंडस्ट्रियल एरिया), मुंगेर, दरभंगा-नंबर 3, भागलपुर (नगर क्षेत्र), बिहारशरीफ (नालंदा), बोधगया आदि.

निष्कर्ष

केंद्र सरकार का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह वास्तविक विकास की पहल है या महज चुनावी रणनीति? जनता को फैसला करना है कि उन्हें शिक्षा का वादा चाहिए या समय पर विकास की गारंटी.


आलोक कुमार

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मंगलवार, 30 सितंबर 2025

“सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है”

 “सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है”


पटना. “सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है” – इस वाक्य का साक्षात रूप है कैथोलिक मेडिकल मिशन सिस्टर्स सोसाइटी. आज से ठीक सौ वर्ष पहले, 30 सितंबर 1925 को वाशिंगटन डी.सी. में डॉ. अन्ना डेंगेल ने जो बीज बोया था, वह आज सेवा, करुणा और समर्पण का विशाल वृक्ष बन चुका है.

    डॉ. डेंगेल का दर्द उस समय से जुड़ा है, जब रावलपिंडी में उन्होंने मुस्लिम महिलाओं और नवजात शिशुओं को स्त्री रोग संबंधी सेवाओं के अभाव में मरते देखा.यह पीड़ा उन्हें विवश कर गई कि स्त्रियों की सेवा, चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक ऐसी सोसाइटी बने, जो जाति, धर्म और लिंग से ऊपर उठकर केवल मानवता के लिए काम करे.

       भारत की धरती से उनका रिश्ता भी बेहद खास रहा.1939 में पटना सिटी की पादरी की हवेली में जब उनका स्वागत “होली फैमिली” कहकर किया गया, तब उन्होंने उसी नाम से माइनर हॉस्पिटल की नींव रख दी. यही अस्पताल आगे चलकर कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल के रूप में मानव सेवा का केंद्र बना. दिलचस्प तथ्य यह भी है कि यहां नर्सिंग ट्रेनिंग प्राप्त करने वालों में मदर टेरेसा जैसी महान आत्मा भी शामिल थीं.

     मिशन सिस्टर्स ने केवल अस्पताल ही नहीं खोले, बल्कि “मानवता की मशाल” को फैलाने का अभियान छेड़ा. दिल्ली के ओखला में 1953 का होली फैमिली हॉस्पिटल, रांची के मंदार और कोडरमा के अस्पताल, मुंबई और पूना के मिशन केंद्र—ये सब उनके अथक परिश्रम के प्रतीक हैं. उनकी कार्यशैली का मूल मंत्र रहा – न्याय, शांति और करुणा. 

    हालांकि बीते दशकों में कई संस्थानों का प्रबंधन अन्य संगठनों को सौंपना पड़ा. मंदार का नर्सिंग स्कूल अब कॉन्स्टेंट लिवेन्स स्कूल ऑफ नर्सिंग बन गया है, मुंबई का अस्पताल उर्सुलाइन ऑफ मैरी इमैक्युलेट के पास है, वहीं दिल्ली और झारखंड के अस्पताल भी नए हाथों में चले गए.लेकिन मिशन सिस्टर्स का योगदान किसी इमारत से नहीं, बल्कि उस भावना से मापा जाता है जिन्होंने समाज में बोई.

    आज भी सिस्टर नशा मुक्ति केंद्रों, वैकल्पिक चिकित्सा केंद्रों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में जुटी हुई है. समग्र उपचार मिशन और आयुष्य सेंटर जैसी पहलें उसकी सेवा-पथ की नई दिशाएं खोल रही हैं.

       सौ साल पूरे होने पर हमें याद रखना चाहिए कि यह संस्था केवल ईंट-पत्थर की इमारतों का नाम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता की परंपरा है. डॉ. अन्ना डेंगेल ने जिस आग को सौ साल पहले जलाया था, वह आज भी सिस्टरों के समर्पित जीवन में उजाला फैलाती है.

        आज का दिन सिर्फ एक संस्थान की वर्षगांठ नहीं, बल्कि उस विचार की पुनः स्मृति है कि – समाज में असली धर्म वही है, जो मानव सेवा से जुड़ा हो.डॉ. अन्ना डेंगेल को नमन, और कैथोलिक मेडिकल मिशन सिस्टर्स सोसाइटी को उनकी शताब्दी पर हार्दिक बधाई!


आलोक कुमार

सोमवार, 29 सितंबर 2025

मुख्यमंत्री ने समस्त बिहार वासियों को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं दीं

 

पटना. मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने आज महासप्तमी पर्व के अवसर पर श्री श्री दुर्गा पूजा महोत्सव शिव मंदिर खाजपुरा तथा श्री श्री दुर्गा आश्रम शेखपुरा के पंडाल में जाकर माँ दुर्गा का दर्शन कर पूजा अर्चना की.मुख्यमंत्री जी ने राज्य की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की.मुख्यमंत्री जी ने इस अवसर पर समस्त बिहार वासियों को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं दीं.

इस दौरान माननीय मुख्यमंत्री जी ने खाजपुरा स्थित शिव मंदिर में पूजा अर्चना भी की.इससे पहले माननीय मुख्यमंत्री जी ने उप मुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा के सरकारी आवास पर जाकर माँ दुर्गा की पूजा अर्चना की एवं महाआरती कार्यक्रम में शामिल हुये.

  मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने आज 1 अणे मार्ग स्थित 'संकल्प' में 11,921 करोड़ रुपये की 20,658 योजनाओं का शिलान्यास / कार्यारंभ एवं उद्घाटन किया.इसके अंतर्गत 7,805 करोड़ रुपये की लागत से जन सुविधा एवं विकास से संबंधित 16,065 योजनाओं का शिलान्यास / कार्यारंभ तथा 4,116 करोड़ रुपये की लागत की 4,593 योजनाओं का उद्घाटन कार्य शामिल है.

आज के कार्यक्रम के अंतर्गत भवन निर्माण विभाग एवं बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा क्रियान्वित विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा, पशु एवं मत्स्य संसाधन, समाज कल्याण, परिवहन, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, खेल, श्रम संसाधन, राजस्व एवं भूमि सुधार, कला संस्कृति एवं युवा, आपदा प्रबंधन, गृह, कृषि, सामान्य प्रशासन एवं वाणिज्य कर विभाग के भवनों के निर्माण से संबंधित 997 करोड़ रुपये लागत की 97 योजनाओं का शिलान्यास / कार्यारंभ तथा 2467 करोड़ की लागत से 137 योजनाओं का उद्घाटन किया गया.

     मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज के शिलान्यास, कार्यारंभ एवं उद्घाटन कार्य के लिए सभी संबद्ध विभाग को बधाई देता हूं.इन योजनाओं के शुरू होने से राज्य में विकास कार्यों को नई गति और दिशा मिलेगी। इसका प्रत्यक्ष लाभ लोगों को मिलेगा, जिससे उनका जीवन-स्तर और बेहतर होगा.


आलोक कुमार

रविवार, 28 सितंबर 2025

भारत का लोकतंत्र अपनी विविधता और बहुलता पर गर्व

 

*धर्मांतरण-विरोधी कानून और लोकतंत्र की चुनौती

* धर्म की स्वतंत्रता पर पहरा, लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है

मैंगलोर,(आलोक कुमार).भारत का लोकतंत्र अपनी विविधता और बहुलता पर गर्व करता है. परंतु विडंबना यह है कि जिन मूल्यों पर यह लोकतंत्र खड़ा है, उन्हीं को आज धर्मांतरण-विरोधी कानूनों के नाम पर चोट पहुंचाई जा रही है.वर्तमान में 12 राज्यों में लागू ये कानून सिर्फ़ कानूनी प्रावधान नहीं हैं, बल्कि भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त आस्था, विवेक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं.

धर्म की स्वतंत्रता पर पहरा, लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है

ऑल इंडिया काथलिक यूनियन (एआईसीयू) की आम सभा ने इन कानूनों को "भारतीय लोकतंत्र पर घाव" करार दिया है. यह संगठन 106 वर्षों की विरासत के साथ देशभर के काथलिकों की सबसे बड़ी आवाज़ है. मैंगलोर में आयोजित बैठक में स्पष्ट कहा गया कि ये कानून न केवल स्वतंत्रता को सीमित करते हैं बल्कि धार्मिक अल्पसंख्यकों — विशेषकर ईसाई, मुस्लिम, दलित और आदिवासी समुदायों — को अपराधी ठहराने का औजार बन गए हैं.

आस्था का चुनाव अदालत का नहीं, अंतरात्मा का विषय है

ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि इन कानूनों का दायरा पिछले दशक में तेज़ी से बढ़ा है। राजस्थान, कर्नाटक, हरियाणा से लेकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात तक, लगभग सभी भाजपा-शासित राज्यों ने इन्हें लागू किया या मजबूत किया है. इन प्रावधानों में "बहलाना", "ज़बरदस्ती" या "कपटपूर्ण तरीका" जिससे अस्पष्ट शब्द शामिल हैं, जो किसी भी धर्मांतरण को अवैध ठहराने का आधार बन सकते हैं.यह स्थिति व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता को मजिस्ट्रेट की अनुमति तक सीमित कर देती है — यह लोकतंत्र का नहीं बल्कि अधिनायकवाद का संकेत है.

पत्रकार और विश्लेषक जॉन दयाल का कहना है

पत्रकार और विश्लेषक जॉन दयाल का कहना है कि इन कानूनों के पीछे "जनसंख्या संतुलन" का डर खड़ा किया गया है.हिंदू राष्ट्रवादी समूहों द्वारा यह नैरेटिव फैलाया जाता है कि अल्पसंख्यक समुदायों की संख्यात्मक वृद्धि से बहुसंख्यक हिंदू पहचान खतरे में पड़ जाएगी. यही सोच भारत की सामाजिक समरसता और धार्मिक स्वतंत्रता पर सबसे बड़ा आघात है.ख़ास तौर पर चिंताजनक यह है कि दलित, आदिवासी और महिलाओं के धर्मांतरण को लेकर कठोर दंड का प्रावधान है.मानो इन्हें अपनी आस्था चुनने का अधिकार ही नहीं है.यह उन सामाजिक समूहों को नियंत्रण में रखने का प्रयास है, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रखा गया है.

भारत का भविष्य बहुलता में है, संकीर्णता में नहीं

एआईसीयू की सभा का संदेश स्पष्ट है: धार्मिक स्वतंत्रता सिर्फ़ किसी एक समुदाय का मुद्दा नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के अस्तित्व का सवाल है। जब आस्था के चुनाव पर पाबंदी लगाई जाएगी, तब लोकतंत्र का असली चरित्र खो जाएगा.आज ज़रूरत है कि भारत का न्यायपालिका और नागरिक समाज मिलकर इन कानूनों की असंवैधानिकता पर गंभीर बहस करें। लोकतंत्र तभी जीवित रहेगा जब हर नागरिक बिना भय और दबाव के अपने विवेक का पालन कर सके.धर्म और आस्था पर अंकुश लगाना किसी राष्ट्र की शक्ति नहीं, बल्कि उसकी कमजोरी का प्रतीक है। भारत को अपने बहुलतावाद और संवैधानिक मूल्यों पर गर्व होना चाहिए — न कि उन पर संदेह.


आलोक कुमार

शनिवार, 27 सितंबर 2025

डॉ. एस. एन. सुब्बा राव (भाई जी)


 डॉ. एस. एन. सुब्बा राव (भाई जी)

पटना.एक युगद्रष्टा समाजसेवी और युवा प्रेरक भारतीय समाज ने अनेक संत, समाज सुधारक और राष्ट्रसेवक देखे हैं, लेकिन डॉ. एस. एन. सुब्बा राव, जिन्हें देश “भाई जी” के नाम से जानता है, उनमें से सबसे विलक्षण रहे.उनका जीवन सेवा, साहस और समर्पण का जीवंत उदाहरण है. 7 फरवरी 1929 को कर्नाटक के सेलम (बैंगलोर के निकट) में जन्मे भाई जी आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी 96वीं जयंती हमें उनके कार्यों और विचारों को पुनः याद करने का अवसर देती है.

चंबल के डाकुओं को अहिंसा के मार्ग पर

सत्तर का दशक. चंबल घाटी डाकुओं के आतंक से कांप रही थी. खून-खराबा, लूटपाट और भय उस इलाके की पहचान बन चुके थे. ऐसे समय में भाई जी ने गांधीवादी तरीके से संवाद, धैर्य और मानवता का सहारा लिया. उन्होंने डाकुओं को न केवल आत्मसमर्पण के लिए तैयार किया, बल्कि उन्हें खेती-किसानी, कुटीर उद्योग और अहिंसक जीवन का प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा में वापस लाए. चंबल का इतिहास इस तथ्य का साक्षी है कि एक व्यक्ति की करुणा और दृढ़ता समाज की दिशा बदल सकती है.

युवाओं के लिए “भाई जी”

भाई जी का विश्वास था कि राष्ट्र की असली ताकत उसकी युवा पीढ़ी है.उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना की भावना को आगे बढ़ाते हुए “राष्ट्रीय युवा योजना” की स्थापना की. यह योजना युवाओं के लिए केवल कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि जीवन का संदेश थी – “युवा ही राष्ट्र की धड़कन हैं, उन्हें सही दिशा मिले तो देश बदल सकता है.

”उनकी अपील सरल लेकिन गहरी थी –

एक घंटा देश को और एक घंटा देह को ”

युवाओं से अपेक्षा थी कि वे प्रतिदिन अपने देश की सेवा में एक घंटा दें और अपने स्वास्थ्य के लिए भी एक घंटा निकालें। यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था.

सद्भावना की रेल यात्रा

भाई जी ने केवल युवाओं को संगठित नहीं किया, बल्कि उन्हें देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा बनाया.1990 के दशक की सद्भावना रेल यात्रा इसका उदाहरण है. यह तीन चरणों में पूरे देश से होकर गुज़री और जहाँ-जहाँ पहुँची, वहाँ सर्वधर्म प्रार्थना सभाओं और रैलियों के जरिए सामाजिक एकता का संदेश दिया.धर्म, जाति और भाषा के भेदभाव को मिटाकर भाईचारे की भावना जगाने में उनका योगदान अद्वितीय रहा.

राहत और पुनर्वास में सदैव अग्रणी

प्राकृतिक आपदाओं या दंगों से पीड़ित इलाकों में भाई जी और उनके युवा स्वयंसेवक सबसे पहले पहुँचते थे। चाहे बाढ़ हो, चक्रवात, भूकंप या दंगे – वे तुरंत राहत शिविर लगवाते और मानवता की सेवा में जुट जाते। यही कारण था कि वे केवल समाजसेवी नहीं, बल्कि युवा शक्ति के मार्गदर्शक माने गए.

संवाद और संगीत की ताकत

भाई जी की सबसे बड़ी शक्ति का संवाद था. वे देश की लगभग हर प्रमुख भाषा में संवाद कर सकते थे.उनकी मधुर आवाज़ में गाए गए भजन और सामूहिक गीत लोगों को झकझोर देते थे. बच्चे उन्हें “फुग्गावाले दादा जी” कहते थे क्योंकि वे हमेशा जेब में गुब्बारे रखते और मासूम चेहरों पर मुस्कान बिखेर देते. युवाओं के लिए वे “भाई जी” और चंबल के आत्मसमर्पित बागियों के लिए “सुब्बाराम” बन गए.

आज की प्रासंगिकता

आज का युवा बेरोजगारी, नशाखोरी, और आडंबर की दुनिया में उलझा है। ऐसे समय में भाई जी का जीवन हमें याद दिलाता है कि सही दिशा, सेवा भाव और दृढ़ संकल्प से ही युवाओं की ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में लगाई जा सकती है। उन्होंने दिखाया कि जब युवा अपने भीतर की शक्ति को पहचानता है, तो समाज की सबसे बड़ी समस्या भी हल हो सकती हैं.

निष्कर्ष

भाई जी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि “सेवा ही सच्ची साधना है.” उनकी 96वीं जयंती पर यही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारे, समाज सेवा के प्रति अपने संकल्प को मजबूत करें और राष्ट्र की एकता-अखंडता के लिए काम करें.

* भाई जी ने अपने जीवन से यह सिद्ध कर दिया कि दृढ़ संकल्प से असंभव संभव है.

* अहिंसा केवल विचार नहीं, बल्कि बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है.

* और युवा शक्ति ही भारत की सबसे बड़ी पूंजी है.

डॉ. एस. एन. सुब्बा राव – एक नाम नहीं, बल्कि सेवा और प्रेरणा की जीवित विरासत हैं.

आलोक कुमार

शुक्रवार, 26 सितंबर 2025

61 योजनाओं का शिलान्यास किया

 दरभंगा. मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने आज दरभंगा में मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान, दरभंगा के परिसर में आयोजित कार्यक्रम स्थल से 3463.2 करोड़ रुपये लागत की कुल 97 योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया. इसमें 96.47 करोड़ रुपये की लागत से कुल 36 विकासात्मक योजनाओं का उद्घाटन एवं 3366.73 करोड़ रुपये की लागत की 61 योजनाओं का शिलान्यास किया गया.

            इन योजनाओं से जिले में विकास कार्यों को नई गति एवं दिशा मिलेगी, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार होगा एवं उन्हें इसका प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा. इसके पश्चात् माननीय मुख्यमंत्री जी ने मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान, दरभंगा के परिसर में ही आयोजित संवाद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित पेंशनधारी लाभुकों, जीविका दीदियों, आंगनबाड़ी सेविका / सहायिका सहित अन्य लाभुकों के साथ संवाद किया.

       इसके पश्चात् माननीय मुख्यमंत्री जी ने मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया. उन्होंने मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान परिसर के प्रशासनिक भवन में पांडुलिपियों का बारीकी से अवलोकन किया. साथ ही माननीय मुख्यमंत्री जी ने मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान को एन.एच.- 77 से संपर्कता प्रदान करने के  लिए प्रशासनिक पथ का अवलोकन किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.


आलोक कुमार

गुरुवार, 25 सितंबर 2025

उप विकास आयुक्त सुमित कुमार ने किया युक्तधारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

 जिला ग्रामीण विकास अभिकरण बेतिया द्वारा युक्तधारा पोर्टल पर प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

उप विकास आयुक्त सुमित कुमार ने किया युक्तधारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ


बेतिया. इस समय देश और प्रदेश में युक्तधारा पोर्टल के उपयोग को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है.इस पोर्टल को केंद्र सरकार ने विकसित किया है और इसका उद्देश्य ग्रामीण विकास के कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करना और कृषि विकास में सहायक होता है.पश्चिमी चंपारण के बेतिया मुख्यालय में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण बेतिया द्वारा युक्तधारा पोर्टल पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का उप विकास आयुक्त सुमित कुमार ने शुभारंभ किया था.

    मनरेगा योजना अंतर्गत युक्तधारा पोर्टल के विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. उप विकास आयुक्त बेतिया, श्री सुमित कुमार (भा०प्र०से०) द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई. महात्मा गांधी मनरेगा योजना अंतर्गत ग्राम पंचायतों में योजनाओं का चयन GIS (जीआईएस) के आधार पर ‘युक्तधारा‘ पोर्टल के माध्यम से किया जाता है.

उप विकास आयुक्त द्वारा बताया गया कि पंचायत स्तर पर मनरेगा योजनाओं का GIS based Planning एवं monitoring युक्तधारा  पोर्टल के माध्यम से किया जाता है,  जो) वित्तीय वर्ष 2026-27 (1 अप्रैल, 2026) से प्रभावी होगा.जिसके लिए जिला अंतर्गत सभी कार्यक्रम पदाधिकारियों, तकनीकी कर्मियों एवं पंचायत रोजगार सेवकों को युक्तधारा के उपयोग के लिए   प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे कि कर्मियों द्वारा पंचायत स्तर पर मानक अनुरूप कार्य हो सके.

उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में निदेशक (रा०नि०का०) श्री पुरुषोत्तम त्रिवेदी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मनरेगा, जिला वित्तीय प्रबंधक मनरेगा, कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता मनरेगा आदि उपस्थित रहे.


आलोक कुमार


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