* जिला में आज 44 अमृत सरोवर के निर्माण कार्य का किया गया शिलान्यास
आलोक कुमार
आलोक कुमार हूं। ग्रामीण प्रबंधन एवं कल्याण प्रशासन में डिप्लोमाधारी हूं। कई दशकों से पत्रकारिता में जुड़ा हूं। मैं समाज के किनारे रह गये लोगों के बारे में लिखता और पढ़ता हूं। इसमें आप लोग मेरी मदद कर सकते हैं। https://adsense.google.com/adsense/u/0/pub-4394035046473735/myads/sites/preview?url=chingariprimenews.blogspot.com chingariprimenews.com
* जिला में आज 44 अमृत सरोवर के निर्माण कार्य का किया गया शिलान्यास
आलोक कुमार
इस जिले के जिला पदाधिकारी मनेश कुमार मीणा के आदेशानुसार जिला अंतर्गत सभी प्रखंडों में पेयजल समस्या से निजात दिलाने के लिए चलंत मरम्मती दलों द्वारा प्रतिदिन 20 से 30 चापाकलों की मरम्मती कराया जा रहा है.अब तक जिला के कुल 1603 चापाकलो की मरम्मती कराकर चालू करा दिया गया है.किसी भी सरकारी चापाकल के बंद होने अथवा पेयजल समस्या की सूचना सीतामढ़ी जिला के पी0एच0ई0डी0 कंट्रोल रूम के नंबर 06226-251818 पर सुबह 10ः00 बजे से शाम 5ः00 बजे तक फोन कर सूचना दिया जा सकता है. पेयजल से संबंधित किसी प्रकार की समस्या होने पर विभाग के कंट्रोल रूम अथवा टोल फ्री नंबर 18001231121 पर फोन कर जानकारी दी जा सकती है.
आलोक कुमार
जिला पदाधिकारी द्वारा बाढ़ पूर्व तैयारी को लेकर सभी प्रखंडों के नोडल पदाधिकारी के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया...
बैठक में उन्होंने बाढ़ पूर्व तैयारी की स्थिति की जांच को लेकर सभी प्रखंडों के नोडल पदाधिकारी को निर्देश दिया कि दो दिनों के अंदर अपने प्रखंड में जांच करें कि पिछले वर्ष की बाढ़ में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मती की स्थिति, अंचल में उपलब्ध सरकारी नाव एवं उसकी मरम्मती की स्थिति, निजी नाव मालिकों के साथ एकरारनामा की स्थिति, मानव शरण स्थल एवं पशु शरण स्थल की भौतिक जांच एवं आवश्यक व्यवस्था (पेयजल,शौचालय, बिजली आदि की उपलब्धता), बाढ़ आपदा से बचाव हेतु प्रखंड स्तरीय माइक्रोप्लानिंग (शरण स्थली, सामुदायिक किचेन आदि) में मानव बल की प्रतिनियुक्ति एवं उनके वैक्सीनेशन की स्थिति, तटबंध प्रहरी की उपलब्धता आदि का भौतिक सत्यापन कर दो दिनों के अंदर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराये.
उक्त बैठक में वरीय पदाधिकारी आपदा रविंद्र नाथ गुप्ता,प्रभारी पदाधिकारी आपदा शंभूनाथ, जिला शिक्षा पदाधिकारी अवधेश कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी अनिल कुमार, जिला भू अर्जन पदाधिकारी विश्वजीत हेनरी, वरीय उप समाहर्ता सोनी कुमारी, जिला योजना पदाधिकारी राकेश कुमार, ओएसडी प्रशांत कुमार के साथ सभी प्रखंड नोडल पदाधिकारी उपस्थित थे.
आलोक कुमार
जिलाधिकारी श्री शशांक शुभंकर ने आज बिहार शरीफ नगर निगम क्षेत्र के नल जल योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की.वार्ड नंबर 15, 16, 19 एवं 20 में 25 मई तक सभी घरों में जलापूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश संवेदक को दिया गया. 25 मई के बाद इन सभी 4 वार्डों के सभी घरों का सर्वे नगर निगम द्वारा किया जाएगा.अगर कोई भी घर जलापूर्ति से वंचित पाया जाएगा तो विलंब अवधि के लिए प्रतिदिन प्रति वार्ड के आधार पर संवेदक के विरुद्ध आर्थिक पेनल्टी लगाई जाएगी, जिसकी कटौती संवेदक को भुगतेय राशि से की जाएगी.
अन्य सभी वार्डों में 2 जून तक सभी छूटे हुए घरों में जलापूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश संवेदक को दिया गया। निर्धारित तिथि के बाद विलंब की अवधि के लिए प्रतिदिन प्रतिवार्ड के आधार पर संवेदक के विरुद्ध आर्थिक पेनाल्टी लगाई जाएगी.नगर निगम क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने के लिए सड़क किनारे की गई खुदाई को भी 2 जून तक दुरुस्त करने का स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया. अन्यथा बुडको के स्थानीय अभियंता एवं संवेदक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी.इसके कारण अगर किसी तरह की दुर्घटना होगी तो संवेदक के विरुद्ध सीधा प्राथमिकी दर्ज किया जाएगा.बैठक में नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त, बुडको के सहायक अभियंता, संवेदक प्रतिनिधि आदि उपस्थित थे.
आलोक कुमार
गया. माननीय मुख्यमंत्री, बिहार, की अध्यक्षता में संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ के पूर्व तैयारियों की समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी प्रमंडलीय आयुक्त, सभी पुलिस महानिरीक्षक, सभी जिला पदाधिकारी एवं सभी वरीय पुलिस अधीक्षक के साथ की गई.’समीक्षा के क्रम में आगामी बाढ़, अतिवृष्टि एवं सुखाड़ आपदा से बचाव की पूर्व तैयारी की समीक्षा संबंधित विभाग द्वारा कार्य योजना पर विस्तृत रूप से की गई एवं संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए.
आपदा प्रबंधन विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पथ निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग , लघु जल संसाधन विभाग, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग , कृषि विभाग के द्वारा आगामी बाढ़, अतिवृष्टि एवं सूखाड़ आपदा से संबंधित कार्य योजना की विस्तार से जानकारी दी गयी.बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ राहत केंद्र , खाद्यान्न वितरण , नाव की व्यवस्था, एनडीआरएफ , एसडीआरफ की व्यवस्था , पशुचारा की व्यवस्था , पीने योग्य पानी की व्यवस्था , कटाव निरोधक कार्य , तटबंधों की निगरानी , बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली , कोविड-19 टेस्टिंग , वैक्सीनेशन , महामारी से बचाव के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव , सतत निगरानी के लिए सुरक्षा व्यवस्था , सड़क एवं पुल पुलिया की मरम्मती , ऊंचा शरणस्थल का चयन , पॉलिथीन शीट की समुचित व्यवस्था , आपातकालीन केंद्र , एंबुलेंस ,साफ सफाई, सूखा राशन वितरण , शरणार्थियों के लिए राहत केंद्र , सामुदायिक किचेन , स्वस्थ व्यवस्था आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई एवं संबंधित पदाधिकारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए.गया जिले के समीक्षा के दौरान जिला पदाधिकारी, गया डॉ० त्यागराजन एसएम ने बताया कि अप्रैल माह में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक देखा गया है. मई माह में 45 डिग्री तापमान आंका गया है। अप्रैल माह में औसतन तापमान 41 डिग्री रहा है, मई में 38.2 रहा है। इस वर्ष पिछले वर्ष से 3.50 डिग्री तापमान ज्यादा है.
भूगर्भ जल स्तर के समीक्षा के दौरान बताया कि गया जिला में औसतन 30.44 फीट जल स्तर है. पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 1 फीट नीचे जलस्तर गया है तथा वर्ष 2019 में आज की तिथि में 43 फीट जलस्तर था.उन्होंने बताया कि गया जिले में 41 क्रिटिकल पंचायत चिन्हित किया गया है. संबंधित पंचायतों में विभिन्न पदाधिकारियों द्वारा भ्रमण करते हुए चापाकल मरम्मत एवं नल जल योजना को चालू कराया गया है. इसके साथ ही नगर निगम क्षेत्र में 19 वार्ड चिन्हित किए गए हैं, जहां जलापूर्ति सुचारू रहे उसके लिए लगातार नजर रखी जा रही है. इसके साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में 297 टोला चिन्हित किए गए हैं, जिनमें अतरी, नीमचक बथानी, वजीरगंज, बाराचट्टी एवं मोहनपुर प्रखंड शामिल है. इन सभी टोलो में पेयजल व्यवस्था के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है.
नल जल योजना के समीक्षा के दौरान उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन महीनों में नल जल योजना का संपूर्ण सर्वेक्षण करवाया गया है. मार्च के प्रथम सप्ताह में 552 अक्रियाशील योजनाओं को चिन्हित किए गए हैं, जिसमें वर्तमान में 130 अक्रियाशील बचे हुए हैं, शेष सभी को मरम्मत करवाते हुए जलापूर्ति चालू करवा लिए गए हैं. उन्होंने बताया कि आज की तिथि में जो अक्रियाशील योजना का बंद रहने के कारण भूगर्भ जल स्तर काफी नीचे जाना, विभिन्न सड़क निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण के दौरान जलापूर्ति के पाइप लाइन को हानि/ टूटना शामिल है, जिसे संबंधित सड़क विभाग के एजेंसियों एवं पदाधिकारियों से संबंध स्थापित करते हुए तेजी से मरम्मत करवाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि पेयजल से संबंधित शिकायत के लिए नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है, जिसमें अब तक 584 शिकायतें आए हैं. सभी शिकायतों को निष्पादन किया जा रहा है. अप्रैल माह में प्रत्येक दिन औसतन 35 से 40 शिकायतें आते थे, जो अब घटकर करके प्रतिदिन दो से तीन शिकायतें आ रहे हैं.
गया नगर निगम क्षेत्र में कुल 81 चापाकल मरम्मत करवाए गए हैं तथा पर्याप्त जगह स्टैंड पोस्ट तथा पियाऊ लगाए गए हैं. जरूरत के अनुसार पानी की शिकायत आने वाले वार्डो एवं टोलो में टैंकर के माध्यम से भी पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है.कैटल ट्रफ के समीक्षा के दौरान बताया गया कि 28 कैटल टर्फ के विरुद्ध 25 कैटल टर्फ कार्यरत है। तीन सोलर प्लेट खराब होने के कारण कैटल टर्फ बंद है. दो-तीन दिनों के अंदर उसे मरम्मत कराते हुए चालू करवा दिए जाएंगे.
आपदा विभाग के समीक्षा के दौरान उन्होंने बताया कि अप्रैल माह में अत्यधिक गर्मी होने के कारण आगजनी की घटनाएं ज्यादा हुई है.पिछले वर्ष में कुल 22 घटना हुई थी, इस वर्ष 71 घटनाएं हुई हैं. साथ ही फसल क्षति 219 एकड़ हुए हैं तथा 22 पशु का मृत्यु हुई है तथा 70 झोपड़ी नष्ट हुए हैं. उन्होंने कहा कि सभी मामलों को बेहतर समन्वय करते हुए मुआवजा दिलवाने का कार्य कर लिया गया है.इसके साथ ही सुखाड़ को ध्यान में रखते हुए आकाशमिक फसल योजना से संबंधित प्रतिवेदन कृषि विभाग को उपलब्ध करा दिया गया है.
जलजमाव के समीक्षा के दौरान उन्होंने बताया कि गया जिले में बड़े बड़े नालों को साफ सफाई तेजी से करवाए जा रहे हैं. मानसरव नाला को विशेष रूप से साफ सफाई की व्यवस्था रखी गई है.हीटवेव के समीक्षा के दौरान उन्होंने बताया कि हीटवेव के लिए जिले में पूरी तैयारी रखी गई है. 32 जागरूकता वाहन द्वारा घूम घूम कर लोगों को हीटवेव से बचाव के लिए जागरूक करवाया जा रहा है. इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग तथा आपदा विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार की एडवाइजरी जारी किए गए हैं, जिस डिस्टिक एडमिनिस्ट्रेशन के सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है.ग्रामीण चिकित्सकों को भी ट्रेनिंग के माध्यम से जागरूक किया गया है ताकि हीटवेव के मरीज आने पर उन्हें किस तरह से उपचार किया जा सके. सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडलीय अस्पताल, जिला अस्पताल तथा मगध मेडिकल अस्पताल में हीटवेव से पीड़ित मरीजों के लिए सभी पर्याप्त व्यवस्थाएं रखी गई है. सभी अस्पतालों में सेपरेट बेड रखे गए हैं. सभी प्रकार की दवाएं भी उपलब्ध है. सभी एंबुलेंस में आइस बैग रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर हीट वेब वाले मरीजो में प्रयोग किया जा सके.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में माननीय मुख्यमंत्री बिहार ने गंगाजल पानी को गया जिला में लाने के पश्चात डोर टू डोर सप्लाई के लिए बिछाया जा रहे पाइपलाइन के संबंध में जानकारी प्राप्त किया. उन्होंने संबंधित अभियंताओं को निर्देश दिया कि गंगाजल का पानी लोगों को डोर टू डोर पहुंचाने के लिए तेजी से कार्य करें. माननीय मुख्यमंत्री ने पाइप लाइन बिछाने के कार्य में मैन पावर बढ़ाकर अति शीघ्र कार्य पूर्ण कराने का निर्देश दिए. साथ ही उन्होंने जिला पदाधिकारी गया को लगातार उसका अनुश्रवण करने का निर्देश दिए.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में वरीय पुलिस अधीक्षक श्रीमती हरप्रीत कौर, नगर आयुक्त गया नगर निगम श्रीमती अभिलाषा शर्मा, अपर समाहर्ता , वरीय समाहर्ता आपदा , वरीय उप समाहर्ता अमित पटेल, जिला कृषि पदाधिकारी, सिविल सर्जन, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, कार्यपालक अभियंता जल संसाधन विभाग सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे.
आलोक कुमार
प्रशासनिक सुधारों के जरिए नागरिकों और सरकार को नजदीक लाने के विषय पर श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन श्रीनगर में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के सहयोग से सम्पन्न हुआ. उक्त महत्वपूर्ण सम्मेलन का आयोजन पीएमओ की पहल पर केंद्र सरकार के प्रशासनिक सुधार व जन शिकायत विभाग और जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा किया गया.डॉ0 जितेंद्र सिंह, पृथ्वी विज्ञान और विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री ने सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन किया. इस अवसर पर डीएआरपीजी के सचिव, श्री वी0 श्रीनिवास सहित कई वरीय अधिकारी और माननीय जनप्रतिनिधिगण शामिल हुए.
सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर के संगठनों को एक ही मंच पर लाना है ताकि उनके अनुकूलन, प्रकृति और आगे के नवाचार को सुविधाजनक बनाने के लिए सुशासन पहल के निर्माण और कार्यान्वयन में अनुभव साझा किया जा सके.जिलाधिकारी द्वारा सम्मेलन के दौरान उपस्थित गणमान्यों से साझा किया गया कि वैश्विक कोविड आपदा के समय पश्चिमी चम्पारण जिला ने कैसे श्रमिकों को मालिक बनाया, कैसे कम से कम समय में चनपटिया स्टार्टअप जोन (बेतिया मॉडल) को विकसित किया गया, कैसे प्लग एंड प्ले मॉडल पर एक के बाद एक उद्यम अधिष्ठापित होते चले गए, कैसे चनपटिया स्टार्टअप जोन के प्रोडक्ट्स देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपना परचम लहरा रहे हैं.जिलाधिकारी द्वारा सम्मेलन में बताया गया कि श्रम का सम्मान करते हुए कामगारों/श्रमिकों के हुनर को जिला प्रशासन के द्वारा पहचानते हुए उन्हें लेबर से सीधे ऑनर बनाया गया है.
स्किल मैपिंग के दौरान मुख्य रूप से टेक्सटाइल एंड एपरिल, फूटवेयर, बम्बू एंड क्राफ्ट इत्यादि विधा में इसके पारंगत होने की जानकारी प्राप्त हुई. इन क्षेत्रों में उनकी पारंगता जानकारी भविष्य में इन कामगारों से संपर्क करने के लिए उद्यम मित्र मंडल का निर्माण किया गया.जिला पदाधिकारी के द्वारा वापस लौटे कामगारों के लिए कोरोना जैसी ’आपदा’ में ’अवसर’ की तलाश करने का प्रयास किया.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 के अगस्त माह में लुधियाना, अमृतसर, सूरत, दिल्ली, मुंबई इत्यादि जगहों से भाग लेने आये 30 से ज्यादा कामगारों के साथ बैठक कर कार्ययोजना तैयार की गई तथा उन्हीं से उद्यम स्थापित करने की दिशा में किये जाने वाले कामों की जानकारी और सुझाव लिया गया.उनसे आवश्यकताओं की जानकारी भी ली गयी और राज्य सरकार के द्वारा जिला औद्योगिक नवप्रवर्तन योजना के तहत दिए जाने वाले लाभों से अवगत कराया गया.
मुख्य रूप से सड़क से सम्बद्ध स्थान, 24×7 के तर्ज पर थ्री फेज बिजली और राशि की आवश्यकता बतलाई गयी. आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बैंक के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर ऋण मेला का आयोजन करते हुए हुए आर्थिक सहायतार्थ ऋण दिलवाया गया.स्थान के लिए 20 एकड़ में फैले बाजार समिति के अनुपयोगी पड़े वेयरहाउस को चिन्हित किया गया और बिजली के लिए उच्चाधिकारियों से वार्ता कर डेडिकेटेड ट्रांसफार्मर की व्यवस्था कराई गई. सभी प्रकार के कागजातों को तैयार करने, ऋण दिलाने में सहायता प्रदान करने या यूं कहें प्रत्येक स्तर पर सहायता करने के लिए जिला स्तरीय एक-एक पदाधिकारी को सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट (स्पोक) के रूप में प्राधिकृत किया गया.
इसके साथ ही कामगारों के द्वारा लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के कंप्यूटर एडेड इक्विपमेंट का आयात करना शुरू किया गया और इस प्रकार से चनपटिया के 20 एकड़ में फैले बाजार समिति में जिले का प्रथम स्टार्टअप की शुरुआत की गई. इस दरम्यान जिलाधिकारी की अध्यक्षता में दर्जनों बार कामगारों, बैंक प्रबंधकों, स्टेक होल्डर्स के साथ समीक्षा बैठक की गई तथा उद्यमियों को हर संभव मदद पहुँचायी गयी.
जिलाधिकारी ने बताया कि अब तक 57 उद्यमियों के द्वारा स्टार्टअप जोन में यूनिट स्थापित कर लिया गया. लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के 400 से अधिक मशीनों की स्थापना हो चुकी है, जिससे उत्पादित 15 करोड़ से ज्यादा के सामानों की बिक्री स्थानीय बाजार सहित अन्य जिले, राज्यों तथा विदेशों में किया जा चुका है. सामानों की बात करें तो बनारसी साड़ी, स्वेटर, कश्मीरी शाल सहित 25 से अधिक प्रकार के टेक्सटाइल एंड एपरिल का निर्माण स्टार्टअप जोन में किया जा रहा है. इसके अतिरिक्त सेनेटरी पैड, फुटवेयर्स, स्टील के बर्तन का भी निर्माण किया जा रहा है.कुछ दिनों पूर्व ही ई-रिक्शा की भी असेम्बलिंग स्टार्टअप जोन में शुरू कर दिया गया है.
बेतिया मॉडल (स्टार्टअप जोन) की सफलता से अभिभूत होकर जिले के अन्य क्षेत्रों में 100 से अधिक उद्यम स्थापित हो चुके हैं.स्टार्टअप जोन के इस अभिनव प्रयोग के कारण जिले के सुदूरवर्ती थरुहट क्षेत्र हरनाटांड़, मिश्रौली एवं रामनगर सहित अन्य क्षेत्रों में भी उद्यम स्थापना की बयार बह चुकी है. 140 से अधिक लोग उद्यम स्थापना के लिए स्थान आवंटन के लिए कतार में हैं. थरुहट के लोगों द्वारा भी चनपटिया के तर्ज पर ही प्लग एंड प्ले आधारित स्टार्टअप जोन स्थापित करने की मांग की गई. इन्हें प्लग एंड प्ले आधारित स्टार्टअप जोन मुहैया कराने को लेकर स्थान भी चिन्हित कर लिया गया है, आगे की कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन द्वारा तीव्र गति से कार्य किया जा रहा है.
जिलाधिकारी ने कहा स्टार्टअप जोन की सफलता के कारण जिले को पी०एम० मित्र पार्क की स्थापना के लिए भी चिन्हित किया गया है, जिसके लिए 1719 एकड़ भूमि को चिन्हित करते हुए प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गयी है.इसी कड़ी में कुमारबाग के औद्योगिक क्षेत्र में अवस्थित बियाडा के 300 एकड़ से अधिक भूमि पर टेक्सटाइल पार्क की थीम पर निर्माण करने की कवायद शुरू हो गयी है. जिले में उद्यम स्थापना का इको-सिस्टम तैयार हो चुका है.
आलोक कुमार
नालंदा। जिलाधिकारी श्री शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में आज हरदेव भवन सभागार में जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आहूत की गई।बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा क्रियान्वित की जा रही योजनाओं की गहन समीक्षा की गई। हर घर नल का जल योजना के संदर्भ में विगत माह में अनुमंडलवार जनप्रतिनिधिगण के साथ की गई बैठक में जिला में 155 वार्डों में नल जल योजना की क्रियाशीलता विभिन्न कारणों से बाधित पाई गई थी। लगातार समीक्षा के उपरांत इनमें से अधिकांश वार्डों में योजना को क्रियान्वित किया गया है। वर्तमान में 24 वार्ड की योजना अलग-अलग कारणों से अक्रियाशील रह गई है, जिसे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अविलंब क्रियाशील कराने का निर्देश सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को दिया गया।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि नल जल के क्रियान्वयन की अद्यतन स्थिति के बारे में गलत जानकारी देने पर संबंधित पंचायत तकनीकी सहायक एवं प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को लगातार क्षेत्र भ्रमण कर नल जल योजना के क्रियाशीलता का निरंतर सत्यापन सुनिश्चित करते रहने को कहा गया।
पंचायती राज विभाग द्वारा क्रियान्वित नल जल योजना वाले वार्डों में लगभग 12 हजार परिवार कनेक्शन से वंचित पाए गए, जिनके लिए 142 नई योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। कुछ योजनाओं का कार्य प्रारंभ हो चुका है। इस माह के अंत तक सभी योजनाओं का क्रियान्वयन पूरा करने का निर्देश दिया गया।
सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को नल जल योजना की निरंतर समीक्षा कर योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया।
मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत पात्र आवेदकों द्वारा सभी प्रखंडों में दो-दो एंबुलेंस का क्रय किया गया है। सिर्फ सरमेरा प्रखंड में एक एंबुलेंस का क्रय किया जाना शेष है। प्रखंड विकास पदाधिकारी सरमेरा को अविलंब पात्र चिन्हित लाभुक के लिए एंबुलेंस का क्रय सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया। इस योजना के तहत अद्यतन लक्ष्य के अनुरूप सवारी वाहन के क्रय के लिए आवेदन सृजित कराने का निर्देश सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को दिया गया। वाहनों के क्रय के लिए अनुमंडल एवं जिला स्तर पर परिवहन मेला के आयोजन के माध्यम से तेजी लाने का निर्देश दिया गया।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए निर्धारित लक्ष्य 32 हजार 566 के विरुद्ध 31 हजार 370 लाभुकों को आवास निर्माण हेतु स्वीकृति दी गई है। इनमें से 27 हज 420 लाभुकों को प्रथम किस्त, 8 हजार 546 लाभुकों को द्वितीय किस्त तथा 271 लाभुकों को तृतीय किस्त की राशि का भुगतान किया गया है।
14 लाभुकों द्वारा आवास निर्माण का कार्य पूरा किया गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी पात्र लाभुकों को आवास निर्माण की स्वीकृति एवं देय किस्त के भुगतान में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। अगर क्षेत्र भ्रमण के दौरान ऐसा कोई भी मामला संज्ञान में आएगा तो संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी की जिम्मेवारी तय होगी एवं कार्रवाई की जाएगी। द्वितीय किस्त के भुगतान में राजगीर में उपलब्धि अत्यंत असंतोषप्रद पाई गई जिसको लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी राजगीर से कारण पृच्छा की गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि पूर्व में दिए गए निदेश के अनुरूप सभी आवास सहायक भ्रमण पंजी संधारित करेंगे, जिसमें प्रतिदिन भ्रमण किए गए घरों के निर्माण की अद्यतन स्थिति की प्रविष्टि सुनिश्चित करेंगे तथा अगले किस्त के भुगतान के संदर्भ में स्पष्ट कारण भी दर्ज करेंगे। कोई भी पात्र लाभुक अगर देय किस्त के भुगतान से वंचित पाया जाएगा तो संबंधित आवास सहायक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को ससमय देय किस की राशि का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
वर्ष 2016-17 से 2019 20 की अवधि के वैसे लाभुक, जिन्होंने सभी किस्त की राशि लेकर भी अपना आवास निर्माण पूरा नहीं किया है, उनके विरुद्ध नीलाम पत्र वाद की कार्रवाई चलाने का निर्देश दिया गया।
मुख्यमंत्री वास स्थल क्रय योजना के तहत रहुई प्रखंड में 3 मामले लंबित पाए गए जिसके लिए चिन्हित जमीन का अभिलेख अभिलंब भेजने का निर्देश दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के क्रम में बताया गया कि जिला के पात्र आयु वर्ग के 85.43 प्रतिशत लोगों को कोविड टीका का प्रथम डोज तथा 90.58 प्रतिशत पात्र लोगों को द्वितीय डोज का टीका दिया गया है।
सामाजिक सुरक्षा की समीक्षा के क्रम बताया गया कि विभिन्न पेंशन योजना के लाभार्थियों का जीवन प्रमाणीकरण का कार्य लगभग 77 प्रतिशत लाभुकों का पूरा हो चुका है। जीवन प्रमाणीकरण हेतु लंबित लाभुकों की सूची सभी प्रखंडों को उपलब्ध कराई गई है। इनमें से मृत एवं बाहर रहने वाले लोगों की पहचान कर इसकी प्रविष्टि सुनिश्चित करने तथा शेष लाभुकों का जीवन प्रमाणीकरण सुनिश्चित कराने का निर्देश प्रखंड विकास पदाधिकारियों को दिया गया।
जीवन प्रमाणीकरण नहीं कराने वाले लाभुकों को पेंशन भुगतान विगत 3 माह से अवरुद्ध है। जीवन प्रमाणीकरण के लंबित मामलों में बिहारशरीफ नगर निगम, हिलसा आदि में ज्यादा मामले हैं। जीवन प्रमाणीकरण का कार्य सीएससी के माध्यम से कराया जा सकता है। प्रखंडों में भी इसके लिए कंप्यूटर ऑपरेटर उपलब्ध हैं।
कबीर अंत्येष्टि अनुदान योजना में सभी पात्र मामलों में त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया तथा पूर्व में भुगतान किए गए मामलों में इसकी ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करने को कहा गया ताकि निरंतर रिवाल्विंग फंड उपलब्ध रहे।
मनरेगा की समीक्षा के क्रम में बताया गया कि मनरेगा के कन्वर्जेंस के माध्यम से जिला में 100 आंगनबाड़ी केंद्र भवन का निर्माण किया जाना है। इनमें से 70 केंद्र भवन का निर्माण प्रारंभ किया गया है जो निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं।
आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में जिला में 75 अमृत सरोवर का निर्माण किया जाना है। इनमें से 46 सरोवरों के निर्माण के लिए स्थल चिन्हित किया गया है। तीन में योजना का शिलान्यास भी किया गया है। शेष चिन्हित योजनाओं का शिलान्यास बुधवार को किया जाएगा। लक्ष्य के अनुरूप शेष सरोवरों के निर्माण के लिए भी स्थल चिन्हित करने की कार्रवाई की जा रही है।
लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान की समीक्षा के क्रम में बताया गया कि जिला में 368 सामुदायिक स्वच्छता परिसर के निर्माण के लक्ष्य के विरुद्ध 288 का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है तथा 51 में निर्माण कार्य जारी है। जिसे 2 सप्ताह के अंतर्गत पूरा कराने का निर्देश सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को दिया गया। निर्मित शौचालय के उपयोग के प्रति लोगों को निरंतर जागरूक करते रहने का निर्देश दिया गया।
लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के अंतर्गत शौचालय निर्माण एवं ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था के लिए प्रथम चरण में जिला के 50 पंचायतों को चिन्हित किया गया है। इन सभी पंचायतों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन इकाई के निर्माण के लिए उपयुक्त स्थल चिन्हित करने तथा स्वच्छता मित्र एवं स्वच्छता पर्यवेक्षक के चयन की प्रक्रिया को अविलंब पूरा करने का निर्देश दिया गया।
नए राशन कार्ड के निर्माण के लिए आरटीपीएस के माध्यम से प्राप्त लगभग 90 प्रतिशत आवेदनों का निष्पादन किया गया है। शेष लंबित आवेदनों का निष्पादन निर्धारित समय सीमा के अंदर सुनिश्चित कराने का निर्देश सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को दिया गया।
आलोक कुमार
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