शुक्रवार, 12 मई 2023

18 मई को गांधी पीस फाउंडेशन में सम्मान समारोह


पटना.जन संगठन एकता परिषद के संस्थापक हैं पी व्ही राजगोपाल.प्रसिद्ध गांधीवादी एवं सर्वोदय नेता हैं राजगोपाल. समाज के हाशिए पर ठहर जाने वाले लोगों के बीच कार्य करने में माहिर है.उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के आलोक में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शांति पुरस्कार निवानो पीस अवार्ड से नमाजे गए.

        बता दें कि भारत से गांधीवादी एवं सर्वोदय नेता पी व्ही राजगोपाल और ख्याति प्राप्त महिला नेत्री जिल कार हैरिस 02 मई को जापान गए.11 मई को जापान की राजधानी टोक्यो में निवानो पीस अवार्ड से आदरणीय राजगोपाल सम्मानित किए गए.जापान से भारत 17 मई को आएंगे. दिल्ली में राष्ट्रीय युवा योजना के तत्वावधान में 18 मई को गांधी पीस फाउंडेशन में सम्मान समारोह होगाा.

       जन संगठन एकता परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रदीप प्रियदर्शी ने कहा  कि निवानो पीस फाउंडेशन जापान के अध्यक्ष रेव निचीको निवानो और डा.फलेमिनिया गिओवनेली द्वारा आदरणीय राजगोपाल जी को निवानो पीस अवार्ड दिया गया.बतौर पुरस्कार के रूप में 1.22 करोड़ की राशि दी गई.मौके पर दुनिया के कई देशों के पुरस्कार प्राप्त लोग पहुंचे थे. यह 40 वां निवानो पीस अवार्ड समारोह था.

       इस अवसर पर राजगोपाल जी ने अपने संबोधन में पूरी दुनिया से अपील की है, कि आम से खास लोग हिंसा को छोड़कर महात्मा गांधी के बताए मार्ग सत्य और अहिंसा को अपने जीवन में उतारे.    

एकता परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रदीप प्रियदर्शी ने आदरणीय राजगोपाल जी को निवानो पीस अवार्ड मिलने पर राजधानी पटना में कहा  कि पूरे देश में एकता परिषद के साथियों के बीच उत्साह का माहौल बन गया है.प्रदेश के अंचलों में लोगों के बीच बैठक कर शुभ संदेश सुनाकर जश्न मना रहे हैं.मौके पर राजगोपाल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दे रहे हैं.

    आगे प्रदीप प्रियदर्शी ने कहा कि देश और दुनिया में एकता परिषद द्वारा गरीबों और वंचितों के बीच लिए किए जा रहे कार्य जल, जंगल ,जमीन के अधिकारों का संघर्ष को यह पुरस्कार सम्मानित करता है और यह अंधेरे में एक प्रकाश है.उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया हिंसा प्रतिहिंसा के चंगुल में जकड़ गया है. वहीं हमारे राजा जी (राजगोपाल)अहिंसा का शक्ति लेकर गरीबों और वंचितों के साथ सड़क पर खड़े हैं.यह विश्वास व्यक्त किया कि जापान का यह अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरस्कार हमें शक्ति प्रदान करेगा.और यह दृढ़ विश्वास दिलाया है कि हम इस अंहिसात्मक लड़ाई को और मजबूती के साथ आगे बढ़ाएंगे.


आलोक कुमार

एक सप्ताह में भुगतान करने की मांग

 मुजफ्फरपुर.इस जिले में मनरेगा वॉच बिहार के द्वारा प्रभावशाली ढंग से कार्य किया जा रहा है.कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का सहयोग भी मिलता है.इस समय राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) ऐप के द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की हाजरी बनवाने का विरोध किया जा रहा है.मनरेगा वॉच ने सभी मजदूरों को संपूर्ण हाजरी बनाने के साथ उस वक्त के मजदूरी 210 रू.के दर से एक सप्ताह में भुगतान करने की मांग की है, अन्यथा सभी मजदूर अपनी मांगों के समर्थन में धरना शुरू कर देंगे.इन सभी मांगों को लेकर दिनांक


15 मई 2023 से मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा. 

बिहार में सामान्य कार्य के नियोजनों में काम करने वाले अकुशल श्रेणी के मजदूरों को अभी 373 रुपए रोजाना मिल रहे हैं.इसमें 15 रुपए की वृद्धि होगी. जबकि अतिकुशल श्रमिकों को 577 रुपए रोजाना में 23 रुपए की वृद्धि होगी. गौरतलब है कि एक साल में दो बार न्यूनतम मजदूरी तय होती है. इसके तहत एक अप्रैल व एक अक्टूबर से हर साल नई न्यूनतम मजदूरी दर तय होती है.

     बिहार में न्यूनतम मजदूरी 388 रुपए से कम मनरेगा मजदूरों की मजदूरी 194 रुपए है.सबसे अधिक लक्ष्यदीप में 266 रुपए देय है.वहीं प्राप्त जानकारी के अनुसार मुजफ्फरपुर जिले के विभिन्न प्रखंडो के परियोजना पदाधिकारी  (पीओ) व विभिन्न पंचायतों के पंचायत रोजगार सेवक (पीआरएस ) के द्वारा मनमर्जी से मनरेगा मजदूरों को काम करने के लिए भेजते रहे हैं.और तो और मजदूरों को मजदूरी के नाम पर मात्र 22.85 रूपए प्रति दिन की दर से मजदूरों से बिना पूछे ही राशि खाते में भेजने का सिलसिला जारी है. 

      इस जिले के प्रखंड कुढ़नी, मुशहरी, बोचहा, मुरौल, सकरा, बंदरा, गायघाट, औराई,कटरा,कांटी,मरवन,सरैया के 106 पंचायतों के मनरेगा में मजदूरों काम करने वालों ने लिखित में काम की मांग कर चुके हैं. अभी तक मजदूरों को काम नहीं दिया गया.उक्त पंचायत के मजदूर को राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) ऐप के द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में छूटे हाजरी भी नहीं लगाई गई है.लंबित भुगतान और जॉब कार्ड नहीं दिया गया है. 

        बताया जाता है कि बोचाहा प्रखंड गरहा पंचायत में जनवरी में योजना का नाम 0515010005/आईसी/ 20463000 ग्राम पंचायत गरहा में एलिवेस्टर गोदाम से एनएच 57 तक नाला उड़ाही कार्य पर मजदूर 12 दिन काम किए थे. जिस नाला का उड़ाही का मस्टर रोल निकाला गया था. उसमें पानी भरा हुआ था. इसके बावजूद परियोजना पदाधिकारी और  पंचायत रोजगार सेवक मजदूरों को काम पर भेजते रहे और मात्र 22.85 रूपए प्रति दिन के दर से मजदूर से बिना पूछे मजदूरी की राशि खाते में भेज दिया गया.

     इस योजना पर राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) ऐप के  कारण आधे अधूरा ही हाजरी लगाया गया, जबकि मजदूर 12 दिन काम किए थे. मजदूरों की मांग है कि उक्त योजना पर किए सभी मजदूर को पूरे हाजरी के साथ उस वक्त के मजदूरी 210 रू.के दर से एक सप्ताह में भुगतान किया जाए, अन्यथा सभी मजदूर अपनी मांग के समर्थन में धरना शुरू करेंगे और कम दिए गए राशि सरकार को वापस करेंगे. 

    कुढ़नी प्रखंड में मनरेगा अंतर्गत लगातार ठेकेदारों की संख्या बढ़ती जा रही है.जिस कारण मजदूर को सही से काम नहीं दिया जा रहा है. इस पर तुरंत कार्रवाई किया जाए. कुढ़नी के कंरमा,किनारू सहित अन्य पंचायत में मजदूर के खाते में पैसे नहीं आए. मुशहरी प्रखंड मुशहरी उर्फ राधा नगर योजना का नाम 0515009016/एलडी/20383166 वार्ड नं. 04 में अवस्थित श्मशान घाट के प्रांगण में मिट्टी भराई कार्य यहां मजदूर सात दिन काम किए.एनएमएमएस ऐप से एक दिन भी हाजरी नहीं बनी.पैसे भी नहीं मिला. मुरौल प्रखंड के मीरापुर पंचायत में योजना का नाम सुरेंद्र सहनी के खेत से नदी के पास तक सड़क निर्माण कार्य पर मजदूर एक सप्ताह काम किए.एनएमएमएस ऐप के कारण आधे हाजरी ही लग पाया. जांच कर सभी मजदूर को पूरा हाजरी के साथ भुगतान किया जाए. 

    

आलोक कुमार 

गुरुवार, 11 मई 2023

लगभग एक करोड़ बाइस लाख रूपये से वे एक ‘शांति कोष’ बनाएंगे

  



राजगोपाल पी.व्ही. को मिला जापान में मिला निवानो शांति पुरस्कार

भोपाल. एकता परिषद के संस्थापक और प्रख्यात गांधीवादी व सर्वोदयी नेता श्री राजगोपाल पी.व्ही. को न्याय और शांति की सेवा में उनके असाधारण कार्य के लिए दुनिया की प्रतिष्ठित संस्था निवानों पीस फाउंडेशन, जापान का 40वां निवानो शांति पुरस्कार जापान की राजधानी टोक्यो के इंटरनेशनल हाउस आफ जापान में आज आयोजित समारोह में दिया गया.

   एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रन सिंह परमार ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि एकता परिषद जन संगठन के संस्थापक श्री राजगोपाल पी.व्ही. ने प्राकृतिक संसाधनो जल, जंगल और जमीन पर गरीबों के अधिकार के लिए देशभर के कई प्रांतों व राष्ट्रीय स्तर पर सत्याग्रह पदयात्राएं की और वंचितों के अधिकार को अहिंसात्मक व शांतिपूर्ण तरीके से राज्य व केन्द्रीय सरकार के समक्ष उठाकर नीतिगत बदलाव के लिए प्रयास किया है.

       श्री राजगोपाल पी.व्ही. ने देश के सबसे गरीब और हाशिए पर पड़े लोगों के लिए बिना किसी जाति व लैगिंक भेदभाव के समान मानवीय गरिमा और प्रत्येक महिला व पुरूष के समान अधिकारों की मान्यता के लिए शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीकों के माध्यम से कार्य किया है. यह पुरस्कार जल, जंगल और जमीन पर गरीबों के प्राथमिक अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, आत्मसमर्पित बागियों के पुनर्वास, युवाओं में शांति व अहिंसा की शिक्षा के लिए दिया गया है. श्री राजगोपाल पी.व्ही को यह पुरस्कार 11 मई 2023 को निवानो पीस फाउंडेशन जापान के अध्यक्ष श्री रेव निचीको निवानो और डा. फलेमिनिया गिओवनेली द्वारा दिया गया.

       पुरस्कार मिलने के बाद समारोह को संबोधित करते हुए राजगोपाल पी.व्ही ने कहा कि दुनिया में शांति के लिए चार दृष्टिकोण अहिंसक शासन, अहिंसक सामाजिक कार्रवाई, अहिंसक अर्थव्यवस्था और अहिंसक शिक्षा की जरूरत है. उन्होंने इस पुरस्कार के लिए अपने जीवन काल में सभी सहयोगियों, साथियों और मार्गदर्शकों के प्रति आभार प्रकट किया.उन्होंने कहा कि भले ही यह पुरस्कार उनको एक व्यक्ति के रूप में दिया गया है लेकिन इसकी धनराशि लगभग एक करोड़ बाइस लाख रूपये से वे एक ‘शांति कोष’ बनाएंगे जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में शांति निर्माण के लिए फोर फोल्ड दृष्टिकोण को सहयोग करने में मदद करेगा.

         महात्मा गांधी सेवा आश्रम के वरिष्ठ साथी अनिल भाई ने बताया कि श्री राजगोपाल पी.व्ही ने देश व विदेश के हजारों युवाओं को शांति व अहिंसा पर प्रशिक्षित कर शांति कार्यकर्ताओं की लम्बी फौज खड़ी की है, जो गांव-गांव में वंचित समुदाय और महिलाओं के अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से कार्य कर रहे हैं. एकता परिषद के राष्ट्रीय महासचिव अनीष कुमार ने बताया कि राजगोपाल जी के सानिध्य में स्थापित एकता परिषद देश के 10 राज्यों में अहिंसात्मक तरीके से वंचित समुदाय के प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित आजीविका के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.

    निवानो शांति पुरस्कार श्री राजगोपाल पी.व्ही को मिलने पर भोपाल के अंश हैप्पीनेस सोसाइटी के मोहसिन भाई, नीरू दिवाकर, एकता फाउंडेशन ट्रस्ट के जीतेन्द्र शर्मा, मध्य प्रदेश एकता परिषद के प्रांतीय संयोजक डोंगर शर्मा, पूर्व संयोजक दीपक अग्रवाल, राकेश रतन सिंह, श्योपुर के जयसिंह जादौन, रामदत्त सिंह तोमर, बुंदेलखंड के संतोष सिंह, मालवा की श्रद्धा कश्यप, बघेलखण्ड के निर्भय सिंह, कस्तूरी पटेल, श्री राम बारेला, सरस्वती उइके ग्वालियर के कुबेर आदिवासी, इन्दर सहरिया, बाबु, सबो बाई, और घाटीगांव के राजेलाल आदिवासी इत्यादि ने श्री राजगोपाल जी को शुभकामनाएं दी.

       एकता परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप प्रियदर्शी, विजय गोरैया,अनिल पासवान,राम लखींद्र प्रसाद,शिवनाथ पासवान,सरोज ठाकुर, ओमप्रकाश, सुनील कुमार,मंजू डुंगडुंग,पुष्पा लकड़ा आदि ने राजगोपाल जी को शुभकामनाएं दी है और गरीबों के लिए युगयुग जीने का आशीर्वाद दिए.

आलोक कुमार  

बुधवार, 10 मई 2023

बेतिया धर्मप्रांत का निर्माण का 25 साल

 

बेतिया  धर्मप्रांत का निर्माण का 25 साल

बेतिया. पश्चिम चंपारण जिले में बेतिया है. 27 जून, 1998 को बेतिया  धर्मप्रांत का निर्माण किया गया.इसका श्रेय पोप जॉन पॉल II को जाता है.इस नए धर्मप्रांत में पांच जिले पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान और सारण को शामिल किया गया.रायपुर धर्मप्रांत के एक पुरोहित फादर विक्टर हेनरी ठाकुर को बेतिया का पहला बिशप नियुक्त किया गया.

       बता दें कि पटना धर्मप्रांत को विभक्त कर मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत 1980 में बनाया गया.पटना धर्मप्रांत के प्रथम बिहारी बिशप बनने का गौरव फादर बेनेडिक्ट जौन ओस्ता को प्राप्त हुआ.21 जून 1980 को बिशप बने.वहीं मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के बिशप जौन बापतिस्ट ठाकुर बने.24 जून 1980 को बिशप बने.दोनों जेसुइट है.

     बता दें कि बिहार राज्य के उत्तर-पश्चिमी भाग में पांच भोजपुरी भाषी जिलों को मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत से अलग कर 18 साल के बाद 27 जून, 1998 को बेतिया धर्मप्रांत का निर्माण किया गया.रायपुर धर्मप्रांत के एक पुरोहित फादर विक्टर हेनरी ठाकुर को बेतिया का पहला बिशप नियुक्त किया गया.11 नवंबर 1998 को कार्डिनल टेलेस्फोर टोप्पो के द्वारा बिशप अभिषेक हुआ.

      बिशप विक्टर हेनरी ठाकुर का जन्म और पालन-पोषण बेतिया धर्मप्रांत के चखनी में हुआ था, लेकिन उन्होंने रायपुर धर्मप्रांत में एक मिशनरी बनना चुना.इस प्रकार बिशप के रूप में धर्मप्रांत में उनकी वापसी काफी स्वाभाविक थी.इस बीच बेतिया के बिशप विक्टर हेनरी ठाकुर को रायपुर के आर्चबिशप के रूप में नियुक्त किया गया.इसके चलते बेतिया धर्मप्रांत बिशप विहीन 3 जुलाई 2013 तक था.

       बेतिया धर्मप्रांत में जन्म लेने वाले पुरोहितों को तरजीह न देकर परम पावन पोप फ्रांसिस ने भागलपुर के फादर पीटर सेबास्टियन गोवेस को बेतिया के नए बिशप के रूप में घोषित कर दिया.जिसकी घोषणा शनिवार, 22 जुलाई, 2017 को अपराह्न 3.30 बजे की गई. 19 अक्टूबर 2017 को पीटर सेबास्टियन गोवेस को बेतिया धर्मप्रांत के बिशप के रूप में नियुक्त कर दिया गया.

   इस समय मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के बिशप काजीटेन फ्रांसिस ओस्ता है.बेतिया धर्मप्रांत के बिशप पीटर सेबास्टियन गोवेस है.अब तक बिशप बीजे ओस्ता, बिशप काजीटेन फ्रांसिस ओस्ता, बिशप जेबी ठाकुर और बिशप विक्टर हेनरी ठाकुर ही धरती पुत्र बिशप बन पाए हैं.दो 'ओस्ता' और उतने ही 'ठाकुर' बिशप बने.


एकता परिषद बिहार के अध्यक्ष श्री विजय गोरैया सम्मानित

  


मुजफ्फरपुर.इस जिले के कुढ़नी प्रखंड में है एकता परिषद का कार्यालय.आज बुधवार को एकता परिषद,उत्तर बिहार की जिला स्तरीय बैठक जनहित आश्रम सकरी सरैया में की गई.एकता परिषद के जिलाध्यक्ष शिवनाथ पासवान ने बैठक की अध्यक्षता की. इसका संचालन राम लखींद्र प्रसाद जिला संयोजक ने किया.

   जिला संयोजक राम लखींद्र प्रसाद ने कहा कि इस बैठक की शुरुआत जय जगत गीत से शुरू की गई.गीत के प्रमुख गायक श्री विशेश्वर गुप्ता थे.इस बैठक में कुढ़नी एवं सरैया प्रखंड के साथियों ने भाग लिया. राजधानी पटना में स्थित एकता परिषद के प्रांतीय कार्यालय में एकता परिषद बिहार के अध्यक्ष श्री विजय गोरैया का चयन किया गया था.मुजफ्फरपुर जिला के सदस्यों ने एकता परिषद बिहार के अध्यक्ष श्री विजय गोरैया को शॉल एवं गांधी सूत्र देकर सम्मानित किया गया.

     


जिला संयोजक ने कहा कि प्रांतीय कार्यालय की बैठक में लिये गये निर्णयानुसार आज 10 मई 2023 को जिला स्तरीय बैठक की गयी.मौके पर  एकता परिषद बिहार के अध्यक्ष श्री विजय गोरैया अपने संबोधन में आवासीय भूमिहीनों का सर्वे करके आवासीय भूमिहीनों को भूमि देने पर बल दिया.युवा बेरोजगारों को वादों के अनुसार सरकारी नौकरी देने का आग्रह सरकार से किया गया.सभी को एक समान शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कानून बनाने के लिए जुझारू संघर्ष का ऐलान किया. समस्याओं के निदान करने के सिलसिले में एक दिवसीय प्रखंड मुख्यालय कुढ़नी पर धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया.

     

 इस अवसर पर कुढ़नी प्रखंड कमेटी क्या गठन किया गया.प्रांतीय प्रशिक्षण शिविर में जिले से 27  महिला और पुरुष का चयन किया गया.सरैया प्रखंड के संयोजक मनीष कुमार का चयन किया गया. अभिनंदन के लिए भावुक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया. बैठक की चर्चा में सर्वश्री रामानुज राकेश, महादेव भाई, ब्रजकिशोर सिंह,विशेश्वर गुप्ता, विद्यानंद प्रसाद, नीतीश कुमार,बिगन  मंडल, रघुनाथ राम,शंकर मांझी, बच्चू राम, रामबाबू साहनी, अरुण सिंह, बसंत कुमार,पांचू शाह, शंभू शाह, मनीष कुमार, के अलावे प्रमिला देवी, राम शीला देवी, जोगी देवी आदि सदस्यों ने अपने-अपने विचार एवं सुझाव दिए.   

       एक अन्य खबर के अनुसार वर्तमान में कोसी प्रमंडल, सहरसा में तीन जिले क्रमशः सहरसा,सुपौल और मधेपुरा है.आज मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड में संचालित एकता परिषद की बैठक गोपाली टोला में की गयी.इस बैठक में ग्राम इकाई निर्माण का शुभारंभ किया गया. कुसुम लाल ऋषि देव की अध्यक्षता बैठक और चर्चा की गयी. नरेश जी ने अनाज कोष संग्रह, आवासीय भूमिहीन एवं मनरेगा पर वार्ता की वार्ता गई. इसी तरह की बैठक दीना पट्टी सखुआ पंचायत अंतर्गत गोपाली टोला मे की गई. ग्राम इकाई के अध्यक्ष सैनी ऋषि देव, सचिव मीना देवी एवं कोषाध्यक्ष संजुल देवी सर्वसम्मति से निर्वाचित की गई.


आलोक कुमार

ददन विश्वकर्मा ने अपने ठेले का नाम ‘पत्रकार पोहा वाला’ रखा

 पटना.पटना में 'ग्रेजुएट चायवाली' और  ‘पत्रकार पोहा वाला’ की खबर सुर्खियों में है. ग्रेजुएट चायवाली प्रियंका की चाय की दुकान पर विभिन्न किस्म की चाय मिल सकती है जैसे कि कुल्हड़ चाय, मसाला चाय, पान चाय और चॉकलेट चाय.उसी तरह  ‘पत्रकार पोहा वाला’ ददन विश्वकर्मा के पास कुल दो तरह के पोहा हैं, एक रिपोर्टर स्पेशल और एक एडिटर स्पेशल.

ग्रेजुएट चायवाली के नाम से मशहूर प्रियंका गुप्ता

ग्रेजुएट चायवाली के नाम से मशहूर प्रियंका गुप्ता बिहार के पूर्णिया जिले की रहने वाली है. प्रियंका ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक किया है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने सामान्य प्रतियोगिता के क्षेत्र में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भी भाग लिया था. 

     पटना की ग्रेजुएट चायवाली प्रियंका गुप्ता आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है. प्रियंका बताती हैं कि उसे पहचान दिलाने में मीडिया का अहम योगदान है. वे बताती है कि जब उन्होंने चाय का स्टॉल लगाया तो मीडिया ने उसे जमकर कवर किया. इसका परिणाम यह हुआ कि उसे दूर-दूर तक के लोग जानने लगे. लेकिन उसकी चाय के कार्ट को अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत निगम ने कई बार उठा लिया. इसके बाद वह सोशल मीडिया पर रोती हुई भी नजर आई थी. लेकिन एक बार फिर वह नए क्लेवर में वापस आ गई है.

       पटना के वीमेंस कॉलेज के सामने कभी चाय का स्टॉल लगाती थी. बाद में उसने अपना स्टॉल बोरिंग रोड में लगाया. अब ग्रेजुएट चाय वाली सिर्फ चाय ही नहीं बल्कि स्वादिष्ट पकवान भी खिला रही है. ग्रेजुएट चाय वाली ने कार्ट छोड़कर अब अपना एक रेस्त्रा खोल लिया है. इस नई जगह पर सिर्फ फ्लेवर्ड चाय ही नहीं, बल्कि खाने-पीने की कई और लजीज चीजें भी मिलती है.

       प्रियंका ने पटना के बोरिंग रोड में हरिहर चैंबर के सामने पंडूई पैलेस के बेसमेंट में अपना रेस्त्रा खोला है. शेफ बैजू कुमार की माने तो इस रेस्त्रा में फ्लैवर्ड चाय के अलावा मोमोज, बर्गर, रोल और बिरयानी जैसे तमाम फूड आइटम्स भी खिलाए जा रहे हैं. इस बार तिजोरी भी रखी गई है. दावा किया जा रहा है कि अगर किसी ग्राहक को खाना पसंद नहीं आया तो शत प्रतिशत पैसा वापस कर दिया जाएगा. शेफ बैजू कुमार इस रेस्त्रा के पार्टनर भी हैं. वे बताते हैं कि वे अपने फूड आइटम्स में विदेशी वेजिटेबल्स मिलाते हैं, जिससे स्वाद बढ़ जाता है.

पत्रकार ददन विश्वकर्मा ने नोएडा फिल्म सिटी में पोहे का ठेला लगा


ज़ी न्यूज़ से नौकरी से निकाले जाने के बाद पत्रकार ददन विश्वकर्मा ने नोएडा फिल्म सिटी में पोहे का ठेला लगा लिया है. तीन महीने पहले तक इसी फिल्म सिटी में ददन विश्वकर्मा ज़ी न्यूज़ में बतौर असिस्टेंट न्यूज़ एडिटर कार्यरत थे. फिलहाल उन्होंने फिल्म सिटी में आज तक के ऑफिस के ठीक सामने ठेले पर पोहा-जलेबी बेचने का नया व्यवसाय शुरू किया है.

        ददन विश्वकर्मा ने बताया, "दिसंबर 2022 में छटनी और ऑफिस पॉलिटिक्स की वजह से नौकरी से निकाल दिया गया. तीन महीने तक नौकरी ढूंढने के बावजूद जब नौकरी नहीं मिली तो आर्थिक मजबूरियों के कारण मैंने यह ठेला लगाया है."

           ददन विश्वकर्मा ने हमें बताया कि उन्हें 13 सालों का पत्रकारिता का अनुभव है. भारतीय जनसंचार संस्थान से वर्ष 2010-11 में हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद वह दैनिक भास्कर के साथ जुड़े. 2011 से लेकर 2014 तक दैनिक भास्कर में काम करने के बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स के साथ काम किया. यहां 2014 से 2016 तक काम करने के बाद वे आज तक चले गए. यहां उन्होंने चार सालों तक काम किया. इसके बाद 2020 में उन्होंने ज़ी न्यूज़ ज्वाइन कर लिया. हालांकि दिसंबर 2022 में ऑफिस पॉलिटिक्स और छंटनी का शिकार होने के कारण उन्हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ी.

         ददन बताते हैं कि उन्होंने पत्रकारिता के जरिए समाज को कुछ देने के मकसद से बीएससी छोड़कर पत्रकारिता की पढ़ाई की थी. लेकिन आज आर्थिक मजबूरियों के चलते उन्हें ठेला लगाना पड़ रहा है. वह कहते हैं यह मत सोचिए कि पत्रकार ठेला लगा रहा है. ये ठेला कोई पत्रकार नहीं लगा रहा है बल्कि मजबूरियों और परिस्थितियों में जकड़ा हुआ इंसान ठेला लगा रहा है.

       पत्रकारिता छोड़ने के सवाल पर ददन कहते हैं कि एक पत्रकार हमेशा पत्रकार होता है, चाहे वह किसी संस्थान से जुड़ा हो या न जुड़ा हो. उन्होंने बताया कि ठेला इसलिए शुरू किया है ताकि परिवार गुजारा का हो सके. वे सोशल मीडिया के जरिए पत्रकारिता जारी रखने की बात कहते हैं. वह कहते हैं कि जब उन्हें जरूरत महसूस होगी कि तो मुद्दों पर बोलेंगे भी और लिखेंगे भी. 

       ददन विश्वकर्मा ने अपने ठेले का नाम ‘पत्रकार पोहा वाला’ रखा है. उनके पास कुल दो तरह के पोहा हैं, एक रिपोर्टर स्पेशल और एक एडिटर स्पेशल.


आलोक कुमार

मंगलवार, 9 मई 2023

भाजपा नेता मणिकांता राठौड़ के खिलाफ पटना के पाटलिपुत्र थाने में प्राथमिकी दर्ज

 पटना.बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह के नेतृत्व में, पार्टी के शीर्ष नेताओं ने कर्नाटक भाजपा नेता मणिकांता राठौड़ के खिलाफ पटना के पाटलिपुत्र थाने में प्राथमिकी दर्ज करवायी एवं शीघ्र उचित कारवाई की मांग की.

        एक वायरल ओडियो में चित्तापुर विधान सभा से भाजपा प्रत्याशी मणिकांता राठौड अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष एवं सांसद श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी को परिवार समेत जान से मारने की धमकी देते सुनाई दे रहे हैं. ऑडियो सुनने के बाद व्यथित बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ भाजपा नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवायी.

       डा0 सिंह ने कहा कि बिहार के सभी कांग्रेसजन भयभीत हैं उन्हें डर है कि हमारे नेता के साथ कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है क्योंकि भाजपा नेता स्वयं अथवा किसी और से भी इस घटना को अंजाम दिलवा सकते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष डा0 सिंह ने कहा कि भाजपा के राज्य एवं केन्द्रीय नेतृत्व को यह बात पच नहीं रही कि श्री खड़गे एक दलित फैक्ट्री श्रमिक के घर में पैदा होकर अखिल भारतीय कांग्रेस की अध्यक्ष के मुकाम तक पहुंच गये. उन्होंने कहा कि दरअसल कर्नाटक के धरती पुत्र खड़गे जी को वहां की जनता से जो अपार स्नेह मिल रहा है उससे भाजपा बौखला गयी है. भाजपा डर रही है कि कर्नाटक विधान सभा चुनाव में कहीं उसका सुपड़ा साफ न हो जाय.

       डा0 सिंह ने कहा कि पहले से ही भाजपा के नेता श्री खड़गे जी के बारे में अपमानजनक टिका-टिप्पणी करते रहे हैं. यहां तक कि प्रदेश भाजपा के महासचिव एवं विधायक मदन दिलावर ने पिछले 2 मई को खड़गे साहब की मृत्यु की कामना तक कर डाली. डा0 सिंह ने अफसोस जाहिर की कि इतनी बड़ी बात हो जाने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व चुप्पी साध रखी है यह शर्मनाक है.

      प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह के साथ जाने वालों में कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित शर्मा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, विधायक विजेन्द्र चौधरी, इंटक के प्रदेश अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश सिंह,मीडिया चेयरमैन राजेश राठौड़,आनन्द माधव,राज कुमार राजन, प्रभात कुमार सिंह,ब्रजेश प्रसाद मुनन, संजय पाण्डेय,अजय कुमार चौधरी, ज्ञान रंजन,चुन्नू सिंह,मृणाल अनामय सहित अन्य वरिष्ठ कांग्रेसजन शामिल थे.


आलोक कुमार

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चिंगारी प्राइम न्यूज़

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