बुधवार, 2 जुलाई 2025

विश्व की शिक्षा की राजधानी बिहार को भाजपा -जेडीयू ने बदहाल कर दिया: दिग्विजय सिंह

 

विश्व की शिक्षा की राजधानी बिहार को भाजपा -जेडीयू ने बदहाल कर दिया: दिग्विजय सिंह

युवाओं के भविष्य की लगाई बोली, पेपर माफिया की सत्ता से हमजोली!: दिग्विजय सिंह

भर्ती और प्रवेश परीक्षा का मोल लगाया, हर पेपर लीक कराया!: दिग्विजय सिंह

 पटना. बिहार की शिक्षा का परचम पूरे विश्व में लहराया था. नालंदा विश्वविद्यालय हो या विक्रमशिला विश्वविद्यालय तिब्बत, चीन, जापान, कोरिया, सुमित्रा, मंगोलिया आदि देशों से विद्यार्थी यहाँ शिक्षा लेने आते थे. चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuan Zang) और इत्सिंग (Yixing) ने इसके वैभव की बहुत प्रशंसा करते नहीं थकते थे. आज उसी बिहार को भाजपा और जेडीयू की सरकार ने युवाओं के भविष्य बेचने का केंद्र बना दिया है.भर्ती प्रवेश परीक्षा के घोटाले, जर्जर स्कूल भवन और युवाओं का पलायन ये बिहार की शिक्षा का भाग्य बन गया है -

         आज मोदी सरकार ख़ुद कह रही है की बिहार को बर्बाद भाजपा जेडीयू ने किया है ये बातें बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कही .

       राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने क्रमवार आंकड़े पेश करके विस्तार से निम्नांकित बातों को प्रमुखता से संवाददाता सम्मेलन में रखी .उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार की स्कूली शिक्षा की रिपोर्ट UDISE+ 2023–24 का बिहार के लिए चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों की बदहाली और ड्रॉपआउट रेट देश में सबसे ज़्यादा, न स्कूलों में बिजली न शिक्षक , न कंप्यूटर न लाइब्रेरी मौजूद है-

      यह प्रदर्शन पूरे देश में सबसे खराब है- बिजली की सुविधा से वंचित स्कूल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 78,120 में से 16,529 स्कूलों में अब भी बिजली नहीं है.कंप्यूटर रहित स्कूल और कुल 78,120 शासकीय स्कूलों में से मात्र 5,057 स्कूलों में कंप्यूटर हैं, अर्थात् मात्र 6.5% स्कूलों में यह सुविधा मौजूद है .

       बिहार में 2,637 स्कूल ऐसे हैं जहाँ सिर्फ एक शिक्षक है और इन स्कूलों में 2.91 लाख छात्र नामांकित हैं. वहीँ राज्य में 117 स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी छात्र नहीं पढ़ता है, फिर भी इन स्कूलों में 544 शिक्षक तैनात हैं. स्कूलों से ⁠ड्रॉप-आउट रेट भी सबसे अधिक बिहार का ही है जिसमें प्राइमरी (1–5): 8.9%, अपर प्राइमरी (6–8): 25.9%, सेकेंडरी (9–10): 25.63% ड्रॉप-आउट रेट है.

      बिहार में कुल स्कूल और सरकारी हिस्सेदारी राज्य में कुल स्कूल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 94,686, कुल स्कूल में सरकारी स्कूल 78,120 हैं,  यानी लगभग 82% स्कूल सरकारी हैं. 2025-26 के बजट में बिहार सरकार ने 60,954 करोड़ रुपए शिक्षा पर खर्च करने का दावा किया, मगर सच्चाई यह है कि यह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है.भाजपा जेडीयू सरकार ने उच्च शिक्षा में भी बिहार के भविष्य को बर्बाद कर दिया. AISHE 2021–22 (All India Survey on Higher Education) की हालिया रिपोर्ट ने बिहार में उच्च शिक्षा की दुर्दशा को फिर से उजागर कर दिया है.

     GER (Gross Enrolment Ratio) यानी कुल GER: 17.1% अर्थात, राज्य की 18–23 वर्ष की अनुमानित जनसंख्या 1.36 करोड़ है, लेकिन इनमें से केवल 23.33 लाख छात्र अंडर ग्रेजुएट में पढ़ रहे है .अर्थात 1.13 करोड़ युवा उच्च शिक्षा से वंचित है. देश में सबसे कम प्रति लाख जनसंख्या पर उच्च शैक्षणिक संस्थान बिहार में हैं जिसमें कुल 37 विश्वविद्यालय, 1092 महाविद्यालय, 315 स्टैंड-अलोन संस्थान के साथ कुल उच्च शिक्षण संस्थान 1,387 हैं लेकिन आबादी की तुलना में ये संख्या बेहद कम है.प्रति 1 लाख आबादी पर सिर्फ़ 7 कॉलेज हैं — जबकि राष्ट्रीय औसत 30 कॉलेज प्रति लाख है. यह पूरे भारत में सबसे कम है.

     पेपर लीक पर बोलते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि युवाओं के भविष्य की लगाई बोली, पेपर माफिया की सत्ता से हमजोली! बिहार में भाजपा-जेडीयू की सत्ता की सरपरस्ती में सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में घोटालों का गोरख धंधा चल रहा है। पिछले सात वर्षों में प्रदेश में 10 से अधिक परीक्षा पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं। नीचे हम पिछले वर्षों में सामने आए प्रमुख घोटालों की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश कर रहे हैं:


 2017: सिपाही भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया था, जिसके कारण परीक्षा को रद्द करना पड़ा.इस मामले में  21 एफआईआर दर्ज की गयी. मगर जांच अभी भी जारी है.

2019 और 2021: इन वर्षों में बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा के पेपर लीक हुए-

2021-22: बिहार उत्पाद विभाग की परीक्षा का पेपर भी लीक हो गया.ईओयू द्वारा जांच जारी है .2022: बहुचर्चित बीपीएससी 67वीं प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया.इस मामले में 21 एफआईआर दर्ज की गयी मगर जाँच अभी जारी है.

2023: फरवरी 2023 में सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हो गया, जिसके चलते परीक्षा रद्द करनी पड़ी. ईओयू द्वारा BPSC के केंद्राधीक्षक को गिरफ्तार किया गया.

2023: अमीन भर्ती परीक्षा का प्रश्न पत्र सोशल मीडिया के जरिए वायरल हो गया था.इस मामले में पटना समेत कई जिलों में एफआईआर दर्ज की गयी.

2023: देशभर में बहुचर्चित NEET परीक्षा का पेपर भी लीक हो गया. पटना से पेपर आउट होने की पुष्टि .यह मामला पूरे देश में सुर्खियों में रहा.

2024: बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई.

2024: राज्य स्वास्थ्य समिति की सीएचओ भर्ती परीक्षा में भी प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले ही व्हाट्सऐप के जरिए लीक हो गया.

    भर्ती और प्रवेश परीक्षा का मोल लगाया, हर पेपर लीक कराया.बिहार में शिक्षा की गौरवशाली और वैभवशाली विरासत को कलंकित करने वाले “पेपर माफिया” का नेटवर्क लगातार सक्रिय होता जा रहा है.एक चौंकाने वाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं के लिए पेपर लीक करने और उसमें मदद दिलाने के बदले में प्रति छात्र भारी-भरकम रकम वसूली जाती है.इन माफियाओं का कारोबार हजारों करोड़ का है .

        नीचे दी गई सूची में विभिन्न परीक्षाओं के लिए पेपर माफिया द्वारा ली जाने वाली दरों का विवरण प्रस्तुत है:

NEET PG ₹70-80 लाख,NEET UG, ₹30-40 लाख, बैंकिंग परीक्षा (Bank PO) ₹15-20 लाख, एसएससी (SSC) ₹15-20 लाख, साक्षात्कार सहायक ₹25-30 लाख, पुलिस SI ₹25 लाख, पुलिस सिपाही ₹10-15 लाख ,पटवारी ₹10-15 लाख, टेट/रीट ₹10 लाख, अन्य ₹10 लाख.


       चुनाव आयोग के द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सत्यापन पर बोलते हुए राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि बिहार में हो रहे वोटर लिस्ट पुनरीक्षण कार्य भाजपा के निर्देशन पर चुनाव आयोग की मनमानी है जिसमें केवल 28 दिनों में 11 दस्तावेजों के साथ मतदाता सत्यापन का जो दावा चुनाव आयोग कर रही है वो सीधे तौर पर गरीब, आदिवासी, युवा, बाढ़ प्रभावित जनता और पलायन का दंश झेल रहे मतदाताओं को आगामी बिहार विधान सभा चुनावों में मतदान से रोकने की कवायद है.

           संवाददाता सम्मेलन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व विधान परिषद् में कांग्रेस के नेता डॉ मदन मोहन झा, राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दूबे, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष अशोक राम, प्रेमचंद मिश्र, पूर्व मंत्री अवधेश कुमार सिंह, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, पूर्व विधायक प्रमोद सिंह, ब्रजेश प्रसाद मुनन, डॉ स्नेहाशीष वर्धन पाण्डेय, सौरभ सिन्हा, असित नाथ तिवारी, ज्ञान रंजन, रीता सिंह सहित अन्य नेतागण मौजूद रहें.


आलोक कुमार


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मंगलवार, 1 जुलाई 2025

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नवनियुक्त कोएड जुटर एलियास फ्रैंक हैं

 


पोप लियो 14वें ने धर्माध्यक्ष एलियस फ्रैंक को कलकत्ता महाधर्मप्रांत का नया सहायक महाधर्माध्यक्ष नियुक्त किया 

 नवनियुक्त कोएड जुटर एलियास फ्रैंक हैं

परमधर्मपीठीय उर्बानिया विश्वविद्यालय में कैनन लॉ में डॉक्टरेट की पढ़ाई की है

आसनसोल .यह बहुत ही कम लोगों के साथ होता है.कलकत्ता महाधर्मप्रांत विभक्त होने पर आसनसोल धर्मप्रांत में फादर एलियस फ्रैंक शामिल हो गये.फादर एलियस फ्रैंक को आसनसोल धर्मप्रांत के दूसरे धर्मप्रांत बनने का मौका मिला.अब कलकत्ता महाधर्मप्रांत के नये सहायक महाधर्माध्यक्ष कोएड जुटर नियुक्त हो गये.

    कलकत्ता महाधर्मप्रांत में 23 अप्रैल 1993 कांे फादर एलियस फ्रैंक का पुरोहिताभिषेक हुआ. इस बीच कलकत्ता महाधर्मप्रांत को विभक्त कर 1997 में आसनसोल धर्मप्रांत बनाया, तब वे इस नए धर्मप्रांत में शामिल हो गए.यह संयोग रहा कि वे असनसोल धर्मप्रांत का दूसरा धर्माध्यक्ष नियुक्त कर दिये गए. उनको 2023 में संत पापा फ्राँसिस ने धर्माध्यक्ष नियुक्त किये. अब वे कलकत्ता महाधर्मप्रांत में आ गये. वे केवल आए ही नहीं बल्कि कलकत्ता महाधर्मप्रांत का नया सहायक महाधर्माध्यक्ष नियुक्त कर दिए गये.पोप लियो 14वें ने 28 जून 2025 को कलकत्ता महाधर्मप्रांत का नया सहायक महाधर्माध्यक्ष नियुक्त कर दिये हैं.

    नवनियुक्त कलकता महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष के कोएड जुटर एलियास फ्रैंक का जन्म 15 अगस्त 1962 को मैंगलोर के बंटवाल धर्मप्रांत में हुआ था.बारासात में संत जॉन वियानी मेजर सेमिनरी में पढ़ाई के बाद, उन्होंने बैरकपुर के मॉर्निंग स्टार रीजनल सेमिनरी में दर्शनशास्त्र और रोम के परमधर्मपीठीय उर्बानिया विश्वविद्यालय में ईशशास्त्र का अध्ययन किया.23 अप्रैल 1993 को कलकत्ता महाधर्मप्रांत में उनका पुरोहिताभिषेक हुआ था.1997 में जब आसनसोल धर्मप्रांत  बना, तो वे इस नए धर्मप्रांत में शामिल हुए.

    अभिषेक के बाद सबसे पहले उन्होंने बर्दवान के सेक्रेड हार्ट पल्ली में सहायक पल्ली पुरोहित के रूप में कार्य किया (1993-1995 और 1996-1999) और बसिंडा के क्रिस्टो ज्योति पल्ली के पल्ली प्रशासक (1995-1996) की भूमिकाएँ निभाईं.उन्होंने कैनन लॉ में लाइसेंसिएट (1999-2001) और रोम के परमधर्मपीठीय उर्बानिया विश्वविद्यालय में न्यायशास्त्र में डिप्लोमा के लिए अध्ययन किया। दुर्गापुर में येसु की छोटी संत तेरेसा पल्ली के पल्ली प्रशासक (2002-2003) के रूप में सेवा करने के बाद उन्होंने परमधर्मपीठीय उर्बानिया विश्वविद्यालय (2003-2004) में कैनन लॉ में डॉक्टरेट की पढ़ाई की. उसके बाद बर्दवान में सेक्रेड हार्ट पल्ली के पल्ली पुरोहित और कलकत्ता के अंतर-धर्मप्रांतीय ट्रिब्यूनल में न्यायाधीश (2005-2006) और रोम के अलफोंसियानुम अकादमी में अतिथि प्रोफेसर (2020 से) रहे. उन्होंने दिव्य उपासना और संस्कारों के अनुशासन के लिए गठित विभाग के सलाहकार, विश्वास के सिद्धांत के लिए विभाग में विवाह मामलों के आयुक्त और रोम भिखारियेट के न्यायालय में बाहरी न्यायाधीश के रूप में भी काम किया है.


आलोक कुमार


कलकत्ता आर्चडायसिस के आर्चबिशप थॉमस डिसूजा हैं


 वाटिकन के नियमानुसार कलकत्ता आर्चडायसिस के आर्चबिशप थॉमस डिसूजा पद त्याग करेंगे

कलकत्ता. कलकत्ता आर्चडायसिस के आर्चबिशप थॉमस डिसूजा हैं.उनका जन्म तिथि 26 अगस्त, 1950 है.वाटिकन के नियम के अनुसार 75 वर्ष होने पर पद मुक्त हो जाना है.इसके आलोक में आर्चबिशप थॉमस डिसूजा ने पोप लियो 14 वें के पास पद मुक्त होने के लिए पत्र प्रेषित कर दिया है.जिसे बहुत जल्द ही स्वीकार कर लिया जाएगा.आग्रह स्वीकार होते ही आर्चबिशप थॉमस डिसूजा एमेरिटस हो जाएंगे.एमेरिटस एक सम्मानित शब्द है.जो विशिष्ट पद धारकों को दिया जाता है.

कलकत्ता आर्चडायसिस के आर्चबिशप थॉमस डिसूजा का पुरोहिताभिषेक 16 अप्रैल, 1977 को हुआ था. वे बागडोगरा, पश्चिम बंगाल, भारत के बिशप 14 जून, 1997 को नियुक्त हुए थे. उनका बिशप अभिषेक 25 जनवरी, 1998 को हुआ.उसके बाद कलकत्ता आर्चडायसिस के कोएड जुटर 12 मार्च, 2011 को मनोनीत हुए. मात्र 11 माह के बाद थॉमस डिसूजा कलकत्ता के आर्चबिशप 23 फरवरी, 2012 नियुक्त किया गया.इस पद पर 13 साल से हैं.

    एमेरिटस एक शब्द है जिसका उपयोग उन लोगों में किया जाता है जो किसी दिए गए संगठन में अपने कार्यों को समाप्त करने के बाद भी कुछ विशेष विशेषाधिकार प्राप्त करते हैं जो उनकी स्थिति के पूर्ण कार्यों में आनंद ले सकते हैं.सामान्य तौर पर, जिन लोगों को किसी संस्थान में एमेरिटस की उपाधि से सम्मानित किया जाता है, वे एक उत्कृष्ट पेशेवर करियर का प्रतिनिधित्व करते हैं और ज्ञान और सलाह के गढ़ का प्रतिनिधित्व करते हैं, इस बात पर जोर देना महत्वपूर्ण है कि इस प्रकार के शीर्षक आम तौर पर संगठनों में दिए जाते हैं वे एक विशिष्ट सिद्धांत जैसे कि ईसाई चर्च, सरकारी प्रशासनिक प्रणाली, कानून फर्म, आदि को आधार बनाते हैं.

आलोक कुमार


सोमवार, 30 जून 2025

आज उनका अंतिम संस्कार की सेवा



आज फादर अरोकिअम जॉन बोस्को का अंतिम विधि


एक्सटीटीआई चैपल में शाम 4ः00 बजे से मिस्सा


पटना.  शिक्षाविद फादर अरोकिअम जॉन बोस्को थे. आज कैथोलिक चर्च,न्यू आरा में मिस्सा अर्पित करने के बाद भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई.यहां पर फादर जॉन बोस्को ने एक शिक्षक के रूप में कैथोलिक हाई स्कूल, आरा में 2016-2018 तक कार्य सेवा निभाया.उसके बाद कैथोलिक मिडिल स्कूल, आरा में 2018-2025 तक प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य किया.वे 63 वर्ष के थे.मृत्यु का कारण लंग्स फेलियोर यानी फेफड़ों का काम करना बंद करना बताया गया.यह एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है जिसमें फेफड़े शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं दे पाते या कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर नहीं निकाल पाते.

   कैथोलिक हाई स्कूल और कैथोलिक मिडिल स्कूल आरा के साथ कैथोलिक चर्च,न्यू आरा में है. इसे जेसुइट सोसायटी के द्वारा संचालित है,यह क्षेत्र बक्सर धर्मप्रांत के अधीन है.इसके आलोक में बक्सर धर्मप्रांत की ओर से श्रद्धांजलि एवं मिस्सा किया गया.बक्सर धर्मप्रांत के बिशप डा. जेम्स शेखर ने मिस्सा अर्पित किया.अन्य पुरोहित ने फादर जॉन बोस्को की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित किये.

   बताते चले कि फादर अरोकिअम जॉन बोस्को का जन्म 27.5.1962 को तमिलनाडु में हुआ था.वे 15.7.1981 को जेसुइट में प्रवेश किये.उनका पुरोहिताभिषेक 30.12.1996 को अंतिम व्रत धारण 15.5.2005 में हुआ था.सोशियस से नौसिखिए मास्टर एक्सटीटीआई दीघा घाट, पटना में 1997-1998 तक थे.शिक्षक सेंट इग्नाटियस हाई स्कूल, औरंगाबाद में 1998-2001 तक थे. प्रधानाध्यापक आर आर हाई स्कूल, बरबीघा में 2003-2006 तक थे. उप प्राचार्य सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, बेतिया में 2006-2011 तक थे.निदेशक के.आर. कैंडिडेट्स हाउस में 2012-2015 तक थे.शिक्षक कैथोलिक हाई स्कूल, आरा में 2016-2018 तक थे.प्रधानाध्यापक कैथोलिक मिडिल स्कूल, आरा में 2018 -2025 मृत्युलोक तक थे.

   आज उनका अंतिम संस्कार की सेवा सोमवार, 30 जून को शाम 4ः00 बजे एक्सटीटीआई चैपल में शुरू होगी.


आलोक कुमार

आजतक मुंगेरी ग्राम नहीं बन सका

पटना . पटना नगर निगम के पाटलिपुत्र अंचल अंतर्गत वार्ड नम्बर-22 बी के कुर्जी मोहल्ला में रहने वाले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मुंगेरी लाल रहने वाले थे.बीमार पड़ने के बाद परिजनों ने मुंगेरी बाबू को कुर्जी होली फैमिली हाॅस्पीटल में भर्ती कराया.यहां पर इलाज के दरमियान दैनिक हिंदुस्तान और दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित हुई.इस खबर से नीतीश सरकार के महकमे में हलचल मच गया.आनन फानन में नीतीश सरकार ने मुंगेरी बाबू को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली भेजने की व्यवस्था कर दी थी.कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल के वरीय चिकित्सक डा.एल.बी.सिंह साथ जाने वाले थे.इस बीच मुंगेरी बाबू की हालत खराब हो गयी और प्रभु के दरबार में चले गए.

     इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजनीतिक विवशता के कारण जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री पद संभालने के लिए दिए.उनके कार्यकाल में बिहार विधान परिषद में कुर्जी मोहल्ला को मुंगेरी ग्राम नामकरण करने का प्रस्ताव पारित किया गया.जो आजतक मुंगेरी ग्राम नहीं बन सका. कुर्जी मोहल्ला का नामकरण स्वतंत्रता सेनानी और राज्य के पूर्व मंत्री मुंगेरी लाल के नाम पर होगा.अब इसे मुंगेरी ग्राम के नाम से जाना जाएगा.मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शुक्रवार को विधान परिषद में इसकी घोषणा की. ध्यानाकर्षण के माध्यम से यह मांग सदस्य दिलीप कुमार चौधरी ने उठाई थी.

      परिषद में नेता प्रतिपक्ष सुशील कुमार मोदी ने भी इस मांग का समर्थन किया और मुख्यमंत्री से इसकी अपील की. रामवचन राय ने भी इसका समर्थन किया था. इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंगेरी लाल बड़े नेता थे और गरीबों के मसीहा थे.सदन और विपक्ष के नेता की भावनाओं को देखते हुए कुर्जी नामकरण मुंगेरी ग्राम करने की घोषणा करता हूं.

आलोक कुमार.

रविवार, 29 जून 2025

मुंगेरी लाल उच्च कोटि के स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक थे: राजेश

 स्व. मुंगेरी लाल जी की 24वीं पुण्यतिथि पर कांग्रेस नेताओं ने दी श्रद्धांजलि


पटना . बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष, स्वतंत्रता सेनानी स्व0 मुंगेरी लाल जी की 24वीं पुण्यतिथि पर आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम में उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया.

            इस अवसर पर बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि स्व0 मुंगेरी लाल उच्च कोटि के स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक थे। राज्य सरकार के मंत्री के रूप में उन्होंने दलितों के विकास की कई योजनाएँ चलायीं. पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जो रिपोर्ट पेश की उसी के आधार पर आज तक बिहार में पिछड़ों एवं अति पिछड़ों के लिये आरक्षण की व्यवस्था है.

            इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के अलावे कांग्रेस विधान परिषद दल के नेता डा0 मदन मोहन झा,अभय दूबे, डा0 अशोक कुमार, अवधेश कुमार सिंह, प्रेमचन्द्र मिश्रा, नरेन्द्र कुमार, राजेश राठौड, प्रमोद कुमार सिंह, जमाल अहमद भल्लू, ब्रजेश प्रसाद मुनन,अजय  चौधरी  ,सौरभ सिन्हा, नागेन्द्र कुमार विकल, असित नाथ तिवारी, स्नेहाशीष वर्द्धन पाण्डेय,ज्ञान रंजन, वैद्यनाथ शर्मा,अरविन्द लाल रजक, रौशन कुमार सिंह अश्विनी कुमार, रीता सिंह, उदय शंकर पटेल, संतोष श्रीवास्तव, शरीफ रंगरेज, वसीम अहमद, अखिलेश्वर सिंह, वसी अख्तर, दुर्गा प्रसाद , संजय कुमार भारती, सत्येन्द्र कुमार सिंह, विश्वनाथ बैठा, सुनील कुमार सिंह, डा0 सुमन कुमार झा, मो0 शहनवाज,बद्री प्रसाद यादव, कृपा शंकर शाही, जलाधर कुमार, डा0 शैलेन्द्र कुमार, विनय कुमार देव, जय प्रकाश शर्मा, विन्ध्याचल आनन्द, रामशरण कुमार, बी0के0 सिंह कुशवाहा,मो0मुराद सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित रहे.


आलोक कुमार

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