शनिवार, 4 जून 2022

बाल श्रमिकों को नियोजित नहीं करेंगे

 

मोतिहारी.विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के पूर्व बाल श्रमिकों को नियोजित नहीं करने से संबंधित जन जागरूकता के लिए आज श्रम अधीक्षक राकेश रंजन के द्वारा श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, पिपराकोठी-प्रभारी मोतिहारी सदर विकास कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, सुगौली रविंद्र भूषण , डंकन हॉस्पिटल रक्सौल के प्रतिनिधि, चाइल्ड लाइन के प्रतिनिधि, प्रयास संस्था के विजय कुमार शर्मा  मोतिहारी शहर क्षेत्र  के क्रमशः बसंत स्वीट्स, छतौनी, मां वैष्णो स्वीट्स छतौनी  पवन स्वीट्स, छतौनी, मोटर साइकिल स्टोर हवाई अड्डा चौक  एवं अन्य  विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया तथा सभी नियोजित ओं से बाल श्रमिकों को नियोजित नहीं करने के संबंध में शपथ पत्र पाया गया तथा सभी दुकानदारों एवं नियोजन को यह निर्देश दिया गया कि वह अपने दुकान, होटल, प्रतिष्ठान में किसी भी बाल श्रमिकों को नियोजित नहीं करेंगे तथा अपने दुकान में इस आशय का एक बोर्ड लगाएंगे कि उनका दुकान या प्रतिष्ठान बाल श्रम मुक्त है.

आज मोतिहारी शहर क्षेत्र  स्थित कुल -01 प्रतिष्ठान ज्योति स्वीट्स छतौनी चौक से  01 बाल श्रमिक को मुक्त कराया गया तथा विमुक्त कराए गए बच्चों को बाल कल्याण समिति, मोतिहारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया तथा संबंधित सभी नियोजकों के विरुद्ध संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया की जा रही है.


श्रम अधीक्षक के द्वारा बताया गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में सभी नियोजकों से प्रति बाल श्रमिक ₹20000 रुपये की वसूली की कार्रवाई अलग से की जाएगी जिसे नियमानुसार जिलाधिकारी के नाम से संधारित जिला बाल श्रमिक पुनर्वास कोष में जमा कराया जाएगा.

जिन नियोजकों के द्वारा ₹20000 जुर्माने की राशि नहीं जमा कराई जाएगी उनके विरुद्ध एक अलग से सर्टिफिकेट केस या नीलाम पत्र वाद दायर किया जाएगा.

श्रम अधीक्षक ने मोतिहारी सदर प्रखंड के सभी नियोजको से यह अपील की कि वे अपने दुकान या प्रतिष्ठान में किसी भी बाल श्रमिकों को नियोजित नहीं करें. यदि किसी भी दुकान या प्रतिष्ठान में बाल श्रमिकों को नियोजित पाया जाता है तो उनके नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करते हुए अग्रसर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.श्रम अधीक्षक ने बताया कि यह अभियान 12 जून तक लगातार सभी प्रखंडों में जारी रहेगा और किसी भी परिस्थिति में बाल श्रम को स्वीकार नहीं किया जाएगा.


आलोक कुमार

 

भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों के चलते न सिर्फ मंहगाई बढ़ रही है

 

पटना.राजधानी पटना में शनिवार को ऐपवा का आठवां नगर सम्मेलन सम्पन्न हो गया. इस अवसर पर प्रोफेसर भारती एस कुमार ने कहा कि इतिहास के सच को झूठ बनाने में तत्पर भाजपा सरकार है.ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि नीतीश सरकार महिलाओं के नाम पर शराब बंदी की लेकिन गरीब ही जेल में बंद कर दिए गए हैं.ऐपवा की नगर सचिव अनिता सिन्हा ने कहा कि सरकार गरीबों के ऊपर बुलडोजर चलवा रही है.तो ऐपवा की राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे ने कहा कि ऐपवा को स्कीम वर्कर्स को संगठित करने पर जोर देना होगा.

 मंहगाई पर रोक लगाने, गैस की कीमतों को कम करने, गरीबों के आशियाने बुलडोजर चलाने पर रोक लगाने, न्याय , आजादी, बहनापा और बराबरी के लिए संघर्ष करने के नारे पर  ऐपवा का आठवां सम्मेलन भाकपा -माले विधायक दल कार्यालय 13 नंबर छज्जूबाग में सम्पन्न हुआ.इससे पहले सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रोफेसर भारती एस कुमार ने कहा कि भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों के चलते न सिर्फ मंहगाई बढ़ रही है अपितु रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं.सरकार इतिहास के सच को झूठ साबित करने में लगी हुई हैं.समस्याओं से लोगों का ध्यान हटाने के लिए साम्प्रदायिक उन्माद भड़का रही है.आज महिलाओं को इसके खिलाफ खड़ा होना होगा.


सम्मेलन की मुख्य वक्ता ऐपवा महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि  केन्द्र सरकार ने  गैस सिलेंडर पर  से सब्सिडी खत्म कर दी , अब केवल उज्जवला योजना वाले सिलेंडर पर ही सब्सिडी बरकरार रहेगी.अर्थव्यवस्था रसातल में जा रही है जिससे मंहगाई बढ़ रही है, रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं.स्वास्थ्य व्यवस्था अभी भी पटरी पर नहीं आईं है.बिहार में नीतीश जी पहले तो लड़कियों को साइकिल बांटने के नाम पर शराब की दुकानों को पंचायत स्तर तक खोलकर राजस्व से सरकार की आमदनी बढ़ाएं. गांव - गांव शराब पीने की लत पड़ गई और  महिलाओं की ही मांग पर शराबबंदी किए लेकिन सब गरीब जेल में बंद कर दिए. शराब माफिया जेल से खुलेआम घूम रहे हैं और जहरीली शराब का कारोबार चला रहे हैं जिससे सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है.अपराध का बोलबाला है अभी कटिहार में में एक नाबालिग अल्पसंख्यक बच्ची का बलात्कार करके हत्या कर दी गई.प्राणपुर विधायक हत्यारों को संरक्षण कर रहे हैं.

सम्मेलन की पर्यवेक्षक वह ऐपवा राज्य सचिव शशि यादव ने कहा कि आज सरकार गरीबों की झोपड़ियों पर बुलडोजर चलवा रही है. बगल के उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी बुलडोजर बाबा बने हुए हैं लेकिन बिहार में बुलडोजर के आगे गरीब मजबूती से खड़ा है. बिहार में बुलडोजर राज नहीं चलने दिया जाएगा.

ऐपवा राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे ने कहा कि ऐपवा अस्सी के दशक से ही महिलाओं का सशक्त आवाज रहा रहा है और अब समय के साथ स्कीम वर्कर्स जिनका सस्ते श्रम के रूप में इस्तेमाल होता है , उनकी जुझारू आवाज बनकर खड़ा है.सम्मेलन में झंडोत्तोलन किया गया.  भाकपा -माले की सत्तर दशक की नेत्री मीरा भट्टाचार्य ने सम्मेलन की अध्यक्षता की. तीन सदस्यीय अध्यक्ष मण्डली - अनुराधा सिंह, राखी मेहता व आसमां खान ने.संचालन अनिता सिन्हा ने किया.कामकाज की रिपोर्ट पेश किया अनिता सिन्हा ने. इस रिपोर्ट पर मधु, विभा गुप्ता, आस्मां खान, ममता, निर्मला, दमयंती कुशवाहा , नसरीन बानो आदि ने अपनी बात रखी. कोरस की टीम ने गीत प्रस्तुत किए.


 अन्त में 35 सदस्यीय कमेटी का चुनाव किया गया.फिर से सर्वसम्मति से मधु को अध्यक्ष व अनिता सिन्हा को सचिव चुना गया.सह सचिव समता राय, अनुराधा सिंह व राखी मेहता चुनी गई.उपाध्यक्ष विभा गुप्ता, आबदा खातून, अफ्शां जंबी, नसरीन बानो व आसमां खान को बनाया गया.अन्त में ‘हम होंगे कामयाब‘ गीत से सम्मेलन का समापन हुआ.


आलोक कुमार

 


नीतीश कुमार ने स्कूली छात्रों के बीच साइकिल प्रेम दिखाये थे

 तीन जून को विश्व साइकिल दिवस 


पटना. दैनिक जीवन में साइकिल के उपयोग को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से विश्व भर में 3 जून यानी आज विश्व  साइकिल दिवस या वर्ल्ड बाइसिकल डे  मनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य लोगों को ये समझाया है कि साइकिल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए तो बेहतर है ही, पर्यावरण  और अर्थव्यवस्था के लिए भी अनुकूल है.संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 जून को इस दिन के तौर पर मनाये जाने की घोषणा की थी. आधिकारिक तौर पर पहली बार विश्व साइकिल दिवस 3 जून, 2018 को मनाया गया था.साइकिल दिवस को मनाने की शुरुआत साल 2018 में हुई। अप्रैल 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व साइकिल दिवस मनाने का फैसला लिया.इसके लिए 3 जून का दिन तय किया गया.तब से अब तक भारत समेत कई देश विश्व साइकिल दिवस हर साल 3 जून को मनाते हैं.                   

यूरोपीय देशों में साइकिल के इस्तेमाल का विचार 18वीं शताब्दी के दौरान लोगों को आया था लेकिन 1816 में पेरिस में पहली बार एक कारीगर ने साइकिल का आविष्कार किया, उस समय इसका नाम हाॅबी हाॅर्स यानी काठ का घोड़ा कहा जाता था.बाद में 1865 में पैर से पैडल घुमाने वाले पहिए का आविष्कार किया. इसे वेलाॅसिपीड कहा जाता था.इसे चलाने से बहुत ज्यादा थकावट होने के कारण इसे हाड़तोड़ कहा जाने लगा. साल 1872 में इसे सुंदर रूप दिया गया.लोहे की पतली पट्टी के पहिए लगाए गए. इसे आधुनिक साइकिल कहा गया। आज साइकिल का यही रूप उपलब्ध है.   

  संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विश्व  साइकिल दिवस का महत्व सदस्य राज्यों के विभिन्न विकास रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करने और अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय विकास नीतियों और कार्यक्रमों में साइकिल को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करता है. साथ ही यह दिन सदस्य राज्यों को सर्वोत्तम प्रथाओं और समाज के सभी सदस्यों के बीच साइकिल को बढ़ावा देने और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर साइकिल सवारी को व्यवस्थित करने के लिए भी प्रोत्साहित करता है. यह दिन बच्चों और युवाओं के लिए शिक्षा को मजबूत करने, स्वास्थ्य को बेहतर बनाये रखने, बीमारियों को रोकने, सामाजिक समावेश और सुविधा प्रदान करने के लिए साइकिल के उपयोग को समझने के लिए भी प्रोत्साहित करता है. विश्व साइकिल दिवस मनाये जाने की वजह साइकिल की विशेषता और बहुमुखी प्रतिभा को पहचान देना भी है. कहा गया कि शहरवासी अपने आसपास की दूरी तय करने के लिए अगर साइकिल का इस्तेमाल करें तो इससे प्रतिदिन सैकड़ों लीटर पेट्रोल की खपत कम होगी. साथ ही शहर का प्रदूषण स्तर भी कम होगा.

सीएम नीतीश ने जो बातें कहीं वह हकीकत ही हैं. इसकी शुरुआत कैसे हुई यह जानने के लिए एक वाकया बताते हैं आपको. वर्ष 2005 में बिहार की सत्ता संभालने के एक साल बाद नीतीश कुमार पटना ज़िला में एक सरकारी समारोह में शिरकत कर रहे थे. इस समारोह में स्कूल में पढ़ने वाली दलित लड़कियों को साइकिल वितरण किया जा रहा था. वितरण के बाद जब लड़कियां क़तार में खड़ी होकर साइकिल चला कर जाने लगीं तो उस मंजर को देख नीतीश कुमार बेहद खुश हुए. उन्होंने तभी अधिकारियों से कहा कि क्यों न सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली तमाम लड़कियों को साइकिल दी जाए. इस तरह से लड़कियों के लिए साइकिल योजना की शुरुआत हुई.

आलोक कुमार



शुक्रवार, 3 जून 2022

जॉर्ज फर्नांडीस जी की जयंती पर आयोजित राजकीय समारोह

 



    * पूर्व केंद्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस का जन्‍म 3 जून 1930 को

                      92 साल


पटना. पटना. जॉर्ज फर्नांडीस का जन्म 3 जून 1930 को मैंगलोर के कैथोलिक परिवार में हुआ था. इनकी पढ़ाई लिखाई मैंगलौर के स्‍कूल और सेंट अल्‍योसिस कॉलेज से हुई. 1949 में जॉर्ज काम की तलाश में मुंबई आ गए. मुंबई में उनका जीवन कठिनाइयों भरा रहा. मामूली नौकरी करते थे, चौपाटी स्टैंड की बेंच पर सोते थे, फुटपाथ पर रहते थे. ये उनके संघर्ष के दिन थे लेकिन इन्हीं संघर्षों ने जॉर्ज फर्नांडिस के व्यक्तित्व का निर्माण किया था. इसके बाद वो सोशलिस्ट लीडर डॉ राम मनोहर लोहिया के संपर्क में आए और सोशलिस्ट ट्रेड यूनियन के आंदोलन में शामिल हो गए. इस आंदोलन में उन्होंने मजदूरों के हक की आवाज उठाई.

आज समाजवादी नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रद्धेय श्री जॉर्ज फर्नांडीस जी की जयंती पर आयोजित राजकीय समारोह में माननीय सीएम  @NitishKumar   जी एवं शिक्षा मंत्री श्री / @VijayKChy   के साथ शामिल होकर दिवंगत पुण्यात्मा के तेल चित्र पर पुष्पार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया.


आलोक कुमार 

दिव्यांगों का रजिस्ट्रेशन और जांच कार्यक्रम का आयोजन




चकिया. पूर्वी चंपारण जिले में है चकिया अनुमंडल.इस अनुमंडल अंतर्गत सभी दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कराने के दृष्टिकोण से एलिम्को कानपुर द्वारा दिव्यांगों का रजिस्ट्रेशन और जांच कार्यक्रम का आयोजन किया गया.जिसका उद्घाटन माननीय विधायक पिपरा श्री श्याम बाबू यादव, चकिया अनुमंडल पदाधिकारी एवं प्रमुख द्वारा  किया गया.

इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी ने कहा कि सरकारी लाभ से वंचित दिव्यांगों को योजनाओं से लाभान्वित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी दिव्यांगों   के लिए शिविर का आयोजन किया गया.शिविर में जांचोपरांत दिव्यांगों की सूची बनाकर एलिम्को के माध्यम से सरकार को भेजा जाएगा.वही उक्त कार्यक्रम की जानकारी देते हुए अनुमंडल पदाधिकारी ने बताया कि ट्राईसाइकिल, मोटर वाहन,श्रवण यंत्र,छड़ी आदि दिव्यांगों  को देने के दृष्टिकोण से दिव्यांगों के शिविर का आयोजन किया गया है.जिसमें उनका जांच कर 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगों को सर्टिफिकेट और उपरोक्त यंत्र दिया जाएगा. कार्यक्रम में सैकड़ों दिव्यांगों की जांच कर उनका रजिस्ट्रेशन किया गया.

उक्त कार्यक्रम में जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक धीरज कुमार, नवीन कुमार नवीन जिला प्रबंधक बुनियाद केन्द्र , पूर्वी चंपारण,अनुमंडल पदाधिकारी चकिया ,बीडीओ चकिया और बुनियाद केंद्र चकिया के सभी कर्मी उपस्थित थे.


 

आलोक कुमार 

ऐपवा का आठवां नगर सम्मेलन कल

 पटना.महिलाओं के अधिकार और न्याय के लिए सतत आंदोलन जारी है. आप जानते हैं कि इस आंदोलन में एक मजबूत भूमिका निभाने वाले संगठन का नाम है -ऐपवा. ऐपवा अपने जन्म काल से ही देश भर में इस आंदोलन में सक्रिय है. यहां पटना की सड़कों पर भी न केवल अतीत में बल्कि हाल के वर्षों में हमने संघर्ष किया है. मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड से लेकर दर्जनों ऐसे मामलों में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार को मजबूर किया. समाज और परिवार में महिलाओं को न्याय और हक दिलाएंगे.

आज एक तरफ महंगाई चरम पर है. रसोई गैस से लेकर हर चीज महंगी हो रही है, दूसरी तरफ महिलाओं पर हिंसा और उत्पीड़न बढ़ रहा है लेकिन महिला कानूनों को कमजोर किया जा रहा है. महिलाओं के लिए न्याय और बराबरी का रास्ता जब सरकार और ताकतवर लोग ही बंद कर रहे हों तब महिलाओं को और मजबूती से अपने संघर्ष को जारी रखना होगा. इस परिप्रेक्ष्य में ऐपवा का आठवां नगर सम्मेलन होने जा रहा है. सम्मेलन उद्घाटनकर्ता -प्रो.भारती एस कुमार हैं. मुख्य वक्ता- मीना तिवारी, महासचिव, ऐपवा हैं.वक्ता- शशि यादव- राज्य सचिव, ऐपवा और सरोज चौबे, राज्य अध्यक्ष ऐपवा हैं.सम्मेलन स्थल -13 नंबर विधायक आवास कैंपस, छज्जू बाग, पटना  और समय - 4 जून दोपहर 1ः00 बजे से है.आप इस सम्मेलन में सादर आमंत्रित हैं. कृपया आप आएं ताकि हम सब एक साथ मिलकर अपने न्याय और अधिकार की आवाज और मजबूती से उठा सकें.

 

आलोक कुमार 



हत्या में नामित अभियुक्तों पर अब तक कोई भी करवाई नहीं

                             * जमुई के सीता राम दस महीने से बेटी के हत्यारों को सजा दिलाने भटक रहा है


जमुई.कानून की ताकत का अहसास करने के लिए अक्सर ये जुमला कहा जाता है ‘कानून के हाथ बहुत लम्बे होते हैं‘ लेकिन इन लंबे हाथों का क्या फायदा जब पीड़िता को इंसाफ ही ना दिला पाए! इन दिनों जमुई में पुलिस की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है. जब तकरीबन दस महीने बीत जाने के बाद भी दहेज के कारण की गई विवाहिता की हत्या में नामित अभियुक्तों पर अब तक कोई भी करवाई नहीं हो पायी है. दरअसल पीड़िता के पिता मसौढ़ी (जमुई), वार्ड न0- 14 निवासी सीता राम उर्फ सोनू राम ने जमुई प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मैंने अपनी 22 वर्षीय पुत्री की शादी 2012 में सदर प्रखंड क्षेत्र के ढण्ड निवासी इंद्रदेव राम के पुत्र विपिन कुमार के साथ किया था. उस दौरान अपनी औकात के अनुसार जो उन्होंने बोला वह दिया पर बेटी के ससुराल वाले हमेशा कुछ ना कुछ डिमांड रख मेरी बेटी को यातना देते रहते. बेटी का घर बस जाए यह सोच  मैं   उसे पूरा करने का प्रयास करता पर जब स्कॉर्पियो का डिमांड हुआ तो मैं उसे पूरा नहीं कर पाया. जिस कारण मेरी बेटी का गला दबाकर 14 अगस्त 2021 को हत्या कर दिया गया. 15 अगस्त को मैंने सभी आरोपियों पर जमुई थाना कांड संख्या- 344/2021 धारा 304 बी /34 भा0 द0 वि0 के तहत प्राथमिकी भी दर्ज कराई पर प्रशासन ने अब तक कुछ नहीं किया. आरक्षी अधीक्षक साहब से कई बार मिलने गया पर उनसे मुलाकात नहीं हो पायी. अब तो न्याय व्यवस्था पर से विश्वास उठता जा रहा है. जानकारी मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ता सुमन सौरभ ने कहा आरोपों की गंभीरता के बावजूद, यह काफी चिंताजनक है कि दहेज हत्या के आरोपियों के खिलाफ पुलिस द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. मैं हर संभव प्रयास करूंगा कि मृतक खुशबू के साथ न्याय हो.                


सामाजिक कार्यकर्ता सुमन सौरभ ने कहा आरोपों की गंभीरता के बावजूद,यह काफी चिंताजनक है कि दहेज हत्या के आरोपियों के खिलाफ पुलिस द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. वैसे माननीय सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या मामले में पूर्व में ही स्पष्ट कर दिया है कि इसमें संदेह नहीं कि दिन-प्रतिदिन दहेज हत्या जैसा खतरा बढ़ रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज मौत के मामलों में (आईपीसी 304 बी) ये साबित करना जरूरी नहीं है कि महिला की अप्राकृतिक मृत्यु से बिल्कुल पहले ही दहेज की मांग की गई हो. यानि अगर मौत से कुछ समय पहले भी दहेज के लिए ससुराल पक्ष से दबाव बनाने और परेशान करने की बात साबित होती है, तो ऐसे मामलों में सजा देने के लिए पर्याप्त होगा. मै हर संभव प्रयास करूंगा कि मृतक खुशबू के साथ न्याय हो.


आलोक कुमार 

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“कब्रिस्तान में जगह नहीं है…”

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