शुक्रवार, 3 जून 2022

हत्या में नामित अभियुक्तों पर अब तक कोई भी करवाई नहीं

                             * जमुई के सीता राम दस महीने से बेटी के हत्यारों को सजा दिलाने भटक रहा है


जमुई.कानून की ताकत का अहसास करने के लिए अक्सर ये जुमला कहा जाता है ‘कानून के हाथ बहुत लम्बे होते हैं‘ लेकिन इन लंबे हाथों का क्या फायदा जब पीड़िता को इंसाफ ही ना दिला पाए! इन दिनों जमुई में पुलिस की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है. जब तकरीबन दस महीने बीत जाने के बाद भी दहेज के कारण की गई विवाहिता की हत्या में नामित अभियुक्तों पर अब तक कोई भी करवाई नहीं हो पायी है. दरअसल पीड़िता के पिता मसौढ़ी (जमुई), वार्ड न0- 14 निवासी सीता राम उर्फ सोनू राम ने जमुई प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मैंने अपनी 22 वर्षीय पुत्री की शादी 2012 में सदर प्रखंड क्षेत्र के ढण्ड निवासी इंद्रदेव राम के पुत्र विपिन कुमार के साथ किया था. उस दौरान अपनी औकात के अनुसार जो उन्होंने बोला वह दिया पर बेटी के ससुराल वाले हमेशा कुछ ना कुछ डिमांड रख मेरी बेटी को यातना देते रहते. बेटी का घर बस जाए यह सोच  मैं   उसे पूरा करने का प्रयास करता पर जब स्कॉर्पियो का डिमांड हुआ तो मैं उसे पूरा नहीं कर पाया. जिस कारण मेरी बेटी का गला दबाकर 14 अगस्त 2021 को हत्या कर दिया गया. 15 अगस्त को मैंने सभी आरोपियों पर जमुई थाना कांड संख्या- 344/2021 धारा 304 बी /34 भा0 द0 वि0 के तहत प्राथमिकी भी दर्ज कराई पर प्रशासन ने अब तक कुछ नहीं किया. आरक्षी अधीक्षक साहब से कई बार मिलने गया पर उनसे मुलाकात नहीं हो पायी. अब तो न्याय व्यवस्था पर से विश्वास उठता जा रहा है. जानकारी मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ता सुमन सौरभ ने कहा आरोपों की गंभीरता के बावजूद, यह काफी चिंताजनक है कि दहेज हत्या के आरोपियों के खिलाफ पुलिस द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. मैं हर संभव प्रयास करूंगा कि मृतक खुशबू के साथ न्याय हो.                


सामाजिक कार्यकर्ता सुमन सौरभ ने कहा आरोपों की गंभीरता के बावजूद,यह काफी चिंताजनक है कि दहेज हत्या के आरोपियों के खिलाफ पुलिस द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. वैसे माननीय सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या मामले में पूर्व में ही स्पष्ट कर दिया है कि इसमें संदेह नहीं कि दिन-प्रतिदिन दहेज हत्या जैसा खतरा बढ़ रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज मौत के मामलों में (आईपीसी 304 बी) ये साबित करना जरूरी नहीं है कि महिला की अप्राकृतिक मृत्यु से बिल्कुल पहले ही दहेज की मांग की गई हो. यानि अगर मौत से कुछ समय पहले भी दहेज के लिए ससुराल पक्ष से दबाव बनाने और परेशान करने की बात साबित होती है, तो ऐसे मामलों में सजा देने के लिए पर्याप्त होगा. मै हर संभव प्रयास करूंगा कि मृतक खुशबू के साथ न्याय हो.


आलोक कुमार 

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