दुर्ग . छतीसगढ़ में दुर्ग है.पिछले दिनों 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन में यात्रा की तैयारी कर रहे 2 नन एवं उनके साथ के बालिग युवतियों को एवं स्टेशन छोड़ने आए एक व्यक्ति को कानून-पुलिसेत्तर (कानून व पुलिस से ऊपर सर्वोच्च निकाय के रूप में कार्य कर रहे संविधान विरोधी) तत्वों/गिरोह द्वारा जबरन हंगामा कर-धार्मिक अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय के खिलाफ नफरत-हिंसा फैलाने में माहिर संगठनों द्वारा प्रताड़ित कर झूठा आरोप गढ़ा गया और एफआईआर कर 2 ननों को जेल में डाल दिया गया. मानव तस्करी तब माना जाता है, जब किसी अपराधी गिरोह द्वारा किसी को शारीरिक शोषण (श्रम व अन्य प्रकार से ) खरीदी -बिक्री किया जाता है.
लेकिन शिक्षा स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जाने वाले ईसाई संस्थाओं के नन द्वारा बालिग लड़कियों को ईसाई संस्थानिक जगह पर खाना बनाने के लिए उचित परिश्रमिक पर जा रहे थे. इन लड़कियों को सही जगह ले जाने एवं स्टेशन छोड़ने आए व्यक्ति व नन पर जबरन मानव तस्करी का आरोप लगाना एवं धर्मांतरण का आरोप लगाना, इन गिरोहों का आम काम है. इससे ये राजनैतिक लाभ लेने ध्रुवीकरण करने का काम करने के लिए कुख्यात हैं.
बस-ट्रेन में रोजाना लाखों लोग अपनी स्वेच्छा से अपने काम- धाम के लिए विभिन्न जगहों पर आना- जाना करते हैं.इनमे से किसी धार्मिक अल्पसंख्यक को सूंघकर ये अपराधी तत्व अशांति फैलाने का काम करते हैं.यदि किसी को कहीं पर कोई कानूनन असंगत बात लगता है, तो वह अपनी शिकायत पुलिस- कानून को कर सकता है, लेकिन हल्ला- बवाल पैदाकर पुलिस को धौंस-धपट दिखाकर कोई भी कानून को प्रभावित नहीं कर सकता. लेकिन यह सब कुछ पुलिस न सिर्फ मूकदर्शक बनकर देखता है वरन सहजरूप से वह इन तत्वों को सक्रिय सहयोग देता है.
पीयूसीएल की जानकारी में इस मामले में जो तथ्य सामने आया है वह यह है कि,सिस्टर प्रीती मेरी और सिस्टर वंदना फ्रांसिस 25/07/2025 सुबह आगरा से दुर्ग रेलवे स्टेशन इसलिए आएं ताकि वे तीन लड़िकियों को अपने कान्वेंट में खाना पकाने का काम के लिए ले जा सके.ये तीन आदिवासी लड़िकियां जिनका उम्र 19 वर्ष से अधिक था, नारायणपुर और ओरछा आसपास के थे. उन्हें, उनके ही परिचित सुकमन मंडावी, पूर्व योजना अनुसार, उनके और उनके माता पिता के सहमति से बस द्वारा 25/07/2025 के सुबह करीब 8 बजे दुर्ग पहुंचाए ताकि वे सिस्टरगण के साथ आगरा जा सके.आगरा जाने, सुकमन को छोड़, सभी के लिए सिस्टरगण द्वारा टिकट बुक हो चुका था जो सिस्टरगण के पास था. सुकमन को दुर्ग से वापस अपना घर जाना था. जब सुकमन और ये तीनों लड़कियां प्लेटफार्म में प्रवेश किये तो टीटीई ने उनसे प्लेटफार्म टिकट के लिए पूछताछ किये.जिसपर उन्होंने बताया की टिकट सिस्टर लोगों के पास हैं और वे उनके साथ आगरा जा रहें हैं.
पूछताछ के दौरान एक बजरंगदली भी था जिसने तुरंत अपने साथियों को दुर्ग रेलवे स्टेशन में बुलाया और सभी को रेलवे पुलिस थाने में सुबह करीब 8.30 - 9.00 बजे ले गये.
रेलवे पुलिस थाने में बजरंगदली सिस्टरगण एवं सुकमन पर तरह-तरह के आरोप, धर्म परिवर्तन और मानव तस्करी का आरोप लगाते, नारें बाजी करतें हुए पुलिस पर मानव तस्करी और धर्मपरिवर्तन के आरोप के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के लिए दबाव बनाते रहें. इसमें ज्योति शर्मा और रवि निगम प्रमुख भूमिका निभाए.ज्योति शर्मा एवं उनके साथी-बजरंगी, तीनों आदिवासी लड़कियों और सुकमन के फोन एवं उनका झोला का जबरदस्ती पूर्वक परिक्षण करतें हुए तरह तरह के आरोप और धमकी के साथ-साथ मारपीट भी किये. वे लोग सिस्टरगनो को भी गाली एवं मारने की धमकी दिए.सुकमन, जो उन तीनों लड़िकियों की मदद करने आया था, उस पर दलाल होने का आरोप भी लगाया गया. इस दौरान एक लड़की इतना परेशान हो गयी की वह वापस जाने की बात कहने लगी.ये सिलसिला शाम 5 बजे तक चलता रहा.बजरंगियों के अलावा और किसी को भी सिस्टरगण, सुकमन और लड़िकियों से मिलने या बात करने नहीं दिया गया. रेलवे पुलिस बस मूक दर्शक बने रहें मानो थाना में अब बजरंगियों का कब्जा हो गया हो. रेलवे पुलिस सिस्टरगण के पक्ष में आएं लोगोँ से कहतें रहें की बजरंगियों के चले जाने पर वे इन सबको छोड़ देंगे और आगरा जाने की टिकट भी कर देंगे.
मगर बजरंगियों के दबाव के चलते वे 5.30 बजे शाम को दो सिस्टर और सुकमन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दिया गया . रेलवे थाना से उन्हें मोहन नगर पुलिस थाना ले जाया गया और वहां से शाम 6 बजे के बाद मजिस्ट्रेट के पास ले गए जो उन्हें रिमांड में दुर्ग जेल भेज दिए. उन लड़कियों को शेल्टर होम भेज दिया गया.
पीयूसीएल प्रशासन से मांग करता है कि, ननो को अविलम्ब रिहा करे एवं दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करें.