गुरुवार, 11 सितंबर 2025

विनोबा भावे की जयंती और आज का यथार्थ

 विनोबा भावे की जयंती और आज का यथार्थ


पटना. आज 11 सितंबर है.भूदान आंदोलन के प्रणेता संत विनोबा भावे की 130वीं जयंती.कभी जिनके नाम पर पूरा देश सामाजिक क्रांति का सपना देखता था, आज उन्हीं की जयंती सरकारी उदासीनता और संस्थागत अभाव के बीच लगभग औपचारिकता भर रह गई है.

    कल तक गैर-सरकारी संस्थाएं विनोबा जी की जयंती को जन उत्सव का रूप देती थीं. पर आज, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) की कठोर शर्तों और धनाभाव के चलते वे संस्थाएँ पंगु होकर रह गई हैं. 2014 के बाद केंद्र सरकार ने इस कानून को सख्ती से लागू किया, जिससे NGOs की गतिविधियां लगभग ठप हो गई. विदेशी अनुदान पर पाबंदियों ने सामाजिक सरोकार के क्षेत्र को सिकोड़कर रख दिया.

     बावजूद इसके, बिहार स्टेट गांधी स्मारक निधि ने पटना में विनोबा जयंती का आयोजन कर परंपरा को जीवित रखने का प्रयास किया.प्रभाकर कुमार की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में माखन लाल दास, डॉ. मोख्तारूल हक़, अरुण प्रसाद, शिबबालक प्रसाद, उमेश मंडल सहित अनेक खादी-ग्रामोद्योग व स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

    सभा में खादी उद्योग और भूदान किसानों की समस्याओं पर गहन विमर्श हुआ. वक्ताओं ने सरकार से लंबित रिबेट राशि का तत्काल भुगतान, खादी पुनरुद्धार योजना के अक्षरशः: पालन और ऋण माफी की मांग की.साथ ही भूदान यज्ञ समिति के पुनर्गठन पर बल दिया ताकि भूदान किसानों की उपेक्षा दूर हो सके.

     यह जयंती केवल एक स्मरण नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक दायित्व की याद दिलाती है.सवाल यह है—क्या हम विनोबा भावे की विरासत को महज औपचारिक आयोजनों तक सीमित कर देंगे, या फिर सामाजिक न्याय और ग्राम-आधारित आत्मनिर्भरता के उनके स्वप्न को पुनर्जीवित करने का साहस दिखाएं?


आलोक कुमार

बुधवार, 10 सितंबर 2025

भारत की महिला हॉकी टीम ने कोरिया को 4-2 से हरा दिया

 महिला एशिया कप हॉकी में भारत की जीत कोरिया पर


चीन.भारत की महिला हॉकी टीम ने कोरिया को 4-2 से हरा दिया. इस मुकाबले में प्लेयर ऑफ द मैच संगीता कुमारी को चुना गया, जिन्होंने भारत के लिए एक स्कोर हासिल किया. संगीता के अलावा वैष्णवी फाल्के, लालरेम्सियामी और रुतुजा पिसल ने भी 1-1 गोल किया. भारतीय टीम इस एशिया कप में बिना कोई मैच हारे आगे बढ़ रही है.

     महिला एशिया कप 2025 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने बुधवार को अपने पहले सुपर-4 मैच में रिपब्लिक ऑफ कोरिया को 4-2 से हराकर जीत की शुरुआत की.पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के हांगझोऊ में गोंगशु कैनाल स्पोर्ट्स पार्क हॉकी फील्ड में खेले गए मुकाबले में भारत की ओर से वैष्णवी विट्ठल फाल्के (दूसरे मिनट में), संगीता कुमारी (33वें मिनट में) लालरेम्सियामी (40वें, मिनट) और रुतुजा दादासो पिसाल (59वें मिनट में) ने गोल किए.दक्षिण कोरिया के लिए युजिन किम (33वें और 53वें मिनट में) ने दो गोल किए.

    मौसम की खराबी के कारण देर से शुरू हुए मुकाबले में एक बार फिर टीम इंडिया ने अपना परचम लहराया.शुरुआती बढ़त को बरकरार रखते हुए जीत हासिल की.पहले क्वार्टर से ही वर्ल्ड रैंकिंग में 10वें स्थान पर काबिज भारतीय महिला हॉकी टीम ने प्रतिद्वंदी टीम पर अपना दबदबा कायम किया.भारत ने इस क्वार्टर में पांच पेनल्टी कॉर्नर अपने नाम किए.दूसरे मिनट में वैष्णवी विट्ठल फाल्के ने पीसी को गोल में तब्दील किया, लेकिन इसके बाद भारत एक भी मौके को भुनाने में सफल नहीं हो सका.क्वार्टर खत्म होने से पहले दक्षिण कोरिया ने पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया, जिसे भारतीय गोलकीपर ने नाकाम कर दिया.

   दूसरा क्वार्टर गोल रहित रहा. दोनों टीमों ने आक्रामक प्रदर्शन किया और बढ़त बनाने के मौके भी हासिल किए, लेकिन भारत और दक्षिण कोरिया की टीम गोल करने में कामयाब नहीं हो सकीं.पहले हाफ की समाप्ति तक भारत ने 1-0 की बढ़त को बनाए रखा.

   तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने अटैक करना जारी रखा और अपने डिफेंस को भी मजबूत बनाए रखने की पूरी कोशिश की. इस बीच 33वें मिनट में संगीता कुमार के फील्ड गोल के साथ भारत की बढ़त को दोगुना कर दिया.लेकिन दक्षिण कोरिया ने एक मिनट बाद ही पलटवार किया.युजिन किम ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर अपनी टीम का खाता खोला. भारत ने आक्रामक खेल के साथ एक और बढ़त बनाने का मौका बनाया. भारत के लिए लालरेमसियामी ने 40वें मिनट में फील्ड गोलकर स्कोर 3-1 कर दिया. इस गोल के साथ भारत ने मैच पर अपनी पकड़ को मजबूत कर लिया.

    चैथे और आखिरी क्वार्टर में भारत ने गेंद पर अपनी पकड़ बनाए रखी और गोल करने के लिए अटैक जारी रखा. वहीं, दक्षिण कोरिया ने दूसरे गोल के साथ मैच में वापसी की. युजिन ने 53वें मिनट में पीसी को गोल में बदला और 3-2 के स्कोर के साथ अंतर को कम किया.यह इस मैच में युजिन का दूसरा गोल था.इसके बाद भारत ने दो पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए.भारतीय टीम पहली पीसी को भुनाने में नाकाम रही, लेकिन क्वार्टर के खत्म होने से पहले दूसरी पीसी को रुतुजा दादासो पिसाल ने गोल में तब्दील कर भारत की जीत पक्की कर दी.


आलोक कुमार

मंगलवार, 9 सितंबर 2025

पोप लियो 14वें के सामने सबसे बड़ी चुनौती

दुनिया के सबसे छोटे देश वेटिकन के सामने बजट की बड़ी समस्या

वाटिकन . दुनिया के सबसे छोटे देश वेटिकन के सामने बजट की बड़ी समस्या है. वेटिकन अपने निवासियों पर टैक्स नहीं लगाता है या बांड जारी नहीं करता है. रोमन कैथोलिक चर्च की केंद्रीय सरकार मुख्य रूप से दान से चलती है, जिसमें लगातार गिरावट हो रही है.इसके अलावा वेटिकन संग्रहालयों के लिए टिकट बिक्री, निवेश से होने वाली आय और रियल एस्टेट से कुछ आमदनी हो जाती है.

     रोमन कैथोलिक चर्च और वेटिकन सिटी की केंद्रीय प्रशासनिक संस्था 'होली सी' के मुताबिक 2021 में उसकी आमदनी 87.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर थी. हालांकि खर्च इससे ज्यादा था.

पोप लियो 14वें के सामने सबसे बड़ी चुनौती वेटिकन को घाटे से बाहर निकालने की है.कोई भी वेटिकन को पैसे दान कर सकता है, लेकिन नियमित स्रोत दो मुख्य रूपों में आते हैं. कैनन कानून के अनुसार दुनिया भर के बिशपों को वार्षिक शुल्क का भुगतान करना पड़ता है. वेटिकन के आंकड़ों के अनुसार सालाना एकत्र किए गए 2.2 करोड़ डॉलर में एक तिहाई से अधिक का योगदान अमेरिकी बिशपों ने दिया.

    वार्षिक दान का दूसरा मुख्य स्रोत आम कैथोलिकों के लिए अधिक जाना-पहचाना है- 'पीटर्स पेंस'. यह एक विशेष संग्रह है, जो आमतौर पर जून के आखिरी रविवार को लिया जाता है.अमेरिका से इस मद में औसतन 2.7 करोड़ डॉलर मिले, जो वैश्विक संग्रह के आधे से अधिक है.हालांकि इसमें लगातार गिरावट हो रही है. घट रही किराए से आय वेटिकन के अपने संस्थान भी लगातार अपना अंशदान कम कर रहे हैं.

      कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका के बिजनेस स्कूल में चर्च प्रबंधन कार्यक्रम के निदेशक रॉबर्ट गहल ने कहा कि लियो को अमेरिका के बाहर से दान जुटाना होगा, जो कोई छोटा काम नहीं है. उन्होंने कहा कि यूरोप में व्यक्तिगत रूप से परोपकार की परंपरा (और कर लाभ) बहुत कम है. वेटिकन के पास इटली में 4,249 संपत्तियां हैं. इसके अलावा लंदन, पेरिस, जिनेवा और स्विट्जरलैंड में 1,200 से अधिक संपत्तियां हैं. इनका लगभग पांचवां हिस्सा ही उचित बाजार मूल्य पर किराए पर दिया जाता है.लगभग 70 प्रतिशत से कोई आय नहीं होती है, क्योंकि उनमें वेटिकन या अन्य चर्च कार्यालय हैं. बाकी 10 प्रतिशत को वेटिकन कर्मचारियों को कम किराए पर दिया जाता है.

   बेचनी पड़ सकती हैं प्रॉपर्टीज वर्ष 2023 में, इन संपत्तियों से केवल 3.99 करोड़ डॉलर का लाभ हुआ. अमेरिका स्थित पापल फाउंडेशन के अध्यक्ष वार्ड फिट्जगेराल्ड ने कहा कि वेटिकन को भी कुछ संपत्तियां बेचने के लिए तैयार रहना चाहिए, जिनका रख-रखाव करना बहुत महंगा है। चुनौती इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों में चर्च जाने वाले कैथोलिकों की संख्या घट रही है और कभी भरे रहने वाले चर्च खाली हो गए हैं.


आलोक कुमार)

सोमवार, 8 सितंबर 2025

धन्य कुँवारी मरियम के जन्मोत्सव

 


माता मरियम का जन्मोत्सव: विश्वास, भक्ति और आनंद का पर्व मरियम का जन्म: मुक्ति की शुरुआत

बेतिया.आज 8 सितंबर है—वह दिन जब कैथोलिक कलीसिया धन्य कुँवारी मरियम के जन्मोत्सव को पूरे आदर और श्रद्धा के साथ मनाती है. यह दिन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि विश्वास और आस्था का जीवंत प्रतीक है. इसे “Nativity of Mary” अथवा मरियम का अवतरण दिवस भी कहा जाता है.यह अवसर हमें यह याद दिलाता है कि मुक्ति की योजना में माता मरियम की भूमिका कितनी अद्वितीय और अपरिहार्य है.

बेतिया: आस्था का आध्यात्मिक केंद्र

पश्चिमी चंपारण का मुख्यालय बेतिया ईसाई समाज का एक सशक्त गढ़ माना जाता है.यहां स्थित नैटिविटी ऑफ द ब्लेस्ड वर्जिन मेरी चर्च इस पर्व का केंद्र है. दूर-दराज़, यहाँ तक कि विदेशों में बस चुके विश्वासी भी इस चर्च से भावनात्मक रूप से जुड़े रहते हैं.इस दिन पल्ली दिवस के रूप में विशेष समारोह आयोजित होता है.

बच्चों का प्रथम परमप्रसाद 

मासूमियत और विश्वास का संगम इस पर्व की विशेषता है बच्चों का प्रथम परम प्रसाद ग्रहण करना.छोटे-छोटे बच्चे सफेद वस्त्र धारण कर altar तक आते हैं. बिशप या पुरोहित उन्हें ख्रीस्त का शरीर और रक्त अर्पित करते हैं. बच्चे पूरे विश्वास के साथ ‘आमेन’ कहकर प्रभु येसु को अपने जीवन में स्वीकार करते हैं. इस पवित्र क्षण में गीत मंडली गाती है—“येसु मेरे दिल में आया”—और पूरा वातावरण भक्ति और आनंद से गूंज उठता है.

श्रद्धा और परंपरा का उत्सव

यह पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहता.कई समुदाय अपने घरों और चर्चों को सजाते हैं.परंपरा के अनुसार ब्लूबेरी वाले व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जो मरियम के नीले वस्त्र का प्रतीक हैं. यह प्रतीक हमें यह याद दिलाता है कि मरियम विनम्रता, पवित्रता और मातृत्व की छाया में सबको अपने आंचल में समेट लेती हैं.

विश्वासियों की भावनाएं: प्रार्थना और आशीर्वाद

स्वाति श्वेता की आवाज़ इस अवसर की गहराई को छूती है—“हम माता मरियम का जन्मदिन श्रद्धापूर्वक मनाते हैं. इस दिन हमारे परिवार के छोटे बच्चे पवित्र यूखरिस्ट के द्वारा प्रभु येसु को अपने जीवन में स्वीकार करते हैं.यह दिन हमारे लिए सुनहरा स्मरण है, क्योंकि बचपन में हमने भी इसी दिन प्रभु को स्वीकार किया था. मैं प्रार्थना करती हूँ कि माता मरियम अपनी साड़ियों की छाया में हमें पीढ़ी-दर-पीढ़ी आशीष देती रहें.”एलेक्स लाजरस की कामना भी दिलों में गूंजती है—“यह दिन प्रेम, शांति और आनंद से भरा हो, जैसे माता मरियम ने अपने पुत्र येसु के द्वारा दुनिया में लाया.

”निष्कर्ष: मरियम—हमारी माता, हमारी संरक्षिका                                                                                        मरियम का जन्मोत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक निमंत्रण है—विश्वास में जीने का, शांति और प्रेम को साझा करने का, और उस मातृत्वमयी करुणा को अपनाने का, जो मरियम के माध्यम से संपूर्ण मानवता तक पहुँचती है.आज का दिन हमें यह याद दिलाता है कि मरियम केवल ईश्वर की माता नहीं, बल्कि हमारी भी माता हैं—जो हमारी प्रार्थनाओं को येसु तक पहुँचाती हैं और हमें हमेशा अपनी छत्रछाया में सुरक्षित रखती हैं.

आलोक कुमार



रविवार, 7 सितंबर 2025

धन्य कार्लो एक्यूटिस को संत घोषित

 

नई दिल्ली.ईश्वर की अद्भुत लीला है जब 15 वर्षीय भाई ने संत घोषणा में पढ़ा पहला पाठ. वेटिकन सिटी का सेंट पीटर स्क्वायर हमेशा से ईसाई धर्म की आस्था और आध्यात्मिकता का ध्रुव रहा है.वही चौक, जो सदियों से संत घोषणाओं, पापाओं के आशीर्वाद और विश्व-भर से आए श्रद्धालुओं की प्रार्थनाओं का साक्षी है, 2025 की इस ऐतिहासिक घड़ी में एक और भावुक अध्याय का हिस्सा बना.

     धन्य कार्लो एक्यूटिस को संत घोषित करने की इस विशेष रस्म में जब उनके छोटे भाई मिशेल एक्यूटिस ने सुसमाचार का पहला पाठ पढ़ा, तो मानो पूरा माहौल ईश्वरीय करुणा से भर उठा. यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि समय, जीवन और मृत्यु को जोड़ने वाली ईश्वर की गहनतम योजना का प्रत्यक्ष दर्शन था.

एक भाई, जिससे कभी मुलाकात नहीं हुई

कार्लो एक्यूटिस का जन्म 1991 में हुआ और उन्होंने 2006 में मात्र 15 वर्ष की आयु में सांसारिक जीवन त्याग दिया.मृत्यु के मात्र चार वर्ष बाद, 2010 में उनके छोटे भाई-बहन मिशेल और फ्रांसेस्का का जन्म हुआ.विडंबना यह रही कि मिशेल ने अपने बड़े भाई को कभी देखा तक नहीं, लेकिन नियति ने उसे ऐसा अवसर दिया, जिससे वह अपने भाई की संत घोषणा का सहभागी बना.

 आज जब मिशेल स्वयं 15 वर्ष का है—

उसकी आयु में जिस उम्र में उसका भाई स्वर्ग चला गया था—तो यह पल और भी रहस्यमय और मार्मिक हो गया.एक भाई जिसने अपने बड़े भाई को कभी जाना नहीं, वही भाई आज पूरे विश्व के सामने खड़ा होकर उसके नाम से जुड़े सुसमाचार का पाठ पढ़ रहा था.यह दृश्य श्रद्धालुओं की आँखें नम कर गया.

संतत्व की गवाही और ईश्वर का तोहफ़ा

संत घोषित किया जाना केवल किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत आध्यात्मिकता की पहचान नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत है.कार्लो एक्यूटिस, जिसने इंटरनेट और आधुनिक तकनीक को सुसमाचार प्रचार का साधन बनाया, आज डिजिटल युग के युवाओं के लिए आदर्श बन चुका है.

    परंतु सबसे गहरा संदेश इस समारोह में मिशेल की उपस्थिति ने दिया—संत कार्लो का जीवन केवल अतीत की स्मृति नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य में भी जीवित है.यह मानो ईश्वर का तोहफ़ा था, जिसने परिवार को दो पीढ़ियों के बीच एक अद्भुत सेतु में बदल दिया.

भावनाओं से भरा एक क्षण

जब मिशेल ने गहन भाव से पहला पाठ पढ़ा, तो वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं के हृदय में यह बात गूँज उठी कि संतत्व की राह केवल ईश्वर की कृपा से ही प्रशस्त होती है.एक 15 वर्षीय किशोर के मुख से निकले वे शब्द उस भाई की पवित्र स्मृति को साकार कर रहे थे, जिसने 15 की ही उम्र में अपने जीवन को ईश्वर को समर्पित कर दिया.

यह दृश्य केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक गवाही था—कि संतों का जीवन समय और मृत्यु से परे होता है.कार्लो एक्यूटिस आज संत बन गए, पर उनकी आत्मा, उनकी गवाही और उनका प्रेम उसी क्षण में सजीव हो उठा जब उनका छोटा भाई, उसी उम्र में खड़ा होकर, सुसमाचार पढ़ रहा था.

यह क्षण निश्चय ही ईश्वरीय योजना का दिव्य चमत्कार था—जो आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि ईश्वर का प्रेम और संतों की गवाही कभी समाप्त नहीं होती, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी और भी गहरी होती जाती है.


आलोक कुमार

शनिवार, 6 सितंबर 2025

सीपीआई (एमएल) लिबरेशन का चुनावी संदेश

 सीपीआई (एमएल) लिबरेशन का चुनावी संदेश


नई दिल्ली .बिहार से अखिल भारतीय राजनीति तकसीपीआई (एमएल) लिबरेशन महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने शनिवार, 6 सितंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित पार्टी संसदीय कार्यालय, 25 मीनाबाग में लोकतांत्रिक वाम बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं से बिहार चुनाव की दिशा पर संवाद किया.

      इस विचार-विमर्श में कई महत्वपूर्ण बिंदु उभरे—एसआईआर विरोधी आंदोलन की रिपोर्ट और उससे जुड़े जनप्रतिरोध का साझा आकलन.आगामी चुनाव में प्रमुख मुद्दों का परखना.बिहार चुनाव के दीर्घकालिक और अखिल भारतीय महत्व पर विमर्श.इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे, सामाजिक–राजनीतिक ध्रुवीकरण और रणनीतिक सहयोग पर सलाह-मशविरा.दीपंकर भट्टाचार्य ने साफ संकेत दिया कि इंडिया गठबंधन में सीटों का बंटवारा एनडीए की तुलना में कहीं अधिक सहज और सहयोगपूर्ण तरीके से संभव होगा. 

     माले इस बार पिछली 19 सीटों के मुकाबले लगभग 30 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है.राजनीतिक विश्लेषण यह कह रहा है कि इस बार फ्लोटिंग वोटरों की संख्या भले कम हो, लेकिन निर्णायक होगी. अधिकांश बड़े सामाजिक समुदायों का झुकाव स्थिर दिख रहा है, किंतु सबसे कठिन और निर्णायक जंग अति पिछड़ा उप-समुदायों के वोटों पर केंद्रित रहने वाली है.

                 सीपीआई (एमएल) की ऐतिहासिक और सामाजिक जड़ें दलितों व अति पिछड़े तबकों में गहराई से जुड़ी रही हैं। लिहाजा, अगर गठबंधन में माले की सीटों में वृद्धि होती है तो यह न केवल पार्टी के लिए बल्कि इंडिया गठबंधन के व्यापक प्रदर्शन के लिए भी शुभ संकेत होगा।क्या आप चाहेंगे कि मैं इसे थोड़ा और धारदार शीर्षकों और उपशीर्षकों के साथ संपादकीय कॉलम जैसा बना दूँ?


आलोक कुमार)

शुक्रवार, 5 सितंबर 2025

डा0 राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण

 पटना .आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में पूर्व राष्ट्रपति डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 137वीं जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाई गई .कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार प्रदेश कांग्रेस  कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम   ने की.

इस अवसर पर डा0 राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए प्रदेश कांग्रेस  कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम   ने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन केवल एक विद्वान ही नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने वाले ,महापुरुष थे.उन्होंने अपने जीवन को शिक्षा, दर्शन और मानवता के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया. भारत में शिक्षक दिवस मनाना, उनके योगदान और आदर्शों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है.

       श्री राम ने कहा कि आज की पीढ़ी को डॉ. राधाकृष्णन के विचारों से प्रेरणा लेकर ज्ञान, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति के पथ पर चलना चाहिए। शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम न होकर, समाज को संस्कारित और राष्ट्र को सश
क्त बनाने का आधार होना चाहिए – यही डॉ. राधाकृष्णन का संदेश था.

     इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और समान अवसर उपलब्ध कराने के अपने वादे पर हमेशा प्रतिबद्ध है.भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही शिक्षक का समाज में बड़ा स्थान रहा है. शिक्षक राष्ट्र के निर्माता हैं तथा उनका सम्मान हमेशा होना चाहिए.इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष डा0 मदन मोहन झा, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, पूर्व विधान पार्षद प्रेमचन्द्र मिश्रा,इजहारूल हुसैन, राजेश राठौड़,  ब्रजेश प्रसाद मुनन, जमाल अहमद भल्लू, कपिलदेव प्रसाद यादव, अजय  चौधरी  , डा0 अम्बुज किशोर झा, नागेन्द्र कुमार विकल, ज्ञान रंजन, राजीव मेहता, सुनीता देवी, शकीलुर रहमान शशि रंजन सत्येन्द्र कुमार सिंह, वैद्यनाथ शर्मा, संतोष श्रीवास्तव, शशिकांत तिवारी अश्विनी कुमार, अरविन्द लाल रजक, सुधा मिश्रा,प्रदुम्न यादव,मृणाल अनामय, चन्द्र भूषण, रवि गोल्डन, अखिलेश्वर सिंह , सुनील कुमार सिंह, संजय कुमार श्रीवास्तव, साधना रजक, यशवन्त कुमार चमन, रंजीत यादव, राजेन्द्र  चौधरी  , प्रमोद राय, निखिल कुमार,गुरूजीत सिंह, एवं अन्य कांग्रेसजनों ने भी डा0 राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यापर्ण किया.


आलोक कुमार

   

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