शनिवार, 27 दिसंबर 2025

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शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025

साल के समापन पर वर्ष में राजनीति

 साल के समापन पर वर्ष में राजनीति

पटना.साल 2025 भारतीय राजनीति के लिए उथल-पुथल, बड़े फैसलों और निरंतर चुनावी गतिविधियों का वर्ष रहा। राष्ट्रीय राजनीति से लेकर राज्यों तक, सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे टकराव, गठबंधनों की नई परिभाषाएं और जन मुद्दों को लेकर संघर्ष लगातार देखने को मिला. वर्ष के समापन पर यह जरूरी हो जाता है कि पूरे साल की राजनीतिक घटनाओं और रुझानों का समग्र विश्लेषण किया जाए.

राष्ट्रीय राजनीति: बड़े फैसलों का साल

केंद्र की राजनीति में वर्ष 2025 कई अहम नीतिगत निर्णयों के लिए याद किया जाएगा.सरकार ने आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं को प्राथमिकता देते हुए कई फैसले लिए.संसद में बहसों का स्तर तीखा रहा। कई विधेयकों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबी बहस हुई, वहीं कुछ मामलों में विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी का आरोप लगाया.विदेश नीति के मोर्चे पर भी सरकार सक्रिय दिखी. पड़ोसी देशों से संबंध, वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका और रणनीतिक साझेदारियों को लेकर सालभर राजनीतिक बयानबाजी होती रही.

विपक्ष की भूमिका: एकजुटता की कोशिश

वर्ष 2025 में विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास किया। महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता जैसे मुद्दे संसद से लेकर सड़क तक उठाए गए.हालांकि, विपक्ष की सबसे बड़ी चुनौती आपसी एकजुटता रही. कुछ राज्यों में विपक्षी दलों ने साझा मोर्चा बनाकर सरकार को कड़ी टक्कर दी, तो कहीं आंतरिक मतभेद सामने आए। इसके बावजूद, साल के अंत तक विपक्ष ने यह संकेत जरूर दिया कि आगामी चुनावों को देखते हुए साझा रणनीति पर काम किया जाएगा.

राज्य राजनीति: चुनावी गर्मी चरम पर

राज्यों की राजनीति में यह साल चुनावी सरगर्मी से भरा रहा। कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, जहां सत्ता परिवर्तन, गठबंधन सरकारों का गठन और मजबूत जनादेश जैसी तस्वीरें उभरीं.राज्य सरकारों के प्रदर्शन पर जनता की नजर रही। कहीं विकास कार्यों को लेकर सरकारों की सराहना हुई, तो कहीं कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं पर तीखा जन असंतोष दिखा.बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों में राजनीतिक घटनाक्रम राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बने रहे.

चुनावी संकेत और जनमत

वर्ष 2025 में हुए उपचुनावों और विधानसभा चुनावों ने आने वाले बड़े चुनावों के संकेत दे दिए. मतदाताओं का रुझान साफ तौर पर मुद्दा आधारित राजनीति की ओर जाता दिखा। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे सवालों पर जनता ने राजनीतिक दलों से स्पष्ट जवाब मांगे.सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म राजनीति के अहम हथियार बनकर उभरे.चुनाव प्रचार से लेकर जनमत निर्माण तक, डिजिटल राजनीति का प्रभाव पहले से कहीं अधिक दिखाई दिया.

सत्ता बनाम विपक्ष: लोकतंत्र की कसौटी

पूरे साल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लोकतंत्र की कसौटी साबित हुआ। संसद के भीतर हंगामे, कार्यवाही का बाधित होना और बहिष्कार जैसी घटनाएं बार-बार सामने आईं। वहीं, सरकार का तर्क रहा कि वह जनादेश के आधार पर फैसले ले रही है.इस खींचतान के बीच न्यायपालिका, चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका भी चर्चा में रही। कई फैसलों और टिप्पणियों ने राजनीतिक विमर्श को नई दिशा दी.

जन आंदोलनों और सामाजिक राजनीति

साल 2025 में सामाजिक मुद्दों पर आधारित आंदोलनों ने भी राजनीति को प्रभावित किया। किसानों, युवाओं, कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों की मांगें राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनीं.इन आंदोलनों ने यह स्पष्ट किया कि राजनीति केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनसरोकारों से सीधा जुड़ाव उसकी सबसे बड़ी कसौटी है.

निष्कर्ष: बदलाव के संकेतों वाला वर्ष

कुल मिलाकर, वर्ष 2025 की राजनीति बदलाव के संकेतों से भरी रही. सत्ता ने अपनी नीतियों और फैसलों के जरिए मजबूत पकड़ बनाए रखने की कोशिश की, जबकि विपक्ष ने जन मुद्दों के सहारे खुद को पुनर्गठित करने का प्रयास किया.साल के समापन पर यह स्पष्ट है कि आने वाला समय राजनीति के लिए और भी चुनौतीपूर्ण होने वाला है। जन अपेक्षाएं बढ़ रही हैं और राजनीतिक दलों के सामने विश्वास बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी है.26 दिसंबर को वर्ष में राजनीति की यह समीक्षा न केवल बीते साल की तस्वीर पेश करती है, बल्कि भविष्य की राजनीतिक दिशा की झलक भी देती है.

आलोक कुमार

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गुरुवार, 25 दिसंबर 2025

साल के समापन पर विशेष श्रृंखला


साल के समापन पर विशेष श्रृंखला

वर्ष के समापन अवसर पर पाठकों के लिए 26 दिसंबर से 31 दिसंबर तक एक विशेष श्रृंखला प्रस्तुत की जा रही है। इस श्रृंखला के अंतर्गत हर दिन एक प्रमुख विषय पर वर्षभर की घटनाओं, उपलब्धियों और परिस्थितियों का विश्लेषणात्मक आकलन किया जाएगा।


श्रृंखला का कार्यक्रम इस प्रकार है—
🔹 26 दिसंबर : वर्ष में राजनीति
🔹 27 दिसंबर : वर्ष में आर्थिक स्थिति
🔹 28 दिसंबर : वर्ष में खेल जगत
🔹 29 दिसंबर : वर्ष में कांग्रेस की स्थिति
🔹 30 दिसंबर : वर्ष में बीजेपी की स्थिति
🔹 31 दिसंबर : वर्ष में राजद की स्थिति

नववर्ष 2026 के स्वागत को लेकर लोगों की तैयारियों और पर्यटन स्थलों की रौनक पर भी विशेष प्रस्तुति दी जाएगी।

पाठक इस विशेष श्रृंखला से जुड़े रहें.


आलोक कुमार

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वैश्विक क्रिसमस धूमधाम से संपन्न

 वैश्विक क्रिसमस धूमधाम से संपन्न


पटना. प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला वैश्विक क्रिसमस पर्व श्रद्धा, उल्लास और भाईचारे के संदेश के साथ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया. इस अवसर पर दुनिया भर के चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं, पवित्र मिस्सा और मध्यरात्रि आराधनाएं आयोजित की गईं. ईसाई समुदाय ने बड़ी संख्या में चर्च पहुंचकर प्रभु यीशु के जन्म का स्मरण किया और मानवता, प्रेम व शांति का संकल्प लिया.

क्रिसमस मास के दौरान पुरोहितों ने पवित्र मिस्सा संपन्न कराई और श्रद्धालुओं के बीच परमप्रसाद का वितरण किया। मिस्सा के बाद लोगों ने एक-दूसरे को विभिन्न भाषाओं और परंपराओं में शुभकामनाएं दीं. झारखंडी अभिवादन में “खुश जनम पर्व”, हिंदी में “बड़ा दिन मुबारक हो” और अंग्रेज़ी में “हैप्पी मैरी क्रिसमस” कहकर लोगों ने आपसी सौहार्द का परिचय दिया.

चर्च परिसरों को आकर्षक रोशनी, क्रिसमस ट्री और जन्म-झांकियों से सजाया गया था। भजन-कीर्तन और कैरोल गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही, जिससे पर्व शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ.

मिस्सा के उपरांत लोग अपने घरों को लौटे, जहां परिवार के साथ केक काटकर खुशी मनाई गई। घरों में पारंपरिक व्यंजन—ठेकुआ, नीमकी और पूरी—बनाए गए और परिजनों के साथ अल्पाहार किया गया. इस तरह वैश्विक क्रिसमस प्रेम, विश्वास और आपसी सद्भाव के संदेश के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ.

आलोक कुमार

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बुधवार, 24 दिसंबर 2025

क्रिसमस की तैयारियों को अंतिम रूप: अर्धरात्रि में चर्च जाएंगे ईसाई समुदाय


 क्रिसमस की तैयारियों को अंतिम रूप: अर्धरात्रि में चर्च जाएंगे ईसाई समुदाय, देशभर में उत्सव का माहौल

नई दिल्ली/पटना/कोलकाता, 24 दिसंबर 2025.

पूरे देश में क्रिसमस पर्व को लेकर उत्साह अपने चरम पर है. 25 दिसंबर को मनाए जाने वाले ईसा मसीह के जन्मोत्सव से पहले, 24 दिसंबर की शाम से ही ईसाई समुदाय द्वारा विशेष तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं. परंपरा के अनुसार, क्रिसमस की अर्धरात्रि में विशेष प्रार्थना सभा (मिडनाइट मास) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु चर्च पहुंचेंगे.                                                                                                                                     दिल्ली, पटना और कोलकाता समेत देश के प्रमुख शहरों में चर्चों को आकर्षक रोशनी, फूलों और क्रिसमस ट्री से सजाया गया है.ईसाई समुदाय के लोग अपने-अपने घरों में भी सजावट कर रहे हैं और पारंपरिक व्यंजनों की तैयारी में जुटे हैं। बाजारों में क्रिसमस केक, सजावटी सामान और उपहारों की अच्छी बिक्री देखी जा रही है.

दिल्ली महाधर्मप्रांत के अधीन चर्चों में विशेष आयोजन                                                                                          राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिल्ली महाधर्मप्रांत के अधीन आने वाले सभी प्रमुख चर्चों में क्रिसमस की विशेष तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं. सेंट्रल दिल्ली, साउथ दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में स्थित चर्चों में 24 दिसंबर की रात को मिडनाइट मास आयोजित की जाएगी. चर्च प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं.                                                                                                                                               दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने भी चर्चों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है.बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए ट्रैफिक और पार्किंग को लेकर भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.

पटना महाधर्मप्रांत में श्रद्धा और उल्लास                                                                                                            बिहार की राजधानी पटना में भी क्रिसमस को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है.पटना महाधर्मप्रांत के अंतर्गत आने वाले चर्चों में प्रार्थना सभाओं की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं.चर्चों में बच्चों द्वारा कैरोल सिंगिंग का अभ्यास किया जा रहा है, वहीं युवा वर्ग स्वयंसेवक के रूप में व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहा है.                                                    पटना के कई इलाकों में गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन और उपहार वितरण की भी योजना बनाई गई है.ईसाई समुदाय के नेताओं ने बताया कि क्रिसमस केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा और मानवता का संदेश देने का पर्व है.

कोलकाता महाधर्मप्रांत में विशेष उत्सव

                                                                                                                                                          कोलकाता, जिसे क्रिसमस का प्रमुख केंद्र माना जाता है, वहाँ भी उत्सव का माहौल साफ दिखाई दे रहा है.कोलकाता महाधर्मप्रांत के अधीन चर्चों में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है. सेंट पॉल्स कैथेड्रल और अन्य ऐतिहासिक चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया जाएगा.                                                             पार्क स्ट्रीट और आसपास के इलाकों में सजावट और रोशनी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. स्थानीय प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं.

शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश                                                                                                                                  धार्मिक नेताओं ने क्रिसमस के अवसर पर शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को एक-दूसरे के प्रति सम्मान, करुणा और सहयोग की सबसे अधिक आवश्यकता है. क्रिसमस पर्व लोगों को आपसी भेदभाव भुलाकर एक साथ आने की प्रेरणा देता है.

प्रशासन की अपील प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे चर्च जाते समय नियमों का पालन करें, सुरक्षा निर्देशों का ध्यान रखें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें. साथ ही, ठंड के मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है.

निष्कर्ष:                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                         24 दिसंबर की रात देशभर में ईसाई समुदाय आस्था और उल्लास के साथ चर्चों में एकत्र होकर क्रिसमस पर्व का स्वागत करेगा.यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि समाज में शांति, प्रेम और सौहार्द का संदेश भी देता है.


आलोक कुमार

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मंगलवार, 23 दिसंबर 2025

कड़ाके की ठंड का कहर जारी

 कड़ाके की ठंड का कहर जारी: उत्तर भारत में तापमान गिरा, शीतलहर से जनजीवन प्रभावित

नई दिल्ली, 23 दिसंबर 2025.उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का सिलसिला लगातार जारी है. दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया है. ठंडी हवाओं और शीतलहर के कारण सुबह और रात के समय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने की चेतावनी जारी की है.                                                     दिल्ली में मंगलवार सुबह ठंडी हवाओं के साथ दिन की शुरुआत हुई. न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को अलाव और हीटर का सहारा लेना पड़ा. सड़कों पर सुबह-सुबह कम चहल-पहल देखने को मिली. ठंड का असर खासतौर पर दिहाड़ी मजदूरों, बुजुर्गों और बच्चों पर अधिक दिखाई दे रहा है.

शीतलहर से बढ़ी मुश्किलें

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के कारण शीतलहर की स्थिति बनी हुई है.कई इलाकों में हवा की रफ्तार तेज़ होने से ठंड और ज्यादा महसूस की जा रही है। रात के समय तापमान और गिरने की आशंका है, जिससे खुले में रहने वाले लोगों के लिए स्थिति और कठिन हो सकती है.                                                                    राज्य सरकारों और जिला प्रशासन ने रैन बसेरों की संख्या बढ़ाने और जरूरतमंदों को कंबल वितरित करने के निर्देश दिए हैं। कई सामाजिक संगठन भी सड़कों पर जरूरतमंदों को गर्म कपड़े और भोजन उपलब्ध करा रहे हैं।

यातायात और दैनिक जीवन पर असर

ठंड और कोहरे के संयुक्त असर से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है.सुबह के समय सड़कों पर दृश्यता कम रहने के कारण वाहन चालकों को धीमी गति से चलना पड़ रहा है.कुछ जगहों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति भी देखने को मिली.                                                                                                                                                                  रेलवे और हवाई सेवाओं पर भी हल्का असर पड़ा है। कुछ ट्रेनों और उड़ानों में देरी दर्ज की गई, जिससे यात्रियों को परेशानी हुई। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अत्यधिक आवश्यक न हो तो सुबह जल्दी यात्रा से बचें।

स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा

ठंड के साथ-साथ बढ़ते प्रदूषण ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को भी बढ़ा दिया है. डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में सर्दी, खांसी, बुखार और सांस से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं. खासकर अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.                                                                                             स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को गर्म कपड़े पहनने, ठंडे पेय पदार्थों से बचने और पर्याप्त मात्रा में गर्म तरल पदार्थ लेने की सलाह दी है. सुबह-शाम खुले में व्यायाम करने से भी बचने को कहा गया है.

खेती और बाजार पर असर

कड़ाके की ठंड का असर खेती पर भी पड़ रहा है.कुछ इलाकों में फसलों पर पाले का खतरा बढ़ गया है.किसान फसलों को बचाने के लिए सिंचाई और अन्य उपाय कर रहे हैं.सब्जियों की आपूर्ति पर भी ठंड का असर देखा जा रहा है, जिससे कुछ जगहों पर दामों में बढ़ोतरी हुई है.                                                                                                  वहीं, बाजारों में भी ठंड के कारण ग्राहकों की संख्या में कमी आई है.खासकर सुबह और देर शाम के समय बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है. छोटे दुकानदारों का कहना है कि ठंड की वजह से बिक्री प्रभावित हो रही है.

मौसम विभाग का अनुमान

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप बना रहेगा. न्यूनतम तापमान में और गिरावट आ सकती है. कुछ राज्यों में शीतलहर की स्थिति जारी रहने की संभावना है. जनवरी की शुरुआत में ही मौसम में कुछ बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है.

लोगों के लिए सावधानी

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से ठंड से बचाव के लिए सभी जरूरी कदम उठाने की अपील की है। गर्म कपड़े पहनें, अलाव या हीटर का सुरक्षित तरीके से उपयोग करें और जरूरतमंदों की मदद करें। वाहन चलाते समय सतर्क रहें और मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान दें.

निष्कर्ष:

उत्तर भारत में जारी कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है.ऐसे में सावधानी, सतर्कता और आपसी सहयोग से ही इस मौसम की चुनौती का सामना किया जा सकता है.

आलोक कुमार

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सोमवार, 22 दिसंबर 2025

घने कोहरे और ठंड की मार

घने कोहरे और ठंड की मार: उत्तर भारत में जनजीवन अस्त-व्यस्त, यातायात और कारोबार पर असर


नई दिल्ली.उत्तर भारत इन दिनों भीषण ठंड और घने कोहरे की चपेट में है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और बिहार के कई इलाकों में सुबह और देर रात घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ यातायात और व्यापार पर भी व्यापक असर पड़ा है। मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों तक ठंड और कोहरे से राहत मिलने की संभावना कम जताई है.

दिल्ली और आसपास के इलाकों में दृश्यता बेहद कम दर्ज की जा रही है.कई स्थानों पर विजिबिलिटी 50 मीटर से भी नीचे चली गई, जिसके कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार काफी धीमी रही. ऑफिस जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी ठंड चुनौती बनी हुई है.

हवाई, रेल और सड़क यातायात प्रभावित

घने कोहरे का सबसे अधिक असर हवाई और रेल यातायात पर देखने को मिला। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कई उड़ानों में देरी हुई, जबकि कुछ उड़ानों को री-शेड्यूल भी करना पड़ा. यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जिससे एयरपोर्ट पर भीड़ बढ़ी.

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, उत्तर भारत से गुजरने वाली कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं.कुछ ट्रेनों को एहतियातन रोकना पड़ा, ताकि किसी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके. वहीं, राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। ट्रैफिक पुलिस ने चालकों से सावधानी बरतने और धीमी गति से वाहन चलाने की अपील की है.

वायु गुणवत्ता भी खराब

कोहरे के साथ-साथ प्रदूषण ने भी चिंता बढ़ा दी है.दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया. विशेषज्ञों का कहना है कि ठंडी हवा और कम हवा की गति के कारण प्रदूषक कण वातावरण में ही फंसे रहते हैं, जिससे सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

    डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है. मास्क का उपयोग करने और गर्म कपड़े पहनने पर जोर दिया जा रहा है.

किसानों और कारोबार पर असर

मौसम की मार का असर खेती और व्यापार पर भी पड़ रहा है.कई राज्यों में सब्जियों की आवक प्रभावित हुई है, जिससे बाजार में दामों में हल्की बढ़ोतरी देखी जा रही है.कोहरे के कारण फसलों में नमी बढ़ने से किसानों को नुकसान की आशंका सता रही है.

   वहीं, छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों का कहना है कि ठंड और कोहरे के कारण ग्राहकों की संख्या कम हो गई है.सुबह और देर रात के समय बाजारों में रौनक घट गई है, जिससे रोज़मर्रा की कमाई प्रभावित हो रही है.

मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 48 से 72 घंटों तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में घना कोहरा बना रह सकता है. न्यूनतम तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।.कुछ इलाकों में शीतलहर चलने की चेतावनी भी जारी की गई है.

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर रहने के कारण फिलहाल ठंड से राहत मिलने की उम्मीद कम है. जनवरी की शुरुआत में ही मौसम में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है.

लोगों के लिए सलाह

प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है.वाहन चलाते समय फॉग लाइट का उपयोग करें, पर्याप्त दूरी बनाए रखें और जरूरत न हो तो सुबह जल्दी यात्रा से बचें।.ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनें और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें.

निष्कर्ष:

घना कोहरा और बढ़ती ठंड उत्तर भारत के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. जनजीवन, यातायात और अर्थव्यवस्था सभी पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है. ऐसे में सावधानी और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है.

आलोक कुमार


 

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