सोमवार, 23 मई 2022

’समस्तीपुर रवाना हुआ पार्थिव शरीर, पार्टी कतार में शोक की लहर’

 ’वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता रामदेव वर्मा को अश्रुपूर्ण नेत्रों के साथ दी गई अंतिम विदाई.’

◆ ’उनके आवास और माले विधायक दल कार्यालय में वाम-लोकतांत्रिक नेताओं ने दी श्रद्धांजलि’ 

◆ ’समस्तीपुर रवाना हुआ पार्थिव शरीर, पार्टी कतार में शोक की लहर’


पटना.वरिष्ठ कम्युनिष्ट नेता और भाकपा(माले) की बिहार राज्य कमिटी के सदस्य कामरेड रामदेव वर्मा (75 वर्ष) को आज उनके आवास और छज्जूबाग स्थित माले विधायक दल कार्यालय में वाम-लोकतांत्रिक नेताओं ने अपनी श्रद्धांजलि दी.छज्जूबाग आने से पहले उनके पार्थिव शरीर पर बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमति राबड़ी देवी, आलोक मेहता व अन्य राजद नेताओं ने फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी.

छज्जूबाग स्थित माले विधायक दल कार्यालय में भाकपा-माले, सीपीएम, सीपीआई, एसयूसीआई(सी), कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों और बुद्धिजीवियों, पत्रकारों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके पार्थिव शरीर पर फूल चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. इसके पश्चात उनकी अंतिम यात्रा पटना से समस्तीपुर के लिए शुरू हुई. समस्तीपुर में आज शाम दाह संस्कार किया जाएगा.श्रद्धांजलि सभा में माले के पोलित ब्यूरो के सदस्य काॅ. स्वदेश भट्टाचार्य, काॅ. रामदेव वर्मा की पत्नी, पूर्व विधायक व माले की राज्य कमिटी की सदस्य मंजू प्रकाश, राज्य सचिव कुणाल, धीरेन्द्र झा, राजाराम सिंह, केडी यादव, मीना तिवारी, सरोज चौबे, शशि यादव, अभ्युदयय सीपीएम के राज्य सचिव ललन चौधरी, पूर्व राज्य सचिव अवधेश कुमार, सर्वोदय शर्माय सीपीआई के रामनरेश पांडेयय कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, वामपंथी नेता नंदकिशोर सिंह, फारवर्ड ब्लाॅक के राज्य सचिव अमेरिका महतो, एसयूसीआई (सी) के राजकुमार चौधरी, प्रेरणा के हसन इमाम, संस्कृतिकर्मी अनीश चैधरी आदि उपस्थित थे. श्रद्धांजलि सभा में रामदेव वर्मा के पुत्र रोहित भी शामिल थे.

का. रामदेव वर्मा का जन्म 1 जुलाई 1947 को हुआ था. वे छपरा काॅलेज में समता युवजन सभा के नेता हुआ करते थे. इसके बाद वे सीपीएम से जुड़ गए. उनके नेतृत्व में सीपीएम का बड़ा विस्तार बेगूसराय के सटे इलाकों में हुआ. विभूतिपुर और उजियारपुर सामंतवाद विरोधी संघर्ष का केंद्र बना. वे माकपा की ओर से समस्तीपुर के विभूतिपुर से छह बार विधानसभा के सदस्य चुने गए थे.भाकपा-माले की क्रांतिकारी धारा से प्रभावित होकर वे 2020 में विधानसभा चुनाव के बाद अपने साथियों के साथ भाकपा (माले) में शामिल हो गए. बीमारी से जूझते हुए भी वे पार्टी के कामकाज को आगे बढ़ाने में लगे रहे. विधायक दल मोर्चे पर उनका मार्गदर्शन हमेशा मिला करता था. का. रामदेव वर्मा को मार्च 2022 में अयोजित पार्टी के विगत बिहार राज्य सम्मेलन में स्थाई आमंत्रित सदस्य के बतौर राज्य कमिटी में शामिल किया गया था.

उनकी शादी सीपीएम के क्रांतिकारी नेता का. ज्योति प्रकाश की बेटी का. मंजु प्रकाश से हुई. का. मंजू प्रकाश भी बक्सर से विधायक और राजद के शासनकाल में महिला आयोग की अध्यक्ष रही हैं. वे फिलहाल हमारी पार्टी की राज्य कमिटी की सदस्य हैं.

माले नेताओं ने कहा कि का. रामदेव वर्मा का निधन न केवल हमारी पार्टी के लिए बल्कि संपूर्ण वामपंथ के लिए अपूरणीय क्षति है. पार्टी की बिहार राज्य कमिटी उनको श्रद्धांजलि देती है और उनके शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है. पटना से लगभग 11 बजे उनकी अंतिम यात्रा समस्तीपुर के लिए रवाना हुई. माले पोलित ब्यूरो सदस्य काॅ. धीरेन्द्र झा व अन्य नेतागण उनके साथ अंतिम यात्रा में शामिल हैं. समस्तीपुर के मगरदही घाट, विभूतिपुर में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी.

आलोक कुमार

पार्थिव शरीर पर माल्यापर्ण कर श्रद्धांजलि दी

पटना.माकपा नेता एवं विभूतिपुर के पूर्व विधायक रामदेव वर्मा का निधन हो जाने पर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा0 मदन मोहन झा ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है.आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा0 मदन मोहन झा ने रामदेव वर्मा के आवास पर जाकर उनके पार्थिव शरीर पर माल्यापर्ण कर श्रद्धांजलि दी. एवं शोक संतप्त परिवार से मिलकर सांत्वना दी तथा ईश्वर से इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवार को धैर्य प्रदान करने की शक्ति देने की प्रार्थना की.अपने शोक संदेश में डा0 मदन मोहन झा ने कहा कि रामदेव वर्मा छः बार विभूतिपुर से विधायक चुने गये एवं विभूतिपुर की धरती पर कम्युनिस्ट आन्दोलन के सफल नेता रहे हैं. वे हमेशा कमजोर और दलितों की हितों की हिमायत करने के लिए जाने जाते थे.उनके निधन से सामाजिक एवं राजनीति क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है. प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, सदस्यता प्रभारी ब्रजेश प्रसाद मुनन, कुमार आशीष ने भी रामदेव वर्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया है.


विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक रामदेव वर्मा का रविवार रात पटना में निधन हो गया. करीब 75 वर्षीय श्री वर्मा प्रखंड के पतैलिया गांव निवासी के थे. वे दो-तीन वर्षों से लगातार बीमार थे. रविवार रात पटना स्थित अपने निजी आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली.वे अपने पीछे जीवन संगिनी व पूर्व विधायक मंजू प्रकाश, पुत्र रोहित कुमार व पुत्रवधू विनीता को छोड़ गये हैं. विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने 1980 में पहली बार माकपा उम्म्ीदवार के रूप में जीत हासिल की थी. उसके बाद 1985 के चुनाव में वे हार गये थे, लेकिन 1990 के बाद 2005 लगातार माकपा उम्मीदवार के रूप में विधायक चुने गये. 2010 और 2015 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने उन्हें उम्म्ीदवार बनाया था, लेकिन वे हार गए. गरीबों व शोषितों की आवाज बुलंद करने के लिए वे काफी प्रसिद्ध थे.विधायक कार्यकाल में वे लोक लेखा समिति के अध्यक्ष भी रहे चुके थे. इन दिनों वे भाकपा माले में थे. 2020 में उन्होंने माले की सदस्यता ली थी. 1947 में विभूतिपुर प्रखंड के पतैलिया गांव में उनका जन्म हुआ. उनकी मां का नाम लखिया देवी व पिता का रामगुलाम महतो था.1967 में उन्होंने माकपा की सदस्यता ली थी. इसके बाद 1978 में ग्राम पंचायत राज पतैलिया से मुखिया निर्वाचित हुए थे. इसके बाद माले पार्टी की मजबूती के लिये जीवन भर काम करते रहे.श्री वर्मा की शादी बक्सर जिला के इटारी थाना अंतर्गत इंदौर गांव के प्रसिद्ध वाम नेता ज्योति प्रकाश की पुत्री मंजू प्रकाश के साथ हुई थी.मंजू प्रकाश भी बक्सर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुकी है. वह बिहार महिला आयोग की अध्यक्ष भी रह चुकी है. श्री वर्मा दो बार लोकसभा का भी चुनाव लड़े पर जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा. वे गरीब, किसान, मजदूर व भूमिहीनों की आवाज सदन में मजबूती से उठते थे.जिले में माकपा के संगठन को मजबूत बनाने में भी उनका महत्वपर्ण योगदान था.जिसके कारण माकपा ने उन्हें राज्य सचिव मंडल का सदस्य बनाया था.उन्होंने बिहार के बंटवारा का सवाल सहित दो तीन पुस्तक भी लिखे. पटना से उनका पार्थिव शरीर पैतृक स्थान पतैलिया लाने के बाद बूढ़ी गंडक नदी के तट पर अंतिम संस्कार किया जायेगा.


आलोक कुमार

बेतिया धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पीटर सेबेस्टियन गोवियस ने धर्मप्रांत के फादरों का स्थानांतरण किया


बेतिया. बेतिया धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पीटर सेबेस्टियन गोवियस ने धर्मप्रांत के फादरों का स्थानांतरण किया है.स्थानांतरित फादरों से कहा गया है कि 20 से 25 जून तक पदभार ग्रहण करने का निवेदन किया गया है.चनपटिया पल्ली के पल्ली पुरोहित फादर बर्टी पौल का स्थानान्तरण छपरा मिशन में पल्ली पुरोहित के रूप में किया गया है.वहां पर संचालित सेक्रेड हार्ट स्कूल,खालपुरा के सचिव होंगे. जो बेतिया पैरिश सोसाइटी द्वारा संचालित है. इस समय यहां संचालित सेक्रेड हार्ट स्कूल,खालपुरा के प्राचार्य फादर सी.ए.मोजेज हैं.

चनपटिया पल्ली में फादर अनूप प्रकाश मिंज का स्थानान्तरण किया गया है.यहां पर संचालित सेंट जॉन पौल द्वितीय एकेडमी,चनपटिया के सचिव बनाया गया है.रामपुर पल्ली में फादर हरमन रफायल का स्थानांतरण किया गया है.यहां पर संचालित सेंट फ्रांसिस जेवियर स्कूल के सचिव भी होंगे.फादर सिलवेस्टर पी रेयान सहायक पल्ली पुरोहित छपरा के होंगे. यहां संचालित सेक्रेड हार्ट स्कूल,खालपुरा के प्राचार्य होंगे. रामपुर मिशन के पैरिश प्रीस्ट सी.ए.मोजेज होंगे.सेंट फ्रांसिस जेवियर स्कूल और सेंट थॉमस इंग्लिश मीडियम स्कूल के सचिव होंगे.सिरसिया मिशन पैरिश ईंचार्ज फादर नौबर्ट कुजूर होंगे.यहां संचालित सेंट ऐन इंगलिश मीडियम स्कूल के प्रिंसिपल होंगे.

नरकटियागंज मिशन के प्रीस्ट इंचार्ज हैं फादर फिनटन साह.बेतिया धर्मप्रांत के विकार जनरल भी हैं फादर फिनटन साह.फादर रॉबर्ट तिग्गा स्टडी पर रहेंगे.बेतिया धर्मप्रांत के लैंड इंचार्ज फादर बिपिन किस्पोट्टा होंगे.इसके साथ बिशप हाउस,बेतिया के फूड इंचार्ज होंगे.रामपुर पल्ली के सहायक पल्ली पुरोहित फादर तेलेस्फोर टोप्पो होंगे. इसके साथ सेंट फ्रांसिस जेवियर स्कूल,रामपुर के वाइस प्रिंसिपल होंगे.फादर पंकज पीटर को सेकेंड सहायक पल्ली पुरोहित नियुक्त किया गया है.इसके साथ सेंट थॉमस मिशन स्कूल,बेतिया के वाइस प्रिंसिपल होंगे.डा. येशु राज को चखनी में नियुक्त किया गया है.यहां संचालित स्कूल में अध्यापन कार्य करेंगे.

आलोक कुमार 

विवादित पोस्‍ट के बाद रतन लाल को गिरफ्तार

नयी दिल्ली.दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रतन लाल को राजधानी की एक अदालत से बड़ी राहत मिली है.कोर्ट ने उन्‍हें जमानत दे दी है.रतन लाल को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था. वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने के दावे के बाद उन्‍होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्‍ट शेयर किया था.इस विवादित पोस्‍ट के बाद रतन लाल को गिरफ्तार किया गया था.रतन लाल को 50 हजार रुपये के बॉन्‍ड और इतनी ही रकम की सिक्‍योरिटी पर बेल दी गई है.   

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रतनलाल को कोर्ट से जमानत मिल गई है.ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग पाए जाने के दावों पर व्यंगात्मक फेसबुक पोस्ट करने के मामले में सुनवाई करते हुए तीस हजारी कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है.कोर्ट के इस फैसले को सोशल मीडिया पर लोग कानून और संविधान की जीत बता रहे हैं.

शनिवार दोपहर करीब 3 बजे प्रोफेसर रतनलाल को दिल्ली पुलिस ने तीस हजारी कोर्ट में पेश किया था. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने रतनलाल को जमानत देने का ऐलान किया. प्रोफेसर रतनलाल को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी गई है.

 कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रोफेसर रतनलाल की रिमांड नही मांगी थी बल्कि कहा था कि आरोपी की ज्यूडिशियल कस्टडी चाहिए. पुलिस ने तर्क दिया कि एक पढ़े लिखे आदमी से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती.आगे से वे ऐसी गलती न करें, इसके लिए पुलिस ने बिना नोटिस दिए, सीआरपीसी 41A के तहत गिरफ्तार किया.

इस पर रतनलाल के वकील ने जवाब दिया कि मामले में कोई केस ही नहीं बनता है.गिरफ्तारी छोड़िए, इनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज नहीं होनी चहिए. अभी तक सोशल मीडिया पोस्ट से कोई हिंसा नहीं हुई है.ऐसे में पुलिस सेक्शन 153A कैसे लगा सकती है.अगर किसी व्यक्ति की सहनशक्ति कम है, तो उसके लिए रतनलाल कैसे ज़िम्मेदार हो सकते हैं. भारत एक लोकतांत्रिक देश है.यहां हर किसी को बोलने की आजादी है. ये एफआईआर रद्द होनी चाहिए.

इस पर प्रोफेसर के वकील ने आगे कहा कि उन्हें जेल नहीं भेजा जाना चाहिए.ये कानून का दुरुपयोग होगा.इस तरफ से होगा तो जेल बुद्धजीवियों से भर जाएगी.उधर पुलिस ने तर्क दिया कि अगर इन्हें जमानत दी गई, तो समाज में गलत मैसेज जाएगा. अगर ये जमानत पर छूटे तो और भी लोग ऐसा करने का साहस करेंगे.                            

रतनलाल की गिरफ्तारी को लेकर दलित संगठनों ने भी बीजेपी सरकारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था.शनिवार को सुबह से ही ट्विटर पर भी रतनलाल की रिहाई संबंधी पोस्ट टॉप ट्रेडिंग बनी रही.लोग शीघ्र उनकी रिहाई की मांग कर रहे थे.                                            

इस संदर्भ में अधिवक्ता विनीत जिंदल ने कहा कि रतन लाल ने हाल में 'शिवलिंग के बारे में अपमानजनक, उकसाने वाला और भड़काऊ ट्वीट साझा किया था.' उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने के मुद्दे पर बयान (रतन लाल का) पोस्ट किया गया, जबकि यह एक बहुत संवेदनशील विषय है और मामला अदालत में लंबित है.                               

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के अंदर शिवलिंग मिलने के दावे को लेकर अभद्र टिप्पणी करने वाले रतन लाल को शुक्रवार रात गिरफ्तार कर लिया है.नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली में असोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदस्थ रतन लाल की ओर से शिवलिंग के दावे को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी पर उनपर आईपीसी की धारा 153A/ 295A के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है. आईपीसी की धारा के बारे में  कहा गया कि 'भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर वैमनस्य को बढ़ावा देना) और धारा 295ए (किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक मान्यताओं को अपमानित कर भावनाएं आहत करने के इरादे से किए गए जानबूझ कर एवं दुर्भावनापूर्ण कृत्य) के तहत एक मामला दर्ज किया गया है।'                              

इसके पहले रतन लाल पर दर्ज मुकदमे के बाद खुद लाल ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर कड़ी सुरक्षा की मांग की थी.   दिल्ली विवि के आचार्य डॉ. रतन लाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन्हें एके 56 रायफलधारी दो अंगरक्षक मुहैया कराये जाने,  यदि यह संभव नहीं है तो उचित प्राधिकारी को निर्देश देकर उनके लिए एके 56 रायफल का लाइसेंस जारी किये जाने की गुहार लगाई है.

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आलोक कुमार


25 मई को जबरदस्त आंदोलन का ऐलान

 


पटना.भाकपा-मालेे विधायक दल के नेता महबूब आलम, फुलवारी विधायक गोपाल रविदास, पटना महानगर के सचिव अभ्युदय सहित माले नेताओं की एक उच्चस्तरीय जांच टीम आज पटना सिटी के कंगनघाट पहुंची और वहां के गरीबों को उजाड़े जाने के कारणों की पड़ताल की. टीम में स्थानीय नेता नसीम अंसारी, राजनाराण सिंह और उमा जी भी शामिल थे.

माले विधायक दल नेता महबूब आलम ने कहा कि भाजपा-जदयू का बुलडोजर गरीबों के खिलाफ खड़ा है, इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा. संबलपुर थाना नंबर 169/170 की जिस जमीन पर बुलडोजर चला है, वह जमीन पूरी तरह से वहां के निवासियों की है. तमाम लोगों के पास कागज है, दाखिल-खारिज किया जा चुका है, रसीद भी कट रहा है. यहां तक कि रजिस्टर 2 में भी नाम चढ़ गया है. ऐसी स्थिति में प्रशासन उनके घरों को किस आधार पर तोड़ सकता है?                                                        


इसके पहले थाना नंबर 110 की जमीन पर कुछ साल पहले शवदाहगृह बनाने के लिए सरकार ने जमीन का अधिग्रहण भी किया और स्थानीय निवासियों को मुआवजा भी दिया गया. इसका मतलब है कि सरकार उस जमीन पर वहां के लोगों के मालिकाना हक को स्वीकार करती है, फिर अचानक वह मालिकाना हक मानने से इंकार क्यों कर रही है?


माले नेताओं ने कहा कि प्रशासन का रवैया पूरी तरह गलत है. यदि उसे अतिक्रमण ही लग रहा था तो उसे न्यायिक प्रक्रिया में जाना चाहिए था, लेकिन अचानक घरों को तबाह करने के काम से जाहिर होता है कि राज्य की सत्ता में बैठी सरकार को न तो गरीबों की चिंता है और न संविधान व कानून की.

माले नेताओं के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल बुलडोजर वापस लौट गए हैं. माले विधायकों ने घटनास्थल से ही कमिश्नर व डीएम से बात करके सही स्थिति से उन्हें अवगत करवाया. प्रशासन ने तब 25 मई का अल्टीमेटम दिया है. इसके खिलाफ जनता में भारी आक्रोश है. आक्रोशित जनता ने कंगन घाट से पटना सिटी तक मार्च किया और फिर सिटी चौक को घंटो जाम रखा. उन्होंने 25 मई को जबरदस्त आंदोलन का ऐलान किया है.

आलोक कुमार


रविवार, 22 मई 2022

फादर प्रोविंशियल सुसैमनी एसजे द्वारा पुस्तक का विमोचन

राजस्थान.अविला की संत तेरेसा ने एक आत्मा की अन्तर्यात्रा की कहानी लिखी, और उसका नाम THE SPIRITUAL WINDOWS दिया है, जिसका हिंदी अनुवाद है,‘ आध्यात्मिक दुर्ग‘.‘आध्यात्मिक दुर्ग‘ में आत्मा अपनी यात्रा बाहर से अन्तः की ओर करती है, जिसमें उसे अनेक दुर्गों का सामना करना पड़ता है, जिसमें उसे अनेक दुर्गों का सामना करना पड़ता है, ऊंची-नीची,लम्बी- चौड़ी ,अंधेरी घाटियों आदि के रूप में व्याख्यायित है.राजस्थान में स्थित संत जेवियर्स कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल हैं फादर रेमण्ड केरोबिन,फादर रेमण्ड केरोबिन आध्यात्मिक दुर्ग का लेखक हैं. पिछले दिनों आध्यात्मिक दुर्ग का विमोचनकिया गया.दिल्ली जेसुइट प्रोविंश के फादर प्रोविंशियल सुसैमनी एसजे द्वारा पुस्तक का विमोचन किया गया.

मैंने संत तेरेसा की इसी पुस्तक,‘ आध्यात्मिक दुर्ग‘ से प्रेरणा प्राप्त कर अपनी इस पुस्तक का नाम ‘ आध्यात्मिक झरोखा‘ रखा है. प्रस्तुत पुस्तक में ‘झरोखा‘ शब्द का अभिप्राय उन छोटी-बड़ी खिड़कियों से है, जिनके माध्यम से आत्मा/व्यक्ति अपने जीवन के परे विभिन्न घटनाओं पर एक नजर डालता है, तथा उनसे अपने भावी जीवन के लिए कुछ सीख लेता है.ये झरोखा इस पुस्तक में विभिन्न कहानियों,जीवनियों एवं घटनाओं के रूप में आए हैं.

प्रस्तुत पुस्तक लिखने के मेरे निम्नलिखित अभिप्राय है- यह पुस्तक..

1. वैसे लोगों के लिए है, जो अपनी व्यस्तता के बावजूद, कुछ समय निकाल कर कुछ रोचक एवं प्रेरणादायक कहानियां पढ़ कर अपने जीवन को सजाने-संवारने में विश्वास रखते है.

2. वैसे शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए है,जो जीवन में घटित घटनाओं को नीति-शिक्षा से जोड़ने में विश्वास रखते हैं.प्रस्तुत पुस्तक आपको चिंतन एवं एकांकी आदि तैयार कर प्रश्न पूछने के लिए प्रचूर मात्रा में सामग्री प्रदान करेगी.

3. वैसे धर्म सामाजिक समुदायों के लिए है, जो प्रति माह एक दिवसीय ‘रेकलेक्शन‘ अथवा प्रार्थना एवं मनन-चिंतन में समय बिताने में विश्वास रखते हैं. प्रस्तुत पुस्तक विभिन्न विषयों पर चिंतन एवं धर्मग्रंथ बाइबिल से उनके प्रेरणों के द्वारा काफी हद तक सहायक सिद्ध हो सकती है.

4. वैसे पुरोहितों के लिए है,जिनको प्रतिदिन और विशेषकर रविवारीय मिस्सा पूजा में प्रवचन अथवा उपदेश देने के लिए काफी समय इसकी तैयारी में लगाना पड़ता है. प्रस्तुत पुस्तक आपको चिंतक एवं धर्मग्रंथ बाइबिल से उनके प्रेरणों के द्वारा सहायक सिद्ध हो सकती है.

अंततः मैं फादर ड्यूरैक,ये.स.,फादर सुशील बिलुंग,ये.स. तथा सिस्टर बेला,ओ.एस.यू. के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं,जिन्होंने न सिर्फ इस पुस्तक की ‘ प्रूफ रीडिंग‘ की है,बल्कि अपने बहुमूल्य सुझावों से इसे आकर्षक तथा प्रेरणादायक बनाने में अहम भूमिका निभाई है.

मैं अपने प्रोविंशियल फादर जोस वड़ाशेरी,ये.स. के प्रति कृतज्ञ हूं,जिन्होंने मुझे इस पुस्तक को छापने की अनुमति दी है, तथा अपने सह्दय विचारों एवं सुझावों से लाभान्वित भी किया है.

पटना महाधर्मप्रांत के हमारे महाधर्माध्यक्ष विलियम डिसूजा,ये.स.के प्रति मैं कैसे धन्यवाद ज्ञापन करूं, समझ में नहीं आता है. उन्हीं की प्रेरणा एवं आशीर्वाद का फल है यह पुस्तक. उन्होंने कैथोलिक हिंदी साहित्य के लिए अपना योगदान देने के लिए मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया है, तथा धर्मप्रांत की कलीसिया के आध्यात्मिक विकास के लिए प्रस्तुत पुस्तक को लिखने के लिए प्रोत्साहित किया है. धन्यवाद शब्द यहां अति लघु जान पड़ता है. प्रस्तुत पुस्तक के लिए आपने बहुमूल्य संदेश लिखा है, तथा इस प्रकाशित करने की अनुमति दी है. यह मेरे लिए बहुत ही उत्साहवर्धक एवं प्रेरणादायक भी है.

मैं अपने सभी मित्रों एवं शुभचिंतकों को भी धन्यवाद देता हूं,जिन्होंने हमेशा मुझे प्रोत्साहित एवं क्रियाशील बने रहने में मेरी सहायता की है. आप सभी की प्रार्थनाओं एवं सहायता के कारण ही मेरी कलम कुछ लिखने को बाध्य हो जाती है.

आलोक कुमार  



मिल कर काम करने पर भी सहमति जाहिर


 देश के प्रसिद्ध कॉलेजों की पढ़ाई के तरीके, सभ्यता और रिसर्च वर्क के लिए पटना वीमेंस कॉलेज ने 17 कॉलेजों के साथ एमओयू साइन किया है. कॉलेजों के बीच शिक्षा, अनुसंधान और अन्य गतिविधियों के क्षेत्रों में अकादमिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ ही कॉलेजों के बीच संबंधों को विकसित करने में मदद करेगा. संस्थान उच्च शिक्षा की दिशा में सहयोग करने और मिल कर काम करने पर भी सहमति जाहिर की है....

पटना.पटना वीमेंस कॉलेज की स्थापना 1940 में बिशप

बी.जे. सुलिवन एसजे, पटना के बिशप और मदर एम. जोसेफिन ए.सी. सुपीरियर जनरल ऑफ अपोस्टोलिक कार्मेल द्वारा की गई थी. यह बिहार में महिलाओं की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खोला गया उच्च शिक्षा का पहला संस्थान था. संस्थापक बिशप सुलिवन ने इसका नाम पटना महिला कॉलेज रखा और इसे बिहार की महिलाओं को उपहार के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे उनके निपटान में उच्च शिक्षा का अवसर मिला. बिशप सुलिवन का दृढ़ विश्वास था कि बिहार का उत्थान अपनी महिलाओं को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करके यानी उन्हें सशक्त बनाकर उन्हें मुक्त करने में है.प्रारंभिक वर्षों में, कॉलेज और छात्रावास बांकीपुर में बिशप के अपने आवास में स्थित थे, जिसे उन्होंने इस मील के पत्थर के लिए खाली कर दिया था.


इस बीच शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने ओपन यूनिवर्सिटी को स्थापित करने के लिए कई नियमों में बदलाव किए हैं. नियमों में हुए संशोधन को लेकर केंद्र शिक्षा मंत्रालय के द्वारा 20 मई को इस पर मुहर लगाई जा चुकी है. यूजीसी फिटनेस नियम 1989 के तहत ओपन यूनिवर्सिटी के लिए यूजीसी के द्वारा गजट अधिसूचना जारी की गई थी. जिसकी मंजूरी शिक्षा मंत्रालय के द्वारा 20 मई को दी जा चुकी है. साथ ही इस बदलाव के संबंध में शिक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन के द्वारा यूजीसी को लेटर और गजट की रिपोर्ट कॉपी भेजी गई है.                


यूजीसी के चेयरमैन का कहना है कि इस संशोधन के बाद ओपन यूनिवर्सिटी की स्थापना करने के लिए लगभग 40 से 60 एकड़ की जमीन की जरूरत को महज पांच एकड़ की जमीन तक सीमित कर दिया गया है. वहीं, अब ओपन यूनिवर्सिटी केवल पांच एकड़ की जमीन पर ही खोले जाएंगे. इस संशोधन के पीछे संस्थान के लिए जमीन की जरूरत को सीमित किए बिना डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन मोड से शिक्षा में ज्यादा से ज्यादा संस्थानों को बढ़ावा देना है. इससे पहले ओपन यूनिवर्सिटी के लिए 40 से 60 एकड़ जमीन हुआ करती थी, जो कि शहरों में और खास कर पहाड़ी इलाकों में खरीदना मुश्किल होता है. जिसे घटाकर महज पांच एकड़ कर दिया गया है.

भारत के प्रसिद्ध कॉलेजों की शिक्षा नीति, सभ्यता और रिसर्च के काम के लिए पटना वीमेंस कॉलेज ने 17 कॉलेजों के साथ एमओयू को साइन किया है. वहीं सभी कॉलेजों के मध्य शिक्षा, अनुसंधान और बाकी सभी गतिविधियों के क्षेत्रों में अकादमिक और सांस्कृतिक सभ्यताओं के आदान-प्रदान के साथ बेहतर संबंधों को बनाया जा सकेगा. संस्थान उच्च शिक्षा के लिए मिलकर काम करने की सहमति जाहिर की है.

साझेदारी समझौता कार्यक्रम जेवियर बोर्ड ऑफ हायर एजुकेशन के द्वारा आयोजित किया गया. इसमें एर्णाकुलम के संत अल्बर्ट कॉलेज के प्राचार्य, उप प्राचार्य, डीन, आइक्यूएसी कोऑर्डिनेटर मौजूद रहे. इसके साथ ही नेशनल कोलेबोरेशन एंड कंसल्टेंसी सर्विस के डीन आलोक जॉन भी शामिल रहे.नेशनल कोलेबोरेशन एंड कंसल्टेंसी सर्विस के डीन आलोक जॉन ने बताया कि एमओयू के तहत 1.क्राइस्ट कॉलेज,केरला 2.फातिमा कॉलेज, मदुरै,तमिलनाडु 3.सेंट तेरेसा कॉलेज,केरला4.होली क्रॉस कॉलेज,तमिलनाडु 5.लिटल फ्लावर डिग्री एंड पीजी कॉलेज,तेलंगाना 6.लोरेटो कॉलेज कोलकाता 7.लोयला एकेडमी,तेलंगाना 8.माउंट कार्मेल कॉलेज,कर्नाटक 9.प्रोविडेंस वीमेंस कॉलेज,केरला, 10.सेल्सियन कॉलेज,वेस्टबंगाल 11. सेंट एल्बर्ट कॉलेज,केरला 12.सेंट एंस कॉलेज फॉर वीमेन, तेलांगना 13. सेंट एंथनी कॉलेज,मेघालय 14.सेंट जोसेफ कॉलेज,तमिलनाडु 15.सेंट जोसेफ कॉलेज,केरला 16.सेंट जेवियर कॉलेज,मुंबई  और 17. विमला कॉलेज,केरला है.

                           


आलोक कुमार           

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“कब्रिस्तान में जगह नहीं है…”

“सराय में जगह नहीं थी…” से “कब्रिस्तान में जगह नहीं है…” तक — एक करुण सामाजिक यथार्थ ईसाई धर्मग्रंथों के अनुसार, येसु मसीह का जन्म बेथलहम मे...

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