गुरुवार, 7 मार्च 2024

एक समर्थ उपाय अपनाना चाहिए ताकि समृद्धि और समाज में सामंजस्य बना रह सके

गरीब छात्रों को सुविधा मिले और वे अपनी पढ़ाई में सफल हो सकें

पटना। गरीबी एक बड़ी समस्या है, जिससे अनेक लोग प्रभावित हो रहे हैं। गरीबी हटाने का सामाजिक उद्देश्य रखने वाले लोगों को एक समर्थ उपाय अपनाना चाहिए ताकि समृद्धि और समाज में सामंजस्य बना रह सके। 

      सबसे पहले, शिक्षा को पहुंचाना आवश्यक है। शिक्षा गरीबी को हटाने का एक महत्वपूर्ण साधन है जो लोगों को अधिक और सुरक्षित रोजगार की दिशा में मार्गदर्शन कर सकता है। सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करना चाहिए ताकि गरीब छात्रों को सुविधा मिले और वे अपनी पढ़ाई में सफल हो सकें।

        दूसरा, गरीबों को रोजगार के अवसरों की पहुंच देना महत्वपूर्ण है। सरकार और निजी संगठनों को उद्यमिता बढ़ाने के लिए योजनाएं बनानी चाहिए, जिससे गरीबों को सही मार्ग पर चलने में मदद मिले। 

           तीसरा, स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाना भी गरीबी को हटाने में मदद कर सकता है। आदेशपरक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने से लोग सकारात्मक और सुरक्षित जीवन जी सकते हैं, जिससे उनका उत्साह बढ़ेगा और वे सक्षम बनेंगे।

          आखिरकर, सामाजिक सांठ-गांठ को तोड़ना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोगों को समझाना चाहिए कि सभी को समान अवसर मिलने चाहिए और वे एक दूसरे की मदद करके समृद्धि की दिशा में बढ़ सकते हैं। इन सभी पहलुओं को मजबूती से लागू करने से गरीबी हटाने में सफलता मिल सकती है और एक समृद्ध और समाजवादी समाज की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।   गरीबी का असमानता के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध है । तीसरी दुनिया के देशों में जहाँ प्रति व्यक्ति आय का स्तर अत्यन्त निम्न है, आय और सम्पत्ति के वितरण की असमानताओं ने अनेक समस्याओं को जन्म दिया है, जिनमें सबसे गंभीर समस्या गरीबी है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि स्वतंत्रता के बाद भारत में आर्थिक प्रगति हुई है।गरीबी भारत में एक गंभीर समस्या है जिसका दुखद परिणाम हमारे समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। गरीबी के कई कारण हैं....

बेरोजगारी: बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है जो गरीबी को और भी बढ़ा देती है। अपातकालीन रूप से बेरोजगारी की स्थितियों में बढ़ोतरी हो रही है।

            शिक्षा की कमी:गरीब परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने में अक्सर कठिनाइयाँ आती हैं, जिसके कारण उनके जीवन की संभावनाएं कम हो जाती हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की कमीः गरीब लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका स्वास्थ्य प्रशासनिक संकट का शिकार हो सकता है।

जातिवाद और सामाजिक असमानतारू भारत में जातिवाद और सामाजिक असमानता भी गरीबी को बढ़ावा देते हैं।

गरीबी के समाधान

गरीबी को कम करने के लिए हमें समृद्धि की दिशा में कदम उठाना होगा। सरकार को और अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में कदम उठाना होगा, जिससे बेरोजगारी कम हो सके।शिक्षा क्षेत्र में निवेश करके हम गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के पहुंच को बढ़ावा देने से हम गरीबों को अधिक उपचार और स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान कर सकते हैं।समाज में सामाजिक असमानता के खिलाफ कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि हर किसी को बराबरी का हक मिल सके। सरकार को गरीबों के लिए विभिन्न योजनाओं का आयोजन करना चाहिए, जैसे कि गरीबों को आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजनाएँ।

गरीबी को कम करना एक लम्बा और कठिन प्रक्रिया हो सकता है, लेकिन इसे समझना और उसके समाधान के दिशा में कदम उठाना हमारी समाज की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। हम सभी को एकमात्र इस समस्या का समाधान करने के लिए साथ मिलकर काम करना होगा ताकि हमारा देश गरीबी से मुक्त हो सके।


आलोक कुमार 

सार्वजनिक चर्चा के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकलता

 बीजेपी ने 2014 में चायवाला, 2019 में चौकीदार और 2024 परिवार को मुद्दा बनाया

पटना। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है। हरेक दिन दिग्गज नेताओं के द्वारा एक दूसरे पर वार की धार और तेज होती जा रही है। रोज नए नारे गढ़े जा रहे हैं और नारों का जवाब नए नारे के साथ दिया जा रहा है। हर जनसभा में इन्हीं नारों का शोर है। मालूम हो कि बीजेपी ने 2014 में चायवाला, 2019 में चौकीदार और 2024 परिवार को मुद्धा बनाया था।

      बता दें कि साल 2014 में दिल्ली में कांग्रेस का सम्मेलन था, जिसमें उसके एक वरिष्ठ नेता ने ऐसी ही एक चूक की थी, जिसे भाजपा ने अपने सबसे बड़े हथियार में बदल दिया था. मणिशंकर अय्यर ने कहा था, ‘ मैं आपसे वादा करता हूं कि 21वीं सदी में नरेंद्र मोदी इस देश का प्रधानमंत्री कभी नहीं बन पाएंगे. लेकिन अगर वो यहां आकर चाय बेचना चाहते हैं, तो हम उन्हें इसके लिए जगह दिला सकते हैं.‘ दरअसल, इससे पहले कई बार नरेंद्र मोदी और भाजपा ये कहती आई थी कि वो बचपन में चाय बेचा करते थे. अय्यर का ताना इसी पर था लेकिन उल्टा पड़ा.

     इसी तरह 2019 में मध्य प्रदेश के सीधी में हुई रैली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनावी सभाओं में लगाए जा रहे नारे ‘चौकीदार चोर है’ का जवाब मोदी ने अपने ही अंदाज में दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं में नए तरीके से  चौकीदार  वाला नारा लगवाया।सीधी की चुनावी सभा के अंत में मोदी ने कहा, ‘गांव-गांव है’, जनता ने आवाज दी ‘चौकीदार है‘ फिर मोदी ने कहा, ‘शहर-शहर है‘ तो जनता ने आवाज लगाई ‘ चौकीदार  है।‘ इसी प्रकार प्रधानमंत्री मोदी कहते गए, ‘बच्चा-बच्चा है, डॉक्टर- इंजीनियर है, शिक्षक है, माताएं-बहनें हैं। सीमा पर भी हैं। खेत-खलिहान में है। लेखक-पत्रकार हैं। वकील-व्यापारी हैं। छात्र-छात्राएं हैं। पूरा हिंदुस्तान है। मोदी के पहली लाइन कहने के बाद इन सभी के अंत में जनता ने आवाज लगाई ‘ चौकीदार  है।‘ 

     ऐतिहासिक गांधी मैदान में 2024 में महागठबंधन द्वारा आयोजित जन विश्वास महारैली में राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि अगर प्रधानमंत्री मोदी का कोई परिवार नहीं तो इसमें वो क्या कर सकते हैं? इस पर मोदी ने कहा कि बचपन में जब मैंने घर छोड़ा था, तो एक सपना लेकर निकला था कि देशवासियों के लिए जीऊंगा। उन्होंने कहा, ‘इस देश के 140 करोड़ लोग मेरा परिवार हैं... मेरा भारत मेरा परिवार।‘इस ओर बीजेपी के राज्याध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के 14 करोड़ लोग मोदी के परिवार है। अब राजद के कार्यकर्ताओं ने बैनर टांग कर कहा है कि हमलोग मोदी के परिवार के लोग नहीं है।

     विपक्ष का वक्तव्य और सत्ताधारी का मुद्धा बनना सार्वजनिक विवेचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब विपक्ष सत्ताधारी के प्रति अपने विचार व्यक्त करता है, तो यह समाज को विभिन्न दृष्टिकोणों से सोचने का अवसर प्रदान करता है। विपक्ष का वक्तव्य विभिन्न रूपों में प्रस्तुत किया जा सकता है, जैसे कि संसदीय भाषण, मीडिया कॉन्फ्रेंस, या सामाजिक मीडिया के माध्यम से। इसमें विपक्ष अपने पक्ष की राय और समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करके सत्ताधारी से अलग दृष्टिकोण प्रदान करता है।

      सत्ताधारी का मुद्दा बनाना इस विवेचना का दूसरा पहलू है। सत्ताधारी को विपक्ष के विचारों को सुनना और उनका उचित रूप से जवाब देना आवश्यक है। सत्ताधारी को चाहिए कि वह विपक्ष की बातचीत को सुने और उस पर विचार करें, ताकि सामाजिक समृद्धि और संवाद की भावना बनी रहे।इस प्रकार की विवेचना से समाज में विचार विनिमय होता है और नीतियों में सुधार होता है। सार्वजनिक चर्चा के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकलता है, जिससे राष्ट्र का विकास हो सकता है।

आलोक कुमार


बुधवार, 6 मार्च 2024

दूसरी राय के रूप में इस पर भरोसा किया जाता

 

विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता 

विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता 

पटना.विश्व भर में बहुत लोगों को आकर्षित करता है क्रिकेट. यह खेल ऐसा ही है.यह खेल एक बल्ले और गेंद के साथ खेला जाता है, जिसमें दो टीमें प्रतिस्पर्धा करती हैं.एक वक्त में एक टीम गेंदबाजी और दूसरी टीम बल्लेबाजी करती है.यह सब सिक्का उछालने के बाद टॉस जीतने वाली टीम के कप्तान पर निर्भर होता है.

    क्रिकेट एक खेल है जिसमें दो टीमें होती हैं, प्रत्येक टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं जो बल्ले और गेंद के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं. एक खेल में दो टीम होती हैं, जिसमें एक टीम बल्लेबाजी करती है जबकि दूसरी टीम गेंदबाजी करती है. विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता  होता है और विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता है.आउट करने का फैसला अंपायर करते हैं.

      अब सोनी के स्वामित्व वाली हॉक-आई प्रणाली को यूनाइटेड किंगडम में पॉल हॉकिन्स द्वारा विकसित किया गया. यह प्रणाली मूल रूप से क्रिकेट में टेलीविजन उद्देश्यों के लिए 2000 में लागू की गई थी.सिस्टम छह (कभी-कभी सात) उच्च-प्रदर्शन वाले कैमरों के माध्यम से काम करता है, जो आम तौर पर स्टेडियम की छत के नीचे स्थित होते हैं, जो विभिन्न कोणों से गेंद को ट्रैक करते हैं.फिर छह कैमरों के वीडियो को त्रिकोणीय बनाया जाता है और गेंद के प्रक्षेपवक्र का त्रि-आयामी प्रतिनिधित्व बनाने के लिए संयोजित किया जाता है.हॉक-आई अचूक नहीं है, लेकिन इसे 3.6 मिलीमीटर के भीतर सटीक होने के लिए विज्ञापित किया जाता है और आम तौर पर खेल में निष्पक्ष दूसरी राय के रूप में इस पर भरोसा किया जाता है.

       उसके बाद अंपायर डिसीजन रिव्यू सिस्टम (यूडीआरएस) आया.हालांकि टेस्ट क्रिकेट में डीआरएस का उपयोग 2008 में किया गया.इस प्रणाली को 2011 में वनडे में शामिल किया गया था.डीआरएस को 2017 में T20 इंटरनेशनल में पेश किया गया था. क्रिकेट का इतिहास हजारों वर्षों से बदला है और यह खेल विभिन्न प्रकारों में खेला जाता है, जैसे कि टेस्ट मैच, वनडे इंटरनेशनल, और टी20. वनडे और टी20 खेल आमतौर पर अधिक रोमांचक होते हैं और उनमें बहुत तेजी से बदलती घटनाएं होती हैं.

    क्रिकेट की प्रतिस्पर्धा आमतौर पर एक उत्सव की भावना के साथ खेली जाती है और इसमें उत्साह, जज्बा, और अद्वितीयता होती है. खेल के शौर्य और कुशलता के साथ, यह खेल खिलाड़ियों के बीच अज्ञात से मित्रता भी पैदा करता है.क्रिकेट जनप्रियता के कारण विभिन्न टूर्नामेंट और लीग आयोजित होते हैं, जैसे कि विश्व कप, आईपीएल, बीबीसी चैम्पियंस ट्रॉफी, और बहुत से अन्य।.इन टूर्नामेंट्स में विभिन्न देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और अपने देश का गौरव बढ़ाते हैं.

      क्रिकेट का इतिहास, उनके क्रिकेट स्टेडियमों की भरपूर महक, और विभिन्न रूपों के खेलों की रोचकता ने इसे एक महत्वपूर्ण खेल बना दिया है.यह न केवल खेल है, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है.क्रिकेट की प्रतिस्पर्धा न केवल खेल दर्शकों को एकजुट करती है, बल्कि यह एक खेल के रूप में आदर्श से उत्साहित करता है.

   

आलोक कुमार

पटना महानगर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष शशि रंजन के नेतृत्व में प्रदर्शन 7 मार्च को

 चुनावी बॉण्ड के डीटेल्स का खुलासा करने के लिए 30 जून तक समय बढ़ाने का सोमवार को उच्चतम न्यायालय से अनुरोध 

पटना.सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को बुधवार 6 मार्च तक निर्वाचन आयोग को डीटेल्स पेश करने का निर्देश दिया था. इस बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी डीटेल्स को जमा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 30 जून तक का समय मांगा है. एसबीआई ने कहा है कि कोर्ट ने जो 3 हफ्ते का समय दिया था वह पर्याप्त नहीं है. एसबीआई ने राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए प्रत्येक चुनावी बॉण्ड के डीटेल्स का खुलासा करने के लिए 30 जून तक समय बढ़ाने का सोमवार को उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया. पिछले महीने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को आदेश दिया था.            

     यू.पी.ए.दो को हराने के बाद एन.डी.ए.की सरकार 2014 में सत्तासीन हो गई.कांग्रेस मुक्त राज्य सरकार बनाने में जुटी भारत सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना की घोषणा 2017 में की थी. इस योजना को सरकार ने 29 जनवरी 2018 को कानून लागू कर दिया था.प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा शुरू की गई चुनावी बांड प्रणाली के तहत, इन बांडों को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से खरीदा जाना चाहिए, लेकिन गुमनाम रूप से पार्टियों को दान किया जा सकता है.इसका भरपूर लाभ एन.डी.ए.सरकार को मिली. हालांकि इलेक्टोरल बॉन्ड का काफी विरोध हुआ.            

     बता दें कि इस योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक राजनीतिक दलों को धन देने के लिए बांड जारी कर सकता है.इन्हें ऐसा कोई भी दाता खरीद सकता है, जिसके पास एक ऐसा बैंक खाता है, जिसकी केवाईसी की जानकारियां उपलब्ध हैं. इलेक्टोरल बॉन्ड में भुगतानकर्ता का नाम नहीं होता है.योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक की निर्दिष्ट शाखाओं से 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, एक लाख रुपये, दस लाख रुपये और एक करोड़ रुपये में से किसी भी मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदे जा सकते हैं.चुनावी बॉन्ड्स की अवधि केवल 15 दिनों की होती है, जिसके दौरान इसका इस्तेमाल सिर्फ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत पंजीकृत राजनीतिक दलों को दान देने के लिए किया जा सकता है.

      केवल उन्हीं राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये चंदा दिया जा सकता है, जिन्होंने लोकसभा या विधान सभा के लिए पिछले आम चुनाव में डाले गए वोटों का कम से कम एक प्रतिशत वोट हासिल किया हो.योजना के तहत चुनावी बॉन्ड जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीनों में 10 दिनों की अवधि के लिए खरीद के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं.इन्हें लोकसभा चुनाव के वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की अतिरिक्त अवधि के दौरान भी जारी किया जा सकता है.हालांकि, इस प्रणाली के साथ कुछ विवाद भी जुड़े हैं.कुछ लोग यह मानते हैं कि इससे लोगों को निश्चित राजनीतिक दलों के साथ बंधन में डालने का खतरा हो सकता है और यह लोकतंत्र के सिद्धांत के खिलाफ है.

     इस प्रणाली की तुलना में, यह भी महत्वपूर्ण है कि कैसे उसे सुधारा जा सकता है ताकि यह सबके समर्थन और प्रतिनिधित्व की दिशा में और बेहतर काम कर सके.इसमें नागरिकों को अधिक सकारात्मक और सशक्त बनाने के लिए उपाय शामिल करना भी महत्वपूर्ण है.सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मतदाताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन है.आयकर अधिनियम के तहत, किसी के चुनावी बांड दान को धारा 80 जीजी और धारा 80 जीजीबी के तहत कर-मुक्त माना जाता है. हालाँकि, दान प्राप्त करने वाला राजनीतिक दल भी आयकर अधिनियम की धारा 13 ए के अनुसार दान प्राप्त कर सकता है.

     इस बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भाजपा को चंदा देने वालों का नाम एस.बी.आई. द्वारा सार्वजनिक नहीं किये जाने के विरोध में पटना महानगर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष शशि रंजन के नेतृत्व में गुरुवार 0 7 मार्च,2024 को गांधी मैदान स्थित एस.बी.आई. शाखा के पास प्रदर्शन किया जाएगा.प्रदर्शन अपराह्न 12ः30 बजे गांधी मैदान स्थित एस.बी.आई. शाखा के पास होगा.     

आलोक कुमार

मंगलवार, 5 मार्च 2024

अगर मोदी देश को वास्तव में परिवार समझते हैं तो परिवार की चिंता करना चाहिए

 धृतराष्ट्र ने हस्तिनापुर को अपना परिवार समझता था:डा0 अखिलेश

पटना। बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश को अपना परिवार समझने वाले बयान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मोदी को बपना परिवार बसाना ही नहीं आया उनको तो परिवार को छोड़ने की आदत है। अगर मोदी देश को वास्तव में परिवार समझते हैं तो परिवार की चिंता करना भी उनको देखना चाहिए।

  आगे कहा कि परिवार को बेहाल करके खुद वास्कोडिगामा की तरह विश्व भ्रमण नहीं करना चाहिए। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या मणिपुर के जिन महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाया गया वह इस परिवार की इज्जत नहीं थी। महिला पहलवानों को भी मोदी जी बेटी कहा था लेकिन उन्हीं के पार्टी के सांसद जब उन बेटियों की इज्जत पर हाथ डाल रहा था तो मोदी जी की पुलिस ने उन बेटियों पर लाठियां बरसाईं, तब मोदी धृतराष्ट्र क्यों हो गए? धृतराष्ट्र ने हस्तिनापुर को अपना परिवार कहता था लेकिन द्रौपदी का चीरहरण होने दिया, हर तरह का अन्याय, अनैतिकता और सत्ता के दुरुपयोग कर विरोधियों को कुचलने का नापाक खेल चलता रहा, वह आज हो रहा है। लेकिन उनको याद होना चाहिए कि जिस तरह कौरवों का विनाश हुआ ठीक उसी तरह भाजपा का भी विनाश तय है।  

    अगर देश को मोदी वास्तव में अपना परिवार समझते हैं तो देशवासियों की आह उनको जरूर लगेगी। अगर देश को परिवार समझते तो भूख से बिलखते बच्चों की चीख उनको जरूर सुनाई नहीं देती और भूख मिटाने वाले अन्नदाता किसानों को कुचलने के लिए मोदी रोड पर कील नहीं ठुकवाते और उनके रास्ते में पत्थरों का पहाड़ खड़ा नहीं करवाते। वही हाल नौजवानों का है। देश का भविष्य बेरोजगारी से बेहाल है और मोदी दो करोड़ सालाना नौकरी का झाँसा देते रहे। देश का नौजवान, महिला और किसान इस क्रूर मजाक का बदला जरूर लेंगे।


आलोक कुमार

सोमवार, 4 मार्च 2024

एमेरिटस महाधर्माध्यक्ष विलियम डिसूजा का जन्मदिन

मार्च महीना महत्वपूर्ण बक्सर

बक्सर धर्मप्रांत के लिए मार्च महीना महत्वपूर्ण है.02 मार्च को उपयाजक अंकित कुमार बने हैं. 05 मार्च को बक्सर धर्मप्रांत के प्रथम धर्माध्यक्ष और पटना महाधर्मप्रांत के द्वितीय महाधर्माध्यक्ष विलियम डिसूजा का जन्मदिन है.21 मार्च को .संत मेरी चर्च कैथेड्रल चर्च में साढ़े तीन बजे से क्रिस्म का मिस्सा अर्पित किया जाएगा.25 मार्च को बक्सर धर्मप्रांत के तीसरे बिशप डाॅ जेम्स शेखर का बिशप अभिषेक का प्रथम वर्षगांठ है. 25 मार्च को बक्सर धर्मप्रांत अस्तित्व में आया.

उपयाजक समारोह 2 मार्च को दिल्ली में
मूलतः बनारस धर्मप्रांत के अंकित कुमार निवासी हैं.वे बक्सर धर्मप्रांत में सेवा कार्य करने के लिए शामिल हुए हैं.उन्होंने अपने तीसरे साल की ईश शास्त्र की पढ़ाई समाप्त किए हैं.02 मार्च को दिल्ली महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष अनिल जोसेफ थॉमस कूटो ने विशेष धार्मिक अनुष्ठान में बक्सर धर्मप्रांत के लिए अंकित कुमार को उपयाजक बनाया.इस समय उनकी पढ़ाई विद्याज्योति सेमिनरी दिल्ली में जारी है.उपयाजक समारोह में बक्सर धर्मप्रांत के प्रवक्ता फादर आनंद कुमार शामिल हुए थे.

एमेरिटस आर्चबिशप का जन्मदिन 5 मार्च को
पटना महाधर्मप्रांत से 25 मार्च 2006 को विभक्त होकर बक्सर धर्मप्रांत अस्तित्व में आया.उसके प्रथम धर्माध्यक्ष और पटना महाधर्मप्रांत के द्वितीय महाधर्माध्यक्ष एमेरिटस विलियम डिसूजा का जन्मदिन 05 मार्च को है.एमेरिटस आर्चबिशप का जन्म 05 मार्च 1946 में हुआ था.78 बसंत देखे हैं. पटना और बक्सर धर्मप्रांत की जनता की ओर से जन्मदिन मुबारक हो.

क्रिस्म का मिस्सा 21 मार्च को साढ़े तीन बजे से
बक्सर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष बनने के बाद बिशप डॉ.जेम्स शेखर पहली बार क्रिस्म तेल पर आशीष देकर पवित्र करेंगे.यह धार्मिक कार्यक्रम संत मेरी चर्च कैथेड्रल चर्च में साढ़े तीन बजे से होगा.इस अवसर पर धर्मप्रांत के सभी स्तर के पुरोहित शामिल होंगे.पुरोहितों के द्वारा बिशप के आदेश का पालन करने का वादा करेंगे.मालूम हो कि बिशप डॉ.जेम्स शेखर तीन प्रकार के तेल पर आशीष देंगे.कैटेचुमेन्स का तेल,अशक्त का तेल (ओलियम इन्फर्मोरम) और पवित्र क्रिस्म (सैक्रम क्रिस्म).ओलियम इन्फर्मोरम से पुरोहिताभिषेक के समय उपयोग किया जाता है.ओलियम इन्फर्मोरम से बीमारों और अशक्त लोगों पर उपयोग किया जाता है.सैक्रम क्रिस्म जिसका उपयोग पूरे धर्मप्रांत में वर्ष भर संस्कारों के उपयोग में किया जाता है.

26 मार्च को बिशप अभिषेक का प्रथम वर्षगांठ
डाॅ जेम्स शेखर का बिशप अभिषेक 25 मार्च 2023 को हुआ था.ये बक्सर धर्मप्रांत के तीसरे बिशप हैं.प्रथम बिशप विलियम डिसूजा और द्वितीय सेबेस्टियन कल्लूपुरा है.डाॅ जेम्स शेखर का बिशप अभिषेक का प्रथम वर्षगांठ है.बिशप डॉ जेम्स शेखर के द्वारा धर्मप्रांत का बेहतर ढंग से नेतृत्व करने पर बधाई स्वीकार करें. वहीं बक्सर धर्मप्रांत का अस्तित्व 25 मार्च 2006 में आया था.18 साल हो गया.इस धर्मप्रांत के सभी लोगों को बधाई प्राप्त हो.

आलोक कुमार 

रविवार, 3 मार्च 2024

40 से अधिक युवाओं ने रक्त अर्पण शिविर में आकर अंजू कुमारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की

 अपनी पत्नी के निधन पर रक्तदान अर्पण शिविर आयोजित कर महादान की शानदार पहल शुरू कर दी 

जमुई। अभी तक सर्वज्ञात था कि लोग जन्मदिन और वैवाहिक सालगिरह के अवसर पर रक्तदान करके महादान करते थे। अब समय बदल गया है। इस क्षेत्र में रहने वाले विनोद मंडल ने अपनी पत्नी के निधन पर रक्तदान अर्पण शिविर आयोजित कर महादान की शानदार पहल शुरू  कर  दी है. इस अवसर पर तकरीबन 40 से अधिक युवाओं ने रक्त अर्पण शिविर में आकर अंजू कुमारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

         बता दें कि गुर्दा (किडनी) शरीर का एक जरूरी अंग है। ये मानव शरीर के निचले हिस्से में होता है। ये मानव खून की सफाई करते हैं और आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालते हैं। किडनी आपके मूत्राशय में विषाक्त पदार्थों को भेजती है, जिसे आपका शरीर बाद में पेशाब के दौरान विषाक्त पदार्थों को निकालता है। पर गुर्दे से जुड़ी कोई भी बीमारी इसके काम काज को प्रभावित कर सकती है। अंजू कुमारी  किडनी रोग के शिकार हो गयी। अंजू कुमारी की दोनों किडनी फेल्योर हो गई। जब आपके गुर्दे आपके ब्लड से वेस्ट चीजों को पर्याप्त रूप से फिल्टर करने की क्षमता खो देते हैं। उसे लगातार डायलिसिस पर रखा गया। जो सफल नहीं हो सका। अंनतः अंजू कुमारी का निधन हो गया। वह एक बच्ची को छोड़ गयी। 

              रक्त के अभाव में किसी व्यक्ति की मौत न हो उसके प्रति सचेत रहने वाली गैर सरकारी संस्था प्रबोध जन सेवा संस्थान की इकाई मानव रक्षक रक्तदाता परिवार,जमुई द्वारा रक्तदाता मिलन सह स्वैच्छिक रक्तदाता शिविर आयोजित की गई।  शिविर का उदघाटन जिलाधिकारी राकेश कुमार, सिविल सर्जन डॉ. महेन्द्र प्रताप, डीएस डॉ सैयद नौशाद अहमद, सुदर्शन सिंह एवं संस्थान सचिव सुमन सौरभ द्वारा संयुक्त रूप से की गई। 

                शिविर की शुरुआत रक्तवीर विनोद मंडल के पत्नी के तस्वीर पर पुष्पर्पित कर की गई। इस दौरान स्मृतिशेष अंजू कुमारी के निधन पर तकरीबन 40 से अधिक युवाओं ने रक्त अर्पण श्रद्धांजलि दी। वहीं, अधिकारियों ने रक्तदाताओं के बीच प्रोत्साहन प्रमाण पत्र भी वितरित किए। 

डीएम राकेश कुमार ने संस्थान के क्रियाकलापों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान महादान है। इससे लोगों को जीवनदान मिलता है।डीएम ने रक्तवीरों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि, हर सक्षम लोगों को रक्तदान अवश्य करना चाहिए। वहीं, संस्थान सचिव सुमन सौरभ, रक्तवीर अनुराग सिंह,शिवजीत सिंह, रोशन सिंह, सौरभ मिश्र, रॉकी, सचिन कुमार आदि ने बताया कि पत्नी के निधन पर आयोजित हुआ ये शिविर एक सामाजिक चेतना का आगाज है,ताकि समाज के अंतिम वर्ग रक्तदान की महत्ता समझते हुए संस्थान के उद्देश्य को सार्थक कर सके। शिविर के अंतिम कड़ी में सिविल सर्जन व डी एस ने भी संस्थान के सकारात्मक कार्यशैली की प्रसंशा करते हुए रक्तवीरों के बीच प्रमाण पत्र का वितरण किया। वहीं, शिविर के मौके पर सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।


आलोक कुमार

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