विश्व का सबसे विशाल शिवलिंग—महाबलीपुरम से चंपारण की ऐतिहासिक यात्रा शुरू
यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टिकाडू गांव में पिछले 10 वर्षों में तैयार किया गया है. इसे शनिवार को 96 पहियों वाले विशेष ट्रक पर कड़ी सुरक्षा के बीच सड़क मार्ग से रवाना किया गया है। रास्ते में कई राज्यों और प्रमुख शहरों में श्रद्धालु इस शिवलिंग के दर्शन भी कर सकेंगे.
चंपारण . तमिलनाडु के समुद्री तट पर बसे महाबलीपुरम से जब 33 फीट ऊँचा और 210 मीट्रिक टन वजनी शिवलिंग 96-चक्का ट्रेलर पर धीरे-धीरे आगे बढ़ा, तो यह सिर्फ पत्थर का कोई ढांचा नहीं था—यह भारतीय आस्था, शिल्पकला और धैर्य का विराट प्रतीक था. दस वर्षों की सतत साधना, अनगिनत हथौड़ों की गूंज और शिल्पकार लोकनाथ की टीम की अनथक मेहनत आखिरकार उस क्षण में फलित हुई, जब पूजा-अर्चना के बाद शिवलिंग को पूर्वी चंपारण के लिए रवाना किया गया.यह सिर्फ एक शिवलिंग नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक यात्रा है—भारत की मिट्टी, मार्ग, लोग और विश्वास, सब इसमें सम्मिलित हैं.
बन रहा है दुनिया का सबसे बड़ा रामायण मंदिर — और अब पहुँच रहा है उसका ‘हृदय’.पूर्वी चंपारण के चकिया (जानकीनगर) में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर अपने आप में एक अद्भुत संरचना बनकर उभर रहा है.1080 फीट लंबा, 540 फीट चौड़ा परिसर,18 शिखर, जिनमें मुख्य शिखर की ऊँचाई 270 फीट,कुल 22 मंदिरों का समुच्चय,चार विशाल आश्रम और अब — दुनिया का सबसे विशाल 33 फीट का शिवलिंग.
महावीर मंदिर न्यास समिति के इस प्रोजेक्ट का सपना आचार्य किशोर कुणाल ने देखा था। आज उनके पुत्र सायण कुणाल उसी स्वप्न को जमीन दे रहे हैं, और इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए दिन-रात पेचीदा तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं.33 फीट शिवलिंग—भारतीय शिल्प का अद्भुत प्रतिमान,एक ही विशाल ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित,वजन 210 मीट्रिक टन,निर्माण समय 10 वर्ष,लागत लगभग 3 करोड़ रुपये.
निर्माण स्थल: महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गाँव.शिवलिंग को भक्तों और गांव वालों की उपस्थिति में परंपरागत पूजन के बाद रवाना किया गया। यह यात्रा महज भौगोलिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक है—जिन राज्यों से शिवलिंग गुजरेगा, वहाँ स्वागत-पूजन की विशेष व्यवस्थाएँ होंगी।
अंदेशा है कि 25 दिनों में यह शिवलिंग चंपारण पहुँचेगा.शिवलिंग यात्रा—दक्षिण से उत्तर की आध्यात्मिक सेतु यात्रा मार्ग:
विशाल शिवलिंग को एक विशेष 96 चक्के वाले ट्रक पर लादकर महाबलीपुरम से बिहार के लिए रवाना किया गया. ये ट्रक कई राज्यों से होकर गुजरेगा. इस दौरान, श्रद्धालु कई शहरों में शिवलिंग के दर्शन कर सकेंगे. शिवलिंग का यात्रा मार्ग भी पहले से तया किया गया है. होसुर, होसाकोट, देवनाहाली, कुरनूल, हैदराबाद, निजामाबाद, अदिलाबाद, नागपुर, सीवनी, जबलपुर, मैहर, सतना, रीवा, मिर्जापुर, आरा, छपरा, मसरख, मोहम्मदपुर, केसरिया होते हुए ये अंत में चकिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर पहुंचेगा।यह मार्ग एक तरह से भारत की सांस्कृतिक रेखा-चित्र जैसा है—दक्षिण की द्रविड़ शिल्प परंपरा से लेकर उत्तर भारत की श्री राम और शिव भक्ति तक.
नए वर्ष में स्थापना—बिहार के लिए ऐतिहासिक क्षण.मंदिर प्रशासन के अनुसार, जनवरी–फरवरी 2026 में इस शिवलिंग की स्थापना हो सकती है। भारी उत्साह और राज्यव्यापी प्रतीक्षा पहले ही दिखने लगी है.यह सिर्फ बिहार का गर्व नहीं होगा, यह भारत का विश्व-मंच पर सांस्कृतिक परिचय बनेगा। जब कोई पूछेगा कि दुनिया का सबसे.विशाल मंदिर कौन-सा है—तो उत्तर होगा बिहार का विराट रामायण मंदिर.
जब देश में मंदिर निर्माण और आध्यात्मिकता की चर्चा होती है, तो अक्सर उत्तर भारत ही विमर्श का केंद्र रहता रहा है। लेकिन इस शिवलिंग की यात्रा एक गहरा संदेश देती है—भारत की असली आत्मा उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम का भेद नहीं करती.यह शिवलिंग दक्षिण की शिल्प परंपरा और उत्तर की आस्था को जोड़ता हुआ एक सांस्कृतिक पुल है. और जब यह चकिया पहुँचेगा, तो संभव है कि यह केवल एक धार्मिक प्रतीक न रह जाए—यह बिहार के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का आधारस्तंभ बन जाए.
आलोक कुमार