मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26

  सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26


पटना . भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे रोमांचक टी20 टूर्नामेंट सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (SMAT) के 2025-26 संस्करण में इस बार नया प्रयोग देखने को मिला है। पारंपरिक नॉकआउट स्टेज की जगह सुपर लीग फॉर्मेट अपनाया गया, जिसमें ग्रुप स्टेज की टॉप-8 टीमें दो ग्रुप्स में बंटकर राउंड-रॉबिन खेलती हैं और दोनों ग्रुप के विजेता सीधे फाइनल में पहुंचे हैं। टूर्नामेंट का फाइनल 18 दिसंबर को पुणे के MCA स्टेडियम में खेला जाएगा।

प्रश्न है ग्रुप ए से फाइनल में पहुंचने वाली टीम का। एलीट ग्रुप स्टेज में चार ग्रुप (A, B, C, D) थे, जिनमें से हर ग्रुप की टॉप-2 टीमें सुपर लीग के लिए क्वालीफाई की.ग्रुप ए से मुंबई और आंध्र प्रदेश ने सुपर लीग में जगह बनाई। मुंबई ने ग्रुप में शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप किया, जबकि आंध्र प्रदेश ने दूसरे स्थान पर रहकर क्वालीफाई किया.

सुपर लीग में ये आठ टीमें थीं: मुंबई, आंध्र प्रदेश (ग्रुप A से), हैदराबाद, मध्य प्रदेश (ग्रुप B से), हरियाणा, राजस्थान (ग्रुप C से), झारखंड, पंजाब (ग्रुप D से)। इन्हें दो ग्रुप में बांटा गया:

सुपर लीग ग्रुप A: मध्य प्रदेश, पंजाब, झारखंड, आंध्र प्रदेश

सुपर लीग ग्रुप B: हैदराबाद, हरियाणा, मुंबई, राजस्थान

16 दिसंबर 2025 तक सुपर लीग के अधिकांश मुकाबले हो चुके हैं। ग्रुप A में झारखंड और हैदराबाद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने-अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया। झारखंड ने तो टूर्नामेंट में लगातार जीत का सिलसिला बना रखा, जिसमें सुपर लीग में भी मध्य प्रदेश जैसी मजबूत टीम को रोमांचक मुकाबले में हराया. हैदराबाद ने भी अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी की धार से ग्रुप B पर जमाया.

इस प्रकार, ग्रुप ए से क्वालीफाई करने वाली आंध्र प्रदेश सुपर लीग ग्रुप A में थी, लेकिन फाइनल में पहुंचने वाली टीम झारखंड बनी, जो मूल एलीट ग्रुप D से आई थी. आंध्र प्रदेश ने सुपर लीग में कुछ अच्छे प्रदर्शन दिखाए, लेकिन झारखंड की लगातार जीत और बेहतर नेट रन रेट के सामने वे फाइनल की दौड़ से बाहर हो गईं। मुंबई (ग्रुप A की दूसरी टीम) भी सुपर लीग ग्रुप B में मजबूत दावेदार थी, लेकिन हैदराबाद ने उन्हें पीछे छोड़ दिया.

यह फॉर्मेट टूर्नामेंट को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना रहा है, क्योंकि एक हार से टीम बाहर नहीं होती। झारखंड और हैदराबाद जैसे टीमों के उभरते सितारों – जैसे ईशान किशन की कप्तानी में झारखंड की आक्रामक बल्लेबाजी और गेंदबाजी – ने दर्शकों को खूब रोमांचित किया.फाइनल में ये दोनों टीमें आमने-सामने होंगी, जो निश्चित रूप से एक यादगार मुकाबला होगा.

ग्रुप ए से सुपर लीग तक का सफर मुंबई और आंध्र प्रदेश के लिए सराहनीय रहा, लेकिन फाइनल की चाबी अब झारखंड और हैदराबाद के पास है. घरेलू क्रिकेट में ऐसे प्रयोग युवा प्रतिभाओं को ज्यादा मौके दे रहे हैं, जो आने वाले आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए शुभ संकेत है.

आलोक कुमार

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सोमवार, 15 दिसंबर 2025

जेल के दिनों ने उनके शरीर पर गहरी चोट

 


पटना.उत्तरी भारत के एक छोटे से गाँव में 45 वर्षीय शीला देवी की कहानी आज भी सवालों से भरे हमारे समय का आईना है. मसीही विश्वास का पालन करते हुए अपने घर में एक छोटी-सी मंडली चलाने की वजह से उन्हें लगभग तीन महीने जेल में रहना पड़ा.आरोप था—धर्म परिवर्तन कानून का उल्लंघन.बीमारी के चलते ज़मानत मिली, पर जेल के दिनों ने उनके शरीर पर गहरी चोट छोड़ी; बाद में कैंसर का पता चला.

पिछले दो वर्षों से शीला अपने घर में प्रार्थना सभाएँ आयोजित कर रही थीं. यह पहल उनके लिए सेवा थी, पर गाँव के कुछ लोगों के लिए असहजता. विरोध बढ़ा, शिकायत हुई और 20 जुलाई की रविवार आराधना के दौरान पुलिस ने घर में प्रवेश कर पूछताछ की. बाइबिल, क्रॉस, भजन की किताबें, दीवार पर टंगा दस आज्ञाओं का पोस्टर, एम्प्लीफायर—सब ज़ब्त कर लिया गया. यहाँ तक कि उनका मोबाइल फ़ोन भी, जो उनके लिए परमेश्वर के वचन से जुड़े रहने का माध्यम था.

शीला का कहना है कि वे सभाएँ बंद नहीं कर सकती थीं. उनका विश्वास था कि ये मुलाक़ातें लोगों को शांति और चंगाई देती हैं—बीमारी और अकेलेपन के बीच आशा का सहारा बनती हैं. इसी दृढ़ता की कीमत उन्हें कैद के रूप में चुकानी पड़ी, पर उनका संकल्प डगमगाया नहीं.

आज, रिहाई के बाद भी चुनौतियाँ कम नहीं हैं.स्वास्थ्य संघर्ष जारी है, सामाजिक दबाव भी। फिर भी उनकी गवाही उस मंडली के लिए प्रेरणा है—कि कठिनाइयों के बीच भी विश्वास पर अडिग रहा जा सकता है.

प्रार्थना

हे स्वर्गीय पिता, शीला की साहसी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद. उनके शरीर को चंगा करें और उनके विश्वास को और दृढ़ करें। स्थानीय अधिकारियों को अनुग्रह दें कि इस समुदाय को शांतिपूर्वक मिलने की अनुमति मिले. यदि परिस्थितियाँ बदलें, तो नेताओं को सही निर्णय की बुद्धि प्रदान करें. भारत में—विशेषकर उत्तरी भाग में—यीशु का प्रकाश और प्रेम चमकता रहे.

वचन

“क्योंकि हम अपना प्रचार नहीं करते, बल्कि प्रभु यीशु मसीह का….” — 2 कुरिंथियों 4:3–5

यदि चाहें, मैं इसे संक्षिप्त समाचार रिपोर्ट, मानवाधिकार नोट, या प्रार्थना-पुस्तिका हेतु अनुकूलित संस्करण में भी ढाल सकता हूँ.

आलोक कुमार


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रविवार, 14 दिसंबर 2025

शहादत की अमर विरासत

 संसद पर हमला: शहादत की अमर विरासत


नई दिल्ली.13 दिसंबर 2001 का दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक अध्याय है. इसी दिन आतंकवादियों ने देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था—संसद—पर हमला कर भारत की संप्रभुता को चुनौती देने का दुस्साहस किया। किंतु उनके मंसूबों को हमारे वीर सुरक्षाकर्मियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर विफल कर दिया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्रियों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा दी गई श्रद्धांजलि यह दर्शाती है कि राष्ट्र आज भी उन शहीदों के बलिदान को एकजुट होकर नमन करता है.यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उस कर्तव्यबोध की पुनः स्मृति है, जिसने देश को एक अडिग सुरक्षा कवच प्रदान किया.

संसद की रक्षा करते हुए शहीद हुए जवानों का साहस, सतर्कता और कर्तव्यनिष्ठा आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा है.उनका बलिदान यह संदेश देता है कि लोकतंत्र की रक्षा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि संकल्प और त्याग से होती है.

आज जब आतंकवाद नए-नए रूपों में वैश्विक चुनौती बना हुआ है, तब 13 दिसंबर 2001 के शहीद हमें सतत सजग रहने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाए रखने की सीख देते हैं.देश उन वीरों और उनके परिवारों का सदा ऋणी रहेगा। उनका बलिदान अमर है और भारत की राष्ट्रीय चेतना में सदैव जीवित रहेगा.                 

 आलोक कुमार

शनिवार, 13 दिसंबर 2025

सड़क चौड़ीकरण के नाम पर शिक्षा का वह एकमात्र ठिकाना मिट्टी में मिला दिया

 


पटना. पटना नगर निगम का वार्ड संख्या–1, जो राजधानी के विकास की चमक के बीच स्थित है, आज भी सामाजिक हाशिए पर खड़े समुदायों की उपेक्षा का जीवंत उदाहरण बन गया है.इस वार्ड की निर्वाचित प्रतिनिधि छठिया देवी स्वयं महादलित मुसहर समुदाय से आती हैं, लेकिन विडंबना यह है कि उन्हीं की बिरादरी आज सबसे अधिक उपेक्षा और अव्यवस्था का दंश झेल रही है.दीघा मुसहरी के लोग समस्याओं के ऐसे मकड़जाल में उलझे हैं, वहां से निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता दिखाई नहीं देता.

     दीघा मुसहरी में कभी सरकारी स्कूल की व्यवस्था थी. भवन के अभाव में शिक्षक केदार मांझी की झोपड़ी में पढ़ाने को विवश थे, जहां पास ही सूअरों का बखौर था. यह दृश्य ही बताता है कि शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत को किस हद तक नजरअंदाज किया गया. वर्षों बाद सड़क किनारे स्कूल भवन बना, जिसने बच्चों और अभिभावकों में उम्मीद जगाई. लेकिन जैसे ही दीघा–पटना रेलखंड पर अटल पथ निर्माण की योजना आई, स्कूल भवन को विकास की भेंट चढ़ा दिया गया.सड़क चौड़ीकरण के नाम पर शिक्षा का वह एकमात्र ठिकाना मिट्टी में मिला दिया गया.

    इसी क्रम में वार्ड पार्षद द्वारा ‘हर घर नल-जल’ योजना के तहत जलापूर्ति केंद्र, शौचालय और स्नानघर का निर्माण कराया गया. कुछ समय के लिए ही सही, महादलित समुदाय को लगा कि सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि उनकी बुनियादी जरूरतों को समझ रहे हैं.लेकिन यह खुशी भी ज्यादा दिन टिक नहीं सकी. सरकारी योजना से बने सामुदायिक भवन की परिधि में जलापूर्ति केंद्र और शौचालय को शामिल कर लिया गया और बाद में उस भवन पर ताला जड़ दिया गया.नतीजा यह हुआ कि जिन सुविधाओं के लिए योजनाएं बनी थीं, उन्हीं से महादलित मुसहर समुदाय को वंचित कर दिया गया.

   जल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से कट जाने के बाद, समाज के सबसे कमजोर तबके के लोग महाजनों से कर्ज लेकर अपने घरों में शौचालय बनवाने और पानी की पाइप लाइन खुद गाड़ने को मजबूर हुए. यह केवल एक बस्ती की कहानी नहीं है, बल्कि ‘हर घर नल का जल’ जैसी महत्वाकांक्षी योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल है. बिहार के कई हिस्सों से यह शिकायत सामने आ रही है कि पाइप तो बिछा दिए गए, लेकिन पानी या तो अनियमित है या बिल्कुल नहीं है.

     दीघा मुसहरी के निवासियों की पहल—खुद पाइपलाइन बिछाना—उनके संघर्ष और जिजीविषा को दर्शाती है, लेकिन यह भी बताती है कि सरकारी व्यवस्था किस हद तक असफल रही है. विकास तब सार्थक माना जाएगा, जब योजनाओं का लाभ सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे. अन्यथा, सामुदायिक भवनों पर ताले और सूखी नल-टोटियां केवल सरकारी दावों की पोल खोलती रहेंगी.

इस गंभीर स्थानीय समस्या के समाधान के लिए जरूरी है कि जन स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) और पटना नगर निगम तत्काल हस्तक्षेप करें. दीघा मुसहरी के महादलित मुसहर समुदाय को जल और स्वच्छता की सुविधाओं से वंचित रखना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि सामाजिक न्याय की अवधारणा पर भी गहरा आघात है.

आलोक कुमार

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शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025

पश्चिम चंपारण के नये जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह

 पश्चिम चंपारण के नये जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह ने किया पदभार ग्रहण.जिले के विकास के लिए टीम भावना अनिवार्य ताकि सरकार की प्राथमिकताएं पूरी शिद्दत के साथ धरातल पर उतारी जा सके.सभी योजनाओं और परियोजनाओं को पूरी तत्परता और तेज गति से लक्ष्य तक पहुंचाया जाएगा.....


बेतिया. पश्चिम चम्पारण जिले में प्रशासनिक जिम्मेदारी का नया अध्याय आज गुरुवार को शुरू हो गया, जब भा.प्र.से. के अधिकारी श्री तरनजोत सिंह ने समाहरणालय बेतिया पहुंचकर विधिवत रूप से जिलाधिकारी का पदभार ग्रहण किया.पदभार ग्रहण के बाद उन्होंने जिले के सभी प्रमुख पदाधिकारियों से एक-एक कर परिचय प्राप्त किया और जिले में चल रही योजनाओं, विकास कार्यों तथा विभिन्न विभागीय कार्यक्रमों की स्थिति पर प्रारंभिक जानकारी ली.

    उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में वे प्रत्येक विभाग की कार्यप्रणाली का गहन अध्ययन कर जिला प्रशासन की कार्यशैली को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर देंगे.जिला पदाधिकारी ने पदभार ग्रहण करते ही जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं के बारे में दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ समाज के हर तबके तक पहुंचे, इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ कार्य करना होगा.उन्होंने पदाधिकारियों से कहा कि जिले के विकास के लिए टीम भावना अनिवार्य है, इसलिए हर अधिकारी को विभागीय समन्वय मजबूत करते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकारी प्राथमिकताएँ पूरी शिद्दत के साथ धरातल पर उतारी जा सकें.

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जनहित से जुड़े कार्य अनावश्यक कारणों से लंबित न रहें और सभी योजनाओं का निष्पादन निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से किया जाए ताकि जनता को किसी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े.जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह ने पश्चिम चंपारण जिले की गौरवशाली ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पवित्र और संघर्षशील धरती पर पदस्थापित होकर वे स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिले को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन को तेजी और ईमानदारी के साथ काम करना होगा तथा सभी अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का निष्पादन पूरी निष्ठा के साथ करना चाहिए. 

  उन्हें आश्वस्त किया कि जिले के विकास को सबसे ऊपर रखते हुए सभी योजनाओं और परियोजनाओं को पूरी तत्परता और तेज गति से लक्ष्य तक पहुंचाया जाएगा.इस अवसर पर जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें उप विकास आयुक्त श्री सुमित कुमार, अपर समाहर्ता श्री राजीव रंजन सिन्हा, अपर समाहर्ता (विभागीय जांच) श्री कुमार रविन्द्र, अपर समाहर्ता-सह-लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी श्री अनिल कुमार सिन्हा, नगर आयुक्त नगर निगम बेतिया श्री लक्ष्मण तिवारी, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी श्री अमरेन्द्र कुमार, निदेशक डीआरडीए श्री अरुण प्रकाश, विशेष कार्य पदाधिकारी गोपनीय शाखा श्री सुजीत कुमार सहित अन्य जिलास्तरीय पदाधिकारी शामिल थे.सभी अधिकारियों ने नए जिलाधिकारी का स्वागत किया और जिले के विकास कार्यों में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया.


आलोक कुमार

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गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

कैथोलिक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात

 

पटना.बिहार की राजनीति में 8 दिसंबर 2025 का दिन केवल एक औपचारिक शिष्टाचार भेंट नहीं था, बल्कि यह उस विश्वास और संवाद की परंपरा का प्रतीक था जिसे लोकतांत्रिक व्यवस्था अपने भीतर संजोए रहती है. पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा के नेतृत्व में कैथोलिक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर उन्हें रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी—एक उपलब्धि जिसे वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (लंदन) ने भी दर्ज कर इतिहास का हिस्सा बना दिया है.

     इस प्रतिनिधिमंडल में विकार जनरल फादर जेम्स जॉर्ज, एक्सलरीज यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मार्टिन पोरस, पटना वीमेंस कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. एम. रश्मि ए.सी., तथा अन्य प्रमुख शिक्षाविद और सामाजिक नेता शामिल थे। स्पष्ट है कि यह मुलाकात केवल राजनीतिक औपचारिकता तक सीमित नहीं थी, बल्कि बिहार के सामाजिक ताने-बाने और सामुदायिक विश्वास को मजबूती देने की एक पहल भी थी.

     नीतीश कुमार के लंबे शासनकाल को लेकर आम राय यही रही है कि अल्पसंख्यक समुदाय—विशेषकर ईसाई—खुद को सुरक्षित और संरक्षित महसूस करते हैं। लेकिन सुरक्षा और विश्वास का यह वातावरण तभी पूर्ण माना जाएगा, जब प्रतिनिधित्व भी समान गति से आगे बढ़े. ईसाई समुदाय की यह अपेक्षा कि उन्हें बिहार विधान परिषद में उचित प्रतिनिधित्व मिले, बिल्कुल न्यायसंगत और लोकतांत्रिक कल्पना के अनुरूप है.

      इसी तरह, बिहार अल्पसंख्यक आयोग में ईसाई समुदाय की भागीदारी लगभग समाप्तप्राय है—जो न केवल असंतुलन का संकेत है, बल्कि शासन की सर्वसमावेशी प्रतिबद्धता के विपरीत भी जाता है.जनादेश भले ही व्यापक हो, लेकिन विकास और विश्वास का समीकरण तब ही संतुलित बनता है जब हर समुदाय को अपने अनुभव, अपनी समस्याएँ और अपना दृष्टिकोण साझा करने का संवैधानिक मंच मिलता है.

      नई सरकार के सामने चुनौती नहीं, बल्कि अवसर है कि वह इस प्रतिनिधित्वहीनता को दूर करे. यदि मुख्यमंत्री यह पहल करते हैं, तो यह कदम न केवल बिहार के ईसाई समुदाय के लिए आश्वस्ति का संदेश होगा, बल्कि राज्य की सामाजिक समरसता को और मजबूत करने वाला ऐतिहासिक निर्णय भी साबित होगा.

     आखिरकार, एक प्रगतिशील लोकतंत्र की पहचान ही यही है—जहाँ मुलाकातें प्रतीक नहीं, बदलाव की शुरुआत बनें.​


आलोक कुमार

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बुधवार, 10 दिसंबर 2025

अधिकारियों को तेजी से कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया

 पटना. माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने आज 1 अणे मार्ग स्थित 'संकल्प' में प्रगति यात्रा के दौरान घोषित विकास योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा की और अधिकारियों को तेजी से कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया.

समीक्षा के दौरान माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2024 के दिसंबर एवं 2025 के जनवरी-फरवरी माह में मैंने प्रगति यात्रा के दौरान सभी जिलों में जाकर विकास कार्यों को देखा था। यात्रा के दौरान जो लोगों का फीडबैक मिला और जमीनी स्तर पर मुझे जो कमी दिखी उसे पूरा करने के लिए 430 नई योजनाओं की स्वीकृति दी गई, जिस पर 50 हजार करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे.उन्होंने कहा कि सभी 38 जिलों से संबंधित इन योजनाओं की लगातार समीक्षा करते रहें और कार्यों को तेजी से पूर्ण करने के लिए इसका सतत अनुश्रवण करते रहें। सभी विभाग लंबित योजनाओं पर तेजी से काम करते हुए शीघ्र पूरा करें.

माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए हम लोग लगातार प्रयत्नशील हैं. राज्य के सभी क्षेत्रों और सभी वर्गों के विकास के लिए योजनाबद्ध ढंग से काम किया जा रहा है.लोगों के उत्थान के लिए जो योजनाएं बनाई गई हैं उस पर पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करें.हम सभी चाहते हैं कि बिहार देश के 05 अग्रणी विकसित राज्यों में शामिल हो.


आलोक कुमार


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