मिली जानकारी के अनुसार जुलाई, 2022 में अल्पसंख्यक विद्यालय में शिक्षक नियुक्ति को लेकर हुटार गांव के ग्रामीणों के साथ रजत एक्का का काफी विवाद हुआ था.मामला इतना बढ़ गया कि ग्रामीणों ने फादर को जान से मारने की धमकी दे डाली थी. इसके बाद फादर के भाई ने डुमरी थाना में मामला दर्ज कराया था.
आलोक कुमार हूं। ग्रामीण प्रबंधन एवं कल्याण प्रशासन में डिप्लोमाधारी हूं। कई दशकों से पत्रकारिता में जुड़ा हूं। मैं समाज के किनारे रह गये लोगों के बारे में लिखता और पढ़ता हूं। इसमें आप लोग मेरी मदद कर सकते हैं। https://adsense.google.com/adsense/u/0/pub-4394035046473735/myads/sites/preview?url=chingariprimenews.blogspot.com chingariprimenews.com
शनिवार, 28 अक्टूबर 2023
हत्या और आत्महत्या की गुत्थी सुलझाने में लगी है पुलिस
मिली जानकारी के अनुसार जुलाई, 2022 में अल्पसंख्यक विद्यालय में शिक्षक नियुक्ति को लेकर हुटार गांव के ग्रामीणों के साथ रजत एक्का का काफी विवाद हुआ था.मामला इतना बढ़ गया कि ग्रामीणों ने फादर को जान से मारने की धमकी दे डाली थी. इसके बाद फादर के भाई ने डुमरी थाना में मामला दर्ज कराया था.
शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2023
बेडसोर होने का खतरा
पीछे की जोड़ की हड्डी टूट गयी
बेतिया.किसी ईसाई व्यक्ति की मौत होने पर कमलनाथ नगर में स्थित बेतिया कब्रिस्तान में ईसाई धर्म रीति के अनुसार दफन किया जाता है.इसी कब्रिस्तान के नुक्कड़ पर आल्फ्रेड जोवाकिम रहते हैं.गिर जाने हड्डी तोड़वा बैठा है.वह घातक बेडसोर से पीड़ित है.
बता दें कि त्वचा पर लंबे समय तक दबाव के कारण त्वचा और उसके नीचे मौजूद ऊतकों को नुकसान हो रहा है.बेडसोर होने का खतरा ज़्यादातर उन लोगों को होता है जो अपनी स्थिति के कारण अपने शरीर को ज़्यादा चला नहीं पाते और लंबे समय तक एक ही अवस्था में रहते हैं.इसका शिकार बदनसीब आल्फ्रेड जोवाकिम हो गया है.वह किसी मसीहा की तलाश में ऐसी अवस्था से उबार दें.एक पर नजर है.वह परोपकारी संस्था संत विंसेंट डी पौल ही है.
फिलहाल यह बताया जाता है कि राजधानी पटना स्थित मरियम टोला से आकर बेतिया पल्ली में आल्फ्रेड जोवाकिम रहने लगा है.वह यहां ठेला चलाने का धंधा करता है.कम आमदनी होने के कारण आल्फ्रेड की धर्मपत्नी से संबंध विच्छेद है.
कहा जाता है कि वह एक दिन लड़खड़ा कर गिर गया था.धरती पर धड़ाम से गिर जाने के बाद हड्डी तोड़वा बैठा है. पीछे की जोड़ की हड्डी टूट गयी है.गरीबी के दलदल में रहने के कारण चिकित्सा नहीं करवा सक रहा है.एक लोकधर्मी के द्वारा निर्मित संत विंसेंट डी पौल समाज के यहां एरिया काउंसिल स्थापित है.इस एरिया काउंसिल का अध्यक्ष रंजीत केरोबिन है.जो हर संस्था/संगठन में ससम्मान शामिल रहते है.
बता दें कि एक विंसेंटियन होने के नाते एरिया काउंसिल का अध्यक्ष रंजीत केरोबिन होम विजिट करना अनिवार्य है.इसमें हॉस्पिटल और जेल भी शामिल है.संत विंसेंट डी पौल समाज के पटना सेंट्रल काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष सुशील लोबो ने दूरभाष पर बताया कि कमलनाथ नगर में स्थित कब्रिस्तान के नुक्कड़ पर रहने वाले पीड़ित आल्फ्रेड जोवाकिम के घर जाकर आवेदन लिख कर संत विंसेंट डी पौल समाज के उच्चतर अधिकारियों के पास आवेदन भेजना चाहिए.इस बीच एरिया काउंसिल को त्वरित कार्रवाई कर आल्फ्रेड जोवाकिम की जिंदगी बचानी चाहिए.
आल्फ्रेड जोवाकिम का पीछे की जॉइंट बोन की हड्डी टूटी है.लगातार बिस्तर पर लेटे रहने से बेडसोर हो गया है.आसपास के लोग मानवता के नाते पीड़ित की जान बजाने का आग्रह कर रहे है.बारम्बार चर्च के नाम पर चंदा देने वाले बेतिया भक्तगण चंदा करके हड्डी टूटे व बेडसोर से पीड़ित को सामान्य जिंदगी जीने लायक बना पाएंगे?यह तो कल ही पता चल जाएगा.
गुरुवार, 26 अक्टूबर 2023
23 वर्षों से श्रीबाबू की जयंती समारोह की तरह मनाते रहे
सदाकत आश्रम में मना श्रीबाबू का जयंती महासमारोह
पटना। आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बना जब इसके प्रांगण में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 136वीं जयंती पहली बार मनाई गयी। बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह विगत 23 वर्षों से श्रीबाबू की जयंती समारोह की तरह मनाते रहे हैं।
इस बार जयंती को महासमारोह की तरह मनाया गया। इसकी खासियत यह रही कि डा0 अखिलेश पहली बार प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से यह जयंती मना रहे थे। वहीं बिहार की पहली कांग्रेसी सरकार के मुखिया रहे डा0 श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पहली बार कांग्रेस मुख्यालय के प्रांगण में मनायी गयी। पूरे प्रदेश से आये लगभग बारह हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं से खचाखच भरा सदाकत आश्रम का परिसर आज अलग दिख रहा था। राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने इसका उद्घाटन किया एवं सुमिरन जी महाराज ने दीप प्रज्वलित कर इसका शुभारंभ किया। राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी समारोह के मुख्य अतिथि थे। पार्टी हाईकमान की ओर से राष्ट्रीय महासचिव तारिक अनवर एवं राष्ट्रीय सचिव अजय कपूर इसमें शामिल हुए।
डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि जब वे पहली बार वर्ष 2000 में विधायक चुन कर आये थे तो लालू यादव ने उन्हें श्रीबाबू की जयंती मनाने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने कहा कि श्रीबाबू आधुनिक बिहार के निर्माता थे जो उद्योग, कृषि, सिंचाई और शिक्षा के क्षेत्र में अपने कृत्य से इतिहास को अभिभूत कर दिया। जब वे मुख्यमंत्री थे तो खुद देवघर के वैद्यनाथ मंदिर में खड़ा होकर दलितों का प्रवेश कराया। इसके अलावा जमींदारी प्रथा का उन्मूलन किया जबकि प्रदेश के ज्यादातर जमींदार उनके स्वजाति थे लेकिन श्रीबाबू को दो पल भी नहीं लगा बंचितों को उनका हक दिलवाने में।
राजद प्रमुख लालू यादव ने अपने चीर-परिचित अंदाज में केन्द्र की भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने भाजपा हटाओ देश बचाओ का नारा देते हुए विश्वास जताया कि भाजपा का सूपड़ा साफ होने वाला है इसलिए वह बौखलाई हुई है। 15-15 लाख का झाँसा देकर सबका एकाउन्ट बैंक में खोलवा दिया उसके बाद पैसा गायब। यह झूठों की सरकार है और इसको भगना ही होगा।
मुख्य अतिथि के तौर पर भाग ले रहे प्रमोद तिवारी ने भी भाजपा सरकार को ईस्ट इंडिया कंपनी से तुलना करते हुए इसके शासन की बुराइयों पर प्रहार किया। तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार ईस्ट इंडिया कंपनी की तर्ज पर काम कर रही है। और इसके चंगुल से देश को आजाद कराना हमारी प्राथमिकता है। भारत को एक बार फिर आजाद करने की जरूरत है। समारोह में मंच का संचालन विधान पार्षद डा0 समीर कुमार सिंह ने किया।
आज के इस महासमारोह में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व मंच पर मौजूद था जिनमें प्रमुख हैं-कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव तारिक अनवर, बिहार के सह प्रभारी अजय कपूर, कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता शकील अहमद खान, पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार, पूर्व अध्यक्ष मदन मोहन झा, मंत्री मुरारी गौतम, अफाक आलम, पूर्व अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, वीणा शाही, विश्व मोहन शर्मा, ब्रजेश पांडेय, विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्र, डा0 अशोक कुमार, निर्मल वर्मा, कौकब कादरी, श्याम सुन्दर सिंह धीरज, नरेन्द्र कुमार, लाल बाबू लाल, मुन्ना तिवारी, अजित शर्मा, अजय कुमार सिंह, आनन्द शंकर, बिजेन्द्र चौधरी, छत्रपति यादव, नीतू सिंह, राजेश कुमार, जादुर रहमान, संतोष मिश्र, विश्वनाथ राम, बंटी चौधरी, नरेन्द्र कुमार, मनोज कुमार सिंह, कपिलदेव प्रसाद यादव, मदन मोहन तिवारी, प्रमोद कुमार सिंह, डॉ. अजय कुमार सिंह, पूनम पासवान। इसके अलावा प्रदेश के सभी जिलाध्यक्ष व प्रखंड अध्यक्ष अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे।
आलोक कुमार
आलोक कुमार
मंगलवार, 24 अक्टूबर 2023
बिहार विभूति डा0 श्रीकृष्ण सिंह की 136वीं जयंती 26 अक्टूबर को पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में
इस बार श्रीबाबू की जयंती होगी ऐतिहासिक : डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह
पटना। बिहार विभूति डा0 श्रीकृष्ण सिंह की 136वीं जयंती 26 अक्टूबर को पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में मनायी जायेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि इस बार श्रीकृष्ण बाबू की जयंती शानदार ढंग से मनाया जाएगा.
उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रीय जनता दल का विधायक सन् 2000 में बना तो सबसे पहले आरजेडी प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव जी ने डा0 श्रीकृष्ण सिंह की जयंती मनाने के लिए मुझे प्रेरित किया और तब से हर साल इस जयंती को समारोह की तरह मनाता रहा हूँ.
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित प्रेसवार्ता में यह बात कही. मालूम हो कि डा0 श्रीकृष्ण सिंह की 136वीं जयंती इस बार 21 अक्टूबर की जगह 26 अक्टूबर को पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में मनायी जायेगी। पहले यह कार्यक्रम मिलर हाई स्कूल ग्राउण्ड में होना था।
इसके बारे में बताते हुए डा0 सिंह ने कहा कि हम नहीं चाहते थे कि दशहरा पूजा में कोई व्यवधान उत्पन्न हो इसलिए जयन्ती की तारीख आगे बढ़ाई गयी और इसे पार्टी मुख्यालय में आयोजित करने का फैसला लिया गया। डा0 सिंह ने कहा कि चूंकि श्रीबाबू की जयन्ती का आइडिया लालू जी का था इसलिए इसका उद्घाटन वही करेंगे.
उन्होंने आगे कहा कि इस बार इसे ऐतिहासिक रूप में मनाने की योजना है जिसके तहत प्रदेश भर में बैनर, पोस्टर और तोरणद्वार आदि युद्ध स्तर पर लगाये जा रहे हैं।
जयंती समारोह में भाग लेने वाले कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार, राज्यसभा में पार्टी के उपनेता प्रमोद तिवारी एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव तारिक अनवर प्रमुख हैं। इसके अलावा दशहरा के शुभ अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सभी बिहार वासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी.
प्रेसवार्ता के दौरान जो कांग्रेस नेता मौजूद रहे उनमें झारखंड के अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष समशेर आलम, ब्रजेश पाण्डेय, पूनम पासवान, राजेश राठौड़, लाल बाबू लाल, कपिलदेव यादव, विनोद शर्मा, निर्मल वर्मा, चन्द्र प्रकाश सिंह, प्रभात कुमार सिंह, आई0पी0 गुप्ता, संजय यादव, सुमन कुमार मल्लिक, शशिकांत तिवारी, अखिलेश्वर सिंह प्रमुख हैं.
आलोक कुमार
सोमवार, 23 अक्टूबर 2023
स्वतंत्र रूप से बेतिया धर्मप्रांत का निर्माण का 25 साल पूरा
बेतिया क्रिश्चियन कॉलोनी का इतिहास 278 साल पुराना
बेतिया धर्मप्रांत का निर्माण का 25 साल पूरा
बिशप बनने के बाद पहली बार बक्सर के बिशप जेम्स शेखर बेतिया में
बेतिया. बेतिया क्रिश्चियन कॉलोनी में क्रिश्चियन को बसाने में फादर जोसेफ मेरी को पूर्ण श्रेय जाता है.फादर जोसेफ मेरी के द्वारा बेतिया चर्च की स्थापना की गई.इस चर्च का नाम ‘नेटिविटी ऑफ दी ब्लेस्ड वर्जिन मेरी‘ है.बेतिया क्रिश्चियन कॉलोनी का इतिहास 278 साल पुराना है.वहीं स्वतंत्र रूप से बेतिया धर्मप्रांत का निर्माण का 25 साल पूरा हो गया है. फादर जोसेफ मेरी नामक ईसाई धर्म पुरोहित के बारे में बताया जाता है कि वे रोम से तिब्बत तक का सफर को पैदल ही तय किया था, क्योंकि तिब्बत में ईसाइयों पर काफी जुल्म किया जा रहा था, वहां मिलने के लिए नेपाल के रास्ते फादर जोसेफ मेरी काफी मुश्किलों का सामना करते हुए पहुंचे. 20 अप्रैल 1745 को तिब्बत मिशन बंद करना पड़ा और 1745 में पाटन, नेपाल पहुंचे.राजा ध्रुव सिंह के शासन काल 1715 से 1762 ईस्वी है, इन्हीं के समय में फादर जोसेफ मेरी जिनके द्वारा बेतिया चर्च की स्थापना की गई, 7 दिसंबर 1745 को इनके बेतिया आने का प्रमाण मिलता है.
बताया गया कि पुराना गिरजाघर खाली जमीन पर स्थित था .सन 1934 के भूकंप में बेतिया की करीब-करीब सभी बड़ी पुरानी इमारतें तबाह हो गई ,जिनमें बेतिया अस्पताल, बेतिया राज इमामबाड़ा, महाराजा लाइब्रेरी, एवं कैथोलिक चर्च भी तबाह हो गया, अभी जो यह चर्च का बड़ा सा रूप देख रहे हैं वास्तव में 1934 के बाद 21 नवंबर 1949 को यह भव्य चर्च आपके सामने दोबारा बना.
यह कैथोलिक चर्च सामने बनाया गया !यहां पर बनाया गया चंद वर्ष पूर्व तक इस चर्च में लोगों को मुफ्त दवाएं दी जाती रही हैं. यह चर्च पूरे चंपारण में होम्योपैथिक के मुफ्त चिकित्सा का केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है.सर्वज्ञात है कि प्रारंभ में विदेशी पुरोहितों का दबदबा रहा है.सभी उच्च पदों पर शोभा बढ़ाते थे.इस बीच पटना धर्मप्रांत के बिशप अगस्टीन वाइल्डरमुथ एसजे ने पोप जॉन पॉल द्वितीय के पास अपना इस्तीफा प्रेषित कर दिया.जिसे पोप ने बिशप ऑगस्टीन वाइल्डरमुथ एसजे का इस्तीफा 28 मार्च 1980 को स्वीकार कर लिया.पोप बेनेडिक्ट 15 ने क्रांतिकारी कदम उठाया. 10 सितंबर 1919 को इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग कर पटना धर्मप्रांत बना दिया.
पोप जॉन पॉल द्वितीय ने 28 मार्च 1980 को ही पटना धर्मप्रांत और मुज़फ़्फ़रपुर धर्मप्रांत बनाने की घोषणा कर दी.उसके पहले भारतीय बिशप के रूप पटना धर्मप्रांत के प्रथम बिशप बेनेडिक्ट जे ओस्ता एसजे को और मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के प्रथम बिहारी बिशप के रूप में जौन बापतिस्ट ठाकुर को 6 मार्च 1980 को घोषित कर दिया.पटना धर्मप्रांत के प्रथम बिशप के रूप में बेनेडिक्ट जे ओस्ता ने 21 जून 1980 को विधिवत बिशप के रूप में अभिषेक हुआ.उसी तरह मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के प्रथम बिहारी बिशप के रूप में जौन बापतिस्ट ठाकुर का बिशप अभिषेक 24 जून 1980 को हुआ.मालूम हो कि 16 मार्च 1999 में पटना धर्मप्रांत को एक महाधर्मप्रांत के रूप में पदोन्नत किया गया था.इस महाधर्मप्रांत में बेतिया, भागलपुर, बक्सर, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया शामिल है. इस बीच मुज़फ़्फ़रपुर धर्मप्रांत को विभक्त कर बेतिया धर्मप्रांत 27 जून 1998 को सृजित किया गया. बेतिया धर्मप्रांत के लोकल कलीसिया चखनी पल्ली के विक्टर हेनरी ठाकुर को बिशप बनाया गया. बेतिया धर्मप्रांत के बिशप विक्टर हेनरी ठाकुर 27 जून, 1998 से 3 जुलाई, 2013 तक रहे. उसके बाद भागलपुर धर्मप्रांत के विकर जनरल पीटर सेबेस्टियन गोवेस को 22 जुलाई 2017 को बेतिया धर्मप्रांत का बिशप बनाया गया.
आज सोमवार को बेतिया धर्मप्रांत का सिल्वर जुबली 9ः30 बजे से समारोही मिस्सा के साथ प्रारंभ हुआ.बेतिया धर्मप्रांत का कैथेड्रल का नाम नेटिविटी ऑफ दी ब्लेस्ड वर्जिन मेरी है समारोही में मिस्सा में विभिन्न धर्मप्रांतों के 6 बिशप शामिल हुए.मेजमान बेतिया धर्मप्रांत के बिशप सेबेस्टियन पीटर गोवेस, मुजफ्फरपुर काजीटेन फांसिस ओस्ता, भागलपुर के बिशप कुरियन वलियाकंदथिल, बक्सर जेम्स शेखर, रायपुर महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप विक्टर हेनरी ठाकुर और एमेरिटस आर्चबिशप विलियम डिसूजा थे. अभी तक पूर्णिया धर्मप्रांत में बिशप नियुक्त नहीं किये गए है.
इस समारोह के मुख्य बात रही कि बेतिया के लोकनायक फादर जोसेफ मेरी व फादर आजिलो के मूर्ति का अनावरण किया गया. समारोह के समापन पर डेढ़ हजार की संख्या में फादर, सिस्टर एवं लोक धर्मियों का प्रतिभोज का आनंद लिये.
आलोक कुमार
विभिन्न प्रखंडों में घूम घूम कर निरीक्षण किया
हिलसा । दुर्गापूजा के अवसर पर जिला में विधि व्यवस्था सामान्य बनाये रखने एवं भीड़ प्रबंधन व्यवस्था का जायजा लेने जिलाधिकारी श्री शशांक शुभंकर ने पुलिस अधीक्षक श्री अशोक मिश्रा के साथ विभिन्न प्रखंडों में घूम घूम कर निरीक्षण किया।
अधिकारी द्वय ने विभिन्न पूजा पंडालों के साथ साथ विभिन्न निर्धारित विसर्जन स्थलों का निरीक्षण किया।
इस अवसर पर सामान्य विधि व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन एवं विसर्जन स्थल पर व्यवस्था को लेकर स्थानीय पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया।
उन्होंने इसलामपुर के हनुमानगंज स्थित सिद्ध पीठ बड़ी देवी मंदिर एवं छोटकी ओंगारी (बूढ़ानगर सूर्य मंदिर तालाब) विसर्जन घाट का निरीक्षण किया।इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी हिलसा, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी हिलसा सहित अन्य स्थानीय पदाधिकारी उपस्थित थे।
आलोक कुमार
रविवार, 22 अक्टूबर 2023
प्रत्येक साल खदानों की माता के आदर में ढोरी माता तीर्थस्थल
चमत्कारी ढोरी माता मरियम का वार्षिक समारोह
प्रत्येक साल खदानों की माता के आदर में ढोरी माता तीर्थस्थल, खदानों में गरीब मजदूरों के प्रति माता मरियम की चिंता और खासकर, मजदूरों के कल्याण के लिए उनकी शक्तिशाली मध्यस्थता का प्रतीक है...
कथारा.हजारीबाग धर्मप्रांत के जारंगडीह में संत अंथोनी चर्च है.कोयला खदानों की चमत्कारी ढोरी माता मरियम का वार्षिक समारोह शुक्रवार 20 अक्टूबर को झंडोत्तोलन एवं नोवेना के साथ शुरू की गई.हजारीबाग धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो ने माता मरियम के सम्मान में झंडोत्तोलन किया तथा मिस्सा बलिदान के द्वारा नोवेना की शुरूआत की. भक्तिपूर्वक रोजरी प्रार्थना करते हुए विश्वासियों ने भारी संख्या में माता मरियम का झंडा लिये हुए नोवेना के पहले दिन में भाग लिया.शुक्रवार के बाद शनिवार को नोवेना में शामिल होने के बाद तीसरे तीन श्रद्धा के साथ श्रद्धालु रविवार को नोवेना में शामिल होंगे.
जारंगडीह स्थित ढोरी माता तीर्थालय जारंगडीह में वार्षिक समारोह झंडोत्तोलन व नोवेना प्रार्थना के साथ शुक्रवार को प्रारंभ कर दिया गया. मुख्य अनुष्ठाता हजारीबाग धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो ने आशीष व प्रार्थना कर झंडोत्तोलन किया. तीर्थालय के पल्ली पुरोहित फादर माइकल लकड़ा, फादर विनोद लकड़ा व फादर विनय किंडो मुख्य रूप से मौजूद थे.
धर्माध्यक्ष आनंद जोजो ने इस अवसर पर अपने संदेश में कहा, “आज हम ढोरी माता पर्व 2023 का शुभारंम्भ कर रहे हैं और इसके तहत नोवेना प्रार्थना भी शुरू कर रहे हैं. ढोरी माता के नाम पर हम झंडोत्तोलन कर रहे हैं. हम प्रार्थना करें कि ढोरी माता की ख्याती और उनके द्वारा आशीर्वाद ...दूर-दूर तक पहुँचे. जो लोग माता मरियम के नाम पर यहाँ आयेंगे उन्हें उनके पुत्र येसु का आशीर्वाद मिले. उनके मन, दिल और हृदय का परिवर्तन हो.वे बेहतर मानव बन सकें. और साथ ही साथ, इस क्षेत्र में जितने भी लोग हैं, दीन, दुःखी और गरीब तबके के लोग, जो कई प्रकार के दुःखों और पीड़ा में हैं सबों को माता मरियम शरण दे. उनका दुःख सुने और सबों को आराम दे, उनके दुःखों को हटा दे और उनका जीवन सुन्दर, पवित्र और समृद्ध बन जाए. हम पूरे देश के लिए भी प्रार्थना करते हैं कि हम सब के सब मित्र भाव से एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की महानता को बरकरार रखते हुए इस देश को हम उन्नति के शिखर की ओर ले चलें.”
इसके बाद पवित्र मिस्सा का अनुष्ठान धर्माध्यक्ष आनंद जोजो ने पूरा किया.नौ दिनों तक आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन संध्या 4 बजे नोवेना प्रार्थना इसके बाद मिस्सा पूजा का आयोजन किया जायेगा. 28 अक्टूबर को देर दोपहर तीन बजे शोभा यात्रा यात्रा इसके बाद मिस्सा पूजा अनुष्ठान फादर बिशु बेंजामिन आइंद खूंटी धर्मप्रांत के वीजी के द्वारा किया जायेगा. वहीं 29 अक्टूबर को सुबह दस बजे समारोही मिस्सा पूजा का आयोजन होगा. जिसके मुख्य याजक हजारीबाग धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो होंगे.
ढोरी माता को कोयला खनिकों की संरक्षिका माना जाता है
ढोरी माता को कोयला खनिकों की संरक्षिका माना जाता है.उनकी प्रतिमा बेरमो कोयलांचल के जारंगडीह के ढोरी माता तीर्थालय में स्थापित है, जो मसीही धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र है. यही कारण है कि ढोरी माता के प्रति अगाध श्रद्धा के कारण प्रतिवर्ष अक्टूबर माह के अंतिम शनिवार एवं रविवार को होने वाले वार्षिकोत्सव में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु यहां मन्नत मांगने जुटते हैं. सीसीएल कामगारों के लिए भी ढोरी माता रक्षा कवच हैं. यहां ईसाइयों के अलावा दूसरे संप्रदाय के लोग भी माथा टेकते हैं.
ढोरी खदान से निकली थी प्रतिमा
विगत 12 जून 1956 को एक हिदू खनिक रूपा सतनामी को ढोरी खदान से कोयला काटने के क्रम में एक मूर्ति मिली थी, जो बाद में ढोरी माता के नाम से प्रसिद्ध हुई. वर्ष 1957 के अक्टूबर माह में फादर अलबर्ट भराकन की अगुवाई में ढोरी माता की मूर्ति जारंगडीह स्थित संत अंथोनी गिरजाघर में रखी गई. फादर बेतरम हेबर्ट लॉट के नेतृत्व में उक्त मूर्ति को गिरजाघर से बाहर लाकर वर्ष 1964 में तीर्थालय में स्थापित किया गया.
वर्ष 2006 में मनाई गई स्वर्ण जयंती
वर्ष 1956 में ढोरी माता की मूर्ति मिलने के 25 वर्ष पूरे होने पर रजत जयंती वर्ष 1981 में मनायी गई थी.ढोरी माता की मूर्ति मिलने के 50 वर्ष पूरे होने पर वर्ष 2006 में स्वर्ण जयंती समारोह आयोजित किया गया. ढोरी माता की मूर्ति के बारे में पुरातत्वविदों का मत है कि उसकी बनावट भारतीय शैली की नहीं है और यह पुर्तगाली या फ्रांसीसी शैली से बनी है. वर्तमान में ढोरी माता का वार्षिकोत्सव भव्य रूप ले चुका है.
ढोरी माता तीर्थालय का इतिहास
*वर्ष 1965 में रांची धर्मप्रांत के पीयूष केरकेट्टा ने पहली बार ढोरी माता के पास विनती की एवं नोवेना प्रार्थना की रचना की.
* वर्ष 1969 के अप्रैल माह में प्रशांत महासागर के पश्चिमी सीमा स्थित द्वीप के अजिया शहर से एक धन्यवाद पत्र आया, जिसमें फादर ए फिलिप तारसियुल की ओर से ढोरी माता के बारे में जानकारी दी गई.
* वर्ष 1971 में डालटेनगंज धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष जौर्ज सोपेन ने अपना पहला धर्माध्यक्षीय पवित्र मिस्सा बलिदान ढोरी माता को अर्पित किया था.
* वर्ष 1983 में ढोरी माता का भव्य एवं आकर्षक तीर्थालय भवन बनकर तैयार हुआ.
आलोक कुमार
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कौवाकोल.नवादा जिले के प्रखंड कौवाकोल के आदर्श उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सोखोदेवरा में बाल संसद का गठन किया गया है.यहां बिहार वाटर डेवलपमेंट स...
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