बुधवार, 17 सितंबर 2025

समाज के अंतिम पायदान के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए


  बेतिया .मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने आज 1, अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत 16,04,929 निबंधित निर्माण श्रमिकों के खाते में वार्षिक वस्त्र सहायता योजना अंतर्गत उत्क्रमित सहायता राशि ₹5000 प्रति निर्माण श्रमिक की दर से कुल ₹802 करोड़ 46 लाख 45 हजार रुपये का अंतरण किया.

इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री जी ने ‘मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना’ के वेब पोर्टल का भी शुभारंभ किया.

        मुख्यमंत्री जी ने कहा कि समाज के अंतिम पायदान के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है. बिहार आज विभिन्न क्षेत्रों में तरक्की के नए आयाम छू रहा है, जिसमें हमारे श्रमिक भाई-बहनों का अतुलनीय योगदान है.उनके कल्याण और विकास के लिए सरकार सतत प्रयासरत है.उन्होंने श्रम संसाधन विभाग को निर्देश दिया कि अभियान चलाकर छूटे हुए सभी श्रमिक भाई-बहनों का निबंधन कर उन्हें इस योजना से जोड़ा जाए और इसका लाभ दिया जाए.


आलोक कुमार

मंगलवार, 16 सितंबर 2025

जिले में 32 लाख दवा खिलाने का रखा गया है लक्ष्य

 



डीएम ने बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाकर  राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की शुरुआत की

* जिले में 32 लाख दवा खिलाने का रखा गया है लक्ष्य

* खाली पेट दवा नहीं खिलाएं,हल्का साइड इफेक्ट हो तो घबराने की आवश्यकता नहीं - डीएम

* छूटे हुए बच्चों के लिए 19 सितंबर को चलेगा मॉप-अप दिवस

मोतिहारी. मोतिहारी शहर के गाँधी चौक स्थित हीरालाल साह मध्य विधालय स्कुल से जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाकर "राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस" की शुरुआत की. इस अवसर पर डीसीएम नंदन झा ने कहा कि जिले में 32 लाख दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है.उन्होंने बताया की सभी को खाली पेट दवाए नहीं खिलाएं,हल्का साइड इफेक्ट हो तो घबराने की आवश्यकता नहीं है वहीं,छूटे हुए बच्चों के लिए 19 सितंबर को चलेगा मॉप-अप दिवस मनाया जाएगा.

          मौके पर डीएम ने कहा कि जिले के सरकारी, प्राइवेट स्कूल एवं आँगनबाड़ी केन्द्रो में बच्चों को पेट के कृमि से बचाव के लिए एल्बेण्डाजोल की दवा खिलाई जाती है ताकि बच्चे कृमि रोगों से सुरक्षित हो सके.जिले के डीआईओ डॉ एस सी शर्मा ने बताया की 01 से 19 वर्ष तक के बच्चों को अलग अलग डोज के अनुसार दवा का सेवन आशा व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के देख रेख में कराया जाता है.किसी-किसी बच्चे में  दवा खाने से हल्का- फुल्का साइड इफेक्ट होता है इससे घबराएं नहीं. जिला एवं प्रखंड स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम की व्यवस्था की गयी है. हल्का साइड इफेक्ट का मतलब है कि आपके शरीर का कीड़ा समाप्त हो रहा है.उन्होंने सभी अभिभावकों से सभी बच्चों को कृमि की दवा खिलवाने की अपील की. दवा खिलाने से पहले इस बात का ध्यान रखना है कि बच्चा पूर्णतः स्वस्थ हो एवं खाली पेट न हो.

            मौके पर सिविल सर्जन डॉ रविभूषण श्रीवास्तव,सदर पीएचसी प्रभारी डॉ दिलीप कु शाही,  महामारी पदाधिकारी डॉ राहुल राज, डीसीएम नंदन झा, अभिजीत आनंद,यूनिसेफ़, डब्लूएचओ, पिरामल, यूनिसेफ़, सिफार,सी 3,  डिस्टिक लिड, वार्ड पार्षद राधना कुमारी, प्रधानाध्यापिका पूनम कुमारी, शिक्षक गण व अन्य लोग उपस्थित थे.


आलोक कुमार

सोमवार, 15 सितंबर 2025

पोप लियो ने जैसे ही जन्मदिन का केक काटा

 पोप लियो ने जैसे ही जन्मदिन का केक काटा 


वाटिकन . संत पॉल महागिरजाघर की संध्या—जहाँ शहीदों की स्मृतियों अभी-अभी श्रद्धा की लौ में झिलमिला रही थीं—अचानक उल्लास और प्रार्थना की गूंज से भर उठी. पोप लियो ने जैसे ही जन्मदिन का केक काटा और उपस्थितों ने "हैप्पी बर्थडे" का गीत छेड़ा, वहाँ एक अनोखा संगम जन्मा—श्रद्धा और सरल मानवीय आनंद का.कार्डिनलों की गोष्ठी और विश्वासियों की उपस्थिति में पोप ने उस क्षण को साधारण उत्सव से कहीं आगे बढ़ा दिया. जब उन्होंने कहा—“मेरी इच्छा नहीं, प्रभु, केवल आपकी इच्छा पूरी हो”—तो लगा मानो जन्मदिन की मोमबत्तियाँ केवल उनकी उम्र का नहीं, बल्कि उनकी आस्था का भी प्रतीक बनकर जल रही हों.क्रूस विजय पर्व की पृष्ठभूमि में यह जश्न और भी गहरा हो उठा. यहाँ जन्मदिन केवल उम्र का पड़ाव नहीं था, यह उस पुकार की याद थी जो जीवन को ईश्वर की योजना के हाथों सौंपने से शुरू होती है.जब संत पापा महागिरजाघर से बाहर निकले और भीड़ का अभिवादन किया, तो वह क्षण एक दीपशिखा-सा था—आस्था की ज्वाला और मानवीय उल्लास का संगम। वास्तव में, यह केवल उत्सव नहीं, बल्कि एक शम्मा था—जो अंधेरे में रोशनी और थके मन को सांत्वना देती है.

आलोक कुमार


रविवार, 14 सितंबर 2025

भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह विकेट के शतक से मात्र 1 कदम दूर

 भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह विकेट के शतक से मात्र 1 कदम दूर


नई दिल्ली. भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इतिहास रचने के बेहद करीब हैं. वह अब तक 99 विकेट ले चुके हैं और जैसे ही अगला विकेट लेंगे, भारत के पहले गेंदबाज बन जाएंगे जिन्होंने टी20 में 100 विकेट पूरे किए .अर्शदीप सिंह ने अभी तक खेले 63 मैचों में 18.30 के औसत और 8.29 की इकॉनमी के साथ सर्वाधिक 99 विकेट चटकाए हैं.वह विकेट के शतक से मात्र 1 कदम दूर है.     
      एशिया कप टूर्नामेंट में भारत का मैच दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जा रहा है.भारत अपना पहला मैच यूएई से और दूसरा मैच चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से खेला गया.इस मैच में अर्शदीप अपना शतक पूरा कर सकते थे अगर बाएं हाथ का  गेंदबाज एक विकेट लेता है तो वह टी20 इंटरनेशनल में 100 विकेट हथिया लेता.इन दोनों मैचों में अभी तक 63 मैचों में 99 विकेट ले चुके अर्शदीप सिंह को टीम 11 में चयन नहीं किया गया.विकेट का शतक पूरा करने में विलम्ब होने से अर्शदीप सिंह के फैंस नाराज होने लगे हैं.ऐसा समझा जा कहा है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ तैंतीस का नहीं छत्तीस का रिश्ता बन गया है.       
        कुछ लोग समझ रहे है कि विकेट का शतक पूरा करने में हो रही देरी के कारण अर्शदीप सिंह के प्रशंसक निराश नहीं हुए हैं, बल्कि उनके इतिहास रचने के बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बनने वाले हैं. भले ही उन्हें एशिया कप के पहले और दूसरे मैच में खेलने का मौका नहीं मिला हो.       
      अब भारत का तीसरा मैच 19 सितंबर को ओमान से है.अब तीसरा मैच ओमान के खिलाफ होने वाले मैच में उनके पास यह मील का पत्थर पूरा करने का एक और मौका है, जो उनके फैंस के लिए खुशी की बात होगी. प्रशंसक अर्शदीप सिंह के शतक पूरा करने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी. प्रशंसक अर्शदीप को टी20 इंटरनेशनल में 100 विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बनते देखना चाहते हैं.        
     प्रशंसक अर्शदीप को एक मैच विनर खिलाड़ी के रूप में देखते हैं जो डेथ ओवरों में भारत के लिए ट्रंप कार्ड साबित होते हैं. देरी होने से निरोत्साहित हो रहे है.अर्शदीप सिंह अभी तक 63 मैचों में 99 विकेट ले चुके हैं.एशिया कप 2025 के शुरुआती मैच में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन अभी भी उनके पास एक विकेट लेते ही 100 विकेट का आंकड़ा पूरा करने का मौका है.

आलोक कुमार


शनिवार, 13 सितंबर 2025

बिहार की नई चुनावी जमीन

रेवड़ी बनाम परिवार लाभ कार्ड : बिहार की नई चुनावी जमीन

 

बेतिया . दिल्ली में जब अरविंद केजरीवाल ने जनता को राहत देने वाले पैकेजों की घोषणा की थी, तो विपक्ष ने उन्हें “रेवड़ी बांटने” का नाम दिया था. उस दौर में हर मंच से यह सवाल उठाया गया कि जनता को मुफ्त योजनाओं के जरिए “लुभाना” लोकतंत्र के लिए कितना सही है. लेकिन विडंबना देखिए, वही “रेवड़ी राजनीति” अब बिहार की गलियों और चौपालों में खुलकर खेले जाने लगी है.
इस बार केंद्र में हैं प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी। उन्होंने अपने अभियान में “परिवार लाभ कार्ड” का पत्ता खोला है.इस कार्ड के तहत पाँच बड़े वादे किए गए हैं—शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, रोजगार और प्रत्यक्ष आर्थिक सहयोग.अनुमान लगाया जा रहा है कि एक परिवार को सालाना लगभग 20 हज़ार रुपये का लाभ मिल सकता है.
बेतिया से लेकर गाँव-कस्बों तक पार्टी के संस्थापक सदस्य गोडेन अंतुनी ठाकुर स्वयं इस कार्ड का पंजीकरण करा रहे हैं. जमीनी राजनीति से जुड़े ठाकुर के पास ग्रामीणों की भीड़ उमड़ रही है और लोग भारी संख्या में फॉर्म भरवा रहे हैं.
यानी, बिहार की राजनीति में अब “पैकेज” शब्द ने नया चेहरा पा लिया है। फर्क इतना है कि दिल्ली में पैकेज को “रेवड़ी” कहकर हंसी उड़ाई जाती थी, और बिहार में वही पैकेज “परिवार लाभ कार्ड” बनकर आकर्षण का केंद्र बन गया है. दिलचस्प यह भी है कि उस समय “रेवड़ी संस्कृति” पर शोर मचाने वाले बयानवीर अब चुप्पी साधे बैठे हैं—जैसे बापू के तीन बंदर.
दरअसल, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है कि क्या जनता के लिए बनाए गए ऐसे पैकेज सिर्फ चुनावी हथकंडा हैं या फिर यह एक सामाजिक सुरक्षा कवच का प्रयास है? बिहार की जनता के सामने चुनावी रेवड़ियां और असली नीतियों का फर्क समझने की चुनौती है.
जन सुराज पार्टी के “परिवार लाभ कार्ड” अभियान से जुड़े बिंदुओं को चुनावी वादों की तरह विस्तार से इस प्रकार लिखा जा सकता है—
जन सुराज पार्टी के परिवार लाभ कार्ड के पांच मुख्य वादे
1. हर परिवार को सालाना आर्थिक सहयोग – एक निश्चित राशि (लगभग ₹20,000 तक) परिवार को सीधे लाभ पहुँचाने का दावा.
2. शिक्षा सहायता – परिवार के बच्चों की पढ़ाई के लिए विशेष आर्थिक पैकेज या छात्रवृत्ति की व्यवस्था.
3. स्वास्थ्य सुविधा – परिवार कार्ड धारकों को मुफ्त इलाज या स्वास्थ्य बीमा योजना से जोड़ने का वादा.
4. महिला सशक्तिकरण – परिवार की महिला मुखिया के खाते में प्रतिमाह सहायता राशि भेजने का प्रस्ताव.
5. कृषि/रोजगार लाभ – छोटे किसानों व बेरोजगार युवाओं को रोजगार या कृषि सहायता पैकेज उपलब्ध कराने का आश्वासन.
पार्टी के संस्थापक सदस्य गोडेन अंतुनी ठाकुर ने कहा कि परिवार लाभ कार्ड मेरे पास आ गया है.मेरे पास पर्याप्त कार्ड उपलब्ध है जो भी माता-पिता,भाई-बहन, विकलांग व बुजुर्ग 60 साल से ऊपर है वह आकर मेरे निवास स्थान क्रिश्चियन क्वार्टर चर्च रोड बेतिया वार्ड न.7 चर्च के पूर्व वाली गली में कल से परिवार लाभ काड P.L.C कार्ड बनाया जाएगा.कार्ड बनवाने के लिए जो भी माता -बहन आएगे वह अपना आधार कार्ड और मोबाइल ले कर आएंगे.
     परिवार मे एक ही आदमी का परिवार लाभ कार्ड बनाया जाएगा,ज्यादा जानकारी लेने के लिए आप मेरे मोबाइल नंबर 7909019652, पर सम्पर्क कर सकते है.सदस्यता शुल्क ₹10 लगेगा .जो आप अपने साथ लेकर आवे धन्यवाद.

आलोक कुमार

शुक्रवार, 12 सितंबर 2025

यूएई के खिलाफ मैच में मौका ही नहीं दिये


 नई दिल्ली . भारतीय गेंदबाज अर्शदीप सिंह है. वह एक मैच विजेता खिलाड़ी हैं. वह 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेट पूरे करने वाले पहले भारतीय बनने के कगार पर है.मुख्य कोच गौतम गंभीर और भारतीय कप्तान ने अर्शदीप सिंह को विकेट के शतक बनाने में व्यवधान डाल दिये.उन्होंने यूएई के खिलाफ मैच में मौका ही नहीं दिये.

       सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली टीम ने यूएई के खिलाफ अपने पहले एशिया कप मुकाबले में इस बाएं हाथ के तेज गेंदबाज को बेंच पर बैठा दिया.जी हां, यह रिकॉर्ड है टी20 इंटरनेशनल में 100 विकेट लेने का.अर्शदीप सिंह ने अभी तक खेले 63 मैचों में 18.30 के औसत और 8.29 की इकॉनमी के साथ सर्वाधिक 99 विकेट चटकाए हैं.वह विकेट के शतक से मात्र 1 कदम दूर है.उसे यूएई के खिलाफ खेलना था और एक विकेट चटकाना था.मगर उसे ऐस करने से रोक दिया गया .अब अर्शदीप सिंह को 14 सितंबर तक इंतजार करना पड़ेगा.वह मौका मिलते ही चीर प्रतिद्ंदी पाकिस्तान के एक विकेट चटकाते ही वह टी20 इंटरनेशनल में 100 विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बन जाएंगे. गौतम गंभीर के रहते अर्शदीप का खेलना नामुमकिन, 1 साल में खेला एक सीरीज, दिग्गज गेंदबाज ने हेड कोच की सोच पर उठाए सवाल

    अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, अर्शदीप का बाहर होना आश्चर्यजनक है, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है. गौतम गंभीर के कोचिंग शुरू करने के बाद से ऐसा होता आ रहा है. अर्शदीप पूरी चैंपियंस ट्रॉफी भी नहीं खेले थे यह एक तरह से एक विषय बनता जा रहा है शायद दुबई की परिस्थितियों को देखते हुए, वे स्पिनरों को तरजीह दे रहे हैं. जब गंभीर ने केकेआर के लिए खिताब जीता था, तब भी वह स्पिन पर पूरी तरह से निर्भर थे. 2025 में अब तक अर्शदीप ने भारत के लिए सिर्फ एक सीरीज खेली है इम्पैक्ट शॉर्ट्स सबसे बड़ी खबरों तक पहुंचने का आपका शॉर्टकट गूगल ही है. जीत का जायका थोड़ा कड़वा लगे तो समझ जाना चाहिए कि कुछ ठीक नहीं हुआ. टी-20 इतिहास में अर्शदीप सिंह से ज्यादा टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने वाला कोई और गेंदबाज नहीं है. 13..23 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से 99 टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेटों के साथ, अर्शदीप 63 मैचों में ही अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. वह एक मैच विजेता खिलाड़ी हैं और बुधवार को, वह 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेट पूरे करने वाले पहले भारतीय बनने के कगार पर थे लेकिन एक चैंकाने वाला घटनाक्रम तब हुआ जब सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली टीम ने यूएई के खिलाफ अपने पहले एशिया कप मुकाबले में इस बाएं हाथ के तेज गेंदबाज को बेंच पर बैठा दिया. अर्शदीप को ना खिलाए जाने पर आर अश्विन ने कोच गौतम गंभीर को जमकर लताड़ा.

पूर्व स्पिनर रविचंद्रन लेकिन हर्षित राणा और मोहम्मद शमी जैसे खिलाड़ियों को उन पर तरजीह दी गई. दिलचस्प बात यह है कि अर्शदीप भारत के पांच टेस्ट मैचों के लंबे इंग्लैंड दौरे का भी हिस्सा थे, लेकिन उन्हें वहां भी जगह नहीं मिल सकी .भारत ने अंशुल कंबोज को टीम में शामिल किया, जो शुरुआती टीम का हिस्सा नहीं थे, लेकिन अर्शदीप को मौका नहीं मिला.

   मौजूदा भारतीय स्क्वॉड में हार्दिक पांड्या एक और ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके नाम 90 से अधिक विकेट दर्ज हैं. पांड्या ने अभी तक इस फॉर्मेट में 94 विकेट चटकाए हैं. वह अपने शतक से 6 कदम दूर हैं.उम्मीद है पांड्या भी इसी टूर्नामेंट में 100 विकेट पूरे कर लेंगे।भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले टॉप-5 गेंदबाजों की लिस्ट में युजवेंद्र चहल, भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ी भी हैं. बुमराह ने इस फॉर्मेट में 89 विकेट चटकाए हैं.वहीं चहल और भुवी अब भारतीय टी20 सेटअप का हिस्सा नहीं हैं.


आलोक कुमार

गुरुवार, 11 सितंबर 2025

विनोबा भावे की जयंती और आज का यथार्थ

 विनोबा भावे की जयंती और आज का यथार्थ


पटना. आज 11 सितंबर है.भूदान आंदोलन के प्रणेता संत विनोबा भावे की 130वीं जयंती.कभी जिनके नाम पर पूरा देश सामाजिक क्रांति का सपना देखता था, आज उन्हीं की जयंती सरकारी उदासीनता और संस्थागत अभाव के बीच लगभग औपचारिकता भर रह गई है.

    कल तक गैर-सरकारी संस्थाएं विनोबा जी की जयंती को जन उत्सव का रूप देती थीं. पर आज, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) की कठोर शर्तों और धनाभाव के चलते वे संस्थाएँ पंगु होकर रह गई हैं. 2014 के बाद केंद्र सरकार ने इस कानून को सख्ती से लागू किया, जिससे NGOs की गतिविधियां लगभग ठप हो गई. विदेशी अनुदान पर पाबंदियों ने सामाजिक सरोकार के क्षेत्र को सिकोड़कर रख दिया.

     बावजूद इसके, बिहार स्टेट गांधी स्मारक निधि ने पटना में विनोबा जयंती का आयोजन कर परंपरा को जीवित रखने का प्रयास किया.प्रभाकर कुमार की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में माखन लाल दास, डॉ. मोख्तारूल हक़, अरुण प्रसाद, शिबबालक प्रसाद, उमेश मंडल सहित अनेक खादी-ग्रामोद्योग व स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

    सभा में खादी उद्योग और भूदान किसानों की समस्याओं पर गहन विमर्श हुआ. वक्ताओं ने सरकार से लंबित रिबेट राशि का तत्काल भुगतान, खादी पुनरुद्धार योजना के अक्षरशः: पालन और ऋण माफी की मांग की.साथ ही भूदान यज्ञ समिति के पुनर्गठन पर बल दिया ताकि भूदान किसानों की उपेक्षा दूर हो सके.

     यह जयंती केवल एक स्मरण नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक दायित्व की याद दिलाती है.सवाल यह है—क्या हम विनोबा भावे की विरासत को महज औपचारिक आयोजनों तक सीमित कर देंगे, या फिर सामाजिक न्याय और ग्राम-आधारित आत्मनिर्भरता के उनके स्वप्न को पुनर्जीवित करने का साहस दिखाएं?


आलोक कुमार

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