सोमवार, 16 अक्टूबर 2023

आज विश्व खाद्य दिवस


लातेहार.आज विश्व खाद्य दिवस है.इसकी स्थापना 16 अक्टूबर 1945 को हुई थी.इसे संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. एफएओ संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है जो भुखमरी की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व करती है.इस साल भारत को 111 वां स्थान मिला है.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएसआई) 2023 की लिस्ट में दुनियाभर के 125 देशों में भारत का 111 वां स्थान मिला है.रिपोर्ट में भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति बेहतर है.हंगर इंडेक्स की लिस्ट में पाकिस्तान की रैंकिंग 102, बांग्लादेश की 81, नेपाल की 69 और श्रीलंका की 60 है.भारत की रैंकिग में लगातार तीसरे साल गिरावट दर्ज की गई है.ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 28.7 स्कोर के साथ भारत में भुखमरी की स्थिति को गंभीर बताया गया है. इससे पहले 2022 में 121 देशों की लिस्ट में भारत 107 नंबर पर था. 2021 में भारत को 101वां रैंक मिला था.

      स्थापना के 78 साल एवं हंगर इंडेक्स के जारी होने के बीच वर्ल्ड फूड एंड सेफ्टी डे 2023 की थीम ( (World Food Safety Day 2023 Theme)) है- ‘खाद्य मानक जीवन बचाते हैं.इस थीम के जरिए लोगों को खाने के लिए तय मानकों का महत्व समझाना है. वहीं साल 2022 की थीम ‘सुरक्षित भोजन, बेहतर स्वास्थ्य (सेफ फूड बेटर हेल्थ )‘ थी.

 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के  10 साल

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम,2013 दिनांक 10 सितम्बर,2013 को अधिसूचित किया है,जिसका उद्देश्‍य एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए लोगों को वहनीय मूल्य पर अच्‍छी गुणवत्‍ता के खाद्यान्न की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध कराते हुए उन्हें मानव जीवन-चक्र दृष्टिकोण में खाद्य और पोषण सुरक्षा प्रदान करना है. इस अधिनियम में,लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के अंतर्गत राज सहायता प्राप्‍त खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए 75 प्रतिशत ग्रामीण आबादी और 50 प्रतिशत आबादी के कवरेज का प्रावधान है,इस प्रकार लगभग दो-तिहाई आबादी कवर की जाएगी. पात्र व्यक्ति चावल/ गेहूं/मोटे अनाज क्रमशः 3/ 2/1 रुपए प्रति किलोग्राम के राज सहायता प्राप्त मूल्यों पर 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति व्यक्ति प्रतिमाह प्राप्त करने का हकदार है. मौजूदा अंत्‍योदय अन्‍न योजना परिवार,जिसमें निर्धनतम व्यक्ति शामिल हैं,35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति परिवार प्रति माह प्राप्त करते रहेंगे.

    इस अधिनियम में महिलाओं और बच्‍चों के लिए पौषणिक सहायता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है.गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं गर्भावस्‍था के दौरान तथा बच्‍चे के जन्‍म के 6 माह बाद भोजन के अलावा कम से कम 6000 रुपये का मातृत्व लाभ प्राप्त करने की भी हकदार हैं. 14 वर्ष तक की आयु के बच्चे भी निर्धारित पोषण मानकों के अनुसार भोजन प्राप्त करने के हकदार हैं. हकदारी के खाद्यान्नों अथवा भोजन की आपूर्ति नहीं किए जाने की स्थिति में लाभार्थी खाद्य सुरक्षा भत्ता प्राप्त करेंगे.इस अधिनियम में जिला और राज्‍य स्‍तरों पर शिकायत निपटान तंत्र के गठन का भी प्रावधान है. पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी इस अधिनियम में अलग से प्रावधान किए गए हैं.

    ‘भूखे पेट, भरे गोदाम,अन्याय है अपराध है‘ के नारे के साथ खाद्य सुरक्षा कानून की लंबी लड़ाई लड़ी गई. 2013 में कानून लागू हुआ. लेकिन 10 साल बाद आज भी अनाज के लिए लोगों को सड़क पर उतरना पड़ रहा है. झारखंड के लातेहार के बरवाडीह का मामला तीन किलो प्रति यूनिट राशन दिया जा रहा है कृपया पूरा राशन दिलाया जाय.

    लातेहार जिला के बरवाडीह में राशन वितरण में अनियमितता के खिलाफ ग्रामीण आक्रोशित हैं.  ग्रामीणों ने प्रति व्यक्ति 5 किलो पूरा राशन देने की मांग की है.राशन नहीं मिलने पर चक्का जाम कर दिया जाएगा.लातेहार जिला के बरवाडीह में राशन वितरण में अनियमितता के खिलाफ ग्रामीण आक्रोशित हैं.  ग्रामीणों ने प्रति व्यक्ति 5 किलो पूरा राशन देने की मांग की है.राशन नहीं मिलने पर चक्का जाम कर दिया जाएगा.लातेहार  के बरवाडीह के बरखेड़ा की आदिवासी विधवा महिला सबिता देवी का राशन कार्ड आवेदन तमरमबज कर दिया गया है.जैसा कि बताया गया जाति प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण राशन कार्ड आवदेन अस्वीकृत किए जा रहे हैं. और भी मामले हैं.

आलोक कुमार 

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