मंगलवार, 18 अक्टूबर 2022

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक सम्पन्न

 अंतर्जातीय विवाह एवं निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना का व्यापक स्तर पर करायें प्रचार-प्रसार: जिलाधिकारी

मुख्यमंत्री अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना के तहत 61 तथा मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना के तहत 15 लाभुकों को किया गया लाभान्वित

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक सम्पन्न


बेतिया. पश्चिम चंपारण जिले के जिलाधिकारी, श्री कुंदन कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री अन्तर्जातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना एवं मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार कराना सुनिश्चित किया जाए ताकि लाभुक इससे लाभान्वित हो सके. उन्होंने कहा कि उक्त दोनों योजनाएं राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएं है, इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता बरती जाय तथा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए. जिलाधिकारी समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित समीक्षात्मक बैठक में अधिकारियों को निर्देशित कर रहे थे.

   सहायक निदेशक, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग द्वारा बताया गया कि मुख्यमंत्री अन्तर्जातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना अंतर्गत जिले के 61 लाभुकों को स्वीकृत आवेदन के आलोक में लाभान्वित किया गया है.इसी तरह मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना अंतर्गत जिले के 15 लाभुकों को स्वीकृत आवेदन के आलोक में लाभान्वित किया गया है.

   उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अन्तर्जातीय विवाह प्रोत्साहन को और अधिक व्यापक बनाने तथा अंतर्जातीय विवाह करने वाली महिला को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रोत्साहन राशि एक लाख रूपये राष्ट्रीयकृत बैंक का सावधि जमा प्रमाण पत्र के माध्यम से अनुदान देने का प्रावधान है, जिसे तीन साल के लिए फिक्स्ड किया जाता है.

मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना के अंतर्गत निःशक्त वर या वधू को 01 लाख रुपये अनुदान राशि, वर/वधु दोनों निःशक्त होने की स्थिति में 02 लाख रूपये की अनुदान राशि का प्रावधान है. निःशक्त एवं अंतर्जातीय विवाह की स्थिति में दोनों योजनाओं का लाभ देय है. राशि तीन साल की अवधि के लिए फिक्स्ड की जाती है.

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, श्री अनिल कुमार, सहायक निदेशक, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग, श्री ब्रजभूषण कुमार आदि उपस्थित रहे.

दिव्यांग अवधेश राम ने कहा कि बगहा प्रखंड एक का 2012-13 का कन्या विवाह योजना का पैसा अभी तक वितरण नहीं किया गया है.9 साल के बाद भी हम लोगों को राशि नहीं मिली है. आवेदक आवेदन डालकर इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि डीएम साहब अभी आ सकता हूं.

आलोक कुमार


पदाधिकारियों के साथ बैठक



गया. जिला  पदाधिकारी गया डॉ० त्यागराजन एसएम ने समाहरणालय सभाकक्ष में शिक्षा विभाग के तमाम पदाधिकारियों के साथ बैठक किया.

    बैठक में जिला पदाधिकारी ने तमाम प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तथा जिला स्तरीय शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सुदूरवर्ती विद्यालयों तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों पर विशेष नजर रखें. वहां हर हाल में शिक्षक उपस्थित रहे, किसी भी हाल में एक दिन भी मध्यान भोजन (एमडीएम) बंद ना रहे, प्रधानाध्यापक उपस्थित रहे, पठन-पाठन नियमित रूप से चले.इन सभी चीजों को आवश्यक रूप से देखते रहे.

    सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अपने क्षेत्र के विद्यालयों का नियमित रूप से जांच करें. उन्होंने कहा कि हाई स्कूल में एडमिशन के नाम पर अवैध राशि वसूल की जाती है. इन सभी चीजों पर निगरानी रखते हुए संबंधित शिक्षक अथवा प्रधानाध्यापक पर कठोर कार्रवाई करें.

    उन्होंने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि बिना किसी ठोस कारण के किसी भी शिक्षक को किसी अन्य विभाग अथवा प्रखंड में प्रतिनियुक्ति नहीं करें.यदि ऐसा पाए जाने पर संबंधित प्रधानाध्यापक के साथ-साथ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी.

    किसी भी विद्यालय में एमडीएम 1 दिन भी एमडीएम बंद ना हो यह सुनिश्चित कराएं.यदि कहीं से सूचना मिलती है कि किसी विद्यालय में एमडीएम बंद है तो संबंधित प्रधानाध्यापक पर कठोर कार्रवाई की जाएगी.

    सभी सरकारी विद्यालयों में लगाए गए स्मार्ट क्लास को अच्छे से संचालन करावे.सरकारी विद्यालय के विकास के लिए स्थानीय विधायक की अध्यक्षता में नियमित बैठक करावे.

        जर्जर स्थिति वाले विद्यालय भवन में किसी भी स्थिति में पठन-पाठन नहीं करावे। अगर कोई घटना होती है तो संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी स्वयं जिम्मेदार माने जाएंगे.

  जिला पदाधिकारी ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को कहा कि वैसे सरकारी विद्यालय जो किसी हाईवे के किनारे, जीटी रोड के किनारे अथवा अति व्यस्ततम सड़क के किनारे जो स्कूल है.वहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था रखें. विद्यालय आने के दौरान अथवा विद्यालय से छुट्टी के उपरांत घर जाने के दौरान सड़क पार कराने के लिए स्वयं शिक्षक/ प्रधानाध्यापक उपस्थित रहकर बच्चों को  रोड क्रॉस कराएंगे.

        उन्होंने जिले के सभी शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ाई करावे. उन्होंने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तथा जिला स्तरीय शिक्षा विभाग के पदाधिकारी को निर्देश दिया कि हर बुधवार तथा बृहस्पतिवार को तमाम पदाधिकारी फील्ड विजिट में रहेंगे तथा अपने अधीनस्थ सभी सरकारी विद्यालयों का पूरी गुणवत्तापूर्ण निरीक्षण करेंगे. साथ ही उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी द्वारा विभिन्न विद्यालयों का किए गए जांच से संबंधित प्रतिवेदन लेते हुए संबंधित विद्यालय पर कठोर कार्रवाई करेंगे.

        अंत में जिला पदाधिकारी ने कहा कि अपने प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों का अवश्य निर्वहन करें. प्रखंड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में जो भी बैठक आयोजित की जाती है, उसमें अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे.आपदा संबंधित कार्यों को प्राथमिकता पर निर्वहन करें.


आलोक कुमार


डेंगू अपना पांव तेजी से पसारता जा रहा

  


पटना.पूरे बिहार में डेंगू का कहर जारी है. डेंगू अपना पांव तेजी से पसारता जा रहा है. इस वक्त की बड़ी खबर राजधानी पटना से आ रही है जहां डेंगू के डंक का शिकार आज फिर एक मासूम हो गया. सोमवार को गांधी मैदान स्थित रूबन मेमोरियल के गायनी एवं चाइल्ड हास्पिटल में एक 9 वर्षीय आरव राज की मौत हो गई. दलदली रोड निवासी लोजपा (रामविलास) के पूर्व प्रवक्ता कृष्ण कुमार कल्लू के आरव राज बड़े बेटे थे.आरव राज को गत कई दिन से बुखार था और गंभीर अवस्था में दो दिन पूर्व उसे रूबन में भर्ती कराया गया था.

      इसके पूर्व पूर्व रविवार को नालंदा मेडिकल कालेज सह अस्पताल में डेंगू पीड़ित चार माह की बच्ची की मौत हो गई.इससे पहले 10 अक्टूबर को मसौढ़ी के 10 वर्षीय बच्चे तथा शनिवार को नालंदा के पांच वर्षीय बच्चे की मौत हुई थी. डेंगू से चार बच्चों की मौत के बाद डॉक्टर बच्चों को मच्छरों से बचाने की सलाह दे रहे हैं. वहीं स्वास्थ्य विभाग को इन मौतों की जानकारी नहीं है.इस तरह की घटनाओं सेपरिजनों के बीच कोहराम मचा हुआ है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.इससे पहले भी तीन दिनों के भीतर तीन बच्चों की मौत डेंगू से हो चुकी है.

  अब तक डेंगू से 5 लोगों की जान जा चुकी है. डेंगू से स्थिति और भयावह होती जा रही है.पटना में 213 नए मामले सामने आए हैं. डेंगू मरीजों की संख्या बढ़कर 3155 हो गयी है. डेंगू के बढ़ते केसेज को देखते हुए जिला प्रशासन ने सिविल सर्जन कार्यालय में एक कंट्रोल रूम बनाया है. जहां स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर चिकित्सीय परामर्श ले सकते हैं.कंट्रोल रूम नंबर 0612-2951964 पर फोन कर सकते हैं. 

     बता दें कि पटना नगर निगम में छह अंचल है. नूतन राजधानी अंचल,पाटलिपुत्र अंचल ,कंकड़बाग अंचल,बांकीपुर अंचल, अजीमाबाद अंचल,पटना सिटी अंचल है.उन अंचलों में कार्यरत कार्यालयों के बाबुओं की खिदमत करने वाले अर्दलियों को क्षेत्र में स्प्रे करने के लिए भेज दिया है.    

       इस समय पाटलिपुत्र अंचल के वार्ड नम्बर-22 A  में फेकू राम स्प्रे कर रहे हैं.उनके बगल में वार्ड इंस्पेक्टर है.जो राजधानी में कहर बरपाने वाले डेंगू के शिकार हो गये थे.प्लेटलेट्स कम होने के बाद चिकित्सक के क्लिनिक में सलाइन चढ़ाये.पांच दिन के बाद कर्तव्य निभाने आए हैं.इस समय प्रेशर में है पल पल की जानकारी मोबाइल से ऊपर के अधिकारियों को दी जा रही है.    हालात यह है नारियल का कच्चा फल डाभ जिसका पानी पीया जाता है,उसका दाम तेज है.डाभ बेचने वाले शख्स के परिजन डेंगू के शिकार कर सलाइन चढ़वा रहा है.डेंगू के बुखार में नारियल का पानी रामबाण का काम करता है.नारियल के पानी में कई मिनरल्स और पोषक तत्व होते है जो शरीर को फिट रखते हैं.    

       मखदुमपुर बगीचा में रहने  वाले लोगों ने जलजमाव वाले एरिया में ब्लींचिग पावडर छिड़काव करने की मांग की है.यदुवंशी नगर में रहने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि उनके घर में चार लोग डेंगू से बेहाल हैं.पॉश एरिया फेयर फील्ड कॉलोनी में बहुत लोग डेंगू से परेशान हैं.

    बताया गया कि खानपान और दिनचर्या में बदलाव सेहतमंद व्यक्ति को भी बीमार कर सकता है. इसे देखते हुए ज्यादातर लोग आजकल बीमारियों के प्रति जागरूक रहने लगे हैं. पहले खतरनाक मानी जाने वाली बीमारी डेंगू के आम होने के बाद लोगों में प्लेटलेट्स को लेकर जागरूकता आई है और इसी का फायदा निजी अस्पताल उठा रहे हैं. सामान्य बीमारियों में भी डॉक्टर सीबीसी टेस्ट करवाते हैं और उसमें प्लेटलेट्स कम होना बताकर इन्हें चढ़ाने के नाम पर कमाई करते हैं.

      जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक सीधे प्लेटलेट चढ़ाने के बजाय यह जांचना जरूरी है कि किस वजह से ये कम हुए हैं. हर मरीज को इन्हें चढ़ाने की जरूरत नहीं होती. उसकी मॉनीटरिंग अच्छे से की जाए तो दवाइयों के जरिए ये बढ़ाए जा सकते हैं. यहां तक कि मरीज को बार-बार प्लेटलेट चढ़ाने पर नुकसान भी हो सकता है. इसका असर प्लेटलेट्स चढ़ाने के बावजूद इसमें वृद्धि नहीं होने के रूप में सामने आता है. पिछले दिनों जिस डेंगू और चिकनगुनिया की दहशत फैली थी, उन बीमारियों में भी अधिकतम 5 फीसदी मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत होती है.

मलेरिया हो या डेंगू किसी भी वायरल इन्फेक्शन से शरीर में प्लेटलेट्स कम हो ही जाते हैं. सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति में 1.5 लाख से 4 लाख प्लेटलेट होना चाहिए, लेकिन यदि ये एक लाख, 90 हजार या उससे कम भी हैं, तब भी इंसान को कोई खतरा नहीं होता. उधर, पैथोलॉजी लैब और डॉक्टर लोगों में ऐसा डर पैदा कर देते हैं कि मरीज को प्लेटलेट चढ़वाना जरूरी लगने लगता है.

    खासकर डेंगू जैसी बीमारी में तो प्लेटलेट कम होने को जान पर खतरा मान लिया जाता है.डॉक्टरों के मुताबिक प्लेटलेट 20 हजार भी पहुंच जाएं तो घबराने की बात नहीं है.बिना चढ़ाए भी इन्हें बढ़ाया जा सकता है, केवल कुछ बीमारियां या स्थितियों में ही प्लेटलेट चढ़ाना जरूरी हो जाता है.

      ग्रेपफ्रूट पोषक तत्वों से भरपूर एक बेहतरीन फल है. इसमें विटामिन सी की अच्छी मात्रा होती है. यह फल बुखार निवारक के रूप में भी काम करता है और शरीर में संक्रमण से लड़ने वाली व्हाइट ब्लड सेल्स के प्रोडक्शन को बढ़ावा देता है. 

 लेकिन शाम के वक्त फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। डेंगू में हल्के फुल्के आहार लेना ही जरूरी होता है. जिससे शरीर में एनर्जी बनी रहती है. इसमें आप खिचड़ी या अन्य हल्के-फुल्के आहार के साथ दही का सेवन कर सकते हैं.

स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, रसभरी, गोजी बेरी और ब्लैकबेरी जैसे जामुन एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. एंटीऑक्सीडेंट मुक्त कणों को बेअसर करते हैं और इस प्रकार प्लेटलेट काउंट में कमी से निपटने में मदद करते हैं. जामुन को आहार में शामिल करने से प्लेटलेट काउंट बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

पपीते का रस प्लेटलेट्स को बढ़ाने में मदद करता है. इसके अलावा पपीते की पत्तियां बुखार दूर करती हैं.इसलिए सुबह और रात में पपीते का पत्तों का रस पी सकते हैं। डेंगू के मरीज के लिए पपीता बहुत असरकारक होता है.

डेंगू बुखार के समय टमाटर, कद्दू, गाजर, खीरा, चुकंदर आदि का अधिक सेवन करना चाहिए। विटामिन और मिनरल्स से भरपूर ये सब्जियां मरीज के इम्यून सिस्टम को मजबूत करती हैं.इसके अलावा सब्जियों को हल्का पकाकर या उबालकर ही खाना चाहिए.

 डेंगू के मरीज को प्रोटीन की जरूरत होती है. इसलिए उसे अंडे, दूध और डेयरी के पदार्थों का सेवन करना चाहिए. अगर मरीज को नॉनवेज खा सके तो मछली, चिकन और मीट अपने खाने में शामिल करें.

संतरा, पपीता, अमरूद, कीवी, आलूबुखारा, तरबूज जैसे फलों को डेंगू के बुखार आने पर खाना चाहिए. इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इन फलों को खाने से मरीज को खूब पेशाब होगी.जिसके चलते वायरस पेशाब के जरिए बाहर निकल जाएगा.

 नींबू का रस डेंगू के मरीज की यूरिन के जरिए शरीर में मौजूद वायरस और विषैले तत्वों को बाहर निकालता है.इसके अलावा नींबू का रस शरीर के भारीपन को भी दूर करता है.डेंगू बुखार आने पर शरीर का एनर्जी लेवल बहुत कम हो जाता है.इसलिए मरीज को दलिया देनी चाहिए और यह आसानी पच भी जाती है.

डेंगू बुखार के आने पर अदरक और इलायची से बनी हर्बल टी को मरीज को पीना चाहिए.

अधिक से अधिक पानी पीना डेंगू के मरीज के लिए बहुत फायदेमंद होता है. डेंगू के मरीज को सूप देना चाहिए. इससे उसकी हड्डियों का दर्द भी कम होगा और मुंह का स्वाद भी ठीक रहेगा.

आलोक कुमार

सोमवार, 17 अक्टूबर 2022

2 दिनों के अंदर नए ट्रांसफार्मर लगवाना सुनिश्चित कराएं

 


 गया. अल्प वर्षापात के लेकर बिहार सरकार द्वारा घोषित किये गए सुखाड़ को लेकर ज़िले के विभिन्न राजस्व ग्राम में डोर टू डोर किए जा रहे सर्वेक्षण तेजी से किया जा रहा है, ताकि सुखाड़ से प्रभावित व्यक्ति को सरकार द्वारा किए जा रहे लाभ को उपलब्ध कराया जा सके.

       इसी परिपेक्ष में आज जिला पदाधिकारी डॉ त्यागराजन एसएम द्वारा परैया प्रखंड का निरीक्षण किया गया। परैया प्रखंड में 06 पंचायत सुखाड़ प्रभावित चिन्हित किए गए हैं. उन सभी पंचायतों के सभी राजस्व ग्राम का किये रहे सर्वे का निरीक्षण किया.

    सुखाड़ सर्वेक्षण का स्वयं जिलाधिकारी द्वारा निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही जिले के कई वरीय अधिकारियों को सुखाड़ वाले प्रखंडों में नामित किया गया है जो सीधे तौर पर नीचे के पदाधिकारियों से समन्वय करते हुए निगरानी रखेंगे.

    परैया प्रखंड के परैयाखुर्द पंचायत के ग्राम परैयाखुर्द जो सूखाग्रस्त इलाका है, इन इलाकों का सर्वेक्षण करने के कार्य का डीएम द्वारा निरीक्षण किया गया. उन्होंने उपस्थित सर्वेक्षणकर्ता को निर्देश दिया कि वार्ड वार घूम घूम कर प्रत्येक घर का सर्वेक्षण कार्य गुणवत्ता पूर्ण करें. उन्होंने उपस्थित सर्वेक्षण कर्ता  से आज के रिपोर्ट की जानकारी लिया कि कितने घरों का आज सर्वेक्षण किया गया.बताया गया कि वार्ड संख्या 09 में कुल 170 घरों को चिन्हित करते हुए आपदा सम्पूर्ति पोर्टल के लिए पर्याप्त का दीदार को देखते हुए मिलान किया गया.

       


जिला पदाधिकारी ने सभी सर्वेक्षण कर्ताओं को कठोर निर्देश दिया है कि जिनको भी जो दायित्व दी गई है वह फील्ड में जा करके वास्तविक सर्वेक्षण करें, न कि कागजी प्रक्रिया करें.ऐसे लापरवाही करने वाले सर्वेक्षणकर्ता कर्मियों के विरूद्ध आपदा अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी.

       ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि इस टोले में विगत 1 सप्ताह से ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण बिजली बाधित है जिला पदाधिकारी में कार्यपालक अभियंता ग्रामीण बिजली विभाग को निर्देश दिया कि 2 दिनों के अंदर नए ट्रांसफार्मर लगवाना सुनिश्चित कराएं.

       कई ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से अनुरोध किया कि जमीन का एलपीसी निर्गत करने में अंचल कार्यालय में काफी लंबित रखा जा रहा है. जिला पदाधिकारी ने अंचल अधिकारी को निर्देश दिया कि कागजातों का जांच करते हुए तेजी से एलपीसी निर्गत करना सुनिश्चित करें.


आलोक कुमार


रविवार, 16 अक्टूबर 2022

मगध यूनिवर्सिटी में लुसी स्नेहा डिक्रुस "यूनिवर्सिटी टॉपर"


पटना. राजू पास्काल और उषा रॉबर्ट के सुपुत्र हैं सुशांत पास्कल.राजधानी पटना के शेखपुरा में स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में सुशांत पास्कल कार्यरत हैं.सुशांत पास्कल की धर्मपत्नी लुसी स्नेहा डिक्रुस हैं.दोनों का विवाह 27 दिसंबर 2017 में हुआ है.पारिवारिक जीवन के साथ एक स्कूल Mount Litera Zee School में शिक्षण कार्य करने के बाद लुसी स्नेहा डिक्रुस ने अपना एम.एड पाठ्यक्रम पूरा कर मगध यूनिवर्सिटी में "यूनिवर्सिटी टॉपर" बन गयी हैं.इस समय सेंट डोमिनिक सावियो हाई स्कूल में कार्यरत हैं.


"यूनिवर्सिटी टॉपर" लुसी स्नेहा डिक्रुस ने संत जेवियर हायर सेकेंडरी स्कूल,बेतिया से, पटना वीमेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया.मिर्जा गालिब शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज, पटना से बीएड और एमएड किया.उसने मगध विश्वविद्यालय में टॉप कर कीर्तिमान स्थापित कर दी. मुजफ्फरपुर में रहने वाले राजीव हेनरी की पत्नी अनुपमा राजीव हेनरी भी टॉपर है.दोनों रिश्तेदार है.

"यूनिवर्सिटी टॉपर" लुसी स्नेहा डिक्रुस कहती हैं कि मैं और मेरे परिवार के लोग काफी खुश हैं.एक महिला सब कुछ नहीं कर सकती हैं.हौसला बुलंद रखने की जरूरत है.कहती है कि एक

शब्द "यूनिवर्सिटी टॉपर" अपने आप में महान कृति है.इसे धारण करने वाले को एक आंतरिक आनंद मिलता है.जबकि नौकरी और विवाहित जीवन के साथ-साथ चले.उसी दौरान अपना एम.एड पाठ्यक्रम पूरा करना वास्तव में एक कठिन काम होता है.जिससे कामयाब हो गई. 

उन्होंने सर्वप्रथम सर्वशक्तिमान परमेश्वर , अपने जन्मदाता  George Anophio D'cruz पिता और माता हेलेन पास्काल, मेरे ससुराल वाले, मेरे पति और अपने दोस्तों को धन्यवाद दी और उनके प्रति आभार व्यक्त की.जो मेरी ताकत के रूप में मेरे साथ थे. आप लोगों के आशीर्वाद और समर्थन के बिना इस पद को हासिल नहीं कर पाती.वह एक फिर से बहुत बहुत धन्यवाद देती है.


सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बिहार विधानसभा की 243 विधानसभाओं में से एक है. यह पटना साहिब लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के साथ-साथ अन्य विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आता है. सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा के विधायक युसूफ सलाहुद्दीन के करकमलों से "यूनिवर्सिटी टॉपर" लुसी स्नेहा डिक्रुस सम्मानित हुई.

इस अवसर पर तारिक हैदर (मिर्जा गालिब शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज, पटना की उप निदेशक, सैंड्रा एलिस, ग्लेंडा गैल्स्टोन, ग्लेन गैल्स्टोन (सेंट डोमिनिक सावियो हाई स्कूल की प्रबंधन समिति) को विशेष थैंक्स दिया गया.राजू पास्काल और उषा रॉबर्ट ने पुत्रवधू लुसी स्नेहा डिक्रुस पर गर्व महसूस किया है.


आलोक कुमार

सबसे ज्यादा हालात भारत के ही खराब

 

पटना.पाकिस्तान और कांग्रेस अलापने वाले पीछे दर पीछे ही चले जा रहे है.कांग्रेस के शासन काल में वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2010 में 67 वां स्थान था. 2011 में 67, 2012 में 66 और 2013 में 63 था.सत्ता परिवर्तन होने के बाद विकास बाबू के हाथ में 2014 में वैश्विक भुखमरी सूचकांक 55 वां स्थान दिया गया.उसके बाद कुकुरमुत्ता की तरह बढ़ता ही जा रहा रूकने का नाम नहीं ले रहा है.अब तो यह हाल हो गया है कि अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से पीछे है. साउथ एशिया के देशों में अफगानिस्तान के बाद सबसे ज्यादा हालात भारत के ही खराब हैं.

बता दे कि वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2015 में 80 वां, 2016 में 97 वां स्थान प्राप्त हुआ था.भारत को 2017 में 100वाँ स्थान प्राप्त हुआ. भारत को 2018 में 103वाँ स्थान प्राप्त हुआ.भारत को 2019 में 102वाँ स्थान प्राप्त हुआ है.वर्ष 2020 में भारत 94वें स्थान पर था.2021 में भारत को 116 देशों में से 101वाँ स्थान प्राप्त हुआ है.

वैश्विक भुखमरी सूचकांक यानी हंगर इंडेक्स में भारत की रैंकिंग और भी ज्यादा खराब हो गई है. भारत भुखमरी से जुड़ी इस रैंकिंग में 6 स्थान और नीचे गिर गया है. ताजा रैंकिंग के अनुसार, भारत 107वें स्थान पर आ गया है और यह रैंकिंग 121 देशों की है. यानी 121 देशों में भारत 107वें स्थान पर है. इससे पहले भारत 116 देशों की रैंकिंग में 101वें स्थान पर था. हैरानी की बात ये है कि अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से पीछे है. साउथ एशिया के देशों में अफगानिस्तान के बाद सबसे ज्यादा हालात भारत के ही खराब हैं.महिला और बाल विकास मंत्रालय ने कहा है कि भारत की छवि को लगातार एक दागदार देश के रूप में दिखाया जा रहा है, जो अपनी आबादी की खाद्य सुरक्षा और पोषण आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रहा है.

वैश्विक भूख सूचकांक 2022 (ग्लोबल हंगर इंडेक्स) में भारत की स्थिति और खराब हुई है. वह 121 देशों में 107वें नंबर पर है जबकि बच्चों में ‘चाइल्ड वेस्टिंग रेट’ (ऊंचाई के हिसाब से कम वजन) 19.3 प्रतिशत है जो दुनिया के किसी भी देश से सबसे अधिक है. पड़ोसी देश पाकिस्तान (99), बांग्लादेश (84), नेपाल (81) और श्रीलंका (64) भारत के मुकाबले कहीं अच्छी स्थिति में हैं. एशिया में केवल अफगानिस्तान ही भारत से पीछे है और वह 109वें स्थान पर है. वैश्विक भूख सूचकांक  के  जरिए वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तरों पर भूख पर नजर रखी जाती है और उसकी गणना की जाती है. 29.1 अंकों के साथ भारत में भूख का स्तर.

  भारत 2021 में 116 देशों में 101वें नंबर पर था जबकि 2020 में वह 94वें पायदान पर था. रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में सबसे अधिक भूख के स्तर वाले क्षेत्र, दक्षिण एशिया में बच्चों में नाटापन की दर (चाइल्ड स्टंटिंग रेट) सबसे अधिक है. इसमें कहा गया है, श् भारत में ‘चाइल्ड वेस्टिंग रेट’ 19.3 प्रतिशत है जो दुनिया के किसी भी देश में सबसे अधिक है और भारत की बड़ी आबादी के कारण यह इस क्षेत्र के औसत को बढ़ाता है.श्

  भारत में करीब 20 लोग ऐसे हैं, जो हर रोज अच्छे से खाना नहीं खा पाते हैं और रात को उन्हें भूखे ही सोना पड़ता है. साल 2020 में साउथ एशिया में 1331.5 मिलियन लोग ऐसे थे, जैसे हेल्दी डाइट नहीं मिल पाई और उसमें से 973.3 मिलियन तो भारत के लोग थे. अगर भूख से मरने वाले लोगों का आंकड़ा देखें तो भारत में हर साल 7 हजार से 19 हजार लोग हर भूख से मर जा रहे हैं. यानी पांच से 13 मिनट में एक आदमी बिना खाने के मर जाता है. वहीं, इंडिया फूड बैंकिंग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 189.2 मिलियन लोग कुपोषित हैं. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में 14ः जनसंख्या कुपोषित है.

भारत ने वैश्विक भूख सूचकांक रिपोर्ट 2022 को खारिज कर दिया है. इसमें भारत को एक सौ इक्कीस देशों में एक सौ सातवां स्थान दिया गया है.महिला और बाल विकास मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि भारत की छवि को लगातार एक दागदार देश के रूप में दिखाया जा रहा है, जो अपनी आबादी की खाद्य सुरक्षा और पोषण आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रहा है.मंत्रालय ने कहा है कि यह सूचकांक भूख के गलत मानकों पर आधारित है और इसमें गंभीर प्रणालीगत खामियां हैं. मंत्रालय ने कहा है कि यह रिपोर्ट जमीनी वास्तविकताओं को नहीं दिखाती है और इसमें सरकार के कोविड महामारी के दौरान खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के सरकार के प्रयासों को नहीं दर्शाया गया है.

कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 8 साल में 2014 के बाद से हमारा स्कोर खराब हुआ है. उन्होंने ट्विटर पर पूछा, ' माननीय प्रधान मंत्री कब बच्चों के बीच कुपोषण, भूख और लाचारगी जैसे वास्तविक मुद्दों का समाधान करेंगे?'


आलोक कुमार

शैक्षणिक विकास प्रतियोगिता में छात्रों ने भाग लिया


छात्रों के समग्र विकास के लिए प्रबोध जन सेवा संस्थान ने आयोजित किया शैक्षणिक विकास प्रतियोगिता

सोनो. रविवार को +2 उच्च विद्यालय, सरधोडीह में प्रबोध जन सेवा संस्थान के द्वारा शैक्षणिक विकास प्रतियोगिता के तहत प्रखंड स्तरीय क्विज प्रतियोगिता  आयोजित की गयी.जिसमें प्रखंड के 1) उत्क्रमित मध्य विद्यालय,बटिया 2)उत्क्रमित मध्य विद्यालय,पैरा मतिहाना 3) उत्क्रमित मध्य विद्यालय,तेतरिया 4) उत्क्रमित मध्य विद्यालय,ढोंढरी 5) उत्क्रमित मध्य विद्यालय,पिपराबांक 6) उत्क्रमित मध्य विद्यालय,तिलवरिया 7) उत्क्रमित मध्य विद्यालय,अमझरी 8) उत्क्रमित मध्य विद्यालय, लखनकियारी व अन्य विद्यालय के छात्रों ने भाग लिया.

   

जिसमें शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से  केवल अष्टम और नवम के छात्र- छात्राओं के बीच शैक्षणिक विकास प्रतियोगिता का आयोजित की गयी. जिसमें अष्टम से कुल दस छात्र-छात्रा को बेहतर प्रदर्शन के लिए तथा नवम से पांच छात्र-छात्रा को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रशस्ति-पत्र तथा पाठ्य सामग्री देकर सम्मानित किया गया. संस्थान के जिला सचिव विनोद कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रबोध जन सेवा संस्थान के बैनर तले डॉ अवधेश कुमार निराला के सौजन्य से किया गया.

 


इस कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे जिसमें पूर्व विधानसभा प्रत्याशी श्री संजय कुमार मंडल, डॉ सुशील वर्मा, मुखिया प्रतिनिधि अयोध्या मंडल, मुखिया प्रतिनिधि गियास अंसारी तथा संस्थान की ओर से उपस्थित रहे सामाजिक कार्यकर्त्ता सुदर्शन सिंह, संस्थान सचिव व संस्थान संस्थापक सदस्य सुमन सौरभ, जिला सचिव विनोद कुमार, सहयोगी संजीत कुमार, पर्यावरण मित्र हरेराम सिंह, अशोक यादव, सिकन्दर कुमार, आदि उपस्थित थे.

आलोक कुमार

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